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हरियाणा में मेयर टीम अधूरी, चुनाव के एक साल बाद भी नहीं भरी गईं अहम कुर्सियां

अंबाला. प्रदेश के नगर निगमों में अजीब तस्वीर दिखाई दे रही है। शहरों को मेयर मिल चुके हैं, सदन बन चुके हैं, पार्षद शपथ ले चुके हैं, लेकिन सत्ता की दो अहम कुर्सियां सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर की अब भी खाली हैं। मार्च 2025 में हुए नगर निगम चुनावों के बाद गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, रोहतक, करनाल, पानीपत और यमुनानगर में मेयरों ने कामकाज संभाल लिया। मई 2026 में अंबाला, सोनीपत और पंचकूला में भी नए सदन अस्तित्व में आ गए। लेकिन प्रदेश के अधिकांश नगर निगमों में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। मार्च 2025 में मानेसर नगर निगम का भी चुनाव हुआ था केवल यहीं पर सीनियर और डिप्टी मेयर का चुनाव हो सका है। नगर निगम कानून आज भी उस दौर की कहानी कहता है जब मेयर का चुनाव पार्षद किया करते थे। अब मेयर सीधे जनता चुनती है, लेकिन कानून की कई धाराओं में आज भी पार्षदों द्वारा मेयर चुनने का जिक्र दर्ज है। नगर निगम की राजनीति में सीनियर डिप्टी मेयर का पद केवल सम्मान का विषय नहीं होता। इसे अक्सर भविष्य की राजनीति का लांचिंग पैड माना जाता है। पंचकूला का नाम शायद इसलिए भी याद रखा जाएगा क्योंकि वहां 2021 से 2026 तक का पूरा कार्यकाल निकल गया है। अंबाला में हाई कोर्ट की लेनी पड़ी थी शरण अंबाला में 2013 में निगम बनने के बाद मेयर के साथ-साथ निर्धारित समय के भीतर सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी हो गया था। दूसरे कार्यकाल में मामला इतना लंबा खिंचा कि चुनाव कराने के लिए तत्कालीन छह पार्षदों जिनमें जसबीर सिंह, फकीर चंद, राजेश मेहता, अमनदीप कौर, राजेश सिंगला इत्यादि को हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। दिसंबर 2020 में चुनाव हुए, जनवरी 2021 में शपथ ग्रहण हुआ, लेकिन सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के चुनाव आठ दिसंबर 2022 में जाकर हुए। लगभग दो साल तक दोनों कुर्सियां खाली रहीं। इस साल अंबाला में 13 मई को चुनाव परिणाम आए, 28 मई को शपथ ग्रहण होने के बावजूद अगली प्रक्रिया का इंतजार जारी है।

