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40 से अधिक राष्ट्रीय उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों, अनुसंधान एवं शिक्षण संस्थानों ने साझा किए सुझाव

भोपाल  रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उप महानिदेशक (स्वदेशीकरण)  सुशील कुमार सतपुते ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थान और शिक्षण संस्थाएं एक साझा मंच पर आकर नवाचार आधारित रक्षा विनिर्माण को आगे बढ़ाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्यों में मजबूत औद्योगिक एवं नवाचार आधारित इको सिस्टम विकसित करना समय की आवश्यकता है और केंद्र व राज्यों के समन्वित प्रयासों से ही देश रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा। रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 20-21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन "आत्मनिर्भरता इन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग : प्रमोटिंग स्टेट-लेवल इकोसिस्टम्स" की तैयारियों के तहत मध्यप्रदेश शासन द्वारा एमपीआईडीसी मुख्यालय, भोपाल में तीसरे चरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय फ्लैगशिप परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण, एमएसएमई, स्टार्टअप, नवाचार तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। कार्यशाला में देशभर के 40 से अधिक प्रमुख उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और नीति विशेषज्ञों ने प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से भागीदारी कर अपने सुझाव साझा किए। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय पहल में 'इंडिजेनाइजेशन, एमएसएमई, स्टार्टअप एवं इनोवेशन इकोसिस्टम' विषय पर सह-नेतृत्व (को-लीड) राज्य की भूमिका निभा रहा है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव  राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य की उद्योग अनुकूल नीतियां, विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना, उपलब्ध संसाधन तथा कुशल मानव संसाधन इसे देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला राज्य की भावी रणनीति तय करने के साथ उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रस्तावित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की रूपरेखा, राज्यों की भूमिका तथा मध्यप्रदेश की सह-नेतृत्व जिम्मेदारी पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस दौरान बताया गया कि रक्षा उत्पादन विभाग ने राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के लिए सात प्रमुख रणनीतिक विषय निर्धारित किए हैं, जिन पर राज्यों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। एमपीआईडीसी द्वारा डिफेंस एवं एयरोस्पेस रणनीति वर्ष 2026-30 प्रस्तुत की गई। इसमें राज्य की वर्तमान औद्योगिक स्थिति, छह रणनीतिक स्तंभों तथा 24 प्रमुख पहलों के माध्यम से रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में निवेश, नवाचार और विनिर्माण को बढ़ावा देने की कार्ययोजना साझा की गई। प्रस्तुतीकरण में जबलपुर की सैन्य वाहन निर्माण क्षमता, इटारसी के आयुध उत्पादन, ग्वालियर के बायो-केमिकल अनुसंधान तथा कटनी की धातुकर्म विशेषज्ञता को मध्यप्रदेश की प्रमुख औद्योगिक शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया। कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण चरण हितधारकों के साथ सातों रणनीतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा रहा। उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, रक्षा प्रतिष्ठानों, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। विशेष रूप से स्वदेशीकरण, एमएसएमई, स्टार्टअप और नवाचार आधारित इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर उपयोगी सुझाव सामने आए। कार्यशाला में बीईएमएल, आईआरईएल, आयुध निर्माणी इटारसी, सेंट्रल प्रूफ एस्टैब्लिशमेंट इटारसी, एमपीएमएसएमई, ग्लोबल स्किल पार्क, आईआईएसईआर भोपाल तथा एमपीएसईडीसी सहित अनेक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं डीआरडीओ, आईआईटी दिल्ली, बीएचयू, धारवाड़, इंदौर, जम्मू, कानपुर, भिलाई, गांधीनगर एवं मद्रास, आईआईएससी बेंगलुरु, नासकॉम, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM), ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया, भारत डायनामिक्स लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑर्डनेंस लिमिटेड, गोल्डन पर्ल डिफेंस सिस्टम्स प्रा. लि. तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। इन संस्थानों की भागीदारी से कार्यशाला को राष्ट्रीय दृष्टिकोण और तकनीकी विशेषज्ञता मिली। एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक ने कार्यशाला के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर 30 जून 2026 तक राज्य की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रक्षा उत्पादन विभाग को भेजी जाएगी। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में मध्यप्रदेश की रणनीति और सुझावों का आधार बनेगी।  

