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वैद्यों के हित में योजनाओं की कार्ययोजना और भविष्य के रोडमैप पर हुई महत्वपूर्ण बैठक

रायपुर छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा 24 जून को रायपुर में वैद्यों के हितकारी योजनाओं की कार्ययोजना एवं भविष्य के रोडमैप पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने की। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों एवं सुदूर अंचलों से आए 8 वैद्य संघों के 60 प्रतिनिधि वैद्य शामिल हुए। वैद्य समुदाय के योगदान का किया गया सम्मान                  बैठक के प्रारंभ में बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम एवं उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने सभी वैद्य प्रतिनिधियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे. ए. सी. एस. राव ने बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए वैद्यों के संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। पारंपरिक ज्ञान को सहेजने के लिए आयोजित हो रहे वैद्य सम्मेलन                मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि पारंपरिक उपचार पद्धतियों और औषधीय ज्ञान को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से नियमित रूप से वैद्य सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 11 वैद्य सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 1 राज्य स्तरीय, 6 संभाग स्तरीय और 4 जिला स्तरीय सम्मेलन शामिल हैं। औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण का दिया जा रहा प्रशिक्षण              बोर्ड द्वारा वैद्यों को औषधीय पौधों की खेती, विनाश-विहीन विदोहन तकनीक तथा वनौषधियों के संरक्षण संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किए जाते हैं। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से वैद्य पारंपरिक उपचार पद्धतियों से जुड़े अपने अनुभवों और ज्ञान का आदान-प्रदान भी करते हैं। 37 वैद्यों का हुआ प्रमाणीकरण            वैद्यों की पारंपरिक उपचार पद्धतियों को मान्यता देने के उद्देश्य से बोर्ड द्वारा क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) के माध्यम से अब तक 37 वैद्यों का प्रमाणीकरण कराया गया है। इससे उनकी सेवाओं की विश्वसनीयता और पहचान को बढ़ावा मिला है। हीलर हर्बल गार्डन योजना से मिल रहा सहयोग             बोर्ड द्वारा संचालित हीलर हर्बल गार्डन योजना के तहत वैद्यों को उनके घर या बाड़ी में उपयोगी औषधीय पौधों का उद्यान विकसित करने के लिए तकनीकी एवं आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके साथ ही वैद्यों के निवास ग्रामों के विद्यालयों में स्कूल हर्बल गार्डन विकसित करने तथा उनकी देखरेख के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। निःशुल्क औषधीय पौधा वितरण और पल्वराइजर मशीन की सुविधा             बोर्ड द्वारा होम हर्बल गार्डन योजना के अंतर्गत निःशुल्क औषधीय पौधों का वितरण किया जा रहा है। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर वैद्यों को जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण में सुविधा देने के लिए राज्य के 28 जिलों में कुल 40 निःशुल्क पल्वराइजर मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बनी विस्तृत कार्ययोजना            बैठक में हीलर हर्बल गार्डन, स्कूल एवं होम हर्बल गार्डन, वैद्य सम्मेलन, प्रशिक्षण कार्यक्रम, वैद्य प्रमाणीकरण तथा पल्वराइजर मशीन वितरण जैसी योजनाओं के प्रभावी संचालन और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी वैद्य प्रतिनिधियों की सहमति से इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए। वैद्यों के संरक्षण और उत्थान के लिए बोर्ड प्रतिबद्ध           बैठक के अंत में अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने कहा कि बोर्ड राज्य के वैद्यों की स्वास्थ्य परंपराओं, पारंपरिक उपचार पद्धतियों, ज्ञान संरक्षण, क्षमता विकास और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।          वहीं उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने कहा कि वैद्यों की मांग के अनुरूप ग्राम पंचायतों के माध्यम से जड़ी-बूटी आधारित उपचार एवं परामर्श केंद्रों के लिए स्थान उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को और अधिक मजबूती मिल सके।

