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शहतूत का पौधा और वास्तु शास्त्र: घर में लगाने से मिलते हैं ये बड़े फायदे

हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बेहद खास तस्वीर सामने आई है, जिसमें दोनों नेता एक साथ शहतूत (Mulberry) का पौधा लगाते नजर आ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मंच पर रिश्तों को मजबूती देने वाली इस तस्वीर के बाद से ही शहतूत का पौधा हर तरफ चर्चा का विषय बन गया है. वास्तु शास्त्र और आयुर्वेद दोनों में ही पेड़-पौधों का सीधा संबंध हमारी किस्मत, घर की ऊर्जा और अच्छी सेहत से होता है. आइए जानते हैं कि शहतूत का पौधा लगाने से जीवन में क्या सकारात्मक बदलाव आते हैं और यह आपके लिए कितना फायदेमंद है. Morus nigra (काला शहतूत): क्यों है यह इतना खास? इस खास मौके पर जिस पौधे को चुना गया, वह है Morus nigra यानी काला शहतूत. वास्तु में इसके विशेष गुणों की वजह से इसे बेहद पूजनीय और मजबूत माना जाता है: लंबी उम्र का प्रतीक: काला शहतूत अपनी लंबी उम्र के लिए जाना जाता है.  वास्तु के अनुसार, यह घर में स्थिरता और परिवार के सदस्यों की दीर्घायु का प्रतीक बनता है. मजबूत जड़ें (स्थायित्व): इसकी जड़ें बेहद मजबूत होती हैं, जो गहराई तक जाती हैं.  यह आपके घर की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने और बिजनेस या करियर में स्थिरता (Stability) लाने में मदद करता है. समय के साथ विस्तार: यह पौधा समय के साथ चारों तरफ फैलता है. जैसे-जैसे यह फलता-फूलता है, वैसे-वैसे घर में सुख-समृद्धि, मान-सम्मान और धन बढ़ता है. शहतूत के पौधे के बड़े वास्तु फायदे नकारात्मक ऊर्जा का नाश: वास्तु शास्त्र के अनुसार, शहतूत के पौधे में आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है. इसे घर के पास या बगीचे में लगाने से वातावरण शुद्ध होता है और परिवार के सदस्यों के बीच सकारात्मकता बढ़ती है. बुरी नजर और तंत्र-मंत्र से बचाव: धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार, शहतूत का पेड़ एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. ऐसा माना जाता है कि जिस घर के आस-पास यह पेड़ फल-फूल रहा हो, वहां किसी भी तरह की बुरी नजर, ऊपरी हवा या नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव नहीं पड़ता. सुख-समृद्धि और धन का आगमन: वास्तु के नियमों के अनुसार, जैसे-जैसे इस पौधे का विकास होता है और इसमें मीठे फल आने लगते हैं, वैसे-वैसे घर की आर्थिक तंगी दूर होने लगती है.   मानसिक तनाव से मुक्ति: इस पौधे की हरी-भरी पत्तियां और वातावरण को शुद्ध करने का गुण घर के सदस्यों के मानसिक तनाव को कम करता है. इसके प्रभाव से घर में कलह-कलेश शांत होता है और शांति का माहौल बनता है. रखें इन जरूरी वास्तु नियमों का ध्यान अगर आप भी इस पौधे को अपने घर में लगाने की सोच रहे हैं, तो इन बातों को बिल्कुल न भूलें. अंदर न लगाएं (No Indoor): वास्तु शास्त्र कहता है कि शहतूत के पौधे को कभी भी मुख्य घर या बेडरूम के ठीक अंदर (In-door) नहीं लगाना चाहिए. सही दिशा का चुनाव: इसे हमेशा घर के बाहर बगीचे में, बालकनी में या घर से थोड़ी दूरी पर खुली जगह में लगाएं.  वास्तु के अनुसार, इसे घर की उत्तर या पूर्व दिशा के लॉन/बगीचे में लगाना सबसे ज्यादा फलदायी और शुभ होता है. चूँकि Morus nigra समय के साथ फैलता है, इसलिए इसे पर्याप्त खुली जगह में लगाना ही बेहतर है. धूप का ध्यान रखें: शहतूत के पौधे को अच्छी ग्रोथ और मीठे फलों के लिए रोजाना 5 से 6 घंटे की सीधी धूप की जरूरत होती है.  इसलिए इसे ऐसी जगह लगाएं जहां पर्याप्त धूप आती हो.