ब्रिटेन में बदले राजनीतिक समीकरण, ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ की जीत के बाद किएर स्टार्मर पर बढ़ा दबाव

लंदन  ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. लेबर पार्टी के दिग्गज नेता और ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम ने संसदीय उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज की है, जिसके बाद प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर की कुर्सी पर खतरा और बढ़ गया है. उन्हें "किंग ऑफ द नॉर्थ" कहा जाता है।  उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड सीट पर हुए चुनाव में बर्नहम ने 54.8 फीसदी वोट हासिल किए. उन्होंने निगेल फराज की पार्टी रिफॉर्म यूके के उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया, जिसे 34.5 फीसदी वोट मिले. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत हो सकती है।  अपनी जीत के बाद बर्नहैम ने इसे "टर्निंग पॉइंट" यानी एक निर्णायक मोड़ बताया. उन्होंने कहा कि देश को ऐसी राजनीति से बचाना होगा जो समाज को बांटती है. बर्नहैम ने संकेत दिया कि वह देश को अमेरिका जैसी पोलराइज्ड राजनीति की दिशा में नहीं जाने देना चाहते।  अगर नेतृत्व का होगा चुनाव तो बर्नहैम हो सकते हैं उम्मीदवार 56 वर्षीय बर्नहैम लंबे समय से लेबर पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं. वह सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण के आलोचक रहे हैं और कई बार खुलकर कह चुके हैं कि पिछले चार दशकों की आर्थिक नीतियां आम लोगों के लिए सफल नहीं रही हैं. उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है कि अगर पार्टी नेतृत्व के लिए चुनाव होता है तो वह उम्मीदवार बनने को तैयार हैं।  दूसरी तरफ, किएर स्टार्मर की लोकप्रियता लगातार गिर रही है. दो साल पहले भारी बहुमत से चुनाव जीतने वाले स्टार्मर आज ब्रिटेन के सबसे अलोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में गिने जा रहे हैं. कई विवादों, नीतियों में बार-बार बदलाव और फैसलों में देरी के आरोपों ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है. सांसदों ने किएर स्टार्मर से मांगा इस्तीफा पिछले महीने हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को बड़ा झटका लगा था. इसके बाद पार्टी के करीब एक चौथाई सांसदों ने स्टार्मर से पद छोड़ने की मांग की थी. रक्षा और स्वास्थ्य मंत्री समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए इस्तीफा दे दिया।  हालांकि, स्टार्मर अभी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे. उन्होंने साफ कहा है कि वह किसी भी नेतृत्व चुनाव का सामना करेंगे और पार्टी को आंतरिक लड़ाई से बचना चाहिए. लेकिन बर्नहैम की जीत के बाद उनके लिए दबाव और बढ़ गया है।  अगर नेतृत्व परिवर्तन होता है तो पिछले एक दशक में ब्रिटेन को सातवां प्रधानमंत्री मिल सकता है. इतनी तेजी से नेतृत्व बदलना ब्रिटिश राजनीति में अस्थिरता का संकेत माना जा रहा है। 