मानसून को लेकर नया अपडेट, 45 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट आईएमडी की चेतावनी: मध्य प्रदेश के 45 जिलों में मौसम बिगड़ने के आसार

भोपाल मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अब 27 से 30 जून के बीच बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) सक्रिय होने की संभावना है। इसके बाद ही मानसून के आगे बढ़ने की उम्मीद है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इस दौरान तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। भोपाल में तेज धूप, नौगांव सबसे गर्म राजधानी भोपाल में गुरुवार को दिनभर तेज धूप रही। बारिश नहीं होने के कारण उमस और गर्मी का असर बढ़ गया। प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। छतरपुर जिले का नौगांव गुरुवार को प्रदेश में सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री अधिक 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं मंडला में तापमान सामान्य से 4.9 डिग्री ज्यादा 37.2 डिग्री सेल्सियस रहा। दक्षिणी हिस्सों में आंधी और बौछारें प्रदेश के आसपास बने प्रेरित चक्रवात के प्रभाव से गुरुवार को दक्षिणी हिस्सों में मौसम बदला। कई जगह 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चली और गरज-चमक के साथ बौछारें हुईं। सबसे अधिक 11 मिलीमीटर वर्षा श्योपुर और बालाघाट जिले के मलाजखंड में दर्ज की गई। इसके अलावा इंदौर, खंडवा, शिवपुरी और छिंदवाड़ा में भी हल्की से तेज वर्षा हुई।   45 जिलों के लिए अलर्ट जारी मौसम केंद्र ने प्रदेश के 45 जिलों के लिए आरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। आरेंज अलर्ट: सीहोर, आगर येलो अलर्ट: भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगौन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनुपपूर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, मैहर और पांढ़ुर्णा। वर्षा आंकड़े (शाम साढ़े पांच बजे तक) शहर     वर्षा (मिलीमीटर) इंदौर     9.0 खंडवा     6.0 श्योपुर     11.0 शिवपुरी     4.0 छिंदवाड़ा     0.6 बालाघाट जिले का मलाजखंड     11.0 चार बड़े शहरों का तापमान शहर     अधिकतम तापमान     न्यूनतम तापमान भोपाल     32.8     22.0 इंदौर     33.9     21.5 ग्वालियर     40.5     29.5 जबलपुर     38.1     26.1

उज्जैन पुलिस प्रशिक्षण शाला में 637 नव आरक्षकों ने लिया साइबर जागरूकता प्रशिक्षण

भोपाल  पुलिस महानिदेशककैलाश मकवाणा के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित साइबर जागरूकता अभियान ‘सेफ क्लिक 2.0’ को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा व्यापक स्तर पर जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन में प्रशिक्षणरत नव आरक्षकों को 24 जून से 8 जुलाई 2026 तक साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जन-जागरूकता संबंधी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत बुनियादी प्रशिक्षण में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 637 नव आरक्षकों को राज्य साइबर पुलिस उज्जैन इकाई के विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा डिजिटल अरेस्ट, वित्तीय धोखाधड़ी (फाइनेंशियल फ्रॉड), ऑनलाइन ठगी तथा साइबर अपराधों के विभिन्न प्रकारों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। नव आरक्षकों को साइबर अपराध होने की स्थिति में उपलब्ध सहायता तंत्र, साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियों एवं डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग, साइबर हेल्पलाइन 1930 तथा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के प्रभावी उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण भी दिया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणरत नव आरक्षकों ने मानव श्रृंखला बनाकर साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने तथा समाज को जागरूक करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन श्रीमती मनीषा पाठक सोनी, राज्य साइबर पुलिस उज्जैन इकाई की पुलिस अधीक्षक श्रीमती लीना मारोठ, उप पुलिस अधीक्षकनंदकिशोर मालवीय, श्रीमती शैलजा भदोरिया, सहायक लोक अभियोजन अधिकारीप्रहलाद घटिया सहित अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित ‘सेफ क्लिक’ अभियान के माध्यम से नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेशभर में विभिन्न प्रशिक्षण, जनसंवाद और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।  

