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सोमाली जेट और अल नीनो का असर, देश में 40% कम बारिश से हालात बिगड़े

नई दिल्ली  देश के सुदूर दक्षिणी छोर केरल में एक तो लेट से मानसून टकराया था। 1 जून को आने वाला यह मानसून इस बार 4 जून को आया। शुरुआत में इसकी रफ्तार मध्य भारत तक ठीक-ठाक रही, मगर जब तक यह ठीक से भिगोता हुआ आगे बढ़ता कि इसकी रफ्तार पर ब्रेक ही लग गया। इसके बाद तो इसके करीब-करीब गायब होने की बातें भी आईं। बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर करने के बाद यह मानसून अचानक लापता हो गया। अब पूरा उत्तर भारत मानसून का बेसब्री से बाट जोह रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात तक में लोग मानसून के स्वागत में खड़े हैं। 12 दिनों से तेलंगाना-महाराष्ट्र में अटका था मानसून ऐसी रिपोर्ट हैं कि महाराष्ट्र और तेलंगाना में यह मानसून बीते 12 दिनों से अटका हुआ था। मगर, अब इसके आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून के लापता होने में सोमाली जेट भी एक बड़ा कारण है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सोमाली जेट के कमजोर विकास ने मानसून की रफ्तार को थाम दिया है। सोमाली जेट क्या होता है, जिसने बिगाड़ा मानसून का मूड     सोमाली जेट एक भूमध्यरेखीय वायु प्रणाली है, जो हिंद महासागर में अफ्रीका के पूर्वी तट के पास बनती है। भारतीय मानसून के लिए अहम सोमाली जेट को फाइंडलेटर जेट भी कहते हैं।     सोमाली जेट पूर्वी अफ्रीका में अपेक्षाकृत कम वर्षा का कारण बनता है। दरअसल सोमाली जेट एक निम्न-स्तरीय वायु प्रवाह है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून को भारत की ओर लाने में मदद करता है।     सोमाली जेट के कमजोर पड़ने से भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है।     बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव प्रणालियों का भी अभाव रहा है, जो आमतौर पर मानसून को अंदरूनी इलाकों तक खींचने में मददगार होती हैं।     इस बार अल नीनो की वजह से भी मानसून के कमजोर पड़ने की आशंका भी मौसम वैज्ञानिक बार-बार जता रहे हैं। 1 से 18 जून तक 40 फीसदी कम बारिश     मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 18 जून के बीच देश में बारिश औसत से 40% कम रिकॉर्ड की गई है।     आमतौर पर 01 जून से 17 जून के बीच देश में औसतन 80.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल अब तक सिर्फ 48.5 मिलीमीटर बारिश हुई है।     मध्य भारत क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां 01 जून से 18 जून के बीच औसत से 63% कम बारिश दर्ज की गई है। 23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंचेगा भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 23 जून तक इसके छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून के लिए जरूरी सिस्टम सक्रिय हो गया है। मध्य भारत में बन रहा चक्रवातीय घेरा     इससे मध्य भारत में चक्रवातीय घेरा बना हुआ है, जिससे मानसून के बादल उत्तर भारत की तरफ आ सकते हैं। मानसून 15 दिन में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है, लेकिन 8 जून से तेलंगाना में अटका हुआ है।     इससे पहले बिहार में शुक्रवार को बिजली गिरने से 6 लोगों की और झारखंड में 8 लोगों की जान गई। राजस्थान के 12 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूरे महाराष्ट्र में हाहाकार मचा, खुले में रात बिता रहे लोग मानसून की इस बेरुखी की वजह से महाराष्ट्र में पानी को लेकर हाहाकार मचा है। पुणे में पानी की सप्लाई के लिए ऑड-इवन फॉर्मूला लागू किया गया है मुंबई में मारे गर्मी के लोग समुद्री तट के किनारे खुले में रात बिता रहे हैं। यहां 11 जून को ही मानसून मुंबई पहुंचने वाला था, मगर अभी तक इसका अता-पता नहीं है। इन राज्यों तक पहुंच चुका है मानसून मौसम विभाग के अनुसार, मानसून केरल, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा, असम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक पहुंच चुका है। 20 जून से 5 जुलाई के बीच इन राज्यों में मानसूनी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में 20 जून से 5 जुलाई तक पहुंचेगा। मध्य और दक्षिण भारत में आंधी-तूफान, बंगाल में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21 से 23 जून के बीच आंधी-तूफान और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, महाराष्ट्र के विदर्भ में 19 से 23 जून तक ऐसा ही मौसम रहने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ में भी 19 से 23 जून के बीच आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की आशंका है। मौसम का यह बदलाव सिर्फ मध्य भारत तक सीमित नहीं। तमिलनाडु और पुडुचेरी में 19 से 21 जून के बीच कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि केरल में भी 19 से 23 जून के बीच भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, बंगाल के कोलकाता, सिलिगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में शनिवार को भी भारी बारिश हुई। दार्जिलिंग में बालासन नदी उफान पर आ गई। इससे नदी पर ह्यूम पाइप से बना पुल टूट कर बह गया। मानसून की कमी के बीच पारा 40 डिग्री के पार     मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई शहरों में बुधवार को पारा 40°C से ज्यादा रहा। देश में सबसे ज्यादा पारा उत्तर प्रदेश के बांदा में 44.2°C दर्ज किया गया।     वहीं यूपी के प्रयागराज में 43.6°C, एमपी के खजुराहो 42.4°C, महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी में 42.1°C, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 42°C, बिहार के छपरा में 41.8°C और झारखंड के डाल्टनगंज में 40°C रहा। 21 और 22 जून को क्या होगी बारिश     21 जून को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना है। बिहार में कुछ जगहों पर 50-70kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।     असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।     राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। कई इलाकों में 40-60kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। … Read more

