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PCC दफ्तर का VIDEO बना चर्चा का विषय, दिग्विजय सिंह ने बदली सीट; पटवारी बोले- वे हमारे मार्गदर्शक हैं

भोपाल  मध्यप्रदेश कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। जिसका एक और वीडियो सामने आया है। जोकी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद प्रदेश कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी। इसी दौरान खुले मंच पर दिग्गज नेताओं के बीच तनातनी देखने को मिली। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जीतू पटवारी के सामने दिग्विजय सिंह अपनी कुर्सी छोड़कर हटे है। दरअसल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले मंच पर सभी नेताओं को सीट पर बैठने हेतु ठीक करते नजर आए। इस दौरान पटवारी ने हाथ का इशारा करते हुए कहा कि “ऐसा कर लो तो हरीश चौधरी भी आ जाएंगे।” जीतू पटवारी की यह बात सुनते ही वहां बैठे पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह तुरंत अपनी कुर्सी से उठ खड़े होते हैं और साइड में जाने लगते हैं। दिग्विजय सिंह को नाराज होता देख जीतू पटवारी उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं और कहते हैं, “आप इधर ही रुक जाओ सर…”। लेकिन, दिग्विजय सिंह उनकी बात अनसुनी कर देते हैं और मुख्य जगह छोड़कर साइड में रखी एक अन्य कुर्सी पर जाकर बैठ जाते हैं। जबकि सह-प्रभारी हरीश चौधरी उनकी छोड़ी कुर्सी पर बैठ गए। ऐसे में पार्टी के भीतर नेताओं में तनातनी की स्थिती बनी हुई है। वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला. पार्टी के नेता ने कहा- कांग्रेस में वर्चस्व और कुर्सी की लड़ाई चल रही है, सभी नेता एक दूसरे को निपटने में लगे हैं. आइए, विस्तार से जानते हैं वीडियो में कुर्सी को लेकर क्या खींचतान हुई, जीतू पटवारी ने क्या कहा, भाजपा ने किस तरह निशाना साधा. कांग्रेस ने किस तरह बचाव किया?    दरअसल, कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस की ओर से भोपाल प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई थी. कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले नेता बैठ रहे थे. इस दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सिटिंग अरेंजमेंट संभालते हुए नजर आ रहे हैं।  'कुर्सी पर बैठ चुके पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को हाथ से इशारा करते हुए पटवारी कहते हैं, "ऐसा कर लो तो हरीश चौधरी भी आ जाएंगे." जीतू पटवारी की यह बात सुनते ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तुरंत अपनी कुर्सी छोड़कर साइड की तरफ जाने लगते हैं. पटवारी उन्हें बीच में टोकते हुए कहते हैं, "आप इधर ही रुक जाओ सर", लेकिन दिग्विजय सिंह उनकी बात अनसुनी कर बगल की कुर्सी पर जाकर बैठ जाते हैं. इसके बाद उनकी खाली हुई जगह पर हरीश चौधरी बैठते हैं' . भाजपा- कांग्रेस में वर्चस्व और कुर्सी की लड़ाई  इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस देखकर ऐसा लग रहा है जैसे मुद्दा चुनाव हार का न होकर एक दूसरे की कुर्सी छीनने का है. जिस तरह से वरिष्ठ नेताओं का अपमान किया जा रहा है, उन्हें अपमानित करके ना बोलने दिया जा रहा है और ना कुर्सी पर बैठने दिया जा रहा है. यह कांग्रेस की रीति नीति जनता के सामने है. इसी तरह के बर्ताव की वजह से जनता कांग्रेस को गंभीरता से नहीं लेती है. कांग्रेस में वर्चस्व और कुर्सी की लड़ाई चल रही है, सभी नेता एक दूसरे को निपटने में लगे हैं।  पीसी शर्मा- दिग्विजय सिंह को कोई साइडलाइन करे यह संभव इस सियासी ड्रामे के वायरल होने के बाद पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने पार्टी का बचाव किया. उन्होंने कहा कि आज के समय में दिग्विजय सिंह को कोई साइडलाइन करे यह संभव नहीं है. कमलनाथ और दिग्विजय की आवश्यकता है. दिग्विजय सिंह जो कहते हैं, सोच समझकर कहते हैं. सभी सीनियर लीडर हैं, बैठकर चर्चा करेंगे आगे क्या करना है. हाईकमान फैसला करेगा। 

