samacharsecretary.com

भारत के मिसाइल रेंज पर जापान की नजर, टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल और हमलावर ड्रोन के परीक्षण की तैयारी

 नई दिल्ली जापान अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारत के मिसाइल परीक्षण स्थलों का उपयोग करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (GSDF) के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मसायोशी अराई ने बताया कि जापानी अधिकारी भारत भेजे गए थे. उनका उद्देश्य यह पता लगाना था कि टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों का पूरा परीक्षण कैसे किया जा सकता है।  इस मिसाइल की रेंज करीब एक हजार किलोमीटर है, जिसे जापान के घरेलू स्थलों पर पूरी तरह इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है. अधिकारी इस महीने की शुरुआत में भारत गए और लगभग एक सप्ताह तक कई स्थलों का निरीक्षण किया. साथ ही छोटे हमलावर ड्रोन के परीक्षण की संभावना पर भी चर्चा हुई।  टाइप-25 मिसाइल और घरेलू सीमाएं टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल जापान की समुद्री रक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसकी लंबी रेंज का पूरा फायदा उठाने के लिए बड़े और सुरक्षित परीक्षण क्षेत्र की जरूरत होती है. जापान के अपने क्षेत्र में इतनी लंबी दूरी का सुरक्षित परीक्षण मुश्किल है क्योंकि आबादी घनी है और सुरक्षा संबंधी कई नियम लागू होते हैं।  जनरल अराई ने स्पष्ट कहा कि घरेलू प्रशिक्षण वातावरण को सुरक्षित करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर विदेश में प्रशिक्षण स्थलों का उपयोग करने के तरीके भी खोजे जा रहे हैं. भारत के विशाल और अपेक्षाकृत कम आबादी वाले मिसाइल रेंज इस जरूरत को पूरा कर सकते हैं. इससे जापान को वास्तविक परिस्थितियों में मिसाइल का परीक्षण करने का मौका मिलेगा।  छोटे हमलावर ड्रोन और शील्ड प्रणाली जापान केवल बड़ी मिसाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहता. वह सस्ते और बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने वाले बिना चालक वाले हवाई, सतह और पानी के नीचे के वाहनों पर आधारित एक बहुस्तरीय तटीय रक्षा प्रणाली बना रहा है. इसे सिंक्रोनाइज्ड, हाइब्रिड, इंटीग्रेटेड एंड एनहांस्ड लिटोरल डिफेंस या शील्ड प्रणाली कहा जाता है।  इसमें टोही और हमले दोनों तरह के ड्रोन शामिल होंगे. ये ड्रोन दुश्मन की रेंज से बाहर से हमला करने वाली स्टैंडऑफ मिसाइलों के साथ मिलकर काम करेंगे. हालांकि जापान के अंदर छोटे हमलावर ड्रोन का प्रशिक्षण कई समस्याओं से घिरा है. रेडियो फ्रीक्वेंसी के इस्तेमाल से नागरिक टेलीविजन और स्मार्टफोन प्रभावित हो सकते हैं।  सुरक्षा चिंताएं भी हैं और स्थानीय सरकारों से समन्वय जरूरी है. इसलिए अधिकारी घरेलू समाधान के साथ-साथ विदेश में उपयुक्त स्थलों की तलाश कर रहे हैं. भारत के रेंज इन चुनौतियों को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं क्योंकि वहां बड़े क्षेत्र उपलब्ध हैं. परीक्षण नियमों में अधिक लचीलापन हो सकता है।  ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग और क्षेत्रीय संदर्भ भारत के अलावा जापान ऑस्ट्रेलिया के मिसाइल परीक्षण स्थलों पर भी नजर रखे हुए है. अगस्त में जापानी रक्षा मंत्री शिन्जिरो कोइजुमी और ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष रिचर्ड मार्ल्स ने बैठक में बताया कि दोनों देश जापान को ऑस्ट्रेलियाई रेंजों तक बेहतर पहुंच देने की दिशा में काम कर रहे हैं. जापान ने 2023 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया में सैन्य अभ्यास के दौरान एंटी-शिप मिसाइल दागी थी और पिछले साल भी अधिक जटिल लॉन्च किया।  कोइजुमी ने कहा कि अगर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज हाइपरसोनिक जैसी स्टैंडऑफ मिसाइलों का परीक्षण ऑस्ट्रेलिया में कर सकें तो यह ऐतिहासिक विकास होगा. मार्ल्स ने अगले दशक में कई मिसाइल क्षमताओं के लिए उन्नत व्यवस्था पर चर्चा का जिक्र किया।  ये कदम क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति से जुड़े हैं. चीन की सैन्य गतिविधियों और उत्तर कोरिया के बढ़ते मिसाइल शस्त्रागार के बीच जापान अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना चाहता है. लंबी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन सिस्टम जापान के परिधि क्षेत्र की रक्षा के लिए जरूरी माने जा रहे हैं. भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे साझेदार देशों के साथ सहयोग से जापान को परीक्षण सुविधाएं मिलेंगी जो घरेलू सीमाओं के कारण उपलब्ध नहीं हैं।  यह विकास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को दर्शाता है. जापान अपनी रक्षा नीति में बदलाव ला रहा है और साझेदार देशों के संसाधनों का उपयोग कर रहा है. भारत के लिए यह सैन्य तकनीकी सहयोग का अवसर हो सकता है. दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध पहले से मजबूत हो रहे हैं. अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो जापान अपनी नई मिसाइलें और ड्रोन सिस्टम अधिक प्रभावी ढंग से विकसित कर सकेगा।  साथ ही क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी. अंतिम फैसला आने वाले समय में स्पष्ट होगा. सुरक्षा, तकनीकी समन्वय और द्विपक्षीय समझौते इस प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे. कुल मिलाकर जापान की यह पहल उसकी रक्षा तैयारियों को नई दिशा दे रही है. भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ सहयोग से वह लंबी दूरी के हथियारों और आधुनिक ड्रोन प्रणालियों का बेहतर परीक्षण कर सकेगा, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। 

