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भाजपा के शिक्षक एवं स्नातक मतदाता प्रमुख सम्मेलन में डिप्टी सीएम ने रखे विचार

लखनऊ लखनऊ खंड शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन की तैयारियों के क्रम में बुधवार को लखनऊ में आयोजित ‘शिक्षक/स्नातक मतदाता प्रमुख सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आगामी चुनाव की रणनीति, संगठनात्मक तैयारियों एवं जनसंपर्क अभियान पर चर्चा की। उन्होंने शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं से संवाद करते हुए कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षित वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उत्तर प्रदेश का योगदान निर्णायक रहेगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चुनाव में शिक्षक एवं स्नातक मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशियों को भारी बहुमत से विजय दिलाकर अपना विश्वास व्यक्त किया था। इस बार भी पार्टी उसी विश्वास और समर्थन की अपेक्षा लेकर मतदाताओं के बीच पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक समाज न केवल शिक्षा एवं बौद्धिक विकास की आधारशिला है, बल्कि सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में भी उसकी अहम भूमिका है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया गया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण योगदान देगा। प्रदेश में विकास, सुशासन और जनकल्याण के विभिन्न प्रयासों के साथ एक नए उत्तर प्रदेश का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस विकास यात्रा में शिक्षकों, स्नातकों और प्रबुद्ध वर्ग की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उपमुख्यमंत्री ने लखनऊ में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के नेतृत्व में राजधानी में अनेक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को गति मिली है। इन प्रयासों से लखनऊ के बुनियादी ढांचे और विकास को नई दिशा मिली है। निरंतर स्थापित करें संवाद उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से आगामी निर्वाचन की तैयारियों को गंभीरता से आगे बढ़ाने, मतदाताओं से निरंतर संवाद स्थापित करने तथा केंद्र एवं प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उपमुख्यमंत्री ने दोनों भाजपा प्रत्याशियों की विजय सुनिश्चित करने के लिए सभी कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं का समर्पण और मतदाताओं के साथ निरंतर संवाद चुनावी तैयारियों के महत्वपूर्ण आधार हैं। इनकी रही उपस्थिति इस अवसर पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह, महामंत्री संजय राय, प्रदेश मंत्री अवधेश श्रीवास्तव, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष नितिन मित्तल, महानगर अध्यक्ष, आनंद द्विवेदी, महापौर, लखनऊ सुषमा खर्कवाल, क्षेत्रीय महामंत्री एवं संयोजक राजीव मिश्रा, सदस्य, विधान परिषद रामचंद्र प्रधान, प्रत्याशी, लखनऊ खंड शिक्षक एवं सदस्य, विधान परिषद उमेश द्विवेदी, प्रत्याशी, लखनऊ खंड स्नातक एवं  सदस्य, विधान परिषद इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

