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मुखर्जी नगर में छात्रों के बीच पहुंचीं CM रेखा गुप्ता, मुफ्त लाइब्रेरी से लेकर महिला सुरक्षा तक दिए निर्देश

नई दिल्ली प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स की समस्याएं जानने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने  मुखर्जी नगर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वह चाय की दुकान पर स्टूडेंट्स के बीच बैठीं और उनसे पढ़ाई, आवास, महिला सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बातचीत की। स्टूडेंट्स ने मुफ्त लाइब्रेरी की कमी, पीजी के महंगे किराए, खराब सफाई व्यवस्था और पानी की क्वॉलिटी से जुड़ी समस्याएं उठाईं। सीएम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को इन समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए। फ्री लाइब्रेरी और सुरक्षा का मुद्दा उठा, सुनीं परेशानियां सीएम ने लंबे समय से बंद पड़े शौचालय को पिंक टॉयलेट के रूप में विकसित करने और नए शौचालयों का निर्माण कराने को कहा। उन्होंने मुखर्जी नगर, नेहरू विहार और पास की कॉलोनियों की गलियों में नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। PG के किराए और पानी की गुणवत्ता पर भी चर्चा मुख्यमंत्री ने स्टूडेंट्स से उनके रहने के इंतजाम और रोजमर्रा की परेशानियों के बारे में जानकारी ली। स्टूडेंट्स ने बताया कि मुखर्जी नगर जैसे कोचिंग हब में PG का किराया काफी अधिक है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं पर आर्थिक दबाव पड़ता है। उन्होंने पढ़ाई के लिए मुफ्त लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत भी बताई। इसके अलावा, इलाके में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई। सीएम ने संबंधित अधिकारियों को इन समस्याओं पर ध्यान देने और जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। महिला सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर जोर मुखर्जी नगर में बड़ी संख्या में छात्राएं भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आती हैं। ऐसे में महिला सुरक्षा, साफ-सफाई और सार्वजनिक शौचालयों की उपलब्धता अहम मुद्दे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इलाके में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने और समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा। बंद पड़े शौचालय को पिंक टॉयलेट के रूप में विकसित करने और नए शौचालय बनाने के निर्देश भी इसी दिशा में दिए गए। साथ ही, मुखर्जी नगर, नेहरू विहार और आसपास की कॉलोनियों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने पर जोर दिया गया। भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग को मिलेगी राहत, नागौर से सस्ता लिग्नाइट मिलने का रास्ता साफ

राजस्थान में कोयले की महंगाई से राहत की उम्मीद, नागौर लिग्नाइट माइंस दोबारा होंगी शुरू