बिहार को हाईस्पीड रेल की सौगात, पटना-दिल्ली बुलेट ट्रेन से सफर होगा बेहद आसान

 पटना /नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली को बिहार की राजधानी पटना से बुलेट ट्रेन के जरिये जोड़ने पर सरकार काफी गंभीरता से काम कर रही है.  रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि पटना एक बार बुलेट नेटवर्क से जुड़ जाएगा तो इससे बिहार को काफी सुविधा मिलेगी. उन्होंने कहा कि पटना से दिल्ली की यात्रा मात्र 4 घंटे 41 मिनट की रह जाएगी. उन्होंने कहा कि आगे पटना से सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन का विस्तार किया जाएगा. आने वाले समय में इसके लिए भी तैयारी शुरू हो गई है. पहली बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई के बीच में अगले साल शुरू होने वाली है।  रेल मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में बिहार में बुलेट ट्रेन आएगी. ये ट्रेन दिल्ली से लखनऊ, लखनऊ से वाराणसी, वाराणसी से पटना और पटना से सिलिगुड़ी तक जाएगी. इसके बाद दिल्ली से पटना की यात्रा मात्र 4 घंटे और 41 मिनट की रह जाएगी।  इससे पहले रेल मंत्री ने कहा था कि भारत ने अब स्वयं बुलेट ट्रेन बनाने की क्षमता रखता है. उन्होंने अगले साल मुंबई-पुणे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर काम शुरू करने की घोषणा की है।  पटना-दिल्ली बुलेट ट्रेन (हाई-स्पीड रेल) प्रोजेक्ट भारत के पूर्वी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का हिस्सा है. यह अभी पूर्ण रूप से प्लानिंग और सर्वे स्टेज में है, यहां अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।  यह बुलेट ट्रेन दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर का हिस्सा है. पटना इस रूट पर प्रमुख स्टेशन होगा. दिल्ली से पटना की दूरी अभी लगभग 1000 से 1100 किलोमीटर के बीच में है. इस यात्रा में अभी 12 से 17 घंटे लगते हैं. लेकिन बुलेट ट्रेन के बाद ये यात्रा 5 घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकेगी।  बिहार दौरे पर आए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए चालू वित्त वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया है।  राज्य के एक दिन के दौरे पर आए वैष्णव ने छपरा से दिल्ली के लिए एक नई एक्सप्रेस ट्रेन सेवा शुरू करने की घोषणा की।  रेल मंत्री ने कहा, "राज्य से लोकोमोटिव (इंजन) एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं. आज बिहार के मरहौरा प्लांट से 51वां लोकोमोटिव इंजन एक अफ़्रीकी देश को एक्सपोर्ट किया जाएगा." वैष्णव ने बताया कि बिहार में लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली रेल परियोजनाएं पहले से ही चल रही हैं।  पटना रेलवे स्टेशन पर बन रहे हैं 5 नए प्लेटफॉर्म रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने चालू वित्त वर्ष में बिहार में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का रिकॉर्ड रेलवे बजट आवंटित किया है।  उन्होंने बताया कि यात्रियों की क्षमता बढ़ाने के लिए पटना रेलवे स्टेशन पर पांच अतिरिक्त प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं. रेल मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य की राजधानी के पास स्थित फतुहा स्टेशन का भी विकास किया जा रहा है। 

42 हजार से अधिक हितग्राहियों को 2 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की आवास स्वीकृतियां, 38 हजार परिवारों का होगा गृह-प्रवेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल शनिवार, 20 जून को इंदौर जिले के सांवेर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 42 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को 2 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की आवास स्वीकृतियां तथा 38 हजार से अधिक परिवारों को उनके नवीन पक्के आवासों में गृह-प्रवेश कराया जाएगा। साथ ही 2 हजार 935 करोड़ रुपये लागत की 48.10 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर-लेन परियोजना का भूमि-पूजन भी करेंगे। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प तथा सभी पात्र परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक सड़क एवं परिवहन अधोसंरचना के निर्माण के माध्यम से प्रदेश के समग्र विकास को नई गति दे रही है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा विकसित की जा रही यह परियोजना मालवा अंचल की कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। लगभग 48.10 किलोमीटर लंबा यह हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा को अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम बनाएगा। परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (40:60) पर विकसित किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने पर इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश, व्यापार, लॉजिस्टिक्स, कृषि विपणन और धार्मिक पर्यटन को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा। महाकाल की नगरी उज्जैन आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को भी ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के बनने से बेहतर और सुगम आवागमन सुविधा प्राप्त होगी। स्थानीय निवासियों एवं किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परियोजना में 18 अंडर-पास तथा 19 जंक्शन इम्प्रूवमेंट कार्यों का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त वेस्टर्न रिंग रोड तथा उज्जैन-बदनावर मार्ग के साथ ग्रेड सेपरेटेड जंक्शन विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक टोल प्लाजा पर एम्बुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहनों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध हो सके।    