24 वैकल्पिक शालाओं से लगभग 800 बच्चों को जोड़ने की पहल

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले व्यक्तियों और उनके परिवारों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं बेहतर जीवन जीने का अवसर प्रदान रही है। इसी दिशा में कोण्डागांव जिले के मर्दापाल क्षेत्र के ग्राम चांगेर निवासी  चीतुराम शोरी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। कभी हिंसा के रास्ते पर चले गए चीतुराम ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आज शासन की पुनर्वास नीति और विशेष परियोजना के तहत मिले पक्के आवास ने उनके परिवार को एक सुरक्षित आशियाना प्रदान किया है। पुनर्वास से मिली नई राह, परिवार को मिला सुरक्षित आशियाना चीतुराम शोरी पूर्व में हिंसा के रास्ते पर चले गए थे, लेकिन उन्होंने माओवाद के हिंसात्मक मार्ग को छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। उनके इस निर्णय के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया के तहत शासन की योजनाओं से उन्हें लाभान्वित किया गया। जिला प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पित परिवारों के लिए संचालित विशेष परियोजना आवास के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का मकान स्वीकृत किया गया। योजना के अंतर्गत उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने निर्धारित समय में अपने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। अब वे अपने परिवार के साथ इसी मकान में रह रहे हैं। पक्के घर की उपलब्धता से उनके परिवार को सुरक्षित आवास मिला है और भविष्य के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है। आत्मसमर्पित परिवारों के जीवन में बदलाव की पहल  छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव की पुनर्वास नीति केवल हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का अवसर ही नहीं देती, बल्कि आत्मसमर्पित व्यक्तियों और उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने का भी प्रयास करती है। आवास सहित कई बुनियादी सुविधाएं एवं शासन की योजनाओं का लाभ मिलने से ऐसे परिवारों को स्थायित्व मिला है और वे अपने बच्चों के भविष्य, परिवार की जरूरतों तथा आजीविका के अवसर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।  परिवार को मिला सुरक्षित और स्थायी आशियाना  माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास की पहुंच सुनिश्चित करने और समाज की मुख्यधारा से दूर हुए परिवारों को जोड़ने के लिए पुनर्वास के साथ-साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना महत्वपूर्ण है।  चीतुराम को मिला पक्का आवास इसी प्रयास का बेहतर उदाहरण है, जहां शासकीय सहायता ने उनके परिवार को सुरक्षित रहने की स्थायी सुविधा उपलब्ध कराई है। आज वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पक्का मकान उनके लिए केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि नए जीवन की स्वर्णिम शुरुआत और बेहतर भविष्य की उम्मीद का आधार भी है। इस सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खण्डपीठ ने राज्य परिवहन प्राधिकरण गठन अधिसूचना को माना वैध

भोपाल मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खण्डपीठ मे निजी बस ऑपरेटर हरिशंकर सिंह पटेल एवं अन्य द्वारा रिट याचिका क्रमांक 15560/2026 दायर किया गया जिसमे राज्य परिवहन प्राधिकरण के गठन से संबंधित राज्य शासन की अधिसूचना दिनांक 10 अगस्त 2026 की वैधता को चुनौती दी गई थी। माननीय न्यायमूर्ति श्री जी. एस. अहलूवालिया एवं माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती अनुराधा शुक्ला द्वारा वादी पक्ष को नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान कर सुना गया ओर राज्य शासन द्वारा भी माननीय न्यायालय के समक्ष अधिसूचना की वैधानिकता के अनुरूप सशक्त पक्ष रखे गए। माननीय न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों के अभिवचनो को दृष्टिगत रखते हुए राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना को विधि के अनुरूप एवं वैध माना गया तथा रिट याचिका क्रमांक 15560/2026 को खारिज कर राज्य शासन को विधि के अनुसार आगे की कार्यवाही करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई। इस निर्णय से राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना की वैधानिकता की पुष्टि होने से इससे संबंधित वैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्य शासन को आगे की कार्यवाही करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि इस याचिका के निरस्त होने से अंतरराज्यीय परमिट आवेदनों एवं अन्य संबंधित विषयों पर राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा निर्णय लिया जा सकेगा।

