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1500 किलोमीटर दूर बिहार के कटिहार से साइबर ठगी का आरोपी गिरफ्तार

बैंक अधिकारी बनकर पेंशन कार्ड अपडेट एवं टैक्स में छूट का झांसा देकर सेवानिवृत्त कर्मचारी से 6 लाख रूपए की हुई थी ठगी 5 लाख रूपए नगद जब्‍त   भोपाल मध्यप्रदेश में साइबर अपराधों के विरुद्ध त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए संचालित “e-Zero FIR” व्यवस्था के तहत देवास पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। बैंक अधिकारी बनकर पेंशन कार्ड अपडेट कराने और टैक्स में छूट दिलाने का झांसा देकर सेवानिवृत्त कर्मचारी से 6 लाख 03 हजार रूपए की साइबर ठगी करने वाले आरोपी को देवास पुलिस ने 1500 किलोमीटर दूर बिहार के कटिहार जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी की निशानदेही पर ठगी की राशि में से 5 लाख रूपए नगद जब्‍त किए हैं। थाना कोतवाली, देवास क्षेत्र निवासी 62 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को साइबर ठगों ने बैंक अधिकारी बनकर संपर्क किया। ठगों ने पेंशन कार्ड अपडेट कराने तथा टैक्स में छूट दिलाने का झांसा देकर उनसे कुल6 लाख 3 हजार रूपए की राशि विभिन्न माध्यमों से अपने खाते में ट्रांसफर करा ली। शिकायत प्राप्त होने पर थाना कोतवाली में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री पुनीत गेहलोद के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। टीम द्वारा साइबर ठगी से संबंधित बैंकिंग लेनदेन, मोबाइल नंबरों तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया। तकनीकी साक्ष्यों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस टीम बिहार के कटिहार जिले पहुंची और आरोपी की पतारसी करते हुए उसे गिरफ्तार किया। आरोपी की निशानदेही पर उसके घर की अलमारी से साइबर ठगी की राशि में से 5 लाख रूपए नगद विधिवत जब्‍त किए। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ तथा विवेचना में प्राप्त तकनीकी एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर साइबर ठगी गिरोह के मुख्य आरोपियों का संबंध जामताड़ा, झारखंड से होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस द्वारा गिरोह के अन्य सदस्यों, उनके बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन तथा ठगी की शेष राशि के संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है। उल्‍लेखनीय है कि जिले में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों की राशि वापस दिलाने के उद्देश्य से संचालित “ऑपरेशन साइबर” के तहत जिला साइबर सेल द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में e-Zero FIR के तहत अब तक कुल 130 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं, जिनमें 26 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं तथा आरोपियों से लगभग 98 लाख 52 हजार रूपए की राशि जब्‍त की गई है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों में त्वरित कार्रवाई, तकनीकी साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग, अंतर्राज्यीय साइबर नेटवर्क की पहचान तथा पीड़ितों की राशि सुरक्षित कराने के लिए लगातार समन्वित कार्रवाई की जा रही है।  

