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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय रेल मंत्री श्री वैष्णव के पिताजी के निधन पर शोक व्यक्त किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केन्द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के पिता श्री दाऊ लाल वैष्णव के निधन पर गहन दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैष्णव परिवार के प्रति शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने बाबा महाकाल से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल परिजन को यह दु:ख सहन करने का संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है। उल्लेखनीय है कि स्व. वैष्णव बीते कुछ दिनों से गंभीर रूप से अस्वस्थ थे और उनका जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज चल रहा था।  

ऑपरेशन सिंदूर का सच आया सामने, राफेल को लेकर कंपनी ने बताई असली बात

नई दिल्ली  राफेल को मार गिराने के पाकिस्तान के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। अब लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी ने भी साफ कर दिया है कि पाकिस्तान ने भारत का कोई राफेल नहीं गिराया है। इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान भारत के रक्षा सचिव भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं। पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। एक राफेल का नुकसान पर पाकिस्तान ने नहीं गिराया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस की वेबसाइट Avion De Chasse को दसॉ एविएशन के अध्यक्ष और सीईओ एरिक ट्रैपियर ने बताया है कि एक राफेल जेट ऊंचाई पर जाकर तकनीकी खामी आ गई थी, जिसके चलते वह क्रैश हुआ। संघर्ष के दौरान कोई जेट नहीं गिरा था। भारत ने क्या कहा मीडिया से खास बातचीत में रक्षा सचिव आरके सिंह ने कहा कि यह कहना गलत है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के राफेल विमान गिराए गए थे। उन्होंने कहा, 'आपने राफेल्स का इस्तेमाल बहुवचन में किया है। मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि यह सच नहीं है। भारत के मुकाबले पाकिस्तान को जान और माल के मामले कई गुना नुकसान हुआ है।' उन्होंने कहा कि 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। उन्होंने कहा है कि भारतीय बलों को ऑपरेशन के दौरान पूरी छूट दी गई थी। उन्होंने कहा, 'हमारे सशस्त्र बलों पर कोई राजनीतिक रोक नहीं थी और उनके पास पूरी स्वतंत्रता थी।' चीन पर भड़के फ्रांस के अधिकारी चीन ने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष के बाद फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन के बारे में भ्रम की स्थिति पैदा करने की जिम्मेदारी अपने दूतावासों को दी थी, ताकि इस विमान की प्रतिष्ठा और बिक्री को नुकसान पहुंचाया जा सके। फ्रांसीसी सैन्य और खुफिया अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला है। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा देखी गई फ्रांसीसी खुफिया सेवा की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के दूतावासों में रक्षा अधिकारियों (डिफेंस अताशे) ने राफेल की बिक्री को प्रभावित करने के लिए अभियान चलाया, जिसका उद्देश्य उन देशों को राजी करना था, जिन्होंने पहले से ही फ्रांस निर्मित लड़ाकू विमान का ऑर्डर दे दिया है – विशेष रूप से इंडोनेशिया- कि वे राफेल विमान न खरीदें तथा अन्य संभावित खरीदारों को चीन निर्मित विमान चुनने के लिए प्रोत्साहित किया। फ्रांसीसी सेना के अधिकारी ने पहचान गुप्त रखते हुए रिपोर्ट एपी के साथ साझा की। पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी वायुसेना ने सैन्य संघर्ष के दौरान पांच भारतीय विमानों को मार गिराया, जिनमें तीन राफेल भी शामिल थे। फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि इससे उन देशों की ओर से राफेल के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे, जिन्होंने फ्रांसीसी निर्माता दसॉ एविएशन से लड़ाकू विमान खरीदे हैं।  

