samacharsecretary.com

मोहासा-बाबई प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर और मेक इन इंडिया के विजन को करेगा साकार

म.प्र. नवकरणीय उपकरण निर्माण सेक्टर में मध्यप्रदेश बनेगा आत्मनिर्भर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से केन्द्र सरकार द्वारा नर्मदापुरम जिले के औद्योगिक क्षेत्र मोहासा-बाबई को मिली 'ग्रीन फील्ड मैन्युफैक्चरिंग जोन फॉर पॉवर एवं रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट' की सौगात प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे विद्युत एवं नवकरणीय ऊर्जा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की परिकल्पना को मूर्त रूप दिया जा सकेगा। भारत सरकार की इस पहल से मध्यप्रदेश न केवल इस क्षेत्र में अग्रणी बनेगा, बल्कि निवेश और रोजगार सृजन के नए अवसर सृजित होंगे। औद्योगिक इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन औद्योगिक क्षेत्र मोहासा-बाबई फेज-1 की 1678 एकड़ विकसित भूमि में से 884 एकड़ भूमि पर विद्युत एवं नवकरणीय ऊर्जा उपकरणों का विनिर्माण क्षेत्र विकसित किया गया है। इकाइयों को उद्योग संवर्धन नीति 2014 (संशोधित) के अतिरिक्त अनेक विशेष प्रोत्साहन दिए गए हैं। इन प्रोत्साहनों में पाँच वर्षों तक रियायती दरों पर बिजली की आपूर्ति, विद्युत शुल्क की प्रतिपूर्ति, पानी की आपूर्ति मात्र 25 रूपये प्रति किलोलीटर की दर पर, भूमि संबंधी सभी शुल्कों में राहत, न्यूनतम विकास शुल्क तथा प्रतीकात्मक राशि पर भूमि आवंटन जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। फेज-वन में 17,750 करोड़ का मिला निवेश राज्य शासन द्वारा आमंत्रित एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के तहत 29 निवेशकों से आवेदन प्राप्त हुए। विस्तृत परीक्षण और चर्चा के बाद 22 इकाइयों को 514.50 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इन इकाइयों से 17,750 करोड़ रूपये के निवेश और 21,777 लोगों के लिए रोजगार का सृजन प्रस्तावित है। वर्तमान में 6 वृहद इकाइयाँ मेसर्स यू एनर्जी प्रा.लि., मेसर्स लेण्डसमिल रिन्यूएबल्स प्रा.लि., मेसर्स लेण्डसमिल ग्रीन एनर्जी प्रा.लि., मेसर्स लेण्डसमिल ग्रीन इंडस्ट्रीज प्रा.लि., मेसर्स इन्सोलेशन ग्रीन एनर्जी प्रा.लि., मेसर्स रेज ग्रीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग प्रा.लि. सहित दो एमएसएमई इकाइयाँ मेसर्स सनकोसा एनर्जी प्रा.लि. एवं मेसर्स एक्लेक्टिक डिज़ाइन अपने भूखण्डों पर तेजी से निर्माण कार्य कर रही हैं। अन्य निवेशक भी अपनी इकाई स्थापना संबंधी आवश्यक कार्यवाही कर रहे हैं। फेज-2 का विस्तार: 750 एकड़ में नया विनिर्माण क्षेत्र विकसित मोहासा-बाबई फेज-1 की सफलता को देखते हुए राज्य शासन ने 30 जुलाई 2025 को फेज-2 विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत 1034 एकड़ भूमि में से 750 एकड़ पर विद्युत एवं नवकरणीय ऊर्जा उपकरणों का विनिर्माण क्षेत्र विस्तारित किया गया है। निवेशकों के लिये विशेष रियायतें फेज-2 में निवेशकों के लिए विशेष रियायतें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें प्रचलित भूमि मूल्य के केवल 25 प्रतिशत प्रीमियम पर भूखंड आवंटन, वास्तविक विकास शुल्क का 20 समान वार्षिक किश्तों में भुगतान, 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क की प्रतिपूर्ति और पानी की आपूर्ति 25 रूपये प्रति किलोलीटर की दर पर शामिल हैं। इस विस्तार से बड़े और छोटे दोनों स्तर के निवेशकों को आकर्षित होंगे, जिससे प्रदेश का औद्योगिक आधार और अधिक सशक्त होगा। मोहासा-बाबई औद्योगिक क्षेत्र के दोनों चरणों से प्रदेश विद्युत एवं नवकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर है। इन विनिर्माण क्षेत्रों से न केवल आवश्यक उपकरणों की आयात निर्भरता कम होगी, बल्कि प्रदेश को एक नई औद्योगिक पहचान भी मिलेगी। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे राष्ट्रीय अभियानों को मजबूत करती है और मध्यप्रदेश को भारत के ऊर्जा उपकरण निर्माण का हब बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हो रही है।  