8% डिस्काउंट पर सरकार बेच रही हिस्सा, बाजार खुलते ही टूटे बैंक के शेयर

मुंबई  सरकारी बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर शुक्रवार को बाजार खुलते ही धड़ाम हो गए हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर शुक्रवार को BSE में करीब 6 पर्सेंट लुढ़ककर 31.89 रुपये पर जा पहुंचे हैं। केंद्र सरकार इस बड़े सरकारी बैंक में अपना हिस्सा बेच रही है। सरकार ने शुक्रवार को ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू की है। केंद्र सरकार, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8 पर्सेंट तक हिस्सेदारी बेच रही है। सरकार, इस सरकारी बैंक में अपनी हिस्सेदारी गुरुवार को बैंक के शेयरों के बंद स्तर से 8 पर्सेंट से अधिक सस्ते में बेच रही है। 31 रुपये प्रति शेयर के दाम पर सरकार बेच रही अपना हिस्सा सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अपनी हिस्सेदारी 31 रुपये के फ्लोर प्राइस पर बेच रही है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर गुरुवार को BSE में 33.91 रुपये पर बंद हुए थे। सरकार 8 पर्सेंट से अधिक सस्ते (डिस्काउंट) पर अपना हिस्सा बेच रही है। डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनजमेंट (DIPAM) के मुताबिक, केंद्र सरकार इस सरकारी बैंक में अपनी 4 पर्सेंट इक्विटी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल के जरिए बेचेगी। इसके अलावा, सरकार के पास ग्रीन शू ऑप्शन के जरिए 4 पर्सेंट और हिस्सेदारी बेचने का विकल्प है। नॉन- रिटेल निवेशक शुक्रवार 22 मई से ऑफर फॉर सेल के लिए बोली लगा सकेंगे। वहीं, आम निवेशक सोमवार 25 मई से बोली लगा सकेंगे। अभी 89.27 पर्सेंट है बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 31 मार्च 2026 को खत्म हुई तिमाही में केंद्र सरकार की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 89.27 पर्सेंट हिस्सेदारी थी। स्टॉक एक्सचेंजों पर उपलब्ध डेटा में यह बात कही गई है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 10.73 पर्सेंट है। मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नॉर्म्स का पालन करने के लिए केंद्र सरकार को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में और 14.27 पर्सेंट हिस्सेदारी बेचनी होगी। केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया समेत चार सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए गोल्डमैन सैक्स को ट्रांजैक्शन एडवायजर नियुक्त किया था। 5 साल में 72% उछले हैं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर सरकारी बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयर पिछले पांच साल में सिर्फ 72 पर्सेंट चढ़े हैं। सरकारी बैंक के शेयर 21 मई 2021 को 18.50 रुपये पर थे। बैंक के शेयर 22 मई 2026 को 31.89 रुपये पर जा पहुंचे हैं। पिछले एक साल में बैंक के शेयरों में करीब 12 पर्सेंट की गिरावट देखने को मिली है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों का 52 हफ्ते का हाई लेवल 41.18 रुपये है। वहीं, बैंक के शेयरों का 52 हफ्ते का निचला स्तर 31.29 रुपये है।

ऐपल ने लॉन्च किया स्लीप एपनिया नोटिफिकेशन फीचर: अब Apple Watch से मिलेगी नींद की बीमारी की जानकारी

अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी ऐपल ने भारत में न्यू हेल्थ फोक्स्ड फीचर को पेश कर दिया है. इस न्यू फीचर की मदद से यूजर्स को खर्राटे से संबंधित सांस वाली बीमारी की जानकारी मिलेगी, जिसको स्लीप एपनिया कहा जाता है. कंपनी ने अपनी ऐपल वॉच में स्लीप एप्निया नोटिफिकेशन फीचर को शामिल किया है, जो यूजर्स की हेल्थ को ट्रैक करेगा और उसकी जानकारी देगा. साथ ही कंपनी ने बताया है के एयरपॉड्स प्रो 3 में क्लिनिकली वैलिडेटेड हियरिंग टेस्ट फीचर दिया गया है. इसकी मदद से यूजर्स अपने घर बैठे ही सुनने की क्षमता की जांच कर सकेगा. इंसानों की जिंदगी अहम है नींद कंपनी ने बताया है कि नींद इंसानों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा है. इसका असर इंसानों की जिंदगी और सेहत दोनों पर ही दिखाई देता है. स्लीप एप्निया क्या होती है? स्लीप एप्निया, एक आम बीमारी है. इसमें सोते समय कुछ पल के लिए सांस रुक जाती है, जिससे शरीर में पर्याप्त आक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती है. जानकारी के मुताबिक, एक अनुमान है कि पूरी दुनिया में इस बीमारी से 1 अरब से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. स्लीप एप्निया की वजह से होने वाले नुकसान स्लीप एप्निया का अगर समय रहते इलाज ना कराया जाए तो यह गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकता है. स्लीप एप्निया की वजह से हाई ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज और दिल से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं. स्लीप एप्निया को कैसे करता है ट्रैक ऐपल वॉच के अंदर एक खास फीचर शामिल किया है, जिसका काम ब्रीदिंग डिस्टर्बेसेज को चेक करना है. यह फीचर एक्सेलेरोमीटर की मदद से कलाई की छोटी-छोटी एक्टिविटियों को पहचानकर नींद के दौरान सांस लेने के दौरान सामान्य पैटर्न में होने वाली रुकावटों को पहचानता है. 30 दिन में ऐपल वॉच इन डेटा का एनालाइज करेगा और अगर स्लीप एप्निया के लगातार संकेत मिलते हैं, तो उसके बाद यूजर्स को नोटिफिकेशन भेजा जाएगा. इसके बाद शख्स को डॉक्टर से संपर्क करना होगा और आगे की जांच करानी होगी.

पंजाब में अजनाला पंचायत चुनाव टले, कोर्ट ने परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को कहा

चंडीगढ़  राज्य चुनाव आयोग ने खरड़ के बाद अजनाला नगर पंचायत का चुनाव स्थगित कर दिया है। अब पहले नगर पंचायत की परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद ही नए सिरे से चुनाव करवाए जाएंगे। यह फैसला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद लिया गया है। आयोग की ओर से जारी आदेश के अनुसार स्थानीय निकाय विभाग ने आयोग को सूचित किया था कि हाईकोर्ट ने अजनाला नगर पंचायत चुनाव पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते 26 मई को प्रस्तावित चुनाव स्थगित कर दिया गया है। आयोग ने अब तक की पूरी चुनाव प्रक्रिया भी रद्द कर दी है। इसमें नामांकन प्रक्रिया भी शामिल है। जिन उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे उनकी फीस वापस की जाएगी।आदेश में कहा गया है कि स्थानीय निकाय विभाग से नया पत्र प्राप्त होने के बाद दोबारा चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद परिसीमन प्रक्रिया पूरी कर चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। इससे पहले खरड़ नगर परिषद चुनाव को लेकर भी इसी तरह का फैसला लिया जा चुका है। अब अजनाला में भी परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव प्रक्रिया पर रोक रहेगी।