भीलवाड़ा देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब भीलवाड़ा का कपड़ा प्रोसेस उद्योग इन दिनों ईंधन की आसमान छूती कीमतों और घटती उपलब्धता के चलते गहरे संकट में घिर गया है। उत्पादन लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी से वैश्विक और घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। इसी बीच, नागौर स्थित राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएम) की लिग्नाइट माइंस की नीलामी होने के बावजूद अनुमतियों के नवीनीकरण में देरी के कारण संचालन ठप हो गया। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए नागौर लिग्नाइट माइंस को तत्काल प्रभाव से दोबारा शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। इससे संकट से जूझ रहे कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। कागजी अड़चनों की भेंट चढ़ी नीलामी, आपूर्ति रुकते ही उछले दाम नागौर स्थित आरएसएमएम की लिग्नाइट माइंस की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन संबंधित दस्तावेजों और पर्यावरणीय एवं प्रशासनिक अनुमतियों का समय पर नवीनीकरण नहीं कराया गया। यदि समय रहते आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली जाती, तो माइंस के संचालन में यह गतिरोध उत्पन्न नहीं होता। माइंस बंद होते ही बाजार में स्थानीय लिग्नाइट की किल्लत पैदा हो गई और उपलब्ध विकल्पों की कीमतों में भारी उछाल आ गया। आयातित कोयले की किल्लत, बीकानेर पर बढ़ा पूरा दारोमदार वर्तमान में भीलवाड़ा के कपड़ा प्रोसेस उद्योगों में ऊर्जा की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से घरेलू कोयले और बीकानेर से आने वाले लिग्नाइट पर निर्भरता है। वहीं, इंडोनेशिया से आयात होने वाले कोयले की आपूर्ति वैश्विक कारणों से बुरी तरह प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कमी और स्थानीय स्तर पर नागौर से आपूर्ति ठप होने के कारण उपलब्ध कोयले के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसका सीधा वित्तीय भार प्रोसेस हाउसों पर पड़ रहा है। वस्त्र नगरी के लिए संजीवनी बनेगी नागौर माइंस व्यापारियों का मानना है कि नागौर की आरएसएमएम लिग्नाइट माइंस का दोबारा संचालन भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होगा। नागौर से भीलवाड़ा की भौगोलिक दूरी कम होने के कारण परिवहन पर होने वाले भारी खर्च में कटौती होगी। भीलवाड़ा के उद्यमियों को ऐसे मिलेगी राहत भीलवाड़ा में प्रतिमाह लगभग 75 हजार टन कोयले और लिग्नाइट की खपत होती है। वर्तमान में बीकानेर से आने वाले लिग्नाइट, घरेलू कोयले और इंडोनेशिया से आयातित कोयले की कीमत 8,500 से 12,000 रुपए प्रति टन है। वहीं, नागौर के लिग्नाइट की कीमत मात्र 6,000 रुपए प्रति टन बताई जा रही है। ऐसे में यदि उद्यमियों को प्रतिमाह लगभग 50 हजार टन लिग्नाइट नागौर से मिलने लगे, तो भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत मिल सकती है और उत्पादन लागत में कमी आएगी। लघु उद्योग भारती ने उठाया मुद्दा लघु उद्योग भारती ने संगठन के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री प्रकाश चंद्र के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से विशेष आग्रह कर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने उद्योगों के हित में संवेदनशीलता दिखाते हुए नागौर माइंस को तत्काल शुरू कराने के प्रशासनिक निर्देश जारी किए हैं। — रवीन्द्र जाजू, संयुक्त सचिव, राजस्थान प्रदेश, लघु उद्योग भारती

चुनाव आयोग का बड़ा कदम, मतदाता सूची से नाम हटाने के नियम सख्त; अब इन बातों का रखना होगा ध्यान

चंडीगढ़ मतदाता सूची से किसी का नाम हटवाने के लिए अब मनमाने ढंग से बड़ी संख्या में आवेदन नहीं किए जा सकेंगे। भारत निर्वाचन आयोग ने फार्म-7 के जरिए दर्ज कराई जाने वाली आपत्तियों की संख्या तय कर दी है। इस कदम का उद्देश्य बिना ठोस आधार सामूहिक आपत्तियां दर्ज कराने पर रोक लगाना और मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाना है। नए निर्देश ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से दिए जाने वाले आवेदनों पर लागू होंगे। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास और संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजकुमार लोहाना ने आयोग के निर्देशों की जानकारी दी। नई मतदाता सूचियों का प्रकाशन छह नवंबर को होगा। अभी तक करीब 34 लाख मतदाताओं के नाम पुरानी मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं, जो मौजूद नहीं हैं। राज्य में पिछली मतदाता सूचियों के आधार पर दो करोड़ छह लाख से अधिक मतदाता थे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, फार्म-7 के जरिए मतदाता सूची में दर्ज किसी व्यक्ति के नाम पर आपत्ति जताई जा सकती है या नाम हटाने की मांग की जा सकती है। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने या संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में दर्ज रहने की पात्रता न होने पर निर्धारित आधार और प्रक्रिया के तहत आपत्ति दी जा सकती है। आयोग के निर्देशों के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जोड़ने से जुड़े दावे-आपत्तियों की निर्धारित अवधि में एक मतदाता अधिकतम 10 फार्म-7 आवेदन दे सकेगा। सूची के सामान्य अद्यतन के दौरान यह सीमा हर महीने पांच आवेदन होगी। फार्म वही व्यक्ति भर सकता है, जिसका नाम संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज है।  

