samacharsecretary.com

930 कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र, योगी बोले—2017 से पहले यूपी में अराजकता का माहौल था

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को पुलिस विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्त हुए युवाओं को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र बांटा। इस मौके पर यूपी पुलिस में किए गए रिफार्म के बारे में खुलकर बात की। 2017 के पहले और अब हुए बदलावों पर चर्चा की। पुलिस कमिश्नरेट के फायदे गिनाएं और इस व्यवस्था पर ऊंगली उठाने वालों पर निशाना साधा। यहां तक कहा कि आईपीएस को आईएएस ऐसा दबाते थे कि फाइलें बंद हो जाएं तो खुलती नहीं थीं। हंसते हुए कहा कि यमराज भी आ जाएं तो फाइलें नहीं मिल पाती थीं। दरअसल पुलिस कमिश्नरेट बनने से आईएएस अधिकारियों के पास से तमाम अधिकार आईपीएस अफसरों के पास चले गए हैं। यूपी में जब पुलिस कमिश्नरेट बनना शुरू हुआ तो आईएएस एसोसिएशन ने सबसे पहले फैसले का विरोध किया था। सीएम योगी इसी की चर्चा कर रहे थे। योगी ने कहा कि कमिश्नरेट सिस्टम 1972 से चला आ रहा है लेकिन इसे लागू करने की हिम्मत कोई नहीं ले पा रहे था। आईपीएस को आईएएस ऐसा दबाते थे कि एक बार फाइल बंद हो जाए तो खुलती ही नहीं थी। यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं खुल पाती थी। पता नहीं कहां वो फाइल पड़ी रहती थी। हमने हिम्मत दिखाई और सात जनपदों में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू कर दिया। सीएम योगी ने कहा कि पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम पुलिस रिफार्म का ही पार्ट है। जिन्हें पुलिस रिफार्म की जानकारी नहीं है वह पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम पर उंगली उठाते हैं। जिन्हें पुलिसिंग की जानकारी नहीं वह इस सिस्टम का विरोध करते हैं। विरोध करने वाले वह लोग हैं जिन्हें सुविधाओं की जानकारी ही नहीं है। जब आप कोई कदम उठाएंगे तो आलोचना होगी। 2017 से पहले पुलिस भी सुरक्षित नहीं थी कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र देने के बाद उन्हें संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले पुलिस भी सुरक्षित नहीं थी। प्रदेश में हर दूसरे-तीसरे दिन दंगा होता था। महीनों-महीनों कर्फ्यू लगता था। हर उत्सव से पहले उपद्रव होने लगते थे। मुरादाबाद में डीआईजी स्तर के अधिकारी को घेरकर मारा था। उपद्रवी उन्हें मरा हुआ समझकर चले गए थे। जब आईपीएस स्तर का पुलिस अधिकारी ही सुरक्षित नहीं है तो कैसे अनुमान कर सकते हैं कि एक सामान्य नागरिक, एक महिला, एक बेटी, एक व्यापारी सुरक्षित रहता होगा। यूपी जैसे राज्य के लिए सुशासन की लोगों ने कल्पना करना बंद कर दिया था। लोगों को लगता था कि सुधार नहीं हो सकता है। डीआईजी पर हमला करने वाले अपराधियों को बचाने के लिए तमाम राजनीतिक दबाव पड़ रहे थे। उन