पेंशन नियमों में बदलाव, इंदिरा गांधी के नाम से नहीं चलेंगी योजनाएं

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 53,428 करोड़ रुपये मंजूर किए। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 53,428 करोड़ रुपये मंजूर किए। इसके तहत दिव्यांग पेंशन के नियम बदले गए हैं। अब पात्र दिव्यांगजन जन्म से ही पेंशन का लाभ ले सकेंगे। वहीं, वृद्धावस्था और विधवा पेंशन योजनाएं मौजूद स्वरूप में जारी रहेगी। इसके अलावा, तीन पेंशन योजनाओं के नाम से इंदिरा गांधी का नाम हटाकर प्रधानमंत्री शब्द जोड़ने का फैसला किया गया है। दिव्यांगता की सीमा 80 से घटाकर 40 फीसदी सरकार ने दिव्यांग पेंशन के लिए दिव्यांगता की सीमा 80 से घटाकर 40 फीसदी कर दी गई है। अब जन्म से ही पात्र दिव्यांगजन पेंशन के लिए आवेदन कर सकेंगे। नए नियमों के तहत 79 वर्ष तक के लाभार्थियों को हर महीने 375 रुपये और 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र वालों को 625 रुपये मिलेंगे। पात्रता, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि से जुड़े नए दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर लागू किए जाएंगे। तीन पेंशन योजनाओं से पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का नाम हटेगा     राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना किया जाएगा।     इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना अब प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना होगा।     इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना कहलाएगी।     इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना होगा।     जबकि राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना नाम दिया जाएगा। 3.20 करोड़ लाभार्थियों को फायदा सरकार के इस फैसले से देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को फायदा मिलेगा। वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के साथ परिवार लाभ योजना पहले की तरह जारी रहेगी। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी। इसके तहत गरीब परिवारों को आर्थिक मदद दी जाती है। योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है, ताकि देशभर में पात्र लोगों को समान रूप से सहायता मिल सके। दिव्यांग पेंशन के नियम दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत बदले गए हैं। इसमें 40 फीसदी दिव्यांगता को मानक माना गया है। साथ ही, दिव्यांगजनों को समान श्रेणी की दूसरी योजनाओं के मुकाबले कम से कम 25 फीसदी अधिक सहायता देने का प्रावधान है।  

राष्ट्रपति मुर्मु 15 अक्टूबर को करेंगी सरस मेले का शुभारंभ

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर दिल्ली-एनसीआर से बाहर पहली बार विजयवाड़ा में 'राष्ट्रीय सरस मेला': 15 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी शुभारंभ   ग्रामीण महिला उद्यमिता को नई उड़ान: विजयवाड़ा में सजेगा 34 राज्यों की 1000 लखपति दीदियों का महाकुंभ- शिवराज सिंह चौहान 'वोकल फॉर लोकल' से सशक्त भारत: माननीय राष्ट्रपति की मौजूदगी में शुरू होगा 650 से अधिक स्टॉल्स वाला राष्ट्रीय सरस मेला- शिवराज सिंह चौहान जन-जन तक पहुंच के लिए दिल्ली से बाहर राष्ट्रीय सरस मेले के आयोजन में पहली बार कृष्णा नदी के तट पर दिखेगी मिनी भारत की झलक- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश)/नई दिल्ली केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित पुन्नमी घाट पर, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रीशिवराज सिंह चौहान की पहल पर पहली बार दिल्ली-एनसीआर से बाहर ‘राष्ट्रीय सरस आजीविका मेला 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक एवं भव्य मेले का औपचारिक शुभारंभ 15 अक्टूबर को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रीशिवराज सिंह चौहान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रीएन. चंद्रबाबू नायडू, उप-मुख्यमंत्रीपवन कल्याण, राज्य के राज्यपाल और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे।   दिल्ली-एनसीआर से बाहर पहली ऐतिहासिक पहल प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रीशिवराज सिंह चौहान के राष्ट्रीय आयोजनों को विकेंद्रीकृत कर देश के विभिन्न हिस्सों तक ले जाने के विज़न के तहत यह पहला मौका है जब राष्ट्रीय स्तर का सरस मेला दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं से बाहर आयोजित किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्रीचौहान ने कहा कि यह आयोजन केवल एक मेला नहीं, बल्कि देश के सुदूर गांवों की महिलाओं की आत्मनिर्भरता, स्वावलंबन और उनकी हुनरमंदी का राष्ट्रीय उत्सव है।   34 राज्यों की 1,000 से अधिक दीदियां और 650 से ज्यादा स्टॉल्स दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) और आंध्र प्रदेश 'सर्फ़' (SERP) के सहयोग से आयोजित इस मेले में देश के 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की लगभग 1,000 महिला उद्यमी और कारीगर भाग ले रही हैं। मेले में 650 से अधिक स्टॉल्स लगाए गए हैं, जहाँ पारंपरिक हथकरघा, हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद और घरेलू वस्तुएं प्रदर्शित की जाएंगी।   6 करोड़ 'लखपति दीदी' का लक्ष्य मेले के दौरान माननीय राष्ट्रपति और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री की उपस्थिति में 'लखपति दीदी संग्रह' (Lakhpati Didi Compendium) और 'सरस शक्ति एप्लिकेशन' का विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। साथ ही देशभर में 6 करोड़ लखपति दीदियां तैयार करने के राष्ट्रीय संकल्प को प्रदर्शित करती एक विशेष फिल्म भी दिखाई जाएगी।   विशेष आकर्षण: इंडिया फूड कोर्ट और लाइव डेमो इंडिया फूड कोर्ट: देश के 28 राज्यों की 200 से अधिक महिला शेफ अपने-अपने क्षेत्रों के पारंपरिक और लजीज व्यंजन (जैसे लिट्टी चोखा, हैदराबादी दम बिरयानी, मक्के दी रोटी-सरसों का साग, वन सुंदरी आदि) शुद्ध देसी मसालों के साथ लाइव तैयार करेंगी।  थीमैटिक पवेलियन: मेले में लखपति दीदी पवेलियन, नॉलेज पवेलियन, कन्वर्जेंस पवेलियन और लाइव डिमोंस्ट्रेशन पवेलियन बनाए गए हैं। यहाँ मिट्टी के बर्तन बनाने से लेकर कढ़ाई-बुनाई की लाइव कला देखने को मिलेगी, साथ ही अमेजन, फ्लिपकार्ट, नाबार्ड और प्रमुख उद्योग मंडलों के विशेषज्ञ महिलाओं को पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स की ट्रेनिंग देंगे। माननीय राष्ट्रपति स्वयं स्टॉल्स का भ्रमण कर महिला उद्यमियों से बातचीत करेंगी और विभिन्न राज्यों की लखपति दीदियों के साथ दोपहर का भोजन भी साझा करेंगी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश सहित पूरे देश के नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस मेले में पहुँचें और 'वोकल फॉर लोकल' तथा 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को मजबूत करते हुए इन ग्रामीण दीदियों के हुनर व उत्पादों को अपना पूरा समर्थन दें।  