भारत-अमेरिका ट्रेड समझौता जल्द हो सकता है फाइनल, सर्जियो गोर का बड़ा बयान

नई दिल्ली  ईरान युद्ध और तेल संकट के बीच भारत के लिए एक अच्‍छी खबर आ रही है. पिछले करीब एक साल से अटकी अमे‍रिकी ट्रेड डील के फाइनल होने को लेकर उम्‍मीदें अब बढ़ गई हैं. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों या महीने में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को पूरा किया जा सकता है. दोनों देशों के बीच इस डील को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है और अब इस पर अंतिम फैसला करने का वक्‍त आ गया है।  भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है. पिछले महीने भारत का एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वॉशिंगटन गया था और अब अगले महीने अमेरिका की टीम दिल्ली आएगी, ताकि बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके. सर्जियो गोर ने कहा कि इस डील पर बातचीत शुरू हुए करीब डेढ़ साल हो चुके हैं, लेकिन बड़े व्यापार समझौतों में समय लगता है. फिलहाल अब ऐसा लग रहा है कि जल्‍द ही दोनों देशों की ट्रेड डील को अंतिम मुकाम तक पहुंचाया जा सकेगा।  दिल्ली में अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के सालाना शिखर सम्मेलन में बोलते हुए, गोर ने विश्वास जताया कि यह समझौता आने वाले हफ्तों और महीनों में पूरा हो जाएगा. उन्‍होंने कहा कि व्यापार डेढ़ साल से चल रहा है, लेकिन अगर तुलना करें तो यूरोपीय संघ को इसमें लगभग 19 साल लगे थे. हमें विश्वास है कि आने वाले हफ्तों और महीनों में यह ट्रेड डील अंतिम रूप ले लेगा।  इस समझौते का क्‍या होगा फायदा  सर्जियो गोर ने बताया कि राष्‍ट्रपति ट्रंप का टारगेट द्विपक्षीय व्यापार को इस तरह से आसान बनाना है, जिससे अमेरिकी कारोबारियों और वर्कर्स के लिए लाभकारी अवसर पैदा हों. हमारा मौजूदा अंतरिम व्‍यापार समझौता अंतिम रूप देने के लिए विचाराधीन है, जिससे दोनों देशों के लिए तरक्‍की के दरवाजे खुलेंगे।  उन्‍होंने कहा कि हम इस डील को फाइनल करने के लिए उत्‍सुक हैं, जिससे मार्केट पहुंच का विस्‍तार होगा, बाधाएं कम होंगी और दोनों देशों के व्‍यवसायों के लिए ज्‍यादा निश्चितता पैदा होगी. अगर यह डील सही ढंग से होती है तो यह सप्‍लाई चेन को मजबूत करेगा, नए निवेशों को बढ़ावा देगा और समावेशी विकास को गति देगा. जिससे उद्योगों, श्रमिकों और अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा लाभ होगा।  दोनों देशों के बीच बातचीत जारी  अंतरिम समझौते के बारीक पहलुओं पर चर्चा करने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल पिछले महीने वाशिंगटन गया था. अब उम्मीद है कि तकनीकी चर्चाओं के अगले दौर के लिए अमेरिकी  प्रतिनिधिमंडल अगले महीने भारत का दौरा करेगा. इसी शिखर सम्मेलन के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आगामी अमेरिकी दौरे की पुष्टि की और राजदूत के समय-सीमा संबंधी आशावाद का समर्थन किया।  23 मई को मार्को रुबियो आ रहे भारत  जब उनसे पूछा गया कि क्या द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए अमेरिका के मुख्य व्यापार वार्ताकार विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ उनकी आगामी भारत यात्रा पर जाएंगे, तो गोयल ने स्पष्ट किया कि वह उनके साथ नहीं आ रहे हैं, लेकिन अगले महीने उनके आने की कुछ योजना है. रुबियो 23 मई से भारत की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा शुरू करने वाले हैं, जो देश की उनकी पहली यात्रा होगी और इसमें व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग शामिल होगा। 

चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में 18 जून को उपचुनाव

नई दिल्ली राज्यसभा की 24 खाली हो रही सीटों पर चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया गया है. चुनाव आयोग ने आज द्विवार्षिक चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. दस राज्यों की 24 सीटों पर 18 जून को मतदान होगा. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह रिटायर हो रहे हैं. वहीं, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन भी राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं।  18 जून को होगी वोटिंग  चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के मुताबिक एक जून को नोटिफिकेशन जारी होगा. 8 जून तक नामांकन भरा जा सकेगा. 9 जून को नामांकन की जांच होगी. 11 जून को नामांकन वापस लिया जा सकेगा. अगर जरूरी हुई तो 18 जून को वोटिंग होगी. वोटिंग सुबह 9 से शाम 4 बजे तक होगी. 18 जून को मतगणना होगी और 20 जून तक राज्यसभा का चुनाव पूरा कर लिया जाएगा।  11 बीजेपी से और 4 कांग्रेस के सांसद हो रहे रिटायर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन, और रवनीत सिंह बिट्टू आदि का कार्यकाल हो रहा है समाप्त।  कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात से चार-चार सीटें होंगी खाली हो रही हैं. राजस्थान और मध्य प्रदेश से तीन-तीन सीटें खाली होने जा रही हैं. मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड से एक-एक सीट खाली होंगी . इनके अलावा झारखंड, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से एक-एक सीटों पर उपचुनाव भी हो सकता है. 22 रिटायर होने वाले सांसदों में 11 बीजेपी के हैं जबकि कांग्रेस के चार सांसद हैं।  चुनाव आयोग ने साफ निर्देश दिया है कि मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेष बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा. किसी अन्य पेन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी. साथ ही चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी ताकि मतदान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया जा सके।  राजनीतिक तौर पर इन चुनावों को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा में संख्या बल कई बड़े विधेयकों और राजनीतिक रणनीतियों पर असर डालता है. ऐसे में आने वाले दिनों में विभिन्न दल उम्मीदवारों के चयन और समर्थन जुटाने की कवायद तेज कर सकते हैं।  किस राज्य की कितनी सीटों पर चुनाव? आंध्र प्रदेश: 4 गुजरात: 4 कर्नाटक: 4 मध्य प्रदेश: 3 राजस्थान: 3 झारखंड: 2 मणिपुर: 1 मेघालय: 1 अरुणाचल प्रदेश : मिजोरम :1 नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून है. केंद्रीय मंत्रियों पर तलवार लटकी केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्य सभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है. इसी तरह अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन मंत्रालय में राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन मध्य प्रदेश से राज्य सभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल भी 21 जून को समाप्त हो रहा है. माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रवनीत सिंह को पार्टी दोबारा राज्य सभा भेज सकती है।  वहीं कूरियन को केरल चुनाव के मद्देनजर सरकार में लाया गया था. अब देखना होगा कि बीजेपी उन्हें फिर से राज्य सभा भेजती है या नहीं. केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इन दोनों मंत्रियों का बना रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि वे फिर से राज्य सभा में आते हैं या नहीं।  खरगे और दिग्विजय का क्या होगा? कर्नाटक से संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को तीन सीटें मिल सकती हैं. इनमें से एक पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का चुना जाना तय माना जा रहा है. वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस को एक सीट जीतने के लिए जोर लगाना पड़ेगा. हालांकि उसके पास केवल छह सरप्लस वोट हैं. ऐसे में किसी वरिष्ठ नेता पर दांव लगाया जा सकता है. खुद दिग्विजय सिंह फिर से राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं. राज्य में दो सीटें बीजेपी और एक कांग्रेस को मिल सकती है. बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन भी दौड़ में हैं. राजस्थान में बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट मिल सकती है। बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा का नाम चल रहा है।  गुजरात में कांग्रेस जीरो कांग्रेस को बड़ा झटका गुजरात में लगने जा रहा है. अभी गुजरात से राज्यसभा की 11 सीटों में कांग्रेस के केवल एक ही सदस्य हैं. शक्तिसिंह गोहिल विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे हैं. वे 21 जून को रिटायर हो रहे हैं. वर्तमान में एक सीट जीतने के लिए 46 वोट चाहिए जबकि कांग्रेस के पास केवल 12 विधायक हैं. यानी कांग्रेस का गुजरात से अपना कोई भी उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव में नहीं जीत सकता. यह पहली बार होगा जब गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य से कांग्रेस का राज्य सभा में कोई भी सदस्य नहीं होगा. हालांकि झारखंड में कांग्रेस की उम्मीदें सत्तारूढ़ जेएमएम पर टिकी हैं. पार्टी को उम्मीद है कि जेएमएम यह सीट कांग्रेस को दे देगा. इस चुनाव में एनडीए की स्थिति वर्तमान स्तर पर ही रहने की संभावना है. हालांकि टीडीपी की सीटें बढ़ सकती हैं. बीजेपी के अभी राज्य सभा में 113 सांसद हैं और एनडीए के 148 सांसद हैं. इस दौर के चुनाव के बाद बीजेपी की संख्या कमोबेश इसी के आसपास रहेगा।  बीजेपी के 11 सांसद हो रहे रिटायर केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन और रवनीत सिंह बिट्टू समेत 11 बीजेपी सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके अलावा कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भी कार्यकाल समाप्त होने को है। ऐसे में कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश में चार-चार सीटें खाली हो रही हैं। झारखँड, तमिलनाडुऔर महाराष्ट्र की एक-एक सीटों पर उपचुनाव हो सकताहै। 11 सांसदों में से 11 बीजेपी के और चार कांग्रेस के सांसद रिटायर हो रहे हैं। रवनीत सिंह बिट्टू केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री हैं। 21 जून को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए बिट्टू को फिर से राज्यसभा भेजा जा सकता है। फिलहाल वह राजस्थान से सांसद हैं। वहीं जॉर्च कूरियन की वापसी … Read more

