samacharsecretary.com

डॉ. यादव के नेतृत्व में तकनीक आधारित सुशासन का मॉडल बना लोक निर्माण विभाग

लोक निर्माण से लोक कल्याण नवाचार से नव निर्माण तक : 2.5 वर्षों में लोक निर्माण विभाग की कार्य पद्धत्ति में आया ऐतिहासिक परिवर्तन डॉ. यादव के नेतृत्व में तकनीक आधारित सुशासन का मॉडल बना लोक निर्माण विभाग हर सड़क, हर परियोजना में गुणवत्ता का संकल्प भोपाल कभी सड़क और भवन निर्माण तक सीमित समझा जाने वाला मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग आज नवाचार, तकनीकी आधुनिकीकरण, पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शिता और जवाबदेही के क्षेत्र में देश के अग्रणी विभागों में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व तथा लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह के मार्गदर्शन में पिछले 2.5 वर्षों के दौरान विभाग ने केवल अधोसंरचना निर्माण ही नहीं किया, बल्कि कार्यप्रणाली में ऐसे परिवर्तनकारी सुधार लागू किए हैं, जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पष्ट सोच रही है कि विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि वह पर्यावरण संरक्षण, जनभागीदारी, तकनीकी दक्षता और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। इसी सोच को आधार बनाकर लोक निर्माण विभाग ने अनेक अभिनव पहलें शुरू की हैं। विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का अनूठा मॉडल : लोक कल्याण सरोवर सड़क निर्माण कार्यों के दौरान आवश्यक मिट्टी एवं मुरम की खुदाई को विभाग ने पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी बनाने का अभिनव निर्णय लिया। अब “लोक कल्याण सरोवर” विकसित किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में विभाग द्वारा 506 से अधिक लोक कल्याण सरोवर निर्मित किए गए, जिन पर कोई अतिरिक्त व्यय नहीं हुआ। इन सरोवरों के लिए पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर विशेष डिजिटल मॉड्यूल विकसित किया गया है, जो निर्माण स्थलों के समीप ऐसे स्थानों की पहचान करता है जहाँ वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके। यह पहल जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण समुदायों को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सड़कों से भूजल संवर्धन की नई पहल जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट की चुनौती को ध्यान में रखते हुए विभाग ने सड़क किनारे “ग्राउंड वाटर रिचार्ज बोर” निर्माण की अभिनव योजना प्रारंभ की है। प्रत्येक किलोमीटर पर रिचार्ज बोर विकसित किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 840 किलोमीटर लंबाई की सड़कों पर लगभग 1000 रिचार्ज बोर निर्मित किए जा रहे हैं, जिससे वर्षा जल सीधे धरती के भीतर पहुंच सकेगा। ग्रीन बिल्डिंग की दिशा में निर्णायक कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार प्रदेश में सभी नवीन शासकीय भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों एवं ऊर्जा दक्षता सिद्धांतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसके लिए 1500 से अधिक अभियंताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया तथा GRIHA काउंसिल के साथ समझौता कर भवन निर्माण को राष्ट्रीय ग्रीन मानकों से जोड़ा गया। वर्षा जल संचयन, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन अब प्रत्येक नए भवन निर्माण का अभिन्न हिस्सा बन रहे हैं।  लोकपथ एप लोक निर्माण विभाग द्वारा 2 जुलाई 2024 को शुरू किया गया “लोकपथ मोबाइल ऐप” नागरिक सहभागिता आधारित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है। इस ऐप के माध्यम से नागरिक सड़क संबंधी शिकायतों की जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड कर सीधे विभाग तक पहुंचा सकते हैं। शिकायतों के निराकरण के लिए चार दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है।     