प्रदेश में नीलाम किये गये मुख्य खनिज ब्लॉक में खनन संक्रियाएँ प्रारंभ किये जाने की समीक्षा

भोपाल  प्रमुख सचिव खनिज साधन श्री उमाकांत उमराव की अध्यक्षता में मंगलवार को आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में नीलाम किये गये मुख्य खनिज ब्लॉक, जिनमें चूना पत्थर, बॉक्साइट, आयरन, मैग्नीज, रॉक फॉस्फेट, कॉपर और अन्य कुल 103 खनिज ब्लॉकों में खनन संक्रियाएँ प्रारंभ किये जाने के संबंध में अधिमानी बोलीदारों के साथ समीक्षा बैठक हुई। प्रमुख सचिव श्री उमराव ने बताया कि समीक्षा बैठक का मूल उद्देश्य खनन संक्रियाएँ प्रारंभ करने के लिये आवश्यक वैधानिक अनुमति प्राप्त करने में अधिमानी बोलीदारों द्वारा की गयी कार्रवाई और उन्हें आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिये एक मंच प्रदान करना था। उन्होंने बताया कि वैधानिक अनुमति प्राप्त करने में लगने वाले समय में निरंतर कमी परिलक्षित हो रही है। विभाग द्वारा वैधानिक अनुमति प्राप्त करने में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिये खनन से संबंधित विभागों बोलीदारों के मध्य समन्वय स्थापित किया गया। उन्होंने कहा कि नीलाम किये गये खनिज ब्लॉक के संचालन प्रारंभ किये जाने में निरंतर वृद्धि हो रही है। बैठक में अधिमानी बोलीदार के अलावा वन, पर्यावरण एवं खनिज विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे। 

एक और वंदे भारत एक्सप्रेस आएगी, राजपुरा-मोहाली कनेक्शन होगा सुपरफास्ट!

नई दिल्ली  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने मंगलवार को राजपुरा-मोहाली के बीच नई रेलवे लाइन की घोषणा की। साथ ही फिरोजपुर कैंट-बाटिंडा-पटियाला-दिल्ली के मार्ग पर नई वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने के प्रस्ताव का भी खुलासा किया है। यह परियोजनाएं क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और यात्रा के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी। ANI की खबर के मुताबिक, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बताया कि पंजाब में रेलवे क्षेत्र में निवेश में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। जहां 2009 से 2014 के बीच यह निवेश सिर्फ ₹225 करोड़ था, वहीं अब यह बढ़कर ₹5,421 करोड़ हो गया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय केंद्रीय राज्य मंत्री (रेल) रवनीत सिंह बिट्टू को दिया, जिन्होंने इस परियोजना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।   486 किलोमीटर का सफर 6 घंटे 40 मिनट में  फिरोजपुर कैंट से दिल्ली के बीच चलने वाली नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन कुल 486 किलोमीटर की यात्रा सिर्फ 6 घंटे 40 मिनट में पुरी हो सकेगी। यह ट्रेन बुधवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी छह दिन उपलब्ध होगी। राजपुरा-मोहाली नई रेल लाइन रेल मंत्री ने कहा कि राज्य की राजधानी से सीधे और शॉर्ट रेल कनेक्टिविटी की काफी समय से मांग की जा रही थी। इसको अब पूरा करने का वक्त है। राजपुरा-मोहाली के बीच की यह लाइन चंडीगढ़ को अम्बाला-अमृतसर मेन लाइन पर स्थित सराय बंजारा स्टेशन के जरिये राज्य के बाकी हिस्सों से कनेक्ट करेगी। यह लाइन फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और पंजाब में एसएएस नगर से गुजरेगी। इस रूट की लंबाई 18 किलोमीटर है। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 443 करोड़ रुपये होगी।   नई रेल लाइन से फायदा इस लाइन के तैयार हो जाने पर राजपुरा और मोहाली के बीच सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी और सफर में करीब 66 किलोमीटर दूरी कम हो जाएगी। इससे इस रूट पर भारी ट्रैफिक से भी निजात पाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, टेक्सटाइल्स, मैनुफैक्चरिंग और कृषि सेक्टर को आगे बढ़ने में मदद हो सकेगी। इस एरिया से करीब कई टूरिस्ट प्लेस भी मौजूद हैं, जाहिर है, इसमें भी काफी तरक्की होगी। 

