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योगी सरकार नवंबर में लाएगी नई आयुष पॉलिसी-26, PPP मॉडल से मजबूत होगा इंफ्रास्ट्रक्चर

योगी सरकार नवंबर में लाएगी नई आयुष पॉलिसी-26   – सीएम योगी के निर्देश पर नई आयुष पॉलिसी-26 का ड्राफ्ट तैयार, पीपीपी मोड से आयुष इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती  – नई पॉलिसी में आयुष रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा, तैयार किया जाएगा मजबूत ढांचा  – निवेशकों को आकर्षित करने के लिए दी जाएंगी विशेष सुविधाएं, आयुष की पारंपरिक पद्धतियों पर विशेष फोकस – प्रदेश में होगा कारोबार का विस्तार, नई आयुष पॉलिसी से स्वास्थ्य सेवाओं में होगा व्यापक सुधार लखनऊ,  योगी सरकार देश के आयुष सेक्टर में अपनी धाक जमाने के लिए नवंबर माह में होने वाली कैबिनटे में नई आयुष पॉलिसी-26 पर मुहर लगाने जा रही है। प्रदेश में आयुष उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी में निवेशकों को विभिन्न तरह की सहूलियतें दी जाएंगी। पॉलिसी में आयुष रिसर्च को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है ताकि प्रदेश को आयुष रिसर्च का हब बनाया जाए। पॉलिसी का उद्देश्य प्रदेश में आयुष दवाओं की जांच और भर्ती के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करना है। नई आयुष पॉलिसी-26 के तहत प्रदेश में आयुष अस्पतालों में मरीजों के इलाज की व्यवस्था को और भी बेहतर बनाया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश में आयुष विभाग को लगातार विकसित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।     नई आयुष पॉलिसी में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रकार की सुविधाएं दी जाएंगी। इसमें कैपिटल सब्सिडी के साथ-साथ लैंड परचेज में स्टांप ड्यूटी में छूट और ग्रीन फील्ड पर विशेष छूट देने की योजना है। इसका उद्देश्य आयुष उद्योग के विस्तार में तेजी लाना और इसे एक वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करना है। आयुष की पारंपरिक और प्राचीन पद्धति पर किया जा रहा फोकस प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने आयुष कारोबार को बढ़ाने के निर्देश दिये थे ताकि पूरे देश में आयुष क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की धाक बन सके और आयुष के क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्योगपति उत्तर प्रदेश का रुख कर सकें। ऐसे में नई आयुष पॉलिसी-26 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसे कैबिनेट के सामने समक्ष रखने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि नवंबर माह में कैबिनेट नई आयुष पॉलिसी-26 पर अपनी मुहर लगा सकती है। नई पॉलिसी में प्राचीन पद्धति पंचकर्म, नेचरोपैथी और वेलनेस सेंटर पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे प्रदेश में आयुष कारोबार को और बढ़ावा मिलेगा। नई पॉलिसी से न केवल आयुष कारोबार को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के एक और स्तर तक पहुंचाने में भी सहायक होगी। नई आयुष पॉलिसी में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर अस्पतालों का निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, आयुष अस्पतालों के निर्माण के लिए नए कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिनमें आयुर्वेद, योग और होम्योपैथी से संबंधित कोर्स शामिल होंगे। इससे न केवल आयुष शिक्षा में वृद्धि होगी, बल्कि युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। आयुष स्वास्थ्य सेवाओं में होगा विस्तार, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर नई पॉलिसी का उद्देश्य रोगियों के उपचार के लिए सुगम स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाना, औषधि गुणों को बेहतर करना और स्टाफ की भर्ती को ध्यान में रखते हुए इसे एक समग्र रूप से विकसित करना है। इसके साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर कार्यान्वयन के लिए नए विचारों को समाहित किया जाएगा, जो राज्य सरकार की मंशा को सही दिशा में बढ़ावा देंगे। इस नई पॉलिसी के तहत, आयुष चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करने और उन्हें आयुष वेलनेस सेंटर के रूप में पेश करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही, योग और पंचकर्म जैसे क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत, स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में और भी व्यापक सुधार किए जाएंगे और प्रदेश के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। नई नीति के माध्यम से प्रदेश में आयुष कारोबार का विस्तार होगा और इसके साथ ही दुनिया भर में फैले इस उद्योग के कारोबार पर उत्तर प्रदेश की धाक जमाने का सपना भी पूरा होगा। आयुष के क्षेत्र में यह नीति न केवल प्रदेश के विकास में योगदान करेगी, बल्कि देश और दुनिया में उत्तर प्रदेश को एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर दौरा गौरव का अवसर, मुरिया दरबार में होंगी शामिल: CM साय