सभी लोगों को कुछ समय पहले सजा हुई है। ऐसी सजा हुई कि आने वाली पीढ़िया अपराध भूल जाएंगी। आज सबसे ऊंची बिल्डिंग में पुलिस बैरक सीएम योगी ने कहा कि हमने इंफ्रास्ट्रचर विकसित किया है। जिन पुलिस वालों के भरोसे हम लोग सुरक्षा की गारंटी देना चाहते हैं, उनका ही कुछ ठिकाना नहीं था। टूटे हुए बैरक में पुलिस वालों को रहना पड़ता था। आज आप देखिए 56 जिले ऐसे हैं जहां सबसे ऊंची कोई बिल्डिंग है तो वह पुलिस की बैरक होगी। यूपी में अब पुलिस सबसे टॉप पर चल रही है। यह बताता है कि प्रदेश अब दौड़ रहा है। पहले पुलिस की भर्ती होती थी तो ट्रेनिंग के लिए मिलिट्री, पैरा मिलिट्री और दूसरे राज्यों के ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण लेना होता था। अब अपने यहां ही ट्रेनिंग हो रही है। अब यूपी में ही होती है पुलिस की ट्रेनिंग 2017 में हमने सबसे पहले पुलिस की रिक्तियां मंगाई। पता चला कि लाखों पद खाली हैं। पूछा क्यों खाली हैं तो पता चला कि कोर्ट में मामला फंसा है। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक फंसा हुआ था। कोर्ट से आदेश लिया गया और भर्ती प्रक्रिया शुरू कराई गई। इसके बाद ट्रेनिंग की क्षमता बढ़ाई गई। 60 हजार की भर्ती के बाद ट्रेनिंग भी अब यूपी में ही कराई गई है। पहले 17 हजार की ट्रेनिंग की व्यवस्था थी, इसे 60 हजार की हो गई है। यह स्पीड है, इसी स्पीड से चलेंगे तो परिणाम आएगा। अब कोई सिफारिश नहीं, कोई भेदभाव नहीं 930 कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र देते हुए सीएम योगी ने बताया कि पिछले दिनों पुलिस आरक्षी के लिए परीक्षा संपन्न हुई है। उससे पहले होमगार्ड्स के लिए परीक्षा हुई। उससे पहले सवा दो लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई है। सब कुछ पारदर्शी तरीके से हुआ। कोई सिफारिश नहीं, कोई भेदभाव नहीं हुआ है। सीएम योगी ने कहा कि 75 जिलों और 25 करोड़ की आबादी वाले राज्य में केवल चार फारेंसिंक लैब थे। अब 25 लैब हमारे पास हैं। हर जनपद में मोबाइल फोरेंसिंक लैब भी मौजूद है। साइबर पुलिस का एक थाना था, आज सभी जिलों में साइबर थाना है और हर थाने में साइबर डेस्क है। यह सब प्रयास करने से होता है। यूपी पुलिस ने समय का प्रयोग किया। आज यूपी पुलिस पर कोई ऊंगली नहीं उठा सकता है। नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी सीएम योगी ने कहा कि पहले यूपी में नौकरी नहीं थी। यूपी के बाहर जाने पर पहचान का संकट था। बोल ही नहीं सकते थे कि यूपी का रहने वाला हूं। अब बाहर भी जाने पर कोई मना नहीं कर सकता है। लोगों का नजरिया बदल गया है। नौ साल में नौ लाख से ज्यादा सरकारी नौकरी दी गई है। प्रदेश में निवेश का माहौल बना है। उसके पीछे सुरक्षा ही है। आज 32 हजार बड़े कारखाने हैं और 96 लाख एमएसएमई हैं। यूपी के युवा को यूपी में रोजगार मिल रहा है। अब दंगा नहीं होता, कर्फ्यू नहीं लगता है।