मोहाली में डिफॉल्टर बिल्डरों पर बड़ा एक्शन, गमाडा ने नई अप्रूवल्स पर लगाई पाबंदी

मोहाली ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने बकाया जमा न करने वाले बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इसके तहत 20 बिल्डरों की नई मंजूरियों पर तब तक रोक लगा दी गई है, जब तक वे अपना पुराना बकाया चुकता नहीं कर देते।  वहीं, इसके बाद गिल्को रियल एस्टेट ग्रुप ने 57 लाख रुपए जमा करवा दिए हैं। इस सूची में कई नेताओं की कंपनियां भी शामिल हैं। कुछ दिन पहले जिस सनटेक ग्रुप के प्रबंधकों पर ईडी की रेड पड़ी थी, वह कंपनी भी डिफॉल्टरों की सूची में शामिल है। गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर संदीप कुमार ने आदेश जारी किए हैं। उनका कहना है कि बिल्डर्स पर काफी बकाया पेंडिंग है। रिकवरी के लिए अब डिफाल्टर लिस्ट बनाकर उनके सभी नए प्रोजेक्ट की अप्रूवल पर रोक लगा दी है। बाजवा डेवलपर का नाम भी आगे गमाडा की तरफ से पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट (PAPRA) के तहत मंजूर 13 कॉलोनियों से डेवलपर्स द्वारा ली जाने वाली फीस का बकाया 312 करोड़ रुपए है। सूची में सबसे अधिक बकाया मेसर्स बाजवा डेवलपर्स पर है, जिस पर दो मेगा प्रोजेक्ट्स के करीब 150 करोड़ रुपए बकाया हैं। इसके अलावा चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर पर 47 करोड़, आरकेएम हाउसिंग पर 31 करोड़ और शिवालिक साइट प्लानर्स पर 36 करोड़ रुपए पेंडिंग हैं। गीतू कंस्ट्रक्शन पर 14 करोड़ और मैजेस्टिक प्रॉपर्टीज पर साढ़े सात करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है। करोड़ों की बोली देने वाले भी पीछे गमाडा की डिफॉल्टर सूची में मेगा प्रोजेक्ट्स के नाम सबसे ऊपर हैं। इन्होंने करोड़ों की बोली देकर प्रॉपर्टी खरीदी थी, लेकिन अब भुगतान नहीं कर रहे हैं। सात मेगा प्रोजेक्ट्स से गमाडा को 701 करोड़ रुपए से अधिक बकाया है। इनमें सबसे अधिक बाजवा डेवलपर्स के मेगा प्रोजेक्ट-1 पर 209 करोड़ और मेगा प्रोजेक्ट-2 पर 168 करोड़ रुपए बकाया हैं। सेक्टर-82, 90 और 91 में काम कर रही जनता लैंड प्रमोटर पर भी 152 करोड़ रुपए बकाया हैं। सेक्टर-66ए में सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर पर 69 करोड़ रुपए समेत कई अन्य नाम भी सूची में शामिल हैं। इन बिल्डरों ने अभी तक चुकाया है बकाया:- मैसर्स बाजवा डेवलपर्स (मेगा प्रोजेक्ट-1) – ₹209.30 करोड़ मैसर्स बाजवा डेवलपर्स (मेगा प्रोजेक्ट-2) – ₹168.61 करोड़ मैसर्स जनता लैंड प्रमोटर्स (सेक्टर 82, 90, 91) – ₹152.12 करोड़ मैसर्स बाजवा डेवलपर्स (लाइसेंस 22/2014) – ₹127.19 करोड़ मैसर्स सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर (सेक्टर 66ए) – ₹69.06 करोड़ मैसर्स चंडीगढ़ रायल सिटी प्रमोटर्स – ₹47.89 करोड़ मैसर्स एचपी सिंह एंड अदर्स (सेक्टर 122) – ₹45.78 करोड़ ग्लोबल्स प्रोजेक्ट्स (सेक्टर 66ए) – ₹34.52 करोड़ आरकेएम हाउसिंग सेक्टर (सेक्टर 111-112) – ₹31.07 करोड़ मैसर्स बाजवा डेवलपर (लाइसेंस 20/2014) – ₹23.40 करोड़ प्रीत लैंड प्रमोटर (सेक्टर 86) – ₹22.14 करोड़ मैसर्स शिवालिक साइट प्लानर्स – ₹20.55 करोड़ मैसर्स शिवालिक साइट प्लानर्स (कासा एस्पान) – ₹15.60 करोड़ मैसर्स गीतू कंस्ट्रक्शंस – ₹14.79 करोड़ द इंडियन कोआपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी सनटेक – ₹11.47 करोड़ मैसर्स बाजवा दामिनी डेवलपर्स – ₹10.65 करोड़ मैसर्स मैजेस्टिक प्रॉपर्टीज – ₹7.13 करोड़ मैसर्स नॉर्थएज डेवलपर्स – ₹1.11 करोड़ मैसर्स राइजिंग स्टार इंफ्रास्ट्रक्चर – ₹0.99 करोड़ मैसर्स गिल्को डेवलपर्स एंड बिल्डर्स – ₹0.57 करोड़  

हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी, डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई से पहले एक्सपर्ट की राय अनिवार्य

चंडीगढ़. चिकित्सकीय लापरवाही (मेडिकल नेग्लिजेंस) के मामलों में डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को लेकर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि स्वतंत्र और सक्षम चिकित्सा विशेषज्ञ की राय के बिना किसी डॉक्टर को आपराधिक मुकदमे में तलब करना कानून की दृष्टि में टिकाऊ नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल मरीज की मृत्यु हो जाने या उपचार असफल रहने भर से डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला नहीं बनता है। न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा की पीठ ने निचली अदालत द्वारा जारी समन आदेश को रद करते कहा कि मजिस्ट्रेट ने चिकित्सा साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया और विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय का इंतजार किए बिना डाक्टरों को मुकदमे का सामना करने के लिए बुला लिया। अदालत ने इसे गंभीर त्रुटि माना। तरनतारन से जुड़ा है मामला मामला तरनतारन में एक महिला की प्रसव के बाद हुई मृत्यु से जुड़ा था। पति का आरोप था कि पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। शुरू में सामान्य प्रसव का आश्वासन दिया गया, बाद में ऑपरेशन में महिला ने जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। आरोप था कि इसके बाद महिला की हालत बिगड़ गई, अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसे दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पति ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आपराधिक शिकायत दायर की थी। प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने डाक्टरों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए (लापरवाही से मृत्यु) सहित अन्य धाराओं के तहत तलब कर लिया था। इसके खिलाफ डॉक्टर हाई कोर्ट पहुंचे। हाई कोर्ट में डाक्टरों की ओर से कहा गया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई चिकित्सकीय साक्ष्य नहीं है जो उनकी लापरवाही साबित करता हो। डॉक्टरों को दोषमुक्त करारा दिया गया एक जांच टीम ने भी रिपोर्ट में डॉक्टरों को दोषमुक्त करार दिया था। अदालत ने पाया कि मजिस्ट्रेट ने केवल इस आधार पर समन जारी कर दिया कि महिला की मृत्यु प्रसव संबंधी जटिलताओं के कारण हुई। अदालत ने कहा कि किसी डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया शुरू होते ही उसे गिरफ्तारी के भय, जमानत की कार्यवाही और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान जैसी गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि बाद में वह निर्दोष भी साबित हो जाए, तब भी उसकी प्रतिष्ठा को हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं होती।