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का बस्तर आगमन गौरव का अवसर, मुरिया दरबार में होंगी शामिल – मुख्यमंत्री साय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन से नक्सली हिंसा से प्रभावित भाई-बहनों का बढ़ा आत्मविश्वास : मुख्यमंत्री साय छत्तीसगढ़ में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच का आयोजन, महिला दर्शकों के लिए प्रवेश रहेगा निःशुल्क रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास के संबंध में  हमने राष्ट्रपति महोदया को बस्तर आने का आमंत्रण दिया था। पूर्व में बस्तर के मांझी-चालकी प्रतिनिधियों से भेंट के दौरान भी उनसे बस्तर आने का आग्रह किया गया था, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया था। उनका 22 एवं 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ प्रवास प्रस्तावित है। 23 अक्टूबर को वे जगदलपुर जाएंगी और वहां मुरिया दरबार में शामिल होंगी। राष्ट्रपति महोदया का बस्तर आगमन हम सभी के लिए प्रसन्नता और गौरव का अवसर है। मुख्यमंत्री साय ने नक्सली हिंसा से प्रभावित एवं अन्य दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर को संबोधित किया है। सरकार का प्रयास है कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता मिले और वे सम्मान एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। प्रदेश में पहली बार आयोजित होने जा रहे अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैच के संबंध में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए प्रसन्नता का विषय है। भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच होने वाले इस मैच में महिला दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। इससे प्रदेश की माताओं-बहनों और बेटियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के साथ उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।

राजस्थान में गांजे की अवैध खेती पर सवाल, 400 से अधिक जमीन मालिकों के बीच असली आरोपी तलाशना चुनौती

जयपुर उदयपुर जिले के मांडवा क्षेत्र में हाल ही में पकड़ी गई करीब 57 हेक्टेयर में फैली गांजे की अवैध खेती का अनुमानित मूल्य 200 करोड़ रुपए आंका गया है। खेतों में पौधे तीन-चार फीट ऊंचे होने के बावजूद स्थानीय पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक नहीं लगी। अब जांच में सबसे बड़ी चुनौती खेती करने वालों की पहचान करना है। गांजे की खेती 56 खसरों में मिली है, जिनके 400 से अधिक मालिक बताए जा रहे हैं। कई खसरों में 10-10 खातेदार हैं। इनमें भाई-बहन भी शामिल हैं, जबकि कुछ खातेदार दूसरे स्थानों पर रहते हैं। ऐसे में जमीन के मालिकों की सूची के आधार पर वास्तविक खेती करने वालों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मामला दर्ज करने के बाद पटवारी, ग्राम सेवक, थानाधिकारी और उपाधीक्षक से संबंधित जमीनों और गांजे की खेती करने वालों की जानकारी मांगी है। उनसे खेती करने वालों की पहचान कर सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है। सवाल- आखिर निगरानी से कैसे बची गांजे की खेती? गांजे की खेती तैयार होने में कई महीने लगते हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी खेती का पता नहीं चलना स्थानीय सूचना तंत्र और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बुवाई से लेकर पौधों के तीन-चार फीट ऊंचे होने तक जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। पहले भी पकड़ी गई गांजे की खेती राजस्थान के कई जिलों में जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और खेतों में गांजे की खेती पकड़ी जा चुकी है। हालांकि, कई मामलों में खेती करने वालों और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचना चुनौती बना रहा। इस वर्ष जनवरी से सितंबर तक राजस्थान पुलिस 10,213 किलोग्राम गांजा बरामद कर चुकी थी। खेतों में छिपाकर उगाए गांजे के पौधे उदयपुर: कोटड़ा के नयावास गांव में 7-8 अक्टूबर को 9.4 बीघा जमीन पर गांजे के 7,577 पौधे मिले। इनसे 2,273 किलोग्राम गांजा तैयार होने का अनुमान था, जिसकी कीमत 11.76 करोड़ रुपए आंकी गई। जयपुर ग्रामीण: समोद क्षेत्र के विजय सिंहपुरा-बांसा गांव में 29 मार्च को बगीचे में उगाए गए गांजे के 1,510 पौधे जब्त किए गए। इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। डूंगरपुर: पांथल गांव में 18 सितंबर को कपास की फसल के बीच उगाए गए गांजे के 2,505 पौधे जब्त किए गए। पहचान करना चुनौती उदयपुर में जिन खसरों में गांजे की खेती मिली है, उनमें कई-कई मालिक हैं। कुछ खसरों में 10-10 खातेदार हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन से खेती करने वालों की पहचान कर उनके नाम मांगे गए हैं, ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। -घनश्याम सोनी, जोनल निदेशक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, जोधपुर