उद्धव खेमे में बढ़ी बेचैनी, शिंदे गुट के मंत्री के कार्यक्रम में पहुंचे संजय देशमुख

 मुंबई महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा खेला होने जा रहा है. टीएमसी में बगावत के बाद अब उद्ध ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में टूट का खतरा मंडराने लगा है. शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 5 लोकसभा सांसदों ने उद्धव ठाकरे के आवास 'मातोश्री' पर बुलाई गई अहम बैठक में हिस्सा नहीं लिया, जिसके चलते 'ऑपरेशन टाइगर' के कयास लगाए जाने लगे हैं।  शिवसेना (यूबीटी) के पास मौजूदा समय में कुल 9 लोकसभा सांसद हैं, जिनमें से रविवार को हुई बैठक में सिर्फ 4 सांसद ही पहुंचे थे बाकी 5 सांसदों ने हिस्सा नहीं लिया. इसे  उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।  शिवसेना (यूबीटी) की टूट के लगाए जा रहे कयास पर उद्धव ठाकरने अपनी चुप्पी तोड़ दी है. उद्धव ठाकरे ने अब साफ-साफ कह दिया है कि अगर वे जाना चाहते हैं, तो खुशी-खुशी जाएं।  आज नहीं,  कल मेरा वक्त आएगा-उद्धव महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की आशंका के बीच उद्धव ठाकरे ने एक तरह से चेतावनी के लहजे में अपने सांसदों से कहा है कि आज मेरा वक्त नहीं है, लेकिन कल जरूर आएगा. तब तक हमें सहना पड़ेगा और संघर्ष करना पड़ेगा. रविवार को मातोश्री में उद्धव ठाकरे ने अपना लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई थी, जिसमें पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 4 ही सांसद पहुंचे थे और पांच नहीं शामिल हुए थे।  उद्धव ने कहा था कि जिन लोगों ने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़ी है, उन्हें एक दिन पछतावा जरूर होगा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी. चार साल पहले पार्टी में बड़ी फूट पड़ी थी, जब 40 विधायक अलग हो गए थे. उस समय मैं राज्य का मुख्यमंत्री था. क्या लोगों को सच में लगता था कि मुझे उस बात का पता नहीं था, जो बाकी सभी लोग साफ-साफ देख और समझ सकते थे? कोई जाना चाहता है, तो वह जा सकता है-उद्धव उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना में चार साल पहते हुई बगावत की मुझे भनक लग गई थी कि क्या हो रहा है, लेकिन मैंने किसी से कुछ भी नहीं कहा, न ही उन पर कोई दबाव नहीं डाला और न ही उनके घोटालों की जांच के लिए कोई फाइल खुलवाई. अगर कोई पहले से ही जाना चाहता है, तो उसे जबरदस्ती रोकने का क्या मतलब है? ऑपरेशन टाइगर की चल रही चर्चा के बीच उद्धव ठाकरे ने बहुत अहम बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर कोई जाना चाहता है, तो वह जा सकता है. मैं बस उनके अच्छे राजनीतिक भविष्य की कामना करूंगा. इस तरह से उद्धव ठाकरे ने मान लिया है कि जिन्हें जाना है, वो पार्टी को छोड़कर जा सकता है।  उद्धव की बैठक में जो पांच सांसद नहीं पहुंचे उद्धव ठाकरे के द्वारा मातोश्री पर बुलाई गई बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के जो पांच सांसद नहीं पहुंचे थे, उसमें संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटिल अष्टिकर हैं. इन पांच सांसदों के कारण पार्टी में फिर से फूट पड़ने की चर्चा शुरू हो गई।  हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) खेमे ने तुरंत दावा किया कि ये सांसद बैठक में वर्चुअली (ऑनलाइन) शामिल हुए थे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उद्ध ठाकरे सिर्फ नागेश पाटिल अष्टिकर से ही सीधे बात कर पाए. वहीं, बैठक में न शामिल होने वाले शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय देशमुख ने दिल्ली में एकनाथ शिंदे खेमे के मंत्री प्रताप राव जाधव से मुलाकात की है, जिसके बाद सियासी चर्चा तेज हो गई।  उद्धव के सांसद शिंदे के संपर्क में है-प्रताप जाधव उद्धव ठाकरे खेमे के नेता और केंद्रीय मंत्री प्रताप राव जाधव ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के सभी सांसद मेरे दोस्त हैं, हमने पहले साथ काम किया है. हमारी मुलाकात और बातचीत होती रहती है. एक बात साफ है कि शिवसेना (UBT) के कई सांसद पार्टी नेतृत्व (उद्धव ठाकरे) से वाकई नाखुश हैं।  प्रताप जाधव कहते हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसद उसी तरह से पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं, जैसे टीएमसी के सांसद थे. शिंदे के अगुवाई वाली ही शिवसेना असली शिवसेना हैं, जो बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों पर काम कर रही है. शिवसेना (UBT) के सभी सांसदों का हमारी पार्टी में स्वागत है. UBT के कुछ सांसद एकनाथ शिंदे जी के संपर्क में हैं। 

परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए पटना-गया समेत कई रूटों पर परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू

गयाजी  पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले हजारों अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए पूर्व मध्य रेल ने 16 और 17 जून को कई परीक्षा स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की घोषणा की है। इन विशेष ट्रेनों का उद्देश्य अभ्यर्थियों को समय पर और सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाना है। गया जंक्शन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाएगा, जिससे मगध क्षेत्र के परीक्षार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। सुबह 7:15 बजे पटना से चलकर गया पहुंचेगी रेलवे द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 17 जून को पटना-गया परीक्षा स्पेशल सुबह 7:15 बजे पटना से चलकर गया पहुंचेगी। वहीं परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों की वापसी के लिए गया-किऊल स्पेशल शाम 5:30 बजे गया से खुलेगी, जो नवादा और शेखपुरा होते हुए किऊल तक जाएगी। इसके अलावा किऊल से गया के लिए भी दोपहर 12:30 बजे विशेष ट्रेन का संचालन होगा। यह ट्रेन शेखपुरा और नवादा के रास्ते गया पहुंचेगी। इससे नवादा, शेखपुरा और किऊल क्षेत्र के अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक आने-जाने में सहूलियत होगी। बख्तियारपुर-राजगीर स्पेशल सुबह 8 बजे राजगीर और बिहारशरीफ क्षेत्र के अभ्यर्थियों के लिए भी रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। बख्तियारपुर-राजगीर स्पेशल सुबह 8 बजे तथा दोपहर 3:30 बजे चलाई जाएगी, जबकि राजगीर-बख्तियारपुर स्पेशल दोपहर 1 बजे और शाम 6:15 बजे रवाना होगी। ये ट्रेनें बिहारशरीफ और नालंदा होकर गुजरेंगी, जिससे नालंदा जिले के अभ्यर्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार परीक्षा के दौरान सामान्य ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए इन विशेष ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। इससे अभ्यर्थियों को यात्रा के दौरान अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकेंगे। अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पूर्व मध्य रेल ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का अधिक से अधिक उपयोग करें तथा यात्रा के दौरान रेलवे के नियमों का पालन करें। रेलवे प्रशासन ने स्टेशनों पर अतिरिक्त निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सहायता केंद्रों की भी व्यवस्था की है। पुलिस भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में युवाओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए रेलवे की यह पहल न केवल भीड़ प्रबंधन में मददगार होगी, बल्कि अभ्यर्थियों की यात्रा को भी आसान बनाएगी। गया जंक्शन सहित मगध क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों पर इन विशेष ट्रेनों को लेकर परीक्षार्थियों में उत्साह देखा जा रहा है। गया से जुड़ी प्रमुख परीक्षा स्पेशल ट्रेनें     पटना – गया स्पेशल : 17 जून, सुबह 7:15 बजे     किऊल – गया स्पेशल : 17 जून, दोपहर 12:30 बजे     गया – किऊल स्पेशल : 17 जून, शाम 5:30 बजे     पटना – भभुआ स्पेशल : गया होकर संचालित, 16 जून रात 11:30 बजे  