वैशाली नाव हादसा: 13 शव देख दहला कलेजा

हाजीपुर बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में मंगलवार रात हुए नाव हादसे ने सबको झकझोर कर रख दिया। राघोपुर के रामपुर श्यामचंद गांव में एक साथ 13 बच्चों के शव कतार में देख सबका कलेजा दहल गया। जिधर नजर जाती सभी की नम आंखें और उदास चेहरे ही दिख रहे थे। पूरे गांव में बुधवार को किसी के घर चूल्हा तक नहीं जला। एक जगह गुमसुम बैठे एकटक निहारते लोग और बीच-बीच में रोने की आवाज माहौल को गमगीन बना रही थी। सबके दिल में छिपा दर्द आंसू बनकर बाहर आ रहा था। बच्चे मंगलवार शाम को ट्यूशन पढ़कर बिना बताए ही भोज खाने के लिए चले गए थे। इसी दौरान गंगा नदी के ढाब में उनकी नाव पलट गई। रामपुर श्यामचंद गांव के लोगों के लिए मंगल का वार अमंगल साबित हुआ। घटना के संबंध में बताते-बताते सुरेश राय फफक पड़े। इनकी दो बेटियों की मौत डूबने से हो गई। उन्होंने कहा, मंगलवार की शाम गांव के सभी बच्चे उनके दरवाजे पर ट्यूशन पढ़ रहे थे। शिक्षक बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर चले गए। इसके बाद सभी बच्चे चौकी पर अपना कॉपी-किताब छोड़कर भोज खाने जाने का प्लान बनाने लगे। घर वालों को बिना बताए भोज खाने चले गए घर से कुछ दूरी पर ही ढाब के उस पार एक श्राद्ध कार्यक्रम में लोगों को भोज खाने जाना था। ट्यूशन पढ़ने के बाद बच्चे अपने अन्य चचेरे भाई-बहनों के साथ परिजनों को बिना बताए भोज खाने निकल पड़े। चुपके से सभी घाट पर पहुंचे और बच्चे एक-एक करके नाव पर सवार हो गए।   नाव पर सवार थे 25 बच्चे, किनारे से 7 मीटर पहले पलटी नाव उन्होंने बताया कि नाव में कुल 25 बच्चे सवार थे। दूसरे किनारे पहुंचने से करीब 5 से 7 मीटर पहले ही नाव डूब गई। नाव पर सवार सभी लोग चीखने-चिल्लाने लगे। चीख-पुकार सुनकर आसपास लोग घाट की ओर दौड़ते हुए भागे। उन्होंने देखा कि सभी बच्चे ढाब के पानी में उपला रहे हैं। ग्रामीण भी शोर मचाते हुए बच्चों को बचाने के लिए पानी में कूदे। कुछ को तो बचा लिया गया, लेकिन कई नहीं बच पाए। ढाब के दूसरे किनारे से लोग चिल्लाते रहे, पर किसी ने नहीं सुना नाव की बायीं ओर करीब एक फीट लकड़ी का पटरा उखड़ा था। भोज खाने के लिए सभी लोग नाव सवार होने लगे तभी दूसरी साइड के लोग तेज-तेज आवाज में बोल रहे थे कि पांच से अधिक लोग नहीं बैठें, नाव की स्थिति ठीक नहीं है। हालांकि, उन लोगों की बात नाव में बैठे बच्चों और अन्य लोगों तक नहीं पहुंची। नाव में अधिक भार होने की वजह से ढाब के बीच में पहुंचते ही नाव डगमागाने लगी और धीरे-धीरे पानी बढ़ने लगा। नाव में बैठे बच्चे और अन्य लोग पानी निकालने के लिए हर संभव प्रयास करते रहे। उन्होंने काफी पानी निकाला, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। नाव दूसरे छोर पर पहुंचने से पहले ही डूब गई। जिस स्थान पर नाव डूबी वहां पर गहराई 20 से 25 फीट थी। रात होने की वजह से रेस्क्यू करने में ग्रामीणों को काफी परेशानी हुई। जब लोग हल्ला मचाते हुए घटनास्थल की ओर दौड़े। उस वक्त जिसके हाथ में जो लगा बांस, रस्सी, बांस का फट्टा लेकर पानी में कूद गए। अंधेरा होने की वजह से पानी में कुछ नहीं दिख रहा था। पानी में डूबे लोगों को आवाज के सहारे ही बचाया गया। अंधेरे में कौन कहां है या नहीं पता चल पाया और किस ओर है या है भी नहीं, यह लोगों को पता चल पाया। इससे एक ही झटके में 13 की जान चली गई।

