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अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस अब सप्ताह में दो दिन

रायपुर सरगुजा संभाग एवं उत्तर छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारतीय रेलवे मंत्रालय ने ट्रेन संख्या 22407/22408 अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस के संचालन को साप्ताहिक से बढ़ाकर द्विसाप्ताहिक (सप्ताह में दो दिन) करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय का पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के लाखों यात्रियों के लिए जनहितैषी कदम बताया है। मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस उत्तर छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा के रूप में कार्य करती है। दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ट्रेन की आवृत्ति बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी, जिसे केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय ने गंभीरता से लेते हुए पूरा किया है। उन्होंने कहा कि ट्रेन के सप्ताह में दो दिन संचालन से यात्रियों को अधिक सुविधा और विकल्प उपलब्ध होंगे। विशेष रूप से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों तथा गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए बड़े शहरों की यात्रा करने वाले मरीजों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इससे यात्रा की प्रतीक्षा अवधि कम होगी और क्षेत्र की राजधानी दिल्ली सहित अन्य प्रमुख शहरों से बेहतर रेल संपर्क स्थापित होगा। मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश के दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। रेलवे के आधुनिकीकरण, नई रेल सेवाओं के विस्तार और यात्री सुविधाओं में लगातार वृद्धि का लाभ अब सरगुजा जैसे अंचलों तक भी पहुंच रहा है। यह निर्णय क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रेलवे मंत्रालय ने क्षेत्र की जनभावनाओं का सम्मान किया है।  अग्रवाल ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में उत्तर छत्तीसगढ़ को रेलवे क्षेत्र में और अधिक सुविधाएं, नई रेल सेवाएं तथा आधारभूत संरचना से जुड़ी नई सौगातें प्राप्त होंगी।  अग्रवाल ने कहा, “अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस को द्विसाप्ताहिक किए जाने का निर्णय सरगुजा संभाग के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और क्षेत्र की कनेक्टिविटी पहले से अधिक मजबूत होगी। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। यह निर्णय न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि सरगुजा क्षेत्र के आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास को भी नई दिशा प्रदान करेगा। क्षेत्रवासियों ने भी इस घोषणा का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय के प्रति खुशी व्यक्त की है।

टैंकर हादसे के बाद सड़क पर फैला तेल बना खतरा, फिसलकर गिरे दो बाइक सवार, फिर भड़की आग

वाड्रफनगर अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर बुधवार दोपहर राइस ब्रान तेल से भरा टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। टैंकर से तेजी से तेल बहने लगा और पक्की सड़क से होता हुआ नजदीक के खेत में जा पहुंचा। सड़क पर तेल फैलने से फिसलन बढ़ गई, जिससे दो मोटरसाइकिल सवार अनियंत्रित होकर गिर पड़े। इस बीच खेत में जल रहे कचरे तक तेल पहुंचते ही भीषण आग लग गई। सूचना पर बसंतपुर पुलिस और वाड्रफनगर से दमकल वाहन मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। घटना बलरामपुर जिले के फुलीडूमर घाट के पास हुई घटना छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बलरामपुर जिले के बसंतपुर थाना क्षेत्र में फुलीडूमर घाट के पास हुई। बताया जा रहा है कि लटोरी के नजदीक स्थित किसी राइस मिल से राइस ब्रान तेल को टैंकर में लोड कर रिफाइन करने के लिए बनारस स्थित फैक्ट्री ले जाया जा रहा था। टैंकर चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा और टैंकर सड़क पर ही पलट गया। टैंकर के पलटते ही उसमें भरा हजारों लीटर राइस ब्रान तेल तेजी से सड़क पर बहने लगा। गुजर रहे दो मोटरसाइकिल सवार अनियंत्रित होकर गिर पड़े सड़क पर तेल फैलने से इसका हिस्सा पूरी तरह चिकना हो गया। इसी दौरान वहां से गुजर रहे दो मोटरसाइकिल सवार फिसलन के कारण अनियंत्रित होकर गिर पड़े। दोनों को मामूली चोटें आईं। राहगीरों ने उन्हें उठाकर सड़क किनारे किया। हादसे के बाद मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई, जिससे कुछ देर के लिए जाम की स्थिति बन गई। खेत में जल रहा था कचरा, संपर्क में आते ही लगी आग बहता हुआ तेल सड़क किनारे स्थित एक खेत तक पहुंच गया। खेत में किसान ने कचरा जलाकर रखा था। तेल के संपर्क में आते ही कचरे ने भीषण आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और लपटें दूर तक दिखाई देने लगीं। घटना की जानकारी मिलते ही बसंतपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। तेल में लगी आग पर काबू पाना स्थानीय स्तर पर संभव नहीं था। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया इस पर वाड्रफनगर से दमकल वाहन बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। तब तक खेत का बड़ा हिस्सा और सड़क किनारे की झाड़ियां जल चुकी थीं। प्रारंभिक जांच में मोड़ पर नियंत्रण खोना हादसे की वजह मानी जा रही है।  