राज्य पुलिस सेवा से IPS बनने का रास्ता साफ, 8 अधिकारियों के नामों को मिली मंजूरी

भोपाल मध्य प्रदेश राज्य पुलिस सेवा के आठ अधिकारियों को IPS संवर्ग में पदोन्नति दी जाएगी। गुरुवार को मंत्रालय में हुई विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक में इन अधिकारियों के नाम तय किए गए। करीब दो माह में अधिसूचना जारी होने के बाद इन्हें IPS संवर्ग आवंटित किया जाएगा। नौ पदों के लिए हुई थी DPC वर्ष 2025 के लिए आयोजित इस DPC में कुल नौ पदों पर विचार किया गया था। 1997 बैच के अमृत लाल मीणा का नाम भी बैठक में शामिल किया गया, लेकिन उनके संबंध में निर्णय घोषित नहीं किया गया। मीणा का जाति प्रमाण पत्र मामला छानबीन समिति में लंबित है। वहीं, राजेश मिश्रा और संदीप मिश्रा के नामों पर विचार नहीं किया गया। राजेश मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, जबकि संदीप मिश्रा की एसीआर अनुकूल नहीं होने के कारण उन्हें प्रक्रिया से बाहर रखा गया। DPC में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद बैठक में संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य संजय वर्मा, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दो वरिष्ठ IPS अधिकारी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, DGP कैलाश मकवाणा और ACS Home संजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे। पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों को 2017 बैच आवंटित किया जाएगा। करीब 27 से 28 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद इन्हें यह पदोन्नति मिलने जा रही है। MP में सबसे देरी से हो रही पदोन्नति राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की IPS में पदोन्नति को लेकर मध्य प्रदेश में देरी की स्थिति बनी हुई है। बड़े राज्यों में सबसे देरी से पदोन्नति मध्य प्रदेश में ही हो रही है। तेलंगाना सहित कुछ राज्यों में 2010 से 2012 बैच तक के पुलिस अधिकारी पदोन्नत होकर IPS बन चुके हैं। इस वजह से राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी पदोन्नति के मामले में राज्य प्रशासनिक सेवा से करीब 10 वर्ष पीछे चल रहे हैं। जल्द होगी IAS पदोन्नति के लिए DPC राज्य प्रशासनिक सेवा से IAS संवर्ग में 13 अधिकारियों की पदोन्नति के लिए भी जल्द DPC बैठक होने वाली है। इसमें वर्ष 2007 और 2008 बैच के अधिकारियों के नामों पर विचार किया जा रहा है। ये अधिकारी होंगे पदोन्नत IPS संवर्ग में पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों में 1997 बैच के सीताराम सस्त्या और 1998 बैच की निमिषा पांडेय, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक सोनी, सुमन गुर्जर, सब्यसाची सराफ और समर वर्मा शामिल हैं।  

लोकतंत्र सेनानियों का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने की बनेगी व्यवस्था