भीषण गर्मी में राहत: कोंकण की पारंपरिक ‘फूटी कढ़ी’ बन सकती है नेचुरल कूलर

चिलचिलाती धूप, गर्म हवा के थपेड़े और 45 डिग्री के पार जाता तापमान… देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. घर से बाहर निकलते ही शरीर पसीने से भर जाता है, जिसकी वजह से कुछ ही देर में थकान होने लगती है. धूप गला सुखाकर सारी एनर्जी छीन लेती है. इस तपिश भरे मौसम में लोगों को सिर्फ AC या ठंडा पानी पीने से ही राहत नहीं मिलती है. ऐसे में वो लोग देसी चीजों से शरीर को अंदर से ठंडा रखने की कोशिश करते हैं. अगर आप भी गर्मी से परेशान हैं, तो मशहूर शेफ संजीव कपूर की बताई कोंकण की ट्रेडिशनल ड्रिंक फूटी कढ़ी आपके लिए किसी  नेचुरल कूलर की तरह काम करेगी. शेफ संजीव ने बताया कि पीढ़ियों से कोंकण इलाके में लोग गर्मियों के दौरान इस हल्की खट्टी और रिफ्रेशिंग ड्रिंक को पीते आ रहे हैं. कोकुम से बनने वाली ये देसी ड्रिंक न सिर्फ स्वाद में शानदार होती है, बल्कि शरीर को ठंडा रखने और गर्मी से राहत दिलाने में भी मददगार मानी जाती है. फूटी कढ़ी बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स:     15-20 कोकुम की पंखुड़ियां     2-3 हरी मिर्च बारीक कटी हुई     2-3 बड़े चम्मच ताजा हरा धनिया     1 बड़ा चम्मच चीनी     स्वादानुसार नमक     2 छोटी चम्मच घी     1 छोटी चम्मच राई     आधी छोटी चम्मच हींग बनाने का तरीका:  1. सबसे पहले कोकुम की पंखुड़ियों को एक बाउल में डालें और उसमें 3 कप पानी मिलाकर लगभग 35-40 मिनट के लिए छोड़ दें. 2. अब इस पानी को छान लें. इसमें हरी मिर्च, धनिया, चीनी और नमक डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. 3. एक पैन में घी गर्म करें. उसमें राई डालें. जब राई चटकने लगे तो उसके बाद उसमें हींग डालकर हल्का सा भून लें. 4. इस तड़के को कोकुम वाले मिक्स में डालें और अच्छी तरह मिला लें. 5. अब इसे गिलास में बर्फ डालकर ठंडा-ठंडा सर्व करें. गर्मियों में क्यों फायदेमंद है ये ड्रिंक? 1. कोकुम की तासीर ठंडी मानी जाती है, इसलिए ये गर्मी और लू से राहत दिलाकर शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद कर सकता है. 2. गर्मियों में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. ऐसी ड्रिंक्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती हैं. 3. फूटी कढ़ी एक बहुत ही हल्की ड्रिंक है और पचाने में आसान होती है. इसे खाने के साथ लेने से पेट को आराम मिल सकता है. 4. तेज गर्मी में होने वाली थकान और सुस्ती को कम करने के लिए भी ये ड्रिंक काफी फायदेमंद मानी जाती है.  