आज यह प्लेटफॉर्म केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं, बल्कि जवाबदेह प्रशासन का प्रतीक बन चुका है। हजारों शिकायतों का त्वरित निराकरण कर विभाग ने जनविश्वास को मजबूत किया है। तकनीक आधारित औचक निरीक्षण : गुणवत्ता पर शून्य समझौता गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने देश में अपनी तरह की अनूठी सॉफ्टवेयर आधारित निरीक्षण प्रणाली विकसित की है। प्रत्येक माह की 5 और 20 तारीख को सॉफ्टवेयर द्वारा रैंडम तरीके से चयनित 35 परियोजनाओं का निरीक्षण किया जाता है। अब तक लगभग 980 निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप 77 ठेकेदारों को नोटिस जारी किए गए, 28 को ब्लैकलिस्ट किया गया, 16 कंसल्टेंट्स को नोटिस दिए गए, एक को ब्लैकलिस्ट किया गया तथा 105 अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई की गई। वहीं उत्कृष्ट कार्य करने वाले 38 अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशंसा भी प्राप्त हुई। यह व्यवस्था स्पष्ट करती है कि विभाग में गुणवत्ता और जवाबदेही पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की 14 मंडलीय प्रयोगशालाओं को 61 अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। साथ ही 14 मोबाइल प्रयोगशालाएं भी शुरू की गई हैं, जो निर्माण स्थल पर ही गुणवत्ता परीक्षण कर सकती हैं। 25 निजी प्रयोगशालाओं को भी एम्पैनल किया गया है जिससे स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित हो सके। बिटुमिन गुणवत्ता सुधार का बड़ा निर्णय प्रदेश की सड़कों की दीर्घकालिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने बिटुमिन की खरीद केवल सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों—आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल से ही सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जीआईएस आधारित डिजिटल क्रांति भास्कराचार्य संस्थान (BISAG-N) के सहयोग से विभाग ने 71 हजार 210 किलोमीटर सड़कों, 2 हजार 975 भवनों और 1 हजार 426 पुलों का जियो-टैग्ड सर्वेक्षण पूरा किया है। अब प्रत्येक परिसंपत्ति डिजिटल मानचित्र पर उपलब्ध है। इसी आधार पर रोड नेटवर्क मास्टर प्लान, बजट मॉड्यूल, डीपीआर मॉड्यूल तथा परियोजनाओं के वैज्ञानिक समय निर्धारण जैसे अत्याधुनिक सिस्टम विकसित किए गए हैं। इससे योजना निर्माण अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और परिणामोन्मुख हुआ है।  अभियंताओं की क्षमता वृद्धि पर विशेष ध्यान विभाग ने पहली बार 1700 से अधिक अभियंताओं का प्रशिक्षण आवश्यकता आकलन (Training Need Assessment) कर व्यापक क्षमता निर्माण ढांचा विकसित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 10 जनवरी 2026 को इसके साथ प्रशिक्षण कैलेंडर, लोक कल्याण सूचकांक और विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ हुए समझौतों का शुभारंभ किया।  प्रदेश का पहला इंजीनियर ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट लोक निर्माण विभाग के इतिहास में पहली बार एक समर्पित इंजीनियरिंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (ETRI) की स्थापना की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा घोषित यह संस्थान केवल लोक निर्माण विभाग ही नहीं बल्कि प्रदेश के सभी निर्माण विभागों के अभियंताओं के लिए राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र बनेगा।    पिछले ढाई वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने यह सिद्ध किया है कि अधोसंरचना विकास केवल सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। यदि तकनीक, पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और मानव संसाधन विकास … Read more