डॉ. वर्णिका शर्मा की पहल रंग लाई, गंभीर रूप से बीमार बालिका को एम्स रायपुर में मिला उपचार

 डॉ .वर्णिका शर्मा की पहल से गंभीर रूप से बीमार बालिका को मिला एम्स रायपुर में उपचार     डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर में भर्ती बालिका से की मुलाकात, चिकित्सकों से ली उपचार की विस्तृत जानकारी*  रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा गंभीर रूप से बीमार नाबालिग बालिका जोगेश्वरी कड़की के प्रकरण का संज्ञान लेते हुए उसके बेहतर उपचार हेतु लगातार पहल की गई, जिसके परिणामस्वरूप बालिका को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में उपचार हेतु भर्ती कराया गया है। उल्लेखनीय है कि बालिका की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी प्राप्त होने पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने दिनांक 05 जून 2026 को कलेक्टर, दंतेवाड़ा को पत्र प्रेषित कर बालिका को बेहतर उपचार हेतु तत्काल एम्स रायपुर भेजने तथा आवश्यक चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उक्त पत्र की प्रतिलिपि जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ), दंतेवाड़ा को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई थी। इसके अतिरिक्त डॉ. वर्णिका शर्मा द्वारा एम्स रायपुर के डायरेक्टर को भी पत्र लिखकर बालिका को समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने तथा आवश्यक चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया था। आयोग के सतत प्रयासों, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के समन्वय से बालिका को उपचार हेतु एम्स रायपुर लाया गया। दिनांक 15 जून 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा स्वयं एम्स रायपुर पहुंचीं और उपचाररत बालिका से मुलाकात कर उसका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने बालिका एवं उसके परिजनों से चर्चा कर स्वास्थ्य स्थिति, उपचार संबंधी व्यवस्थाओं तथा उनकी आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की। दौरे के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा ने एम्स रायपुर के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट एवं संबंधित चिकित्सक दल से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बालिका की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उपचार की प्रगति, किए जा रहे चिकित्सकीय परीक्षणों तथा आगामी उपचार योजना के संबंध में जानकारी प्राप्त की। चिकित्सकों ने अवगत कराया कि बालिका को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। इस अवसर पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने चिकित्सकीय दल से बालिका के उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहने देने तथा उसे सर्वोत्तम संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बालिका के स्वास्थ्य एवं उपचार से जुड़ा यह मामला आयोग की प्राथमिकता में है तथा आयोग द्वारा उपचार प्रक्रिया की सतत निगरानी की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आयोग की ओर से हरसंभव सहयोग एवं समन्वय उपलब्ध कराया जाएगा। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होना उसका अधिकार है तथा छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बच्चों के अधिकारों की रक्षा एवं उनके समग्र कल्याण के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