28.86 लाख अभ्यर्थियों ने किया था आवेदन, 4,481 महिला अभ्यर्थी भी सफल

चयनित अभ्यर्थियों की सूची बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर उपलब्ध अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइज्ड स्कोर नवंबर के तीसरे सप्ताह में वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे लखनऊ ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 का अंतिम चयन परिणाम घोषित कर दिया है। इस भर्ती के तहत विभिन्न पदों पर कुल 32,679 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। चयनित अभ्यर्थियों की सूची बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट [uppbpb.gov.in](https://uppbpb.gov.in/) पर उपलब्ध है। भर्ती के लिए कुल 28,86,797 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इस भर्ती में आरक्षी नागरिक पुलिस के 10,469, आरक्षी पीएसी/सशस्त्र पुलिस के 15,131, आरक्षी विशेष सुरक्षा बल के 1,341, महिला बटालियन के लिए महिला आरक्षी के 2,282, आरक्षी घुड़सवार पुलिस के 71, जेल वार्डर (पुरुष) के 3,279 और जेल वार्डर (महिला) के 106 पद शामिल हैं। कुल चयनित अभ्यर्थियों में 4,481 महिलाएं भी शामिल हैं। 75 जिलों में हुई लिखित परीक्षा, तीन चरणों में पूरी हुई प्रक्रिया भर्ती बोर्ड ने 8, 9 और 10 जून 2026 को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में छह पालियों में लिखित परीक्षा आयोजित की थी। लिखित परीक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर 76,184 अभ्यर्थियों को डॉक्युमेंट्स की जांच एवं शारीरिक मानक परीक्षा (डीवी/पीएसटी) के लिए चयनित किया गया। यह प्रक्रिया 17 से 31 अगस्त तक चली। इसके बाद सफल अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) 1 से 11 अक्टूबर तक आयोजित की गई। पारदर्शी भर्ती के लिए तकनीक का सहारा भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी की व्यवस्था की गई। शारीरिक दक्षता परीक्षा में अभ्यर्थियों की दौड़ का समय सटीक रूप से दर्ज करने के लिए आरएफआईडी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। वहीं, लिखित परीक्षा केंद्रों, डीवी/पीएसटी केंद्रों और पीईटी स्थलों पर व्यापक सीसीटीवी कवरेज के साथ जनपद एवं बोर्ड स्तर के कंट्रोल रूम से रियल टाइम मॉनिटरिंग की गई। मेरिट और वरीयता के आधार पर अंतिम चयन अंतिम परिणाम लिखित परीक्षा के नॉर्मलाइज्ड स्कोर की रैंकिंग और अभ्यर्थियों की ओर से आवेदन पत्र में दी गई पदों की वरीयता के आधार पर तैयार किया गया। चयन में उत्तर प्रदेश शासन की ओर से समय-समय पर जारी आरक्षण नीति के प्रासंगिक प्रावधानों का पालन किया गया। भर्ती बोर्ड के अनुसार, लिखित परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइज्ड स्कोर नवंबर के तीसरे सप्ताह में वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। स्कोर देखने की प्रक्रिया के संबंध में अलग से सूचना प्रकाशित की जाएगी। बोर्ड ने सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए भर्ती परीक्षा के संचालन में सहयोग करने वाले सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

नगर निकायों की आर्थिक मजबूती पर मंथन

छठे राज्य वित्त आयोग के सम्मेलन में 17 नगर निगमों के महापौरों ने बताईं प्राथमिकताएं लखनऊ के विस्तारित क्षेत्रों के विकास के लिए 7,603 करोड़ रुपये की वित्तीय जरूरत, महापौर सुषमा खर्कवाल ने रखीं मांगें नगर निकायों की वित्तीय आत्मनिर्भरता आधुनिक शहरों के विकास का आधार- सुरेश खन्ना, वित्त मंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शहरी विकास को गति देने और नगर निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में वित्तीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में नगर निकायों की आय बढ़ाने, नागरिक सुविधाओं का विस्तार करने और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि नगर निकायों की वित्तीय आत्मनिर्भरता ही सशक्त और आधुनिक शहरों के विकास का आधार है। बढ़ते शहरीकरण के बीच नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निकायों को अपनी आय बढ़ाने, वित्तीय प्रबंधन सुदृढ़ करने और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना होगा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को गोमती नगर स्थित होटल ताज महल में छठे राज्य वित्त आयोग, यूनिसेफ और डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'शहरों की बात सुनना, शहरी चुनौतियों का समाधान' विषयक सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। सम्मेलन में प्रदेश के 17 नगर निगमों के महापौरों ने शहरी विकास की चुनौतियों और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया। नगर निकायों की आय बढ़ाने और वित्तीय प्रबंधन पर जोर वित्त मंत्री ने स्वच्छता, सीवरेज व्यवस्था, सेप्टेज प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को शहरी विकास की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया। सम्मेलन में संपत्ति कर का दायरा बढ़ाने, कर संग्रह में सुधार, उपयोगकर्ता शुल्क और नगर निकायों की परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग से आय बढ़ाने के उपायों पर मंथन हुआ। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए म्युनिसिपल बॉण्ड जैसे वित्तीय विकल्पों की उपयोगिता पर भी चर्चा की गई। धार्मिक एवं पर्यटन नगरों में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के कारण नागरिक सुविधाओं पर बढ़ने वाले दबाव को देखते हुए कानूनी प्रावधानों के तहत पर्यटन शुल्क अथवा नगर पर्यटन कर की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। महापौरों ने पेयजल, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, नगर नियोजन और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए। बच्चों, महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा सुरक्षित, स्वच्छ और समावेशी शहर विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। लखनऊ के विस्तारित क्षेत्रों के विकास के लिए 7,603 करोड़ रुपये की जरूरत सम्मेलन में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने गोमती नदी से सटे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान और आधारभूत संरचनाओं को पहुंची क्षति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में पुनर्निर्माण, जल निकासी और नागरिक सुविधाओं की बहाली के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। नगर निगम में शामिल विस्तारित क्षेत्रों के विकास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तुत प्रतिवेदन में लगभग 7,603 करोड़ रुपये की वित्तीय जरूरत का आकलन किया गया है। लखनऊ महापौर ने आयोग के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने छठे राज्य वित्त आयोग से नगर निगम का निर्धारित वित्तीय अंश दोगुना करने का आग्रह किया। उन्होंने विस्तारित क्षेत्रों में विकास, मार्ग प्रकाश और प्रशासनिक व्यय के लिए 2,184 करोड़ रुपये तथा पेयजल और सीवर व्यवस्था के लिए 5,825.85 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की मांग रखी। इसके अलावा स्टाम्प ड्यूटी की निर्धारित दो प्रतिशत धनराशि नगर निगम को देने का अनुरोध किया। महापौर ने यूपीसीडा की संपत्तियों और कुछ श्रेणियों को कर छूट से होने वाली राजस्व हानि की भरपाई की मांग भी उठाई। पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने पर भी मंथन सम्मेलन में 16वें वित्त आयोग और छठे राज्य वित्त आयोग की संवैधानिक भूमिकाओं के संदर्भ में नगर निकायों की वित्तीय स्थिति, संस्थागत क्षमता, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने पर चर्चा हुई। छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं अपर मुख्य सचिव, वित्त दीपक कुमार ने उद्घाटन संबोधन किया। आयोग के सचिव सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया। नील रतन, आलोक दीक्षित तथा यूनिसेफ के डॉ. सौमेन बागची और पियूष एंटनी सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