रेल बजट जैसा तोहफा! छपरा-दिल्ली एक्सप्रेस लॉन्च, पटना स्टेशन होगा और आधुनिक

 पटना केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार, 19 जून को बिहार की राजधानी पटना में रेलवे विकास को नई गति देने वाली कई बड़ी घोषणाएं की हैं. रेल मंत्री ने कहा कि बिहार में रेलवे के 1.15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट चल रहे हैं. अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार को रेलवे बजट में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दी गई है. उन्होंने कहा, बिहार में पूरी तरह से रेलवे विकास हो रहा है।  रेल मंत्री ने पटना के हार्डिंग पार्क इलाके में 5 नए प्लेटफॉर्म बनाने का ऐलान किया है. पटना स्टेशन का विस्तार होगा तो रेल क्षमता बढ़ेगी. इससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी और ट्रेनों का आना-जाना सुगम होगा. हार्डिंग पार्क में इस प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है।  रेल मंत्री ने कहा कि छपरा से दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) के लिए नई एक्सप्रेस ट्रेन शुरू की जा रही है. इससे यात्रियों को सीधा और आरामदायक सफर मिलेगा. रेल मंत्री ने बिहार में बने रेल इंजनों की सराहना की।  मढ़ौरा रेल इंजन कारखाने से आज 51वां लोकोमोटिव इंजन निर्यात के लिए रवाना हो रहा है. यह इंजन अफ्रीकी देश गिनी को भेजा जाएगा. वैष्णव ने कहा कि बिहार में बने इंजन अब विदेशों में भी जा रहे हैं, जो राज्य के लिए गर्व की बात है।  रेल मंत्री ने बताया कि बिहार में चल रही सभी रेलवे परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी. केंद्र सरकार बिहार में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. आने वाले समय में और नई सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।  दिल्ली और एनसीआर के यात्रियों को मिलेगी राहत रेल मंत्रालय के अनुसार छपरा और पूर्वी उत्तर प्रदेश से दिल्ली एवं एनसीआर क्षेत्र में रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है। बढ़ती मांग को देखते हुए 12527/12528 छपरा-आनंद विहार टर्मिनस-छपरा साप्ताहिक एक्सप्रेस तथा 14055/14056 मऊ-आनंद विहार टर्मिनस-मऊ एक्सप्रेस को मंजूरी दी गई है। नई सेवाओं से यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा और बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। छपरा-दिल्ली साप्ताहिक एक्सप्रेस का समय 12527 छपरा-आनंद विहार टर्मिनस एक्सप्रेस प्रत्येक रविवार रात 8:50 बजे छपरा से रवाना होकर अगले दिन दोपहर 2:00 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी। वापसी में 12528 आनंद विहार टर्मिनस-छपरा एक्सप्रेस प्रत्येक सोमवार शाम 4:25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 9:40 बजे छपरा पहुंचेगी। इन स्टेशनों पर होगा ठहराव यह ट्रेन बलिया, मऊ, आजमगढ़, शाहगंज, जौनपुर, सुल्तानपुर, लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद स्टेशनों पर रुकेगी। रेलवे के अनुसार उद्घाटन के अवसर पर इन ट्रेनों का संचालन विशेष उद्घाटन गाड़ियों के रूप में किया जाएगा। इससे यात्रियों को नई सेवाओं का लाभ जल्द मिल सकेगा।  