मेधावी विद्यार्थियों की शिक्षा में बाधा ना बने आर्थिक अभाव : ए. श्रीजा

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार और राज्य शिक्षा केंद्र स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भोपाल में हुआ राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने पर हुआ मंथन भोपाल आर्थिक अभाव के कारण किसी भी मेधावी विद्यार्थी की शिक्षा बाधित न हो, इस दिशा में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) देश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की शैक्षिक निरंतरता के लिए एक बड़ा संबल है। यह बात भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार तथा भारतीय आर्थिक सेवा की अधिकारी श्रीमती ए. श्रीजा ने राजधानी भोपाल में कही। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार और राज्य शिक्षा केंद्र स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को एक निजी होटल में राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की आर्थिक सलाहकार तथा भारतीय आर्थिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी श्रीमती ए. श्रीजा ने कहा कि अक्सर कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चे किशोरावस्था में ही पढ़ाई के स्थान पर आजीविका अर्जित करने की ओर ध्यान देने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप उनकी शिक्षा प्रभावित होती है। वहीं, छोटी-मोटी मेहनत-मजदूरी से वे न तो अपने परिवार की आर्थिक कठिनाइयों को दूर कर पाते हैं और न ही अपने भविष्य को बेहतर बना पाते हैं। ऐसे परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने और उनकी शैक्षणिक निरंतरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। कक्षा 9 से 12 तक प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये की छात्रवृत्ति राज्य शिक्षा केंद्र के संयुक्त संचालक श्री प्राचीश जैन ने कहा कि राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका प्रमुख उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी विद्यार्थियों को कक्षा 8 के बाद उन्हें माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर तक शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक, निर्धारित पात्रता एवं नवीनीकरण संबंधी शर्तें पूरी करने पर, प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इस प्रकार पात्र विद्यार्थी अधिकतम चार वर्षों में कुल 48 हजार रुपये की छात्रवृत्ति का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। छात्रवृत्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है। संयुक्त संचालक श्री जैन ने कहा कि, कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र एवं मेधावी विद्यार्थियों को जानकारी के अभाव, आवेदन में त्रुटियों अथवा सत्यापन में देरी के कारण छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित न रहना पड़े। इसके लिए अधिकारियों एवं शिक्षकों को योजना की पात्रता शर्तों, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीयन तथा संस्थान एवं जिला स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया के संबंध में भारत सरकार के अधिकारियों और योजना से जुडी टीम के सदस्यों ने सहभागियों को समुचित मार्गदर्शन भी प्रदान किया है। प्रदेश में योजना के और अधिक प्रभावी क्रियान्वयन से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही विद्यालयों, शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर छात्रवृत्ति का लाभ अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। पात्रता और चयन के प्रमुख नियम उल्लेखनीय है कि योजना अंतर्गत शासकीय, शासकीय अनुदान प्राप्त एवं स्थानीय निकाय के विद्यालयों में कक्षा 8 में अध्ययनरत ऐसे विद्यार्थियों को लाभ प्राप्त होता है, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक ना हो। साथ ही विद्यार्थी ने कक्षा 7 में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों को प्राप्तांक में 5 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाती है। योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों का चयन मानसिक योग्यता एवं शैक्षिक अभिरुचि परीक्षण के आधार पर राज्य स्तरीय परीक्षा के माध्यम से होता है। कार्यशाला में भारत सरकार के राष्ट्रीय स्कॉलरशिप प्रकोष्ठ की संचालक श्रीमती श्रीकला पी. वेणुगोपाल, सलाहकार श्री राघवेन्द्र खरे, मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, योजना से जुड़े विभिन्न जिलों के नोडल अधिकारी तथा अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यशाला में योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति से लाभान्वित चयनित विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की। विद्यार्थियों ने अपने परिवारों की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रीय मीन्स-कम-मेरिट छात्रवृत्ति योजना से प्राप्त आर्थिक सहायता ने उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। उन्होंने छात्रवृत्ति से मिले संबल के आधार पर अपनी वर्तमान शैक्षणिक उपलब्धियों और भविष्य की तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी।  