मुख्यमंत्री ने की अपील- अफवाहों पर ध्यान न दें उपभोक्ता, त्योहारों पर भी पर्याप्त व्यवस्था

गोदामों में 70.64 लाख कुंतल चीनी उपलब्ध, इसमें सहकारी मिलों में 13.40 लाख कुंतल, निगम के पास 2.93 लाख कुंतल व निजी चीनी मिलों के पास 54.3 लाख कुंतल से अधिक चीनी उपलब्ध गन्ना आयुक्त ने क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ की बैठक, चीनी स्टॉक सत्यापन एवं मूल्य नियंत्रण के दिए आवश्यक निर्देश सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिख चीनी उपलब्धता, मूल्यों की निगरानी व विभागीय टीमों का गठन कर सत्यापन-प्रवर्तन का अनुरोध लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में चीनी की उपलब्धता को लेकर बुधवार को विभागीय अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। इसके उपरांत चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसकी कहीं कोई कमी नहीं है, इसलिए प्रदेशवासी किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। त्योहारों पर भी पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहेगी। राज्य के गोदामों में वर्तमान में 70.64 लाख कुंतल चीनी का स्टॉक है। इसमें सहकारी चीनी के मिलों के पास 13.40 लाख कुंतल, निगम की चीनी मिलों के पास 2.93 लाख कुंतल तथा निजी क्षेत्र की चीनी मिलों के पास 54.3 लाख कुंतल से अधिक चीनी है। इसके अतिरिक्त चीनी मिलों का संचालन अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से प्रारंभ हो जाएगा, जिससे नवंबर में नए सत्र 2026-27 के अंतर्गत नई उत्पादित चीनी भी बहुत जल्द उपभोक्ताओं के लिए सुलभ हो जाएगी। इससे पहले केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने भी मंगलवार को उच्च स्तरीय समीक्षा कर चीनी मूल्यों पर प्रभावी नियंत्रण रखने और देश भर में इसकी सुचारु उपलब्धता बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके उपरांत बुधवार को गन्ना आयुक्त ने क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया चीनी के स्टॉक के भौतिक सत्यापन, मूल्य नियंत्रण सतत निगरानी, सत्यापन कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर जिलों में चीनी मिलों से चीनी निकासी, बाजार में उपलब्धता, उसके एक्स-मिल खुदरा एवं थोक मूल्यों की सतत निगरानी करने का अनुरोध किया है। साथ ही, इसके लिए विशेष विभागीय टीमों का गठन कर भौतिक सत्यापन और प्रवर्तन की कार्रवाई सख्ती से सुनिश्चित करने को कहा गया है। शासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि केंद्र सरकार के सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन हो और त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में चीनी की उपलब्धता सुचारु रूप से बनी रहे, ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