MNS के मार्च से मचा सियासी घमासान, एकनाथ शिंदे ने भाजपा पर भी साधा निशाना

मुंबई मराठी भाषा पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की एकता के चलते शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे को अपना जनाधार खिसकता दिख रहा है। ऐसे में अब उनका दल भी ऐक्टिव हो गया है और मराठी भाषा को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के लोगों पर सख्ती का विरोध किया है। मीरा भायंदर पुलिस ने आज सुबह ही बड़ी संख्या में मनसे के लोगों को हिरासत में लिया है। इसके अलावा विरोध मार्च पर भी रोक लगा दी है। इस पर मनसे और उद्धव सेना के समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा है। इन लोगों का कहना है कि सरकार ने कारोबारियों के विरोध प्रदर्शन पर तो नहीं रोक लगाई, लेकिन हमारे खिलाफ सख्ती दिखाई जा रही है। आखिर मराठी लोगों से सरकार को क्या दिक्कत है। मनसे कार्य़कर्ताओं ने कहा, 'यह सरकार महाराष्ट्र और मराठी लोगों के लिए है या फिर दूसरे राज्य की है? आखिर इन लोगों को मराठी लोगों के मार्च से क्या दिक्कत है?' मराठी बनाम हिंदी विवाद में अपनी जमीन खिसकने के डर से अब एकनाथ शिंदे गुट भी ऐक्टिव हो गया है। भले ही वह सरकार में शामिल है, लेकिन उसने मनसे के लोगों पर सख्ती को लेकर ऐतराज जताया है। फडणवीस सरकार में मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा कि आखिर मराठी लोगों को मार्च की परमिशन क्यों नहीं है। यही नहीं इशारों में ही उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साध दिया। सरनाइक ने कहा कि आखिर पुलिस की मंशा क्या है। मराठी लोगों पर ऐसा अत्याचार किस राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा,'मैं मराठी लोगों पर ऐक्शन की निंदा करता हूं। पुलिस को मार्च की परमिशन देनी चाहिए थी। इसके चलते शहर में बेवजह बवाल हो रहा है। गृह मंत्रालय ने ऐसा कोई आदेश भी नहीं दिया है कि आंदोलन की परमिशन नहीं है। फिर लोगों की गिरफ्तारी क्यों की जा रही है। ऐसा लग रहा है कि किसी एक राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा हो रहा है।' दरअसल मराठा कार्ड पर राजनीति करने वाले अब तीन दल हो गए हैं। उद्धव सेना, मनसे और एकनाश शिंदे की शिवसेना। अब दो गुट एक हो गए हैं तो एकनाथ शिंदे सेना को लग रहा है कि इससे उसके आधार को नुकसान पहुंचेगा। यही कारण है कि उसने अब मनसे के लोगों पर ऐक्शन का विरोध किया है। महाराष्ट्र में भाजपा को बाहरी वोटरों की पार्टी भी माना जाता है। वजह यह है कि वह हिंदु्त्व की राजनीति पर फोकस करती है, जिसके दायरे में दूसरे राज्यों के हिंदू भी आते हैं। भाजपा नेता नितेश राणे ने गैर-मराठी लोगों को पीटने पर ऐतराज भी जताया था और कहा था कि यह गरीब हिंदुओं पर हमला है।  

पीएम नेतन्याहू के साथ डिनर के दौरान ट्रंप ने तीखे शब्दों में ममदानी को दी चेतावनी

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर उम्मीदवार जोहरान ममदानी पर फिर से निशाना साधा है। उन्होंने जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि वह एक सोशलिस्ट नहीं बल्कि कम्युनिस्ट हैं। पहले वह डेमोक्रेट नेताओं को सोशलिस्ट कहते थे, लेकिन अब कम्युनिस्ट ही कह रहे हैं। अमेरिका में कम्युनिस्ट विचारधारा के लोगों को बहुत सकारात्मक तरीके से नहीं देखा जाता। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ डिनर के दौरान ट्रंप ने तीखे शब्दों में ममदानी को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ममदानी को अपने व्यवहार में सुधार लाना होगा वरना बड़ी परेशानियों में घिर जाएंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'ममदानी सोशलिस्ट नहीं है बल्कि कम्युनिस्ट है। उसने यहूदी लोगों के बारे में बहुत सी गलत बातें कही हैं। इसके अलावा बहुत से लोगों के बारे में कई गलत बातें कही हैं। मुझे लगता है कि अभी उसका हनीमून चल रहा है।' इसके आगे ट्रंप ने कहा कि ऐसा हमेशा नहीं चल सकता। उन्हें अपने व्यवहार में सुधार करना होगा या फिर वह कुछ बड़ी परेशानियों में घिर सकते हैं। ऐसा पहली बार नहीं है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने जोहरान ममदानी पर हमला बोला है। वह पहले भी कह चुके हैं कि ममदानी को अपने रुख में सुधार लाना होगा। इस बार नेतन्याहू के साथ बैठकर एक मेयर कैंडिडेट पर इस तरह निजी हमला करना और महत्वपूर्ण है। इससे पहले ट्रंप ने यह भी कहा था कि यदि जोहरान ममदानी मेयर बने और अपने रवैये में सुधार नहीं किया तो फिर न्यूयॉर्क सिटी के फंड में कटौती कर दी जाएगी। न्यूयॉर्क में नवंबर में मेयर का चुनाव होना है। यही नहीं ट्रंप ने तो यहां तक कहा था कि जोहरान ममदानी के पास शायद अमेरिका की नागरिकता भी नहीं है। वह देखेंगे कि अमेरिका में वह कानूनी रूप से हैं या फिर अवैध तौर पर यहां रह रहे हैं। ट्रंप ने कहा, 'ऐसे काफी लोग हैं, जो कहते हैं कि वह अवैध रूप से यहां हैं। हम हर चीज देख रहे हैं। उन्हें खुद को कम्युनिस्ट पहचान से अलग होना होगा, लेकिन फिलहाल वह एक कम्युनिस्ट हैं।' बता दें कि 1 जुलाई को जोहरान ममदानी ने मेयर चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में जीत हासिल की है। अब उनका मुकाबला एरिक एडम्स से होगा। नवंबर में न्यूयॉर्क सिटी का चुनाव होगा और जोहरान ममदानी पहले ऐसे मुस्लिम नेता हैं, जो मेयर चुनाव में उतरे हैं।  