उत्तर प्रदेश और पंजाब चुनाव पर RSS का फोकस, इंदौर में रणनीति को लेकर जुटेंगे संघ के पदाधिकारी

इंदौर  अगले साल की शुरुआत में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है. संघ का मुख्य ध्यान उत्तर प्रदेश और पंजाब पर है। सूत्रों के अनुसार, इन दोनों राज्यों को लेकर पिछले कुछ महीनों से तैयारियां चल रही हैं. नवंबर के पहले हफ्ते में इंदौर में होने वाली आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में कई अहम मुद्दों पर बात होगी. इनमें एसआईआर को लेकर विपक्ष के अभियान, ड्रग्स, देश विरोधी ताकतों और देश में अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।  आरएसएस सूत्रों के अनुसार, एसआईआर के मुद्दे का जमीन पर कोई खास असर नहीं है और यह आम लोगों का मुद्दा नहीं है. संघ के एक नेता के अनुसार, 13 करोड़ लोगों के नाम कटने की बात कही जा रही है, लेकिन इससे केवल तीन करोड़ लोग ही प्रभावित हुए हैं. बाकी नाम उन लोगों के हैं जिनका या तो पता बदल गया है या फिर जिनकी मौत हो चुकी है।  जिन तीन करोड़ लोगों पर इसका असर पड़ा है, उन्हें भी फिर से वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने का मौका दिया जा रहा है. नेता के मुताबिक, अगर विपक्ष एसआईआर का मुद्दा उत्तर प्रदेश में उठाता है, तो इससे उसी का नुकसान होगा. ठीक वैसे ही जैसे बिहार में महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा था, क्योंकि इस वजह से दूसरे मुद्दों से ध्यान भटक गया था।  संघ नेताओं के अनुसार, उत्तर प्रदेश में संगठन की स्थिति काफी मजबूत है. अपने शताब्दी वर्ष में संघ ने देश के इस सबसे बड़े राज्य में ज़मीनी पकड़ मजबूत की है और शाखाओं की संख्या बढ़ाई है. राज्य में बीजेपी की सरकार होने का भी फायदा मिला है. इसीलिए आरएसएस पूरी ताकत लगाकर बीजेपी की हैट्रिक के अभियान में जुटेगा।  वहीं पंजाब में भी गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय लोगों से भी संपर्क बढ़ाया गया है. पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या पर भी संघ का खास फोकस है. इंदौर की बैठक में इस मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा होगी।  इंदौर की कार्यकारी मंडल की बैठक में देश के अंदरूनी मामलों में विदेशी दखल और ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट जैसे समसामयिक विषयों पर भी बात की जाएगी. दो और तीन नवंबर को होने वाली यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। 

ब्रिटिश हिंदू संगठन INSIGHT UK की रिपोर्ट में दावा, पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी के अनुपात में आई भारी गिरावट

