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भारत का डर और इजरायल की चिंता: पाक-सऊदी रक्षा गठबंधन की वजहें

रियाद सऊदी तेल का राजा है, लेकिन सुरक्षा के मामले में कमजोर। सालों से ईरान उसका सबसे बड़ा दुश्मन रहा। वहीं पाकिस्तान हर तरह से भारत के सामने बौना नजर आता है। दोनों ही मुस्लिम देश एक दूसरे को ढाल की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं।  रियाद के यमामा पैलेस में एक ऐतिहासिक डील देखने को मिली। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गले मिलकर 'स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' (एसएमडीए) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता साफ कहता है: एक देश पर मतलब दोनों पर हमला। लेकिन यह सिर्फ कागजों का खेल नहीं, बल्कि दो देशों की गहरी मजबूरी का नतीजा है। एक तरफ पाकिस्तान, जो परमाणु शक्ति होने के बावजूद भारत के सामने बेबस महसूस करता है। दूसरी तरफ सऊदी अरब है, जो ईरान की पुरानी दुश्मनी से जूझता था, लेकिन अब इजरायल को सबसे बड़ा खतरा मानने लगा है। खाड़ी के देशों के लिए यह समझौता एक नई ढाल कहा जा रहा है, जो अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर सवाल उठाने के बाद आई। आइए, विस्तार से समझते हैं कि यह समझौता क्यों हुआ, कैसे हुआ, और इसके पीछे की सच्ची कहानी क्या है। पाकिस्तान का भारत डर: परमाणु ताकत, लेकिन कन्वेंशनल कमजोरी पाकिस्तान दुनिया का छठा सबसे बड़ा परमाणु हथियार संपन्न देश है। उसके पास करीब 170 परमाणु हथियार हैं, जो किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं। लेकिन कन्वेंशनल यानी पारंपरिक जंग में भारत के सामने यह बौना नजर आता है। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 के मुताबिक, भारत की मिलिट्री रैंकिंग दुनिया में चौथी है, जबकि पाकिस्तान 12वीं पर खिसक गया है। सैनिकों की तुलना: भारत के पास 14.6 लाख एक्टिव सैनिक हैं, पाकिस्तान के सिर्फ 6.5 लाख। भारत के रिजर्व फोर्स 11.5 लाख हैं, पाकिस्तान के सिर्फ 5 लाख। हथियारों का फर्क: भारत के पास 4,200 से ज्यादा टैंक, 2,200 से ज्यादा लड़ाकू विमान और 290 से ज्यादा नौसैनिक जहाज हैं (जिनमें 2 एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल)। पाकिस्तान के पास 2,600 टैंक, 1,400 विमान और महज 121 जहाज। बजट का अंतर: भारत का डिफेंस बजट 2025-26 के लिए 79 बिलियन डॉलर (करीब 6.8 लाख करोड़ रुपये) है, जो पाकिस्तान के 10 बिलियन डॉलर से 8 गुना ज्यादा। यह फर्क सिर्फ आंकड़ों में नहीं, जमीनी हकीकत में भी दिखा। मई में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया। 7 मई को भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और पंजाब प्रांत सहित कई इलाकों में 9 ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। सकड़ों आतंकी मारे गए। चार दिनों तक चली इस जंग में पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की, लेकिन फिर भारत ने अपनी ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान के अनेकों एयरबेस उड़ा दिए। मजबूरन पाकिस्तान को 10 मई को सीजफायर की गुहार लगानी पड़ी। इस संघर्ष ने पाकिस्तान को एहसास दिलाया कि कन्वेंशनल ताकत में भारत से मुकाबला मुश्किल है। परमाणु हथियार आखिरी हथियार हैं, लेकिन परमाणु जंग शुरू होते ही सब कुछ तबाह हो सकता है। इसलिए पाकिस्तान को एक मजबूत दोस्त की जरूरत थी, जो भारत के खिलाफ बैलेंस बनाए। सऊदी अरब, जो पाकिस्तान को आर्थिक और मिलिट्री मदद देता रहा है, परफेक्ट चॉइस था। सऊदी का डर: ईरान से इजरायल तक, खतरा बढ़ा सऊदी अरब तेल का राजा है, लेकिन सुरक्षा के मामले में कमजोर। सालों से ईरान उसका सबसे बड़ा दुश्मन रहा। यहां एक बड़ी ही दिलचस्प बात ये है कि इजरायल और ईरान एक दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन हैं। लेकिन दोनों की सऊदी अरब से नहीं बनती। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 2019 में सऊदी के आरामको प्लांट पर ड्रोन हमला किया था। 2025 में भी इजरायल-ईरान से टेंशन बढ़ी। लेकिन असली टर्निंग पॉइंट आया 9 सितंबर 2025 को। कतर की राजधानी दोहा के लीक्तैफिया इलाके में इजरायली एयरस्ट्राइक हुई। हमला हमास के नेताओं पर था, जो कतर सरकार के रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में सीजफायर प्रपोजल पर मीटिंग कर रहे थे। हमले में 5 हमास मेंबर, 1 कतरी सिक्योरिटी ऑफिसर और नागरिक मारे गए। कतर ने इसे 'स्टेट टेररिज्म' कहा। अमेरिका ने कतर को मेजर नॉन-नाटो एली बनाया है और दोहा में उसका अल उदेद एयरबेस है जोकि मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा यूएस बेस। फिर भी, इजरायल ने हमला कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें पहले से खबर नहीं थी। यह हमला खाड़ी देशों के लिए बड़ा झटका था। कतर ने इजरायल को अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का दोषी ठहराया। 15 सितंबर को दोहा में अरब-इस्लामिक समिट हुई, जहां सऊदी क्राउन प्रिंस समेत कई लीडर्स ने इजरायल की निंदा की। लेकिन कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ। सऊदी को लगा कि अमेरिकी सुरक्षा गारंटी भरोसेमंद नहीं रही। ईरान पुराना खतरा था, लेकिन अब इजरायल ने जगह ले ली। चैथम हाउस के डायरेक्टर सनम वकील कहते हैं, "गल्फ स्टेट्स अब इजरायल को सबसे बड़ा सिक्योरिटी थ्रेट मानते हैं।" इजरायल के हमले ने अरब देशों को भड़का दिया यह समझौता इजरायल के प्रति एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इजरायल को मध्य पूर्व का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश माना जाता है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर हमले के बाद से इजरायल ने ईरान, लेबनान, फिलिस्तीनी क्षेत्रों, कतर, सीरिया और यमन में व्यापक सैन्य कार्रवाई की है। इस महीने की शुरुआत में कतर पर इजरायल के हमले ने अरब देशों को भड़का दिया। एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, "यह समझौता किसी विशिष्ट देश या घटना के जवाब में नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गहरे सहयोग को संस्थागत रूप देने का कदम है।" हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्रीय तनावों के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है।  