CM यादव ने मुरैना दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र का किया निरीक्षण

उत्कृष्ट विद्यालय में विद्यार्थियों से किया संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनविश्वास अभियान अंतर्गत मुरैना जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र में दिव्यांगजनों के उपचार, पुनर्वास एवं समग्र विकास के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का अवलोकन किया तथा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र में संचालित न्यूरोलॉजिकल पुनर्वास कक्ष, बाल पुनर्वास कक्ष, शिशु एवं बाल चिकित्सा उपचार कक्ष तथा विद्युत चिकित्सा कक्ष सहित विभिन्न कक्षों का निरीक्षण किया। उन्होंने यहां दिव्यांग बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही उपचार एवं चिकित्सा सुविधाओं, पुनर्वास की व्यवस्थाओं तथा उनकी प्रगति के संबंध में जानकारी प्राप्त की। दिव्यांग बच्चों से आत्मीय संवाद कर बढ़ाया उत्साह मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र में उपस्थित दिव्यांग बच्चों से आत्मीय संवाद किया और उनके अनुभवों एवं गतिविधियों के बारे में चर्चा की। मुख्यमंत्री को दिव्यांग बच्चों ने अपने हाथों से बनाई गई गौशाला की पेंटिंग भेंट की। एक बच्चे ने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतीकों को सांकेतिक चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए उनके बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों की रचनात्मकता, प्रतिभा एवं आत्मविश्वास की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बच्चों के साथ आत्मीयता से संवाद कर उनका मनोबल बढ़ाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांगजनों को विभिन्न सहायक उपकरण भी वितरित किए। इनमें ट्राइसाइकिल, व्हील चेयर, बैसाखी, छड़ी, घुटने के सहायक पट्टे, दृष्टिबाधितजनों के लिए विशेष छड़ी, कॉलर बेल्ट एवं श्रवण यंत्र शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया उत्कृष्ट विद्यालय मुरैना का निरीक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत मुरैना के उत्कृष्ट विद्यालय क्र.-1 में पहुँचकर विद्यालय का निरीक्षण किया और विद्यार्थियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से विज्ञान और गुरुत्वाकर्षण के संबंध में संवाद किया। इसके साथ ही विद्यालय में स्थापित प्रयोगशाला का निरीक्षण कर प्रयोगशाला के बारे में भी विद्यार्थियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों की कक्षा में पहुँचकर बच्चों से विज्ञान विषय के संबंध में संवाद किया। उन्होंने विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के स्कूल पहुँचने पर विद्यार्थियों और अध्यापकों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. सुदाम खाड़े, संभागीय आयुक्त मनोज खत्री, कलेक्टर मुरैना लोकेश कुमार जांगिड़, पुलिस अधीक्षक मुरैना धर्मराज मीणा सहित जनप्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