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की स्थिति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में है। ब्रिटेन स्थित प्रवासी संगठन INSIGHT UK ने ब्रिटिश संसद में एक रिपोर्ट पेश कर पाकिस्तान में हिंदुओं के कथित धार्मिक उत्पीड़न, संपत्ति पर कब्जे, जबरन धर्म परिवर्तन और महिलाओं के अपहरण जैसे गंभीर मुद्दे उठाए हैं। रिपोर्ट में ब्रिटिश सरकार (British Government) से पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में अल्पसंख्यकों (Minority) की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की गई है। INSIGHT UK की यह रिपोर्ट पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता (Religious Freedom) और अल्पसंख्यकों के अधिकारों (Rights of Minorities) को लेकर कई सवाल खड़े करती है।  पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी कितनी घटी? रिपोर्ट के मुताबिक, 1941 की जनगणना में उस क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी लगभग 14.6 प्रतिशत थी, जो बाद में पश्चिमी पाकिस्तान बना। आज पाकिस्तान में हिंदुओं की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से कम बताई जाती है। इस बदलाव के पीछे 1947 का विभाजन (Partition of India and Pakistan), बड़े पैमाने पर पलायन, समय-समय पर हुई सांप्रदायिक हिंसा (Religious Violence) और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों जैसे कई ऐतिहासिक कारण रहे हैं। रिपोर्ट का आरोप है कि हिंदू परिवारों को हिंसा और भेदभाव के कारण अपनी जमीन तथा घर छोड़ने पड़े। इसमें पुश्तैनी संपत्तियों से बेदखली की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। 15 प्रतिशत से 2 प्रतिशत रह गए हिंदू रिपोर्ट की शुरुआत एक ऐसे आंकड़े से होती है जो उत्पीड़न की पूरी कहानी बयां कर देता है. 1941 की भारत की जनगणना के अनुसार, उस इलाके में, जो बाद में 'पश्चिम पाकिस्तान' बना, हिंदुओं की आबादी 14.6 प्रतिशत थी. बंटवारे के बाद, यह संख्या तेजी से गिर गई. आज, पाकिस्तान की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से भी कम है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि सात दशकों तक लगातार हुई इतनी बड़ी गिरावट, इस्लामाबाद के उस दावे पर सवाल खड़े करती है जिसमें वह कहता है कि वह अपने अल्पसंख्यकों की रक्षा करता है. इन आंकड़ों के पीछे हिंसा और आर्थिक रूप से घोंटने का एक लंबा इतिहास छिपा है।  रिपोर्ट में बताया गया है कि 1947 के दंगों के बाद से ही इस समुदाय को समय-समय पर हिंसा की लहरों का सामना करना पड़ा है. हजारों हिंदू परिवारों को वहां से भागना पड़ा या विस्थापित होना पड़ा. उन्हें 'एनिमी प्रॉपर्टी लॉ' (शत्रु संपत्ति कानून) जैसे कठोर कानूनों के जरिए उनकी पुश्तैनी जमीन और खेतों से बेदखल कर दिया गया. इस कदम ने पूरे समुदाय को गरीबी और हमेशा के लिए विस्थापन की स्थिति में धकेल दिया।  कानून भी उत्पीड़न का जरिया रिपोर्ट का तर्क है कि यह उत्पीड़न केवल सड़कों पर ही नहीं होता, बल्कि पाकिस्तान के कानूनों में भी दर्ज है. वहां के संविधान के अनुच्छेद 41 और 91 के अनुसार, केवल एक मुस्लिम ही राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बन सकता है. 2019 में लाए गए एक सुधार विधेयक को रोके जाने के बाद, यह प्रावधान आज भी बिना किसी चुनौती के कायम है।  हर पाकिस्तानी को अपने पासपोर्ट पर अपना धर्म बताना अनिवार्य है. यहां तक कि राजधानी इस्लामाबाद में भी कोई चालू हिंदू मंदिर नहीं है. आधिकारिक अनुमति मिलने के बावजूद, इस्लामी समूहों के हिंसक विरोध के कारण 2020 में पहले मंदिर का निर्माण रोक दिया गया था, जो आज तक पूरा नहीं हो सका है।  इस रिपोर्ट का सबसे भयावह हिस्सा महिलाओं और लड़कियों की दुर्दशा के बारे में है. पाकिस्तान में हर साल लगभग एक हजार या उससे अधिक हिंदू और ईसाई महिलाओं और लड़कियों का अपहरण कर लिया जाता है, उन्हें जबरन इस्लाम कबूल कराया जाता है और अपहरणकर्ताओं से शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है. मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार इस तरह की घटनाओं को दर्ज किया है. इनमें से ज्यादातर पीड़ित गरीब परिवारों की नाबालिग लड़कियां होती हैं, जिनकी न्याय तक कोई पहुंच नहीं है।  ब्रिटिश सरकार से रखी यह मांग रिपोर्ट के अंत में, UK सरकार के सामने पांच अहम मांगें रखी गई हैं. इनमें शामिल हैं कि UK-पाकिस्तान के बीच होने वाली हर बातचीत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को एक अनिवार्य शर्त बनाया जाए; मंदिरों की सुरक्षा और मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए समयबद्ध कदम उठाया जाए; पाकिस्तान को दी जाने वाली ब्रिटिश सहायता को मानवाधिकारों की स्थिति में सुधार से जोड़ा जाए और अल्पसंख्यक अधिकार समूहों के लिए अलग से फंड सुरक्षित की जाए. इसके साथ ही इस्लामाबाद स्थित ब्रिटिश उच्चायोग में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए दो पद आरक्षित करना ताकि बिना किसी रुकावट या फिल्टर के अत्याचारों की रिपोर्ट मिल सके. इतना ही नहीं मांग है कि हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर हर छह महीने में एक आधिकारिक रिपोर्ट प्रकाशित करने को कहा जाए और जबरन धर्म परिवर्तन तथा धार्मिक उत्पीड़न के शिकार लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय बने।  रिपोर्ट में विदेश सचिव, धार्मिक स्वतंत्रता या आस्था के मामलों में प्रधानमंत्री के विशेष दूत और हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) मामलों के मंत्री से कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है. इसमें जोर देकर कहा गया है कि धार्मिक स्वतंत्रता एक मानवाधिकार है, और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, गरिमा तथा उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।  पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद पर शर्त लगाने की मांग INSIGHT UK ने ब्रिटिश सरकार से मांग की है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली कुछ आर्थिक मदद को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में सुधार से जोड़ा जाए. संगठन ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने वाले संगठनों के लिए आर्थिक मदद अलग रखने की भी मांग की है।  रिपोर्ट में हर छह महीने में अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति का आधिकारिक आकलन करने और उत्पीड़न का सामना करने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए शरण लेने के रास्ते उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।  रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश हिंदुओं से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाला संसदीय समूह इन चिंताओं को ब्रिटेन की सरकार के सामने उठाने पर विचार कर रहा है. इसके लिए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर बैठक की मांग करने का विकल्प भी चर्चा में है. समूह में पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद कम करने के सवाल पर भी चर्चा हुई है. इस रिपोर्ट में पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की स्थिति की अधिक निगरानी करने … Read more

