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योगी सरकार का बड़ा फैसला, ईवी खरीद पर रोड टैक्स शून्य और भारी आर्थिक राहत

लखनऊ यूपी में नए ई-वाहन (ईवी) खरीदने पर योगी सरकार ने बड़ी राहत दे दी है। अब ईवी खरीदने पर रोड टैक्स का नहीं देना होगा। ईवी पर 2.56 लाख रुपये तक का लाभ प्रदान किया जाएगा। कैबिनेट बैठक में सोमवार को वायु प्रदूषण से निपटने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एनसीआर क्षेत्र में परिवर्तन योजना लागू किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। योजना के तहत एनसीआर में बीएस-वन से बीएस-फोर तक के पुराने ट्रकों और बसों को स्क्रैप कर नई बीएस-सिक्स अथवा इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर वाहन स्वामियों को मोटरयान कर और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 10 वर्ष तक भारी छूट प्रदान की जाएगी। नए बीएस-सिक्स या इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर 100 फीसद रोड टैक्स माफ होगा। पुराने वाहनों पर 50 प्रतिशत की छूट वहीं पुराने/प्रयुक्त बीएस-सिक्स/ईवी वाहनों पर रोड टैक्स में 50 फीसद छूट दी जाएगी। यह छूट 10 वर्षों तक वैध रहेगी। नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रजिस्ट्रेशन शुल्क शत-प्रतिशत माफ होगा। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को विशेष प्रोत्साहन दिया है। डीजल-सीएनजी गाड़ियों पर पांच प्रतिशत ब्याज छूट और ईंधन वाउचर मिलेगा जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों पर गाड़ी की श्रेणी के अनुसार 64 हजार रुपये से 2.56 हजार रुपये तक का एकमुश्त लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा नई गाड़ी खरीदने पर ओईएम यानी वाहन कंपनियों की ओर से 8% की शुरुआती छूट भी मिलेगी। भारत सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए परिवर्तन योजना शुरू की है। यूपी सरकार ने अब इसे राज्य के एनसीआर जिलों में प्रभावी रूप से लागू करने का फैसला किया है। योजना का मकसद प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को चरणबद्ध ढंग से हटाना है। बस-ट्रक पर माफ होगा बकाया टैक्स यूपी एनसीआर में पंजीकृत बीएस-वन, टू, थ्री व फोर श्रेणी की बसों-ट्रकों पर यदि एक वर्ष से अधिक का टैक्स बकाया है तो उसे भी खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए पुराने वाहन को अधिकृत रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (आरवीएसएफ) के जरिए स्क्रैप कराना होगा और उसके बाद ही नए वाहन का पंजीकरण कराना होगा। वाहन स्वामियों को अपने पुराने वाहन आरवीएसएफ केंद्र पर जमा कर स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट लेना होगा। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर नई गाड़ी खरीदते समय रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में छूट मिलेगी। बकाया टैक्स माफी का लाभ भी इसी प्रक्रिया से मिलेगा। डाटा सेंटर नीति में बुंदेलखंड और पूर्वांचल को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दी गई। यह नीति 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई थी, इसलिए सरकार नई उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2026 लेकर आई है। डाटा सेंटर नीति में बुंदेलखंड और पूर्वांचल को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्रीन, एआई-रेडी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी डाटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। नीति के तहत दो गीगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने और दो लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि नई नीति में जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रस्तावित किए गए हैं। टियर/रेटिंग-3 व 4 वाले डाटा सेंटर्स को प्रोत्साहन, एआई कंप्यूट बूस्टर प्रोत्साहन तथा ग्रीन एवं सस्टेनेबल परिचालन प्रोत्साहन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। 50 हजार को रोजगार मिलने की संभावना डाटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में विश्वस्तरीय डाटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित होगा। डाटा सेंटर इकाइयों के आसपास सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी आधारित अन्य इकाइयों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रस्तावित नीति से 7500 लोगों को दीर्घकालीन प्रत्यक्ष रोजगार और निर्माण अवधि में लगभग 50 हजार लोगों को अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। सुनियोजित नीति से मिले ठोस परिणाम मंत्री ने बताया कि योगी सरकार ने जनवरी 2021 में उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2021 लागू की थी, जिसे बाद में 7 नवंबर 2022 को संशोधित किया गया। उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2021 (प्रथम संशोधन-2022) के तहत लगभग 21,343 करोड़ रुपये के निवेश से 6 डाटा सेंटर पार्क तथा 40 मेगावाट से कम क्षमता वाली दो डाटा सेंटर इकाइयों में से 7 परियोजनाएं परिचालन में आ चुकी हैं। 210 करोड़ की सब्सिडी दी गई वहीं, प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है। योगी सरकार ने 210 करोड़ रुपये से अधिक सब्सिडी के रूप में ईवी वाहन मालिकों को वितरित किए हैं। कहा कि खाड़ी देशों में गंभीर हालात और तेल संकट के बीच ईवी वाहनों की तरफ रुख करना ही बेहतर है। ईवी खरीद सब्सिडी योजना शानदार सहयोग दे रही है। इससे पेट्रोल-डीजल पर लोगों की निर्भरता कम होगी और बेहतर पर्यावरण से लोगों का स्वास्थ्य अच्छा होगा।