मध्यप्रदेश के संसाधन और ताइवान की तकनीक उद्योग क्षेत्र में नई मिसाल करेंगे प्रस्तुत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ताइवान के साथ नई साझेदारी की ओर अग्रसर मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव से ताइवान के प्रतिनिधि मंडल ने निवेश अवसरों पर की चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ताइवान की निर्माण तकनीक और मध्यप्रदेश की विशाल औद्योगिक तथा उपभोक्ता क्षमता मिलकर विकास, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगी। सेमीकंडक्टर, पीसीबी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्र मध्यप्रदेश और ताइवान सहयोग के नए केंद्र बन रहे हैं। ताइवान की तकनीक और मध्यप्रदेश के संसाधन मिलकर वैश्विक स्तर पर दृढ़ और प्रतिस्पर्धी उद्योग विकसित कर सकते हैं। आने वाला समय दोनों पक्षों के लिए अनंत संभावनाएं ला रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ताइवानी निवेश को आकर्षित करने और सफल बनाने के लिए पूरी सुविधा, नीतिगत समर्थन और प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और ताइवान के बीच व्यापार और निवेश अवसरों पर ताइवान व्यापार विकास परिषद और ताइवान आर्थिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के प्रतिनिधियों से मंत्रालय में चर्चा के दौरान यह बात कही। चर्चा में प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह सहित ताइवान विकास परिषद के डायरेक्टर जनरल श्री चुन यू चांग, सेकंड सेक्रेटरी श्री जिह शेंग वांग, ताइवान आर्थिक एवं सांस्कृति केन्द्र के निदेशक श्री विक लिन तथा ट्रेड प्रमोशन विशेषज्ञ सुश्री कीर्तन नांबियार शामिल हुईं। औद्योगिक साझेदारी के साथ ही शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी होगा आदान-प्रदान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप हम ताइवान के साथ एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में नए साझेदारी की ओर अग्रसर हो रहे हैं। ताइवान अपनी तकनीक और नवाचार में अग्रणी है और मध्यप्रदेश प्रचुर संसाधनों, कुशल मानव संसाधन और विभिन्न सेक्टर में अनंत संभावनाओं के साथ सहयोग का इच्छुक है। मध्यप्रदेश से ताइवान को मुख्य रूप से इलेक्ट्रानिक मशीनरी, फार्मास्युटिकल्स, रासायन तथा खाद्य पदार्थ निर्यात होते हैं, वहीं ताइवान से मध्यप्रदेश इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे, मशीनरी और सेमीकंडक्टर्स आयात करता है। ताइवान के प्रतिनिधि मंडल द्वारा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव में सक्रिय सहभागिता की गई। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर ने ताइवान के विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू किया है, जो शिक्षा, अनुसंधान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देगा। मध्यप्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति, संसाधनों और उद्योग सहयोगी नीतियों के कारण ताइवानी निवेशकों के लिए एक आदर्श गंतव्य है। ताइवान और मध्यप्रदेश एक स्पष्ट रोडमैप तैयार कर निवेश बढ़ाने की दिशा में अग्रसर होंगे।  

लव जिहाद का डरावना सच: इंदौर में आरोपी ने बदल दी लड़की की जिंदगी, कहा – तुम नमाज पढ़ा करो