9 दिन की देरी के बाद प्रदेश पहुंचा मानसून, दो सीमाओं से हुई दमदार दस्तक

भोपाल  इस बार दक्षिण–पश्चिम मानसून की जोरदार एंट्री प्रदेश की दो सीमाओं से हुई है। प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी इलाकों से मानसून बुधवार को दाखिल हुआ। अहम बात यह है कि राजधानी भोपाल की दहलीज पर मानसून पहुंच गया है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं हुई है, लेकिन नर्मदापुरम तक मानसून पहुंच गया है, जो इस बात का संकेत है कि मानसून भोपाल से काफी करीब है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अलीराजपुर, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी और अनूपपुर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसके चलते राजधानी समेत प्रदेश के दक्षिण हिस्सों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जोरदार आंधी–तूफान के साथ कहीं हल्की तो कहीं तेज वर्षा हुई। 9 दिन की देरी से हुई एंट्री मौसम केंद्र के पूर्वानुमान अधिकारी अरुण शर्मा ने बताया कि प्रदेश में मानसून के कदम रखने की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। लेकिन इस बार मानसून तय समय से 9 दिन की देरी से पहुंचा। अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के पूरे मध्य प्रदेश को कवर कर लेगा। वर्ष 2020 में 15 जून को पहुंचा था मानसून दस साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मानसून वर्ष 2020 में 15 जून को पहुंचा था। उसके बाद से अब तक एक भी बार तय समय में मानसून नहीं आया। पिछले साल 16 जून को प्रदेश में दाखिल हुआ था और राजधानी भोपाल में इसकी एंट्री 18 जून को हुई थी। राजधानी में शाम को हुई झमाझम वर्षा प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही राजधानी भोपाल में बुधवार शाम को गरज–चमक के साथ झमाझम वर्षा हुई । दिन में तीखी धूप से राजधानीवासी बेहाल थे, शाम को अचानक आसमान पर काले बादल छाए और तेज हवा चलने के साथ वर्षा हुई। इससे राजधानीवासियों को गर्मी और उमस से राहत महसूस हुई। अब तक सामान्य से 50 प्रतिशत कम हुई वर्षा एक जून से 24 जून तक प्रदेश में सामान्य के मुकाबले 50 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे कम वर्षा पूर्वी मध्य प्रदेश हुई। जहां वर्षा सामान्य से 70 प्रतिशत कम दर्ज की गई। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी वर्षा का आंकड़ा सामान्य से 32 प्रतिशत कम है। केंद्र ने 45 जिलों के लिए जारी किया अलर्ट ऑरेंज अलर्ट– भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, सतना, अनुपपूर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, पांढ़ुर्णा। येलो अलर्ट– सीहोर। पिछले 10 सालों में मानसून प्रदेश में कब–कब पहुंचा वर्ष — प्रदेश — भोपाल 2016 — 19 — 19 2017 — 22 — 26 2018– 24 — 27 2019 — 24 –28 2020 — 15 –23 2021 — 10 –11 2022 — 16 –26 2023 — 24 –24 2024 — 21 — 23 2025 — 16 — 18 2026 — 24 — 00 सुबह साढ़े आठ बजे से लेकर शाम साढ़े पांच बजे तक कहां कितनी हुई वर्षा शहर का नाम — वर्षा मिलीमीटर में बैतूल — 9.0 भोपाल — 2.0 धार — 4.0 इंदौर — 2.0 खरगौन — 8.0 रायसेन — 2.0 उज्जैन — 1.0 छिंदवाड़ा — 0.8  

सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को मिल रही बड़ी राहत, खेती की लागत में आई कमी

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों को खेती-किसानी के लिए आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में जशपुर जिले में प्रभावी पहल की जा रही है। जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को रियायती दरों पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उन्हें खेती के लिए आवश्यक सामग्री आसानी से मिल रही है और कृषि लागत में कमी आ रही है। जिले की विभिन्न सहकारी समितियों में खाद एवं बीज वितरण का कार्य लगातार जारी है। वर्तमान में किसानों को प्रति बोरी यूरिया 266.50 रुपये, डीएपी 1350 रुपये, सुपर फॉस्फेट पाउडर 551 रुपये, सुपर फॉस्फेट दानेदार 591 रुपये, जिंकेटेड सुपर फॉस्फेट 576 रुपये, टीएसपी 1300 रुपये, एनपीके 1850 से 1990 रुपये, पोटाश 1975 रुपये, नैनो यूरिया 500 एमएल 225 रुपये तथा नैनो डीएपी 600 रुपये की निर्धारित दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। जशपुर के महाराजा चौक स्थित सहकारी समिति सहित जिले की विभिन्न समितियों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में किसान खाद एवं बीज प्राप्त कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि शासन की इस व्यवस्था से खेती के लिए आवश्यक सामग्री सहज रूप से उपलब्ध हो रही है और उन्हें खुले बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। खाद लेने पहुंचे किसान रहमान साह ने बताया कि उचित दर पर खाद उपलब्ध होने से खेती की लागत कम हुई है और आर्थिक बोझ में राहत मिली है। उन्होंने कहा कि अब कृषि कार्यों के लिए ऋण या ब्याज पर पैसे लेने की आवश्यकता पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। इसी प्रकार सारूडीह के किसान गिरधारी यादव ने बताया कि पहले खाद, बीज एवं अन्य कृषि सामग्री के लिए अलग-अलग दुकानों के चक्कर लगाने पड़ते थे और अधिक कीमत चुकानी पड़ती थी। अब सहकारी समितियों के माध्यम से सभी आवश्यक सामग्री उचित मूल्य पर उपलब्ध हो रही है, जिससे किसानों को आर्थिक राहत मिल रही है। किसानों की सुविधा शासन की प्राथमिकता जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि ऋण, तकनीकी मार्गदर्शन तथा विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है। इससे खरीफ सीजन की तैयारियां सुचारू रूप से आगे बढ़ रही हैं और किसानों को खेती के लिए आवश्यक संसाधन समय पर मिल रहे हैं। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद एवं बीज केवल अधिकृत सहकारी समितियों एवं पंजीकृत विक्रेताओं से ही खरीदें तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें।