लखनऊ आपातकाल की 51वीं बरसी 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र को बचाने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इसके साथ ही सीएम ने घोषणा की कि प्रदेश सरकार लोकतंत्र सेनानियों के लिए जल्द ही 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी। सीएम ने लोकतंत्र सेनानियों के स्वस्थ व दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था बनाई जा रही है। सीएम योगी ने कहा कि आज लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करते हुए गौरव की अनुभूति हुई। उनकी अपनी पीड़ा है। उन्होंने लोकतंत्र को बचाने के लिए जेल की यातनाएं सहीं। इसलिए प्रदेश में जब लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित सरकार आई तो लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान के लिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। प्रदेश में 3,780 लोकतंत्र सेनानी तथा 1,461 उनके आश्रित हैं। सरकार वर्ष 2018 से लोकतंत्र सेनानियों व मरणोपरांत उनके आश्रितों को प्रत्येक माह 20 हजार रूपये की सम्मान राशि दे रही है। साथ ही लोकतंत्र सेनानी या उनके उत्तराधिकारी (पति अथवा पत्नी) को एक सहायक के साथ पूरे प्रदेश में परिवहन निगम की सभी श्रेणी की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। लोकतंत्र सेनानियों को राजकीय चिकित्सालयों में निशुल्क चिकित्सा भी उपलब्ध कराई जा रही है।  पांच लाख की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा जल्द सीएम योगी ने कहा कि अब सरकार लोकतंत्र सेनानियों को कैशलेस 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष स्वास्थ्य सुविधा भी उलब्ध कराने जा रही है। इसके साथ ही लोकतंत्र सेनानी के दिवंगत होने पर उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था सरकार द्वारा बनाई जा रही है। आने वाली पीढ़ी हमेशा इस बात को ध्यान में रखेगी कि जो भी देश व लोकतंत्र के हित में काम करेगा, सरकारें उन्हें सम्मानित करेंगी।  सीएम योगी ने किया लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया। इसमें 6 महीने तक जेल में यातनाएं झेलने वाले लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित, गया प्रसाद सोनकर, राम सिंह कुशवाहा (हरदोई), विद्या राम वर्मा (हरदोई), अजय सिंह (बाराबंकी) व ओम प्रकाश गुप्ता (सीतापुर) शामिल रहे।  लोकतंत्र सेनानियों ने सुनाई आपबीती इस दौरान लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित ने बताया कि आपातकाल लगाने का कोई कारण नहीं था। कांग्रेस बस किसी भी तरह सत्ता में रहना चाहती थी। आपातकाल के दौरान हमारी गिरफ्तारी के समय कपड़े फाड़ दिए गए। हम लोगों ने इसके बाद भी सत्याग्रह में भाग लिया, तब बहुत ज्यादा अत्याचार किए गए। लोकतंत्र सेनानी विद्या राम वर्मा ने बताया कि इतने साल बीत जाने के बाद भी आपातकाल के बारे में सोचता हूं तो मन भावुक हो जाता है। सीपीआई को छोड़कर बाकी सभी दलों के साथ अत्याचार किया गया। मेरा घर रात में घेरा गया, जैसे किसी डकैत को पकड़ने आए हों। जेल में कैदियों के नाखून उखाड़े गए और जबरन नसबंदी की गई। उस समय की सरकार ने कैसे अत्याचार किए गए, आज कोई अहसास भी नहीं कर सकता।

बीते दो माह में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के 1747 प्रकरण दर्ज

रायपुर मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख का असर अब खनिज माफियाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य में अप्रैल और मई 2026 के दौरान उक्त कार्रवाई के तहत 1,747 प्रकरण दर्ज कर 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल की गई है।  अभियान के दौरान सबसे अधिक 1,487 मामले अवैध परिवहन के सामने आए, जबकि 231 प्रकरण अवैध उत्खनन और 29 मामले अवैध भंडारण के दर्ज किए गए। इससे यह पता चलता है कि सरकार ने खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है।  अवैध उत्खनन के मामलों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला सबसे ऊपर रहा है, जहां 44 प्रकरण दर्ज किए गए। इसके बाद रायपुर में 15 तथा कबीरधाम में 14 और बालोद में 14 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, अवैध परिवहन के सबसे अधिक रायपुर में 173 मामले दर्ज हुए। इसके बाद जांजगीर-चांपा में 162, बिलासपुर में 101 और धमतरी में 101 मामले पकड़ में आए हैं। अवैध भंडारण के सर्वाधिक 8 प्रकरण रायपुर में दर्ज किए गए, जबकि दंतेवाड़ा में 4 तथा कांकेर में 3 और बिलासपुर में 3 मामले पकड़ाए हैं।  अवैध उत्खनन में सबसे अधिक 55.32 लाख रुपये की दाण्डिक राशि दंतेवाड़ा जिले में वसूल की गई है। अवैध परिवहन में सर्वाधिक 54.69 लाख रुपये रायपुर से वसूले गए, जबकि अवैध भंडारण में भी सबसे अधिक 12.58 लाख रुपये की दाण्डिक राशि रायपुर में वसूली गई। इस प्रकार कुल दांडिक राशि की वसूली के मामले में रायपुर जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा है।  गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख के चलते सरकार ने एक ओर राज्यभर में खनिज माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ रखा है, वहीं दूसरी ओर नियमों में बदलाव कर जुर्माने और दण्ड के प्रावधान भी पहले से कहीं अधिक कठोर कर दिए हैं। मुख्यमंत्रीसाय का कहना है कि राज्य के खनिज संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गौण खनिज नियमों में संशोधन के बाद अब किसी भी मामले में समझौता (प्रशमन) राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन पर प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क के साथ-साथ खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और रेत का मूल्य देना होगा। जब्त वाहन, मशीन या उपकरण की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन की श्रेणी के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी, इसके बाद ही वाहन छोड़ा जाएगा।