इंदौर 'तुम मुस्लिमों की तरह रहा करो, हिंदू बनकर मत रहा करो। नमाज पढा करो। मैं मुस्लिम हूं। तुमसे दूसरी शादी कर लूंगा।' श्रमिक कॉलोनी (राऊ) निवासी दानिश मंसूरी हिंदू युवती को इसी तरह धमकाता था। उसने युवती का आपत्तिजनक वीडियो भी बना लिया। अलग-अलग होटलों में बुलाया और दुष्कर्म किया। युवती की सगाई हुई तो मंगेतर को वीडियो व मैसेज भेज कर रिश्ता तुड़वा दिया। जून में पीड़िता का रिश्ता हुआ तय राऊ क्षेत्र निवासी 22 वर्षीय पीड़िता एक स्टोर में नौकरी करती थी। इसी दौरान दानिश से दोस्ती हो गई। पीड़िता की मां हिंदू और पिता मुस्लिम है। हालांकि वह हिंदू धर्म मानती है। हिंदूओं की तरह रहती है और हिंदू देवी देवताओं की पूजा करती है। दानिश इससे इनकार करता था। उसने कहा कि तुम मुस्लिमों की तरह रहा करो। दानिश की शादी हो गई लेकिन वह दूसरी शादी करने का बोलता था। इसी वर्ष जून में पीड़िता का रिश्ता तय हो गया।   जबरदस्ती कर अश्लील वीडियो बनाया दानिश ने पीड़िता को धमकाया और युवती के मंगेतर को आपत्तिजनक मैसेज कर दिए। उसने अगस्त माह में मिलने के लिए राजेंद्र नगर स्थित एक होटल में बुलाया और जबरदस्ती कर अश्लील वीडियो बना लिया। इसके बाद पीड़िता को फूटी कोठी,सिरपुर क्षेत्र की अलग-अलग होटलों में बुलाकर शारीरिक संबंध बनाए। उसने पीड़िता के मंगेतर को भी वीडियो भेज दिए। हिंदू संगठन ने थाने का किया घेराव सोमवार रात घटना की जानकारी मिलने पर हिंदू संगठन का कार्यकर्ता अनिल पाटिल सहित 100 ज्यादा कार्यकर्ताओं ने द्वारकापुरी थाने का घेराव कर दानिश मंसूरी पर कायमी की मांग की। पुलिस के आनाकानी करने पर थाना घेरकर परिसर में ही बैठ गए। हनुमान चालिका का पाठ करने लगे। देर रात पुलिस को कायमी कर दानिश को पकड़ना पड़ा। पुलिस ने कमजोर धारा लगाए, पीड़िता ने चप्पल से पीटा पीड़िता का दानिश पर गुस्सा फूट पड़ा। उसने चप्पल से पिटाई कर दी। रोते हुए कहा तूने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। हिंदू संगठन के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कायमी की, लेकिन दुष्कर्म की धाराएं लगाई। पुलिस ने लव जिहाद की धारा लगाने में गड़बड़ी कर दी।

मंत्री टेटवाल से सिंगापुर के प्रतिनिधि मंडल ने भेंटकर कौशल विकास पर चर्चा की

भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री श्री गौतम टेटवाल से सिंगापुर के कौंसुल-जनरल (मुंबई) श्री चॉन्ग मिंग फूंग के नेतृत्व में आए प्रतिनिधि मंडल ने मंत्रालय में भेंट की। मंत्री श्री टेटवाल से प्रतिनिधि मंडल ने कौशल विकास, रोजगार के अवसरों और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कौशल विकास के क्षेत्र में नई उड़ान भर रहा है। प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर के गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सिंगापुर के साथ सहयोग से प्रदेश के युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने और उन्हें नए रोजगार अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रतिनिधि मंडल में कौंसुल जनरल श्री जेरोम वॉन्ग और रिसर्च एवं सूचना विश्लेषक सुश्री ऋद्धि कोठावाले भी शामिल थे। उन्होंने मध्यप्रदेश में कौशल विकास और रोजगार की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए और राज्य सरकार के आमंत्रण और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क जैसे प्रोजेक्ट से जुड़ना गर्व की बात है और वे भविष्य में ज्ञान साझेदार के रूप में सक्रिय सहयोग करने के लिए तत्पर हैं। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि प्रदेश के युवाओं की क्षमता और कौशल को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने के लिए किए जा रहे प्रयास देश में मिसाल बन रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सिंगापुर के सहयोग से प्रदेश में कौशल विकास की गुणवत्ता और अवसरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मंत्री श्री टेटवाल ने प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट किए और राज्य की नीतियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कौशल विकास केंद्रों की सफलताओं के बारे में जानकारी भी दी। सिंगापुर का प्रतिनिधि मंडल 24 सितंबर को संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क का भ्रमण करेगा। इस दौरान वे पार्क की विभिन्न ट्रेडों, अत्याधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्थाओं और वैश्विक स्तर की सुविधाओं का अवलोकन करेंगे तथा प्रशिक्षण केंद्र की सभी गतिविधियों और नवाचारों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे। ग्लोबल स्किल्स पार्क के सीईओ श्री गिरीश शर्मा ने संस्थान की उपलब्धियों, योजनाओं और नवाचारों की जानकारी दी। इस अवसर पर ग्लोबल स्किल्स पार्क के ट्रेड्स और नवाचारों पर आधारित शॉर्ट फिल्म का प्रदर्शन किया।  

शिक्षा विभाग ने किया ऐलान, पश्चिम बंगाल के स्कूल रहेंगे बंद, जानिए क्यों!