तिलक वर्मा का नया बैटिंग प्लान तैयार, अब पहली गेंद से करेंगे अटैक; जरूरत पड़ने पर सिंगल-डबल से संभालेंगे पारी

ऑकलैंड भारतीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा का बल्लेबाजी क्रम बदलने के साथ अंदाज भी बदला है. पहले नंबर-3 पर उतरने वाले तिलक अब नंबर-5 या नंबर-6 पर बल्लेबाजी कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस बदलाव ने उनकी सोच में थोड़ा फर्क लाया है. अब वह पहली गेंद से ही बाउंड्री लगाने का मौका तलाशते हैं, हालांकि इसके लिए गेंद का हिट करने लायक होना जरूरी है।  तिलक ने न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 इंटरनेशनल से पहले ऑकलैंड में यह बात कही. पिछले 12 महीनों में उन्होंने रन चेज के दौरान अपनी बल्लेबाजी से खास पहचान बनाई है. न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में भी उन्होंने नीतीश रेड्डी के साथ मिलकर मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. भारतीय टीम पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर चुकी है।  'पहली गेंद से बाउंड्री का मौका तलाशता हूं' तिलक ने कहा- मेरे पास पहले से ही पावर गेम था. मैंने नंबर-3 पर भी रन बनाए हैं. अब नंबर-5 या नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए मैं पहली ही गेंद पर बाउंड्री लगाने के बारे में सोचता हूं, लेकिन तभी जब गेंद हिट करने लायक हो।  उन्होंने आगे कहा- अगर ऐसा मौका नहीं मिलता, तो मेरा ध्यान मैच को आखिरी ओवरों तक ले जाने पर रहता है. मैं थोड़ा समय लेता हूं. शुरुआत में सिंगल और डबल लेने, गैप तलाशने और चौके या दो रन जुटाने पर ध्यान देता हूं।  डेथ ओवर्स में गेंदबाजों पर बनाते हैं प्रेशर  रन चेज के दौरान तिलक सिर्फ अपने शॉट्स पर ही नहीं, बल्कि गेंदबाजों की मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देते हैं. उनका मानना है कि आखिरी ओवरों में बल्लेबाज के मुकाबले गेंदबाज पर ज्यादा दबाव होता है।  नीतीश रेड्डी से त‍िलक वर्मा की क्या बात हुई थी? हेगले ओवल में न्यूजीलैंड के खिलाफ टारगेट का पीछा करते हुए नीतीश रेड्डी के साथ अपनी पार्टनरश‍िप को याद करते हुए तिलक ने बताया कि उन्होंने अपने साथी बल्लेबाज से क्या कहा था।  उन्होंने कहा- मैंने नीतीश से कहा था कि अगर हम यहां से मैच निकाल लेते हैं, तो बहुत मजा आएगा. बस क्रीज पर टिके रहो, मैच को आखिरी तक ले चलो और फिर देखते हैं कि क्या होता है।  भारत की नजरें 5-0 के क्लीन स्वीप पर भारतीय टीम सीरीज अपने नाम कर चुकी है, लेकिन तिलक की नजरें अब बाकी दोनों मुकाबले जीतकर क्लीन स्वीप करने पर हैं. उन्होंने कहा कि टीम इसे 5-0 से जीतने के शानदार मौके के तौर पर देख रही है। 

Delhi Airport पर यात्रियों को बड़ी राहत, अब ₹10 की चाय और ₹20 में नाश्ता; जानें लोकेशन

नई दिल्ली दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अब यात्रियों को चाय-कॉफी और नाश्ते के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होगी. एयरपोर्ट पर आमतौर पर महंगे मिलने वाले खाने-पीने के सामान के बीच अब यात्रियों को सिर्फ 10 रुपये में चाय और 20 रुपये में नाश्ता मिल सकता है. इसके लिए एयरपोर्ट पर UDAN Yatri Café की शुरुआत की गई है. यह पहल हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को सस्ती और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।  दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 के चेक-इन एरिया में शुरू किए गए उड़ान यात्री कैफे में यात्रियों को कम कीमत पर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें मिलेंगी, यहां चाय की कीमत 10 रुपये रखी गई है, जबकि कॉफी सिर्फ 20 रुपये में मिल सकती है. इसके अलावा पैकेटबंद पीने का पानी 10 रुपये और दिन का खास स्नैक या मिठाई 20 रुपये में उपलब्ध है।  स्नैक्स में उपलब्धता के आधार पर समोसा, कचौरी, पैटीज और वड़ा पाव जैसे विकल्प मिल सकते हैं. इससे उन यात्रियों को राहत मिल सकती है, जिन्हें एयरपोर्ट पर खाने-पीने की चीजें सामान्य बाजार के मुकाबले महंगी लगती हैं।  सिक्योरिटी चेक के बाद नहीं मिलेगी यह सुविधा अगर आप फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंच रहे हैं, तो इस कैफे की लोकेशन जानना जरूरी है. उड़ान यात्री कैफे टर्मिनल-3 के चेक-इन एरिया में है, न कि सिक्योरिटी जांच के बाद यात्रियों के बैठने वाले डिपार्चर एरिया में, इसलिए सिक्योरिटी चेक पूरा करने के बाद सस्ती चाय या नाश्ता खरीदने की योजना बना रहे यात्रियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।  नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से सिक्योरिटी जांच के बाद भी ऐसे कैफे शुरू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, इसका विस्तार एयरपोर्ट पर उपलब्ध जगह, संचालन और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं पर निर्भर करेगा।  देश के दूसरे एयरपोर्ट पर भी मिल रही सस्ती चाय-नाश्ते की सुविधा उड़ान यात्री पहल का उद्देश्य हवाई यात्रियों को कम कीमत पर बुनियादी खानपान की सुविधा उपलब्ध कराना है. मई 2026 तक यह पहल देश के 25 एयरपोर्ट तक पहुंच चुकी थी, इनमें मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के एयरपोर्ट के साथ कई छोटे शहरों के एयरपोर्ट भी शामिल हैं।  दिल्ली एयरपोर्ट पर इस सुविधा की शुरुआत से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर उन लोगों के लिए यह उपयोगी हो सकती है, जो परिवार के साथ यात्रा करते हैं या फ्लाइट से पहले चाय, कॉफी और हल्का नाश्ता करना चाहते हैं। 