सैनिकों के पुनर्वास और कौशल विकास में क्रिस्प की भूमिका सराहनीय : सुकृति लिखी

भोपाल सैनिकों के पुनर्वास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में सेंटर फॉर रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल स्टॉफ परफॉर्मेंस (क्रिस्प), भोपाल में बुधवार को रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग की सचिव सुकृति लिखी ने दौरा किया और डी.जी.आर प्रशिक्षणार्थियों से संवाद कर उनके अनुभव जाने। क्रिस्प के कार्यों से प्रभावित हुईं सुकृति लिखी मुख्य अतिथि सुकृति लिखी ने डी.जी.आर के प्रशिक्षणार्थियों से बातचीत की और उनके प्रशिक्षण अनुभवों को जाना। उन्होंने क्रिस्प में संचालित प्रशिक्षण गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा, “डी.जी.आर से जुड़े लोग इस संस्थान की तारीफ करते हैं। यहां आकर जब मैंने कार्यक्रमों का जायजा लिया, तो मैं भी प्रभावित हुई कि क्रिस्प वास्तव में इस क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य कर रहा है।” उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अनुशासन, परिश्रम और अपनी क्षमताओं को पहचानना जरूरी: मेजर जनरल एसबीके सिंह महानिदेशक, पुनर्वास महानिदेशालय मेजर जनरल एसबीके सिंह, एसएम ने अपने लंबे अनुभव साझा करते हुए बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व सैनिक विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मेहनत, अनुशासन और कौशल के बल पर बेहतर करियर बना सकते हैं और अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग का पूरा लाभ उठाने और प्रशिक्षण के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण के साथ प्लेसमेंट पर भी जोर: एम.डी.कुर्रे क्रिस्प के प्रबंध संचालकबसंत कुर्रे ने संस्थान में संचालित विभिन्न कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा, “क्रिस्प के प्रबंध संचालककुर्रे ने बताया कि संस्थान द्वारा डी.जी.आर. के अंतर्गत अब तक 600 से अधिक सैनिकों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के साथ उनके प्लेसमेंट के लिए भी निरंतर प्रयास किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में सीनियर ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट, बिल्डिंग ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट, सीनियर सी.एन.सी. (प्रोग्रामिंग एंड ऑपरेशन) एग्जीक्यूटिव, 2डी एनीमेशन एंड मोशन ग्राफिक्स तथा ग्राफिक डिजाइन जैसे कोर्स शामिल हैं।” पूर्व सैनिकों को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना क्रिस्प की प्राथमिकता: संचालकवैद्य क्रिस्प के संचालक अमोल वैद्य ने कहा, “क्रिस्प का प्रयास है कि उन्हें आधुनिक तकनीक और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उनके अनुभव को नई दिशा दी जाए। डी.जी.आर. के साथ मिलकर संचालित किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद नए करियर अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।” क्रिस्प संचालकवैद्य ने आभार व्यक्त किया।  

भाजपा के शिक्षक एवं स्नातक मतदाता प्रमुख सम्मेलन में डिप्टी सीएम ने रखे विचार

लखनऊ लखनऊ खंड शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन की तैयारियों के क्रम में बुधवार को लखनऊ में आयोजित ‘शिक्षक/स्नातक मतदाता प्रमुख सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आगामी चुनाव की रणनीति, संगठनात्मक तैयारियों एवं जनसंपर्क अभियान पर चर्चा की। उन्होंने शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं से संवाद करते हुए कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षित वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उत्तर प्रदेश का योगदान निर्णायक रहेगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चुनाव में शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशियों को भारी बहुमत से विजय दिलाकर अपना विश्वास व्यक्त किया था। इस बार भी पार्टी उसी विश्वास और समर्थन की अपेक्षा लेकर मतदाताओं के बीच पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक समाज न केवल शिक्षा एवं बौद्धिक विकास की आधारशिला है, बल्कि सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में भी उसकी अहम भूमिका है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण योगदान देगा। प्रदेश में विकास, सुशासन और जनकल्याण के विभिन्न प्रयासों के साथ एक नए उत्तर प्रदेश का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस विकास यात्रा में शिक्षकों, स्नातकों और प्रबुद्ध वर्ग की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उपमुख्यमंत्री ने लखनऊ में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के नेतृत्व में राजधानी में अनेक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को गति मिली है। इन प्रयासों से लखनऊ के बुनियादी ढांचे और विकास को नई दिशा मिली है। निरंतर स्थापित करें संवाद उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से आगामी निर्वाचन की तैयारियों को गंभीरता से आगे बढ़ाने, मतदाताओं से निरंतर संवाद स्थापित करने तथा केंद्र एवं प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उपमुख्यमंत्री ने दोनों भाजपा प्रत्याशियों की विजय सुनिश्चित करने के लिए सभी कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं का समर्पण और मतदाताओं के साथ निरंतर संवाद चुनावी तैयारियों के महत्वपूर्ण आधार हैं। इनकी रही उपस्थिति इस अवसर पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह, महामंत्री संजय राय, प्रदेश मंत्री अवधेश श्रीवास्तव, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष नितिन मित्तल, महानगर अध्यक्ष, आनंद द्विवेदी, महापौर, लखनऊ सुषमा खर्कवाल, क्षेत्रीय महामंत्री एवं संयोजक राजीव मिश्रा, सदस्य, विधान परिषद रामचंद्र प्रधान, प्रत्याशी, लखनऊ खंड शिक्षक एवं सदस्य, विधान परिषद उमेश द्विवेदी, प्रत्याशी, लखनऊ खंड स्नातक एवं  सदस्य, विधान परिषद इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