कोलकाता कोलकाता और दक्षिण बंगाल के अन्य जिलों में भारी बारिश के कारण जन-जीवन ठप्प हो जाने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित समय से दो दिन पहले ही दुर्गा पूजा की छुट्टियां घोषित कर दी। बिजली के करंट से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जलभराव वाली सड़कों से दूर रहने और स्कूलों में छुट्टियां करने या ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश के बाद, राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने घोषणा की कि सभी सरकारी शिक्षण संस्थान 24 और 25 सितंबर को बंद रहेंगे।   24 और 25 सितंबर को सभी शिक्षण संस्थान बंद शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने एक्स हैंडल पर ट्वीट कर कहा कि राज्य में अभूतपूर्व आपदा जैसी स्थिति बनी हुई है। मौजूदा स्थिति में छात्रों को राहत देने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मुख्यमंत्री की सलाह के अनुसार, कल और परसों, यानी 24 और 25 सितंबर को सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा मंत्री ने कही ये बातें मंत्री ने कहा कि अनुरोध है कि इस आपदा के दौरान, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी अपने ज़रूरी और अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए घर से काम करें। मंत्री ने आगे कहा, "चूँकि दुर्गा पूजा की छुट्टियाँ 26 सितंबर से शुरू होने वाली हैं, इसलिए प्रभावी रूप से ये छुट्टियाँ कल (बुधवार) से शुरू होंगी। मैं सभी को पूजा की शुभकामनाएं देता हूं। इस आपदा में अपनी जान गंवाने वाले मेरे साथी नागरिकों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। कई इलाकों में भारी बारिश कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में मंगलवार को सामान्य जनजीवन लगभग ठप्प हो गया क्योंकि रात भर हुई भारी बारिश के कारण बड़े पैमाने पर बाढ़ आ गई, जिससे यातायात, सार्वजनिक परिवहन और दैनिक गतिविधियाँ ठप्प हो गईं। शहर में बिजली का झटका लगने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। शहर के कुछ हिस्सों में कुछ ही घंटों में 330 मिमी से ज़्यादा बारिश हुई, जबकि शहर और उसके उपनगरों के ज़्यादातर हिस्सों में औसतन 250 मिमी से ज़्यादा बारिश हुई।

नर्सिंग छात्रा की मौत से हड़कंप! बीएमएचआरसी में लापरवाही का आरोप, निदेशक के खिलाफ सख्त कदम की मांग

भोपाल भोपाल मेमोरियल हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में प्रथम वर्ष की नर्सिंग छात्रा की मौत से हड़कंप मच गया है। छात्रा की मृत्यु का कारण अस्पताल प्रशासन और प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव की गंभीर लापरवाही बताया जा रहा है। इस घटना के बाद छात्रों और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में धरना शुरू कर दिया है। गंदा पानी और खराब व्यवस्था नर्सिंग छात्र लगातार हास्टल में गंदे और दूषित पानी, खराब भोजन और साफ-सफाई की समस्याओं की शिकायत करते आ रहे थे। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष अक्षय तोमर ने आरोप लगाया कि छात्रा की तबीयत खराब होने के बावजूद उसे क्लिनिकल ड्यूटी के लिए मजबूर किया गया। हालत बिगड़ने पर भी उसे उचित इलाज देने की बजाय छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। प्रशासन की इस लापरवाही ने एक होनहार छात्रा की जान ले ली। बीएमएचआरसी में कुप्रबंधन के आरोप एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि बीएमएचआरसी भोपाल का सबसे पुराना और बड़ा अस्पताल है, कुप्रबंधन के कारण बदहाल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव का ध्यान अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नहीं है। वे टेंडरों और अपने पुत्र के निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के प्रचार में ज्यादा सक्रिय रहती हैं। यही कारण है कि अस्पताल की सेवाएं लगातार गिर रही हैं। प्रभारी निदेशक को तत्काल पद से हटाया जाए, छात्रा की मौत की उच्च-स्तरीय जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और नर्सिंग छात्रों को सुरक्षित वातावरण मिले। एनएसयूआई ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। निदेशक ने बयान जारी करके दी यह सफाई बीएमएचआरसी प्रशासन को 22 सितंबर को पता चला कि संस्थान के नर्सिंग कॉलेज के फर्स्ट इयर की छात्रा शुभांगीनी दशहरे का भोपाल के एक अस्पताल में देहांत हो गया है। पूरे बीएमएचआरसी के लिए यह दुख का समय है। बीएमएचआरसी प्रबंधन नर्सिंग कॉलेज की छात्रा शुभांगीनी के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता है। संस्था की पूरी टीम इस दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवार के साथ खड़ी है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती है। आज प्रातः जब नर्सिंग कॉलेज के कुछ विद्यार्थी प्रशासनिक परिसर में अपनी बात रखने आए, तो बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने स्वयं उनसे मुलाकात की। विद्यार्थियों की समस्त बातों को गंभीरता से सुना गया और त्वरित कार्यवाही का भरोसा भी दिलाया गया। डॉ मनीषा श्रीवास्तव, प्रभारी निदेशक, बीएमएचआरसी ने बताया विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए आरोप कि संस्था की कैंटीन में मिलने वाले भोजन और पानी की गुणवत्ता खराब है, पूरी तरह निराधार हैं। संस्थान में पीने के लिए उपयोग होने वाले पानी की समय-समय पर वैज्ञानिक जांच कराई जाती है। हाल ही में 9 सितंबर 2025 को कराई गई जांच में पानी पूरी तरह सुरक्षित पाया गया।  