मोहन सरकार का प्रशासनिक सर्जरी प्लान! CMO में नई टीम, 15 अफसरों के तबादले संभव

भोपाल  मध्यप्रदेश के 3 प्रमुख सचिव (पीएस), 2 संभागायुक्त और 10 कलेलटरों पर तबादले की तलवार लटकी है। कभी भी इनके तबादले किए जा सकते हैं। ये सभी लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ है, इनमें से 75 फीसद पहले से नई पदस्थापना की जुगत में हैं तो, कुछ को सरकार बदलने का मन बना चुकी है। सूत्रों के मुताबिक प्रमुख सचिवों में अमित राठौर, गुलशन बामरा और सोनाली पोंकशे वायंगंकर का नाम बताया जा रहा है। इनके पास क्रमश: वाणिज्यिक कर, जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय विभाग है। जहां पर ये दो साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय में कुछ पदों पर नए सिरे से जमावट की सुगबुगाहट है। हाल में मुख्यमंत्री के सचिव आलोक सिंह को आईजी पंजीयन बनाकर भेजा है। माना जा रहा है कि उनका काम किसी युवा आइएएस को दिया जा सकता है। हालांकि पहले से मुख्यमंत्री के पास इलैया राजा टी और कौशलेंद्र विक्रम सिंह जैसे दो युवा सचिव हैं। बीते बुधवार को भी 29 IAS का हो चुका है तबादला बता दें कि बीते बुधवार सरकार ने 29 आइएएस का तबादला किया था, जिनमें से 20 फीसद आइएएस को बदलने की जिम्मेदारी ऐन वक्त पर ली गई। अभी भी आइएएस खेमे में कुछ नामों के बदलाव के पीछे कई कयास लगाए जा रहे हैं। कई अफसरों से अतिरिक्त प्रभार भी वापस लिए गए। पशुपालन में पीएस, खादी बोर्ड में आएंगे नए एमडी आइएएस माल सिंह जून माह में सेवानिवृब होंगे। वे फिलहाल खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के एमडी है, जबकि जुलाई में प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव सेवानिवृब हो रहे हैं। वे पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव है। इन दोनों ही आइएएस के सेवानिवृत्त होने के बाद उनके पास मौजूद जिम्मेदारी किसी अन्य आइएएस (MP Transfer cmo) को देनी होगी। तबादलों को हर बार चुनौती देते हैं हजारों शासकीय सेवक तबादलों के बाद अब 1000 से अधिक मामलों में स्थगन की आशंका है। मध्यप्रदेश के 75 फीसद विभागों ने इससे बचने के लिए हाईकोर्ट जबलपुर समेत हाईकोर्ट की दोनों खंडपीठ में केविएट दायर कर दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर बार तबादलों के बाद हजारों की संख्या में शासकीय सेवक कोर्ट चले जाते हैं और तबादलों को चुनौती दे देते हैं। एक विभाग प्रमुख ने बताया कि जो तबादले (MP Transfer IAS Transfer) प्रशासकीय आधार पर किए जाते हैं, उनमें स्थगन की स्थिति कई बार बनती है। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते इस साल पहले ही न्यायालयों में केविएट लगा दी है। ताकि स्थगन से पहले विभाग को भी पक्ष रखने का मौका मिल सके। पूर्व में इन कमियों के कारण शासकीय सेवकों को आसानी से स्थगन मिल गए, बाद में ऐसे प्रकरण लंबे चलते हैं और स्थगन खारिज कराना मुश्किल हो जाता है। स्थगन मिला तो विभागाध्यक्षों को करनी पड़ती है सुनवाई कानून मामलों के जानकारों का कहना है कि स्थगन स्थाई नहीं होते, बल्कि यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें संबंधित शासकीय सेवक को सुनवाई का अवसर दिया जाता है। यह सुनवाई तबादला (MP Transfer IAS Transfer CMO Transfer) करने वाले विभाग के प्रमुख द्वारा की जाती है। यदि वे संबंधित शासकीय सेवक के तर्कों से संतुष्ट न हों तो तबादला यथावत रखते हैं। ये कमिश्नर, जिन्हें बुलाने की तैयारी  मनोज खत्री, ग्वालियर- कब से पदस्थ- 29 जून 2024 सुरभि गुप्ता, शहडोल – कब से पदस्थ – 18 नवंबर 2024 ये पीएस, जिनकी बदल सकती है जिम्मेदारी (MP Transfer PS) अमित राठौर, वाणिज्य कर – कब से पदस्थ – 25 जनवरी 2024 गुलशन बामरा, जनजातीय कार्य – कब से पदस्थ – 12 नवंबर 2024 सोनाली पोंकशे वायंगंकर, सामाजिक न्याय – कब से पदस्थ 12 अगस्त 2024 इन कलेक्टर्स को वापल बुला सकती है सरकार (MP Transfer of Collectors) कलेक्टर – जिला – कब से पदस्थ     रुचिका चौहान- ग्वालियर – 11 नवंबर 2024     केदार सिंह – शहडोल – 13 अगस्त 2024     गिरीश मिश्रा – राजगढ़ – 12 अगस्त 2024     रिजू बाफना – शाजापुर – 5 जनवरी 2024     अदिति गर्ग – मंदसौर – 29 जुलाई 2024     पार्थ जायसवाल – छतरपुर – 6 अगस्त 2024     मृणाल मीना – बालाघाट – 12 अगस्त 2024     हर्षल पंचोली – अनूपपुर – 13 अगस्त 2024     हिमांशु चंद्रा – नीमच – 13 अगस्त 2024     किरोड़ीलाल मीना – भिंड – 16 फरवरी 2024

