samacharsecretary.com

सीएम योगी ने किया मां बगुलामुखी का दर्शन-पूजन, मुख्यमंत्री ने तुवन मंदिर में भी माथा टेका

दतिया/ललितपुर बुंदेलखंड को विकास परियोजनाओं की सौगात देने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को मध्य प्रदेश के दतिया में मां बगुलामुखी का दर्शन-पूजन भी किया। दतिया हवाई पट्टी पर मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सीएम योगी का स्वागत किया। मुख्यमंत्री यहां से पीतांबरा पीठ पहुंचे।  पीतांबरा पीठ में मुख्यमंत्री ने मां बगुलामुखी के दर्शन किए और विधिवत पूजा अर्चना की। उन्होंने परिसर में स्थित वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर में मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक भी किया। इसके बाद मुख्यमंत्री लोकार्पण/शिलान्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए ललितपुर रवाना हो गए। ललितपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने तुवन मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान मंदिर के पुजारी व महंत आदि उपस्थित रहे।

शिवसेना विवाद गहराया, शिंदे के बयान के बाद राउत की रहस्यमयी पोस्ट से बढ़ा तनाव

मुंबई  शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके गोरेगांव में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला था। शिंदे ने यूबीटी सांसदों की टूट का जिक्र करते हुए कहा था कि यह तो सिर्फ ट्रेलर, पिक्चर अभी बाकी है। उन्होंने यह भी कहा था कि ऑपरेशन के लिए शेर का दिल चाहिए। इस मौके पर शिंदे ने विरोधी खेमे पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुत्ते झुंड में आते हैं, टाइगर अकेला आता है। अब शिंदे के इस बयान पर उद्धव ठाकरे के करीबी नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने रहस्यमयी पोस्ट की है। राउत ने एक्स पर जय महाराष्ट्र के साथ लिखा है कि कुछ लोग कुत्ते होते हैं लेकिन वफादार नहीं। आप एकनाथ शिंदे को इतना गंभीरता से क्यों लेते हैं? उन्हें गंभीरता से लेना बंद करें। वे कोई महान व्यक्ति नहीं हैं। वे एक बेईमान नेता हैं और आप उन्हें गंभीरता से लेते हैं? आप शुभेंदु अधिकारी को भी गंभीरता से लेते हैं। ये बेईमान लोग हैं। इन्होंने अपने ही लोगों को धोखा दिया है। जब तक वे सत्ता में हैं, जब तक उनके हाथ में पैसा है, वे ऐसी बातें कहते रहेंगे। उद्धव ठाकरे के सांसदों में बगावत महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच राजनीतिक तनाव और बयानबाजी सांसदों के बागी होने को लेकर बढ़ी है। दावा किया गया है कि शिवसेना यूबीटी के सिंबल मशाल पर जीते छह सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया है। उद्धव ठाकरे के पास अब सिर्फ तीन सांसद ही बचे हैं। शिंदे ने ऑपरेशन टाइगर के जरिए छह सांसदों को शिवसेना में शामिल कर लिया है। इसका औपचारिक ऐलान 21 जून को होने की संभावना जताई जा रही है। यह भी दावा किया गया है कि इस सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भी दे दिया है। शिंदे के ऊपर संजय राउत का पलटवार शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट शेयर की। उनकी यह पोस्ट 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा और इस बढ़ती अटकलबाजी के बीच आई है कि पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। X पर एक पोस्ट में राउत ने एक इन्फोग्राफिक शेयर किया जिसमें लिखा है कि कुछ लोग कुत्ते तो होते हैं लेकिन वफादार नहीं होते। उन्होंने पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा है जय महाराष्ट्र!, राउत की यह टिप्पणी महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर शिवसेना कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे गुट पर निशाना साधा था और कहा था कि कुत्ते झुंड में आकर भौंकते हैं, शेर अकेला आता है।  