नक्सली संगठन के दबाव में हुई नसबंदी, आत्मसमर्पित नक्सलियों का माइक्रोसर्जरी से उपचार

जगदलपुर. बस्तर में पुनर्वास की एक अनोखी पहल ने कई परिवारों के जीवन में नई खुशियां लौटाई हैं. महारानी अस्पताल में आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों के लिए विशेष सर्जिकल शिविर आयोजित किया गया. शिविर में रिवर्स वासेक्टॉमी जैसी जटिल माइक्रोसर्जरी की गई. ये वे लोग हैं, जिन्हें कभी नक्सली संगठन के दबाव में नसबंदी करानी पड़ी थी. देश के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वैच्छिक सेवाएं देकर ऑपरेशन किए. दो चरणों में अब तक 73 सफल सर्जरी पूरी की जा चुकी हैं. इस पहल का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को सामान्य पारिवारिक जीवन लौटाना है. चिकित्सकों ने इसे मानवीय सेवा का अनूठा उदाहरण बताया. अभियान के सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं. कुछ परिवारों में बच्चों की किलकारियां फिर गूंजने लगी हैं. पुलिस और प्रशासन इसे पुनर्वास मॉडल की बड़ी सफलता मान रहे हैं. बस्तर में बंदूक छोड़ चुके लोगों के जीवन में यह पहल नई उम्मीद लेकर आई है.

चोट से उबरकर नीरज चोपड़ा लौटेंगे मैदान में, दोहा डायमंड लीग से करेंगे सीजन की शुरुआत

नई दिल्ली  चोट से उबरने के बाद बाद भारत के भाला फेंक स्टार नीरज चोपड़ा 19 जून को दोहा डायमंड लीग से इस सीजन में वापसी करेंगे। सोमवार को नीरज की इस घोषणा से उनके इस सीजन के प्रतियोगी कैलेंडर में लौटने को लेकर हफ्तों से चल रही अटकलों को विराम मिल गया है। दो बार के ओलिंपिक पदक विजेता 28 वर्षीय नीरज पीठ की चोट से उबर रहे थे। जिसके कारण वह इस साल अब तक किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाए थे। अब उनकी मैनेजमेंट फर्म वेल स्पोर्ट्स ने इंस्टाग्राम पर घोषणा की कि 2026 का पहला थ्रो दोहा में। इससे यह तय हो गया है कि नीरज तीन दिन बाद प्रतियोगी एक्शन में होंगे। चोपड़ा को इस इवेंट में देर से शामिल किया गया है, क्योंकि 12 जून को आयोजकों द्वारा घोषित सूची में उनका नाम नहीं था। वह सीजन की तैयारी के लिए स्विट्जरलैंड के ओलिंपिक सेंटर में ट्रेनिंग कर रहे हैं। लेकिन अब चोपड़ा ने भी इंस्टाग्राम पर लिखा है कि दोहा में मिलते हैं। वहीं पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम का नाम इस प्रतियोगिता की नवीनतम सूची में नहीं है, जबकि 12 जून को उनके इसमें भाग लेने की घोषणा की गई थी। ऐसे में चोपड़ा का सीधा मुकाबला श्रीलंका के स्टार खिलाड़ी रुमेश थरंगा पथिरागे से होगा। पथिरागे हाल ही में चार जून को डायमंड लीग के रोम चरण में 92.62 मीटर के शानदार थ्रो के साथ सीजन के बेस्ट थ्रोअर बने हैं। इसके अलावा, त्रिनिदाद और टोबैगो के मौजूदा विश्व चैंपियन केशोरन वालकाट और ग्रेनाडा के दो बार के वर्ल्ड चैंपियन एंडरसन पीटर्स से भी नीरज को हमेशा की तरह कड़ी चुनौती मिलेगी। नौ खिलाड़ियों वाले इस इवेंट में अन्य खिलाड़ियों में अमेरिका के विश्व चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता कर्टिस थांपसन, केन्या के जूलियस येगो, चेक गणराज्य के जैकब वाडलेच, मिस्र के मोहम्मद हुसैन अहमद सामेह और आर्तुर फेल्फनर शामिल हैं।

