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साय कैबिनेट की बैठक में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर भी अहम फैसला लिया जा सकता

रायपुर छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने 11 जुलाई को अपने अधिनस्त मंत्रियों की बैठक बुलाई है। बताया जा रहा है ​कि साय कैबिनेट की बैठक​ मंत्रालय में 11 जुलाई शुक्रवार को 11.30 बजे आयोजित की जाएगी। चूंकि छत्तीसगढ़ में मानसून के आगमन के साथ ही किसानी का काम शुरू हो चुका है, ऐसे में ये माना जा रहा है कि किसानों और खाद से जुड़ी समस्याओं को लेकर लेकर साय कैबिनेट में अहम फैसला लिया जा सकता है। दूसरी ओर कयास लगाए जा रहे हैं कि बैठक में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर भी अहम फैसला लिया जा सकता है। मिली जानकारी के अनुसार कयास लगाए जा रहे हैं कि छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर साय कैबिनेट की बैठक में अहम फैसला लिया जा सकता है। हालांकि अभी इस संबंध में अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अगर सरकार इस संबंध में फैसला लेती है तो सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत हो जाएगा। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 53 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ते का भुगतान किया जा रहा है। दरअसल छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को फिलहाल 53 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ते का भुगतान किया जा रहा है, जो केंद्रीय कर्मचारियों से दो प्रतिशत कम है। वहीं, जुलाई में एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी होनी है। ऐसे में साय कैबिनेट की बैठक को लेकर एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों की उम्मीद जग गई है। गौरतलब है कि मार्च में छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की गई थी। 3 मार्च को विधानसभा में साल 2025-26 के वार्षिक बजट में 53 प्रतिशत डीए किए जाने की घोषणा की थी। इस दौरान सातवें वेतनमान में कार्यरत कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इसके बाद उन्हें 53 प्रतिशत महंगाई भत्ता, जबकि छठवें वेतनमान के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 7 प्रतिशत की दर से डीए का भुगतान किया जा रहा है।

शादी का वादा कर किया शोषण, यश दयाल पर लगा आरोप, FIR दर्ज

गाजियाबाद गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के स्टार गेंदबाज यश दयाल के खिलाफ यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाते हुए FIR दर्ज की गई है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि यश ने शादी का वादा करके उसका शोषण किया। सोशल मीडिया से शुरू हुई दोस्ती, शादी का वादा कर किया शोषण सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 5 साल पहले सोशल मीडिया के जरिए यश दयाल और पीड़िता की मुलाकात हुई थी। शुरुआत दोस्ती से हुई जो बाद में प्रेम संबंध में बदल गई। पीड़िता का कहना है कि यश ने उसे शादी का भरोसा दिलाया था। दोनों ने लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहने के बाद यश ने बेंगलुरु समेत कई शहरों में उसे होटल और रिसॉर्ट्स में ले जाकर शारीरिक और मानसिक शोषण किया। FIR दर्ज, 10 साल तक की हो सकती है सजा, जांच जारी बताया जा रहा है कि पहले भी इस मामले में पीड़िता ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन यश दयाल के परिवार ने इसे साजिश करार दिया था। अब गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना में भारतीय दंड संहिता की धारा 69 के तहत गैरजमानती FIR दर्ज की गई है। अगर यश दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें 10 साल तक की सजा हो सकती है। पीड़िता ने पुलिस को यश के साथ हुई इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया चैट के कई सबूत भी दिए हैं, जो उनके आरोपों को मजबूत करते हैं। प्रशासन मामले की गहराई से जांच कर रहा है और जल्द ही कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। इस बीच, यश दयाल की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। 

फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट से 7 मौतें, अब देशभर के कैथ लैब के डॉक्टरों की परखी जाएगी योग्यता,मृतक के परिजनों को 10-10 लाख का मुआवजा