जेफरीज रिपोर्ट: ग्लोबल मार्केट पर बदले हालात, ईरान की बढ़ी ताकत

नई दिल्‍ली  हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान सीजफायर फ्रेमवर्क से ईरान को सबसे ज्‍यादा फायदा हुआ है। जेफरीज की हालिया 'ग्रीड एंड फियर' रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसके अनुसार, प्रस्तावित समझौता जियोपॉलिटिकल हालात में एक बड़ा बदलाव है। इसके ग्लोबल मार्केट पर दूरगामी असर हो सकते हैं। ईरान मार ले गया मैदान रिपोर्ट के मुताबिक, इस ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी करने की बात कही गई है। साथ ही लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंधों को हटाए जाने की भी संभावना है। बातचीत औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ही आधी रकम मिलने की उम्‍मीद है। जेफरीज ने इस घटनाक्रम को इस बात का संकेत बताया है कि बातचीत में तेहरान का पलड़ा भारी रहा है। ट्रंप को ऐसे हुआ नुकसान ब्रोकरेज के अनुसार, यह युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़ते राजनीतिक दबाव को भी दिखाता है। उनकी अप्रूवल रेटिंग काफी कम हो गई है। रिपोर्ट में बताए गए रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे में 62% लोगों ने उन्हें नापसंद किया। वहीं, 63% लोगों ने अर्थव्यवस्था को संभालने के उनके तरीके को नापसंद किया। मार्केट के नजरिए से जेफरीज का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला सीजफायर और तेल की कम कीमतें अमेरिका के बाहर के मार्केट, खासकर साइक्लिकल सेक्टर में बेहतर परफॉर्मेंस में मदद कर सकती हैं। इन चार बड़ी कंपनियों की बल्‍ले-बल्‍ले रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश की भारी तेजी पर भी जोर दिया गया है। अमेरिका की चार बड़ी हाइपरस्केलर कंपनियों का कैपिटल एक्सपेंडिचर 2026 में 680 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह AI की होड़ की तीव्रता को दिखाता है। इन कंपनियों में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और मेटा शामिल हैं। जापान में बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरें बढ़ाकर 1% कर दी हैं। ये तीन दशकों से ज्‍यादा समय में सबसे ज्‍यादा स्तर है। यील्ड बढ़ने के बावजूद जेफरीज का मानना है कि बेहतर होती नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ और महंगाई की स्थिति के कारण जापानी इक्विटी सरकारी बॉन्ड की तुलना में काफी ज्‍यादा आकर्षक बनी हुई है। अमेरिका में महंगाई की बढ़ती चिंता ब्रोकरेज के अनुसार, अमेरिका में महंगाई के जोखिमों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। मनी मार्केट अब 2026 के अंत तक ब्याज दरों में लगभग 0.36 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। यह इस चिंता को दिखाती है कि महंगाई पहले की उम्मीद से ज्‍यादा समय तक बनी रह सकती है। जेफरीज का तर्क है कि बॉन्ड यील्ड का बढ़ना निवेशकों के लिए मुख्य जोखिमों में से एक बना हुआ है। साथ ही, कॉर्पोरेट कमाई की उम्मीदें भी मजबूत बनी हुई हैं। आम सहमति वाले अनुमानों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में एसएंडपी 500 की कमाई में साल-दर-साल 22.8 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसमें टेक्नोलॉजी कंपनियां इस बढ़त में सबसे आगे रहेंगी। इमर्जिंग मार्केट्स कंपनियों में कुछ को प्रॉफिट हालांकि, जेफरीज को इक्विटी मार्केट में सट्टेबाजी के बढ़ते संकेत दिख रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले साल MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में शामिल सिर्फ 24.6% शेयरों ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। यह एक रिकॉर्ड निचला स्तर है जो बताता है कि मार्केट का नेतृत्व कुछ ही शेयरों तक सीमित होता जा रहा है। रिपोर्ट में स्‍पेसएक्‍स को लेकर दिख रहे जबरदस्त उत्साह का भी जिक्र किया गया है। हाल ही में लॉन्च किए गए 11 लेवरेज्ड स्‍पेसक्‍स एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने सिर्फ तीन दिनों में 8.2 अरब डॉलर का ट्रेडिंग वॉल्यूम हासिल किया। वहीं, उनके पास मौजूद एसेट्स की कीमत सिर्फ 63.8 करोड़ डॉलर थी। जेफरीज इस घटनाक्रम को आम निवेशकों की तरफ से सट्टेबाजी के बढ़ते जोश का एक और संकेत मानता है। इजरायल रह गया खाली हाथ इजरायल का रिपोर्ट में जिक्र नहीं है। लेकिन, वह खाली हाथ ही रहा है। युद्धविराम से इजरायल नाराज है। ऐसा होने का मुख्य कारण यह है कि इस पूरी बातचीत में इजरायल को पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया। इससे उसके प्रमुख सुरक्षा हित दांव पर लग गए हैं। इजरायल का मानना है कि इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करने और लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह व गाजा में हमास जैसे ईरान-समर्थित सशस्त्र समूहों के खतरों को खत्म करने का कोई ठोस रोडमैप नहीं है। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन की ओर से तय की गई शर्तों के तहत दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की मांग ने इजरायल के भीतर राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर भारी असंतोष पैदा कर दिया है। उसे डर है कि युद्ध रुकने से उसके दुश्मनों को फिर से मजबूत होने का मौका मिल जाएगा। चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था इस बीच, चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था संघर्ष कर रही है। रिटेल बिक्री कमजोर हुई है। क्रेडिट ग्रोथ धीमी है। प्रॉपर्टी में निवेश पर दबाव बना हुआ है। फिर भी निर्यात खासकर सेमीकंडक्टर शिपमेंट में तेजी से बढ़ोतरी जारी है। इससे आर्थिक तस्वीर काफी असमान होती जा रही है। कुल मिलाकर, जेफरीज का मानना है कि निवेशक एक ऐसी दुनिया में काम कर रहे हैं जो भू-राजनीतिक अनिश्चितता, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और AI-आधारित बाजार तेजी से आकार ले रही है। यह तेजी कुछ ही क्षेत्रों या शेयरों तक सीमित होती जा रही है।