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे 2036 पौधों के वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ

रायपुर.  अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर 23 जून को छत्तीसगढ़ में खेल और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ एवं वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बीएसएफ कैंप, नया रायपुर स्थित ग्राम पलौद में विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री होंगे मुख्य अतिथि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम का आयोजन दोपहर 1 बजे होगा। मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति से खिलाड़ियों, खेल संगठनों तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ेगा। 2036 पौधों के रोपण का लक्ष्य भारतीय ओलंपिक संघ के आह्वान पर इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 2036 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जलवायु संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। खेल और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश इस आयोजन के माध्यम से खिलाड़ियों और युवाओं को खेलों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। वृक्षारोपण अभियान प्रदेश में हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता संरक्षण तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। युवा खिलाड़ियों को मिलेगी प्रेरणा छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का मानना है कि मुख्यमंत्री की सहभागिता से प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिलेगी। इससे खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूकता बढ़ेगी। हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार जनभागीदारी आधारित अभियान चला रही है। अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस पर आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम खेल और प्रकृति के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा तथा ‘हरित छत्तीसगढ़-हरित भारत’ के संकल्प को और मजबूत करेगा।

टेट अनिवार्यता पर झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, विशेष परीक्षा की मांग कर रहे शिक्षक

 रांची  शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) अनिवार्य किए जाने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सामान्य अभ्यर्थियों के लिए आयोजित होनेवाली झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में ही कार्यरत शिक्षकों को भी सम्मिलित करने का निर्णय लिया है। विभाग ने बकायदा इसके निर्देश झारखंड एकेडमिक काउंसिल को दिए हैं, लेकिन कार्यरत शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश लागू ही करना है तो कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा पृथक रूप से आयोजित हो। शिक्षकों ने तमिलनाडु तथा उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला भी दिया है, जहां न्यायालय के आदेश आने के बाद कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष पात्रता परीक्षा आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। तमिलनाडु में जहां इसपर निर्णय लिया जा चुका है, जबकि उत्तर प्रदेश में इसे लेकर रिपोर्ट मांगी गई है कि कितने शिक्षक यह परीक्षा उत्तीर्ण हैं तथा कितने को यह परीक्षा उत्तीर्ण होना बाकी है। इसे लेकर जारी पत्र में कहा गया कि सरकार कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष पात्रता परीक्षा आयोजित करने पर विचार कर रही है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव राममूर्ति ठाकुर के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में सभी राज्यों से कार्यरत शिक्षकों के लिए वर्ष में दो शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने को कहा है। दूसरी तरफ, झारखंड में सामान्य अभ्यर्थियों के लिए हो रही परीक्षा में ही शामिल करने का निर्णय लिया गया है जो उचित नहीं है। इधर, अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ सहित कई अन्य संघ सर्वोच्च न्यायालय में क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने की भी तैयारी कर रहे हैं बताते चलें कि न्यायालय ने कक्षा एक से आठ के उन शिक्षकों के लिए भी यह पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया है जो आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त हैं। हालांकि शिक्षक नियुक्त होने के लिए पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता का प्रविधान आरटीई में ही किया गया है।

फसल नुकसान झेल रहे किसानों को सरकार का तोहफा, 13 जिलों में कृषि इनपुट अनुदान जारी