रसोई में रोटियां गिनकर क्यों नहीं बनानी चाहिए? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

 हमारे भारतीय समाज में रसोई घर को सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि घर की खुशहाली और बरकत का केंद्र माना जाता है. अक्सर आपने घर के बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि रसोई में रोटियां गिनकर नहीं बनानी चाहिए. कुछ लोग इसे केवल एक पुरानी सोच या अंधविश्वास मानकर टाल देते हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे आज भी पूरी शिद्दत से निभाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोटियां गिनकर बनाने की मनाही के पीछे सिर्फ पौराणिक मान्यताएं या वास्तु शास्त्र ही नहीं, बल्कि एक गहरा व्यावहारिक और स्वास्थ्य से जुड़ा तर्क भी है? आइए जानते हैं कि रोटियां गिनकर बनाना आपकी सेहत, रिश्तों और घर की समृद्धि को किस तरह प्रभावित करता है. वास्तु शास्त्र का दृष्टिकोण बरकत की कमी वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम रोटियां गिनकर बनाते हैं, तो हम अनजाने में अपने घर की बरकत को सीमित कर देते हैं. भोजन को मां अन्नपूर्णा का रूप माना जाता है, और उसे तौलना या गिनना उनका अनादर माना जाता है. ग्रहों का प्रभाव: राहु का दोष रसोई को मंगल का स्थान माना जाता है. मान्यता है कि गिन-गिनकर रोटियां बनाने से कुंडली में राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है, जिससे घर में मानसिक तनाव और बिना वजह के खर्चे बढ़ते हैं. मेहमान का सत्कार सनातन परंपरा में अतिथि देवो भव की भावना है. अगर रोटियां बिल्कुल नाप-तोलकर बनाई जाएं और अचानक कोई मेहमान आ जाए, तो उसे सम्मानपूर्वक भोजन नहीं कराया जा सकता, जिससे बुध और गुरु ग्रह कमजोर होते हैं. वैज्ञानिक कारण (Scientific Reasons) भूख और संतुष्टि का नियम इंसान की भूख हर दिन एक जैसी नहीं होती. कभी काम के तनाव में भूख कम लगती है, तो कभी स्वाद या ज्यादा शारीरिक श्रम के कारण व्यक्ति एक-दो रोटी ज्यादा खा लेता है. अगर घर में सख्त गिनती से रोटियां बनेंगी, तो परिवार के किसी सदस्य को अपनी भूख मारनी पड़ सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. सकारात्मक ऊर्जा की कमी जो महिला या खाना बनाने वाला व्यक्ति लगातार गिन-गिनकर रोटियां बनाता है, उसकी मानसिकता सीमित या कंजूसी वाली होने लगती है. इसका सीधा असर भोजन के स्वाद और रसोई के माहौल (Vibe) पर पड़ता है. वास्तु के अनुसार कितनी रोटियां ज्यादा बनाएं? पहली रोटी (गाय के लिए): पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालनी चाहिए, इससे घर के सभी वास्तु दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है. आखिरी रोटी (कुत्ते के लिए): रसोई में बनने वाली अंतिम रोटी कुत्ते के लिए होनी चाहिए, जिससे राहु, केतु और शनि शांत रहते हैं. अतिरिक्त रोटियां: 2-3 रोटियां हमेशा अतिरिक्त होनी चाहिए ताकि कोई भूखा जीव, पक्षी या अचानक आया मेहमान खाली हाथ न लौटे.