प्रिंस यादव मौत मामले में जांच तेज, खान सर पर एफआईआर की मांग उठी

 पटना फैजल खान उर्फ खान सर और और रौशन आनंद सर के बीच विवाद अभी थमने वाला नहीं बल्कि ऐसा लगता है कि यह पूरा विवाद और भी बड़ा रूप लेने वाला है। अब रौशन आनंद सर के वकील निरंजन कुमार सिंह ने कहा है कि वो रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की मौत के मामले में हत्या का केस खान सर पर दर्ज करवाएंगे। निरंजन कुमार सिंह ने कहा है कि इस मामले में वो ना सिर्फ खान सर पर मर्डर का केस दर्ज करवाएंगे बल्कि सीबीआई जांच की मांग भी करेंगे। बता दें कि रौशन आनंद सर के जेल में रहने के दौरान नेपाल में उनके छोटे भाई प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत हो गई थी। रौशन आनंद सर ने पहले भी खान सर पर हत्या का आरोप लगाया था। मीडिया से बातचीत में निरंजन कुमार सिंह ने कहा, 'चूकि यह भी आईने की तरफ साफ है कि एक केस में रौशन आनंद को आरोपी बनाया जाता है। जिस केस में धारा 109 कहीं से नहीं लगना था लेकिन जबरदस्ती उस केस को गंभीर बनाने के लिए 109 को लाया गया। दूसरा केस, रियल पिक्चर के आधार पर दर्ज होता है। यह केस खान सर पर दर्ज किया जाता है। उसी दिन खान सर का बयान भी आता है लेकिन फिर भी उनकी गिरफ्तारी नहीं होती है। किसी तरह से उन्होंने कोर्ट में जाकर अंतरिम राहत मिली है। अगर रौशन आनंद के भाई की हत्या के आरोप में खान सर पर सरकार द्वारा स्वत: संज्ञान नहीं लिया जाता है और उनपर केस दर्ज नहीं किया जाता है तो हमलोग हत्या के आरोप के अंतर्गत खान सर पर एफआईआर दर्ज करवाएंगे। निरंजन कुमार सिंह ने कहा कि रौशन आनंद सर का परमानेंट बेल हुआ है। इनका तो जेल जाना ही अपने आप में एक अन्याय था। वो बिल्कुल निर्दोष हैं। उनको कुछ पता तक नहीं है और उस इंसान को जेल के पीछे डाल दिया गया। इधर जिसने साजिश रच कर यह संगठित अपराध किया और साजिश पर साजिश रची और भाई की खोने की वजह भी बना वो बाहर है। प्रिंस यादव की मौत की जारी है जांच बहरहाल आपको बता दें कि पटना के चर्चित ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान से जुड़े प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत मामले में नेपाल पुलिस की जांच लगातार जारी है। मामले को लेकर पुलिस ने मृतक के साथ होटल में ठहरे चार भारतीय नागरिकों से पूछताछ भी की है, जबकि एक नेपाली नागरिक को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपस्थित होने की शर्त पर रिहा कर दिया गया है। मामले की जानकारी देते हुए पुलिस प्रवक्ता डीएसपी मर्केंद्र कुमार मिश्र ने बताया था कि घटना के कारणों का स्पष्ट खुलासा अभी नहीं हो सका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो पाएगी। इधर हिरासत में लिए गए सभी व्यक्तियों के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाने के लिए भारतीय पुलिस से भी संपर्क कर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस के अनुसार मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्यों से पर्दा उठने की संभावना है। फिलहाल जांच पूरी होने तक पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।

अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गैंग पर पुलिस का शिकंजा, चंडीगढ़ से 3 आरोपी दबोचे गए