पटना खेतों में लगी फसल की क्षति के बाद मुआवजे के इंतजार कर रहे बिहार के किसानों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री मंत्री सम्राट चौधरी ने इन किसानों को फसल क्षति की राशि सीधे उनके खाते में भेज दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को 13 जिलों के 3.96 लाख किसानों के खाते में 200 करोड़ की अनुदान राशि हस्तांतरित की है। यह राशि फसल क्षति के लिए कृषि इनपुट अनुदान के रूप में दी गई है। लोक सेवक आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि है आगे भी जिन किसानों के आवेदन आए हैं, उन्हें कृष इनपुट अनुदान की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है की डबल इंजन की सरकार बिहार के किसानों के लाभ के लिए काम कर रही है। आपको बता दें कि हाल ही में बिहार समेत देश भर के करोड़ों किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त आई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून को करीब साढ़े नौ लाख किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये ट्रांसफर किए थे। अब आज बिहार के किसानों को फसल क्षति अनुदान सीएम सम्राट चौधरी ने ट्रांसफर किया है। दरअसल 2025-26 के दौरान जिन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा था। उन्हीं किसानों को सरकार द्वारा यह जरूरी मदद दी जा रही है। मार्च के तीसरे और चौथे हफ्ते में अचानक आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि से रबी की फसल को बिहार में काफी नुकसान पहुंचा था। जिन किसानों के फसल का नुकसान हुआ है सीएम ने उनके खाते में मुआवजे की राशि भेजी है। आपको बता दें कि कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत सरकार आंधी, बारिश या सूखाड़ समेत अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान किसानों के फसल का नुकसान होने पर उन्हें मुआवजा देती है। यह योजना करीब 2 हेक्टेयर भूमि में हुए फसल के नुकसान तक के लिए मान्य है। कृषि इनपुट अनुदान योजना में कितनी राशि मिलती है आपको यहां बता दें कि इस योजना के तहत सरकार ने न्यूनतम सहायता राशि भी तय कर दी है। इसके तहत असिंचित क्षेत्र के लिए कम से कम 1,000 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए 2,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए न्यूनतम 2,500 रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसकी एक खास बात यह भी है कि इस योजना का लाभ सिर्फ भू-स्वामी किसान ही नहीं बल्कि रैयत और गैर रैयत (बटाईदार या पट्टे पर खेती करने वाले) किसान भी ले सकते हैं।

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सड़क डामरीकरण का कार्य प्रारंभ कराया