‘संस्कारी बहू’ का बोल्ड अवतार, बिकिनी फोटो में निमृत अहलूवालिया ने बढ़ाया इंटरनेट का पारा

मुंबई  निमृत कौर अहलूवालिया टेलीविजन की लोकप्रिय एक्ट्रेसेस में से एक हैं. टीवी पर वो संस्कारी और सभ्य किरदार निभाने के लिए जानी जाती हैं। इन दिनों एक्ट्रेस फ्लोरिडा में वेकेशन पर हैं, जहां Beach पर फैन्स को उनका बोल्ड अवतार देखने को मिला।  समंदर किनारे निमृत कौर ब्राउन बिकीनी सेट में अपनी बोल्डनेस से पारा हाई करती नजर आईं। एक्ट्रेस बिकिनी में आत्मविश्वासी और स्टाइलिश दिख रही थीं. उन्होंने बिकीनी ब्रा के साथ मैचिंग बॉटम्स पहने थे, जिससे उनका लुक ग्लैमरस लग रहा था।          समुद्री एहसास बढ़ाने के लिए उन्होंने शेल चोकर नेकपीस भी पहना था, जो Beach के मूड से बिल्कुल मेल खा रहा था। लुक पूरा करने के लिए निमृत ने स्टाइलिश ब्राउन हैट भी पहना था, जिससे उनका Beach लुक ट्रेंडी और नैचुरल लग रहा था।          टीवी की संस्कारी बहू को बिकिनी में देखकर फैन्स के होश उड़ गए हैं. एक ने लिखा कि ये तो नहीं सोचा था. दूसरे ने कहा कि मैम गर्मी बढ़ा दी।  बिकिनी पहनकर निमृत ने अपना टोन्ड फिगर भी फ्लॉन्ट किया, जिसे देखकर फैन्स सन्न रह गए. एक ने लिखा कि आपने कितना वजन घटा लिया।  अन्य फैन ने कहा कि UFF… मार ही डाला. कई फैन्स ने फायर इमोजी बनाई. कुछ लोगों ने निमृत को ग्लैमरस बताकर उनकी तारीफ की। एक्ट्रेस के वर्कफ्रंट की बात करें, तो उन्हें टीवी पर छोटी सरदारनी शो के लिए जाना जाता है. वो बिग बॉस 16 का हिस्सा भी बनी थीं. आखिरी बार उन्हें 2022 में खतरा खतरा खतरा शो में देखा गया था. 

नायब सैनी बोले: पंजाब-हरियाणा सिर्फ पड़ोसी नहीं, एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं

 चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने पंजाब और हरियाणा के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों राज्यों के संबंध को सिर्फ पड़ोसी राज्यों का रिश्ता नहीं, बल्कि “नाखून और उंगली” जैसा बताया। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पंजाब की राजनीति को लेकर भी लगातार चर्चा तेज है। एक इंटरव्यू के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पंजाब को करीब से समझने और देखने का मौका मिला है। उन्होंने बताया कि पंजाब ओबीसी मोर्चा का प्रभारी रहते हुए उन्होंने पूरे प्रदेश का दौरा किया और शायद ही कोई ऐसा चुनाव रहा हो, जहां उन्हें जाने का अवसर न मिला हो। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने पंजाब और हरियाणा के सामाजिक व सांस्कृतिक जुड़ाव को बेहद मजबूत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की जमीन एक है, छत एक है और दोनों का सफर भी एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “पंजाब-हरियाणा का रिश्ता सामान्य नहीं है, यह नाखून और उंगली का रिश्ता है।” उनके इस बयान को दोनों राज्यों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने राजनीतिक स्तर पर पंजाब की मौजूदा सरकार पर निशाना साधने से भी परहेज नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की सोच आम आदमी पार्टी से अलग है। मुख्यमंत्री का आरोप था कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने आम लोगों को अपमानित करने का काम किया है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब की जागरूक जनता भ्रष्टाचार में लिप्त आम आदमी पार्टी को बाहर का रास्ता दिखाएगी। साथ ही कहा कि अगर पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है तो सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान हरियाणा की उपलब्धियों का भी जिक्र किया और कहा कि प्रदेश ने खेल, कृषि, उद्योग और विकास के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वहीं, पंजाब और हरियाणा के रिश्ते पर दिया गया उनका “नाखून और उंगली” वाला बयान अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