समिति प्रबंधकों और फड़मुंशियों को मिलेगी 2-2 लाख रुपए की सामाजिक सुरक्षा बीमा

रायपुर सरकार की कल्याणकारी पहलों के तहत इन जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को जोखिम सुरक्षा प्रदान करने के लिए समूह बीमा योजना के माध्यम से 2-2 लाख रुपये का सामाजिक सुरक्षा कवच (बीमा सुरक्षा) उपलब्ध कराया जाता है। छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज सहकारी समितियों के प्रबंधकों और फड़मुंशियों के लिए एक बड़ी राहत भरा कदम उठाया गया है। अब इन्हें दो-दो लाख रुपए की सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में लाया जाएगा। इसके साथ ही, समिति प्रबंधकों को सेवानिवृत्ति पर एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित की 27वीं वार्षिक साधारण सभा में कर्मचारी कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और अधोसंरचना विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। लंबित प्रकरणों का भुगतान और सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान बैठक में शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के पूर्व के लंबित प्रकरणों का संघ मद से चरणबद्ध तरीके से भुगतान करने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत 69 पात्र हितग्राहियों को ऑनलाइन माध्यम से सीधे राशि ट्रांसफर की गई। मैदानी स्तर पर दिन-रात मेहनत करने वाले समिति प्रबंधकों और फड़मुंशियों के लिए बीमा योजना के स्थान पर अब सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत दो-दो लाख रुपए की राशि का प्रावधान किया गया है। आधारभूत संरचनाओं को मिलेगा बढ़ावा साधारण सभा में यह भी तय किया गया कि जिन प्राथमिक सहकारी समितियों के पास अपने भवन नहीं हैं, उनके लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर नए भवनों का निर्माण किया जाएगा। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के वन धन विकास केंद्रों के लिए भी नए भवन बनाए जाएंगे, जिससे जनजातीय आजीविका और लघु वनोपज से जुड़ी गतिविधियों को और अधिक मजबूती मिलेगी। साथ ही, समितियों के कार्यालयों में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों के भव्य आयोजन के लिए पृथक से बजट का प्रावधान किया गया है। इस महत्वपूर्ण साधारण सभा में संघ के अध्यक्ष  रूपसाय सलाम, उपाध्यक्ष  यज्ञदत्त शर्मा, वन विभाग के सचिव  अमरनाथ प्रसाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  अरुण पांडेय तथा लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक मती संजीता गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति में सीपीसीटी से मिलेगी छूट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप राज्य शासन ने मध्यप्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए सहायक ग्रेड 3 और समकक्ष पदों पर पदोन्नति के लिए सीपीसीटी में छूट आदि से संबंधित समेकित निर्देश जारी किया है। अब जहां सहायक ग्रेड 3 के पद पर पदोन्नति के लिए 45 वर्ष से अधिक के कर्मियों को सीपीसीटी स्कोर कार्ड से पूरी छूट दी है वहां अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद निर्धारित कम्प्यूटर अर्हताएं प्राप्त करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का अवसर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के तहत सभी विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू होने के बाद आ रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए यह निर्देश जारी किए हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए कम्प्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (CPCT) एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की अनिवार्यता के संबंध में संशोधित निर्देश जारी किए हैं।सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को CPCT स्कोर कार्ड की अनिवार्यता से छूट प्रदान की गई है। साथ ही अन्य पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद निर्धारित कम्प्यूटर अर्हताएं प्राप्त करने के लिए अधिकतम 5 वर्ष का अवसर दिया गया है। अब सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखने वाले ऐसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिन्हें CPCT एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की अर्हता प्राप्त करना आवश्यक है, उन्हें पदोन्नति के बाद 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करना होगी तथा मान्यता प्राप्त संस्थान से एक वर्षीय कम्प्यूटर डिप्लोमा अथवा निर्धारित समकक्ष योग्यता प्राप्त करना होगी। यदि कर्मचारी 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में आवश्यक अर्हताएं प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो उनकी परिवीक्षा अवधि अधिकतम 3 वर्ष और बढ़ाई जा सकेगी। इस प्रकार उन्हें पदोन्नति के बाद कुल 5 वर्ष के भीतर निर्धारित योग्यता प्राप्त करनी होगी। इस अवधि में आवश्यक योग्यता प्राप्त नहीं करने पर संबंधित कर्मचारी को उसके मूल चतुर्थ श्रेणी पद पर वापस पदस्थ कर दिया जाएगा।उक्त प्रावधान केवल विभागीय पदोन्नति के मामलों में लागू होंगे। सीधी भर्ती आदि में नहीं मिलेगा लाभ सीधी भर्ती अथवा अन्य किसी माध्यम से होने वाली नियुक्तियों में CPCT एवं कम्प्यूटर डिप्लोमा की निर्धारित अर्हताएं यथावत अनिवार्य रहेंगी। 45 वर्ष से अधिक वालों को बड़ी राहत आदेश अनुसार शासकीय सेवक अपनी पदोन्नति की तिथि को 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें सहायक ग्रेड-3 पर पदोन्नति हेतु CPCT स्कोर कार्ड से छूट प्रदान की गई है, परंतु कम्प्यूटर दक्षता की अनिवार्यता बनी रहेगी।