खुद पर लगे आरोपों को भगवंत मान ने किया खारिज, कहा- छवि खराब करने की कोशिश जारी

चंडीगढ़ पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री अकाल तख्त के फैसले पर अपनी सफाई दी. उन्होंने कहा कि पिछले दिन तख्त श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार की ओर से एक वीडियो के संबंध में मेरे खिलाफ कुछ हुकमनामे जारी किए गए हैं. भगवंत मान ने कथित विवादित वायरल वीडियो को को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।  सीएम भगवंत मान ने कहा कि वायरल वीडियो में जो शख्स दिखाई दे रहा है वह मैं नहीं हूं. मैं हैरान हूं कि पंथ के इतने बड़े ओहदे पर बैठे लोग सियासी मोहरे की तरह काम कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री मान ने कहा कि वायरल वीडियो में जो शख्स है, न तो उसके चेहरा-मोहरा मिलता है और न ही कद काठी मुझसे मिलती है, उसके शारीरिक बनावट पूरी तरह उनसे बिल्कुल अलग है. ये मेरे खिलाफ एक प्रोपेगंडा है।  सीएम भगवंत मान ने कहा कि मैं पंजाब में गुरु की बाणी, पानी, किसानी और जवानी के लिए जो सरकारी फैसला ले रहा हूं वह मेरे विरोधियों को बर्दाश्त नहीं हो रहे हैं. इसलिए मुझे बदनाम करने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं और इसके लिए धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. मान ने कहा कि मैं श्री अकाल तख्त को सर्वोच्च संस्था मानता हूं और उसके आगे नतमस्तक होता हूं।  भगवंत मान ने कहा  श्री अकाल तख्त से मत्था लगाने के बारे में न तो मैं सोच सकता हूं और न ही मेरी आने वाली कई पीढ़ियां ऐसा सोच सकती हैं लेकिन श्री अकाल तख्त पर जो सियासी नियुक्तियां हुई हैं और ये लोग जिस तरह के फैसले ले रहे हैं, वह सारी संगत अच्छी तरह जानती है।  ऐसे समय में जब अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान हाल ही में 2027 चुनाव के लिए पार्टी का चेहरा घोषित किया, यह विवाद पंजाब की चुनावी राजनीति पर कितना असर डालेगा, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है ।  1. आखिर कौन सा वीडियो बना भगवंत मान के लिए मुसीबत? पूरा विवाद एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें एक व्यक्ति कथित तौर पर हाथ में शराब का गिलास लिए सिख गुरुओं और जनरल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों पर शराब के छींटे मारता दिखाई देता है. वीडियो सामने आने के बाद इसे सिख धार्मिक भावनाओं और मर्यादा के अपमान से जोड़कर देखा गया. विपक्षी दलों और कई धार्मिक संगठनों ने दावा किया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं. हालांकि, शुरुआत से ही आम आदमी पार्टी और भगवंत मान इस दावे को खारिज करते रहे. सीएम भगवंत मान से जुड़ा यह वीडियो दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में खूब वायरल हुआ था।  2. भगवंत मान ने क्या कहा था? वीडियो वायरल होने के बाद भगवंत मान ने आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया. उनका कहना था कि वीडियो नकली है और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से तैयार किया गया है. उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक विरोधी उनकी छवि खराब करने और पंजाब सरकार को बदनाम करने के लिए इस तरह की सामग्री फैला रहे हैं. मान ने यह भी कहा कि किसी वीडियो की मौजूदगी मात्र से उसमें दिख रहे व्यक्ति की पहचान सिद्ध नहीं हो जाती।  5 जनवरी 2026 को अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने भगवंत मान को तलब किया और वीडियो की सत्यता की जांच कराने की घोषणा की. 15 जनवरी को मान अकाल तख्त के समक्ष पेश भी हुए।  3. अकाल तख्त की रिपोर्ट में क्या निकला? वायरल वीडियो को बेअदबी का गंभीर मामला मानते हुए इसे गंभीरता को देखते हुए अकाल तख्त ने जनवरी 2026 में भगवंत मान को तलब किया. मुख्यमंत्री ने पेश होकर अपना पक्ष रखा और कुछ दस्तावेज भी जमा कराए. इसके बाद वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए विशेषज्ञ संस्थानों के पास भेजा गया।  जून 2026 में सामने आई रिपोर्ट में कहा गया कि वीडियो में किसी प्रकार की एडिटिंग या एआई जनरेशन के संकेत नहीं मिले. रिपोर्ट के आधार पर अकाल तख्त ने माना कि वीडियो तकनीकी रूप से प्रामाणिक है. हालांकि रिपोर्ट में यह प्रश्न अलग बना रहा कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति निश्चित रूप से भगवंत मान हैं या नहीं।  4. अकाल तख्त ने भगवंत मान को पंथ विरोधी क्यों घोषित किया? जून 2026 में सामने आए फॉरेंसिक रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान को "गुरु द्रोही" और "पंथ विरोधी" घोषित किया. धार्मिक नेतृत्व का तर्क था कि वीडियो में दिखाई गई गतिविधि सिख परंपराओं और गुरुओं के सम्मान के खिलाफ है. मान ने जांच के दौरान वीडियो को AI बताकर गुमराह करने की कोशिश की।  आकल तख्त ने सिख समुदाय से अपील की गई कि वे इस मामले को गंभीरता से लें. यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अकाल तख्त सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था मानी जाती है और उसके निर्णयों का पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक चर्चा पर प्रभाव पड़ता है।  15 से 16 जून 2026 को पांच सिंह साहिबानों की बैठक के बाद अकाल तख्त ने भगवंत मान को "गुरु-दोखी" और "खालसा पंथ विरोधी" घोषित किया. अकाल तख्त का कहना है कि वायरल वीडियो और उससे जुड़े घटनाक्रम ने सिख धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई तथा मान ने जांच के दौरान वीडियो को AI बताकर गुमराह करने की कोशिश की।  5. विपक्षी दलों ने इस विवाद को कैसे भुनाया? अकाल तख्त के फैसले के बाद कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल तीनों ने मुख्यमंत्री पर दबाव बढ़ा दिया. बीजेपी ने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री खुद ऐसे विवाद में घिरे हैं तो राज्य में नशा मुक्ति और नैतिक शासन की बात कैसे कर सकते हैं. कांग्रेस ने इसे नैतिकता का मुद्दा बताते हुए इस्तीफे की मांग की. वहीं अकाली दल ने इसे सिख मर्यादा और धार्मिक सम्मान का प्रश्न बताते हुए अकाल तख्त के फैसले का खुलकर समर्थन किया. इससे विपक्ष को लंबे समय बाद एक ऐसा मुद्दा मिला है जिस पर लगभग सभी दल एक सुर में दिखाई दे रहे हैं।  6. आम आदमी पार्टी का बचाव क्या है? आम आदमी पार्टी का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट केवल यह बताती है कि वीडियो तकनीकी रूप से असली है, लेकिन इससे यह साबित … Read more