खान सर-रोशन सर विवाद के बीच सरकार का बड़ा कदम, कोचिंग होंगे शिफ्ट

पटना बिहार की राजधानी पटना में बड़े कोचिंग संचालक फैसल खान(खान सर) और रोशन आनंद(रोशन सर) के बीच विवाद के बीच सीएम सम्राट चौधरी ने बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कोचिंग संस्थानों को पटना शहर से अलग जगह दिया जाएगा ताकि, इनका एक जगह पर केंद्र स्थापित हो सके। सीएम ने यह भी कहा कि टाउनशिप के निर्माण से हमारे शहर स्मार्ट होंगे। सभी चीजें व्यवस्थित ढंग से स्थापित होंगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को नगर विकास एवं आवास विभाग की विभिन्न योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम के बाद अपनी बात रख रहे थे। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि पटना के सभी वार्ड में सब्जी हाट का निर्माण करें, जहां पर दूध, सब्जी और मछली आदि की एक जगह पर बिक्री हो। बिहार में सरकारी नौकरी में क्रेडिट की लड़ाई में खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक खान सर और ज्ञान बिन्दु के संचालक रोशन आनंद कुछ ऐसे उलझे कि सड़क पर हंगामा, प्रदर्शन से थाना, कोर्ट, कचहरी और जेल तक पहुंच गया। 4 जून को खान ग्लोबल स्टडीज में तोड़ फोड़ हुई जिसके आरोप में रोशन आनंद को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसी दौरान एक वायरल वीडियो ने खान सर को फायरिंग का आरोपी बना दिया। उनके दो सुरक्षा गार्ड जेल चले गए और फैसल खान पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई। कोर्ट ने भले ही उन्हें गिरफ्तारी से राहत दे दिया हो लेकिन, बेल मिलने के बाद जेल से निकले रोशन आनंद ने फैसल खान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी बीच कोचिंग संस्थानों को लेकर सम्राट सरकार का बड़ा फैसला सामने आया है। नगर विकास विभाग के कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने कहा कि जितनी भी कोचिंग संस्थाएं हैं उनका भी एक ऑर्गनाइज्ड सेंटर होना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में गौरवशाली इतिहास रहा है। जितने भी कोचिंग संस्थाएं पटना शहर में संचालित हैं उन्हें सिटी एरिया से बाहर एक जगह पर होना चाहिए। हमारा आग्रह है कि वे पटना के बाहर चलें। वहां पूरी व्यवस्था बहाल की जाएगी तो ज्यादा से ज्यादा लोग वहां आ पाएंगे। सीएम ने कहा कि सभी लोग सिवरेज कनेक्शन से अपने अपने घरों को जोड़ें ताकि एसटीपी के माध्यम से गंदगी को साफ किया जा सके और गंगा नदी में गंदगी जाने से रोका जा सके। शहरी क्षेत्र में जहां भी सड़क या नाला को तोड़ दिया गया है उन्हें बरसात से पहले ठीक कर लें। बरसात की समाप्ति तक नई योजनाओं की शुरुआत नहीं करें। इससे आम जनों की परेशानी कम होगी। शहर को सुंदर और विकसित बनाने के लिए कुछ फेर बदल करना पड़ेगा। सीएम ने कहा कि पटना से बड़ा एक नया शहर बसाना है। 66 हजार एकड़ में नए पाटलिपुत्रा टाउनशीप में शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई, रोजगार, पानी, बीजली सभी सुविधाएं बहाल की जाएंगी।

रुदौली में जनसभा के दौरान बोले रामभक्तों पर सवाल उठाने वालों का दोहरा चरित्र उजागर

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। रुदौली विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग आज रामभक्तों के अपमान की बात कर रहे हैं, वही पहले राम का नारा लगाने वालों और कारसेवकों पर गोली चलवाते थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के दोहरे चरित्र को जनता भलीभांति जानती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के दोहरे चरित्र को देखो, कहती है कि राम भक्तों का अपमान हुआ है। कारसेवकों और रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले लोग उपदेश देने चले हैं। हमने ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी जांच बैठाई। एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी। मैं सभी से कहूंगा कि कोई भी अनर्गल टिप्पणी न करें, जो रामभक्तों को आहत करे सपा-कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी योगी कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए 500 वर्षों तक संघर्ष किया गया है। कांग्रेस ने मंदिर निर्माण रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था और सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम के अस्तित्व तक पर सवाल उठाए गए थे। आज वही लोग अयोध्या और रामभक्तों की चिंता जताने का दिखावा कर रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। उन्होंने कहा कि एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। अगर किसी के पास चंदा या चढ़ावा चोरी से संबंधित कोई सबूत है तो वह जांच एजेंसी को सौंपे। जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और अगर कोई दोषी पाया जाता है तो वह किसी भी कीमत पर नहीं बचेगा। अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आए- योगी उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि जांच रिपोर्ट आने तक अनर्गल बयानबाजी से बचें और किसी के चरित्र हनन का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि अयोध्या और रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाने वाली बातें नहीं होनी चाहिए। जनता को भी ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए जो अयोध्या को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर बन न पाए, इसके लिए कांग्रेस ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट में बेशर्मी के साथ कहा था कि राम तो हुए ही नहीं। वही कांग्रेस आज अयोध्या पर बहुत मचल रही है। कह रही है कि रामभक्तों का अपमान हुआ। झलकारी बाई की 22 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण इससे पहले मुख्यमंत्री ने मां कामाख्या धाम में पूजा-अर्चना की। उन्होंने राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का लोकार्पण किया और वीरांगना झलकारी बाई की 22 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। साथ ही 378 करोड़ रुपये से अधिक की 126 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

274 राजस्व गांवों और 6 वार्डों में विकास कार्यों पर अस्थायी रोक, सुनियोजित टाउनशिप पर जोर