चुनाव होंगे समय पर या दिसंबर तक टलेंगे? राजस्थान हाईकोर्ट आज करेगा साफ

 जयपुर राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय (नगर पालिका/नगर निगम) के चुनाव समय पर होंगे या दिसंबर तक के लिए टल जाएंगे, इस पर आज तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकती है. राज्य सरकार और इलेक्शन कमिशन के चुनाव टालने वाले प्रार्थना पत्र पर राजस्थान हाईकोर्ट आज (22 मई) अपना बड़ा फैसला सुना सकता है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले में बीते 11 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित (Reserve) रख लिया था, जो आज कोर्ट रूम में सुनाया जा सकता है. क्या है पूरा मामला और सरकार क्यों मांग रही है समय? दरअसल, हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को एक साथ 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सख्त आदेश दिए थे कि 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में पंचायत और निकाय चुनाव करा लिए जाएं. हालांकि, भजनलाल सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाकर इस समय-सीमा में चुनाव कराने को व्यावहारिक रूप से असंभव बताया और दिसंबर 2026 तक का समय मांग लिया. सरकार ने चुनाव टालने के पीछे कोर्ट के सामने प्रशासनिक और व्यावहारिक दलीलों की पूरी लिस्ट रखी थी:- सरकार का तर्क है कि मई-जून में राजस्थान में भयंकर लू (Heatwave) चलती है, जबकि जुलाई से सितंबर तक भारी बारिश और कृषि कार्यों में ग्रामीण मतदाता व्यस्त रहते हैं.  शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 68 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनेंगे, जिनके लिए 3.4 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, जो फिलहाल संभव नहीं है. महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन पर दो अलग-अलग फैसलों और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने के कारण आरक्षण तय करने में देरी हुई. 11 मई की सुनवाई में कोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार पिछली सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने सरकार की इन दलीलों पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था- 'सरकार का रवैया ठीक नहीं है और उन्हें चुनाव की तैयारियों के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है.' जब सरकार ने मौसम और ओबीसी आयोग का हवाला दिया, तो बेंच ने साफ कहा कि आदेश निकायों को लेकर था, तो फिर पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए? और ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह कोर्ट के सामने विषय नहीं है. कोर्ट ने सरकार के 'गर्मी-बरसात' वाले तर्कों को स्वीकार न करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 'जनता परेशान, सिस्टम बेहाल: विपक्ष हमलावर दूसरी तरफ, पूर्व कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया है. उन्होंने इस मामले में एक अवमानना याचिका (Contempt Petition) भी दायर की है, जिस पर जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच में अगली सुनवाई 26 मई को होनी है. संयम लोढ़ा ने कहा, 'राजस्थान की जनता को उनके वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है. चुनाव न होने से पंचायतों और निकायों में भारी अव्यवस्था है, स्थानीय स्तर पर विकास के सारे काम पूरी तरह ठप हैं। लोग परेशान हैं और पूरा सिस्टम बेहाल है.' आज के फैसले पर टिकी सबकी नजरें यदि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच आज सरकार के प्रार्थना पत्र को खारिज कर देती है, तो सरकार और राज्य चुनाव आयोग को तुरंत चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. वहीं, यदि कोर्ट से राहत मिलती है, तो प्रदेश में स्थानीय सरकार के गठन के लिए जनता को दिसंबर तक का इंतजार करना पड़ेगा.