राजभवन में गुलाब की विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन होगा दोगुना

वर्ल्ड रोज कन्वेंशन 2028 वैश्विक संवाद और आतिथ्य का अभूतपूर्व अवसर : राज्यपाल आयोजन, विश्व स्तर पर भारत की बढ़ती साख का प्रतिफल: राज्यपाल मंगुभाई पटेल राजभवन में गुलाब की विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन होगा दोगुना भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्ल्ड रोज कन्वेंशन 2028 का भोपाल में आयोजन, भारत के लिए ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण है। यह आयोजन विश्व स्तर पर भारत की बढ़ती साख का प्रतिफल है। भारत को विश्वगुरू के रूप में स्थापित करने की ओर बढ़ा कदम है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल 21वें वर्ल्ड रोज कन्वेंशन- 2028 संबंधी बैठक को संबोधित कर रहे थें। इस अवसर पर उन्होंने मध्यप्रदेश रोज सोसायटी के मुख्य संरक्षक के रूप में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी द्वारा भारत को 2028 के आयोजन की मेजबानी के लिए मई 2025 में सौंपे गए ध्वज को ग्रहण किया। कन्वेंशन का आयोजन भोपाल में वर्ष 2028 में 7 से 13 जनवरी तक होगा। बैठक का आयोजन राजभवन के सांदीपनि सभागार में इण्डियन रोज फेडरेशन के तत्वावधान में मध्यप्रदेश रोज सोसायटी द्वारा किया गया था। राज्यपाल पटेल ने कहा कि वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी के ध्वज को ग्रहण करना देश और प्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का पल है। यह ध्वज 2028 के ऐतिहासिक आयोजन के गौरवपूर्ण कार्यक्रम की जिम्मेदारी, वैश्विक संवाद और आतिथ्य के अभूतपूर्व अवसर का प्रतीक है। राज्यपाल पटेल ने वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी द्वारा भारत को पहली बार आयोजन की जिम्मेदारी सौंपने के लिए आभार ज्ञापित किया। उन्होंने वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी के पहले भारतीय अध्यक्ष बनने पर सुशील प्रकाश को सम्मानित किया। इण्डियन रोज फेडरेशन और मध्यप्रदेश रोज सोसायटी को आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्ल्ड रोज कन्वेंशन 2028 का मध्यप्रदेश के भोपाल में आयोजन, प्रदेश को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाएगा। आयोजन की मेजबानी सम्पूर्ण मध्यप्रदेश और भोपाल शहर के लिए हर्ष और गर्व का विषय है। आयोजन के लिए रोज सोसायटी द्वारा भोपाल को रोज सिटी के रुप में विकसित करने की जानकारी पर राज्यपाल पटेल ने राजभवन में गुलाब की विभिन्न प्रजातियों के वर्तमान उत्पादन को दोगुना करने की पहल करने के लिए कहा है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि गुलाब धार्मिकता और पर्वित्रता का प्रतीक है। यह आत्मीयता और सहृदयता की पहचान है। उन्होंने कहा कि हम सभी आयोजन से जुड़े प्रत्येक कार्य और जिम्मेदारियों को भव्यता और दिव्यता के साथ सम्पन्न करने का संकल्प ले ताकि यह आयोजन दुनियां भर के प्रतिनिधियों के मन में प्रेरणादायी और यादगार अनुभव के रूप में अंकित हो। राज्यपाल पटेल ने मध्यप्रदेश और भोपाल के गुलाब प्रेमियों से आयोजन को सफल बनाने में सहयोग की अपील भी की। बैठक में संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि वर्ल्ड रोज कन्वेंशन 2028 का आयोजन मध्यप्रदेश टूरिज्म को बढ़ाने में भी मददगार होगा। पर्यटन विभाग द्वारा मेहमानों को मध्यप्रदेश दर्शन कराने की योजना भी तैयार की जाएगी। उन्होंने मध्यप्रदेश में इस आयोजन के लिए वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी को धन्यवाद ज्ञापित किया। संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी का स्वागत उच्च शिक्षा, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल का पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. शिवशेखर शुक्ला ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया और परिचयात्मक उद्बोधन दिया।बैठक में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ रोज सोसायटी के अध्यक्ष सुशील प्रकाश ने वर्ल्ड रोज कन्वेंशन 2028 की तैयारी, योजना आदि पर आधारित पी.पी.टी. प्रस्तुतिकरण दिया। आभार मध्यप्रदेश रोज सोसायटी के अध्यक्ष एस.एस. गर्दे ने व्यक्त किया।    