घोड़ों की उत्पत्ति पर बदली वैज्ञानिक समझ, चीन से मिला बड़ा सबूत

बीजिंग  घोड़ों के विकास के इतिहास को एक नई फॉसिल DNA स्टडी ने बदल दिया है। इस स्टडी से पता चला है कि उत्तर-पूर्वी चीन का विलुप्त हो चुका 'डालियन घोड़ा' (Dalian horse) उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के बीच जेनेटिक कड़ी का काम करता था। सबसे पहले कहां पाए गए घोड़े? सालों से एक बात मानी जा रही है कि घोड़े यूरोप से अमेरिका लाए गए थे। उन्हें स्पेनिश विजेताओं ने अमेरिका पहुंचाया और वहां के मूल निवासियों को एक ऐसे जीव से चौंका दिया था जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। लेकिन हाल की जीनोमिक रिसर्च ने इस कहानी को पूरी तरह से बदल दिया है। घोड़ों की उत्पत्ति लाखों साल पहले उत्तरी अमेरिका में हुई थी और वे चीन में मौजूद एक आश्चर्यजनक जेनेटिक कड़ी की वजह से ही यूरोप तक पहुंच पाए। डालियन घोड़ा (Dalian Horse) 'स्टेट की लेबोरेटरी ऑफ जियोमाइक्रोबायोलॉजी एंड एनवायर्नमेंटल चेंजेज' के शोधकर्ताओं के मुताबिक, डालियन घोड़ा – जिसे कभी उत्तर-पूर्वी चीन तक सीमित एक स्थानीय अनोखा जीव माना जाता था, उसमें अमेरिका से जुड़ी खास जेनेटिक खूबियां पाई गई थीं। उसने ये खूबियां साइबेरिया में घोड़ों की प्राचीन आबादी तक पहुंचाईं। इस जीन प्रवाह (gene flow) का मतलब है कि जिन वंश-परंपराओं से बाद में आधुनिक यूरोपीय घोड़े बने, उन्हें अपनी अमेरिकी जड़ें इसी चीनी घोड़े से मिलीं। घोड़ों ने तय किया 50,000 साल का सफर इक्वीड्स (घोड़े के परिवार के जीव) की उत्पत्ति शुरुआती इओसीन काल में उत्तरी अमेरिका में हुई थी। 'इक्वस' (Equus) जीनस, जो सबसे पहले करीब 4 से 5 मिलियन साल पहले सामने आया था, एकमात्र जीवित वंश है जिसमें सभी आधुनिक घोड़े, गधे और जेबरा शामिल हैं। फॉसिल रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 'इक्वस' करीब 2.6 मिलियन साल पहले बेरिंग लैंड ब्रिज के जरिए उत्तरी अमेरिका से यूरेशिया में फैला और फिर उसमें बड़े पैमाने पर विकासवादी विविधता आई। विलुप्त हो गया डालियन घोड़ा स्टेबल आइसोटोप एनालिसिस से पता चला कि डालियान घोड़ा खास तरह की घास खाने वाला जानवर था। जब लगभग 40,000 साल पहले माहौल बदला और नमी बढ़ गई, जिससे सूखे घास के मैदानों की जगह पीट-लैंड और वेट-लैंड (दलदली और गीली जमीन) ने ले ली, तो सीमित खान-पान की वजह से यह खुद को ढाल नहीं पाया। डालियान घोड़े के बड़े शरीर और सीमित इकोलॉजिकल प्लास्टिसिटी (पर्यावरण के हिसाब से खुद को बदलने की सीमित क्षमता) की वजह से वग अच्छी क्वालिटी का चारा खत्म होने पर जिंदा नहीं रह सका। विलुप्त होने का यह पैटर्न उस दौर के दूसरे बड़े शाकाहारी जानवरों, जैसे उत्तरी अमेरिकी घोड़े और विशाल ऊंट, जैसा ही है।