जेएसबीसीएल पर भुगतान संकट, उद्योग संगठनों ने जताई चिंता

रांची  झारखंड में शराब आपूर्ति कंपनियों का झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) पर 200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। अल्कोहलिक वेबरेजेज उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों ने इसपर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि राज्य में शराब आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यह बकाया भुगतान 31 अगस्त 2025 तक की गई शराब की आपूर्ति से संबंधित है। करीब नौ महीने के बाद भी बकाया भुगतान नहीं होने से शराब आपूर्ति कंपनियां ऋण लेकर शराब की आपूर्ति कर रही है। लंबित भुगतानों को तत्काल जारी करें अल्कोहलिक पेय उद्योग के प्रमुख संगठन कनफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (सीआईएबीसी), ब्रुअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) तथा इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसडब्ल्यूएआई) ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि अल्कोहलिक बेवरेजेज आपूर्ति संकट को टालने के लिए लंबित भुगतानों को तत्काल जारी करें। देश में बिकने वाली शराब, बीयर व वाइन की कुल बिक्री का 80 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधित्व इन्हीं तीनों कंपनियों के माध्यम से होता है। बकाया का 35 प्रतिशत भुगताव राज्य सरकार की कंपनी जेएसबीसीएल ने फरवरी 2026 में कुल बकाया राशि का लगभग 35 प्रतिशत आंशिक भुगतान जारी किया था, लेकिन नौ महीने से अधिक समय से लंबित 200 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी राशि का भुगतान अब तक लंबित है। भुगतान में देरी के चलते शराब आपूर्ति कंपनियों की बैलेंस शीट में प्राप्तियों का बड़ा बोझ जमा हो गया है।  

कांग्रेस संगठन में अनुशासन पर जोर, अनुमति के बिना कार्यक्रमों पर लगी रोक

चंडीगढ़. हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर चल रहा विवाद फिर सुर्खियों में आ गया है। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एचपीसीसी) अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने पार्टी नेताओं व पदाधिकारियों को चेतावनी पत्र जारी कर प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद के पूर्व के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करने को कहा है। इस नए पत्र के बाद कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और संगठन बनाम जनप्रतिनिधि की खींचतान तेज होने की संभावना बढ़ गई है। कांग्रेस कार्यालय से लेनी होगी अनुमति राव नरेंद्र सिंह ने सोमवार को पत्र जारी कर याद दिलाया कि प्रदेश में किसी भी धरना, प्रदर्शन, रैली, अनशन या अन्य राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन से पहले प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके साथ ही कार्यक्रमों में लगाए जाने वाले बैनर, पोस्टर और प्रचार सामग्री में नेताओं के चित्र भी संगठनात्मक वरिष्ठता और प्रोटोकॉल के अनुसार ही लगाने होंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले उसकी सूचना जिलाध्यक्षों के माध्यम से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में भेजनी होगी। जानकारों का मानना है कि राव नरेंद्र सिंह के इस नए पत्र के बाद अंदरूनी खींचतान को नया मुद्दा मिल सकता है।

सुरक्षा याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, परिवार से भागना बदनामी का कारण