उत्तर-पूर्व दिशा में इन चीजों को रखने से बचें, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को बहुत ही शुभ मानते हैं। जानें यहां पर किन चीजों को रखने से बचना चाहिए?  ईशान कोण में क्या ना रखें? वास्तु शास्त्र में कुछ दिशाओं को बहुत ही शुभ माना जाता है और इन्हीं में से एक है ईशान कोण। शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ही ईशान कोण कहा जाता है। इस दिशा को बहुत ही खास मानते हैं और यहां पर कुछ चीजों को रखने से बचने की सलाह दी जाती है। जानें ये दिशाएं कौन सी हैं? सबसे पवित्र कोना है ईशान कोण शास्त्र के अनुसार घर के उत्तर और पूर्व दिशा के बीच वाले कोने को ही ईशान कोण कहते हैं। मान्यता है कि यहां पर सबसे ज्यादा पॉजिटिव एनर्जी रहती है। इस दिशा में पूजा करना और ध्यान वगैरह लगाना बहुत ही खास माना जाता है। ऐसे में इस दिशा को हमेशा खुला, साफ और हल्का रखने की कोशिश करनी चाहिए। ईशान कोण में ना रखें भारी सामा ईशान कोण की ओर आप भूलकर भी कोई भारी सामान ना रखें। इस दिशा में अलमारी, बेड, सोफा या फिर लोहे का कोई भी भारी सामान रखने से बचें। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो घर में वास्तु दोष लगने का डर होगा। उत्तर-पूर्व दिशा में ना रखें जूते-चप्पल नियम के अनुसार घर की इस दिशा में कोई भी ऐसा सामान या चीज ना रखें जिससे गंदगी हो। यहां पर जूते-चप्पल ना निकालें। इसके अलावा कूड़ेदान रखने से भी बचें। आप इस दिशा को जितना साफ रखेंगे उतना ही अच्छा होगा और इससे घर का माहौल भी अच्छा बनेगा। ईशान कोण में ना बनवाएं ये 2 चीजें वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण की ओर कभी भी किचन ना बनवाएं। यहां पर बाथरूम भी बनवाना सही नहीं मानते हैं। अगर इस दिशा में ये गलती की जाए तो कई काम में बाधाएं आनी शुरू हो सकती है। ऐसे में घर बनवाते समय इन बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए। सफाई से जुड़ी चीजें ना रखें ईशान कोण में कभी भी सफाई से जुड़ी चीजें जैसे झाड़ू या फिर पोछा वगैरह रखने से बचें। वास्तु मान्यता के हिसाब से ईशान कोण वाला कोना पवित्र होता है तो ऐसे में यहां पर इन चीजों को रखने से बचना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि ये जगह हल्की और खाली ही रहे। ईशान कोण में क्या रखें? अब सवाल ये है कि आखिर ईशान कोण की साइड कौन सी चीजें रख सकते हैं? वास्तु नियम के हिसाब से यहां पर पानी से भरा कटोरा रख सकते हैं जिसे उरली भी कहा जाता है। आप हर सुबह इसका पानी बदलकर इसमें फूल डाल सकते हैं। इसके अलावा इस दिशा में तुलसी का पौधा रखना भी शुभ होता है।    

पंजाब में नशा तस्करी का मामला, तरनतारन बॉर्डर से नशीले पदार्थों के साथ पुलिसकर्मी गिरफ्तार

चंडीगढ़. पंजाब के तरन तारन जिले में नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पंजाब पुलिस के एक कांस्टेबल को 15 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया है. आरोपी की पहचान करनदीप सिंह के रूप में हुई है. वह भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे खालड़ा इलाके में एंटी-ड्रोन ड्यूटी पर तैनात था. वहां उसकी तैनाती का मकसद सीमा पार से ड्रोन के जरिए होने वाली नशे की तस्करी पर नजर रखना था. इस मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की. तरन तारन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सुरिंदर लांबा ने आजतक/इंडिया टुडे से बातचीत में कांस्टेबल की गिरफ्तारी और 15 किलो हेरोइन की बरामदगी की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि आरोपी कांस्टेबल एंटी-ड्रोन ड्यूटी पर तैनात था और जब्ती के समय वह ड्यूटी पर नहीं था. हालांकि, पुलिस अधिकारी ने मामले में आगे की जांच किए जाने की बात कही है. फिलहाल, आरोपी के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है. जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे तरन तारन के सीमावर्ती क्षेत्र में की गई. ऑपरेशन में NCB और BSF की टीमें शामिल थीं. आरोपी के पास से कुल 15 किलोग्राम हेरोइन बरामद होने की जानकारी दी गई है. हालांकि, बरामदगी के सटीक स्थान, कार्रवाई के पूरे घटनाक्रम और आरोपी के कथित नेटवर्क के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि बरामद हेरोइन कहां से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। साथ ही, इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति या तस्करी नेटवर्क की भूमिका होने की आशंका की भी जांच की जा सकती है. फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी और हेरोइन की बरामदगी की पुष्टि हुई है. जांच के नतीजे और आगे की कानूनी कार्रवाई से मामले की पूरी तस्वीर साफ होगी.