जनदर्शन में उप मुख्यमंत्री ने सुनी नागरिकों की समस्याएं

रायपुर लोगों की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता :  अरुण साव नागरिकों की समस्याओं, मांगों एवं शिकायतों को सुनकर उनके निराकरण के लिए शासन-प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से लोरमी रेस्ट हाउस में जनदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने जनदर्शन में पहुंचे नागरिकों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं, मांगों एवं शिकायतों को गंभीरता से सुना। उन्होंने नागरिकों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे तथा प्राप्त आवेदनों पर संबंधित विभागों के माध्यम से नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।  लोगों की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता :  अरुण साव जनदर्शन कार्यक्रम में क्षेत्र के नागरिकों ने अपनी समस्याएं सीधे उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। इस दौरान लोगों ने अपनी आवश्यकताओं, स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़ी मांगों को सामने रखा। उप मुख्यमंत्री  साव ने नागरिकों की बातों को सुनते हुए उनके आवेदनों पर नियमानुसार कार्यवाही करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं का समाधान शासन की प्राथमिकता है और लोगों को अपनी जायज मांगों के निराकरण के लिए अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। जनदर्शन में 520 से अधिक आवेदकों ने उनके समक्ष अपनी मांगें एवं समस्याएं रखीं।  लोगों की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की प्राथमिकता :  अरुण साव उप मुख्यमंत्री  साव ने ग्राम तुलसाघाट निवासी  लाल दास खाण्डेकर की मांग पर तत्काल श्रवण यंत्र प्रदान कर लाभान्वित किया। इसके साथ ही ग्राम लाखासार निवासी  हितेश साहू को आय प्रमाण पत्र प्रदान किया। उन्होंने शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने कामना की कि मां दुर्गा की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली आए। उन्होंने इस पावन पर्व को आस्था, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बताते हुए सभी के सुखमय जीवन की कामना की। उप मुख्यमंत्री  साव ने कहा कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विकास एवं निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विकास कार्यों के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप अधोसंरचना को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देते हुए आवश्यकतानुसार कार्यवाही की जाएगी।  उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास में आम नागरिकों की आवश्यकताओं और सुझावों का महत्वपूर्ण योगदान है। जनदर्शन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों की समस्याओं को सीधे सुनने और उनके समाधान की दिशा में आवश्यक पहल करने का अवसर मिलता है। शासन की मंशा है कि आम नागरिकों को योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ मिले तथा उनकी समस्याओं का नियमानुसार निराकरण हो।  उप मुख्यमंत्री  साव ने धान खरीदी को लेकर कहा कि किसानों को धान विक्रय के दौरान किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए सभी स्तरों पर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। धान खरीदी प्रदेश के किसानों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए इसकी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित एवं सुचारू बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जनदर्शन में मुंगेली जिला पंचायत के सीईओ  गोकुल रावटे, वनमंडलाधिकारी  तन्यम कौशिक, लोरमी एसडीएम मती रेखा चंद्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के 5वें संस्करण का 15 अक्टूबर से शुभारंभ