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले एक जोड़े की सुरक्षा याचिका खारिज करते हुए कहा है कि इस तरह के संबंध ‘आधुनिक जीवनशैली’ का हिस्सा हैं, जो पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव में समाज के कुछ वर्गों में अपनाए जा रहे हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि माता-पिता के घर से बच्चों का भागना परिवार की ‘बदनामी’ का कारण बनता है। न्यायमूर्ति संदीप मोदगिल की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि विवाह एक पवित्र संबंध है, जिसे भारत में सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर अत्यधिक सम्मान प्राप्त है। जोड़े का दावा: परिवार कर रहा परेशान अदालत ने कहा कि देश की सांस्कृतिक परंपराओं में नैतिकता और आचार-विचार का विशेष महत्व है, जबकि समय के साथ कुछ लोगों ने लिव-इन रिलेशनशिप को अपनाना शुरू किया है। याचिका में जोड़े ने दावा किया था कि वे दोनों बालिग हैं, एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और भविष्य में विवाह करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे वर्तमान में साथ रह रहे हैं और उनके परिजनों द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है, लेकिन साथ ही यह भी टिप्पणी की कि माता-पिता के घर से भागना उनके सम्मान और गरिमा को प्रभावित करता है। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लिव-इन संबंधों को वैधता तभी मिलती है जब दोनों पक्ष विवाह योग्य हों, अविवाहित हों और समाज के सामने स्वयं को पति-पत्नी के रूप में प्रस्तुत करते हों। न्यायालय ने यह भी कहा कि केवल कुछ दिनों तक साथ रहने के आधार पर किसी संबंध को लिव-इन मान लेना पर्याप्त नहीं है। अदालत के अनुसार, ऐसे मामलों में पुलिस सुरक्षा देना सामाजिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है और इसे अनुचित माना जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी रिश्ते को लिव-इन रिलेशनशिप के रूप में स्वीकार करने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें होती हैं. दोनों पक्ष विवाह योग्य आयु के होने चाहिए, अविवाहित होने चाहिए और समाज के सामने खुद को पति-पत्नी जैसे रिश्ते में प्रस्तुत करना चाहिए. अदालत ने पाया कि याचिका में स्वयं कहा गया है कि एक पक्ष अभी विवाह योग्य आयु तक नहीं पहुंचा है और भविष्य में विवाह करने की बात कही गई है।  हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कुछ दिनों तक साथ रहने भर से किसी रिश्ते को वैध लिव-इन रिलेशनशिप नहीं माना जा सकता. सिर्फ एक सामान्य दावा कर देने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दोनों वास्तव में ऐसे रिश्ते में हैं, जिसे कानूनी मान्यता दी जा सके. अदालत ने कहा कि किसी रिश्ते को वैधानिक स्वीकार्यता देने के लिए निर्धारित शर्तों का पूरा होना जरूरी है।  जस्टिस मौदगिल ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में पुलिस सुरक्षा का आदेश देना अप्रत्यक्ष रूप से एक अवैध या गैर-मान्यता प्राप्त रिश्ते को स्वीकृति देने जैसा हो सकता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान द्वारा दी गई स्वतंत्रता पूर्णतः निरंकुश नहीं है और उसे कानून की सीमाओं के भीतर ही लागू किया जा सकता है. इन्हीं आधारों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन कपल की सुरक्षा याचिका खारिज कर दी और पुलिस संरक्षण देने से इनकार कर दिया। 

गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस की बड़ी तैयारी, विशेष स्क्वाड करेगा नेटवर्क का सफाया