सालों के इंतजार के बाद बुरहानपुर के केले को GI टैग, किसानों में खुशी की लहर

बुरहानपुर   बुरहानपुर का केला पूरे देश के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर है. अब बुरहानपुर में उत्पादित केले को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है. हाल ही में बुरहापुर के केले को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (Geographical Indication) यानि जीआई टैग मिला है. इससे केला उत्पादक किसानों में खुशी की लहर है. बीते 15 सालों से बुरहानपुर के केले को जीआई टैग दिलाने की कोशिशें चल रही थीं।  सालाना औसतन 18 लाख मैट्रिक टन उत्पादन बुरहानपुर जिले में करीब 26 हजार हेक्टेयर रकबे में केला फसल लगाई जाती है. 18 हजार 640 किसान केला फसल लगाते हैं. 18 लाख मैट्रिक टन से ज्यादा उत्पादन होता है. अब केले को जीआई टैग मिलने से इसकी विशिष्टता को आधिकारिक मान्यता मिल गई है. अब किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम, व्यापक बाजार और निर्यात के नए अवसर मिलेंगे. इसके अलावा केला आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा. बुरहानपुर जिले में केला फसल का इतिहास पुराना है. सन् 1960 से यहां केले की फसल उगाई जा रही है।  खाड़ी देशों तक बुरहानपुर के केले की मिठास बुरहानपुर जिला प्रशासन के मुताबिक यहां की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ भूमि सहित विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां उत्पादित केला अपनी मिठास, आकर्षक रंग सहित उच्च स्तरीय क़्वालिटी के लिए देश-प्रदेश ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी विशेष पहचान रखता है. बुरहानपुर के केले की मिठास न सिर्फ देश में, बल्कि खाड़ी देशों में भी अपने स्वाद का जादू बिखेरती है. हर साल बड़ी मात्रा में केला यहां से विदेशों में सप्लाई किया जाता है।  बुरहानपुर में 55 से अधिक केला प्रोसेसिंग इकाइयां बुरहानपुर के केला व्यवसाय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोग जुड़े हैं. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत बुरहानपुर जिले में 55 से अधिक केला प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित की गई हैं. इन इकाइयों में केले से विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं. विधायक अर्चना चिटनिस ने बताया "बुरहानपुर के केले को जीआई टैग मिल गया है. विभिन्न विभागों, कृषि एवं उद्यानिकी विशेषज्ञों सहित संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने के बाद ये उपलब्धि मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वोकल फोर लोकल‘ और ‘लोकल टू ग्लोबल‘ विजन को बढ़ावा दिया है. इसी का ये परिणाम है।  क्या है जीआई टैग और क्या हैं इसके लाभ जियोग्राफिकल इंडिकेशन (Geographical Indication) यानि जीआई टैग एक प्रकार से उस उत्पाद के लिए प्रमाणपत्र है. जीआई टैग मिलने से उत्पाद को विशेष पहचान स्थान से जोड़कर मिलती है. जीआई टैग मिलने के बाद उत्पादकों की आय में वृद्धि होती है. क्योंकि उत्पाद की प्रामाणिकता साबित होती है. इस कारण उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अच्छी कीमत मिलती है। 

कतर का बड़ा प्रस्ताव, खाड़ी देशों के निवेश से ईरान की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है $300 बिलियन का सहारा

दोहा  कतर का मानना है कि खाड़ी देशों से ईरान से जुड़े इन्वेस्टमेंट मैकेनिज्म को फंड करने में मदद के लिए कहा जा सकता है. कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने खुद इस पर सहमति जताई है।  अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुलरहमान अल थानी का मानना है कि खाड़ी राज्य, ईरान के आर्थिक सुधार के लिए वित्तीय मदद दे सकते हैं. कतर के प्रधानमंत्री की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है।  दरअसल ये प्रस्तावित ढांचा 300 अरब डॉलर के निवेश कोष की रिपोर्टों से जुड़ा हुआ है. इस फंड का मकसद जंग के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालना और वहां मची अफरा-तफरी को संभालना है।  ईरान और अमेरिका के बीच मिडिएटर बना कतर इस मामले में कतर ईरान और अमेरिका के बीच मिडिएटर की तरह काम कर रहा है. इसके साथ ही, कतर ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज कराने और क्षेत्र में तनाव कम करने से जुड़ी वार्ताओं में भी सीधे तौर पर शामिल रहा है।  कतर ने खाड़ी देशों को तीन सुझाव दिए हैं, जिसके जरिए वो ईरान की मदद कर सकते हैं।      खाड़ी देश कई इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स के जरिए ईरान मदद कर सकते हैं.     वो फाइनेंसिंग मैकेनिज्म का हिस्सा बन सकते हैं,     खाड़ी देश आर्थिक विकास से जुड़ी पहलों में सहयोग दे सकते हैं. वार्ता के नतीजों पर टिका है भविष्य हालांकि, इस योजना को लेकर अभी तक किसी भी तरह की कमिटमेंट या फंडिंग का ऐलान नहीं हुआ है. ऐसे किसी भी फंड का बनना पूरी तरह से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के अंतिम नतीजों पर ही निर्भर करेगा. ये इस बात पर भी निर्भर करेगा कि दोनों देशों के बीच होने वाले अंतिम समझौते को किस तरह लागू किया जाता है।   