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में एक्टिव अपराधियों तक अवैध हथियार पहुंचाने वाले एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का चंडीगढ़ पुलिस की ऑपरेशन सेल ने भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से एक पिस्टल, दो देसी कट्टे और दो जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी स्थानीय अपराधियों को जरूरत पड़ने पर हथियार और अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध करवाते थे। तीन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मौलीजागरां निवासी अभियास यादव (23), डीएमसी कॉलोनी निवासी विकास उर्फ बट्टी (20) और मनीमाजरा निवासी तैयब उर्फ चेतन (20) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार तीनों के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। गुप्त सूचना के बाद शुरू हुई कार्रवाई यूटी पुलिस की ओर से असामाजिक तत्वों, वांछित अपराधियों और गैंगस्टरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान ऑपरेशन सेल को सूचना मिली थी कि कुछ युवक अवैध हथियारों की सप्लाई कर रहे हैं और स्थानीय अपराधियों को वारदातों के लिए हथियार उपलब्ध करवा रहे हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी और तकनीकी व स्थानीय स्तर पर जांच शुरू की। पहले आरोपी से मिली पिस्टल और कारतूस जांच के दौरान 8 जून को ऑपरेशन सेल की टीम ने बीएसएनएल मोड़ फेज-2 के पास एक संदिग्ध युवक को रोका। तलाशी लेने पर उसके कब्जे से एक देशी पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए। आरोपी की पहचान अभियास यादव के रूप में हुई। उसके खिलाफ सेक्टर-31 थाना में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ और पुलिस रिमांड के दौरान उसने अपने अन्य साथियों के बारे में अहम जानकारी दी। पूछताछ में सामने आए दो और नाम अभियास यादव से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने 10 जून को सेक्टर-43 स्थित सीटीयू वर्कशॉप के पीछे से विकास उर्फ बट्टी को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से एक देसी कट्टा बरामद हुआ। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो तीसरे आरोपी तैयब उर्फ चेतन का नाम सामने आया। पुलिस ने 15 जून को किशनगढ़ चौक के पास स्लिप रोड से उसे गिरफ्तार किया और तलाशी के दौरान उसके पास से भी एक देसी कट्टा बरामद किया। अपराधियों तक पहुंचाए जा रहे थे हथियार प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े हुए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार कहां से लाए गए और इन्हें किन अपराधियों तक पहुंचाया जाना था। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो इन हथियारों का इस्तेमाल किसी बड़ी आपराधिक वारदात में किया जा सकता था। आरोपियों का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी अभियास यादव के खिलाफ पंचकूला, चंडीगढ़ और मोहाली में हत्या के प्रयास, मारपीट, अपहरण, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के करीब 19 मामले दर्ज हैं। वहीं विकास उर्फ बट्टी के खिलाफ हत्या के प्रयास, दंगा, धमकी और आर्म्स एक्ट से जुड़े आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। तीसरे आरोपी तैयब उर्फ चेतन के खिलाफ भी लूट और चोरी के कई मामले दर्ज बताए गए हैं। नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने में जुटी पुलिस फिलहाल पुलिस आरोपियों के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि हथियार सप्लाई चेन में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इनके संभावित गैंग कनेक्शन क्या हैं और इन हथियारों का इस्तेमाल किन वारदातों में किया जाना था। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