राज्य के विकास कार्यों पर मुख्य सचिव सख्त, सचिवों के साथ समीक्षा बैठक में दिए अहम निर्देश

मुख्य सचिव ने सचिवों की ली उच्च स्तरीय बैठक विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के समस्त विभागों के भार सादक सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों में बैकलॉग के रिक्त पदों की भर्ती के लिए शीघ्र कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को उनके विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए है। बैठक में ई-ऑफिस, लोक सेवा गारंटी, नियद नेल्लानार डेसबोर्ड, सुघ्घर छत्तीसगढ़, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति सीजी स्टेट पोर्टल, डी रेगुलेशन ई-गजट, सेवा सेतु, ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने शासन के महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों के अंतर्गत भू-अर्जन के प्रकरणों को तेजी से निपटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए है। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव श्रीमती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, मुख्यमंत्री एवं सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, परिवहन विभाग के सचिव एस.प्रकाश, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुआर.शंगीता, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव बसवराजु एस., राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) सचिव भुवनेश यादव सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के सचिव मौजूद थे।

स्वेच्छानुदान मद से स्वामी आत्मानंद स्कूल मांझीगुडा को 10 कंप्यूटरों की सौगात

रायपुर  राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपने स्वेच्छानुदान मद से बस्तर जिले के विकासखंड दरभा के सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मांझीगुडा चिंगपाल को 10 कंप्यूटर प्रदान किए। इसके लिए राज्यपाल द्वारा पूर्व में स्वीकृति प्रदान की गई थी।        लोक भवन  में आज राज्यपाल ने विद्यालय के लिए कंप्यूटरों का औपचारिक रूप से हस्तांतरण किया। इन कंप्यूटरों के माध्यम से सुदूर वनांचल क्षेत्र के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके ज्ञान और कौशल का विकास होगा।            इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उप सचिव सुश्री निधि साहू तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मांझीगुडा (जिला बस्तर) के प्राचार्य उपस्थित थे।

अस्मिता लीग साउथ ज़ोन कैनोइंग-कयाकिंग चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश बना ओवरऑल चैंपियन

अस्मिता लीग साउथ ज़ोन कैनोइंग एवं कयाकिंग चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश रहा ओवरऑल चैंपियन मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के खिलाड़ियों ने जीते 38 पदक 16 स्वर्ण, 17 रजत एवं 5 कांस्य पदकों के साथ प्रदेश ने किया शानदार प्रदर्शन भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के खिलाड़ियों ने 4 से 5 जुलाई 2026 तक आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित गंबरमगेड्डा रिजर्वायर में आयोजित अस्मिता लीग साउथ ज़ोन कैनोइंग एवं कयाकिंग चैंपियनशिप-2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश को ओवरऑल चैंपियन बनने का गौरव दिलाया। प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में कुल 38 पदक अर्जित किए, जिनमें 16 स्वर्ण, 17 रजत एवं 5 कांस्य पदक शामिल हैं। पदकों की शानदार बरसात, प्रदेश ने किया शीर्ष स्थान हासिल चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश ने सर्वाधिक 38 पदकों के साथ पदक तालिका में प्रथम स्थान प्राप्त किया। खिलाड़ियों के उत्कृष्ट तकनीकी कौशल, अनुशासित प्रदर्शन और निरंतर अभ्यास का परिणाम रहा कि प्रदेश ने अन्य राज्यों को पीछे छोड़ते हुए ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी में उपलब्ध उच्च स्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था तथा खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की बढ़ती सशक्त पहचान अस्मिता लीग जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ओवरऑल चैंपियन बनने की यह उपलब्धि मध्यप्रदेश में खेल प्रतिभाओं के सुनियोजित विकास और खेल अधोसंरचना की गुणवत्ता को दर्शाती है। प्रदेश के खिलाड़ी निरंतर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश को नई पहचान दिला रहे हैं। खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इस शानदार उपलब्धि पर मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है, जिसका परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर लगातार मिल रही सफलताओं के रूप में सामने आ रहा है। युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत मध्यप्रदेश राज्य कैनोइंग एवं कयाकिंग अकादमी के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। यह सफलता सिद्ध करती है कि समर्पण, अनुशासन, उत्कृष्ट प्रशिक्षण और निरंतर प्रयास के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की जा सकती हैं।  