कर्बला की जंग: सत्ता के खिलाफ उसूलों की सबसे बड़ी कुर्बानी की कहानी

इतिहास में बहुत युद्ध बहुत हुए हैं, लेकिन 10 अक्टूबर, 680 ईस्वी (10 मुहर्रम, 61 हिजरी) की घटना ऐसी है जो केवल एक तारीख बनकर नहीं, बल्कि न्याय के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के रूप में दर्ज है.  इराक के कर्बला के रेगिस्तान में जो हुआ, वह सत्ता और उसूलों के बीच की वह लड़ाई थी जिसने इंसानियत की परिभाषा बदल दी.  इराक के कर्बला में हुई यह घटना इमाम हुसैन और उमय्यद खलीफा यजीद प्रथम की सेनाओं के बीच हुई थी. सत्ता का संकट और कूफा का निमंत्रण इस संघर्ष की शुरुआत 680 ईस्वी में हुई, जब मुआविया प्रथम की मृत्यु के बाद उनका बेटा यजीद प्रथम खलीफा बना. मुस्लिम समुदाय (उम्मा) का एक बड़ा वर्ग मानता था कि नेतृत्व का सही अधिकार हजरत मोहम्मद के चचेरे भाई और दामाद अली इब्न अबी तालिब और उनके वंशजों का है.  इराक के कूफा शहर के लोगों ने हुसैन (अली के बेटे) को निमंत्रण दिया कि वे उनके पास आएं और उन्हें खलीफा घोषित किया जाएगा. जब यजीद को इस विद्रोह की भनक लगी, तो उसने उबैदुल्लाह (बसरा के गवर्नर) को कूफा भेजा.  उबैदुल्लाह ने कड़ाई से पेश आते हुए जनजातीय प्रमुखों को जिम्मेदार ठहराया और विद्रोह करने वालों को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी. इन धमकियों के बावजूद, हुसैन अपने परिवार और वफादार साथियों के साथ मक्का से कूफा के लिए चल पड़े. कर्बला में घेराबंदी 10 अक्टूबर को जब हुसैन फरात नदी के पश्चिम में स्थित कर्बला पहुंचे, तो उनका सामना उबैदुल्लाह द्वारा भेजी गई एक विशाल सेना से हुआ. 4,000 सैनिकों वाली इस सेना का नेतृत्व कूफा के संस्थापक के बेटे उमर इब्न साद कर रहे थे.  हुसैन के पास लड़ने वाले केवल 72 लोग थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने यजीद की सेना के आगे झुकने से इनकार कर दिया. कूफा के निवासियों से मिले मदद के वादे पूरे नहीं हुए, और हुसैन अपने साथियों के साथ  युद्ध में घिर गए.  युद्ध का अंत अत्यंत दुखद था; हुसैन और उनके लगभग सभी परिवार के लोग और साथी मारे गए. उनके शवों के साथ की गई बर्बरता ने बाद की शिया समुदायों के भीतर गहरा आक्रोश और शोक भर दिया. जैनब का साहस और सत्ता को चुनौती युद्ध के बाद, हुसैन की बहन जैनब और बच्चों सहित परिवार की महिलाओं को बंदी बना लिया गया. उन्हें पहले कूफा और फिर रेगिस्तान के रास्ते दमिश्क में यजीद के दरबार में पेश किया गया. शिया परंपरा के अनुसार, जैनब ने कूफा में उबैदुल्लाह को और दमिश्क में यजीद को सरेआम ललकारा और उसकी सत्ता को चुनौती दी.  उनका निधन 681 ईस्वी में हुआ.  उन्हें कहां दफनाया गया, इसे लेकर मान्यताएं बंटी हुई हैं: शिया परंपरा के अनुसार वे दमिश्क में दफन हैं, जबकि सुन्नी परंपरा उन्हें काहिरा में दफन मानती है. इतिहास पर गहरा प्रभाव और शोक की परंपरा इस जंग के बाद हुसैन को मानने वाले लोगों ने उमर, उबैदुल्लाह और यजीद को सीधे तौर पर हत्यारा माना.  यही वजह है कि आज भी मुस्लिम समुदाय में इन तीनों नामों को बहुत नफरत से देखा जाता है. हर साल 10 मुहर्रम (जिसे आशूरा कहा जाता है) के दिन दुनिया भर के मुसलमान गहरा दुख मनाते हैं. इस दिन लोग ताज़िया निकालते हैं और मातम (शोक मनाने का तरीका, जिसमें कई लोग खुद को चोट पहुँचाकर अपना दर्द जाहिर करते हैं) के जरिए कर्बला की उस कड़वी याद को ताजा करते है. . आज भी कर्बला में बना हुसैन का मकबरा  मुसलमानों के लिए पवित्र जगह है. अगर हम इस जंग के मकसद को देखें, तो यजीद के लिए यह लड़ाई सिर्फ अपनी गद्दी और ताकत को बचाने का एक जरिया थी. लेकिन दूसरी तरफ, हुसैन के लिए यह अपने उसूलों और सच्चाई पर डटे रहने की परीक्षा थी. हुसैन ने इस परीक्षा में अपनी जान दे दी, लेकिन वे झुकने के बजाय हारकर भी इतिहास के सबसे बड़े नायक बन गए.