खालिस्तान नेशनल आर्मी के नाम से धमकी भरा मेल, दिल्ली जाने वाली ट्रेन में धमाके की चेतावनी

लुधियाना  महानगर में एक बार फिर बम धमाके की धमकी मिलने से सनसनी फैल गई है। बुधवार को नगर निगम (MC) और डिप्टी कमिश्नर (DC) दफ्तर की आधिकारिक ईमेल आई.डी. पर आए एक धमकी भरे मेल के बाद प्रशासनिक हलकों और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस बार शातिर ईमेल भेजने वाले ने किसी लावारिस बैग या टाइमर बम की नहीं, बल्कि 'ह्यूमन बम' (मानव बम) के जरिए इन दफ्तरों को उड़ाने की खौफनाक धमकी दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईमेल भेजने वाले सिरफिरे ने लुधियाना मेयर के दफ्तर, नगर निगम कार्यालय, डी.सी. दफ्तर और शहर के व्यस्त रेलवे ट्रैक पर बम धमाके करने की चेतावनी दी है। जैसे ही इसकी भनक उच्च अधिकारियों को लगी, तुरंत पुलिस के आला अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं। चंडीगढ़ और दिल्ली तक की खुफिया एजेंसियां अलर्ट, खंगाले जा रहे डिजिटल फुटप्रिंट्स  धमकी भरे ईमेल की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम की टीमें और देश की खुफिया एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गई हैं। इस मेल के ओरिजिन (कहाँ से भेजा गया) का पता लगाने और भेजने वाले शातिर को बेनकाब करने के लिए हाई-लेवल जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी पहलुओं, आई.पी. एड्रेस (IP Address) और डिजिटल फुटप्रिंट्स की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके। सर्च ऑपरेशन में नहीं मिला कुछ संदिग्ध, एडिशनल DCP बोले- घबराएं नहीं  मामले की पुष्टि करते हुए एडिशनल डी.सी.पी. (ADCP) देव सिंह ने बताया कि बम की धमकी वाला ईमेल मिलने की सूचना मिलते ही पुलिस की विशेष टीमों और बम निरोधक दस्ते ने तुरंत दोनों दफ्तरों के परिसरों की सघन चेकिंग की। पूरे इलाके को खंगालने के बाद पुलिस को वहां कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ है। उन्होंने जनता से अपील की है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। मेल आने के बाद पुलिस व प्रशासन ने डीसी दफ्तर, नगर निगम दफ्तर में हर आने जाने वाले पर नजर रखनी शुरू कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की मेल पहले भी आई थी। हालांकि तब भी कुछ नहीं निकला था। फिर भी प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। जानकारी के अनुसार प्रशासन को 17 जून 2026 को सुबह करीब 9:34 बजे मेल मिली। ईमेल भेजने वाले ने खुद को खालिस्तान नेशनल आर्मी' का सदस्य बताया है। ईमेल में बेहद आपत्तिजनक और डराने वाली बातें लिखी गई हैं। इस ईमेल के बाद लुधियाना मेयर दफ्तर, डीसी कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुट गई है कि यह ईमेल कहाँ से जनरेट हुआ है और इसके पीछे किसी शरारती तत्व का हाथ है या वाकई कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। प्रशासन को मिली मेल में लिखी अहम बातें… मेयर और DC ऑफिस पर फिदायीन हमला: आज दोपहर 1:11 बजे लुधियाना मेयर और डीसी ऑफिस को 'मानव बम' से उड़ाने की धमकी दी गई थी। CM भगवंत मान को निशाना बनाने का दावा: ईमेल में लिखा गया है कि 2027 तक पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर पूर्व सीएम बेअंत सिंह की तरह आत्मघाती हमला किया जाएगा। रेलवे ट्रैक और आम जनता को चेतावनी: ईमेल में साफ लिखा गया है कि 18 जून से 30 सितंबर के बीच अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला के रेलवे ट्रैक को निशाना बनाया जाएगा। भेजने वाले ने खुलेआम चेतावनी दी है अपने बच्चे बचाओ, कोई भी 18 जून से 30 सितंबर के बीच दिल्ली वाली रेल से सफर न करे। गृह मंत्री अमित शाह को धमकी: ईमेल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाने और हरदीप सिंह निज्जर की मौत का बदला लेने की बात भी कही गई है। पहले भी आ चुकी हैं फर्जी धमकियां, सिंगर दिलजीत दोसांझ का घर भी था निशाने पर  काबिलेगौर है कि लुधियाना में बम धमाकों की धमकी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे करीब तीन हफ्ते पहले भी एक ऐसा ही फर्जी ईमेल आया था, जिसमें लुधियाना के मेयर दफ्तर और मशहूर पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ के घर को बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, लुधियाना में पिछले समय के दौरान आए ऐसे सभी बम थ्रेट ईमेल महज एक 'होक्स' (अफ़वाह या फर्जी कॉल) ही साबित हुए हैं। पुलिस का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व का काम है, जिसे जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