शरद पवार से उद्धव ठाकरे तक: गठबंधन और बगावत की कहानी

 मुंबई महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय जो कुछ भी हो रहा है, वह कोई नई बात नहीं है। राज्य के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो पार्टियों में टूट, गठबंधनों का बदलना, पार्टी के चुनाव चिह्नों पर विरोधी दावे, रातों-रात बनने वाली सरकारें और एक साझा प्रतिद्वंद्वी को सत्ता से दूर रखने के लिए विरोधियों का हाथ मिलाना आम बात रही है। शिवसेना को अपनी चपेट में लेने वाला यह नया संकट एक ऐसी कहानी का अगला अध्याय है, जिसकी शुरुआत दशकों पहले 1960 के दशक के अंत में कांग्रेस के विभाजन और एक युवा विद्रोही के रूप में शरद पवार के उदय के साथ हुई थी। जैसे-जैसे शिवसेना के दोनों गुट पार्टी की स्थापना के 60 साल पूरे कर रहे हैं, बाल ठाकरे द्वारा बनाया गया यह संगठन आज बंटा हुआ नजर आता है। फिर भी, महाराष्ट्र को इस मुकाम तक लाने वाला रास्ता बहुत पहले ही तैयार हो चुका था। कांग्रेस का विभाजन ने भारतीय राजनीति को बदल दिया आधुनिक भारतीय राजनीति के सबसे निर्णायक क्षणों में से एक नवंबर 1969 में आया, जब कांग्रेस पार्टी ने एक ऐतिहासिक टूट का सामना किया। राष्ट्रपति चुनाव के बाद से यह संकट महीनों से पनप रहा था। इसका चरम तब हुआ जब कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने का असाधारण कदम उठाया। इस कदम ने कांग्रेस के भीतर सत्ता के दो केंद्रों के बीच खुले टकराव को जन्म दिया। तीन घंटे की बैठक के बाद, पार्टी अध्यक्ष एस. निजलिंगप्पा के नेतृत्व में वर्किंग कमेटी के 21 में से 11 सदस्यों ने एक नए नेता के चुनाव के लिए कांग्रेस संसदीय दल की तत्काल बैठक बुलाई। समिति में शामिल गांधी के समर्थक 10 सदस्यों ने इस बैठक का बहिष्कार किया। इंदिरा गांधी और उनके समर्थकों ने वर्किंग कमेटी के फैसले को अवैध और अमान्य बताते हुए खारिज कर दिया। उनका तर्क था कि जब तक उन्हें सांसदों का बहुमत प्राप्त है, तब तक वह कांग्रेस की सदस्य और संसदीय दल की नेता बनी रहेंगी। संसद में 167 कांग्रेस सांसदों का एक समूह एक प्रतिद्वंद्वी पार्टी मुख्यालय में इकट्ठा हुआ और लोकतंत्र और समाजवाद की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा करते हुए इंदिरा गांधी के नेतृत्व को अपना समर्थन दिया। शरद पवार की पहली राजनीतिक बगावत 1969 के विभाजन के बाद, महाराष्ट्र के कई नेताओं ने इंदिरा गांधी की कांग्रेस (आर) या रिक्विजिशनिस्ट का पक्ष लिया। इनमें यशवंतराव चव्हाण और उनके राजनीतिक शिष्य शरद पवार भी शामिल थे। हालांकि, महाराष्ट्र में गहरा विभाजन 1977 के आम चुनाव में आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी की हार के बाद उभरा। तब तक कांग्रेस एक बार फिर टूट चुकी थी। गांधी के गुट को कांग्रेस (आई) के नाम से जाना जाने लगा, जहां आई का अर्थ इंदिरा था, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट कांग्रेस यूनाइटेड के रूप में उभरा। पवार ने यशवंतराव चव्हाण के साथ कांग्रेस (यू) के साथ रहना चुना। दोनों कांग्रेस गुटों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा, लेकिन बाद में जनता पार्टी को महाराष्ट्र में सत्ता से बाहर रखने के लिए हाथ मिला लिया। वसंतदादा पाटिल मुख्यमंत्री बने और पवार एक मंत्री के रूप में सरकार में शामिल हुए। यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल पाई। उसी वर्ष, पवार कांग्रेस (यू) से अलग हो गए, जनता पार्टी के समर्थन से प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) नामक एक गठबंधन बनाया और 38 वर्ष की आयु में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए। यह राज्य के इतिहास में राजनीतिक विद्रोह के सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक था। उनका पहला कार्यकाल 1980 में समाप्त हुआ जब केंद्र में सत्ता में लौटीं इंदिरा गांधी ने उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया। फिर भी पवार का कांग्रेस के साथ रिश्ता स्थायी रूप से शत्रुतापूर्ण होने के बजाय लचीला बना रहा। 1987 में वह पार्टी में लौट आए, बाद में यह स्पष्ट करते हुए कि वह शिवसेना के बढ़ते प्रभाव को रोकना चाहते थे। शिवसेना का उदय एक ओर जहां कांग्रेस के गुट वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे थे, वहीं महाराष्ट्र में एक और ताकत उभर रही थी। 1966 में बाल केशव ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की, जिन्हें बालासाहेब ठाकरे के नाम से जाना जाता है। पेशे से कार्टूनिस्ट और समाज सुधारक केशव प्रबोधनकार ठाकरे के बेटे बाल ठाकरे ने महाराष्ट्र की मराठी भाषी आबादी के हितों को लेकर इस पार्टी का निर्माण किया। समय के साथ, शिवसेना ने विशेष रूप से मुंबई में एक मजबूत जमीनी संगठन विकसित किया। इसके कार्यकर्ता अपने आक्रामक सड़क-स्तर के लामबंदी और पार्टी नेतृत्व के प्रति अटूट वफादारी के लिए जाने जाने लगे। पार्टी के उभार ने अंततः इसे भाजपा के साथ दीर्घकालिक गठबंधन में ला खड़ा किया। लगभग 25 वर्षों तक शिवसेना और भाजपा राजनीतिक भागीदार बने रहे। उस अवधि के अधिकांश समय में, शिवसेना को व्यापक रूप से महाराष्ट्र में सीनियर भागीदार के रूप में माना जाता था। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, वह संतुलन 2014 के बाद बदलना शुरू हुआ जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और भाजपा राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी। पहली शिवसेना-भाजपा सरकार वर्ष 1995 एक और ऐतिहासिक क्षण लेकर आया। महाराष्ट्र में पहली बार शिवसेना-भाजपा गठबंधन सत्ता में आया। मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने, जबकि गोपीनाथ मुंडे ने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। यह सरकार केवल औपचारिक गठबंधन पर ही नहीं, बल्कि निर्दलीय और बागी विधायकों के समर्थन पर भी निर्भर थी। अविभाजित शिवसेना ने अंततः तीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी, नारायण राणे और उद्धव ठाकरे दिए। फिर भी, किसी ने भी पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया। पवार का कांग्रेस से दूसरी बार नाता टूटना 1999 में, महाराष्ट्र ने एक और बड़ी राजनीतिक टूट देखी। शरद पवार सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस से अलग हो गए और एक अलग राजनीतिक दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। विभाजन के बावजूद, राजनीति ने एक बार फिर अप्रत्याशित साझेदारियां पैदा कीं। शिवसेना-भाजपा गठबंधन को सरकार बनाने से रोकने के लिए चुनाव के बाद कांग्रेस और पवार की नई पार्टी ने हाथ मिला लिया। विलासराव देशमुख मुख्यमंत्री बने। 2004 से 2014 तक, पवार केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के भीतर एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए और केंद्रीय मंत्री के … Read more

PhonePe का नया नियम लागू, कुछ सेवाओं पर देना होगा अतिरिक्त शुल्क; चार्ज ₹100 तक पहुंच सकता है