10 एकड़ तक जमीन आवंटन का अधिकार डीएम को, बिहार में प्रक्रिया होगी तेज और सरल

पटना बिहार में सरकारी परियोजनाओं की रफ्तार को तेज करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब विभिन्न सरकारी विभागों को फ्री या स्थायी रूप से जमीन ट्रांसफर करने के मामले में डीएम और कमिश्नर के अधिकारों का दायरा काफी ज्यादा बढ़ा दिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस बदलाव को लेकर अपना आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया है। विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम से छोटे और मध्यम स्तर के प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि आवंटन की फाइलों को बार-बार मुख्यालय भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय की बड़ी बचत होगी। पहले सिर्फ 3 एकड़ तक ही सीमित था जिलाधिकारियों का पावर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह की ओर से जारी किए गए पत्र के अनुसार, पुरानी व्यवस्था के तहत अब तक जिलाधिकारियों को केवल 3 एकड़ तक की ही सरकारी या गैर मजरूआ आम भूमि का हस्तांतरण करने का अधिकार प्राप्त था। वहीं, 3 एकड़ से अधिक और 5 एकड़ तक की भूमि का फ्री हस्तांतरण प्रमंडलीय आयुक्त (कमिश्नर) के स्तर पर किया जा रहा था। हाल ही में विभाग द्वारा की गई उच्च स्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात खुलकर सामने आई कि इस पुरानी व्यवस्था के कारण छोटी-छोटी परियोजनाओं के लिए भी जमीन हस्तांतरण में बहुत अधिक समय बर्बाद हो रहा था। इसी लेती-देती को खत्म करने के लिए विभाग ने अब 10 एकड़ तक की जमीन के ट्रांसफर की पूरी शक्ति सीधे तौर पर डीएम को सौंप दी है। 10 से 20 एकड़ तक की जमीन का फैसला करेंगे कमिश्नर विभाग द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब 10 एकड़ से अधिक और 20 एकड़ तक की सरकारी जमीन के फ्री या स्थायी हस्तांतरण की मंजूरी प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर दी जा सकेगी। यदि किसी बड़ी परियोजना के लिए 20 एकड़ से अधिक भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए अंतिम मंजूरी सीधे राज्य मंत्रिपरिषद के स्तर पर ली जाएगी। इसके साथ ही, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने पारदर्शिता और आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए एक और कड़ा फरमान जारी किया है। विभाग ने सख्त लहजे में दोहराया है कि अब आम जनता या किसी भी कार्य के लिए लैंड रिकार्ड की केवल डिजिटल साइन्ड कॉपी ही ली जाएगी।