24 वैकल्पिक शालाओं से लगभग 800 बच्चों को जोड़ने की पहल

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले व्यक्तियों और उनके परिवारों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं बेहतर जीवन जीने का अवसर प्रदान रही है। इसी दिशा में कोण्डागांव जिले के मर्दापाल क्षेत्र के ग्राम चांगेर निवासी  चीतुराम शोरी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। कभी हिंसा के रास्ते पर चले गए चीतुराम ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आज शासन की पुनर्वास नीति और विशेष परियोजना के तहत मिले पक्के आवास ने उनके परिवार को एक सुरक्षित आशियाना प्रदान किया है। पुनर्वास से मिली नई राह, परिवार को मिला सुरक्षित आशियाना चीतुराम शोरी पूर्व में हिंसा के रास्ते पर चले गए थे, लेकिन उन्होंने माओवाद के हिंसात्मक मार्ग को छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। उनके इस निर्णय के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत शासन की योजनाओं से उन्हें लाभान्वित किया गया। जिला प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पित परिवारों के लिए संचालित विशेष परियोजना आवास के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का मकान स्वीकृत किया गया। योजना के अंतर्गत उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने निर्धारित समय में अपने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। अब वे अपने परिवार के साथ इसी मकान में रह रहे हैं। पक्के घर की उपलब्धता से उनके परिवार को सुरक्षित आवास मिला है और भविष्य के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। आत्मसमर्पित परिवारों के जीवन में बदलाव की पहल  छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव की पुनर्वास नीति केवल हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का अवसर ही नहीं देती, बल्कि आत्मसमर्पित व्यक्तियों और उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने का भी प्रयास करती है। आवास सहित कई बुनियादी सुविधाएं एवं शासन की योजनाओं का लाभ मिलने से ऐसे परिवारों को स्थायित्व मिला है और वे अपने बच्चों के भविष्य, परिवार की जरूरतों तथा आजीविका के अवसर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।  परिवार को मिला सुरक्षित और स्थायी आशियाना  माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास की पहुंच सुनिश्चित करने और समाज की मुख्यधारा से दूर हुए परिवारों को जोड़ने के लिए पुनर्वास के साथ-साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना महत्वपूर्ण है।  चीतुराम को मिला पक्का आवास इसी प्रयास का बेहतर उदाहरण है, जहां शासकीय सहायता ने उनके परिवार को सुरक्षित रहने की स्थायी सुविधा उपलब्ध कराई है। आज वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पक्का मकान उनके लिए केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि नए जीवन की स्वर्णिम शुरुआत और बेहतर भविष्य की उम्मीद का आधार भी है। इस सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खण्डपीठ ने राज्य परिवहन प्राधिकरण गठन अधिसूचना को माना वैध