राधिका आप्टे बोलीं- काम के नाम पर सौदेबाजी नहीं चलेगी, एक्शन सीन के लिए रखी गई थीं ऐसी शर्तें

मुंबई  बॉलीवुड एक्ट्रेस राधिका आप्टे हमेशा से काफी बोल्ड और बेबाक रही हैं. फिल्म इंडस्ट्री में अपने अनुभवों को लेकर वो हमेशा खुलकर बात करती हैं. हाल ही में अपने आने वाले शो 'अक्का'  के प्रमोशन के दौरान, राधिका ने एक बार फिर एक फिल्म में काम करने के अपने खराब एक्सपीरियंस पर बात की।  'न्यूज 18' संग इंटरव्यू में राधिका ने एक एक्शन फिल्म में काम करने के दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि उन्हें इनरवियर में शूट करने के लिए कहा गया था. उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की मांगों के खिलाफ आवाज उठाने पर इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर्स को नौकरी से निकाल दिया जाता है।  इनरवियर में एक्शन सीन की हुई डिमांड इस बारे में बात करते हुए राधिका आप्टे ने एक फिल्म की शूटिंग का किस्सा सुनाया, जहां उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वो इनरवियर में कुछ एक्शन सीक्वेंस करें. राधिका बोलीं- उन्होंने मुझसे कहा था- क्या आप बिना ब्रा के शर्ट पहन सकती हैं और बटन खुले रख सकती हैं? इसपर मैंने उनसे कहा था कि थोड़ा फिजिक्स के बारे में तो सोचों।  राधिका ने कहा कि फिल्मों में एक्शन सीन करते समय भी एक्ट्रेसेस से ये उम्मीद की जाती है कि वो दर्शकों को लुभाएं. इस बारे में बात करते हुए राधिका बोलीं- मेरी सोच थोड़ी अलग है. जब मैं कोई रोल साइन करती हूं, तो मुझे बहुत साफ-साफ बता दीजिए कि इस किरदार को लेकर आपकी सोच क्या है. मुझे सीन से दो दिन पहले यह मत बताइए, क्योंकि असली दिक्कत वहीं आती है।  'मेरा यही कहना है कि अगर आपने कोई ऐसा किरदार लिखा है, जो फिल्म में ज्यादातर बिना कपड़ों के रहता है, चाहे आपकी वजह जो भी हो, तो मैं यह जानकर ही साइन करूंगी कि मुझे क्या करना है. लेकिन अगर आप सीन से दो दिन पहले मुझसे इस बात पर सौदेबाजी करते हैं और ऐसे कपड़े पहनने के लिए दबाव बनाते हैं, तो यह बहुत ही मुश्किल हो जाता है।  राधिका ने आगे बताया कि जब उनके साथ ऐसा कुछ हुआ तो वो बात पूरे दो हफ्तों तक चलती रही. एक्ट्रेस बोलीं- वो मुझसे पूछते रहे- क्या आप यह हिस्सा दिखाएंगी? क्या आपको वो दिखाना चाहिए? यह पूरी तरह से मानसिक रूप से परेशान करने वाला था. यह सच में बहुत निराश करने वाला होता है।  इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर पर भी दबाव राधिका आप्टे ने ये भी बताया कि सेट पर इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर भी होते हैं, जो न्यूडिटी और इंटीमेसी वाले सीन्स के लिए नियमों का पालन करते हैं. राधिका ने बताया कि जब प्रोड्यूसर्स ऐसी डिमांड करते हैं, तो वो काफी परेशान हो जाते हैं।  एक्ट्रेस ने इस बारे में बात करते हुए कहा- आप न्यूडिटी दिखाना चाहते हैं, तो ठीक है, लेकिन मुझे शुरुआत से ही बताएं कि आप क्या चाहते हैं.आखिरी समय में ऐसे सरप्राइज क्यों मिलते हैं? यह बहुत कमाल की बात है कि अब हमारे पास इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर हैं, लेकिन उन्हें भी प्रोड्यूसर्स ही काम पर रखते हैं।  'मैंने देखा है कि जब इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर एक्टर्स की साइड लेते हैं तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है. यह कोई आसान सिचुएशन नहीं है. हालांकि, उनकी मौजूदगी से बहुत फर्क पड़ा है, लेकिन इससे हमें प्रोटेक्शन नहीं मिली है, क्योंकि या तो उन्हें निकाल दिया जाता है या वो मजबूरी में अपने सुर बदल लेते हैं, या फिर वो अड़े रहते हैं और फिर भी कुछ नहीं होता. आपको वैसे ही परेशान किया जाता है. एक्टर्स अपनी पसंद का कोई इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर नहीं रख सकते।  किस बात का है डर? हालांकि, राधिका ने यह भी साफ किया कि इंडस्ट्री में आमतौर पर ऐसा नहीं होता है. वो बोलीं- ज्यादातर लोग ऐसे नहीं होते. 10 में से सिर्फ एक सेट पर ऐसा हुआ था. 9 सेट ऐसे हैं, जो पूरे सम्मान के साथ मेरा बहुत अच्छा ख्याल रखते हैं. लेकिन वो एक सेट वाला वाकया फिर भी हो जाता है. दिक्कत यह है कि आप इसके बारे में खुलकर बात भी नहीं कर पाते. मैं आज भी आपको उस फिल्म या प्रोजेक्ट का नाम नहीं बता पा रही हूं. घर वापस जाकर मुझे लगता है कि मैं कब खुलकर अपनी बात कह पाऊंगी? यही असली मसला है और मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है। 