जनगणना के लिए घर-घर जाने वाले कर्मचारी भी मोबाइल से ही डेटा जुटाएंगे और उसे रियलटाइम अपलोड करेँगे

नई दिल्ली भारत में हर 10 साल पर जनगणना की परंपरा रही है, लेकिन इस बार 16 साल के लंबे गैप के बाद 2027 में जनगणना शुरू होगी। यह जनगणना भले ही देर से आई है, लेकिन इसके प्रावधान पहले के मुकाबले काफी दुरुस्त हैं। इनमें से एक प्रावधान यह है कि लोग अपने घर से ही ऑनलाइन माध्यम से जनगणना पोर्टल पर अपनी जानकारी दे सकेंगे। इस संबंध में जल्दी ही एक पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। इस पोर्टल पर लोग अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। फिर अपने और परिवार के बारे में पूरी जानकारी दे सकेंगे। यहीं पर लोग जनगणना में शामिल सभी सवालों के जवाब भर के सबमिट कर देंगे तो यह जानकारी दर्ज हो जाएगी। इसके माध्यम से ऐसे लोगों की शिकायतें दूर हो जाएंगी, जो अकसर कहते हैं कि जनगणना वाले तो उनके घर तक आए ही नहीं। ऐसे में जनगणना में शामिल कर्मचारियों का इंतजार किए बिना ही लोग अपने बारे में जानकारी भर सकेंगे। यही नहीं जनगणना के लिए घर-घर जाने वाले कर्मचारी भी मोबाइल से ही डेटा जुटाएंगे और उसे रियलटाइम अपलोड कर देंगे। सरकार का कहना है कि इससे डेटा हासिल करने में आसानी होगी और उसका विश्लेषण भी जल्दी ही किया जा सकेगा। जनगणना का पूरा डेटा जल्दी उपलब्ध होगा। इसके अलावा अलग-अलग मानकों पर उसका विश्लेषण भी किया जा सकेगा। सूत्रों का कहना है कि जनगणना के लिए रजिस्ट्रेशन कमोबेश ऐसे ही होगा, जैसे वोटर आईडी बनवाने के लिए ऑनलाइन सुविधा है। संभावना है कि इसे आधार कार्ड से भी जोड़ा जा सकता है। पोर्टल पर पहले लोगों को रजिस्ट्रेशन करके प्रोफाइल बनानी होगी। इसके बाद जनगणना के लिए दिए गए फॉर्म में पूरी डिटेल भरकर सबमिट करना होगा। यही नहीं यह सुविधा भी दो चरणों में मिलेगी। दोनों राउंड में जानकारी देने का रहेगा विकल्प पहले राउंड में हाउस लिस्टिंग होगी। पहले उसके संबंध में लोग जानकारी दे सकेंगे। इसके बाद दोबारा जनगणना के दौरान अपने और परिवार के बारे में डिटेल दे सकेंगे। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब देश भर में जाति जनगणना कराई जाएगी।