 पटना  पटना के निकट प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप पाटलिपुत्र क्षेत्र में जमीन मालिकों को भी विशेष परिस्थितियों में राहत मिलेगी। जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और लीज की अनुमति दी गई है। शहरी क्षेत्र की जमीन के लिए मालिकों को बाजार मूल्य या एमवीआर का दो गुना भुगतान मिलेगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि के लिए यह राशि बाजार मूल्य या MVR के चार गुना के बराबर होगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि के लिए तय मुआवजा राशि पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। पुनपुन नपं के छह वार्डाें की जमीन के लिए एमवीआर से दो गुना भुगतान इस व्यवस्था का लाभ पटना जिले के नौ प्रखंडों के 274 राजस्व गांवों को मिलेगा। इनमें दनियावां, धनरुआ, फतुहा, मसौढ़ी, नौबतपुर, पटना ग्रामीण, फुलवारी, पुनपुन और संपतचक प्रखंड शामिल हैं। वहीं पुनपुन नगर पंचायत के छह वार्डों की जमीन के लिए एमवीआर से दो गुना भुगतान का प्रावधान किया गया है। पटना मास्टर प्लान-2031 के तहत जोनल प्लान तैयार करने के उद्देश्य से इन 274 राजस्व गांवों और पुनपुन नगर पंचायत के छह वार्डों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, विकास और भवन निर्माण संबंधी कार्यों पर तत्काल प्रभाव से 30 मार्च 2027 तक रोक लगाई गई है ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में नौ प्रखंड के 274 गांव व 6 वार्ड यह फैसला ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के सुनियोजित विकास और भविष्य की आधारभूत संरचना को ध्यान में रखकर लिया गया है। जोनल प्लान तैयार होने के बाद आगे की विकास योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। परियोजना में सबसे अधिक 85 राजस्व गांव पुनपुन प्रखंड से शामिल किए गए हैं। इसके अलावा फतुहा के 70, नौबतपुर के 49, धनरुआ के 24, मसौढ़ी के 14, संपतचक के 10, दनियावां और फुलवारी के आठ-आठ तथा पटना ग्रामीण के छह राजस्व गांव इस योजना का हिस्सा होंगे।