बिहार के सिमुलतला विद्यालय ने बनाई राष्ट्रीय पहचान, रैंकिंग में दूसरे स्थान

 पटना  बिहार के जमुई जिले में स्थित सिमुलतला आवासीय विद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। C-Fore School Ranking 2026 में विद्यालय को देशभर में दूसरा स्थान मिलने का दावा किया गया है। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने इसे पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय बताया और विद्यालय की स्थापना के पीछे की कहानी साझा की। नेतरहाट विद्यालय की तर्ज पर बना सिमुलतला आवासीय विद्यालय संजय झा ने कहा कि एक समय नेतरहाट विद्यालय संयुक्त बिहार की शैक्षणिक पहचान हुआ करता था। वर्ष 1954 में स्थापित इस विद्यालय में पढ़ना मेधावी विद्यार्थियों का सपना माना जाता था। वर्ष 2000 में बिहार के विभाजन के बाद नेतरहाट विद्यालय झारखंड में चला गया। इसके बाद बिहार में भी उसी तरह का उत्कृष्ट आवासीय विद्यालय स्थापित करने की जरूरत महसूस की गई। 2010 में हुआ था विद्यालय का उद्घाटन संजय झा के मुताबिक, वर्ष 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में कई पहल शुरू की गईं। विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं के साथ शिक्षकों की बहाली पर भी जोर दिया गया। इसी दौरान नेतरहाट विद्यालय की तर्ज पर जमुई जिले के सिमुलतला में आवासीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया। संजय झा ने बताया कि 9 अगस्त 2010 को इस विद्यालय का उद्घाटन हुआ था। डेढ़ दशक में राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान सिमुलतला आवासीय विद्यालय की स्थापना के करीब डेढ़ दशक बाद इसे C-Fore School Ranking 2026 में देशभर में दूसरा स्थान मिलने की बात सामने आई है। इस उपलब्धि को बिहार में सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता और मेधावी विद्यार्थियों की क्षमता से जोड़कर देखा जा रहा है। संजय झा ने इस सफलता के लिए विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और बिहार के लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य के लिए गर्व का विषय है। शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास जारी रखने की बात संजय झा ने कहा कि बिहार में शिक्षा और प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए पिछले दो दशकों में प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए सरकार इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। सिमुलतला आवासीय विद्यालय की उपलब्धि से राज्य में सरकारी स्कूलों की भूमिका और शिक्षा की गुणवत्ता पर चर्चा को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, रैंकिंग जारी करने वाली संस्था, श्रेणी और मूल्यांकन के मानकों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इस उपलब्धि का पूरा संदर्भ स्पष्ट होगा।

नमो घाट पर आम लोगों की आवाजाही बंद, एयर शो में जुटेंगे 30 लाख दर्शक

वाराणसी  वाराणसी के नमो घाट को अति संवेदनशील घोषित करते हुए शुक्रवार से आम लोगों की आवाजाही को यहां प्रतिबंधित कर दिया गया। पुलिस की तैनाती के साथ ही घाट की ओर बने गेट को बंद कर दिया गया है। वहां निजी गार्ड भी तैनात कर दिए गए हैं। पूरी कवायद अगले हफ्ते होने वाले एयरशो को लेकर हो रही है। इस एयरशो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही कई वीवीआईपी का आगमन होगा। वायुसेना और सेना यहां एयरशो की तैयारियों में जुटी है। वीआईपी के लिए खास ग्रीन रूम और स्टेज बनाए जा रहे हैं। नमो घाट पर 22, 24 और 25 अक्तूबर को एयर शो होने वाला है। इसकी तैयारियों के बीच ही वायु सेना ने नमो घाट के फेज-2 को अपनी निगरानी में ले लिया है। यहां वायु सेना का कम्युनिकेशन सेटअप स्थापित किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से इस क्षेत्र को अति संवेदनशील घोषित करते हुए आम लोगों के प्रवेश और आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए यहां पुलिस फोर्स भी तैनात कर दी गई है। नमो घाट के फेज-2 में वायु सेना के संचार उपकरणों और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। इस क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों को मुस्तैद किया गया है। एयर शो के दौरान वायु सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने में कम्युनिकेशन सेटअप की अहम भूमिका होगी। बताया जा रहा है कि नमो घाट पर आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध एयर शो के समापन के तत्काल बाद नहीं हटाया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था के तहत कार्यक्रम समाप्त होने के एक दिन बाद तक यहां आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियां अपने उपकरणों, संचार व्यवस्था और अन्य संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी। वायु सेना की निगरानी वाले इस क्षेत्र में भी पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पतंगबाजी पर 26 अक्तूबर तक रोक एयर शो के मद्देनजर नगर निगम ने 26 अक्तूबर तक गंगा किनारे और आसपास के क्षेत्रों में पतंगबाजी पर रोक लगाई है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने कहा कि पतंगबाजी करते हुए कोई मिला तो कार्रवाई की जाएगी। 22 के पहले भी गरजेंगे जंगी जहाज ट्रायल के तौर पर 22 अक्तूबर के पहले ही जंगी जहाज करतब दिखाते नजर आ सकते हैं। हालांकि इस बारे में सेना की ओर से कोई अधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। ट्रायल के तौर पर जंगी जहाजों के वाराणसी से गुजरने के दौरान करतब दिखाने की तैयारी है। सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए जा रहे हैं। प्रशासन कोई चांस लेने के मूड में नहीं है। एयर शो को ऐतिहासिक बनाने के लिए वह प्रतिबद्ध है। तीन दिन के शो में 30 लाख लोगों के जुटने का अनुमा तीन दिन के एयर शो में करीब 30 लाख लोगों के जुटने का अनुमान है। लोगों के बैठने के लिए गंगा किनारे पाथ-वे और समतलीकरण का काम शुरू है। बैरिकेडिंग भी कराई जा रही है। गंगा किनारे एक साथ भीड़ न बढ़े, इसके मद्देनजर दर्शकों के लिए क्षेत्र बढ़ाया जा रहा है। सारनाथ के सराय मोहाना और गंगापार चंदौली के बलुआ क्षेत्र के कुछ हिस्सों का भी इस्तेमाल किया जाएगा। रामनगर में पुलिस अफसरों ने स्थलीय निरीक्षण किया। भीड़ प्रबंधन और लोगों की सहूलियत के मद्देनजर व्यापक इंतजाम किये जा रहे हैं। सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त होंगे ताकि कोई चूक न होने पाए। तैयारी में किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो-इसके लिए अधिकारी रोज समीक्षा बैठक कर रहे हैं। मातहतों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि तैयारी में चूक न होने पाए। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। शहर को सजाने-संवारने का काम भी युद्धस्तर पर जारी है। खासकर, गंगाघाटों को आकर्षक लुक दिया जा रहा है।