CG Dhan Kharidi: किसानों को ₹3100 प्रति क्विंटल मिलेंगे दाम, 360 नए खरीदी केंद्र भी खुलेंगे; टोकन प्रक्रिया जानें

रायपुर  छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की आधिकारिक घोषणा हो गई है। मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में 15 नवंबर से धान खरीदी पर मुहर लगी है। धान खरीदी की घोषणा के साथ ही किसानों के चेहरे पर खुशी आ गई है। किसान लंबे समय से धान खरीदी के तारीख की इंतजार कर रहे थे। वहीं, दूसरी तरफ सरकार ने भी धान खरीदी की तैयारी तेज कर दी है। इस बार भी किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी होगी। 360 नए धान खरीदी केंद्र मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस वर्ष 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ हो रही है। राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए धान खरीदी व्यवस्था को और सुगम बनाने के लिए 360 नए धान खरीदी केंद्र खोलने का निर्णय लिया है। नए केंद्र खुलने से किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और खरीदी केंद्रों पर दबाव भी कम होगा। इससे किसानों के समय और श्रम की बचत होगी तथा धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनेगी। अधिकारियों को निर्देश मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र किसान सुविधाजनक तरीके से अपनी उपज बेच सके। टोकन के लिए लंबी लाइन नहीं खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों को धान बेचने के लिए टोकन प्राप्त करने हेतु सोसायटियों में लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। राज्य सरकार द्वारा किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार एप के माध्यम से घर बैठे धान विक्रय के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे। फोन में कर सकते हैं डाउनलोड खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा संचालित ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसके माध्यम से किसान 24×7 ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था से किसानों के समय और श्रम की बचत होने के साथ ही धान खरीदी की प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित होगी। किस किसान को कितने टोकन धान विक्रय के लिए किसानों की जोत के अनुसार टोकन की संख्या निर्धारित की गई है। दो एकड़ तक के लघु एवं सीमांत किसानों को एक टोकन मिलेगा। दो एकड़ से अधिक और 10 एकड़ तक के किसानों को अधिकतम दो टोकन तथा 10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसानों को अधिकतम तीन टोकन प्राप्त करने की सुविधा होगी। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी पिछले वर्ष की तरह टोकन में धान की मात्रा दर्ज करने की सुविधा रहेगी। किसान अपनी आवश्यकता और उपलब्धता के अनुसार मात्रा दर्ज कर टोकन प्राप्त कर सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि यदि किसान किसी टोकन पर अपनी पूरी पात्र मात्रा का धान नहीं बेचता है, तो उसकी शेष पात्रता समाप्त नहीं होगी। वह पात्रतानुसार शेष मात्रा का धान दूसरे अथवा तीसरे टोकन के माध्यम से बेच सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को धान विक्रय के लिए अधिक सुविधा और विकल्प उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बार-बार सोसायटियों के चक्कर न लगाने पड़ें और वे अपनी सुविधा के अनुसार टोकन प्राप्त कर सुगमता से धान का विक्रय कर सकें।

सतना में हाईकोर्ट के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई, ट्रांसमिशन लाइन कॉरिडोर में बने 94 निर्माणों को नोटिस