HTET आंसर-की हुई रिलीज, अभ्यर्थियों को मिला 72 घंटे का मौका, ऐसे करें ऑब्जेक्शन

भिवानी. हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के प्रश्न पत्रों की खामियों के बीच हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने आंसर-की जारी कर दी है। लेवल तीन की सायं को जारी की गई तो लेवल एक व दो की रात तक जारी की गई। आंसर-की के बाद अभ्यर्थी 72 घंटे यानी नौ जुलाई की सायं तक अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकेंगे। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से पांच व छह जुलाई को हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा-2025 करवाई गई थी। सुरक्षा के कडे़ पहरे और सीसीटीवी की निगरानी में करीब 1,92,226 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी जबकि 17.60 प्रतिशत यानी 41068 अनुपस्थित रहे थे। परीक्षा के बाद प्रश्न पत्रों की खामियों के कारण काफी सवाल उठे और अभ्यर्थियों ने आरोप लगाए कि मुहावरे का अर्थ पूछा मगर मुहावरा दिया ही नहीं। मैथ के सवालों में अंग्रेजी में अलग अंक दिए इनके अलावा मैथ के सवालों में अंग्रेजी में अलग अंक दिए और हिंदी में अलग। कई जगह प्रश्न पत्र मिस प्रिंटिंग की शिकायत आई तो काफी अभ्यर्थी ऐसे भी रहे जिन्होंने आरोप लगाए कि बुकलेट सील नहीं थी। अब हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से आंसर-की जारी कर दी है और प्रश्न पत्रों की खामियों के चलते आपत्तियां भी ज्यादा लगने की संभावनाएं है। अभ्यर्थियों को आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 72 घंटे का समय दिया गया है। यानी नौ जुलाई तक अभ्यर्थी अपनी आपत्तियां दर्ज करवा सकते है। लेवल     कुल अभ्यर्थी     उपस्थित     गैर हाजिर एक     41,062     31,402     9,660 दो     1,19,141     99,904     19,237 तीन     73,091     60,920     12,171 हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों को लगता है कि प्रश्न पत्र में दिए प्रश्न अधूरे थे या गलत थे या उनके विकल्प सही नहीं थे, वे अपनी आपत्तियां दर्ज करवाए। हम हमारे एक्सपर्ट के समक्ष आपत्तियां रखेंगे। हम अभ्यर्थियों को आश्वस्त करते है कि किसी अभ्यर्थी के साथ अन्याय नहीं होगा।