आईआईएम रायपुर में पंजीयन विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न, सुधारों पर जोर

आईआईएम रायपुर में पंजीयन विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न, प्रशासनिक सुधारों को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पहचान पंजीयन विभाग के नवाचारों, चुनौतियों और समाधान पर तैयार होंगी केस स्टडी, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशन की पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में विभागीय सुधारों को अकादमिक जगत तक पहुंचाने की अभिनव पहल आईआईएम रायपुर के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को दिया केस स्टडी लेखन, शोध और प्रकाशन का प्रशिक्षण रायपुर,   छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में किए जा रहे नवाचारों को अब राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक पहचान दिलाने की पहल की जा रही है। इसी उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय 'वर्कशॉप ऑन केस राइटिंग एंड कोलैबोरेटिव पब्लिकेशन' 15 अक्टूबर को संपन्न हुई। 14 एवं 15 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यशाला में विभागीय सुधारों, महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों, उनके क्रियान्वयन में आई चुनौतियों तथा अधिकारियों द्वारा विकसित व्यावहारिक समाधानों को केस स्टडी के रूप में तैयार कर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित कराने की प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ पंजीयन विभाग द्वारा विगत तीन वर्षों में अनेक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार एवं जनहितकारी पहल की गई हैं। महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक पुष्पेंद्र मीणा के नेतृत्व में विभाग द्वारा पंजीयन सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन सुधारों के क्रियान्वयन से प्राप्त अनुभवों को अब व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकृत कर शोध, अध्ययन और प्रशासनिक प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने की पहल की गई है। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक नवाचारों से सीख सकेंगे देश-दुनिया के नीति-निर्माता कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य पंजीयन विभाग में हुए सुधारों को केवल प्रशासनिक उपलब्धियों तक सीमित न रखकर उन्हें अध्ययन और शोध के उपयोगी उदाहरणों के रूप में विकसित करना है। विभागीय सुधारों को लागू करते समय अधिकारियों के सामने अनेक व्यावहारिक चुनौतियां आईं, जिनका समाधान स्थानीय परिस्थितियों, प्रशासनिक अनुभवों और नवाचारों के माध्यम से किया गया। इन अनुभवों को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत करने से देश-दुनिया के शिक्षाविदों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, प्रशासकों और नीति-निर्माताओं को छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से सीखने का अवसर मिलेगा। यह पहल प्रशासनिक सुधारों के अनुभवों को संस्थागत ज्ञान में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सफल कार्यप्रणालियों, निर्णय लेने की प्रक्रियाओं और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान को अन्य विभागों एवं संस्थानों के साथ साझा करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। दो दिनों तक केस स्टडी लेखन, शोध और प्रकाशन की बारीकियों पर प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रथम दिन विशेषज्ञों ने केस स्टडी लेखन की आवश्यकता, उसकी संरचना, उपयुक्त विषयों के चयन, समस्याओं की पहचान तथा प्रशासनिक अनुभवों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को बताया गया कि विभागीय कामकाज के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय, उनके पीछे की परिस्थितियां, क्रियान्वयन में आई कठिनाइयां और उनके समाधान किस प्रकार एक उपयोगी एवं प्रभावशाली केस स्टडी का आधार बन सकते हैं। दूसरे दिन केस स्टडी तैयार करने की व्यावहारिक प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। इसमें आवश्यक सूचनाओं का संकलन, तथ्यों का सत्यापन, संबंधित व्यक्तियों के साक्षात्कार, केस की रूपरेखा तैयार करने और विश्लेषणात्मक लेखन की विधियों पर प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही टीचिंग नोट तैयार करने, उपयुक्त अकादमिक जर्नल एवं प्रकाशन मंच के चयन, समीक्षा तथा प्रकाशन की प्रक्रिया के संबंध में भी विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन प्रदान किया। आईआईएम रायपुर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव कार्यशाला में पंजीयन विभाग के डीआईजी मदन लाल कोर्पे एवं डीआईजी श्रीमती उषा साहू सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर, कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय, प्रो. सत्यसिबा दास, प्रो. मनोजीत चट्टोपाध्याय, प्रो. अर्चना पाराशर तथा प्रो. आर.के. जना सहित अन्य विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। विशेषज्ञों ने प्रशासनिक अनुभवों को शोधपरक एवं तथ्यात्मक तरीके से प्रस्तुत करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अच्छी केस स्टडी न केवल किसी समस्या और उसके समाधान को सामने लाती है, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया, उपलब्ध विकल्पों और उनसे प्राप्त सीख को भी स्पष्ट करती है। प्रशासनिक सुधारों के दस्तावेजीकरण से सुशासन को मिलेगी मजबूती पंजीयन विभाग की यह पहल छत्तीसगढ़ में किए जा रहे प्रशासनिक नवाचारों को व्यवस्थित रूप से संकलित करने और उन्हें व्यापक अध्ययन का विषय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभागीय अनुभवों पर आधारित केस स्टडी तैयार होने से भविष्य में अधिकारियों के प्रशिक्षण, नीति निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। कार्यशाला के समापन अवसर पर पंजीयन विभाग के डीआईजी मदन लाल कोर्पे, आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. संजीव पाराशर तथा कार्यक्रम निदेशक प्रो. प्रणित कुमार रॉय ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। यह आयोजन पंजीयन विभाग और प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान के बीच ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।