भोपाल  मध्य प्रदेश के दमोह जिले के मिशन अस्पताल में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा की गई दिल की सर्जरी से 7 लोगों की मौत के बाद यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर रूप से लिया गया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने पूरे देश की कैथ लैब्स में कार्यरत डॉक्टरों की योग्यता की जांच के निर्देश दिए हैं। परिजनों को 10-10 लाख रुपए दे MP सरकार : NHRC फर्जी डॉक्टर के इलाज से मारे गए लोगों के मामले का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने राज्य सरकार से मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए की मुआवजा राशि देने को कहा है। आयोग ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार तथा केंद्र के लिए कई सिफारिशें की हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच समिति ने मध्य प्रदेश के दमोह में मिशन अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में काम करने वाले एक फर्जी डॉक्टर द्वारा किए गए इलाज से लोगों की मौत के मामले की जांच की। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग ने राज्य सरकार को प्रत्येक मृतक के परिजनों को दस-दस लाख रुपए की अनुग्रह राशि का भुगतान करने को कहा है। आयोग ने सोमवार को यहां बताया कि उसकी जांच समिति ने मामले की जांच के बाद मध्य प्रदेश सरकार तथा केंद्र के लिए कई सिफारिशें की हैं। दोनों से चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने गत 28 मार्च को एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। संबंधित राज्य अधिकारियों से रिपोर्ट मांगने के अलावा अपनी ओर से भी जांच की थी। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार को सिफारिश की है। आयोग ने कहा कि वह इस अस्पताल में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा इलाज के बाद मरने वाले सभी सात मरीजों के परिजनों को राहत के रूप में दस-दस लाख रुपए का भुगतान करे। मानवाधिकार आयोग ने मामले के निपटारे तक मिशन अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की भी सिफारिश की है। साथ ही अधिकारियों को मध्य प्रदेश में कार्यरत सभी कैथ लैब का निरीक्षण करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा राज्य सरकार यह सत्यापित करने के लिए आवश्यक निर्देश भी जारी करेगी कि सभी डॉक्टर कैथ लैब में काम करने के लिए योग्य हैं या नहीं। जांच समिति ने कुछ अन्य सिफारिशें भी की हैं जिनमें बीमा राशि, सर्जरी से संबंधित जानकारी, भूखंड पर अनधिकृत निर्माण और जांच से जुड़े लापरवाह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उठाये गये कदमों की जानकारी मांगी गई है। उल्लेखनीय है कि इस अस्पताल में उपचार के बाद कई मरीजों की मौत हो गई थी। क्या है मामला? इसी वर्ष मार्च में यह मामला सामने आया था। आयोग ने 28 मार्च, 2025 को एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। इसमें संबंधित राज्य अधिकारियों से रिपोर्ट मांगने के अलावा अपनी जांच भी की थी। आयोग को अपनी जांच में सरकार द्वारा की गई कार्रवाई में कई अनियमितताएं मिली थीं। इसी के आधार पर कई अनुशंसाएं की हैं। आयोग ने अपनी अनुशंसाओं पर चार सप्ताह में कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट देने के लिए कहा है। जांच में लापरवाही करने वाले पुलिसकर्मियों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), दमोह के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए भी कहा है। इसमें मामले के अंतिम निपटारे तक मिशन अस्पताल का लाइसेंस रद करना भी सम्मिलित है। दमोह के मिशन अस्पताल में डॉ. नरेंद्र यादव उर्फ एन. जान कैम ने लंदन का कार्डियोलॉजिस्ट बताकर कई मरीजों की हार्ट सर्जरी की। मार्च 2025 में हुए इस खुलासे में सात मरीजों की मौत हुई। मामला सामने आने के बाद NHRC ने संज्ञान लिया और राज्य से रिपोर्ट तलब की। जांच में अनियमितताएं, लापरवाही और प्रशासनिक चूक सामने आई। NHRC ने दिए ये निर्देश देशभर में सभी कैथ लैब्स के डॉक्टरों की योग्यता की जांच सभी राज्य सरकारों को आयुष्मान भारत योजना के दुरुपयोग की जांच करने को कहा सात मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की अनुशंसा डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर अलग-अलग FIR दर्ज करने का निर्देश गैर इरादतन हत्या, ठगी, जालसाजी, चिकित्सकीय लापरवाही जैसे मामलों में कानूनी कार्रवाई पुलिस और CMHO द्वारा की गई लापरवाही पर विभागीय कार्रवाई मिशन अस्पताल का लाइसेंस निलंबित करने और संपत्ति की जांच के निर्देश गंभीर सवाल जिनकी होगी जांच     क्या मरीजों को सर्जरी से पहले खतरे और विकल्पों की जानकारी दी गई थी?     क्या अस्पताल ने बीमा कराया था, और क्या परिजनों को उसका लाभ मिला?     भूमि, भवन निर्माण, और अस्पताल संचालन में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं? व्हिसल ब्लोअर्स की सुरक्षा जो लोग इस आपराधिक कृत्य को सामने लाने में मददगार रहे, उन्हें व्हिसल ब्लोअर सुरक्षा कानून 2014 के तहत संरक्षण देने की भी सिफारिश की गई है।