कम पानी, कम जगह और अधिक उत्पादन की आधुनिक खेती

रायपुर भारत जैसे कृषि प्रधान देश में बढ़ती जनसंख्या, घटती कृषि भूमि और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच खेती की नई और टिकाऊ तकनीकों की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। ऐसे समय में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में एक अभिनव और प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। यह ऐसी आधुनिक खेती पद्धति है, जिसमें मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती और पौधों को पानी में घुले पोषक तत्वों के माध्यम से उगाया जाता है। क्या है हाइड्रोपोनिक्स तकनीक?            हाइड्रोपोनिक्स एक वैज्ञानिक कृषि पद्धति है, जिसमें पौधों की जड़ों को पोषक तत्वों से युक्त पानी में रखा जाता है। इस तकनीक में मिट्टी के स्थान पर विशेष माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषण सीधे प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप पौधों की वृद्धि तेजी से होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है। कम संसाधनों में अधिक उत्पादन          हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक खेती की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। सीमित भूमि वाले किसान, शहरी क्षेत्रों के निवासी तथा छोटे उद्यमी भी इस तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक खेती कर सकते हैं। नियंत्रित वातावरण में फसल उत्पादन होने के कारण मौसम का प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम पड़ता है। पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में सहायक            विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोपोनिक्स तकनीक गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कम पानी की खपत, रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग और भूमि पर कम दबाव के कारण यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की टिकाऊ कृषि पद्धतियों में शामिल किया जा रहा है। युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर            हाइड्रोपोनिक्स तकनीक केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वरोजगार और कृषि उद्यमिता के नए अवसर भी प्रदान करती है। कम स्थान में व्यावसायिक स्तर पर सब्जियां, हरी पत्तेदार फसलें और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलें उगाकर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। इससे युवाओं को कृषि आधारित स्टार्टअप शुरू करने का अवसर मिल रहा है। सरकार दे रही आधुनिक कृषि को बढ़ावा           केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विभाग तथा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे किसान आधुनिक खेती अपनाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं। भविष्य की खेती की ओर एक मजबूत कदम             हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग खोल रही है। यह तकनीक कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण का संतुलित समाधान प्रस्तुत करती है। आने वाले समय में यह पद्धति किसानों, युवाओं और कृषि उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।          आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ हाइड्रोपोनिक्स खेती न केवल कृषि को अधिक लाभकारी बना रही है, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

जल आत्मनिर्भरता का भाव ही बचा सकेगा पर्यावरण संकट से :नागर

भोपाल  मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष एवं ख्यातिलब्ध पर्यावरणविदमोहन नागर को राष्ट्रपति से पद्मश्री अलंकरण मिलने पर परिषद के राज्य कार्यालय में में भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। अलंकरण को राष्ट्रसेवा में किये गये प्रयासों का प्रतिफल निरूपित करते हुएनागर ने भाव विभोर होकर कहा कि यह सम्मान हर उस कार्यकर्ता का है जो निरंतर मां भारती की सेवा में अपना सर्वस्व समर्पित कर रहे हैं।नागर ने पद्मश्री अलंकरण मिलने के बाद भोपाल में राज्यपालमंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सौजन्य भेंट की। परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड ने अपने अभिनंदन उदबोधन में कहा किनागर के सम्मान ने परिषद को न केवल समाज सेवा के क्षेत्र में प्रतिष्ठा प्रदान की है बल्कि उनके अलंकरण से परिषद से अपेक्षाओं में भी वृद्धि हुई है। अभिनंदन समारोह में राज्य, संभाग एवं जिला कार्यालय के अधिकारी, कर्मचारियों सहित नेटवर्क से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने सहभागिता की। 