पराली जलाने के मामले बढ़े, पंजाब में 14 FIR, जानें कौन सा जिला सबसे अधिक प्रभावित

पंजाब  पंजाब में धान की कटाई शुरू होते ही पराली जलाने के मामले एक बार फिर से सामने आने लगे हैं। पंजाब सरकार द्वारा सैटेलाइट मॉनिटरिंग के बाद पराली जलाने की संख्या 62 हो गई है। सोमवार को अमृतसर जिले में पराली जलाने के तीन मामले, कपूरथला में एक और तरनतारन में दो मामले सामने आए हैं। किस जिले में कितने मामले? पंजाब में 15 सितंबर से लेकर अब तक पराली जलाने के कुल 62 मामले सामने आए हैं। इनमें से सबसे अधिक 38 मामले अमृतसर जिले से सामने आए हैं। वहीं बरनाला में दो, बठिंडा में एक, फिरोजपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, संगरूर, एसएएस नगर व मालेरकोटला में एक-एक, पटियाला में सात और तरनतारन में भी सात मामले हुए हैं। प्रशासन ने क्या कार्रवाई की? पंजाब में अधिकारियों की ओर से पराली जलाने के 27 मामलों में 1 लाख 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस जुर्माना राशि में से 50 हजार रुपये की वसूली भी कर ली गई है। वहीं, पुलिस की ओर से ऐसे 14 मामलों में बीएनएस की धारा 223 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। किसान क्यों जलाते हैं पराली? दरअसल, धान की कटाई के बाद रबी की फसल- गेहूं के बुआई के लिए किसानों के पास में काफी कम समय होता है। इसी कारण से कुछ किसान अगली फसल को बोने के लिए पराली को जल्दी से साफ करने के लिए अपने खेतों में आग लगा देते हैं। अक्टूबर और नवंबर महीने में धान की कटाई के बाद दिल्ली में वायु प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। ऐसा होने के लिए अक्सर पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं को जिम्मेदार बताया जाता है। बीते साल पराली जलाने के कितने मामले आए? साल 2024 में, पंजाब में पराली जलाने की कुल 10,909 घटनाएं सामने आई थीं। वहीं, साल 2023 में पराली जलाने की घटनाएं 36,663 थीं। इस हिसाब से पराली जलाने की घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में नजर आएगा पृथ्वी के प्रति उत्तर प्रदेश का संकल्प