गायक एमएम कीरवानी के पिता गीतकार शिव शक्ति का 92 वर्ष की उम्र में निधन

हैदराबाद  मनोरंजन जगत से एक बुरी खबर सामने आ रही है। मशहूर संगीतकार एमएम कीरवानी के पिता और गीतकार शिवा शक्ति दत्ता इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने 92 की उम्र में आखिरी सांस ली। गीतकार होने के साथ-साथ शिवा शक्ति तेलुगु सिनेमा से बतौर पटकथा लेखक, निर्देशक और निर्माता भी जुड़े हुए थे। कीरवानी तब दुनियाभर में चर्चा का विषय बने थे, जब 'RRR' में उनके गाने 'नाटू-नाटू' ने 'बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग' श्रेणी में ऑस्कर जीतकर इतिहास रच दिया था।  एसएस राजामौली से था खास रिश्ता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवा ने सोमवार रात हैदराबाद स्थित अपने घर पर आखिरी सांस ली। वह उम्र संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। वह 'बाहुबली' और 'RRR' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के निर्देशक एसएस राजामौली के पिता और लेखक विजयेंद्र प्रसाद के बड़े भाई थे। इस दुखद खबर के आने के बाद से इंडस्ट्री से जुड़े लोग और प्रशंसक दिवंगत गीतकार को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। चिंरजीवी समेत कई दिग्गज कलाकारों ने उनके दुख पर शोक व्यक्त किया है।  पवन कल्याण और चिरंजीवी ने जताया शोक अभिनेता और नेता पवन कल्याण ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'शिवा शक्ति दत्ता जी के निधन की खबर से गहरा दुख हुआ। उनके गीतों में संस्कृत और तेलुगू का अद्भुत समावेश देखने को मिलता है। मेरी संवेदनाएं कीरवानी गारू और उनके परिवार के साथ है।' चिरंजीवी ने लिखा, 'शिवा शक्ति दत्ता, एक चित्रकार, संस्कृत भाषा के विद्वान, लेखक, कहानीकार और बहुमुखी प्रतिभा के धनी। उनके जाने की खबर से मैं बेहद हैरान हूं।' कई लोकप्रिय फिल्माें के लिए लिखे गाने शिवा अपने कमाल के गीत लेखन से जाने जाते थे। वह संस्कृत के अच्छे जानकर थे। दक्षिण भारतीय सिनेमा में उन्हें खूब सम्मान मिला और उन्होंने कई सफल फिल्मों के गाने लिखे। पिछले कुछ सालों में उन्होंने कई हिट फिल्मों जैसे 'बाहुबली', 'RRR', 'एनटीआर: कथानायकुडु', 'हनु-मान' और 'साईं' के लिए यादगार गाने लिखे। उनके लिखे गए गानों पर लोगों ने खूब प्यार लुटाया। 'साहोरे बाहुबली' भी शिवा की कलम से ही निकला था। शिवा ने भाई के साथ रखा था फिल्मी दुनिया में कदम शिवा ने अपने छोटे भाई और अनुभवी पटकथा लेखक विजयेंद्र प्रसाद के साथ फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था। उन्होंने साल 1988 में अपना करियर फिल्म जानकी रामुडु से शुरू किया था, जहां उन्होंने लेखक और गीतकार दोनों के रूप में काम किया। उन्होंने 'अर्धांगी' और 'चंद्रहास' जैसी फिल्मों के जरिए निर्देशन में भी हाथ आजमाया, लेकिन ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रहीं। उनके भाई विजयेंद्र प्रसाद 'बाहुबली' समेत कई बड़ी फिल्मों के कहानीकार रह चुके हैं।  

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता का निधन, जोधपुर AIIMS में ली अंतिम सांस