पुजारी को मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता, केवल पूजा और प्रबंधन का होता है अधिकार: हाईकोर्ट

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मंदिर की संपत्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि पुजारी को मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पुजारी केवल देवता की पूजा करने और मंदिर का सीमित प्रबंधन करने के लिए नियुक्त एक प्रतिनिधि होता है, न कि स्वामी। बता दें कि यह फैसला जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने उस याचिका पर सुनाया, जो धमतरी जिले के श्री विंध्यवासिनी मां बिलाईमाता मंदिर के पुजारी परिषद अध्यक्ष मुरली मनोहर शर्मा ने दायर की थी। शर्मा ने राजस्व मंडल, बिलासपुर के 3 अक्टूबर 2015 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी। विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुरली मनोहर शर्मा ने तहसीलदार के समक्ष आवेदन देकर अपना नाम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की थी। तहसीलदार ने उनके पक्ष में आदेश जारी किया, लेकिन एसडीओ ने इस आदेश को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ शर्मा ने अपर आयुक्त रायपुर के समक्ष अपील की, जो खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह दलील दी कि तहसीलदार का आदेश न्यायोचित था और अन्य अधिकारियों ने मामले की सही समीक्षा नहीं की। हाईकोर्ट की टिप्पणी हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि विंध्यवासिनी मंदिर ट्रस्ट समिति 23 जनवरी 1974 से विधिवत पंजीकृत संस्था है और वही मंदिर की संपत्ति का वैधानिक प्रबंधन करती है। कोर्ट ने 21 सितंबर 1989 को सिविल जज, वर्ग-2, धमतरी द्वारा पारित एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ट्रस्ट समिति ट्रस्ट की संपत्ति की देखरेख के लिए किसी भी व्यक्ति को प्रबंधक नियुक्त कर सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उस व्यक्ति को संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त हो गया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पुजारी एक “ग्राही” यानी धारक होता है, जो मंदिर की पूजा संबंधी गतिविधियों के लिए नियुक्त होता है। यदि वह अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता, तो यह अधिकार वापस भी लिया जा सकता है। इसलिए पुजारी को मंदिर की भूमि या संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता। यह निर्णय उन मामलों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है जहां मंदिर की संपत्ति को लेकर पुजारियों और ट्रस्ट के बीच विवाद खड़े होते हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक सेवा का अधिकार और मालिकाना हक अलग-अलग बातें हैं और पुजारी केवल सेवा के लिए नियुक्त व्यक्ति है, स्वामी नहीं।

कोरबा में वाटरफॉल में फंसे 5 युवक-युवतियों का सफल रेस्क्यू, सेल्फी-पॉइंट पर मौजूद थे, अचानक बढ़ा जलस्तर