दहलीज पर ठहरा मानसून, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कब बरसेंगे बादल? IMD ने दिया अपडेट

भोपाल / रायपुर   दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon 2026) की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है. दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास ठहर गया है, तो वहीं पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद मानसून बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रुक गया है. मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत 16 राज्यों में बारिश का इंतजार बढ़ गया है।  मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ वालों को करना होगा मानसून का इंतजार मौसम विभाग के अनुसार, 13 जून 2026 तक केरलम, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडू, महाराष्ट्र, आंध प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, असम, मेघालय, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक मानसून पहुंच चुका है. वहीं छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश,जम्मू खस्वीर,पंजाब, हरियाणा, दिल्ली के लोगों को अभी थोड़ा और इंतेजार करना होगा।   छत्तीसगढ़ की दहलीज पर अटका मानसून बता दें कि मानसून की रफ्तार फिलहाल छत्तीसगढ़ की दहलीज पर आकर अटक गया है. इधर, मौसम विभाग ने बताया कि 15 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के बचे हुए हिस्सों- तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ गया है।  मौसम विभाग ने बताई संभावित तारीख मौसम विभाग ने बताया कि अगले 4-5 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगी. बता दें कि छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मानसून की दस्तक 13 जून और मध्य प्रदेश में 15 जून के आसपास हो जाती है, लेकिन इस मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने के कारण इसकी रफ्तार थम गई है. मौसम विभाग की माने तो मध्य प्रदेश में 18-19 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून दस्तक दे सकता है. हालांकि दोनों राज्यों में प्री मानसून एक्टिव है, जिसके चलते लगातार बारिश हो रही है।  MP-छत्तीसगढ़ में प्री मानसून एक्टिव इस बीच मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है. छत्तीसगढ़ में अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कई स्थानों में तेज हवा के साथ हल्की बारिश की संभावना है. कई जगहों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी भी चल सकता है. वहीं मध्य प्रदेश में 30 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. राजधानी भोपाल, सागर, रायसेन, सीहोर में तेज बारिश होगी, जिससे मौसम सुहाना रहेगा. हालांकि कई जिलों में तेज धूप रहेगी। 