जोधपुर  केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता दाऊलाल वैष्णव का मंगलवार को एम्स जोधपुर में निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और एम्स में उनका इलाज चल रहा था। 81 वर्षीय दाऊलाल वैष्णव राजस्थान के पाली जिले के जीवंद कलां गांव के मूल निवासी थे और पूर्व में सरपंच के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता का निधन AIIMS जोधपुर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी करते हुए जानकारी दी कि, "माननीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जी के पिताजी दाऊलाल वैष्णव का आज दोपहर 11:52 बजे निधन हो गया। वह पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे। मेडिकल टीम ने उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हो सके। हम दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।" दिल्ली से जोधपुर पहुंचे रेल मंत्री पिता दाऊलाल वैष्णव के निधन की सूचना मिलते ही केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव दिल्ली से जोधपुर रवाना हुए। वह सुबह 10:30 बजे हवाई मार्ग से जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से सीधे अपने घर गए, जहां परिवार के अन्य सदस्य पहले से मौजूद थे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जताया शोक राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया के माध्यम से रेल मंत्री के पिता के निधन पर शोक जताते हुए लिखा, 'माननीय केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिताजी श्री दाऊलाल वैष्णव के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।' रेल मंत्री के पिता के निधन की खबर से उनके गांव और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर है। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं।

विराट कोहली की विंबलडन वाली पोस्ट पर फैंस की चुटकी – अब रिटायरमेंट का वक्त आ गया?

नई दिल्ली भारतीय टीम के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली अब आपको सिर्फ और सिर्फ वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में नजर आएंगे, क्योंकि वे दो फॉर्मेट से रिटायरमेंट ले चुके हैं। इस बीच वे अपने परिवार के साथ लंदन में हैं और काफी समय से वहीं रहते हुए आ रहे हैं। इसी दौरान वे सात जुलाई को नोवाक जोकोविच का मुकाबला देखने के लिए विंबलडन के टेनिस एरेना में नजर आए। हालांकि, कुछ फैंस को ये बात तीर सी चुभ गई, क्योंकि जिस खिलाड़ी का समर्थन करने के लिए वे पहुंचे थे, वह उनसे दो साल बड़ा है और विराट ने दो फॉर्मेट से रिटायरमेंट ले लिया है।   विराट कोहली अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ विंबलडन में पहुंचे थे। विराट कोहली ने नोवाक जोकोविच की एक तस्वीर भी इंस्टाग्राम पर शेयर की और इस दिग्गज की सराहना की। नोवाक जोकोविच का भी रिप्लाई इस पोस्ट पर आया। हालांकि, बात इतनी सी नहीं है। कुछ फैंस इस बात से नाराज हैं कि विराट कोहली ने 36 साल की उम्र में रिटायरमेंट (दो फॉर्मेट से) ले लिया है, जबकि 38 साल के नोवाक जोकोविच अभी भी अपना 100 फीसदी दे रहे हैं। ऐसे में फैंस का कहना है कि 36 साल के क्रिकेटर रिटायर होकर 38 साल के खिलाड़ी को सपोर्ट कर रहे हैं। ये दुखद है। हालांकि, फैंस का एक तबका इस जोड़ी की तारीफ कर रहा है। वैसे भी विंबलडन में भारतीय क्या किसी भी क्रिकेटर का जाना अब आम हो गया है। एमएस धोनी से लेकर रोहित शर्मा और खुद विराट कोहली इस टूर्नामेंट को देखते हुए नजर आ चुके हैं। इंग्लैंड के क्रिकेटर तो अक्सर विंबलडन के मैच देखने के लिए पहुंच जाते हैं। नोवाक जोकोविच की बात करें तो वे राउंड 16 का अपना मुकाबला जीतकर क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुके हैं, जहां से सेमीफाइनल और फिर फाइनल का सफर भी वे तय कर सकते हैं।  

हाईकोर्ट ने कहा कि जवाब आने तक सरकार कोई कदम न उठाए, नहीं तो हम अंतरिम आदेश पारित करेंगे