कोरबा  छत्तीसगढ़ में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश से आफत बढ़ती ही जा रही है। हालांकि इस पानी से गर्मी-उमस से भी राहत मिली है। कोरबा जिले में तेज पानी गिर रहा है। है। कोरबा के पाली में पिछले 24 घंटे के दौरान 260 मिमी बारिश हुई। यानी हर घंटे करीब 11 मिमी की औसत से बारिश हुई। कई जगहों पर भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इस बीच, घूमने के लिए देवपहरी पहुंचा 5 दोस्तों का ग्रुप जलस्तर बढ़ने से टापू पर फंस गया। 5 दोस्तों का ग्रुप बारिश का नजारा देखने देवपहरी के गोविंदझुंझा जलप्रताप पहुंचा था। इनमें तीन युवती और दो युवक शामिल हैं।  जलप्रताप में बारिश के दौरान नजारा मनमोहक होने से दोस्तों का ग्रुप आगे टापू की ओर चला गया, जहां फोटो और सेल्फी लेने के बाद लौट रहे थे, तभी ऊपर से पहाड़ी की ओर से बारिश का पानी तेजी से पहुंचा। वे सभी जलस्तर बढ़ने से टापू पर बने गुंबद में पहुंचे। चारों ओर तेज पानी का बहाव होने से वे फंस गए हैं। दूसरी ओर, अमरकंटक से लौटते वक्त पेंड्रा इलाके में सजहा नाले के तेज बहाव में एक कार बह गई। इसमें नर्स प्रीति यादव, उनके पति चंद्रशेखर यादव और दो बच्चे सवार थे। हादसे में चारों की मौत हो गई। घटना किरर टोल प्लाजा के पास हुई, जहां पुल पर तेज पानी होने के बावजूद कार को पार कराने की कोशिश की गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस के पार होते देख चंद्रशेखर ने भी कार बढ़ा दी, जो तेज बहाव में बह गई। सोमवार को शव बरामद कर लिया गया है। मप्र के मंत्री दिलीप जायसवाल ने परिजन को सांत्वना दी और 25-25 हजार रुपए की सहायता घोषित की। वहीं, रतनपुर से केंवची के रास्ते में मझवानी गांव के पास पुल के ऊपर से पानी बहता हुआ देखने के बावजूद पार करने की कोशिश में कोयला लोड ट्रक बह गया। हालांकि सड़क के दूसरी छोर पर मौजूद लोगाें ने ड्राइवर को बचा लिया। बारिश के कारण धमतरी जिले में सोंढूर नदी उफान पर है। इससे घोरागांव, छोटे गोबरा, दौड़ पंडरीपानी, समेत 15 गांव जिला मुख्यालय से कट गए। वहीं मगरलोड मार्ग पर महानदी पर मेघा एनीकट के पास निर्माणाधीन पुल से लगकर 50 गांव की आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाया गया था, जो बह गया। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक तेज बारिश होगी। 9 जुलाई के बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। मंगलवार को भी प्रदेश के बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग में कहीं-कहीं पर भारी बारिश की संभावना है। लगातार हो रही बारिश से 15 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। भिलाई में भी रविवार की रात से सोमवार सुबह 10 बजे तक दुर्ग- भिलाई में तेज बारिश होने से ट्विनसिटी के अलावा रिसाली और भिलाई-तीन चरोदा नगर निगम क्षेत्र की बहुत सी निचली बस्तियों में पानी भर गया। अभी तक इतनी हो चुकी है बारिश रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई शहरों में पिछले 24 घंटे से हो रही भारी बारिश के कारण छत्तीसगढ़ में अब तक की बारिश सामान्य से ऊपर हो गई है। 7 जुलाई तक पूरे प्रदेश में 306 मिमी पानी गिर चुका है, जबकि औसत 271.9 मिमी है। यानी औसत से 13 फीसदी ज्यादा पानी गिर चुका है। उत्तरी और मध्य छत्तीसगढ़ में पिछले दो-तीन दिनों से हो रही तेज बारिश के कारण 7 जुलाई तक का कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। कोरबा के पाली में पिछले 24 घंटे के दौरान 260 मिमी बारिश हुई। यानी हर घंटे करीब 11 मिमी की औसत से बारिश हुई। कई जगहों पर भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई।  

कवर्धा जिले में सरकारी कार्यालयों में अनुशासन की नई मिसाल कायम हुई, देर से ऑफिस पहुंचने वाले कर्मचारियों को सबक सिखाया

कवर्धा  छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सरकारी कार्यालयों में अनुशासन की नई मिसाल कायम हुई है। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने देर से ऑफिस पहुंचने वाले कर्मचारियों को ऐसा सबक सिखाया कि अब शायद ही कोई समय पर न आए। जिला पंचायत कार्यालय के मुख्य द्वार पर हाजिरी रजिस्टर लेकर खुद बैठ गए कलेक्टर साहब और जो भी लेटलतीफ कर्मचारी दिखा, उससे कान पकड़वाकर उठक-बैठक कराई। इस अनोखे दृश्य का वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। गेट पर कलेक्टर, हाथ में रजिस्टर गुरुवार सुबह कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जिला पंचायत कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। सुबह 10 बजे के बाद भी कई कर्मचारी अपनी कुर्सियों पर नदारद थे। बस फिर क्या, कलेक्टर ने कुर्सी जमा ली और कार्यालय के मुख्य द्वार पर डेरा डाल दिया। कलेक्टर ने देरी से दफ्तर पहुंचने वाले कर्मचारियों की क्लास लगा दी। उन्होंने कर्मचारियों को कान पकड़कर माफी मांगने और उठक-बैठक करने को कहा गया। क्यों सख्त हुए कलेक्टर साहब? कवर्धा में सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की समयबद्धता पर सवाल उठते रहे हैं। पंचिंग मशीन के बावजूद कई कर्मचरारी समय पर नहीं पहुंचते, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। कलेक्टर ने कहा, 'जनता के लिए काम समय पर हो, यह सुनिश्चित करना हमारा फर्ज है। अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी।' इस कार्रवाई के बाद कर्मचारियों ने भविष्य में समय पर आने का वचन दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। कुछ लोग कलेक्टर की तारीफ कर रहे हैं, कह रहे हैं कि ऐसी सख्ती जरूरी थी।