चंडीगढ़. सेक्टर-11 में श्री कुमार केमिस्ट के कैशियर जानकी दास की शनिवार को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या की घटना से व्यापारी व उद्योगपति वर्ग में खासी दहशत हैं। गैंगस्टरों की ओर से रंगदारी के लिए आ रहे फोन काॅल ने चंडीगढ़ पुलिस और कारोबारियों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। शहर के केमिस्ट संचालकों समेत अन्य कारोबारियों को फ्रांस, कनाडा और अन्य विदेशी नंबरों से काल कर लगातार रंगदारी मांगी जा रही है। रंगदारी व संगठित आपराधिक गतिविधियों पर नकेल कसने के चंडीगढ़ पुलिस ने मास्टर प्लान तैयार किया है। डीजीपी डाॅ. सागर प्रीत हुड्डा ने कहा शहर में गैंगस्टरों का नेटवर्क खत्म करने के लिए स्पेशल एंटी-गैंगस्टर स्क्वाड गठित किया जा रहा है। स्पेशल एंटी-गैंगस्टर स्क्वाड बनाने का उद्देश्य शहर में हाल के समय में बढ़ी गैंगस्टर गतिविधियों, रंगदारी काल, व्यापारियों को मिल रही धमकियों और सेक्टर-11 के केमिस्ट हत्याकांड जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण करना रहेगा। इसके साथ ही चंडीगढ़ पुलिस अब गैंगस्टर गतिविधियों, रंगदारी नेटवर्क और सुपारी किलिंग जैसे मामलों पर विशेष फोकस करेगी। स्पेशल स्क्वाड गैंगस्टरों की पहचान, निगरानी, गिरफ्तारी और उनके आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने का काम करेगी। हत्या के अगले दिन ही फिर धमकी जानकी दास हत्याकांड के एक दिन बाद ही सेक्टर-16 और सेक्टर-19 स्थित मेडिकल स्टोर संचालक को धमकी भरे संदेश मिलने का मामला सामने आया। संदेश में एक दिन के भीतर मांग पूरी करने की चेतावनी दी गई थी। संचालक के पास विदेशी नंबर से कॉल भी आई, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया और तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है तथा कॉल और संदेश भेजने वालों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। व्यापारियों में दहशत शनिवार को हुए गोलीकांड और उसके अगले ही दिन धमकियों के बाद केमिस्ट समुदाय समेत कारोबारी वर्ग में भय का माहौल। इसको लेकर चंडीगढ़ केमिस्ट एसोसिएशन (सीसीए) का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को डीजीपी डाॅ. सागर प्रीत हुड्डा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने हत्याकांड के मामले में आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी, व्यापारियों की सुरक्षा मजबूत करने और रंगदारी व संगठित आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की। इसके साथ कहा कि व्यापारियों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बैठक के दौरान डीजीपी ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और भरोसा दिलाया कि मामले में शामिल आरोपितों के खिलाफ सख्त और निर्णायक कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा व्यापारिक प्रतिष्ठानों और बाजारों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। एंटी-गैंगस्टर स्क्वाड के प्रमुख काम गैंगस्टरों की पहचान और निगरानी करना। रंगदारी फिरौती, धमकी और वसूली के मामलों की जांच करना। शूटरों और गैंग सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाना। अपराधियों के नेटवर्क और फंडिंग का पता लगाना। गैंगस्टरों को हथियार, वाहन या अन्य संसाधन उपलब्ध कराने वालों पर कार्रवाई करना। इंटरनेट मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म पर गैंगस्टरों की गतिविधियों की निगरानी करना। अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करना। व्यापारियों, उद्योगपतियों और आम लोगों को मिलने वाली धमकियों की जांच करना। गैंगवार, सुपारी किलिंग और संगठित अपराध को रोकने के लिए खुफिया जानकारी जुटाना।

नाम की गलती से परेशान ग्रामीण को शिविर में मिला न्याय

जयपुर  माता—पिता ने नाम रखा डूंगरदास लेकिन पटवारी की लापरवाही से राजस्व रेकार्ड में नाम दर्ज हुआ डूंगरराम। बैंक पास बुक, आधार, जन आधार और अन्य रेकार्ड में असली नाम डूंगरदास चलता रहा। अब उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल सकता था क्योंकि खेत हो गया डूंगरराम के नाम और बैंक पास बुक डूंगरदास के नाम। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक गया और अब यह डर घर कर गया कि नाम दुरूस्ती से पहले ईश्वर के यहां से बुलावा आ गया तो जमीन उसकी संतान के नाम नहीं हो पायेगी क्योंकि जमीन डूंगरराम के नाम है और डूंगरराम नाम का कोई आदमी उस गांव में था ही नहीं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरदास जैसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए ही ग्रामीण सेवा शिविर अभियान चला रखा है। जैसलमेर जिले की ग्राम पंचायत खींया में आयोजित शिविर में डूंगरदास की जमीन के रेकार्ड में 10 मिनट में उसका गलत नाम डूंगरराम हटा कर वास्तविक नाम दर्ज किया गया।  वर्षों से चली आ रही समस्या का शिविर में ही समाधान होने पर डूंगरदास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए उनका आभार प्रकट किया है। अब उसे उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिनका अब तक पात्र तो था लेकिन नाम में त्रुटि के कारण अब तक वंचित था।                  जैसलमेर जिले की ही ग्राम पंचायत सादा में आयोजित शिविर में वर्षों से लंबित नाम शुद्धिकरण की समस्या का भी मौके पर ही समाधान किया गया।       शिविर में चेतनाराम, भागूराम, नेताराम एवं चन्द्रेश ने राजस्व अभिलेखों मेंदर्ज नामों की त्रुटियों के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। दस्तावेज चैक करने के बाद शिविर में ही पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी ने इनको  नाम शुद्धिकरण पत्र प्रदान किए गए। इसी प्रकार ग्राम पंचायत लोहारकी निवासी मीना पत्नी बाबूनाथ के जीवन में यह शिविर उम्मीद की नई किरण लेकर आया और वर्षों से संजोया गया उसका आवासीय भूखण्ड  पट्टे का सपना पूरा हुआ। उसने बताया कि श्री भजनलाल शर्मा ने उसे और उसके परिवार को इतना बड़ा उपहार दिया, वे उनकी इस पहल को कभी नहीं भूलेंगे।