रायपुर.  प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने आज नगर निगम कोरबा के वार्ड क्र. 40 पाड़ीमार वार्ड में सड़क डामरीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया। इस अवसर पर महापौर संजूदेवी राजपूत उपस्थित थी। उन्होंने डामरीकरण कार्य के दौरान गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने एवं शीघ्र कार्य को पूर्ण किये जाने के निर्देश मौके पर अधिकारियों को दिये।  नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा अनवरत रूप से किये जा रहे विकास कार्यों की कड़ी में निगम के बालको जोन अंतर्गत वार्ड क्र. 40 पाड़ीमार क्रमांक 01 में 25 लाख रूपए की लागत से राजेश ठाकुर के घर से बरगद चौक होते हुये इंदिरा मार्केट मुख्य मार्ग तक सड़क डामरीकरण का कार्य कराया जा रहा है।  अब तक निगम क्षेत्र में 1000 करोड़ रूपए के विकास कार्य स्वीकृत उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने इस मौके पर अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आशीर्वाद से विगत ढाई वर्ष के दौरान नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्रंातर्गत विभिन्न मदों के अंतर्गत लगभग 1000 करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत किये गये हैं, जिसमें अनेक कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं, अनेक प्रगति पर हैं तथा शेष कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होने जा रहे हैं। उद्योग मंत्री देवंागन ने अपने उद्बोधन में कहा कि निगम क्षेत्र में 15 करोड़ रूपये के सड़क डामरीकरण कार्य कराये जाने हैं, जिसमें अनेक कार्य पूर्ण भी कर लिये गये हैं, जैसे-जैसे डामर की उपलब्धता होती जायेगी, यह कार्य संपादित होंगे। उन्होेने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारे छत्तीसगढ़ राज्य का तेजी से विकास हो रहा है तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्र सरकार की दर्जनों जनकल्याणकारी योजनाओं व मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में राज्य की विभिन्न योजनाओं से प्रदेश व देश के करोड़ों लोग लाभान्वित हो रहे हैं।  बिना भेदभाव के हो रहे विकास कार्य इस अवसर पर महापौर संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नगरीय प्रशासन मंत्री व उप मुख्यमंत्री अरूण साव तथा उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के आशीर्वाद से निगम क्षेत्र में व्यापक रूप से विकास कार्य हो रहे हैं तथा सभी 67 वार्डों में बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य कराये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जब से हमारी सरकार बनी है, तभी से सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के साथ-साथ हमारे कोरबा में भी विकास को तेज गति व सही दिशा मिली है, बरसों से व्याप्त समस्याएं दूर हो रही हैं तथा लोगों को आवश्यक   सुविधाएं सहज रूप से मुहैया हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें कोरबा की जनता का जो भरपूर आशीर्वाद मिला, उन्होंने हम पर जो विश्वास जताया, वह विश्वास हमेेशा बना रहेगा, विश्वास टूटने नहीं दिया जाएगा, इस हेतु हम कृत संकल्पित हैं।  इस अवसर पर एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, सत्येन्द्र दुबे, रजत खुंटे, मंगलराम बंदे, चेतन सिंह मैत्री, चंदादेवी रत्नाकर, तरूण राठौर के साथ ही दिलेन्द्र यादव, जिला उपाध्यक्ष प्रफुल्ल तिवारी, नरेन्द्र पाटनवार, आकाश श्रीवास्तव, मनोज सिंह, जय कुमार राठौर, प्रीति स्वर्णकार, रेणु प्रसाद, दीपक चन्द्रा, लखन चन्द्रा, हेमलता निर्मलकर, निगम के सहायक अभियंता मोतीलाल बरेठ, अंजूलता तिग्गा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, निगम के अन्य कर्मचारीगण एवं काफी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