चंबल के बैकवाटर्स पर साहसिक गतिविधियों और ग्लेम्पिंग का मिलेगा अनूठा अनुभव पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिलेगा संबल भोपाल पर्यटकों को प्रकृति के बीच रोमांच और सुकून का अनूठा अनुभव प्रदान करने के लिए मंदसौर के गांधीसागर जलाशय के सुरम्य बैकवाटर्स पर 'गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट' के पांचवें संस्करण का शुभारंभ 15 अक्टूबर को किया जा रहा है। एमपी टूरिज्म बोर्ड द्वारा लल्लूजी एंड सन्स एवं इवोक कैंपिंग के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। चंबल नदी के शांत जल विस्तार और प्राकृतिक परिवेश के बीच यह आयोजन साहसिक और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। 'लग्जरी टेंट सिटी' के साथ साहसिक गतिविधियों का आनंद रिट्रीट के तहत पर्यटकों के ठहरने के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित 'लग्जरी टेंट सिटी' (ग्लेम्पिंग) विकसित की गई है। यहाँ साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए जल, नभ और थल पर रोमांचक व्यवस्थाएं की गई हैं। लैंड एक्टिविटीज में हाई रोप, ज़िपलाइन, एटीवी राइड, साइकलिंग, ड्यूो साइकिल और एयरगन शूटिंग की सुविधा उपलब्ध है। हवाई रोमांच के लिए पैरामोटरिंग तथा जल-क्रीड़ा के प्रेमियों के लिए स्पीड बोट, जेट स्कीइंग, बनाना बोट, ड्रैगन बोट और कयाकिंग जैसी आधुनिक वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पर्यटकों के लिए जंगल सफारी, नाइट वॉक, स्टार गेज़िंग, बोट सफारी, बोट स्पा, योग-वेलनेस सत्र और इनडोर खेलों की भी व्यापक व्यवस्था की गई है। पर्यटकों को मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, लोक कलाओं, पारंपरिक जीवनशैली और प्रामाणिक स्थानीय व्यंजनों से परिचित कराने के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। वर्ष 2023 से प्रारंभ हुए इस आयोजन ने गांधीसागर क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख 'एडवेंचर टूरिज्म हब' के रूप में स्थापित किया है। इस वृहद आयोजन से न केवल देशी-विदेशी पर्यटकों की आमद बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट देश-प्रदेश के प्रमुख शहरों से सड़क एवं रेल मार्ग द्वारा सुलभ है। इंदौर से लगभग 250 से 300 किलोमीटर की दूरी सुगम राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के माध्यम से निजी वाहन, टैक्सी अथवा नियमित बस सेवाओं से 4 से 6 घंटे में तय की जा सकती है। रेल मार्ग से आने वाले पर्यटक नागदा या भवानी मंडी जंक्शन उतरकर वहाँ से स्थानीय परिवहन ले सकते हैं। वहीं, राजधानी भोपाल से लगभग 333 किलोमीटर का सफर सड़क मार्ग से 7 घंटे में पूरा किया जा सकता है। भोपाल से ट्रेन द्वारा आने वाले यात्री निकटतम रेलवे स्टेशनों—भवानी मंडी (55 किमी), मंदसौर (70 किमी) या नीमच (115 किमी) तक पहुँचकर वहाँ से टैक्सी अथवा बस द्वारा आसानी से गांधीसागर पहुँच सकते हैं।