भोपाल  आरक्षण के आधार पर प्रमोशन की बाट जोह रहे कर्मचारियों को हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया। हाईकोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण की नई नीति पर सरकार से जवाब मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने पूछा कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो सरकार ने नई नीति उसी तरह की क्यों बनाई? मौखिक रूप से पीठ ने कहा कि जवाब आने तक सरकार कोई कदम न उठाए, नहीं तो हम अंतरिम आदेश पारित करेंगे। इस पर महाधिवक्ता ने पीठ के समक्ष अंडरटेकिंग दी कि सरकार जवाब पेश होने और अगली सुनवाई तक प्रमोशन प्रक्रिया(Reservation in Promotion) पर किसी तरह से आगे नहीं बढ़ेगी। पीठ ने 15 जुलाई को केस सुनवाई के लिए लिस्टेड करने का आदेश दिया। प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सरकार के बनाए नए नियम को भोपाल के समीर कुमार शर्मा समेत अन्य 17 ने याचिका के जरिए चुनौती दी है। हाईकोर्ट में सोमवार को 2025 में राज्य सरकार के प्रमोशन में आरक्षण संबंधी बनाए नियमों के खिलाफ यचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उल्लंघन का आरोप याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता सुयश मोहन गुरु ने कोर्ट को बताया, याचिकाकर्ताओं ने 2025 के प्रमोशन में आरक्षण संबंधी नियमों को चुनौती दी है। तर्क दिया- 2002 के नियमों को हाईकोर्ट ने आरबी. राय के केस में समाप्त किया है। इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। शीर्ष कोर्ट ने यथास्थिति का आदेश दिया है और याचिकाएं लंबित हैं। उन्होंने कहा, सरकार के पास प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए कोई क्वांटिफिएबल डेटा नहीं है। एम. नागराज और जरनैल सिंह के मामलों में दिए गए आदेशों का पालन भी नहीं किया है। तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति के आदेश की अवहेलना कर 2025 के नियम बनाए। यह न्याय संगत नहीं है। नोटिस जारी कर मांगा जवाब एक्टिंग चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार से पहले के और नए प्रमोशन नियम के फर्क के बारे में पूछा। संतोषजनक जवाब न आने पर पीठ ने प्रमोशन (Reservation in Promotion) पर स्टे देने की मंशा जताई। इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने मौखिक अभिवचन दिया कि अगली सुनवाई तक कोई प्रमोशन नहीं किए जाएंगे। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी के जवाब तलब कर लिया।   ● हाईकोर्ट: मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो प्रमोशन में आरक्षण को लेकर नियम क्यों बनाए? सरकार पहले सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात को रखती। याचिका का निराकरण कराती फिर आगे बढ़ना चाहिए। ● महाधिवक्ता: यह नियम 2002 के आदेश से अलग है। ● हाईकोर्ट: दोनों नियमों पर तुलनात्मक रिपोर्ट पेश करें। ● महाधिवक्ता: इसके लिए समय चाहिए। ● हाईकोर्ट: जब तक जवाब नहीं आता, तब तक सरकार इस पर आगे नहीं बढ़े। यदि इस पर अभिवचन दिया जाता है तो ठीक है, वर्ना अंतरिम रोक के आदेश पारित किए जाएंगे। ● महाधिवक्ता: जवाब आने तक सरकार प्रमोशन प्रक्रिया पर आगे नहीं बढ़ेगी।

हाईकोर्ट में मिली चुनौती के चलते एक बार फिर अधिकारी, कर्मचारियों में ओहदा बढ़‌ने की नौ साल बाद जागी उम्मीदों पर अघोषित ठहराव की स्थिति