स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगीकरण पर फोकस करें कलेक्टर : मुख्य सचिवजैन

भोपाल  मुख्य सचिवअनुराग जैन ने कलेक्टर्स से कहा है कि विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश को विकसित किए जाने के लिए बुनियादी रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, औद्योगीकरण और मानवसंसाधन को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने निर्देश दिए कि आमजन से जुड़़ी योजनाओं और लक्ष्य आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए आसान प्रक्रिया अपनाएं। उन्होंने सुशासन के अनेक बिंदुओं की नियमित समीक्षा से आए बदलाव के लिए कलेक्टर्स की तारीफ की। मुख्य सचिवजैन ने गुरूवार को मंत्रालय से वी.सी के माध्यम से कलेक्टर, कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों के साथ कलेक्टर्स कांफ्रेंस में विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। पुलिस महानिदेशकैलाश मकवाना भी इस अवसर पर उपस्थित थे। मुख्य सचिवजैन ने कलेक्टर्स से कहा कि शहरीकरण के तहत मास्टर प्लान तैयार करने के साथ औद्योगीकरण के लिए निवेश आकर्षित करने पर भी काम किया जाए। उन्होंने मध्यप्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवसंसाधन के कौशल विकास पर भी काम करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि पी.एम गतिशक्ति पर निर्माण कार्यों और संपत्ति की मेपिंग चल रही है, कलेक्टर्स सी.एम गतिशक्ति पर भी प्रदेश के निर्माण कार्यों और समस्त प्रोजेक्ट की प्रगति की जानकारी अपडेट करें जिससे नियमित समीक्षा हों सके। उन्होंने शासकीय संपत्ति का उपयोग अन्य विभागों द्वारा किए जाने पर भी बल दिया।जैन ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय भवन के निर्माण के बाद रिक्त हुए स्कूल भवनों में आयुष बेलनेस सेंटर, उप-स्वास्थ्य केंद्र,आगंनवाड़ी आदि संचालित किए जा सकते है। कानून व्यवस्था पर समन्वित प्रयास करने के निर्देश बैठक की शुरूआत में कानून व्यवस्था की समीक्षा की गयी। मुख्य सचिवजैन ने निर्देश दिए कि अनुभाग स्तर पर एस.डी.एम और एस.डी.ओपी तथा जिला स्तर पर डी.एम और एस.पी संयुक्त रूप से भ्रमण आदि कर कानून व्यवस्था उत्कृष्ट बनाएं। उन्होंने एनकार्ड की नियमित बैठक करने और साइबर फ्राड जैसी घटनाएं रोकने के लिए गम्भीरता से कार्यवाही करने को कहा है। डीजीपीकैलाश मकवाना ने सभी शैक्षणिक संस्थानों के आस-पास के क्षेत्र को ड्रग फ्री जोन बनाने और साइबर धोखाधडी को रोकने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पाक्सो एक्ट के तहत एक माह में चार्ज सीट प्रस्तुत करने का लक्ष्य रखने के लिए कहा है। विस्फोटक अधिनियम की शर्तों का शतप्रतिशत पालन कराने के लिए लाइसेंसी संस्थानों का संयुक्त पुलिस और प्रशासन को निरीक्षण करने के निर्देश दिए है। बैठक में नवीन न्याय संहिता के क्रियान्वयन के लिए न्यू क्रिमीनल लॉ और ई-साक्ष्य में गम्भीरता से कार्य करने और समय सीमा में चालान पेश करने को कहा है। डीजीपी ने कहा कि रियल टाइम में संवाद हो जिससे अपराधों को रोका जा सके। इस दौरान अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण पर कार्यवाही के लिए विशेष कार्यवाही सतत् रूप से करने के निर्देश दिए गए है। बेसिक सुशासन आवश्यक सुशासन की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिवजैन लोक सेवा गांरटी और सीएम हेल्पलाइन के समय-सीमा से बाहर के लंबित प्रकरणों के निराकरण में सुधार होने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नियमित समीक्षा से स्थिति में सुधार हुआ है। मुख्य सचिव ने भू-अधिग्रहण मामलों में समय पर अवार्ड आदि पारित करने के कलेक्टर को निर्देश दिए जिससे नागरिक अनावश्यक रूप से परेशान न हों और परियोजनाएं समय से पूरी हो सकें। इस दौरान नामातरण, सीमांकन, बटवारा और शासकीय विभागों को भूमि आवंटन के प्रकरणों की भी समीक्षा की गयी। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि लोकसेवा गारंटी और सीएम हेल्पलाइन से आमजन को बेसिक सुशासन दिया जा सकता है। स्वास्थ्य एवं पोषण की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कलेक्टर से कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अधिकाधिक समय दें और स्वास्थ्य तथा महिला बाल विकास के अमले का संयुक्त भ्रमण कराकर स्वास्थ्य कार्यक्रम में मध्यप्रदेश को बेहतर स्थिति में लाएं। शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमीं लाने के लिए सतत् प्रयास करने की जरूतर बताई और प्रसव पूर्व होने वाली जाँच तथा संस्थागत प्रसव कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा है। उन्होंने अनमोल 2.0 कार्यक्रम में सही डाटा एंट्री करने पर बल दिया। मुख्य सचिव ने कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को पोषण के साथ ही उचित उपचार उपलब्ध कराने को कहा है। अगले माह होने वाले दस्तक सह स्टॉप डायरिया अभियान के लिए अभी से योजना बनाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि सुनिश्चित किया जाए कि पेयजल स्त्रोतों की जाँच हो और उनका शुद्धीकरण किया जाए। मुख्य सचिव ने निक्षयमित्र टी.बी मुक्त भारत अभियान को प्रधानमंत्री की प्राथमिकता का अभियान बताते हुए कहा है कि क्षय रोग के मरीजों को उपचार के साथ ही पोषण किट उपलब्ध कराने के लिए जनप्रतिनिधियों का भी योगदान लिया जाए। बैठक में 1075 पीएससी से चयनित डाक्टर्स के अस्पतालों में पदभार ग्रहण करने के जानकारी दी गयी है। कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए कि स्वास्थ्य विभाग की नियमित समीक्षा करें और स्वास्थ्य संस्थाओं के निर्माण कार्यों की निगरानी करें। मुख्य सचिवजैन ने जिलों में एकल नल-जल योजना के संचालन की समीक्षा की और निर्देश दिए कि इन योजनाओं के संचालन के लिए मापदंड अनुसार संचालन समिति बनाएं। उन्होंने पेयजल स्त्रोतों की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा है। मुख्य सचिव ने कुछ जिलों में मानसून की देरी के दृष्टिगत पेयजल की उपलब्धता निरंतर बनाएं रखने के निर्देश दिए। जनजातीय मामलों की समीक्षा में मुख्य सचिव ने सामुदायिक वन संसाधन के संरक्षण एवं प्रबंधन की समीक्षा करते हुए समुदाय से अभी तक प्राप्त वन अधिकार अधिनियम के तहत नवीन दावों और निरस्त दावों के प्रकरणों की समीक्षा की और निर्देश दिए कि वन,राजस्व और जनजातीय कार्य विभाग इस दिशा में संयुक्त पहल करें। विशेष ग्राम सभाओं में दावों पर चर्चा करें जिससे गुणवत्ता बेहतर हों। 100 प्रतिशत बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित करें मुख्य सचिव ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए स्कूल जाने योग्य बच्चों के प्रवेश और ड्रॉप आउट बच्चों के पुन:प्रवेश की स्थिति पर संतोष्व्यक्त किया। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा कि शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में आस-पास के बसाहटों के बच्चों का सौ फीसदी नामांकन हो। उन्होंने आगंनबाड़ी की स्कूल से मैपिंग के कार्य की भी समीक्षा की। इस दौरान उल्लास नवभारत साक्षारता कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए असाक्षर व्यक्तियों को चिह्न्ति करने के निर्देश दिए। उन्होंने हर विद्यार्थी की अपार आइडी बनाने … Read more