पेरिस ओलिंपिक में अनजाने में गोल्ड जीतने वाली मार्गरेट एबॉट की हैरान करने वाली कहानी

 नई दिल्‍ली  खेल जगत में कई विचित्र घटनाएं देखने को मिलती हैं, पर ऐसा भी हुआ है जब कोई महिला दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच पर गोल्‍ड मेडल जीतती है, लेकिन उसे जीवन भर अपनी इस उपलब्धि के बारे में पता ही न चले? यह अद्भुत कहानी है गोल्फ खिलाड़ी मार्गरेट एबॉट की। 15 जून 1878 को जन्मीं एबॉट दुनिया की पहली महिला ओलिंपिक चैंपियन तो बनीं, लेकिन अपनी ही जीत के जश्न से हमेशा अनजान रहीं। भारत की मिट्टी से जुड़ी इस गुमनाम चैंपियन की कहानी दिलचस्प है। इसने महिलाओं के लिए खेलों के दरवाजे खोले। मार्गरेट एबॉट     जन्म: 15 जून 1878     मृत्यु: 10 जून 1955 कोलकाता से शुरू हुआ सफर मार्गरेट एबॉट का जन्म भारत के कोलकाता (कलकत्ता) में हुआ था। उनके पिता चार्ल्स पैटरसन एबॉट एक अमेरिकी व्यापारी थे। वह ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में बिजनेस करते थे। पिता के निधन के बाद उनका परिवार वापस अमेरिका लौट गया और शिकागो में बस गया। यहीं पर उनकी मां मैरी ने एक संपादक के रूप में अपनी नई शुरुआत की। शिकागो के इसी माहौल में मार्गरेट ने पहली बार गोल्फ खेलना शुरू किया। अखबार में देखा विज्ञापन 1890 के दशक के अंतिम वर्षों में कला की बारीकियां सीखने के लिए मार्गरेट अपनी मां के साथ पेरिस आ गईं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने गोल्फ खेलना जारी रखा। एक दिन उन्होंने पेरिस के अखबार में 4 अक्टूबर 1900 को होने वाले एक गोल्फ टूर्नामेंट का विज्ञापन देखा। यह प्रतियोगिता पेरिस से कुछ मील दूर स्थित कॉम्पिएन गोल्फ क्लब में होने वाली थी। गोल्फ के शौक के चलते मार्गरेट और उनकी मां मैरी दोनों ने इसमें हिस्सा लेने का फैसला किया। अनजाने में रचा ओलिंपिक का इतिहास 1900 का पेरिस ओलिंपिक आज के भव्य ओलिंपिक खेलों जैसा बिल्कुल नहीं था। इसे पेरिस में चल रहे 'विश्व मेले' के एक हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था। इस आयोजन में इतनी अव्यवस्था थी कि अधिकांश खिलाड़ियों को यह मालूम ही नहीं था कि वे ओलिंपिक का हिस्सा बन रहे हैं। मार्गरेट भी इन्हीं खिलाड़ियों में से एक थीं। उन्होंने अपने शानदार खेल के दम पर पहला स्थान हासिल किया वहीं उनकी मां सातवें नंबर पर रहीं। इस तरह वह अनजाने में ही अमेरिका और दुनिया की पहली महिला ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट बन गईं। 70 साल बाद खुला दुनिया की पहली चैंपियन का राज     मार्गरेट ने अपनी पूरी जिंदगी यही सोचकर गुजार दी कि उन्होंने पेरिस में सिर्फ एक सामान्य गोल्फ टूर्नामेंट जीता था।     1955 में उनका निधन हो गया और उनके चैंपियन बनने का रहस्य लगभग 70 सालों तक दफन रहा।     बाद में अमेरिकी ओलिंपिक बोर्ड की अधिकारी पाउला वेल्च की नजर न्यूयॉर्क के ओलिंपिक मुख्यालय में लगी एबॉट की एक पुरानी तस्वीर पर पड़ी।     पाउला ने गहरी छानबीन की, पुराने दस्तावेज खंगाले और तब जाकर यह सच्चाई दुनिया के सामने आई कि वह ओलिंपिक चैंपियन थीं।     1984 में उनके बेटे फिलिप एबॉट ने अपनी मां की इस उपलब्धि पर एक लेख लिखकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।     ऐसे दौर में जब महिलाओं का खेलों में आना वर्जित माना जाता था, मार्गरेट एबॉट की यह अनजानी सफलता आज भी खेल जगत के लिए एक अनमोल प्रेरणा है।  