भोपाल  सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को पदोन्नति देने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक कर ली है। लोक निर्माण विभाग, वाणिज्यिक कर और निर्वाचन आयोग भी कुछ वर्गों के लिए अलग-अलग बैठकें कर चुका है। निर्वाचन में प्रमोशन आदेश भी जारी हुए। स्कूल शिक्षा जैसे कई विभागों ने सहमति लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। उधर जिन विभागों में शासकीय सेवकों की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) पूरी करने संबंधी प्रक्रिया अधूरी थी, उनमें भी अतिरिक्त काम हो रहे हैं। इस बीच हाईकोर्ट में मामले को सपाक्स वर्ग के कर्मचारियों की ओर से मिली चुनौती के चलते एक बार फिर अधिकारी, कर्मचारियों में ओहदा बढ़‌ने की नौ साल बाद जागी उम्मीदों पर अघोषित ठहराव की स्थिति बन गई है।  30 जुलाई तक नहीं आया फैसला तो…. 30 जुलाई तक यही हाल रहे तो तब तक बगैर प्रमोशन के 1500 से ज्यादा अधिकारी, कर्मचारी रिटायर हो जाएंगे। इसके पहले एक से डेढ़ लाख इसी तरह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जब तक कोर्ट से निर्णय नहीं हो जाता तब तक मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक पदोन्नति दिए जाने को लेकर शुरु हुई सीआर लिखने, पदोन्नति के लिए शासकीय सेवकों से सहमति लिए जाने, विभागों में डीपीसी की बैठकें करने जैसी सभी कार्रवाई पर ठहराव की स्थिति बननी तय है। कर्मचारी घोषित तौर पर तो अब कुछ नहीं कह रहे, लेकिन सपाक्स, अजाक्स के पदाधिकारी एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 31 जुलाई है डेडलाइन सभी विभागों को पहले चरण के तहत 31 जुलाई तक पदोन्नति देना है। मुख्य सचिव (सीएस) ने जून के अंत में बैठक ली थी। निर्देश एसीएस, पीएस, सचिव व विभागाध्यक्षों को दिए थे। यह भी कहा था कि प्रमोशन संबंधी जितने प्रकरण निपट जाएं, उतने निपटा लें। शेष शासकीय सेवकों के लिए सितंबर-अक्टूबर में बैठकें करें। सरकार ने नौ साल से लंबित पदोन्नति संबंधी मामलों में तेजी लाने के लिए इस वर्ष दो बार डीपीसी करने का निर्णय लिया है। आमतौर पर अगले वित्तीय वर्ष से वर्ष में एक बार ही डीपीसी होगी। इस वर्ष सभी विभागों में पहली डीपीसी की संबंधी प्रक्रिया 31 जुलाई तक पूरी करनी है। कब क्या हुआ     08 अप्रैल 2025 : सीएम ने पहली बार पदोन्नति की घोषणा की।     27 मई 2025 : सीएम ने दोहराया कि पदोन्नति जल्द देंगे।     10 जून 2025 : कैबिनेट में पदोन्नति नियम के प्रस्ताव पर चर्चा।     17 जून 2025 : कैबिनेट में पदोन्नति नियम के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।     19 जून 2025 : अधिसूचना जारी।     26 जून 2025 : मुख्य सचिव ने 31 जुलाई की डेडलाइन तय की।

बारिश के कारण सब्जियों की आवक कम, दाम छु रहे आसमान, रसोई का बजट बिगड़ा

भोपाल  मानसून आते ही सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं। हरी सब्जियां बहुत महंगी हो गई हैं। फूल गोभी और गिलकी 120 रुपये प्रति किलो बिक रही हैं। लौकी और पत्ता गोभी 80 रुपये प्रति किलो बिक रही हैं। टमाटर, जो सर्दी और गर्मी में 10 से 20 रुपए प्रति किलो बिकते थे, अब 60 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। आलू और प्याज ही ऐसे हैं जो 30 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। कद्दू भी 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। बारिश के कारण सब्जियों की आवक कम हो गई है। इसलिए दाम बढ़ गए हैं। करेला और गिलकी के दाम सुन हैरान हैं लोग स्कूल टीचर प्रेरणा शर्मा ने बताया कि कुछ दिन पहले बिट्टन हाट में सब कुछ सस्ता था। बैंगन 10 रुपये का ढेर था। टमाटर 20 से 40 रुपये प्रति किलो थे, पर अब 60 रुपये से कम में कुछ नहीं मिल रहा है। करेला और गिलकी 120 रुपये प्रति किलो देखकर वे हैरान रह गईं। फल खरीदने का मौसम सरकारी कर्मचारी पंकज दुबे ने हंसते हुए कहा 'मुझे नहीं पता कि लोगों के लिए यह कितना संभव है, लेकिन मैं सुझाव दूंगा कि यह साल का वह समय है जब सब्जियां खरीदने के बजाय फल खरीदना बेहतर है। आपके पास कई तरह के आम, केले, संतरे, जामुन और कुछ और हैं, और वे बहुत महंगे भी नहीं हैं, सिवाय लीची और निश्चित रूप से अनार और सेब के, जो अभी भी सब्जियों से महंगे हैं। सब्जियों की सप्लाई हुई कम सब्जी विक्रेता राकेश चौरसिया ने बताया कि सब्जियों की सप्लाई कम हो गई है। थोक बाजार में दाम बढ़ने से खुदरा बाजार में भी दाम बढ़ जाते हैं। बिट्टन मार्केट सब्जी व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष हरिओम खटीक ने कहा कि बारिश में सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। बारिश सबसे पहला कारण उन्होंने कहा कि 'सब्जियों की कीमतें आमतौर पर बारिश के मौसम में बढ़ जाती हैं, लेकिन अगर थोक बाजार में कद्दू 20 रुपये प्रति किलो बिकना शुरू हो जाए, तो हम यह कह सकते हैं कि सब्जियों की कीमतें वास्तव में बढ़ गई हैं। जिन क्षेत्रों से सब्जियां भोपाल लाई जाती हैं, उनमें बारिश की मात्रा उनकी कीमतों को तय करने में एक प्रमुख कारक है। भोपाल के आसपास नहीं होती सब्जियां बारिश के मौसम में, भोपाल के आसपास के क्षेत्रों में सब्जियों का उत्पादन नहीं होता है, इसलिए सब्जियों की स्थानीय आवक बहुत कम हो जाती है। हरिओम खटीक ने बताया कि अब, हमारे पास महाराष्ट्र, रतलाम और मंदसौर की ओर मालवा और मैहर से आपूर्ति हो रही है, और इसमें कोई संदेह नहीं है कि सभी सब्जियों की कीमतें अधिक हैं।  