छत्तीसगढ़ में 900 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन, दो महीने के इलाज से स्वस्थ हुआ शिशु

छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं ने रचा जीवन रक्षा का नया अध्याय, महज 900 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दूरस्थ वनांचलों तक पहुंच रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, जिला अस्पताल में दो माह के उपचार से स्वस्थ हुआ गंभीर नवजात गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों ने पेश की संवेदनशीलता और समर्पण की मिसाल, 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हुआ शिशु का वजन रायपुर छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों के बीच गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय से एक सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे महज 900 ग्राम वजन के एक नवजात शिशु को चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने लगभग दो माह तक लगातार उपचार एवं विशेष देखभाल प्रदान कर नया जीवन दिया है। अत्यंत कम वजन, समय से पूर्व जन्म, सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे इस नवजात की सफल चिकित्सा ने जिले में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की उपयोगिता और चिकित्सकीय टीम के समर्पण को रेखांकित किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने तथा दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण उपचार पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में जिला चिकित्सालयों में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात का सफल उपचार इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है। महज 900 ग्राम वजन के साथ जिंदगी की जंग लड़ रहा था नवजात गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी श्रीमती गोमती के नवजात शिशु का जन्म समय से पूर्व हुआ था। जन्म के बाद शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उसका वजन मात्र 900 ग्राम था। इसके साथ ही उसे श्वसन संबंधी परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या भी थी। इतनी कम उम्र और अत्यंत कम वजन के कारण शिशु को विशेष चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार की आवश्यकता थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिशु को जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने तत्काल उपचार शुरू किया। नवजात के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की गई और उसकी चिकित्सकीय आवश्यकताओं के अनुरूप उपचार एवं पोषण संबंधी देखभाल सुनिश्चित की गई। दो सप्ताह ऑक्सीजन सपोर्ट, दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया उपचार के दौरान नवजात को सांस लेने में हो रही परेशानी के कारण लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट प्रदान किया गया। गंभीर एनीमिया की स्थिति में दो यूनिट रक्त ट्रांसफ्यूजन भी किया गया। इसके अतिरिक्त शिशु के शारीरिक तापमान को संतुलित रखने, पोषण सुनिश्चित करने और वजन बढ़ाने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी), नियमित फीडिंग तथा अन्य आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी एवं लगभग दो माह के उपचार से शिशु के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आए और शिशु का वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार होने पर 8 अक्टूबर 2026 को शिशु को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दूरस्थ वनांचल के परिवार के लिए जिला अस्पताल बना जीवनरक्षक सहारा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे वनांचल बहुल जिले में गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशु का जिला स्तर पर सफल उपचार होना विशेष महत्व रखता है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों के लिए गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियों में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है। जिला चिकित्सालय में उपलब्ध विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों की निरंतर निगरानी, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सेवाओं और आवश्यक उपचार सुविधाओं के माध्यम से नवजात के स्वास्थ्य में सुधार संभव हो सका। यह उपलब्धि दर्शाती है कि जिला स्तर पर नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल सुविधाएं गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे परिवारों के लिए