ध व्यापारिक उपभोक्ताओं को राहत, गैर-घरेलू पैक्ड LPG पर लगी पाबंदियां समाप्त

 नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में पैदा हुए ऊर्जा संकट के कम होने के संकेतों के बीच केंद्र सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए कमर्शियल एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को फिर से सामान्य स्तर पर बहाल कर दिया है। इसके साथ ही हालिया संकट के दौरान लागू किए गए अधिकांश सेक्टर-विशिष्ट प्रतिबंध भी हटा लिए गए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि घरेलू उत्पादन में सुधार और आयातित एलपीजी कार्गो की उपलब्धता बढ़ने से आपूर्ति स्थिति बेहतर हुई है। इसी के मद्देनजर गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी पर लगाए गए सभी प्रतिबंध समाप्त कर दिए गए हैं। उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद मंत्रालय के अनुसार, संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोकी गई बल्क एलपीजी सप्लाई को भी आंशिक रूप से बहाल करते हुए पूर्व खपत स्तर के 50 प्रतिशत तक अनुमति दे दी गई है। इससे औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए लगाए गए थे प्रतिबंध दरअसल, ईरान संघर्ष के बाद वेस्ट एशिया से एलपीजी आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा हो गई थी। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। ऐसे में सरकार ने घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्रों में आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगा दी थी। बाद में स्थिति में कुछ सुधार होने पर सप्लाई को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया गया, लेकिन कई क्षेत्रों में आवंटन सामान्य स्तर से काफी कम रखा गया था। पेट्रोकेमिकल सेक्टर से LPG उत्पादन की ओर मोड़ा गया कच्चा माल संकट के दौरान एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत विशेष निर्देश जारी किए थे। इसके तहत सी-3 और सी-4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स को पेट्रोकेमिकल उत्पादन से हटाकर एलपीजी निर्माण में इस्तेमाल किया गया। इस फैसले से पेट्रोकेमिकल कंपनियों, विशेष रूप से रिफाइनिंग सेक्टर की कंपनियों को उत्पादन समायोजन करना पड़ा। अब आपूर्ति स्थिति सामान्य होने के बाद सरकार ने इन स्ट्रीम्स का आवंटन धीरे-धीरे फिर से पेट्रोकेमिकल और अन्य उद्योगों के लिए बहाल करने का फैसला किया है। हालांकि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि देश में एलपीजी उत्पादन प्रतिदिन 40,000 टन से नीचे न जाए। कच्चे तेल की कीमतें भी लौटीं सामान्य स्तर पर सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब संघर्ष-पूर्व स्तर के करीब पहुंच गई हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। यही वजह है कि आपातकालीन राशनिंग उपायों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। PNG पर शिफ्ट करने की योजना को मिलेगी रफ्तार मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं को बिना रुकावट एलपीजी उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। इसके साथ ही कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) से जोड़ने की योजना को भी तेज किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में सिटी गैस नेटवर्क उपलब्ध है, वहां पात्र एलपीजी उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से PNG पर स्थानांतरित किया जाएगा। एकीकृत डेटाबेस तैयार रखने का दिया निर्देश सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एलपीजी उपभोक्ताओं का एकीकृत डेटाबेस तैयार रखने तथा आपूर्ति प्रबंधन को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संशोधित व्यवस्था के सुचारू क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।