नाम की गलती से परेशान ग्रामीण को शिविर में मिला न्याय

जयपुर  माता—पिता ने नाम रखा डूंगरदास लेकिन पटवारी की लापरवाही से राजस्व रेकार्ड में नाम दर्ज हुआ डूंगरराम। बैंक पास बुक, आधार, जन आधार और अन्य रेकार्ड में असली नाम डूंगरदास चलता रहा। अब उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत अन्य योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल सकता था क्योंकि खेत हो गया डूंगरराम के नाम और बैंक पास बुक डूंगरदास के नाम। एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक गया और अब यह डर घर कर गया कि नाम दुरूस्ती से पहले ईश्वर के यहां से बुलावा आ गया तो जमीन उसकी संतान के नाम नहीं हो पायेगी क्योंकि जमीन डूंगरराम के नाम है और डूंगरराम नाम का कोई आदमी उस गांव में था ही नहीं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरदास जैसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए ही ग्रामीण सेवा शिविर अभियान चला रखा है। जैसलमेर जिले की ग्राम पंचायत खींया में आयोजित शिविर में डूंगरदास की जमीन के रेकार्ड में 10 मिनट में उसका गलत नाम डूंगरराम हटा कर वास्तविक नाम दर्ज किया गया।  वर्षों से चली आ रही समस्या का शिविर में ही समाधान होने पर डूंगरदास के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस जनहितैषी पहल की सराहना करते हुए उनका आभार प्रकट किया है। अब उसे उन सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा, जिनका अब तक पात्र तो था लेकिन नाम में त्रुटि के कारण अब तक वंचित था।                  जैसलमेर जिले की ही ग्राम पंचायत सादा में आयोजित शिविर में वर्षों से लंबित नाम शुद्धिकरण की समस्या का भी मौके पर ही समाधान किया गया।       शिविर में चेतनाराम, भागूराम, नेताराम एवं चन्द्रेश ने राजस्व अभिलेखों मेंदर्ज नामों की त्रुटियों के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। दस्तावेज चैक करने के बाद शिविर में ही पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी ने इनको  नाम शुद्धिकरण पत्र प्रदान किए गए। इसी प्रकार ग्राम पंचायत लोहारकी निवासी मीना पत्नी बाबूनाथ के जीवन में यह शिविर उम्मीद की नई किरण लेकर आया और वर्षों से संजोया गया उसका आवासीय भूखण्ड  पट्टे का सपना पूरा हुआ। उसने बताया कि श्री भजनलाल शर्मा ने उसे और उसके परिवार को इतना बड़ा उपहार दिया, वे उनकी इस पहल को कभी नहीं भूलेंगे।