धान घोटाले की फाइल ठंडे बस्ते में? रडार पर आए 30 आरोपियों पर अब तक नहीं हुआ एक्शन

यमुना नगर. 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले के खुलासे के बाद 237 दिन बीत चुके हैं, पर जांच अभी भी धीमी गति से चल रही है। पांच थाना प्रभारियों की एसआइटी गठित होने के बावजूद कार्रवाई तीन आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित है। जांच के दौरान 30 से ज्यादा अधिकारी, कर्मचारी व अन्य लोगों के नाम सामने आ चुके हैं, पर अभी भी कई आरोपित पकड़ से बाहर हैं। घोटाले के मुख्य आरोपित छछरौली निवासी राइस मिलर संदीप सिंगला को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। मामले की सुनवाई 27 जुलाई को होगी। गिरफ्तारी नहीं होने से जांच टीम पर भी सवाल उठने लगे हैं। संदीप सिंगला को दो दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उसे तीन चरणों में 18 दिन तक एसआइटी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। पूछताछ में सामने आया था कि उसके नियंत्रण में सात राइस मिलें हैं, जिनमें पांच पुरानी व दो नई हैं। पुलिस ने संदीप सिंगला व रीतिका सिंगला के खिलाफ तीन थानों में केस दर्ज किए थे। पावर आफ अटार्नी संदीप के नाम होने के कारण रितिका को राहत मिल गई थी। पूछताछ में 30 से ज्यादा अधिकारी व कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। जांच प्रभावित न हो। इसलिए पुलिस ने नाम सार्वजनिक नहीं किए। नाम होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है। महानिदेशक की जांच में घोटाले का खुलासा जांच में सामने आई गड़बड़ियों के बाद मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण, मंडी गेट पास, मिल आवंटन, स्टाक सत्यापन व सरकारी रिकार्ड की जांच की थी। आरोप है कि नियमों के विपरीत कम धान की खरीद दिखाकर स्टाक में हेराफेरी की गई और सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। 13 नवंबर को खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह की जांच में घोटाले का खुलासा हुआ था। जांच में धान के स्टाक और रिकार्ड में भारी अनियमितताएं सामने आने के बाद विशेष जांच दल का गठन किया गया था। इसमें पांच थाना प्रभारी शामिल किए गए थे, पर इसके बाद भी जांच की रफ्तार तेज नहीं हो सकी। मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां जांच में फर्जी गेट पास व दस्तावेजों के माध्यम से स्टाक में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की बात सामने आई थी। जांच के दौरान 30 से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के नाम सामने आए थे, लेकिन पुलिस ने इनके नाम सार्वजनिक नहीं किए। अब तक मामले में तीन ही गिरफ्तारियां हुई हैं। संदीप सिंगला के अलावा एसआइटी द्वारा हैफेड के सीनियर मैनेजर शैलेंद्र कुमार व परचेज मैनेजर अनिल कुमार को गिरफ्तार किया था। बर्खास्तगी के आगे नहीं बढ़ा जांच दायरा प्रशासनिक स्तर पर इंस्पेक्टर मनोज यादव, सविता, विनोद कुमार व एएफएसओ देवेंद्र कुमार को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। बावजूद इसके जांच अभी उन्हीं बिंदुओं तक सीमित है। कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अब तक सामने नहीं आए हैं। प्रतापनगर में एक ही परिसर में चार लाइसेंस जारी होने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नियमानुसार एक स्थान पर एक लाइसेंस दिया जा सकता है, जबकि वहां एक से अधिक लाइसेंस संचालित पाए गए। अदालत ने हैफेड व खाद्य आपूर्ति विभाग को तीन माह में एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे, पर समय सीमा बीत चुकी है। कोर्ट ने कहा था कि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल औपचारिक रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होगी। रणजीतपुर में एक ही स्थान पर दो राइस मिल चल रही थी। हैफेड व खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से मिल में धान भेजा गया था। घोटाले के बाद बचे धान पर दोनों विभागों ने अपना दावा किया था। बाद में कोर्ट के आदेश पर दोनों विभागों को 50-50 प्रतिशत धान उठाने की अनुमति दी थी। हैफेड ने अपना हिस्सा उठा लिया, पर डीएफएससी की ओर से धान उठाने में देरी की। जिस कारण काफी धान खराब भी हुआ। वहीं जगाधरी डीएसपी राजीव मिगलानी का कहना है कि इस मामले में जांच जारी है, इसमें अभी कुछ नया सामने नहीं आया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई निश्चित तौर पर होगी।

बस की छत पर रखी साइकिल बनी जानलेवा, 11 हजार वोल्ट करंट से नालंदा में दर्दनाक हादसा

 नालंदा बिहार के नालंदा जिले में बड़ा हादसा हो गया है। यहां पावापुरी थाना क्षेत्र के शमवशरण मंदिर के समीप बुधवार को एक दर्दनाक हादसे में मजदूरों से भरी एक यात्री बस 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन बिजली तार की चपेट में आ गई। हादसे में करंट लगने से एक दंपती की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को इलाज के लिए पावापुरी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां पांच लोगों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। बस पर करीब 60 मजदूर सवार थे। सभी नरकटिया से ईंट-भट्ठे पर काम करने के बाद अपने गांव घोसरावां लौट रहे थे। बस की छत पर एक साइकिल भी रखी गई थी। शमवशरण मंदिर के पास पहुंचते ही साइकिल ऊपर से गुजर रहे 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन बिजली तार के संपर्क में आ गई। साइकिल के तार से छूते ही पूरी बस में करंट दौड़ गया, जिससे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। हादसा इतना भयावह था कि बस में सवार लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। करंट की चपेट में आने से रुदल मांझी और उनकी पत्नी फूलो देवी की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों रिश्ते में पति-पत्नी थे और मजदूरी कर अपने घर लौट रहे थे। वहीं आठ अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को बस से बाहर निकाला और इलाज के लिए पावापुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। घायलों में , पुटूस कुमारी , रिंकू देवी, करु मांझी, संतोष मांझी, पवन मांझी, सरोज देवी, धर्मेंद्र मांझी और राजकुमार मांझी शामिल हैं। सभी घायलों का इलाज पावापुरी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चल रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पावापुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल भेज दिया। वहीं घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। पावापुरी थानाध्यक्ष गौरव कुमार सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में बस की छत पर रखा साइकिल हाईटेंशन तार के संपर्क में आने से हादसा होने की बात सामने आई है। बस में सवार सभी लोग ईंट-भट्ठे में मजदूरी का कार्य कर अपने गांव लौट रहे थे।