 नई दिल्ली PhonePe चलाने वालों के लिए जरूरी खबर है. जल्द ही पेमेंट ऐप में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. कंपनी ने वॉलेट गाइडलाइंस को अपडेट किया है, जिसके बाद अगर आप लंबे समय तक वॉलेट का यूज करना छोड़ देते हैं, तो 100 की पेमेंट करनी पड़ सकती है।  कंपनी ने हाल ही में अपनी वॉलेट गाइडलाइंस को अपडेट किया है, जिसके तहत अगर कोई फोनपे यूजर 365 दिनों तक अपने PhonePe Wallet का उपयोग नहीं करता है, तो उसपर इनएक्टिविटी मेंटेनेंस फीस लगाई जाएगी. यह फीस 100 रुपये होगी।  फोनपे की नई गाइडलाइंस को लेकर कई लोगों ने नाराजगी जाहिर की है. इसको लेकर बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।  X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर @yabhishekhd नाम के अकाउंट ने बताया कि कई यूजर्स PhonePe Wallet का इस्तेमाल नहीं करते और सीधे अपने बैंक अकाउंट से UPI पेमेंट करते हैं. कुछ  लोगों ने कहा कि ऐसे फीचर के लिए पैसे वसूलना, जो उसका इस्तेमाल नहीं करते हैं, गलत है।  आजकल लोग लोग Wallet में पैसे डालकर उसे लंबे समय तक बिना इस्तेमाल किए छोड़ देते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि Inactive Wallet क्या होता है, किन यूजर्स पर यह शुल्क लागू हो सकता है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए। Inactive Wallet किसे माना जाएगा Inactive Wallet का मतलब ऐसे Wallet से है जिसका उपयोग लंबे समय तक नहीं किया गया हो। यदि कोई यूजर Wallet में पैसे रखकर उसे महीनों तक इस्तेमाल नहीं करता, न कोई ट्रांजैक्शन करता है और न ही कोई भुगतान करता है, तो उसे Inactive कैटेगरी में रखा जा सकता है। Inactive Wallet पर हर तीन महीने में 100 रुपए तक का शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि यह चार्ज Wallet में उपलब्ध बैलेंस और अन्य शर्तों के आधार पर भी तय किया जा सकता है। क्या सभी PhonePe यूजर्स पर लागू होगा नियम? नहीं, यह शुल्क केवल Wallet यूजर्स के लिए हो सकता है। जो लोग केवल UPI के जरिए सीधे बैंक अकाउंट से पेमेंट करते हैं, उन पर इसका असर नहीं पड़ने की संभावना है। यह मुख्य रूप से PhonePe Wallet से जुड़े अकाउंट्स के लिए हो सकता है। UPI और Wallet में क्या अंतर और शुल्क से बचने का तरीका कई लोग UPI और Wallet को एक जैसा समझते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग सेवाएं हैं। UPI में भुगतान सीधे बैंक अकाउंट से होता है। वहीं Wallet में पहले पैसे जोड़ने पड़ते हैं और फिर उसी बैलेंस से भुगतान किया जाता है। अगर आप PhonePe Wallet का इस्तेमाल करते हैं, तो समय-समय पर उसमें कोई छोटा ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। मोबाइल रिचार्ज, बिल भुगतान या किसी भी छोटे भुगतान के जरिए Wallet को एक्टिव रखा जा सकता है। इससे Wallet निष्क्रिय नहीं माना जाएगा। किन लोगों पर लगेगी 100 रुपये की फीस  100 रुपये की फीस सिर्फ उन लोगों पर लागू होगी, जिन्होंने एक साल तक अपने PhonePe Wallet से कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया है. सिर्फ PhonePe ऐप खोलना या UPI के जरिए भुगतान करना वॉलेट गतिविधि नहीं माना जाएगा. शुल्क से बचने के लिए यूजर्स को वॉलेट के जरिए कम से कम एक ट्रांजैक्शन करना होगा, जिससे वॉलेट दोबारा एक्विट मान लिया जाएगा।  15 दिन पहले आएगा अलर्ट मैसेज  फोनपे की तरह से फीस काटने से पहले यूजर्स को 15 दिन पहले एक मैसेज भेजा जाएगा. अगर वॉलेट में बैलेंस है तो कंपनी सीधे 100 रुपये काट लेगी. वहीं, अगर वॉलेट में 100 रुपये से कम रकम है तो वह रकम पूरी काट ली जाएगी. हालांकि बैलेंस को नेगेटिव नहीं किया जाएगा।  क्या होता है PhonePe वॉलेट और इसका काम क्या है? जब आप पहली बार अपने मोबाइल में PhonePe ऐप डाउनलोड करते हैं, तो वॉलेट की सर्विस इसके साथ ही इन-बिल्ट (नत्थी होकर) आती है. यूजर इस वॉलेट को अपने बैंक खाते से रीचार्ज करके इसमें पैसे रख सकते हैं. वॉलेट का एकमात्र बड़ा फायदा यह है कि यह ऑफलाइन या कम नेटवर्क में भी काम कर जाता है।  अगर कभी आपके बैंक का सर्वर डाउन है और आप सीधे अकाउंट से पैसे नहीं भेज पा रहे हैं, तो वॉलेट में मौजूद पैसों से तुरंत भुगतान किया जा सकता है. आज के समय में शायद ही कोई वॉलेट में पैसे रखता है. अगर एक ऐप का यूपीआई काम नहीं करता, तो लोग तुरंत गूगल पे (Google Pay) या पेटीएम (Paytm) जैसे दूसरे ऐप का इस्तेमाल कर लेते हैं. इसलिए आम जनता के लिए यह वॉलेट लगभग बेकार ही पड़ा रहता है।  क्या PhonePe का ऐसा चार्ज वसूलना कानूनी है? कई यूजर्स के मन में यह सवाल है कि बिना इस्तेमाल किए पैसे काटना क्या बेईमानी नहीं है? लेकिन तकनीकी और कानूनी रूप से कंपनी ऐसा कर सकती है. जब हम पहली बार ऐप पर साइन-अप या लॉगिन करते हैं, तो हम बिना पढ़े ‘नियम और शर्तों’ (Terms and Conditions) को स्वीकार (Accept) कर लेते हैं. कंपनी इसी कानूनी दांवपेच का फायदा उठा रही है. हालांकि, आम उपभोक्ताओं के नजरिए से देखा जाए तो इसे एक तरह की ‘जबरदस्ती’ ही कहा जाएगा।  वॉलेट चार्ज से अपने ₹100 कैसे बचाएं ? अगर आप इस गैर-जरूरी चार्ज से बचना चाहते हैं, तो आपके पास दो आसान रास्ते हैं. अपने PhonePe वॉलेट में ₹10 या ₹50 डालकर उसे दोबारा एक्टिवेट कर लें और कभी-कभी उससे कोई छोटा-मोटा भुगतान कर दें. इससे आपका वॉलेट इनएक्टिव लिस्ट से बाहर हो जाएगा।  यदि आप इस वॉलेट झंझट को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं, तो ऐप के भीतर जाकर अपने वॉलेट की फुल केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करें. इसके बाद आप वॉलेट को पूरी तरह बंद या हमेशा के लिए इनएक्टिवेट करने का विकल्प चुन सकते हैं।  ध्यान रहे कि इस वॉलेट चार्ज का आपकी सामान्य यूपीआई (UPI) सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यदि आप वॉलेट एक्टिव नहीं भी करते हैं, तो भी आप पहले की तरह बैंक-टू-बैंक यूपीआई ट्रांसफर (Scan & Pay) करते रह सकेंगे।  आखिर PhonePe ऐसा कर क्यों रहा है? बाजार के जानकारों का मानना है कि कंपनी यह कदम अपनी बैलेंस शीट को मजबूत और दमदार दिखाने के लिए उठा रही है. दरअसल, PhonePe आने वाले समय में अपना … Read more

राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रु. की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया सीएम योगी ने

ललितपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ललितपुर को आज एक साथ 1500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की सौगात मिल रही है। कांग्रेस ने पांच दशक और सपा ने चार बार प्रदेश में शासन किया, लेकिन इन दलों ने कुल मिलाकर 1500 करोड़ रुपये भी ललितपुर को नहीं दिए होंगे, क्योंकि उनमें विकास की सोच नहीं थी। सपा के लिए सैफई ही परिवार था और कांग्रेस के लिए दिल्ली का परिवार ही देश था। दोनों इससे बाहर नहीं निकल सकते। लेकिन, हमारे लिए 25 करोड़ जनता ही परिवार है और उसे विकास, सुरक्षा, सम्मान देना हमारा दायित्व है।  मुख्यमंत्री शनिवार को तुवन मंदिर मैदान में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित 1766 करोड़ रुपये की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर ललितपुर की विकास यात्रा पर लघु फिल्म भी दिखाई गई। सीएम ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात बुंदेलखंड के सुंदरतम जनपदों में से एक ललितपुर हमारे हृदय में बसता है। सीएम ने कार्यक्रम में उपस्थित जनता का अभिनंदन करते हुए आश्वासन दिया कि डबल इंजन सरकार यहां के विकास के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। अब ललितपुर के युवाओं व बेटियों को मिलती है सरकारी नौकरी  सीएम ने कांग्रेस व सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि संकुचित सोच वाली इनकी सरकारों ने हर जनपद में एक-एक माफिया दिया था, जो जनता की गाढ़ी कमाई पर डकैती डालने के साथ अवैध खनन, वनों की अवैध कटान, गोतस्करी करते थे। प्रदेश को बंजर बनाते थे। इन लोगों ने यूपी को बीमारू बनाकर बुंदेलखंड के नौजवानों को पलायन पर मजबूर किया। बहन-बेटियों को कष्ट दिया था, लेकिन आज ललितपुर की बेटियां व नौजवान यूपी पुलिस समेत सरकारी नौकरियों में भर्ती होते हैं।  पिछली सरकारों की उपेक्षा का दंश झेलता था ललितपुर सीएम ने कहा कि पिछली सरकारों की उपेक्षा का दंश झेलने वाला ललितपुर विकास की योजनाओं से कोसों दूर था। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास परियोजनाएं नहीं थीं। पानी होने के बावजूद खेती के लिए सिंचाई, गरीब के लिए आवास की सुविधा नहीं थी। मिट्टी के घड़े में पानी ढोते-ढोते माता-बहनों की जिंदगी व्यतीत हो जाती थी। यहां के संसाधनों व वन संपदा में लूट होती थी और मुट्ठी भर लोग अवैध खनन कर अव्यवस्था पैदा करते थे।  अब नवाचार के लिए जाना जा रहा है ललितपुर सीएम ने कहा कि ललितपुर अब विकास की ऊंचाइयों को प्राप्त कर नवाचार के लिए जाना जा रहा है। प्रदेश की पहली गोशाला देकर ललितपुर ने बताया था कि सरकार भी गोशाला का संचालन कर सकती है। तुवन सरकार की कृपा से तत्कालीन जिला प्रशासन ने पहली गोशाला प्रारंभ की थी। अब वहां से कंपोस्ट का निर्यात अन्य देशों को होने जा रहा है। अब ललितपुर के पास मेडिकल कॉलेज, अटल आवासीय विद्यालय भी है। 1500 एकड़ में यूपी का पहला फार्मा पार्क ललितपुर में बनेगा, इसकी तैयारी हो चुकी है। इससे हजारों नौजवानों को नौकरी मिलेगी।  बुंदेलखंड में बसने जा रहा यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर  सीएम ने कहा कि अब बहन-बेटियां, माताएं सिर पर घड़ा लेकर नहीं जातीं, क्योंकि बुंदेलखंड में हर घर जल की योजना साकार हो रही है। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। सीएम ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की चर्चा करते हुए कहा कि हम लोग यूपी का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर बुंदेलखंड में बसाने जा रहे हैं। पहले यहां का युवा पलायन करता था। ठोकर से घड़ा फूट जाता था तो माताएं-बहनें किस्मत पर रोती थीं। आपके पूर्वजों ने बुंदेलखंड को सजाया-संवारा था, लेकिन पिछली सरकारों के निकम्मेपन और माफियावृत्ति के कारण बुंदेलखंड पिछड़ा था। हर जनपद में माफिया नौजवानों की नौकरी पर डकैती डालता था। विकास योजनाओं पर गुंडों को बैठाकर जनता के हक को छीना जाता था, जिससे बुंदेलखंड ठगा महसूस करता था।  नए भारत को ताकत दे रहे पीएम मोदी सीएम ने याद दिलाया कि सरकार ने बुंदेलखंड को भी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के हब के रूप में विकसित करने की बात कही थी। अभी इस कॉरिडोर में यूपी के अंदर ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। ऑपरेशन सिंदूर में जब यह मिसाइल दागी गई तो पाकिस्तान त्राहिमाम करते हुए जान की भीख मांग रहा था। पीएम मोदी नए भारत को ताकत दे रहे हैं। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश समेत बुंदेलखंड का कायाकल्प हो रहा है। यहां की पहचान अब नौजवानों को नौकरी, बहन-बेटियों की सुरक्षा-समृद्धि से हो रही है। महिला स्वयंसेवी समूह की बहनें बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर के माध्यम से तेजी से कैसे आय बढ़ा सकती हैं, बुंदेलखंड, ललितपुर, झांसी इस मॉडल का प्रतीक बन रहा है। पूरी हो गई दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना  सीएम ने कहा कि समग्र विकास का कोई विकल्प नहीं हो सकता। विकास ही जीवन में परिवर्तन लाएगा। नौजवान, किसान, कारीगर, हस्तशिल्पी, व्यापारी, बेटी-बहन समेत समाज के हर तबके को विकास का वाहक बनाना पड़ेगा, तब किस्मत बदलेगी और समृद्धि आएगी। डबल इंजन की भाजपा सरकार ने यही कार्य किया। लंबित सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से बढ़ाया गया है। दशकों से लंबित अर्जुन सहायक परियोजना अब पूरी हो गई। रतौली बांध, बावनी बांध, कचनौदा बांध, चिल्ली सिंचाई आदि परियोजनाओं ने बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत बदली है। किसानों की आमदनी अब कई गुना हो रही है।  गोरखपुर या उप मुख्यमंत्रियों के जनपदों को नहीं दिया मेडिकल कॉलेज सीएम ने कहा कि हमने गोरखपुर या उप मुख्यमंत्रियों के जनपदों के लिए नहीं, बल्कि ललितपुर के लिए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किया। सीएम युवा के माध्यम से युवा उद्यमी बनाए जा रहे हैं। पूर्वजों ने कहा था कि ललितपुर न छोड़ियो, जब तक मिले उधार। किंतु अब आपको उधार लेने की जरूरत नहीं, क्योंकि सरकार ब्याज-गारंटी मुक्त पैसा दे रही है। अपना व्यवसाय चलाइए और कुछ समय बाद पैसा वापस कर दीजिए। आपका व्यवसाय भी बढ़ेगा और आप उद्यमी भी हो जाएंगे। सीएम ने विधायकों व सांसद की जमकर तारीफ भी की सीएम ने कहा कि अच्छा कार्य तब होता है, जब अच्छी सरकार आती है। अच्छी सरकार तब आती हैं, जब अच्छे विधायक-सांसद चुने जाते हैं। सीएम ने मन्नू कोरी व रामरतन कुशवाहा को ईमानदार, मेहनती तथा जनसेवा के प्रति पूरी तरह समर्पति बताते हुए कहा कि वे दिन-रात काम करते हैं। हमने उनसे … Read more