बड़ी सफलता! छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने नक्सली ठिकाना ध्वस्त किया, तीन इनामी नक्सली मारे गए

रायपुर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा और बीजापुर जिलों में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। दो अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 12 लाख रुपए के इनामी तीन माओवादी मारे गए, जिनमें एक महिला माओवादी भी शामिल है। दोनों ही मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक सामग्री और दस्तावेज भी बरामद किए हैं। सुकमा जिले में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। इस दौरान 5 लाख की इनामी महिला माओवादी बूस्की नुप्पों (35) मारी गई। वह मलांगीर एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य (एसीएम) थी और सुकमा एवं दंतेवाड़ा में दर्ज 9 गंभीर मामलों की आरोपी थी। इसके पास से 315 बोर रायफल, रायफल कारतूस, वायरलेस सेट, डेटोनेटर, कोर्डेक्स वायर, जिलेटिन रॉड, पिट्ठू बैग, बारूद, रेडियो, बंडा, नक्सली साहित्य एवं दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद की गई है। सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि विश्वसनीय सूचना के आधार पर डीआरजी की टीम ने जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें यह सफलता मिली। वहीं, बीजापुर जिले की मुठभेड़ में दो इनामी नक्सली मारे गए। यह मुठभेड़ 17 सितंबर को हुई। बीजापुर के दक्षिण-पश्चिमी जंगलों में भी माओवादियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में दो इनामी माओवादी ढेर कर दिए गए। ये दोनों हाल ही में ग्रामीणों और एक शिक्षादूत की हत्या में शामिल थे। मारे गए माओवादियों की पहचान रघु हपका (33) के रूप में हुई है। इसके ऊपर 5 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। दूसरे माओवादी की पहचान सुक्कु हेमला (32) के रूप में हुई है, जो बीजापुर थाना का रहने वाला था। इसके ऊपर 2 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। इनके पास से 303 रायफल, मैग्जीन, जिंदा कारतूस, बीजीएल लांचर, सेल, बैटरी, कार्डेक्स वायर, सेफ्टी फ्यूज, पिट्ठू बैग, माओवादी वर्दी, दवाइयां और अन्य नक्सली सामग्री बरामद हुई है। बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा 202 एवं 205 की टीम ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन में इन दोनों इनामी माओवादियों को ढेर किया।

भारत में पहुंची ‘समुद्र की रानी’ from बांग्लादेश, लोग उत्साहित, दुकानदार हैं टेंशन में