Holiday Alert: 18 जून को चंडीगढ़ में सार्वजनिक अवकाश घोषित, प्रशासन ने जारी किए आदेश

चंडीगढ़  चंडीगढ़ प्रशासन ने कल यानी 18 जून (गुरुवार) को सरकारी छुट्टी की घोषणा की है। यह फैसला श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर लिया गया है। प्रशासन के गृह विभाग ने बुधवार को इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। पहले प्रतिबंधित अवकाश था जारी अधिसूचना के मुताबिक, पहले इस दिन चंडीगढ़ प्रशासन के कैलेंडर वर्ष 2026 में ‘प्रतिबंधित अवकाश’ घोषित किया गया था। अब पुराने आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए इसे पूर्ण 'सार्वजनिक अवकाश' घोषित कर दिया गया है। इन जगहों पर रहेगा अवकाश प्रशासन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि इस दौरान सरकारी कार्यालय, बोर्ड और कॉर्पोरेशन,सरकारी संस्थान, औद्योगिक प्रतिष्ठान पूरी तरह से बंद रहेंगे। गृह सचिव दिप्रावा लाकरा की तरफ से यह आदेश जारी किए गए है।  

शिक्षा विभाग का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, पंजाब में 16 प्राचार्यों और अधिकारियों को मिली नई तैनाती

चंडीगढ़. चंडीगढ़ प्रशासन के डायरेक्टरेट ऑफ स्कूल एजुकेशन (DSC) ने गर्मी की छुट्टियों में सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक काम को आसान बनाने के मकसद से प्रिंसिपल, हेड टीचर और ऑफिसर इन इंचार्ज के बड़े पैमाने पर ट्रांसफर और एडजस्टमेंट के ऑर्डर जारी किए हैं। ये ऑर्डर तुरंत लागू हो गए हैं। स्कूल एजुकेशन डायरेक्टर नीतीश सिंगला, PCS द्वारा जारी ऑर्डर के मुताबिक, कुल 16 अधिकारियों का ट्रांसफर और एडजस्टमेंट किया गया है। ट्रांसफर – राजिंदर सिंह को GMHS-46 से GMHS खुदा जस्सू में ट्रांसफर किया गया। विवेक गुप्ता को GMHS-31C से GMHS मलोआ कॉलोनी में ट्रांसफर किया गया। मंजुला खन्ना को GMHS-29A से GMHS विकास नगर, मौली जागरण में ट्रांसफर किया गया। श्याम लाल को GMHS-28 से GMHS माखन माजरा में ट्रांसफर किया गया।  नवदीप कौर को GMHS-42 से GMHS दरिया में पोस्ट किया गया। सुमन जायसवाल को GMHS-53 से GMHS कजहेड़ी में ट्रांसफर किया गया। मनमोहन सिंह को GMHS-20D से GMHS मौली जागरण में पोस्ट किया गया। इंदु को GMHS-50 से GMHS पॉकेट नंबर 8, मनीमाजरा में ट्रांसफर किया गया। सुनीता खुराना को GMHS-47 से GMHS मलोआ में पोस्ट किया गया। तेजवीर कौर को GMHS मलोआ से GMHS-36 में पोस्ट किया गया। इंचार्ज ऑफिसर्स की जिम्मेदारियां भी बदली गई हैं। इसके अलावा, मीनाक्षी सोनी, चरणजीत कौर, भारती वंदना, सुमन, सुनीता टंडन और रेणु बाला समेत कई इंचार्ज ऑफिसर्स को नए स्कूलों में ज़िम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें से ज़्यादातर नियुक्तियां खाली पोस्ट पर या संबंधित स्कूलों में एग्जीक्यूटिव अरेंजमेंट के तहत की गई हैं। एजुकेशन डिपार्टमेंट के मुताबिक, प्रशासनिक का मकसद स्कूलों में एडमिनिस्ट्रेटिव एफिशिएंसी बढ़ाना, खाली पोस्ट भरना और एकेडमिक और प्रशासनिक कामों को बेहतर तरीके से करना है। ऑर्डर की कॉपी डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर, डिप्टी डायरेक्टर, संबंधित स्कूलों के हेड और दूसरे अधिकारियों को जरूरी एक्शन के लिए भेज दी गई हैं।