राज्यपाल रमेन डेका से आज रोटरी क्लब ग्रेटर रायपुर के सदस्यों ने लोक भवन में सौजन्य मुलाकात एवं चर्चा की। राज्यपाल ने उन्हें समाज हित से जुडे़ विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया।

रायपुर चर्चा के दौरान राज्यपाल ने रोटरी क्लब द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह एक संगठित और सेवा भावना से कार्य करने वाला संगठन है। उन्होंने कहा कि समाज के विकास और जनकल्याण के लिए सभी संस्थाओं और नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा। राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि रायपुर शहर में पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट और टाइल्स का घेरा बना दिया गया है, जिससे उनकी जड़ों तक पर्याप्त पानी और हवा नहीं पहुंच पाती। उन्होंने रोटेरियन से ऐसे घेरों को हटाने और पेड़ों को पुनर्जीवन देने के लिए सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राज्य को संभावित गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए अभी से जल स्रोतों के पुनर्जीवन और संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने रोटरी क्लब से इस अभियान में सक्रिय सहयोग करने का आग्रह किया। राज्यपाल ने महिलाओं में बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि रोटेरियन इस दिशा में जनजागरूकता अभियान चलाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने राज्य के विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान और विकास में भी रोटरी क्लब के सहयोग की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों की संस्कृति छत्तीसगढ़ की मूल पहचान और धरोहर है, जिसे संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने रोटेरियन से विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य गांवों को गोद लेकर वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक विकास के क्षेत्र में कार्य करने का आग्रह किया।  राज्यपाल ने कहा कि रोटरी क्लब सामूहिक रूप से तो उत्कृष्ट कार्य करते है, लेकिन प्रत्येक सदस्य को व्यक्तिगत स्तर पर भी ऐसे कार्य करने चाहिए, जिनमें लेने की अपेक्षा देने की भावना हो। इससे जीवन में आत्मिक संतोष और आनंद प्राप्त होता है तथा समाज का भी कल्याण होता है। राज्यपाल ने कहा कि समाज में अनेक ऐसे अनसंग हीरो और हीरोइन हैं, जो बिना किसी प्रचार-प्रसार के उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। ऐसे लोगों को सामने लाकर सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में रोटरी क्लब महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में वहां के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शासन द्वारा अच्छे कार्य किए जा रहे है। इसकी जानकारी देने और इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने में रोटेरियन सहयोग कर सकते हैं। बैठक में रोटरी क्लब के अध्यक्ष  रितेश जिंदल ने राज्यपाल  डेका का स्वागत किया। क्लब की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।  इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, रोटरी क्लब ग्रेटर रायपुर के सचिव  प्रकाश अग्रवाल, क्लब के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।