श्रीडूंगरगढ़ में मंत्री सुमित गोदारा का संवाद, एनएफएसए लाभार्थियों को मिला प्रमाण पत्र

जयपुर पंचायत समिति परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गोदारा ने कहा कि गिव अप अभियान ने प्रदेश के 84 लाख लोगों की खोई मुस्कान लौटाई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अगुवाई में प्रदेश में चला यह अभियान देशभर के लिए नजीर बना। अभियान के तहत 82 लाख लोगों द्वारा स्वेच्छा से लाभ त्याग करना देशभर में नजीर है। गोदारा ने कहा कि घर-घर संपर्क के दौरान यह सामने आया कि अपात्र लोग इस योजना का लाभ ले रहे थे जबकि पात्र एवं जरूरतमंद इससे वंचित हैं। खाद्य सुरक्षा अधि​नियम के अनुसार प्रदेश के 4.46 करोड़ लोगों को ही इसका लाभ दिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि इसे ध्यान रखते हुए 1 नवंबर, 2024 को यह अभियान शुरू किया और सक्षम लोगों से स्वेच्छा से एनएफएसए का लाभ त्यागने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि अभियान से प्रेरित होकर 56 लाख ने इसका त्याग किया और 29 लाख ने ईकेवाईसी नहीं करवाई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने एक दशक से अधिक समय के बाद 26 जनवरी, 2025 को एनएफएसए पोर्टल चालू किया और अब तक 84 लाख वास्तविक पात्रजनों को लाभ दिया जा सका है। उन्होंने कहा कि इन लाभार्थियों को निःशुल्क इलाज, गैस सिलेंडर सब्सिडी और दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिति में परिजनों को पांच लाख रुपए तक की सहायता मिलेगी। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दस साल पूर्व चला ऐसा अभियान गोदारा ने कहा कि दस वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गैस सब्सिडी स्वेच्छा के छोड़ने का अभियान चला। जिसे आमजन का बड़ा समर्थन मिला। गिव अप अभियान को भी आमजन का भरपूर सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसकी सराहना की। इस दौरान उन्होंने लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा प्रमाण पत्र प्रदान किए। जनप्रतिनिधियों में हो सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना गोदारा ने गत ढाई वर्षों में लूणकरणसर क्षेत्र में हुए विकास कार्यों के बारे में बताया और कहा कि इस अवधि में क्षेत्र में पानी, बिजली, सड़क, चिकित्सा, शिक्षा और पशु चिकित्सा के सहित सात प्रमुख क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले ढाई सालों में डूंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र प्रदेश के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल होगा। गोदारा ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। प्रत्येक क्षेत्र में लाभार्थियों से हो रहा संवाद गोदारा ने कहा कि प्रदेश में चले ऐतिहासिक गिव अप अभियान की सफलता के पश्चात मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों के एनएफएसए लाभार्थियों के साथ संवाद करने के निर्देश दिए हैं। इसकी अनुपालना में अब तक नोखा और खाजूवाला में लाभार्थी सम्मेलन आयोजित किया जा चुका है। भविष्य में अन्य विधानसभाओं में भी इसका आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि श्रीडूंगरगढ़ में 34 लाख लोगों ने स्वेच्छा से एनएफएसए का लाभ छोड़ा है, जिससे 30 हजार से अधिक पात्र लोगों को योजना से जोड़कर राहत दी गई है। श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत ने कहा कि गत ढाई वर्षों में क्षेत्र ने विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। क्षेत्र में सड़क, पानी, विद्युत तंत्र सुदृढ़ीकरण सहित आधारभूत सुविधाओं का विकास तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के प्रत्येक गांव में बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मर लगे हैं। जिससे विद्युत तंत्र में आमूलचूल सुधार हुआ है। विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष राम गोपाल सुथार ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मजदूरों, गरीबों, महिलाओं, वृद्धजनों और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की अनेक योजनाएं इन वर्गों के लिए चलाई जा रही हैं। पात्र व्यक्ति इनका लाभ उठाएं, उन्होंने शहरी और ग्रामीण सेवा शिविरों में अधिक से अधिक लोगों को पहुंचाने का आह्वान किया। इस दौरान जालम सिंह भाटी, रामेश्वर पारीक और छैलू सिंह शेखावत ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में मानमल शर्मा, विनोद गिरी गुसाई, महेंद्रनाथ तंवर, कानाराम, राजकुमार कस्वा, हेमनाथ जाखड़ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अनेक लोगों ने मंत्री गोदारा का मालाएं पहनाकर स्वागत किया। बीकानेर से श्रीडूंगरगढ़ के बीच दर्जनों स्थानों पर हुआ अभिनन्दन इससे पहले बीकानेर से रवाना होने पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा का रायसर, सेरूणा, झंझेउ, जोधासर और लखासर सहित श्रीडूंगरगढ़ तक दर्जनों स्थानों पर भव्य स्वागत हुआ। बड़ी संख्या में लोगों ने की मंत्री गोदारा की अगवानी की। इनमें सेरूणा से पूर्व सरपंच, रणवीर सिंह, गौरीशंकर स्वामी, भगवान स्वामी, झंझेउ से श्री भँवर सिंह तंवर, रीडी से बालू राम जाखड़, मुनीराम जाखड़, बादनूं से नवरत्न घिंटाला, लखासर से भंवर सिंह चंद्रावत, गोपालसर से सीताराम बुढ़िया, कुलदीप सारस्वत सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल रहे।  