आधुनिक रिश्ते और शिव-आदर्श: बराबरी, भरोसा और भावनात्मक संतुलन की नई परिभाषा

 आज के समय में रिश्तों को लेकर सोच तेजी से बदल रही है. खासकर Gen Z लड़कियां अब सिर्फ दिखावे, स्टाइल या कूल बनने वाले लड़कों से ज्यादा प्रभावित नहीं होतीं हैं. वे ऐसे पार्टनर की तलाश में हैं जो उन्हें समझे, सम्मान दे और भावनात्मक रूप से मजबूत हो. यही वजह है कि अब उनकी पसंद भगवान शिव जैसे शांत, संतुलित और भरोसेमंद व्यक्तित्व की तरफ बढ़ रही है. लाइफ पार्टनर को लेकर Gen Z लड़कियों की बदली सोच Gen Z यानी आज की युवा पीढ़ी. आम तौर पर 1997 के बाद जन्मे लोगों को Gen Z कहा जाता है. यह जनरेशन पहले के मुकाबले ज्यादा समझदार, अपनी बात खुलकर कहने वाली, लॉजिकल और इमोशंस को समझने वाली है. खासकर जब बात प्यार और रिश्तों की आती है, तो इनकी सोच तेजी से बदल रही है. इसी विषय को लेकर आजकल एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है, खासकर Gen Z लड़कियों के बीच. आजकल की लड़कियां अपने पार्टनर या लाइफ पार्टनर में भगवान शिव जैसी खूबियां चाहती हैं. यहां भगवान शिव जैसा पार्टनर का मतलब भगवान बनने से नहीं है, बल्कि उनके स्वभाव और गुणों से है. अब लड़कियां दिखावे, ओवर रोमांस या सिर्फ कूल बनने वाले लड़कों से ज्यादा इंप्रेस नहीं होतीं हैं. वे ऐसे पार्टनर चाहती हैं जो सच्चा हो, सिंपल हो, जमीन से जुड़ा हो और रिश्ते को समझे. वैसे यह सोच पूरी तरह नई भी नहीं है. पौराणिक कथाओं में भी बताया गया है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. यानी शिव जैसे गुण हमेशा से आदर्श माने गए हैं. अब बस फर्क इतना है कि आज की लड़कियां फिर से उन्हीं गुणों को अपने पार्टनर में ढूंढ रही हैं. आइए समझते हैं कि इस बदलती सोच के पीछे आखिर कौन-सी भावनात्मक जरूरतें छिपी हैं. Gen Z  लड़कियां चाहती हैं भोलेनाथ जैसा पार्टनर सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर चर्चा बहुत हो रही है. कई लड़कियां कहती हैं कि उन्हें ऐसा लाइफ पार्टनर चाहिए जिसमें भगवान शिव जैसी खूबियां हों. यह बात सिर्फ धर्म या आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी भावनाएं और समाज से जुड़ी सोच भी छिपी हुई है. Gen Z लड़कियों को रिश्तों में स्थिरता, धैर्य और इमोशनल बैलेंस चाहिए होता है. भगवान शिव के स्वभाव में भी यही खूबियां देखने को मिलती हैं. यही वजह है कि लड़कियां ऐसे पार्टनर की चाहत रखती हैं जो गुस्से में भी खुद को संभाल कर रखे, बेवजह रिएक्ट न करे. लेकिन जब उसकी पार्टनर किसी परेशानी में हो, तो पूरी मजबूती से उसके साथ खड़ा हो जाए. रिश्तों में बांधें नहीं बल्कि सशक्त बनें भगवान शिव की एक खास बात यह है कि वे एक तरफ योगी हैं और दूसरी तरफ गृहस्थ भी. यही बैलेंस Gen Z लड़कियों को काफी आकर्षित करता है. आज के जमाने की लड़कियां ऐसा पार्टनर चाहती हैं जो उनके सपनों को रोके नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने में उनका साथ दे. शिव जी हमेशा माता पार्वती को अपने साथ रखते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें शक्तियां भी देते हैं. मां पार्वती ने कई बार राक्षसों का नाश भी किया था, जो यह दिखाता है कि शिव जी उन पर पूरा भरोसा करते थें. वे उन्हें बांधकर नहीं रखते थे, बल्कि आगे बढ़ने की ताकत देते थें. आज की लड़कियां भी ऐसा ही पार्टनर चाहती हैं, जो उनके करियर को समझे, उन्हें सपोर्ट करे और उन्हें अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की आजादी दे. समानता भगवान शिव का अर्धनारीश्वर रूप बहुत खास माना जाता है. इसमें आधा हिस्सा शिव का है और आधा माता शक्ति का. इसका सीधा सा मतलब है कि पुरुष और महिला एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं, दोनों मिलकर ही जीवन और सृष्टि को आगे बढ़ाते हैं. यह रूप यह भी बताता है कि सिर्फ शक्ति या सिर्फ चेतना से काम नहीं चलता है, बल्कि दोनों का साथ होना जरूरी है. यानी रिश्ते में बराबरी और संतुलन सबसे ज्यादा मायने रखता है. अर्धनारीश्वर का संदेश साफ है कि पति-पत्नी या पार्टनर्स को एक-दूसरे को बराबर समझना चाहिए, एक-दूसरे की इज्जत करनी चाहिए और हर फैसले में दोनों की अहमियत होनी चाहिए. अच्छा साथी भगवान शिव की एक खास बात यह है कि वे जितने शक्तिशाली हैं, उतने ही दयालु और शांत स्वभाव के भी हैं. Gen Z लड़कियों के लिए आदर्श पार्टनर वही है जो बाहर से मजबूत हो, लेकिन अंदर से समझदार, केयरिंग और सॉफ्ट दिल वाला हो. भगवान शिव को अहंकार खत्म करने वाला भी माना जाता है. इसलिए आज की लड़कियां भी ऐसे पार्टनर चाहती हैं जिनमें बेवजह का ईगो न हो. वे ऐसा रिश्ता चाहती हैं जो बराबरी और सम्मान पर टिका हो, न कि सिर्फ मर्द होने के घमंड पर. आज के रिश्तों में लड़कियां समझदारी चाहती हैं, जहां एक-दूसरे को कंट्रोल करने की कोशिश न हो, बल्कि दोनों मिलकर एक-दूसरे को समझें और सपोर्ट करें.