​अंधाधुंध रासायनिक खाद से बढ़ रहा कैंसर का खतरा

रायपुर  किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रति जागरूक करने तथा टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को सारंगढ़ के कृषि उपज मंडी प्रांगण में 'प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला' तथा 'खेती बचाओ अभियान' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया। साथ ही उन्होंने ‘गौ ग्राम जनजागरण वाहन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ​उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन पैसा जा रहा अस्पताल: राजस्व मंत्री   ​ राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 50 साल पहले लोग नाममात्र का रासायनिक खाद उपयोग करते थे और खुद से तैयार गोबर व केंचुआ खाद खेतों में डालते थे। आज उत्पादन बढ़ाने की होड़ में प्रति एकड़ उत्पादन 8-9 क्विंटल से बढ़कर 35 से 40 क्विंटल तक पहुंच गया है, लेकिन हम अनाज के साथ जहर (रसायन और कीटनाशक) भी खा रहे हैं। यही कारण है कि आज अस्पतालों और मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हम जो पैसा मेहनत करके कमा रहे हैं, वह घूम-फिरकर अस्पतालों में जा रहा है। ​पंजाब की 'कैंसर ट्रेन' का दिया हवाला      मंत्री  वर्मा ने  कहा कि पंजाब में फसल का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है, लेकिन आज देश में सबसे ज्यादा कैंसर रोगी भी वहीं हैं। वहाँ से एक ट्रेन चलती है जिसे लोग 'कैंसर ट्रेन' के नाम से जानते हैं। आज छत्तीसगढ़ में भी ऐसे लोग कैंसर के शिकार हो रहे हैं जो किसी प्रकार का नशा या तंबाकू का सेवन नहीं करते। इसका मुख्य कारण भोजन के माध्यम से शरीर में पहुँचने वाला केमिकल है। इसका एकमात्र समाधान जैविक खेती है। मोदी की गारंटी और किसान कल्याण को समर्पित सरकार      ​ मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विजन को साझा करते हुए मंत्री  वर्मा ने कहा कि किसानों की तरक्की से ही छत्तीसगढ़ की तरक्की संभव है क्योंकि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि सरकार 'मोदी की गारंटी' को पूरा करते हुए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपए प्रति क्विंटल के मान से कर रही है, जिससे किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिन भूमिहीन कृषि मजदूरों के पास खुद की जमीन नहीं है, उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय कृषि मजदूर कल्याण योजना' लागू की गई है। इसके तहत प्रदेश के लगभग 5 लाख पंजीकृत भूमिहीन मजदूरों के खातों में 10 हज़ार रुपए की राशि ट्रांसफर की जा रही है।  किसानों को जैविक खाद की किट भी वितरित       कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने हितग्राहियों को राशन कार्ड और किसानों को जैविक खाद की किट भी वितरित की। ​कार्यशाला में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने मिट्टी की जल धारण क्षमता और कार्बनिक पदार्थों (ह्यूमस) को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। महिलाओं के स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए जैविक कीटनाशकों और खादों की प्रदर्शनी का अतिथियों ने अवलोकन किया। किसानों को वर्मीकंपोस्ट, वर्मीवॉश, नाडेप खाद के साथ-साथ हरी खाद (जैसे ढैंचा, सनई एवं मूंग) के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।       ​ इस अवसर पर गणमान्य जनप्रतिनिधि,कलेक्टर,सहित बड़ी संख्या में कृषक, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल आकार ले रही है। अचल संपत्तियों के पंजीकरण, स्वामित्व सत्यापन और नामांतरण प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित एवं तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने व्यापक सुधारों का खाका प्रस्तुत किया।   भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस योगी सरकार लगातार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। प्रस्तुतीकरण में पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन कर नई धाराएं 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे संपत्ति के स्वामित्व और अधिकारों की पूर्व जांच अनिवार्य हो सकेगी।   हर संपत्ति को मिलेगी यूनिक पहचान योगी सरकार का लक्ष्य प्रदेश की सभी ग्रामीण एवं शहरी संपत्तियों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करना है। इस आईडी को जीआईएस मैपिंग और आधिकारिक स्वामित्व अभिलेखों से जोड़ा जाएगा, जिससे किसी भी संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और रिकॉर्ड की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत घरौनी तैयार करने का कार्य पहले से चल रहा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।  पंजीकरण के साथ ही स्वतः होगा नामांतरण प्रदेश सरकार नागरिकों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीकरण पूरा होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इसके लिए विभिन्न विभागों के अभिलेखों का एकीकरण, एपीआई आधारित डेटा साझाकरण और रियल-टाइम रिकॉर्ड अपडेट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इससे लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और समय तथा संसाधनों की बचत होगी।  भू-आधार से जुड़ेगा हर भूमि पार्सल योगी सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के अनुरूप भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर भी तेजी से कार्य कर रही है। इसके तहत प्रत्येक भूमि पार्सल को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) यानी ‘भू-आधार’ प्रदान किया जाएगा। यह जियो-रेफरेंस्ड पहचान संख्या भूमि अभिलेखों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और जीआईएस प्रणालियों से जोड़ने में मदद करेगी, जिससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक और अद्यतन रहेंगे।  बिजली, पानी और संपत्ति कर रिकॉर्ड होंगे एक जगह   इस प्रस्तावित सुधारों के तहत संपत्ति कर रजिस्टर को स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग, राजस्व विभाग, बिजली, पानी और सीवर विभागों के रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। कॉमन प्रॉपर्टी आईडी आधारित यह व्यवस्था विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल डेटा साझा करने में सहायक होगी और कर संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी।  ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों के लागू होने से संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी, नागरिकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। योगी सरकार की यह पहल न केवल डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करेगी, बल्कि ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी नई गति प्रदान करेगी। उत्तर प्रदेश को तकनीक आधारित भूमि और संपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दमोह के डायल-112 हीरोज 1 वर्ष 5 माह के मासूम को सकुशल दस्तयाब कर माँ के सुपुर्द किया

भोपाल दमोह जिले के थाना हटा क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता, संवेदनशीलता एवं तकनीकी समन्वय से एक 1 वर्ष 5 माह मासूम बच्चे को सकुशल दस्तयाब कर उसकी माँ के सुपुर्द किया गया। समय पर की गई इस कार्रवाई से संभावित अनहोनी को टालते हुए बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी। 19 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना हटा क्षेत्र में एक व्यक्ति अपने 1 वर्ष 5 माह के बच्चे को घर से साथ ले गया है। सूचना में बताया गया कि वह शराब के नशे में है तथा फोन पर परिजनों को लगातार धमकी दे रहा है और भ्रामक जानकारी एवं गलत लोकेशन बता रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल थाना हटा क्षेत्र में तैनात डायल-112 डायल 112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। सूचना प्राप्त होते ही डायल-112 वाहन को मौके पर रवाना किया गया तथा घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों एवं पीसीआर को भी दी गई। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री संजय आठिया एवं पायलट श्री हरेंद्र अहिरवार ने जानकारी एकत्रित कर बच्चे एवं उसके पिता की तलाश प्रारंभ की। चूँकि संबंधित व्यक्ति लगातार गलत लोकेशन बता रहा था, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम स्टाफ प्रधान आरक्षक श्री नागेन्द्र तिवारी एवं आरक्षक श्री जुनैद मिर्जा द्वारा साइबर सेल के प्रधान आरक्षक श्री सौरभ टंडन के सहयोग से तकनीकी माध्यमों से लोकेशन ट्रेस की गई। साइबर सेल से प्राप्त लोकेशन के आधार पर डायल-112 टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्ति एवं मासूम बच्चे को सकुशल दस्तयाब कर लिया। इसके उपरांत बच्चे को सुरक्षित उसकी माँ के सुपुर्द किया गया। डायल-112 जवानों, कंट्रोल रूम स्टाफ एवं साइबर सेल के उत्कृष्ट समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई से एक मासूम बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा संवेदनशील मामलों में तकनीक एवं मानवीय दृष्टिकोण के समन्वय से आमजन की सुरक्षा हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।