हाई कोर्ट के निर्देश पर सतना में ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में निर्माणों पर कार्रवाई 94 निर्माणों को नोटिस सतना मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के निर्देशों के पालन तथा विद्युत दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा सतना जिले में ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में किए गए निर्माणों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत जिले में पांच ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में निर्माण करने पर संबंधित लोगों को कुल 94 नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें अधिकांश निर्माण डिलौरा क्षेत्र के हैं। एमपी ट्रांसको द्वारा स्थानीय प्रशासन के सहयोग से लोगों को प्रतिबंधित कॉरिडोर में निर्माण से होने वाले गंभीर विद्युत जोखिमों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। पांच ट्रांसमिशन लाइनों के कॉरिडोर में निर्माण चिह्नित सतना में 132 केवी सतना सीमेंट, 132 केवी सतना-प्रिज्म सीमेंट, 132 केवी सतना-रामपुर, 132 केवी सतना-उचेहरा तथा 220 केवी सतना-कटनी ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में किए गए निर्माणों के संबंध में नोटिस जारी किए गए हैं। इन लाइनों के नीचे और आसपास सुरक्षा मानकों के विपरीत किए गए निर्माणों से लोगों की जान को खतरा हो सकता है। तेज हवा या अन्य कारणों से विद्युत तारों के झूलने की स्थिति में मकानों, दुकानों और अन्य संरचनाओं के समीप दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। तारों के सीधे संपर्क के अलावा विद्युत आर्क से भी जानलेवा हादसा हो सकता है। 132 केवी लाइन के लिए 27 और 220 केवी के लिए 35 मीटर प्रतिबंधित कॉरिडोर निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार, 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन के दोनों ओर 27 मीटर तथा 220 केवी लाइन के दोनों ओर 35 मीटर का प्रतिबंधित कॉरिडोर निर्धारित है। इस क्षेत्र में सुरक्षा मानकों के विपरीत निर्माण करना गंभीर विद्युत जोखिम पैदा कर सकता है। एमपी ट्रांसको द्वारा संबंधित निर्माण स्वामियों को नोटिस देकर सुरक्षा मानकों की जानकारी दी जा रही है और प्रतिबंधित कॉरिडोर में निर्माण नहीं करने के लिए समझाइश दी जा रही है। विद्युत दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अभियान एमपी ट्रांसको का यह अभियान मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के निर्देशों के पालन के साथ ही संभावित विद्युत दुर्घटनाओं की रोकथाम और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। कंपनी ने नागरिकों से अपील की है कि वे ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित कॉरिडोर में किसी भी प्रकार का निर्माण न करें तथा निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।  

Diwali Bonus 2026: BMC कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, पिछले साल से ₹2,000 ज्यादा मिलेगा बोनस

 मुंबई दिवाली से पहले मुंबई महानगरपालिका (BMC) के हजारों कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर आई है. महापौर ऋतु तावड़े ने साल 2026 के लिए पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों को 33,000 रुपये दिवाली बोनस देने की घोषणा की है. पिछले साल कर्मचारियों को 31,000 रुपये बोनस मिला था. इस बार इसमें 2,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को त्योहार से पहले आर्थिक राहत मिलेगी।  महापौर ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि बोनस की रकम नवंबर महीने के नियमित वेतन के साथ जारी की जाए. यह फैसला BMC मुख्यालय में हुई बैठक के बाद लिया गया. बैठक में अलग-अलग राजनीतिक दलों के समूह नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. बोनस की रकम तय करने को लेकर सभी पक्षों के बीच चर्चा हुई।  93,509 कर्मचारियों और पात्र कर्मियों को मिलेगा फायदा BMC के इस फैसले से कुल 93,509 अधिकारी, कर्मचारी और पात्र कर्मी लाभान्वित होंगे. इसमें महानगरपालिका के नियमित वेतनमान पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं. इसके अलावा सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी बोनस का लाभ मिलेगा।  महानगरपालिका की तरफ से पात्र सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेवकों और बालवाड़ी शिक्षकों को भाऊबीज की राशि भी दी जाएगी. इस तरह बोनस और भाऊबीज की रकम से अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों और कर्मियों को त्योहार के मौके पर आर्थिक मदद मिलेगी।  पिछले साल से 2,000 रुपये ज्यादा बोनस महापौर ऋतु तावड़े के मुताबिक, बोनस की रकम तय करने के दौरान महाराष्ट्र के कई हिस्सों में कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया. कर्मचारी संगठनों की मांग और आर्थिक हालात पर चर्चा के बाद 33,000 रुपये बोनस देने पर सहमति बनी।  पिछले साल 31,000 रुपये बोनस दिया गया था, जबकि इस साल इसे बढ़ाकर 33,000 रुपये कर दिया गया है. बोनस की रकम नवंबर के नियमित वेतन के साथ देने के निर्देश के बाद पात्र कर्मचारियों को दिवाली से पहले इसका लाभ मिलने की उम्मीद है. महानगरपालिका के इस फैसले से हजारों परिवारों को त्योहार की तैयारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक मदद मिलेगी। 

भोपाल मेट्रो यात्रियों को राहत, अब UPI से पेमेंट कर वेंडिंग मशीन से तुरंत मिलेगा टिकट