राज्यपाल रमेन डेका ने “प्रारंभ” पत्रिका के विशेषांक का किया विमोचन

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका द्वारा “सोसायटी फॉर एम्पावरमेंट” द्वारा प्रकाशित पत्रिका “प्रारंभ” का आज विमोचन किया गया। इस विशेषांक का संपादन डॉ. रूपेन्द्र कवी, उपसचिव (संवैधानिक प्रकोष्ठ), लोकभवन, रायपुर द्वारा किया गया है।                 यह विशेषांक “प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में जनजातीय ज्ञान की प्रासंगिकता” विषय पर आधारित है, जिसमें जनजातीय ज्ञान एवं पर्यावरण संरक्षण के परंपरागत दृष्टिकोणों को समाहित किया गया है।                इस अवसर पर राज्यपाल ने पत्रिका की विषयवस्तु की सराहना करते हुए कहा कि यह अंक वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान हेतु महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। उन्होंने संपादकीय टीम को बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान की।

खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए PM मोदी को ईरान का निमंत्रण, बढ़ी कूटनीतिक चर्चा

नई दिल्ली  ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेदेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार समारोह 5 जुलाई से 9 जुलाई कर आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, पीएम मोदी को मिले निमंत्रण के बारे में भारत की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है। 28 फरवरी को हुई थी खामेनेई की मौत तीन दशकों तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई थी, जो तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों का पहला दिन था। राजनयिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने भारतीय प्रधानमंत्री को अंतिम संस्कार समारोह के लिए आमंत्रित किया है। अंतिम संस्कार तेहरान और कोम में 5,6 और 7 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद शहर में होगा।  

प्रदेश में सुशासन की दिशा में बड़ा सुधार- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी खरीदी की राशि सीधे खातों में मिलेगी