डीके शिवकुमार का सख्त आदेश, कर्नाटक में योजनाओं पर फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नए नियम

कर्नाटक कर्नाटक सरकार की 'पांच गारंटी' योजनाओं का लाभ अब केवल उन्हीं नागरिकों को मिलेगा, जिनका नाम मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में दर्ज होगा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को यह साफ कर दिया है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि जो भी इन योजनाओं के असली हकदार हैं, उन्हें लाभ से वंचित न किया जाए, लेकिन अपात्र लोगों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए। वोटर लिस्ट में नाम होना अनिवार्य विधान सौधा में एक समीक्षा बैठक के दौरान डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार की 'गृह ज्योति' जैसी योजनाओं का लाभ अब सिर्फ पंजीकृत मतदाताओं तक सीमित रहेगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे चल रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के दौरान यह सुनिश्चित करें कि मतदाता सूची से उनका नाम न छूटे। मुख्यमंत्री ने कहा, "केवल वे मतदाता ही सरकारी योजनाओं के लाभार्थी होंगे, जिनके नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं।" दूसरे राज्यों के लोगों का रोका जाएगा फायदा समीक्षा बैठक में यह बात भी सामने आई कि दूसरे राज्यों से आकर कर्नाटक में रह रहे कई लोग भी 'गृह ज्योति' जैसी योजना का लाभ ले रहे हैं। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए सीएम ने कहा, "हमारे राज्य की योजनाओं का लाभ सिर्फ कर्नाटक के लाभार्थियों को ही मिलना चाहिए। हमने पाया है कि दूसरे राज्यों के वोटर भी यह लाभ ले रहे हैं, इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।" गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम बैठक में कल्याणकारी योजनाओं में हो रहे कई तरह के फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि योजना का पैसा यूपीआई (UPI) खातों और कर्नाटक के बाहर के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा रहा है। सीएम ने ऐसे पैसे के प्रवाह पर रोक लगाने और लाभ को केवल राज्य के भीतर सीमित रखने के निर्देश दिए। सीएम ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि मृत लाभार्थियों को भी पैसे का भुगतान जारी है। उन्होंने अधिकारियों को लाभार्थियों के रिकॉर्ड को 'रियल-टाइम' अपडेट करने का निर्देश दिया। 'गृह लक्ष्मी' योजना के तहत, बैंक खाते में पैसे आते ही कुछ बैंकों द्वारा उसे पुराने लोन की किस्तों (EMI) के रूप में काट लिए जाने के मामले भी सामने आए। इसके चलते कुछ महिलाओं ने अपने खाते बदल लिए। सीएम ने कहा कि लाभार्थियों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए। ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 'गृह लक्ष्मी' सहायता राशि एक ही बैंक खाते के जरिए कई लाभार्थियों को भेजी गई, जिसमें लगभग 3 लाख किस्तों में करीब 60 करोड़ रुपये बांटे गए। ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सीएम ने निर्देश दिया कि योजना का पैसा खाते में आते ही लाभार्थियों को एक ऑटोमेटेड वॉइस मैसेज भेजा जाए। क्या हैं कर्नाटक की 5 गारंटी योजनाएं और उनके ताज़ा आंकड़े? समीक्षा बैठक में राज्य की फ्लैगशिप योजनाओं के आंकड़ों पर भी चर्चा की गई। गृह ज्योति: हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली। (अब तक 1.65 करोड़ लाभार्थी मुफ्त बिजली का लाभ उठा चुके हैं।) गृह लक्ष्मी: परिवार की महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपये की आर्थिक मदद। अन्न भाग्य: बीपीएल (BPL) परिवार के प्रत्येक सदस्य को हर महीने 10 किलो चावल। जुलाई 2023 से दिसंबर 2024 के बीच 11,561.05 करोड़ रुपये डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजे गए हैं। साथ ही 4.44 करोड़ लाभार्थियों को 5 किलो अतिरिक्त चावल हर महीने दिया जा रहा है। शक्ति योजना: महिलाओं के लिए राज्य की सरकारी (नॉन-लग्जरी) बसों में मुफ्त यात्रा। मई के अंत तक महिलाओं ने 763 करोड़ मुफ्त बस यात्राएं की हैं, जिनके टिकट की कीमत लगभग 20,047.69 करोड़ रुपये है। साथ ही 2026-27 शैक्षणिक वर्ष में छात्रों को लगभग 10 लाख मुफ्त बस पास जारी किए जाने की उम्मीद है। युवा निधि: 18 से 25 साल के बेरोजगार स्नातकों को 3,000 रुपये और बेरोजगार डिप्लोमा धारकों को 1,500 रुपये प्रति माह का भत्ता- दो साल के लिए।