भोपाल मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खण्डपीठ मे निजी बस ऑपरेटर हरिशंकर सिंह पटेल एवं अन्य द्वारा रिट याचिका क्रमांक 15560/2026 दायर किया गया जिसमे राज्य परिवहन प्राधिकरण के गठन से संबंधित राज्य शासन की अधिसूचना दिनांक 10 अगस्त 2026 की वैधता को चुनौती दी गई थी। माननीय न्यायमूर्ति श्री जी. एस. अहलूवालिया एवं माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती अनुराधा शुक्ला द्वारा वादी पक्ष को नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान कर सुना गया ओर राज्य शासन द्वारा भी माननीय न्यायालय के समक्ष अधिसूचना की वैधानिकता के अनुरूप सशक्त पक्ष रखे गए। माननीय न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों के अभिवचनो को दृष्टिगत रखते हुए राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना को विधि के अनुरूप एवं वैध माना गया तथा रिट याचिका क्रमांक 15560/2026 को खारिज कर राज्य शासन को विधि के अनुसार आगे की कार्यवाही करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई। इस निर्णय से राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना की वैधानिकता की पुष्टि होने से इससे संबंधित वैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्य शासन को आगे की कार्यवाही करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि इस याचिका के निरस्त होने से अंतरराज्यीय परमिट आवेदनों एवं अन्य संबंधित विषयों पर राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा निर्णय लिया जा सकेगा।

28.86 लाख अभ्यर्थियों ने किया था आवेदन, 4,481 महिला अभ्यर्थी भी सफल

चयनित अभ्यर्थियों की सूची बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर उपलब्ध अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइज्ड स्कोर नवंबर के तीसरे सप्ताह में वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे लखनऊ ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 का अंतिम चयन परिणाम घोषित कर दिया है। इस भर्ती के तहत विभिन्न पदों पर कुल 32,679 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। चयनित अभ्यर्थियों की सूची बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट [uppbpb.gov.in](https://uppbpb.gov.in/) पर उपलब्ध है। भर्ती के लिए कुल 28,86,797 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इस भर्ती में आरक्षी नागरिक पुलिस के 10,469, आरक्षी पीएसी/सशस्त्र पुलिस के 15,131, आरक्षी विशेष सुरक्षा बल के 1,341, महिला बटालियन के लिए महिला आरक्षी के 2,282, आरक्षी घुड़सवार पुलिस के 71, जेल वार्डर (पुरुष) के 3,279 और जेल वार्डर (महिला) के 106 पद शामिल हैं। कुल चयनित अभ्यर्थियों में 4,481 महिलाएं भी शामिल हैं। 75 जिलों में हुई लिखित परीक्षा, तीन चरणों में पूरी हुई प्रक्रिया भर्ती बोर्ड ने 8, 9 और 10 जून 2026 को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में छह पालियों में लिखित परीक्षा आयोजित की थी। लिखित परीक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर 76,184 अभ्यर्थियों को डॉक्युमेंट्स की जांच एवं शारीरिक मानक परीक्षा (डीवी/पीएसटी) के लिए चयनित किया गया। यह प्रक्रिया 17 से 31 अगस्त तक चली। इसके बाद सफल अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) 1 से 11 अक्टूबर तक आयोजित की गई। पारदर्शी भर्ती के लिए तकनीक का सहारा भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी की व्यवस्था की गई। शारीरिक दक्षता परीक्षा में अभ्यर्थियों की दौड़ का समय सटीक रूप से दर्ज करने के लिए आरएफआईडी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। वहीं, लिखित परीक्षा केंद्रों, डीवी/पीएसटी केंद्रों और पीईटी स्थलों पर व्यापक सीसीटीवी कवरेज के साथ जनपद एवं बोर्ड स्तर के कंट्रोल रूम से रियल टाइम मॉनिटरिंग की गई। मेरिट और वरीयता के आधार पर अंतिम चयन अंतिम परिणाम लिखित परीक्षा के नॉर्मलाइज्ड स्कोर की रैंकिंग और अभ्यर्थियों की ओर से आवेदन पत्र में दी गई पदों की वरीयता के आधार पर तैयार किया गया। चयन में उत्तर प्रदेश शासन की ओर से समय-समय पर जारी आरक्षण नीति के प्रासंगिक प्रावधानों का पालन किया गया। भर्ती बोर्ड के अनुसार, लिखित परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइज्ड स्कोर नवंबर के तीसरे सप्ताह में वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। स्कोर देखने की प्रक्रिया के संबंध में अलग से सूचना प्रकाशित की जाएगी। बोर्ड ने सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए भर्ती परीक्षा के संचालन में सहयोग करने वाले सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।