डिजिटलीकरण, क्षमता विस्तार और सुस्थिर खनन पहलों की समीक्षा की

हैदराबाद  एनएमडीसी के वरिष्ठ प्रबंधन ने दोणिमलै कॉम्प्लेक्स की हाल ही में हुई एक यात्रा के दौरान परिचालन दक्षता को मजबूत करने, जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने और कर्मचारियों तथा आसपास के समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से कई रणनीतिक पहलों की समीक्षा की । इस दौरे से प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने का अवसर मिला, जो दोणिमलै को भविष्य के लिए तैयार खनन परिसर में बदलने में मदद कर रही हैं । साथ ही, एनएमडीसी को भारत के सबसे बड़े और जिम्मेदार लौह अयस्क उत्पादक के रूप में सुस्थापित करती है । इस यात्रा के दौरान प्रबंधन ने कुमारस्वामी खदान से 10 एमटीपीए और दोणिमलै परिसर से 17 एमटीपीए के उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से चल रही क्षमता-विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास की पहलों की समीक्षा की । इन पहलों से एनएमडीसी के 100 एमटीपीए खनन कंपनी बनने के विजन में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है । प्रबंधन ने 35% तक Fe युक्त लौह अयस्क, लौह अयस्क स्लाइम्स और निम्न श्रेणी के लौह-युक्त पदार्थों जैसे बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (बीएचजे) और बैंडेड हेमेटाइट क्वार्ट्जाइट (बीएचक्यू) के उपयोग के लिए पहलों की भी समीक्षा की । परंपरागत रूप से, इन संसाधनों का सीमित उपयोग किया जाता था और मूल्यवान लौह सामग्री होने के बावजूद इन्हें अपशिष्ट के रूप में माना जाता था । लाभकारी और वैज्ञानिक खनिज प्रसंस्करण के माध्यम से, एनएमडीसी इन कम उपयोग किए गए संसाधनों को मूल्यवान कच्चे माल में बदल रहा है, मौजूदा खदानों से अधिक लौह अयस्क को पुनः प्राप्त कर रहा है, जबकि अपशिष्ट उत्पादन को कम कर रहा है । यह पहल खनन की सुस्थिर प्रथाओं का समर्थन करती है, खनिज संरक्षण में सुधार करती है, खनन कार्यों के पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करती है और भारत के इस्पात क्षेत्र की कच्ची सामग्री की बढ़ती आवश्यकताओं में योगदान करती है । कुमारस्वामी खदान में नई लागू की गई स्वचालित गेट प्रबंधन प्रणाली दौरे के दौरान समीक्षा का एक अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु था । डिजिटल प्रणाली ने रियल टाइम निगरानी और सामग्री की आवाजाही के सत्यापन को सक्षम बनाकर लौह अयस्क प्रेषण में पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत बनाया  है । यह पहल यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि खनिज संसाधनों को उनके इच्छित गंतव्यों तक सुरक्षित रूप से पहुँचाया जाए, साथ ही मैनुअल हस्तक्षेप को कम किया जाए और परिचालन संबंधी निगरानी में सुधार लाया जाए । एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कार्यपालक निदेशकों के साथ मिलकर हाल ही में विकसित बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें हाई-राइज टावर शामिल हैं, जो कर्मचारी कल्याण और सामुदायिक विकास के प्रति एनएमडीसी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता  है । भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में, एनएमडीसी का मानना है कि सतत विकास उत्पादन लक्ष्यों से परे होता है और इसमें कर्मचारियों के लिए बेहतर जीवन-स्तर बनाना, स्थानीय समुदायों का समर्थन करना और पर्यावरण प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित रखना शामिल है । इस अवसर पर बोलते हुए, एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा, "हमारा दृष्टिकोण ऐसे खनन संचालन का निर्माण करना है, जिस पर भावी पीढ़िया गर्व कर सकें । भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में, हम दोणिमलै को एक मॉडल खनन परिसर बनाने की आकांक्षा रखते हैं, जो जिम्मेदार खनन, नवाचार और कर्मचारी कल्याण के उच्चतम मानकों को दर्शाता है । जैसे-जैसे एनएमडीसी अपने 100 एमटीपीए विजन की ओर बढ़ रहा है, हम भारत के इस्पात उद्योग को उच्च-गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध हैं । साथ ही, हम प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से हर संसाधन के मूल्य को अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, यहां तक कि निम्न श्रेणी के अयस्क को उत्पादक परिसंपत्तियों में बदल रहे हैं, साथ ही सुस्थिर और जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा दे रहे    हैं ।

19 जून से 5 जुलाई तक तबादलों की मंजूरी, सभी विभागों में प्रक्रिया तेज

जयपुर राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर लगा बैन हट गया है. सरकार ने 16 दिनों के लिए ट्रांसफर विंडो खोली है. प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने आदेश जारी कर 19 जून से ट्रांसफर-पोस्टिंग की अनुमति दी है. इसके साथ ही लंबे समय से बैन हटने का इंतजार कर रहे कर्मचारियों और अधिकारियों को राहत मिली है. आदेश के मुताबिक, तबादलों की अनुमति 5 जुलाई तक रहेगी. इस दौरान सभी विभाग अपने स्तर पर तबादला प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. अब तेज होगी ट्रांसफर की प्रक्रिया सरकार ने 16 दिनों के लिए ट्रांसफर विंडो खोली है. ऐसे में आदेश जारी होने के साथ ही तबादलों को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है. अब विभिन्न विभागों में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तबादलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है. यह आदेश राज्य के सभी विभागों के साथ-साथ निगमों, मंडलों, बोर्डों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू होगा. चिकित्सा विभाग में बैन, थर्ड ग्रेड टीचर्स का इंतजार लंबा हालांकि, थर्ड ग्रेड टीचर्स को अभी लंबा इंतजार करना होगा. इस बार भी शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी वेतन श्रृंखला के अध्यापकों को तबादलों की प्रक्रिया से बाहर रखा गया है. इसके अलावा संभावित वर्षाकाल को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों पर तबादला प्रतिबंध अगले आदेश तक यथावत रहेगा. इन कर्मचारियों को दी जाएगी प्राथमिकता सरकार के आदेश में यह भी कहा गया है कि तबादलों में एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, मेडिकल बोर्ड या सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े और किडनी सहित अन्य प्राणघातक रोगों से पीड़ित कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके साथ ही दिव्यांग कर्मचारी, दीर्घावधि सेवा वाले कर्मचारी तथा राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामलों को भी प्राथमिकता मिलेगी.