पटवारियों की हड़ताल से राजनांदगांव में कामकाज प्रभावित, राजस्व सेवाओं पर असर

राजनांदगांव. पटवारियों की हड़ताल के चलते राजस्व विभाग से जुड़े विभिन्न कार्य प्रभावित हो रहे हैं। दो दिनों से यही स्थिति देखने को मिल रही है। तहसील कार्यालयों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। हड़ताल के कारण फसलों का भौतिक सत्यापन का काम भी नहीं हो पा रहा है, जिससे किसनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर किसान पंजीयन तथा जमीन संबंधी कार्यों तक पर इसका असर देखने को मिल रहा है। इसके साथ-साथ अन्य कार्यों पर भी असर पड़ने लगा है। राजनांदगांव जिले में भी छत्तीसगढ़ राजस्व संघ के आह्वान पर पटवारी हड़ताल पर चले गए हैं। पटवारी राजस्व व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जमीन के रिकॉर्ड, सीमांकन से जुड़ी प्रक्रिया, भूमि संबंधी रिपोर्ट और विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए आवश्यक सत्यापन में उनकी भूमिका रहती है। ऐसे में उनके हड़ताल पर रहने से संबंधित प्रक्रियाओं में देरी हो रही है। इसका असर विद्यार्थियों, किसानों और जमीन संबंधी काम कराने वाले नागरिकों पर पड़ रहा है। दो दिनों से शहर तथा जिले में यही स्थिति देखने को मिल रही है। पीवी ऐप की समस्याओं को लेकर आंदोलन छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 13 अक्टूबर से शुरू हुई है। पटवारी संघ का कहना है कि फसल के भौतिक सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पीवी ऐप में तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। हड़ताल का असर आगामी धान खरीदी की तैयारियों पर भी पड़ने की आशंका है। किसान पंजीयन और फसल सत्यापन में देरी होने से किसानों को परेशानी हो सकती है। वहीं आय और जाति प्रमाण पत्र की जरूरत वाले विद्यार्थियों तथा अन्य आवेदकों को भी इंतजार करना पड़ सकता है। 

वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट हुए 35 गांवों के आदिवासी, जमीन के दस्तावेज लेकर भोपाल आएंगे