पीतांबरा पीठ में यूपी के दिग्गज नेताओं का दर्शन, CM योगी और केशव मौर्य ने टेका माथा

दतिया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को दतिया पहुंचे। जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री पीतांबरा पीठ में मां बगलामुखी के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने देश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने पीतांबरा पीठ परिसर में स्थित महाभारत कालीन वानखंडेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक भी किया। इस दौरान पीठ के पुजारियों ने मंत्रोच्चार के बीच योगी से जलाभिषेक कराया। एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से हुई अगवानी इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष विमान से दतिया एयरपोर्ट पहुंचे। यहां पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, शिमला विधायक प्रदीप अग्रवाल कलेक्टर स्वप्निल वानखडे व एसपी मयूर खंडेलवाल सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी अगवानी कर स्वागत किया। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने पार्टीजन से भी मिले। इसके बाद सीधे पीतांबरा पीठ पहुंचे, जहां मंदिर प्रबंधन एवं पुजारियों ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। पूजा-अर्चना कर ललितपुर हुए रवाना पीताम्बरा पीठ में दर्शन एवं पूजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात रहा। धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद मुख्यमंत्री कुछ समय तक मंदिर परिसर में रहे तथा वहां स्थित अन्य मंदिरों के भी उन्होने दर्शन किए। दर्शन और पूजा-अर्चना के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दतिया से उत्तर प्रदेश के ललितपुर के लिए रवाना हो गए। योगी की सुरक्षा के मद्देनजर पीठ के आसपास की दुकानें भी बंद रही। मौर्य भी पहुंचे दतिया वही उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य भी शनिवार सुबह दतिया पहुंचे। जहां उन्होंने सुबह पीतांबरा पीठ पर दर्शन पूजन किया। इसके बाद वह वापस रतन महल होटल पहुंचे, जहां से अगले गंतव्य के लिए रवाना हुए। दोनों दिग्गज नेताओं की इस दौरान आपस में मुलाकात नहीं हो सकी।

चाणक्य नीति के अनुसार स्त्री के 5 महत्वपूर्ण गुण जो बनाते हैं उसे मजबूत और सम्मानित

 आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति शास्त्र (Chanakya Niti) में जीवन को सफल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं. चाणक्य नीति के अनुसार, एक मजबूत और श्रेष्ठ स्त्री केवल शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि अपने गुणों और विचारों से शक्तिशाली होती है. चाणक्य ने स्त्री के ऐसे 5 विशेष गुणों का उल्लेख किया है, जो उसे हर विपरीत परिस्थिति में मजबूत बनाते हैं और समाज में सम्मान दिलाते हैं. आइए जानते हैं इन गुणों के बारे में: संतोष (संतुष्ट रहने का गुण) आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो स्त्री हर परिस्थिति में संतुष्ट रहना जानती है, वह सबसे मानसिक रूप से सबसे मजबूत होती है. संकट के समय या आर्थिक तंगी होने पर भी जो स्त्री धैर्य नहीं खोती और कम साधनों में भी घर को संभाल लेती है, वह किसी भी मुश्किल दौर से अपने परिवार को बाहर निकाल सकती है. ऐसी स्त्री को कोई भी परिस्थिति तोड़ नहीं सकती. धर्म और संस्कारों का पालन चाणक्य नीति कहती है कि जो स्त्री धर्म के मार्ग पर चलती है और जिसके पास अच्छे संस्कार होते हैं, वह न केवल खुद मजबूत होती है बल्कि पूरे परिवार की धुरी बनती है. संस्कारी और धार्मिक स्त्री सही और गलत का अंतर बखूबी जानती है. वह समाज के बहकावे में नहीं आती और अपने बच्चों को भी सही दिशा देती है, जिससे आने वाली पीढ़ियां मजबूत बनती हैं. मधुर वाणी (मीठी बोली) वाणी को चाणक्य ने सबसे बड़ा हथियार माना है. चाणक्य के अनुसार, जिस स्त्री की वाणी मधुर होती है, वह सबसे शक्तिशाली होती है. कड़वी बात कहने वाले अक्सर अपनों को भी पराया कर देते हैं, लेकिन अपनी मीठी और समझदारी भरी बातों से एक स्त्री बड़े से बड़े विवाद को शांत कर सकती है. मधुर वाणी वाली स्त्री हर किसी का दिल जीत लेती है और संकट के समय लोग उसके साथ खड़े होते हैं. शिक्षित और ज्ञानवान होना आचार्य चाणक्य का मानना था कि स्त्री का शिक्षित और जागरूक होना बेहद जरूरी है. ज्ञान ही स्त्री की असली शक्ति है. एक ज्ञानवान स्त्री केवल घर ही नहीं संभालती, बल्कि जरूरत पड़ने पर सही और बड़े फैसले लेने में भी सक्षम होती है. वह अपने अधिकारों को जानती है और समाज में कोई उसका शोषण नहीं कर सकता. ज्ञान उसे आत्मनिर्भर और साहसी बनाता है. साहस और संकट में धैर्य (साहसी स्वभाव) चाणक्य के अनुसार, एक मजबूत स्त्री का सबसे बड़ा गुण उसका साहस है. वह मुश्किल समय में रोने या घबराने के बजाय उसका सामना करने की रणनीति बनाती है. जब परिवार पर कोई विपत्ति आती है, तो साहसी स्त्री एक ढाल की तरह आगे आकर खड़ी हो जाती है. उसका यही हौसला पूरे घर को संबल देता है और विपरीत समय को भी अनुकूल बना देता है.

WhatsApp में नया मैसेज एनिमेशन फीचर: iOS यूजर्स को मिलेगा स्मूथ चैटिंग एक्सपीरियंस

WhatsApp ने अपने प्लेटफॉर्म में एक नया फीचर शामिल किया है, जिसका नाम मैसेज एनिमेशन है. इस फीचर को iOS यूजर्स के लिए जारी किया है, जिसके बाद यह iPhone पर नजर आएगा. इसके लिए यूजर्स को सेटिंग्स में मैसेज एनिमेशन के लिए एक टॉगल मिलेगा, उसको इनेबल और डिसेबल किया जा सकेगा. इस फीचर की जानकारी Wabetainfo ने शेयर की है. रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp का यह फीचर अभी iOS के बीटा वर्जन 26.24.10.70 के साथ दिया गया है. अभी इसे कुछ बीटा यूजर्स के लिए जारी किया है और आने वाले सप्ताह में और ज्यादा यूजर्स को ये फीचर दिया जाएगा. WhatsApp ने पहले मैसेज एनिमेशन को iOS से हटा दिया था, जिसके बाद मैसेज बिना किसी विजुअल इफेक्ट के दिखाई देता था. अब कंपनी ने iOS पर मैसेज एनिमेशन को नए अवतार में पेश किया है. iOS पर नया मैसेज एनिमेशन कैसे काम करेगा? नए अपडेट के साथ मैसेज भेजने और रिसीव करने के दौरान नया एनिमेशन जोड़ा है. पहले वाले इफेक्ट की जगह अब मैसेज बबल धीरे-धीरे दिखाई देगा और चैटिंग में अपनी जगह लेते समय थोड़ा बड़ा होता हुआ नजर आएगा. बिना एनिमेशन वाले तरीके की तुलना में अचानक मैसेज दिखने की तुलना में यह अनुभव ज्यादा स्मूथ दिखाई पड़ता है. यह नया इफेक्ट पुराने एनिमेशन को पूरी तरह रिप्लेस करेगा, यानी इसे वैकल्पिक स्टाइल के तौर पर नहीं दिया जाएगा. मैसेज एनिमेशन को कंट्रोल करना आसान होगा व्हाट्सऐप ने पहली बार WhatsApp फॉर iOS में यूजर्स को सीधे ऐप की सेटिंग्स में एनिमेशन को मैनेज करने की सुविधा दी है. यह फीचर WhatsApp Settings > Chats > Animations में जाकर देखने को मिलेगा. बताते चलें कि जहां पहले से इमोजी, स्टिकर्स और GIF एनिमेशन को कंट्रोल करने की सुविधा मौजूद है. अब इस सेक्शन में मैसेज एनिमेशन के लिए भी एक अलग टॉगल को शामिल कर दिया गया है. एंड्रॉय यूजर्स को भी यह फीचर इसी पाथ में मिलता है, जिसमें दोनों प्लेटफॉर्म पर एक्सपीरियंस एक जैसा रहेगा. गौर करने वाली बात ये है कि एनिमेशन अगर पसंद नहीं आता है या फिर ध्यान भटकाने वाला लगता है तो वे इसको आसानी से बंद कर सकते हैं. पहले हटाया जा चुका है एनिमेशन WhatsApp पहलले iOS पर से मैसेज एनिमेशन को हटा चुका है, तब उसे बंद करने का कोई विकल्प नहीं दिया गया था. यह एनिमेशन इफेक्ट्स कई लोगों को पसंद नहीं आ सकते हैं. अब कंपनी ने मैसेज एनिमेशन को टॉगल के जरिए जोड़ा है.