कार्यपालिका के पदाधिकारी की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की भी भागीदारी होती है, क्यों देते हैं राय?: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली  भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने CBI निदेशक की नियुक्ति में CJI की भूमिका पर आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने सवाल उठाए हैं कि क्या ऐसा दुनिया में कहीं और हो रहा है? इसके अलावा उन्होंने जज के घर से नकदी मिलने पर भी खुलकर बात की। उपराष्ट्रपति ने कहा है कि हर अपराध की जांच होनी चाहिए। साथ ही कहा कि अगर पैसा मिला है, तो उसके स्त्रोत का भी पता लगाया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, 'मैं इस बात से पूरी तरह हैरान हूं कि CBI निदेशक जैसे कार्यपालिका के पदाधिकारी की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायाधीश की भी भागीदारी होती है। कार्यपालिका की नियुक्ति कार्यपालिका के अलावा किसी और की तरफ से क्यों होनी चाहिए? क्या ऐसा संविधान के तहत होता है? क्या ऐसा दुनिया में कहीं और हो रहा है?' दरअसल, DSPE एक्ट के तहत सीबीआई निदेशक की नियुक्ति एक हाई पावर कमेटी करती है, जिसके सदस्य प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनकी तरफ से नॉमिनेट किया हुआ कोई जज शामिल होते हैं। कोच्चि में कानूनी की पढ़ाई कर रहे छात्रों से बातचीत में उन्होंने न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका को अलग करने वाली सीमा कमजोर होने पर चिंता जाहिर की। नकदी मिलने पर क्या बोले नखड़ ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के आधिकारिक आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले की आपराधिक जांच शुरू की जाएगी। धनखड़ ने इस घटना की तुलना शेक्सपीयर के नाटक जूलियस सीजर के एक संदर्भ 'इडस ऑफ मार्च' से की, जिसे आने वाले संकट का प्रतीक माना जाता है। रोमन कलैंडर में इडस का अर्थ होता है, किसी महीने की बीच की तारीख। मार्च, मई, जुलाई और अक्टूबर में इडस 15 तारीख को पड़ता है। उपराष्ट्रपति ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि अब मुद्दा यह है कि यदि नकदी बरामद हुई थी तो शासन व्यवस्था को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी और पहली प्रक्रिया यह होनी चाहिए थी कि इससे आपराधिक कृत्य के रूप में निपटा जाता, दोषी लोगों का पता लगाया जाता और उन्हें कठघरे में खड़ा किया जाता। उपराष्ट्रपति ने कहा कि 14-15 मार्च की रात को न्यायपालिका को अपने खुदे के 'इडस ऑफ मार्च' का सामना करना पड़ा, जब बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार की गई थी, लेकिन अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। धनखड़ ने कहा कि इस मामले से शुरुआत से ही एक आपराधिक मामले के तौर पर निपटा जाना चाहिए था, लेकिन उच्चतम न्यायालय के 90 के दशक के एक फैसले के कारण केंद्र सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा, 'अगर इतना अधिक मात्रा में पैसा है, तो हमें पता लगाना होगा: क्या यह दागी पैसा है? इस पैसे का स्रोत क्या है? यह एक न्यायाधीश के आधिकारिक आवास में यह कैसे पहुंचा? यह किसका था? इस प्रक्रिया में कई दंड प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है। मुझे उम्मीद है कि प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।'