भारत सरकार ने टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी बैन लगाया, NEET UG से पहले बड़ा फैसला

भारत सरकार ने सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम को 22 जून 2026 तक टेम्पररी बैन कर दिया है. इस बैन की मांग नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने की थी. NTA का कहना है कि इससे पेपर लीक को लेकर फैलाए जा रहे फेक मैसेज कम होंगे. NEET UG की एग्जाम 21 जून 2026 को होनी है. NTA के हेड के मुताबिक कोई नया पेपर लीक मामला सामने नहीं आया था, लेकिन सोशल मीडिया पर फैल रहे फर्जी मैसेज की वजह से स्टूडेंट्स के बीच तनाव बढ़ रहा था. गूगल ने भारत में अपने प्ले स्टोर से टेलीग्राम को हटा दिया है और एप्पल भी जल्द ऐसा कर सकता है. जानिए इस बैन के बाद टेलीग्राम के CEO का बड़ा बयान टेलीग्राम के फाउंडर और CEO पावेल दुरोव ने भारत सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि इस बैन की वजह से 15 करोड़ रेगुलर यूजर्स को सजा मिल रही है, जबकि एक्शन उन लोगों पर होनी चाहिए जो पेपर लीक की जानकारी फैला रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस बैन का ज्यादा मतलब नहीं बनता, क्योंकि जो लोग पेपर लीक करना चाहते हैं, वे दूसरे ऐप्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इस पूरे बयान से साफ है कि पावेल दुरोव भारत सरकार के इस फैसले से खुश नहीं हैं. उनका कहना है कि पेपर लीक करने वाले लोग दूसरे प्लेटफॉर्म का भी सहारा ले सकते हैं. जानिए पेपर लीक के मामले सामने आने के बाद टेलीग्राम ने क्या एक्शन लिया था NEET UG पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद टेलीग्राम ने भारत सरकार के साथ पूरा सहयोग किया था. कंपनी ने ऐसे कई चैनल और ग्रुप हटाए थे जो पेपर लीक से जुड़ी जानकारी शेयर कर रहे थे. पिछले कुछ हफ्तों में इस एक्शन की मदद से कई ऐसे ग्रुप भी सामने आए थे जो फर्जी पेपर लीक रैकेट चला रहे थे. जानिए NTA ने यह कदम क्यों उठाया NTA के मुताबिक टेलीग्राम को करीब एक महीने तक मॉनिटर किया गया. इस दौरान पता चला कि टेलीग्राम पर अभी भी Paper Leak NEET जैसे चैनल बनाए जा रहे थे, जिससे स्टूडेंट्स के बीच डर का माहौल बन रहा था. साथ ही एग्जाम के समय कई पेपर लीक माफिया टेलीग्राम पर एक्टिव रहते हैं और अपने रैकेट चलाते हैं. एजेंसी को आशंका थी कि पेपर लीक की कोशिश की जा सकती है, इसलिए NTA को यह कदम उठाना पड़ा.  

CG पुलिस विभाग में तबादलों की लिस्ट जारी, 125 अधिकारी-कर्मचारी इधर से उधर किए गए

बलरामपुर. बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने स्थानांतरण आदेश जारी करते हुए कुल 125 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला किया है। जारी आदेश के अनुसार, 10 सहायक उप निरीक्षकों (एएसआई) का स्थानांतरण किया गया है। इसके अलावा 15 प्रधान आरक्षकों को भी नई पदस्थापना दी गई है। वहीं 85 आरक्षकों और 15 महिला आरक्षकों का भी विभिन्न थाना व चौकियों में तबादला किया गया है। यह तबादला बलरामपुर, रामानुजगंज, राजपुर, शंकरगढ़, चलगली, कुसमी, सनावल सहित जिले के कई थाना क्षेत्रों में किया गया है। जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक दृष्टिकोण और लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्यस्थल परिवर्तन के उद्देश्य से यह आदेश जारी किया गया है।