चाणक्य नीति के 7 गुप्त नियम, चुपचाप मेहनत कर ऐसे पाएं बड़ी सफलता

इस दुनिया में दो तरह के लोग हैं, एक वो जो दिखावा करते हैं और दूसरे वो जो चुपचाप इतिहास लिखते हैं. चाणक्य कहते हैं कि अगर तुम अपनी तरक्की की बातें सबको बताओगे, तो लोग तुम्हारा रास्ता रोकने लगेंगे. इसलिए असली बुद्धिमान वहां है, जो बिना शोर मचाए अपनी सबसे बड़ी जीत हासिल करता है. आज का जमाना शोर मचाने वालों के लिए नहीं, बल्कि साइलेंट अचीवर्स का है. यही चाणक्य नीति का वो गुप्त राज है. ये उन लोगों के लिए है जो लाइफ में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, आगे निकलना चाहते हैं. क्योंकि याद रखना, दुनिया तुम्हें तब तक सपोर्ट करती है, जब तक तुम उनके लेवल पर हो. जैसे ही तुम उनसे ऊपर जाने लगते हो, वहीं से जलन शुरू हो जाती है. तो सवाल यह है कि वो 7 काम कौन से हैं, जिन्हें अगर तुमने चुपचाप करना शुरू कर दिया, तो तुम हर उस इंसान से आगे निकल जाओगे जो आज तुमसे ज्यादा सफल दिख रहा है? खुद को मजबूत बनाओ मजबूती सिर्फ शरीर की नहीं होती, असली ताकत होती है मेंटल स्ट्रेंथ, इमोशनल कंट्रोल और डिसिप्लिन की. जब तुम रिएक्ट करना छोड़कर रिस्पॉन्ड करना सीख जाते हो, तभी असली बदलाव शुरू होता है. हर दिन 30 मिनट अकेले बैठो और खुद से पूछो कि मैं 1% बेहतर कैसे बन सकता हूं? लोगों को मत बताओ कि तुम क्या सीख रहे हो, सीधा रिजल्ट दिखाओ. अपना अगला कदम किसी को मत बताओ जो ज्यादा बोलते हैं, वो कम करते हैं. जो चुप रहते हैं, वही इतिहास बनाते हैं. जैसे ही तुम अपने प्लॉन किसी को बताते हो या तो वो तुम्हें रोकते हैं, या कॉपी कर लेते हैं. इसलिए चुप रहो और मेहनत करो. दूसरों से नहीं, खुद से मुकाबला करो सबसे बड़ी गलती क्या है? हम दूसरों को देखकर सोचते हैं और ऐसे में हम पीछे रह जाते हैं. लेकिन असली सवाल ये होना चाहिए कि मैं कल से कितना बेहतर हूं? हर दिन एक बुरी आदत कम करो और बस प्रोग्रेस ट्रैक करो. असफलता को पब्लिक मत करो, साइलेंटली बदलो जब तुम हारते हो, लोग मजाक उड़ाते हैं या बेकार सलाह देते हैं. लेकिन असली खिलाड़ी क्या करता है? चुप रहता है और वापसी की तैयारी करता है. असफलता को एनालाइज करो, सिस्टम बनाओ और साइलेंटली कमबैक करो. अपने काम का क्रेडिट मत मांगो जिसे खुद की तारीफ करनी पड़े यानी वो अभी शुरुआती लेवल पर है. और जिसकी तारीफ लोग खुद करें, वही असली खिलाड़ी है. तुम बस इतना करो कि काम में एक्सीलेंस दिखाओ. क्रेडिट अपने आप आएगा और जब आएगा, बड़ा आएगा. लोगों को अपने बदलाव से चौंकाओ, बातों से नहीं अगर सच में बदल रहे हो, तो बोलना बंद करो. जब तुम सच में बदलते हो, तो तुम्हारा एटीट्यूड, तुम्हारे फैसले, सब बदल जाते हैं. और फिर लोग खुद पूछते हैं कि, 'तू इतना बदल कैसे गया?' अपना अंत इतना मजबूत बनाओ कि शुरुआत लोग भूल जाएं दुनिया तुम्हारी शुरुआत नहीं याद रखती, लेकिन तुम्हारा अंजाम जरूर याद रखती है. विनर्स बार-बार शुरू नहीं करते बल्कि वो खत्म करते हैं. जब छोड़ने का मन करे, खुद से कहो कि अब रुकना नहीं है, अब खत्म करना है.