भोपाल  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लोकसभा क्षेत्र में आने वाले 35 गांवों के आदिवासी इकट्‌ठा होकर भोपाल आ रहे हैं। वे यहां मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलेंगे। उन्हें वन विभाग की कार्रवाई के संबंध में बताएंगे। वे कब्जे की जमीन के दस्तावेज भी दिखाएंगे। वन विभाग ने पिछले दिनों सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ दिए थे। कुएं को मिट्टी से भर दिया था।इसके बाद शिवराज ​सिंह चौहान भी कोसमी पहुंचे थे। वन विभाग की कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने अपनी सरकार के खिलाफ धरना भी दिया था। अधिकारियों-कर्मचारियों को हटाए, कार्रवाई करें गांव में तीन दिन से आंदोलन चल रहा है। इसमें शामिल रमेश बारेला ने बताया कि धरने का तीसरा दिन है। उनकी प्रमुख मांग है कि कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों को तत्काल हटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। वर्षों से जिस जमीन पर कुआं बनाकर खेती कर रहे थे, उस जमीन का वैध अधिकार यानी पट्टा दिया जाए। प्रभावित परिवारों के रहने, भोजन और स्वास्थ्य की व्यवस्था करने के साथ फसलों के नुकसान का मुआवजा दिया जाए।बारेला ने कहा कि आदिवासी परिवार बाहर से आकर नहीं बसे। उसी वन क्षेत्र में रहते आए हैं, जहां उनके पूर्वज रहते थे। जंगल से उनकी आजीविका जुड़ी है। मकान टूटने से 12 परिवार बेघर हो गए हैं। 35 से अधिक गांवों में खेती रोकने का आरोप आदिवासी समाज का आरोप है कि खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों में जनजातीय किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। इससे परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। समाज ने इटावा खुर्द, जामुल झील पानी, पांगरी, छापरी, कोसमी, सनकोटा, नवलगांव, भीलखेड़ा, कुरी, बसंतपुर, लावापानी, बोरपानी, डोंगला पानी, बेड़ापानी, सिराली, बावड़ी खेड़ा, अमीरगंज, सुरई, खजूरी, आमाझिर, चतरकोटा, ठीकरी खेड़ा, यारनगर, मथार, भूरीटेक कावड़, ढाबा, पाट तलाई, भिलाई, मोगरा खेड़ा, भूराखेड़ा, सेवनिया, मंजाखेड़ी छाप, मोगली भुराट, गाडरीपुरा, झोलियापुरा और बीलपाटी समेत कई गांवों का उल्लेख किया है। खिवनी से विदिशा तक बेदखली की शिकायतें आदिवासी समाज ने खिवनी अभयारण्य, बुधनी के यार नगर और कोसमी के अलावा विदिशा जिले के ग्यारसपुर, मेहंदीपुर, डगरवाड़ा, बदनपुर, शमशाबाद, लटेरी और सिरोंज क्षेत्रों में भी जमीन से जुड़े विवादों और बेदखली की शिकायतें उठाई हैं। समाज का दावा है कि जून 2025 में खिवनी क्षेत्र में 50 से अधिक परिवारों के मकान तोड़े गए थे। यार नगर में 18 परिवारों के पट्टे अमान्य किए जाने की शिकायत भी सामने आई थी। वहीं विदिशा के ग्यारसपुर में करीब 115 लोगों की फसलें नष्ट किए जाने का आरोप लगाया गया है।आदिवासी समाज ने सभी मामलों की निष्पक्ष जांच, पुराने पट्टों और जमीन से जुड़े दस्तावेजों के परीक्षण तथा प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा की मांग की है।रमेश बारेला ने स्पष्ट किया कि कृषि मंत्री के पदयात्रा में शामिल होने की कोई जानकारी नहीं है। उनके मुताबिक, आदिवासी समाज के लोग ही पदयात्रा करेंगे। प्रशासन की जांच रिपोर्ट में कब्जे अवैध बताए दूसरी ओर वन विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित परिवारों ने गलत तरीके से वन भूमि पर कब्जा किया था। सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे जिलों से आए लोगों ने वन भूमि पर कब्जा कर सागौन के पौधे काटे और खेती के लिए झोपड़ियां बनाईं। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि सामान्य वन मंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी।वर्ष 2021 में निगम ने इसके 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3,37,500 सागौन के पौधे लगाए। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 78,700 पौधे काटकर 31.48 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया गया। गूगल अर्थ की तस्वीरों को बनाया आधार जांच रिपोर्ट में गूगल अर्थ की टाइम लाइन तस्वीरों को साक्ष्य के रूप में पेश किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 तक संबंधित वन भूमि खाली दिखाई दे रही थी, जबकि वर्ष 2022 से वहां झोपड़ियां बनाकर खेती के लिए कब्जा किए जाने के संकेत मिले। रिपोर्ट में सुनील (पिता शैतान) और अन्य 11 लोगों का उल्लेख है। भैंरोंदा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्रवाई के दौरान बेदखल किए गए सभी 9 कब्जा धारियों के मूल गांव सिंधपुर और हल्लीबन नगर में पहले से पक्के मकान, मकान नंबर और वोटर आईडी कार्ड दर्ज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 11 अक्टूबर को अतिक्रमण हटाने के दौरान 9 झोपड़ियां हटाकर संबंधित जमीन को मलबे से भर दिया गया। पूरी कार्रवाई की ड्रोन वीडियोग्राफी भी कराई गई। रिपोर्ट के अनुसार, भैंरोंदा तहसील के लाड़कुई परिक्षेत्र में कोसमी बीट स्थित रिजर्व फॉरेस्ट के कंपार्टमेंट 426 की 31.48 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। कार्रवाई के विरोध में वन विकास निगम के डिपो के बाहर तीन दिन से धरना-प्रदर्शन चल रहा है। अब आदिवासी समाज मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखने और जमीन से जुड़े दस्तावेज पेश करने के लिए भोपाल कूच की तैयारी में है।

Train Ticket Insurance: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद PRS सिस्टम में होगा बदलाव, जानें यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर

नई दिल्ली भारतीय रेलवे से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत बड़ा और राहत भरा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे को निर्देश दिया है कि ऑनलाइन टिकटों की तर्ज पर ही रेलवे रिजर्वेशन काउंटर से खरीदे जाने वाले ऑफलाइन टिकटों पर भी यात्रियों को अनिवार्य रूप से बीमा (Travel Insurance) कवर दिया जाए. कोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश से काउंटर से टिकट लेने वाले यात्रियों के साथ होने वाला कथित भेदभाव अब समाप्त हो गया है।  क्या है कोर्ट का निर्देश? सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया है कि आदेश के अनुपालन में आगामी 27 अक्टूबर से इस व्यवस्था को लागू किया जाए, ताकि काउंटर टिकट धारकों को भी यात्रा के दौरान समान सुरक्षा मिल सके।  अब तक ऑनलाइन (IRCTC के जरिए) टिकट बुक करने वाले यात्रियों को तो बीमा कवर मिल जाता था, लेकिन रेलवे काउंटर से टिकट खरीदने वाले यात्री, विशेषकर ग्रामीण इलाकों के लोग, बुजुर्ग, मजदूर और स्मार्टफोन या डिजिटल साक्षरता से दूर रहने वाले लोग इस सुविधा से वंचित रह जाते थे. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि टिकट खरीदने के माध्यम (ऑनलाइन या काउंटर) के आधार पर यात्रियों की जान की कीमत या सुरक्षा में अंतर नहीं किया जा सकता।  किसी दुर्घटना या अप्रिय घटना की स्थिति में काउंटर टिकट धारक के परिजनों को भी ऑनलाइन टिकट धारकों की तरह ही समान रूप से बीमा क्लेम और मुआवजा पाने का पूरा अधिकार होगा।  रेलवे और पीआरएस सॉफ्टवेयर में बदलाव सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद भारतीय रेलवे और पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को अपने सॉफ्टवेयर और टिकटिंग सिस्टम में जरूरी बदलाव करने होंगे, ताकि काउंटर से टिकट बुक करते समय भी यात्रियों को बीमा का विकल्प मिल सके. सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से देश के उन करोड़ों यात्रियों को बड़ी सुरक्षा मिलेगी जो आज भी लंबी लाइनों में लगकर पारंपरिक काउंटर टिकट खरीदते हैं।  इससे पहले 11 मई को केंद्र ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि ऑफलाइन टिकटों के लिए भी बीमा देने के सवाल पर फैसला लिया जा चुका है और तरीके तय किए जा रहे हैं. बेंच ने कहा कि सरकार ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी। 

नवरात्रि में कन्या पूजन को लेकर कन्फ्यूजन खत्म, 19 को अष्टमी और 20 अक्टूबर को नवमी; जानें मुहूर्त

Sharadiya Navratri:  शारदीय नवरात्रि में इस बार महाअष्टमी और नवमी को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है। बता दें कि महाअष्टमी और नवमी में कन्या पूजन किया जाता है। महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन करने और व्रत रखने का विधान है। जबकि महानवमी के दिन हवन करके व्रत का पारण किया जाता है। लेकिन, इस बार महानवमी और अष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच में थोड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है। जिस वजह से लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि कन्या पूजन रविवार में करें या सोमवार में करें। आइए जानते हैं ज्योतिष से किन दिन अष्टमी और नवमी मनाई जाएगी। महा अष्टमी और महानवमी 2026 कब ?  पंडित राकेश झा बताते हैं कि पंचांग की गणना के अनुसार, 18 तारीख को सुबह में 8 बजकर 29 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का संयोग बनेगा। जबकि 19 तारीख को 10 बजकर 52 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। ऐसे में 18 तारीख को उदय तिथि के अनुसार अष्टमी तिथि नहीं लगने की वजह से इस दिन को अष्टमी नहीं मान्य होगा और 19 तारीख को उदया तिथि में अष्टमी होने से 19 तारीख को ही अष्टमी से संबंधित पूजा विधान किया जाएगा और इसी दिन देवी को खोंचा अर्पित किया जाएगा। वहीं, 20 तारीख को उदय तिथि के साथ नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा और दोपहर में 12 बजकर 50 मिनट तक नवमी तिथि रहेगी। ऐसे में जो लोग नवमी तिथि को कन्या पूजन करते हैं वह 20 तारीख को सुबह में 12 बजकर 50 मिनट से पहले ही कन्या पूजन कर लें। बता दें कि तिथि और मुहूर्त का विवरण यहां पंचांग दिवाकर के अनुसार दिया गया है। हालांकि, अलग-अलग स्थान और परंपराओं के अनुसार, तिथि और पूजा का समय अलग-अलग हो सकता है ऐसे में अगर कोई कंफ्यूजन है तो अपने स्थानीय पुरोहित से पूछकर ही पूजा करें। अष्टमी और नवमी में किस देवी की पूजा की जाती है अष्टमी और नवमी में मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां महागौरी को पवित्रता, शांति और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मां महागौरी की पूरे विधि विधान से पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है। साथ ही मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से यश, बल, मोक्ष और धन की प्राप्ति होती है।