चार भीषण सड़क दुर्घटनाओं से दहला फतेहाबाद, 12 लोगों ने गंवाई जान

फतेहाबाद. राजस्थान के बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में सोमवार दोपहर स्विफ्ट डिजायर कार और ट्रक की आमने-सामने की भिड़ंत में फतेहाबाद के गांव मताना निवासी पंचायत विभाग से सेवानिवृत सीनियर अकाउंटेंट ओमप्रकाश सुथार (58) समेत उनके परिवार के छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में ओमप्रकाश की पत्नी सोरमा देवी (55), बेटी प्रमिला (30), दोहती यशवी (10), खुशी (8) और पोता रोनित (4) शामिल हैं। इस भीषण दुर्घटना में 10 वर्षीय बच्ची तनवी गंभीर रूप से घायल हो गई, जो जिंदगी की जंग लड़ रही है। उसका बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में उपचार चल रहा है। ओमप्रकाश सुथार महज 15 दिन पहले ही डीडीपीओ कार्यालय से रिटायर हुए थे और परिवार सहित रविवार को मुकाम धाम दर्शन के लिए रवाना हुए थे। सोमवार सुबह दर्शन करने के बाद परिवार कार से वापस फतेहाबाद लौट रहा था। दोपहर करीब ढाई बजे श्रीडूंगरगढ़ थाना क्षेत्र के हेमासर गांव के पास सामने से आ रहे ट्रक से कार की आमने-सामने की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और सड़क पर कई फीट तक टायरों के घिसटने के निशान बन गए। अमानी के पास ओवरलोड निजी बस पलटने से होमगार्ड जवान समेत तीन की जान टोहाना उपमंडल के गांव अमानी के पास फतेहाबाद-भूना-टोहाना रूट की एक प्राइवेट बस अनियंत्रित होकर खेतों में पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में गांव डूल्ट निवासी होमगार्ड जवान बलविंद्र सिंह, भोडी निवासी 70 वर्षीय मोनी देवी और भोडियाखेड़ा निवासी 22 वर्षीय छात्रा बोहती देवी की मौत हो गई। बस में क्षमता से अधिक करीब 80 सवारियां ठंसी हुई थीं और कई यात्री तो छत पर भी बैठे थे। हादसे में 30 से अधिक लोग घायल हो गए, जिन्हें टोहाना के सरकारी व निजी अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त ड्राइवर की जगह परिचालक बस चला रहा था। यात्रियों के अनुसार, बस चला रहे परिचालक के पास अचानक फोन आया, जिससे बस अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराकर पलट गई। रतिया में पिकअप की टक्कर से दो सगे भाइयों ने तोड़ा दम रतिया क्षेत्र के मिराना गांव के पास तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहां एक पिकअप ने बाइक सवार दो सगे भाइयों को जोरदार टक्कर मार दी। इस सड़क हादसे में गांव पलांटा निवासी कर्म सिंह (57) और रणजीत सिंह (54) की मौत हो गई। दोनों भाई गुरुद्वारे में माथा टेककर अपने घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में काल ने उन्हें अपना ग्रास बना लिया। पुलिस ने घटना के बाद पिकअप वाहन को अपने कब्जे में ले लिया है और मौके से फरार चालक की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है। शहर में युवक ने फंदा लगाकर दी जान, हादसे में घायल युवक की भी उपचार के दौरान मौत सड़क हादसों के अलावा जिले में आत्महत्या और लापरवाही के कारण भी मौत के मामले सामने आए। फतेहाबाद शहर के गांव धारनिया निवासी 25 वर्षीय युवक विक्रम ने मानसिक तनाव के चलते अपने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। वहीं, एक अन्य सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरनगर निवासी और वर्तमान में फतेहाबाद शहर के अशोक नगर निवासी 18 वर्षीय युवक अभिषेक की उपचार के दौरान अस्पताल में मौत हो गई।