कितनी उपयोगी साबित हो सकती हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण, आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और शासकीय अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा जरूरतमंद नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए जिला चिकित्सालयों में संचालित एसएनसीयू जैसी इकाइयां समय से पूर्व जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित बच्चों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में नवजात शिशु का सफल उपचार शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सेवाओं का एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह घटना स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के महत्व को भी रेखांकित करती है। इसी क्रम में जिला चिकित्सालय में गंभीर मरीजों एवं नवजात शिशुओं के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता, मरीजों की सतत निगरानी तथा उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण से मिली सफलता नवजात शिशु के सफल उपचार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन तथा सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम सहित एसएनसीयू के समस्त नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग दो माह तक शिशु के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी, आवश्यक उपचार, पोषण प्रबंधन और विशेष देखभाल सुनिश्चित की गई। चिकित्सकीय टीम के सामूहिक प्रयासों और समर्पित सेवाओं से गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात के स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार संभव हुआ। नवजात की मुस्कान बनी शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं की सार्थकता का प्रतीक मात्र 900 ग्राम वजन के साथ गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे नवजात का स्वस्थ होकर घर लौटना उसके परिवार के लिए बड़ी राहत है। यह सफलता न केवल चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण को दर्शाती है, बल्कि शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध नवजात देखभाल सुविधाओं के महत्व … Read more

ध्रुव राठी की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें? साकेत कोर्ट के समन को घर के गेट पर चिपकाया

  गुरुग्राम     यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि के मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट का समन गुरुग्राम में उनके घर के मेन गेट पर चिपका दिया गया है. घर सेक्टर-56 की केंद्रीय विहार सोसाइटी में है. यह केस भाजपा आईटी सेल के सदस्य विकास सांकृत्यायन उर्फ विकास पांडे ने दायर किया है. मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होनी है।  कोर्ट ने शिकायतकर्ता को अदालती स्टाफ के साथ जाकर समन तामील कराने की अनुमति दी थी. इसके बाद ही यह नोटिस ध्रुव राठी के घर पर लगाया गया. यानी समन उन्हें हाथ में देने की जगह घर के गेट पर चिपकाकर कोर्ट की सूचना उन तक पहुंचाई गई है।  पूरा विवाद साल 2018 में अपलोड हुए एक वीडियो से जुड़ा है. वीडियो का नाम 'BJP IT Cell Part-2' है. शिकायतकर्ता विकास पांडे का आरोप है कि इस वीडियो में भाजपा आईटी सेल और उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए. वीडियो में दावा किया गया था कि विकास पांडे के जरिए महावीर प्रसाद नाम के व्यक्ति को रिश्वत देने की कोशिश हुई थी. यह भी कहा गया था कि ध्रुव राठी को बदनाम करने के लिए 50 लाख रुपये की पेशकश की गई थी. विकास पांडे का कहना है कि ये सभी बातें झूठी और मनगढ़ंत हैं. उनके मुताबिक इनसे उनकी निजी और सामाजिक प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा है।  शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक जुलाई 2019 में पहली बार समन जारी हुआ था. तब से यह समन तामील नहीं हो पा रहा था. वजह यह बताई गई कि ध्रुव राठी ऑस्ट्रिया में रहते हैं और सीधे नोटिस लेने से इनकार करते रहे. हाल ही में सूचना मिली कि वे भारत में, यानी दिल्ली एनसीआर में मौजूद हैं. इसके बाद कोर्ट ने नया समन जारी किया।  यह समन ऐसे समय चिपकाया गया है जब कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की तरफ से दिल्ली के सेंट्रल पार्क में झंडा फहराने की प्रोटेस्ट कॉल चर्चा में है. इस कार्यक्रम में ध्रुव राठी के शामिल होने की भी चर्चाएं हैं. अब सबकी नजर 17 अक्टूबर की सुनवाई पर है, जब कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई होनी है। 