रांची में एचईसी की संपत्ति पर अतिक्रमण, हजारों एकड़ जमीन पर निगरानी पर सवाल

रांची हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) की जमीन अब अवैध निर्माण और किराये के कारोबार का अड्डा बनती जा रही है। कंपनी की खाली पड़ी जमीन पर कब्जा कर कई लोगों ने पक्के मकान, दुकान और छोटे-छोटे व्यावसायिक परिसर तक खड़े कर दिए हैं। स्थिति यह है कि जमीन कंपनी की, संसाधन कंपनी के और कमाई किसी और की हो रही है। एचईसी के आवासीय और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं, जहां लोग बिना किसी वैध अधिकार के कंपनी की जमीन पर निर्माण कर उसे किराये पर देकर हर माह हजारों रुपये कमा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की बताई जा रही है जिनका एचईसी से प्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है। कई लोग वर्षों पहले रोजगार की तलाश में रांची आए थे और धीरे-धीरे खाली जमीन पर कब्जा कर स्थायी निवासी बन गए। किराये से लाखों की कमाई, कंपनी को नुकसान स्थानीय लोगों के अनुसार, कई अवैध कब्जाधारियों ने एक से अधिक कमरे बनाकर किराये पर दे रखे हैं। कुछ जगहों पर दुकानें, गोदाम और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी संचालित हो रहे हैं। ऐसे निर्माणों से कब्जाधारियों को हर माह हजारों रुपये की आमदनी हो रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कई मामलों में अवैध निर्माण करने वाले लोग खुद उस परिसर में नहीं रहते। उन्होंने कंपनी की जमीन पर मकान या दुकान बनाकर किराये पर दे दिया है और दूसरे स्थानों पर रहने लगे हैं। यानी एचईसी की संपत्ति निजी आय का साधन बन गई है। बिजली-पानी का भी हो रहा दुरुपयोग अवैध निर्माण के साथ-साथ बिजली और पानी के कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कई अवैध बस्तियों और निर्माण स्थलों पर कंपनी के संसाधनों का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कई जगह बिना अनुमति पानी और बिजली की व्यवस्था कर ली गई है। जानकारों का कहना है कि किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान की जमीन पर अवैध कब्जा सिर्फ जमीन का मामला नहीं होता, बल्कि इससे सुरक्षा, भविष्य की विकास योजनाओं और कंपनी की संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। हजारों एकड़ जमीन की सुरक्षा चुनौती एचईसी की स्थापना के समय कंपनी को बड़े क्षेत्रफल में जमीन उपलब्ध कराई गई थी। कंपनी के पास करीब हजारों एकड़ जमीन का बड़ा भू-भाग रहा है, जिसमें फैक्ट्री परिसर, आवासीय क्षेत्र और खाली जमीन शामिल हैं। समय के साथ आर्थिक संकट और निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण कई क्षेत्रों में अतिक्रमण बढ़ता गया। कंपनी के आवासीय परिसर में हजारों क्वार्टर हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीनों पर धीरे-धीरे अवैध बस्तियां विकसित हो गईं। कुछ स्थानों पर तो स्थायी बाजार और बहुमंजिली निर्माण तक हो चुके हैं। नगर प्रशासन विभाग पर भी सवाल अवैध निर्माण को लेकर एचईसी नगर प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के कारण कब्जाधारियों के हौसले बढ़ते गए। कुछ मामलों में विभागीय स्तर पर जांच भी चल रही है। हालांकि कंपनी प्रबंधन समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता रहा है, लेकिन जमीन की निगरानी और अवैध निर्माण रोकना बड़ी चुनौती बना हुआ है। कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा संकट एचईसी की जमीन पर बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर अब ठोस नीति की जरूरत महसूस की जा रही है। कंपनी की संपत्ति की पहचान, सीमांकन, डिजिटल रिकॉर्ड और नियमित निगरानी के बिना अतिक्रमण रोकना मुश्किल होगा। एचईसी की जमीन भविष्य की औद्योगिक गतिविधियों और पुनरुद्धार योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में जमीन को अवैध कब्जे और निजी कमाई के साधन से बचाना कंपनी के अस्तित्व और भविष्य दोनों के लिए जरूरी है।

मुसल्लहपुर हाट फायरिंग केस: एलसीआर मांग के बाद टली जमानत पर सुनवाई

 पटना  राजधानी के मुसल्‍लहपुर हाट में कोचिंग विवाद से जुड़े मामले में ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद के भाई और स्‍टाफ को सोमवार को जमानत नहीं मिली। जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश की बेंच में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। एडीजी 33 की अदालत में अभ‍िषेक और गौरव की जमानत पर सुनवाई के दौरान दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने एलसीआर की मांग की है।   फर्स्‍ट क्‍लास मज‍िस्‍ट्रेट के यहां से एलसीआर (लोअर कोर्ट रिकॉर्ड) आने के बाद मामले में अगली तारीख को दोबारा बहस होगी। फर्स्‍ट क्‍लास मज‍िस्‍ट्रेट ने दोनों की बेल खारिज कर दी थी। फैजल खान मामले में 25 जून को सुनवाई 2 जून की रात खान ग्‍लोबल स्‍टडीज पर बवाल के बाद हुए फायरिंग मामले में फैजल खान उर्फ खान सर एवं उनके दो गार्डों की जमानत पर 25 जून को सुनवाई होनी है।   इस मामले में कोर्ट 25 जून तक गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है। पिछली सुनवाई में कोर्ट में पुलिस ने अपडेटेड केस डायरी सबम‍िट की थी।   क्‍या है पूरा मामला? बता दें कि कोचिंग संस्‍थान में हंगामा, मारपीट और फायरिंग मामले में ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद व उनके भाई एवं स्‍टाफ को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस घटना में खान ग्‍लोबल के गार्ड चुनचुन यादव को चोटें आई थीं। इसके बाद फैजल खान के दो गार्डों ने दो-दो राउंड फायरिंग की थी।   पिछले दिनों रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में संदिग्‍ध परि‍स्‍थ‍ित‍ियों में हुई मौत के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। जमानत पर जेल से बाहर आए रौशन आनंद ने फैजल खान और कोल्‍ड स्‍टोरेज के मालिक पर अपने भाई की हत्‍या का आरोप लगाया था। 