झारखंड में धान खरीद पर बड़ा फैसला जल्द, 50 लाख टन का लक्ष्य घटेगा; बिचौलियों पर सरकार की नजर

रांची झारखंड में इस वर्ष भी सरकारी संग्रह केंद्रों पर धान जमा करानेवाले किसानों को एडवांस में पैसे मिल जाएंगे। राज्य सरकार ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। दूसरी ओर, झारखंड में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य पूर्व निर्धारित लक्ष्य 50 लाख टन से कम किया जा सकता है। इस सप्ताह इस मसले पर राज्य सरकार निर्णय ले लेगी। लक्ष्य कितना कम होगा उसको लेकर मंत्री डाॅ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में निर्णय लिया जाएगा। समीक्षा बैठक इसी सप्ताह होने का अनुमान है। लक्ष्य कम करने के पीछे एक बड़ा कारण सिस्टम में घुस चुके बिचौलिए भी हैं। झारखंड में ऐसे लोग भी हैं जिनकी जमीन का काेई ठिकाना नहीं है लेकिन सैकड़ों क्विंटल धान बेच चुके हैं। इन अनुभवों और केंद्र के निर्देश को आत्मसात करते हुए इस वर्ष धान अधिग्रहण प्रक्रिया में बदलाव भी किया गया है। किसानों को अभी एक महीने के अंदर जमीन का सत्यापन कराकर खाते का ई-केवाइसी भी कराने को कहा गया है। झारखंड में पिछले वर्ष 60 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य था जिसे कुछ महीनों पूर्व घटाकर 50 लाख टन कर दिया गया था। अब एक बार फिर यह लक्ष्य कम हो सकता है। लक्ष्य बड़ा होने का फायदा बिचौलिए उठाते थे और जमीन नहीं होने अथवा खेतीबारी से जुड़ाव नहीं होने के बावजूद सरकारी केंद्रों पर धान बेचकर निकल जाते थे। ऐसे लोग दूसरों की पंजीकृत आईडी का इस्तेमाल भी कर लेते थे। अब सरकार ने नवंबर महीने में अंचल कार्यालय में जमीन की रसीद, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और फोटो जमा कर किसानों को सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। सरकार बिहार से सटे धान क्रय केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारियों में जुटी है। बिचौलियों से रक्षा के लिए निर्धारत मीलों तक धान ले जाने के लिए उन्हीं वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा जिनमें जीपीएस लगा होगा। बिहार-यूपी से अधिक लक्ष्य पर सवाल झारखंड में धान अधिप्राप्ति को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश से अधिक लक्ष्य पर सवाल उठ रहा है।बिहार में चालू वित्तीय वर्ष में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य 36 लाख टन है जिसे बढ़ाकर 50 लाख टन करने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य 65 लाख टन निर्धारित किया गया है। इन दोनों पड़ोसी राज्यों का क्षेत्रफल और कृषि योग्य भूखंड झारखंड से अधिक है। झारखंड में दो वर्ष पूर्व धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य 80 लाख टन था जिसे घटाकर पिछले वित्तीय वर्ष में 60 लाख टन किया गया था। अब इस वर्ष 50 लाख टन धान खरीदारी का लक्ष्य है जिसे कम करने की तैयारी में राज्य सरकार है।     हम एक बार फिर किसानों को भुगतान के लिए एडवांस में राशि जारी करने जा रहे हैं। धान खरीद के लक्ष्य को लेकर केंद्र से शीघ्र ही वार्ता होगी। जहां तक बिचौलियों का सवाल है, राज्य सरकार किसीर को फायदा उठाने नहीं देगी।     -डाॅ. इरफान अंसारी, मंत्री, खाद्य आपूर्ति विभाग।