आंबेडकरनगर में एसटीएफ एनकाउंटर, 25 मुकदमों वाला इनामी बदमाश आसिफ मारा गया

नॉएडा यूपी में एसटीएफ और बदमाशों के बीच एक बार फिर एनकाउंटर हुआ है। आम्बेडकरनगर के बेवाना थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह नोएडा एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक लाख के इनामी बदमाश आसिफ उर्फ विक्की को मार गिराया गया। आसिफ मूल रूप से कानपुर नगर के धुरैया मरकरपुर का निवासी था और लंबे समय से पुलिस उसके पीछे पड़ी थी। पुलिस के अनुसार, मारे गए अपराधी पर हत्या, लूट, गैंगस्टर समेत 25 से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे विभिन्न जनपदों में दर्ज थे। वह लंबे समय से कानून प्रवर्तन एजेंसियों की तलाश में था। एनकाउंटर में दोनों ओर से हुई फायरिंग में यूपी एसटीएफ के सिपाही ओमनाथ चौहान भी घायल हो गए हैं। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने घटनास्थल से एक .32 बोर की पिस्तौल, 12 बोर का देसी हथियार, भारी मात्रा में कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। बताया जाता है कि एसटीएफ ने मुखबिर की सूचना पर बदमाश की घेराबंदी की थी। खुद को घिरा देख विक्की ने टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ की गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और अन्य सामान भी बरामद किया। विक्की का लंबा आपराधिक इतिहास विक्की उर्फ आसिफ अली पर हत्या, डकैती और लूट की कई सनसनीखेज वारदातों के आरोप थे। वर्ष 2013 में सुल्तानपुर में साथियों के साथ घर में घुसकर डकैती के दौरान एक व्यक्ति की हत्या की। वर्ष 2014 में जौनपुर के शाहगंज में परिवार को बंधक बनाकर लूटपाट की और धारदार हथियार से हमला किया, जिसमें दो महिलाओं की मौत हो गई। वर्ष 2015 में कौशांबी में दंपती की हत्या कर डकैती की वारदात को अंजाम दिया। 2015 में ही मुजफ्फरनगर में कई घरों में सिलसिलेवार डकैतियां डालीं और महिलाओं पर जानलेवा हमला किया। वर्ष 2021 में कानपुर देहात के रसूलाबाद में घर में घुसकर तासीम की हत्या करने का भी आरोप था। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ विभिन्न जनपदों में 25 से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 25 हजार के इनामी का हाफ एनकाउंटर उधर, बहराइच में सोमवार की रात गोकशी के आरोपी व थाना कैसरगंज के 25 हजार के इनामी बदमाश अशरफ उर्फ टन्ने के साथ पुलिस की मुठभेड़ हो गई। इस घटना में वांछित अपराधी के पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस को उसके हरनी गांव की रोड से प्यारेपुर जाने वाले रास्ते में पुलिया पर बैठे होने की जानकारी मिली थी। सूचना पर थाना कैसरगंज की पुलिस टीम द्वारा पुलिया के नजदीक पहुंच कर घेरेबंदी की। पुलिस टीम से घिरता देख बदमाश ने पुलिस टीम पर फायर कर दिया। पुलिस ने फायर किया तो उसके दाहिने पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी से उसके पास एक देशी तमंचा, कारतूस और एक खोखा कारतूस बरामद हुआ है।

‘सतलुज’ फिल्म विवाद पर गरमाई सियासत, AAP नेता बोले- सरकार पंजाब की सच्चाई छिपा रही

चंडीगढ़. ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 से फिल्म 'सतलुज' को हटाए जाने पर आम आदमी पार्टी के नेता नील गर्ग ने केंद्र सरकार पर कड़ा निशाना साधा है। बठिंडा में मीडिया से बात करते हुए नील गर्ग ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और फिल्म को तुरंत रिलीज करने की मांग की। नील गर्ग ने कहा, "जब 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरला स्टोरी' जैसी फिल्मों को प्रमोट किया जाता है, तो सरकारें पंजाब के सच को दबाने की कोशिश क्यों करती हैं?" उन्होंने आगे कहा कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के संघर्ष पर बनी फिल्म 'सतलुज' में 1980 और 1990 के दशक में कांग्रेस सरकार के दौरान पंजाब के युवाओं पर हुए अत्याचारों को दिखाया गया है। ऐसी फिल्मों पर रोक लगाना और उन्हें दबाना इस बात का सबूत है कि सरकार अपने ही इतिहास से डरती है। आप नेता ने केंद्र और कांग्रेस के बीच मिलीभगत की आशंका जताते हुए सवाल किया, "उस समय कांग्रेस सत्ता में थी; तो फिर केंद्र सरकार इससे क्यों डर रही है? क्या दोनों के बीच कोई मिलीभगत है? इस फिल्म पर रोक लगाकर आखिर क्या छिपाया जा रहा है?" नील गर्ग ने मांग ने क्या मांग की? नील गर्ग ने मांग की है कि इस फिल्म को रिलीज किया जाना चाहिए ताकि अतीत पर रोशनी डाली जा सके और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सके। फिल्म अभिनेता और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज की काफी चर्चा हो रही है। कानूनी और सर्टिफिकेशन से जुड़ी कई मुश्किलों के बाद 3 जुलाई को आखिरकार जी5 ने पहले इस फिल्म को ओटीटी पर रिलीज किया और अब हटा दिया है। यह फिल्म 2022 में बनकर तैयार हो गई थी लेकिन लंबे समय तक सर्टिफिकेशन के पचड़े में फंसी रही। इसी वजह से 2023 में ये टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में तय प्रीमियर में शामिल नहीं हो पाई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है जो इतने फसाद में फंसी हुई है किस पर आधारित है यह फिल्म? दिलजीत की सतलुज मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी और पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आधारित है। जसवंत सिंह खालरा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में लापता हुए हजारों अज्ञात लोगों और उनके कथित अंतिम संस्कार के मामले की जांच की थी। उनकी इस जांच ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ला खड़ा किया था। इस मुद्दे को उठाने के बाद जसवंत सिंह खुद लापता हो गए।