भोपाल  मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) भोपाल मेट्रो के यात्रियों के सफर को और अधिक सुगम व हाईटेक बनाने जा रहा है। प्रायोरिटी कॉरिडोर के सभी मेट्रो स्टेशनों पर 30 अक्टूबर शुक्रवार से टिकट वेंडिंग मशीन (टीवीएम) की सुविधा शुरू की जा रही है। इस ऑटोमैटिक प्रणाली के जरिए यात्री बिना कतार में लगे 30 सेकंड में खुद अपना टिकट प्राप्त कर सकेंगे। सेवा को समावेशी बनाने के लिए मशीनों में दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों की सुविधा हेतु ब्रेल लिपि का विशेष प्रावधान भी किया गया है। सभी स्टेशनों पर दो-दो मशीनें मेट्रो स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण और तेज टिकटिंग के लिए प्रत्येक स्टेशन पर दो-दो टीवीएम लगाई गई हैं। यात्री स्क्रीन पर बाय क्यूआर टिकट चुनकर गंतव्य दर्ज करेंगे और स्क्रीन पर दिख रहे क्यूआर कोड को किसी भी यूपीआई एप से स्कैन कर सेकंडों में टिकट हासिल कर सकेंगे। इसके अलावा यात्री एमपीएमआरसीएल एप, टिकट काउंटर और ई-वालेट से भी कैशलेस टिकटिंग का लाभ ले सकते हैं। 31 दिसंबर तक मिल रही है टिकटों पर बंपर छूट यात्रियों के लिए 31 दिसंबर तक विशेष प्रमोशनल छूट भी जारी रहेगी। इसके तहत सिंगल जर्नी पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त, रिटर्न जर्नी पर कुल 30 प्रतिशत और ग्रुप टिकट पर 35 प्रतिशत छूट मिल रही है। न्यूनतम दो यात्री मिलकर ग्रुप छूट का लाभ ले सकते हैं। वहीं ई-वालेट रिचार्ज पर आठ से 15 प्रतिशत तक का बोनस दिया जा रहा है। 20 रुपये के सिंगल टिकट पर छूट लागू नहीं। मेट्रो टिकट पर छूट का लाभ भी मेट्रो यात्रियों को टिकट पर विशेष छूट का लाभ भी दिया जा रहा है. 11 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू प्रमोशनल डिस्काउंट व्यवस्था के अंतर्गत सिंगल जर्नी टिकट पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त छूट, रिटर्न जर्नी टिकट पर कुल 30 प्रतिशत तथा ग्रुप टिकट पर कुल 35 प्रतिशत छूट का लाभ मिल रहा है. ग्रुप टिकट की सुविधा को भी सरल बनाया गया है, जिसके तहत अब केवल दो यात्री मिलकर ग्रुप टिकट का लाभ ले सकते हैं।  हर स्टेशन पर दो-दो मशीनें : स्टेशन चुनकर यूपीआई के जरिये कर सकेंगे पेमेंट टिकट काउंटर पर जाने की जरूरत नहीं नई मशीनों से टिकट लेने के लिए काउंटर की कतार में नहीं लगना पड़ेगा। भुगतान यूपीआई से होगा। मशीन से निकला प्रिंटेड क्यूआर टिकट एएफसी गेट पर स्कैन करते ही गेट खुल जाएगा। इससे टिकट लेने की प्रक्रिया कैशलेस और कॉन्टैक्टलेस होगी। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, पीक ऑवर्स में काउंटर पर कतारों का दबाव 70% तक घटने की उम्मीद है। इससे मैनपावर पर निर्भरता भी कम होगी। 6 आसान चरणों में ऐसे निकालें टिकट     टिकट वेंडिंग मशीन की स्क्रीन पर Buy QR Ticket का विकल्प चुनें। {जिस स्टेशन तक जाना है, उसे चुनें। {स्क्रीन पर स्टेशन का कुल किराया दिखाई देगा।     भुगतान के लिए यूपीआई क्यूआर कोड आएगा।     मोबाइल के यूपीआई एप से कोड स्कैन कर भुगतान करें।     भुगतान होते ही मशीन से प्रिंटेड क्यूआर टिकट निकल आएगा। इसे लेकर आप यात्रा कर सकते हैं। 31 दिसंबर तक टिकट पर इतनी छूट :     सिंगल जर्नी: 25% अतिरिक्त छूट। यह 20 रुपए के बेस टिकट पर लागू नहीं होगी। रिटर्न जर्नी: आने-जाने के टिकट पर कुल 30% छूट।     ग्रुप टिकट: कुल 35% छूट। अब दो यात्री भी ग्रुप टिकट ले सकेंगे।     एप वॉलेट: एमपीएमआरसीएल एप में रिचार्ज राशि के अनुसार 8% से 15% तक अतिरिक्त बोनस। ऐसे मिलेगी TVM से टिकट भोपाल एवं इंदौर मेट्रो के सभी स्टेशनों पर दो-दो टिकट वेंडिंग मशीन (TVM) स्थापित की गई हैं. इन मशीनों के माध्यम से यात्री स्वयं आसानी से टिकट प्राप्त कर सकेंगे. टिकट प्राप्त करने की प्रक्रिया निम्नानुसार है।      Buy QR Ticket विकल्प पर क्लिक करें.     अपनी यात्रा के लिए गंतव्य स्टेशन का चयन करें.     चयनित गंतव्य के अनुसार स्क्रीन पर कुल किराया प्रदर्शित होगा.     इसके बाद स्क्रीन पर QR कोड के माध्यम से भुगतान का विकल्प दिखाई देगा.     अपने UPI ऐप से QR कोड स्कैन कर भुगतान करें.     भुगतान सफल होने के बाद मशीन से अपना टिकट प्राप्त करें