कनॉट प्लेस में प्रदर्शन से पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में, दिल्ली पुलिस का एक्शन

नई दिल्ली  कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने शुक्रवार की शाम ये कार्रवाई की है। बता दें कि सीजेपी के सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद अभिजीत दिपके ने दिल्ली के कनॉट प्लेस पर स्थित सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन का ऐलान किया था। हालांकि, शुक्रवार को होने वाले इस प्रदर्शन से पहले ही पुलिस ने अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लिया है। सामने आई जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने दिपके को प्रिवेंटिव कस्टडी में लिया है। उन्हें सेंट्रल पार्क जाने के दौरान हिरासत में लिया गया। सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. वह तिरंगा मार्च के लिए घर से निकले थे और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क जा रहे थे. हिरासत में लिए जाने से पहले अभिजीत ने कहा कि वह अकेले हैं और अकेले ही जा रहे हैं. इस दौरान वह लगातार पूछते रहे कि वह प्रदर्शन के लिए कहां जाएंगे. वह बार-बार कहते रहे, "मैंने किया क्या है? दिल्ली पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अभिजीत को एहतियातन हिरासत में लिया है. पुलिस ने आज सुबह उन्हें दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत नोटिस भी दिया था. इसके बावजूद अभिजीत सेंट्रल पार्क जाने पर अड़े थे।  इससे पहले भी दिल्ली पुलिस ने अभिजीत को दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया था. उस समय उन्हें बॉन्ड डाउन किया गया था. कोर्ट ने 50 हजार रुपये के पीस बॉन्ड पर उन्हें रिहा किया था. साथ ही एक साल तक अशांति नहीं फैलाने का निर्देश देते हुए उनसे बॉन्ड पर हस्ताक्षर करवाए गए थे।  दिल्ली पुलिस ने दिपके को दिया था नोटिस अभिजीत दिपके के घर जाकर दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को 2 नोटिस दिया था। एक नोटिस नई दिल्ली की तरफ से दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत दिया गया है जिसमें बताया गया है कि वह सेंट्रल पार्क न आएं, वहां BNS की धारा 163 लागू है। दूसरा नोटिस साउथ वेस्ट दिल्ली पुलिस की तरफ से दिया गया था जिसमें अभिजीत को बताया गया है कि अभिजीत, आशुतोष और सौरव को बाउंड डाउन किया गया था जब एयरपोर्ट से एहतियातन हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश किया गया था और कोर्ट ने एक साल तक अशांति नहीं फैलाने को बोला था। पूरे सेंट्रल दिल्ली की किलेबंदी दिल्ली पुलिस शुक्रवार को पूरी तरह से तैयार है। कनॉट प्लेस और सेंट्रल पार्क के साथ साथ पूरे सेंट्रल दिल्ली की किलेबंदी कर दी गई है। इस पूरे इलाके में दिल्ली पुलिस के 6,000 से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं। CAPF की 220 कंपनियां पूरी तरह से रेडी हैं। सेंट्रल पार्क और राजीव चौक के आसपास 10 से ज्यादा नए CCTV कैमरे लगाए गए हैं। कनॉट प्लेस, राजीव चौक, सेंट्रल पार्क, जंतर-मंतर, पालिका बाजार समेत दिल्ली के अहम इलाकों में पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स पूरी तरह से मुस्दैत है। वहीं सेंट्रल पार्क के अंदर 7 लेयर की सिक्योरिटी की गई है। दूसरे जिलों से भी अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को बुलाया गया है। संसद मार्ग समेत कई जगह बैरिकेड सामने आई जानकारी के अनुसार, 5 हजार के करीब पुलिसकर्मी रिजर्व रखे गए हैं। पुलिस ने कॉनॉट प्लेस, पटेल चौक, ITO और संसद मार्ग समेत कई जगह बैरिकेड लगाए हैं। CJP के प्रोटेस्ट को देखते हुए NDMC ने सेंट्रल पार्क को आज कल के लिए बंद कर दिया है। पुलिस ने ये भी कहा है कि अगर प्रदर्शनकारी चाहें तो उन्हें दूसरी जगह पर तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है।