शिव पुराण में कलयुग का वर्णन, जानें कैसा होगा मानव जीवन का स्वरूप

जैसे जन्म के बाद मृत्यु निश्चित है, वैसे ही युगों का परिवर्तन भी अटल सत्य है. हिंदू धर्म ग्रंथों में समय को चार युगों में विभाजित किया गया है सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलयुग. वर्तमान समय में हम कलयुग में जी रहे हैं. हमारे शास्त्रों में पहले ही बताया गया है कि कलियुग में मानव जीवन कैसा होगा. तो आइए जानते हैं कि शिव पुराण के अनुसार कलयुग का स्वरूप कैसा बताया गया है. कलयुग के बारे में क्या कहता है शिवपुराण शिवपुराण में कलयुग का विस्तृत वर्णन मुख्य रूप से विद्येश्वर संहिता के पहले और दूसरे अध्याय में मिलता है. इसमें सूत जी और ऋषियों के संवाद के माध्यम से कलयुग की शुरुआत और उसके अंत के बारे में विस्तार से बताया गया है. शिव पुराण के अनुसार, घोर कलयुग आने पर मनुष्य पुण्य कर्मों से दूर हो जाएगा और दुराचार में फंस जाएगा. लोग सत्य बोलने से मुंह मोड़ लेंगे. दूसरों की निंदा करने में लगे रहेंगे. पराए धन को हड़पने की इच्छा बढ़ेगी. मन पराई स्त्रियों में आसक्त रहेगा. लोग हिंसक प्रवृत्ति के हो जाएंगे और अपने शरीर को ही आत्मा मानने लगेंगे. मनुष्य नास्तिक, गुणहीन और पशु बुद्धि वाला हो जाएगा. माता-पिता के प्रति द्वेष बढ़ेगा. ब्राह्मण लोभ के कारण अपने धर्म से भटक जाएंगे और वेदों का ज्ञान बेचकर जीविका चलाएंगे. विद्या का उपयोग केवल धन कमाने के लिए किया जाएगा और लोग अहंकार में डूबे रहेंगे. वर्गों का होगा नाश शिवपुराण के मुताबिक, क्षत्रिय वर्ग भी अपने धर्म का त्याग कर देगा. उनमें शौर्य का अभाव होगा और वे गलत तरीकों से जीविका कमाएंगे. वैश्य वर्ग भी धर्म से भटक जाएगा और केवल धन कमाने पर ध्यान देगा, यहां तक कि व्यापार में भी धोखाधड़ी करेगा. शूद्र वर्ग अपने कर्म छोड़कर दूसरों के आचरण अपनाने लगेगा और बाहरी दिखावे में लगा रहेगा. समाज में हर व्यक्ति अपने धर्म और कर्तव्यों से भटक जाएगा. लोग कुटिल, स्वार्थी और दूसरों की निंदा करने वाले होंगे. यदि कोई धनवान होगा तो कुकर्मों में लिप्त रहेगा और विद्वान होने पर भी केवल वाद-विवाद में उलझा रहेगा. कलयुग में स्त्रियों का क्या होगा? कलयुग की स्त्रियों के बारे में भी बताया गया है कि वे सदाचार से दूर हो जाएंगी, पति का अपमान करेंगी और सास-ससुर का आदर नहीं करेंगी. वे अनुशासनहीन होंगी और पारिवारिक मूल्यों से दूर होती जाएंगी. आज के समय में हम देखते हैं कि शिव पुराण में कही गई कई बातें वास्तविकता में घटित होती दिखाई दे रही हैं. हालांकि, कलयुग के अभी केवल लगभग 5000 वर्ष ही बीते हैं और इसके समाप्त होने में अभी लाखों वर्ष बाकी हैं.