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सुशासन की संकल्पना को साकार करने के लिए लगातार बड़े सुधारात्मक कदम उठा रही है। राज्य सरकार अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य करते हुए शासन की व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और जनहितैषी बनाने के लिए निरंतर नवाचार कर रही है।  आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं पसंद की साड़ी चयन करने की स्वतंत्रता             महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने विभाग में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी सुधार का निर्णय लेते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के लिए साड़ी की संचालनालय स्तर पर होने वाली केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। अब साड़ी खरीदी के लिए निर्धारित राशि सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में अंतरित की जाएगी। हाल के दिनों में साड़ी खरीदी प्रक्रिया को लेकर सामने आए विभिन्न मुद्दों तथा प्राप्त सुझावों का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। यह कदम न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुरूप साड़ी चयन करने की स्वतंत्रता भी प्रदान करेगा। डायरेक्ट बेनिफिट के माध्यम से राशि का ट्रांसफर          महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की स्पष्ट सोच है कि शासन की राशि अधिकतम रूप से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे लक्षित व्यक्ति तक पहुंचे, ताकि बिचौलियों और अनावश्यक प्रक्रियाओं की कोई गुंजाइश न रहे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी प्रदेश में अनेक पारदर्शी और तकनीक आधारित सुधार लागू कर सुशासन का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। विभाग का यह निर्णय उसी सोच का विस्तार है।  साड़ी का रंग एवं डिज़ाइन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी          मंत्री  राजवाड़े ने विभाग को निर्देशित किया है कि साड़ी का डिज़ाइन पूर्ववत रखा जाए तथा अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से परामर्श के बाद निर्धारित किया जाए। साड़ी का रंग एवं डिज़ाइन विभागीय स्तर पर निर्धारित कर उसकी जानकारी विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पूरे प्रदेश में एकरूपता बनी रहे। वहीं साड़ी के कपड़े जैसे कॉटन, सिंथेटिक अथवा अन्य विकल्पों का चयन स्थानीय स्तर पर स्वयं कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं कर सकेंगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका बहनों के प्रति विभाग पूरी तरह संवेदनशील         मंत्री  राजवाड़े ने कहा कि विभाग में वर्षों से चली आ रही व्यवस्थाओं की भी सतत समीक्षा की जा रही है और जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी वहां हितग्राहियों के हित में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।  राजवाड़े आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका बहनों के सम्मान, सुविधा और अधिकारों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है तथा उनके हितों की रक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित         उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को उनकी पहचान और एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म प्रदान करने का प्रावधान है, जिसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित है। प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग का यह निर्णय प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण आधारित प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे न केवल व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी बल्कि हितग्राहियों को निर्णय लेने का अधिकार भी मिलेगा और शासन की राशि का लाभ सीधे पात्र व्यक्तियों तक पहुंचेगा।

449 महिला एवं 123 पुरुष नव आरक्षक प्राप्त करेंगे आधुनिक पुलिसिंग, कानून, साइबर अपराध एवं जनसेवा आधारित प्रशिक्षण

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस पेशेवर , संवेदनशील एवं जनोन्मुखी पुलिसिंग को सुदृढ़ करने के लिए अपने मानव संसाधनों के क्षमता विकास पर निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी परिसर स्थित पुलिस प्रशिक्षण शाला (पीटीएस), भौंरी, भोपाल में 23 जून को5वें नव आरक्षक बैच के 572 नव आरक्षकों के बुनियादी प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ पुलिस उप महानिरीक्षक (ग्रामीण), भोपाल राजेश सिंह चंदेल के मुख्‍य आतिथ्‍य मेंहुआ। इस बैच में 449 महिला एवं 123 पुरुष नव आरक्षक शामिल हैं, जो पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती सहभागिता और सशक्त उपस्थिति को भी रेखांकित करता है। मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के मार्गदर्शन में संचालित यह प्रशिक्षण सत्र नव आरक्षकों को शारीरिक दक्षता, विधिक ज्ञान, पुलिसिंग कौशल, तकनीकी समझ, नेतृत्व क्षमता तथा जनसेवा के मूलभूत मूल्यों से परिचित कराएगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बदलते अपराध परिदृश्य, साइबर अपराध, महिला एवं बाल सुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग तथा नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग के विभिन्न आयामों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।ताकि वे आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप प्रभावी, संवेदनशील एवं जनोन्मुखी पुलिसिंग के लिए तैयार हो सकें। कार्यक्रम में उपनिदेशक मध्यप्रदेश अकादमी, भोपाल डॉ. संजय कुमार अग्रवाल, सहायक निदेशक प्रशिक्षण श्रीमती रश्मि पाण्डेय, उप पुलिस अधीक्षक नीरज नामदेव, राजीव त्रिपाठी, एडीपीओ श्रीमती सुचित्रा वर्मा, जितेंद्र अग्निहोत्रीसहित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी एवं पुलिस प्रशिक्षण शाला के वरिष्ठ अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित थे।