96 लाख इकाइयों और 1.65 करोड़ रोजगार के साथ उत्तर प्रदेश अग्रणी

आगरा विश्व पटल पर भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और एमएसएमई क्षेत्र की अपार संभावनाओं को नई दिशा देने के लिए ताजनगरी आगरा में 'ब्रिक्स-इंडिया 2026' के अंतर्गत पहले दिन ब्रिक्स एमएसएमई फोरम और तीसरे ब्रिक्स एमएसएमई वर्किंग ग्रुप की दो दिवसीय बैठक का भव्य आयोजन हुआ। ताजगंज स्थित ताज एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने एमएसएमई सेक्टर की शानदार उपलब्धियों और वैश्विक व्यापार की रणनीतियों को विश्व समुदाय के समक्ष प्रमुखता से रखा। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों के साथ यूपी बना 'एमएसएमई राजधानी' ब्रिक्स सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तथा जनपद प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज भारत की एमएसएमई राजधानी बनकर उभर रहा है। राज्य में वर्तमान में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो लगभग 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही हैं। योगी सरकार एमएसएमई को केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सबसे सशक्त इंजन मानती है। ब्रिक्स देशों के साथ 5.36 बिलियन डॉलर का व्यापारिक संबंध प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार, तकनीक और निवेश के नए आयाम स्थापित कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025- 26 के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के साथ उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात 5.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 3,938 मिलियन डॉलर सदस्य देशों को और 1,429 मिलियन डॉलर साझेदार देशों को) से अधिक रहा है। प्रदेश से मशीनरी, परिधान, चमड़ा, कालीन और बहुमूल्य पत्थर दुनिया के कई देशों में निर्यात हो रहे हैं। ओडीओपी और पारंपरिक शिल्प को मिल रही वैश्विक उड़ान उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 'एक जनपद एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय प्रतिभा और पारंपरिक शिल्प को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का अभूतपूर्व कार्य किया है। एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि ओडीओपी के तहत अब तक 20 हजार से अधिक लोगों को करीब 897 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी देकर 3.16 लाख रोजगार सृजित किए गए हैं। इसके साथ ही 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना' से 4.41 लाख पारंपरिक शिल्पकारों को आधुनिक टूलकिट और प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है। युवाओं और उद्यमियों के लिए योगी सरकार की अभिनव पहल योगी सरकार ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' (सीएम युवा) जैसी अभिनव पहल शुरू की है। इसके तहत बिना गारंटी के ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका लक्ष्य 10 वर्षों में 10 लाख नई सूक्ष्म इकाइयां स्थापित करना है। इसके अतिरिक्त, एमएसएमई पार्क विकसित करने के लिए प्लेज (PLEDGE) योजना के तहत प्रदेश के 12 जिलों में पार्क स्वीकृत किए जा चुके हैं, जो उद्योगों को बेहतर इकोसिस्टम प्रदान करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का विधिवत शुभारंभ सुबह 10:15 बजे भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। उन्होंने देश में एमएसएमई सेक्टर की ग्रोथ और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दूसरे दिन ब्रिक्स देशों से आए विभिन्न प्रतिनिधिमंडल आगरा की ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण करेंगे और यहां की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू होंगे।