कतर के LNG प्लांट में मौत का धमाका: 13 की दर्दनाक मौत, भारत-पाकिस्तान के नागरिक भी हादसे का शिकार

रास लाफान.  कतर में रास लाफान औद्योगिक शहर में भीषण विस्फोट में 13 लोगों की जान चली गई। कतर एनर्जी ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि देश के प्रमुख ऊर्जा केंद्र रास लाफान औद्योगिक शहर के बरजान क्षेत्र में रविवार देर रात हुए विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई। कंपनी ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि विस्फोट घरेलू गैस आपूर्ति संयंत्र को रखरखाव के बाद दोबारा चालू करने की प्रक्रिया के दौरान हुआ। अचानक हुए विस्फोट के बाद आग भड़क उठी, जिसे स्थानीय अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं की टीमों ने तेजी से नियंत्रित कर लिया। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरने वालों में अधिकांश भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। कतर एनर्जी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस हादसे में कुल 66 लोग घायल हुए हैं। घायलों में कतर, भारत, पाकिस्तान, तंजानिया, गिनी, नेपाल, बांग्लादेश, केन्या और नाइजीरिया के नागरिक शामिल हैं। कंपनी ने आश्वासन दिया कि सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया और उनकी चोटें गंभीर नहीं हैं। किसी भी घायल की हालत चिंताजनक नहीं बताई गई है। बता दें कि रास लाफान कतर का सबसे बड़ा औद्योगिक और ऊर्जा हब है, जहां दुनिया के सबसे बड़े द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादन संयंत्र और निर्यात सुविधाएं स्थित हैं। यह क्षेत्र कतर की आर्थिक समृद्धि का मुख्य आधार है और वैश्विक LNG आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कतर एनर्जी ने स्पष्ट किया कि इस विस्फोट से LNG उत्पादन, निर्यात कार्यों या रास लाफान बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर कोई असर नहीं पड़ा है। संयंत्र और बंदरगाह दोनों पूरी क्षमता के साथ सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। कंपनी ने वैश्विक बाजार को पूरा आश्वासन दिया है कि गैस आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं आएगा। कतर एनर्जी ने विस्फोट के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय तकनीकी जांच समिति गठित कर दी है। विशेषज्ञ टीम घटनास्थल पर पहुंचकर सबूतों का जुटा रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि फिर से चालू करने की प्रक्रिया के दौरान विस्फोट होने की बात सामने आई है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। घायलों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां आपको बता दें कि मार्च में ईरान की एक मिसाइल ने रास लाफान पर हमला किया था, जिसमें आग लग गई और भारी नुकसान हुआ। इसके बाद से ही कतर ने वहां उत्पादन रोक रखा था। बताया जा रहा है कि उसी को एक बार फिर से चालू करने की कोशिश की जा रही थी, जिस कारण यह हादसा हुआ। फिलहाल सभी घायलों का इलाज चल रहा है।

सीएसआईडीसी संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न

रायपुर.  छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसआईडीसी) की 161वीं संचालक मंडल बैठक आज सोमवार को रायपुर स्थित उद्योग भवन में अध्यक्ष राजीव अग्रवाल (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के औद्योगिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। प्रमुख रूप से देवेन्द्र नगर (पंडरी), रायपुर में जेम्स एवं ज्वेलरी पार्क की स्थापना हेतु आगे की कार्यवाही के संबंध में निर्णय लिया गया। इसके साथ ही राज्य में टेक्सटाइल पार्क एवं रेडीमेड गारमेंट पार्क में निवेश आकर्षित करने तथा संबंधित प्रक्रियाओं को तेज करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, प्रबंध संचालक सीएसआईडीसी विश्वेश कुमार, संचालक उद्योग संचालनालय प्रभात मलिक, संयुक्त सचिव वित्त विभाग श्रीमती श्रद्धा त्रिवेदी तथा अपर संचालक नगर एवं ग्राम निवेश संदीप बागड़े सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।