सस्टेनेबिलिटी की दिशा में अग्रसर यूपी, पानी बचाने से लेकर वनों के विस्तार तक की अनोखी पहल आधुनिक सिंचाई तकनीक, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और क्लाइमेट रेज़िलिएंस पर फोकस हॉल नंबर 8 में सिंचाई, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग करेंगे उपलब्धियों का प्रदर्शन  25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में यूपीआईटीएस 2025 का भव्य आयोजन  लखनऊ उत्तर प्रदेश को “नए भारत का ग्रोथ इंजन” बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस 2025) राज्य की आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक ताकत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने जा रहा है। 25 से 29 सितंबर तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाले इस भव्य आयोजन का यह तीसरा संस्करण होगा, जिसमें व्यापार, उद्योग, संस्कृति, खानपान, तकनीकी नवाचार के अतिरिक्त इस बार सस्टेनेबिलिटी की अनूठी झलक देखने को मिलेगी। योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष में अपनी प्रतिबद्धता का एक सशक्त संदेश देते हुए यहां 'उत्तर प्रदेश प्लेजेस टू द प्लैनेट' यानी पृथ्वी के प्रति उत्तर प्रदेश का संकल्प भी लिया है। यूपीआईटीएस 2025 का यह पहलू इस बात का सशक्त उदाहरण है कि कैसे उत्तर प्रदेश खुद को भारत के ग्रोथ इंजन के साथ-साथ ग्रीन इंजन के रूप में भी स्थापित कर रहा है। हॉल नंबर 8 में होगा उपलब्धियों का प्रदर्शन इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर के बीच आयोजित होने जा रहे इस आयोजन में हॉल नंबर 8 का दृश्य कुछ खास होगा, जहां सिंचाई, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग अपनी योजनाओं और उपलब्धियों का प्रदर्शन करेंगे। यहां आगंतुकों को दिखाया जाएगा कि किस तरह यूपी आधुनिक सिंचाई समाधानों के जरिए न केवल किसानों की उपज बढ़ा रहा है, बल्कि पानी की भारी बचत भी कर रहा है। यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त कर रही है। इस मौके पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इस अभियान ने अब तक प्रदेश में करीब पांच लाख एकड़ तक वन आच्छादन बढ़ाने में सफलता पाई है। यह उपलब्धि न केवल पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में क्रांतिकारी कदम है, बल्कि हर नागरिक को हरियाली से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास भी है। ग्रीन फ्यूचर की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश  कार्यक्रम में यह भी बताया जाएगा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश ने विकास और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन साधने का ठोस मॉडल तैयार किया है। सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को ध्यान में रखते हुए राज्य ग्रीन फ्यूचर की ओर तेजी से अग्रसर है। आयोजन समिति के अनुसार, इस सेक्शन का उद्देश्य आगंतुकों को प्रेरित करना और उन्हें यह विश्वास दिलाना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि यह मॉडल न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए क्लाइमेट जस्टिस और सतत विकास की दिशा में प्रेरक साबित होगा।  पांच दिनों तक बिजनेस, संस्कृति और क्रिएटिविटी का दिखेगा संगम उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का मंच सज चुका है, जहां 5 दिनों तक व्यापार, संस्कृति, खानपान और रचनात्मकता का अद्भुत मेल देखने को मिलेगा। इस मेगा इवेंट में उत्तर प्रदेश अपनी ताकत और संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य राज्य को ग्लोबल सोर्सिंग हब के रूप में स्थापित करना है, जहां छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों से लेकर पारंपरिक वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) के खजाने, आधुनिक तकनीक, हस्तशिल्प और प्रदेश की विविधतापूर्ण व्यंजन संस्कृति सब एक ही छत के नीचे दिखाई देंगे। इस बार आयोजन में एमएसएमई और स्टार्टअप्स को विशेष प्लेटफार्म दिया गया है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीदारों और निवेशकों से जुड़ सकें। वहीं, मेगा इंडस्ट्री सेक्टर की कंपनियां भी अपने उत्पाद और सेवाओं का प्रदर्शन करेंगी। व्यापारियों, निवेशकों और खरीदारों के लिए यह आयोजन न केवल नए अवसरों का द्वार खोलेगा, बल्कि 'मेक इन यूपी' की अवधारणा को सशक्त भी करेगा। प्रदर्शनी में आने वाले विज़िटर्स को खरीदारी और बिज़नेस डील्स के साथ-साथ यूपी के क्राफ्ट, कल्चर और कुजीन का लुत्फ भी मिलेगा। प्रदेश के पारंपरिक शिल्प, पीतल, जरी-ज़रदोज़ी, बनारसी साड़ी से लेकर आधुनिक तकनीकी नवाचारों तक की झलक यहां देखने को मिलेगी। साथ ही, आगंतुकों को अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल की पाक विरासत का स्वाद चखने का मौका मिलेगा।