रेल यात्रियों की बढ़ी मुसीबत, रेलवे ने CG से होकर चलने वाली 16 ट्रेनों को किया रदद्, 16 अगस्त से 24 दिन तक नहीं चलेंगी गाड़ियां

रायपुर  छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने वाली 16 ट्रेनों को भारतीय रेलवे ने कैंसिल कर दिया है, यह ट्रेनें अगस्त और सितंबर के पूरे महीने में नहीं चलेगी, ऐसे में यहां से गुजरने वाले यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. बताया जा रहा है कि यह गाड़ियां अगले आदेश बदले हुए रूट से चलाई जाएगी, जबकि कुछ ट्रेनों की दूरी को शॉर्ट कर दिया गया है. बिलासपुर रेलवे जोन पर चक्रधरपुर मंडल के झारसुगड़ा यार्ड में नॉन इंटरलॉकिंग का काम शुरू होना है, यह काम 16 अगस्त से 10 सितंबर के बीच चलेगा, जिससे यहां ट्रैफिक पूरी तरह से ब्लॉक रहेगा, यही वजह है कि एक साथ इतनी ट्रेनों को कैंसिल किया गया है.  छत्तीसगढ़ के यात्री होंगे परेशान  दरअसल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात और तेलंगाना की तरफ जाने वाली ज्यादातर गाड़ियां प्रभावित हुई है, जिससे यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, 24 दिनों तक होने वाले नॉन इंटरलॉकिंग काम की वजह से यात्री ट्रेनों को कैंसिल कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि रेलवे अगले आदेश तक इन ट्रेनों को कैंसिल रखेगा. हालांकि ट्रेनों के संचालन की प्रक्रिया दोबारा से शुरू होने की जानकारी तुरंत ही दी जाएगी.  छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली यह ट्रेनें कैंसिल      एनएससीबी इतवारी-टाटा एक्सप्रेस 5 से 10 सितंबर के बीच कैंसिल रहेगी.      एनएससीबी इतवारी-टाटा एक्सप्रेस 19 से 21 अगस्त और 24 अगस्त से 2 सितंबर के बीच भी नहीं चलेगी.      गाड़ी संख्या 17007 चर्लापल्ली-दरभंगा एक्सप्रेस 26 अगस्त से 9 सितंबर के बीच नहीं चलेगी.      चर्लापल्ली-दरभंगा एक्सप्रेस 29 अगस्त से 12 सितंबर के बीच भी कैंसिल रहेगी.       हैदराबाद-रक्सौल गाड़ी संख्या 17005 भी 31 अगस्त को नहीं चलेगी.      रक्सौल-हैदराबाद गाड़ी संख्या 17006 भी 30 अगस्त को संचालित नहीं होगी.      रक्सौल-चर्लापल्ली एक्सप्रेस भी 1 और 4 सिंतबर को कैंसिल रहेगी.      नांदेड़-संतरागाछी एक्सप्रेस 8 और 10 सितंबर को संचालित नहीं होगी.      मालदाटाउन-सूरत एक्सप्रेस भी 6 और 8 सितंबर को नहीं चलेगी.      संतरागाछी-पुणे एक्सप्रेस भी 6 और 8 सितंबर को संचालित नहीं होगी.  फिलहाल भारतीय रेलवे की तरफ से इन ट्रेनों को लेकर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई है, ऐसे में जिन यात्रियों ने पहले से ही इन ट्रेनों में रिजर्वेशन करवा लिया था, उन्हें क्या व्यवस्था मिलेगी, इसकी जानकारी जल्द ही रेलवे की तरफ से दी जाएगी या फिर यात्रियों को पैसा रिफंड किया जाएगा. हालांकि यात्रियों को रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट को विजिट करते रहना चाहिए. क्योंकि किसी भी अपडेट की जानकारी सबसे पहले यही जारी की जाएगी. इन ट्रेनों के कैंसिल होने से छत्तीसगढ़ में भी लंबी दूरी की यात्रा तय करने वाले रेलवे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.