कोलकाता  दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश से हिल्सा मछली, जिसे समुद्र की रानी भी कहा जाता है, की पहली खेप भारत-बांग्लादेश सीमा पर पहुंच चुकी है। आठ ट्रकों में करीब 32 टन मछली भारत आई है। बांग्लादेश ने हाल ही में त्योहारों को ध्यान में रखते हुए 1200 टन हिल्सा मछली के निर्यात को मंजूरी दी थी। यह आपूर्ति 16 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच होगी। प्रत्येक ट्रक में पद्मा नदी की लगभग चार टन मछलियां लदी हैं। मछली आयातक संघ के सचिव सैयद अनवर मकसूद ने बताया कि यह खेप थोक बाजारों में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि एक किलो 'पद्मा हिल्सा' की कीमत ग्राहकों के लिए लगभग 1800 रुपये होगी। मकसूद ने आगे कहा कि अब लगभग हर दिन बांग्लादेश से मछलियां कोलकाता के बाजारों में आएंगी। खुदरा विक्रेताओं में तनाव इस कीमती खेप ने मछली प्रेमियों और व्यापारियों में उत्साह पैदा किया है, खासकर पद्मा नदी की हिल्सा के अनोखे स्वाद के कारण। हालांकि, ऊंची कीमतों के चलते खुदरा विक्रेता चिंतित हैं। सुबह-सुबह नीलामी के लिए जुटे खुदरा विक्रेताओं ने ऊंची दरों पर चिंता जताई। एक स्थानीय विक्रेता ने कहा कि मछली की गुणवत्ता शानदार है, लेकिन इसकी कीमत इतनी अधिक है कि इससे ज्यादा मुनाफा कमाने की उम्मीद नहीं है। अगर लोग इतनी ऊंची कीमत पर मछली खरीदेंगे, तभी हम कुछ लाभ कमा पाएंगे। खुदरा बाजार में कीमतों के और बढ़ने की संभावना है, और अनुमान है कि कीमत 2000 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक हो सकती है। इन मछलियों का आकार 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक बताया जा रहा है। एक अन्य विक्रेता ने स्थानीय मछलियों से प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए कहा कि पहले कुछ लोगों ने गुजरात से हिल्सा मंगवाई थी। दोनों का स्वाद अलग है, और बांग्लादेशी मछली की मांग हमेशा ज्यादा रहती है, लेकिन इस बार कीमत बहुत अधिक है। क्या बोले अधिकारी? अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मछली की यह खेप उसकी निर्यात नीति 2024–27 के तहत होनी चाहिए, जिसमें न्यूनतम निर्यात मूल्य 12.5 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम निर्धारित है। इस मंजूरी की वैधता 16 सितंबर से 5 अक्टूबर तक है।  

सोशल मीडिया पर बदलाव: अनिल विज ने ‘X’ बायो से हटाया मंत्री पद का ज़िक्र

अंबाला  हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने बुधवार देर रात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बायो में बदलाव करते हुए मिनिस्टर (Minister) शब्द हटा दिया। पहले उनका बायो अनिल विज मिनिस्टर हरियाणा इंडिया (Anil Vij Minister Haryana, India) लिखा था, जिसे अब बदलकर अनिल विज अंबाला कैंट हरियाणा इंडिया (Anil Vij Ambala Cantt Haryana, India) कर दिया गया है। बीजेपी के बेबाक छवि वाले नेता अनिल विज सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर करते रहे हैं, हालांकि पार्टी नेतृत्व के प्रति असंतोष पर वह सीधी टिप्पणी करने से बचते हैं। हाल ही में उन्होंने अंबाला छावनी में अपनी ही पार्टी पर निशाना साधते हुए लिखा था, “अंबाला छावनी में कुछ लोग ऊपर वालों की कृपा से समानांतर भाजपा चला रहे हैं। हमें क्या करना चाहिए? पार्टी को भारी नुकसान हो रहा है।” उन्होंने अपने समर्थकों से इस पर सुझाव भी मांगे थे, लेकिन बाद में इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि इससे पहले भी अनिल विज अपने सोशल मीडिया बायो में बदलाव कर सुर्खियां बटोर चुके हैं। पिछले साल उन्होंने अपने ‘X’ हैंडल से ‘मोदी का परिवार’ टैगलाइन हटा दी थी। हालांकि बाद में इसे वापस जोड़ते हुए स्पष्टीकरण जारी किया और कहा कि वह भाजपा के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। इस बार ‘Minister’ शब्द हटाने को लेकर भी उनके रुख और इरादों पर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विज ही टैग हैः अनिल विज बदलाव को लेकर जब द ट्रिब्यून ने उनसे बात की तो विज ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ‘Minister’ शब्द लोकप्रियता के लिए नहीं रखा था। उन्होंने कहा, “मैं अपनी व्यूअरशिप और फॉलोअर्स को मंत्री पद के नाम से नहीं बढ़ाना चाहता। मेरे फॉलोअर्स तब ज्यादा तेजी से बढ़ रहे थे, जब बायो में ‘Minister’ टैग नहीं था। अब ‘विज’ ही एक टैग है, मुझे किसी और टैग की जरूरत नहीं।” विज ने बताया कि करीब एक साल पहले उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट से भी ‘Minister’ टैग हटा दिया था।

Maruti की बड़ी घोषणा: S-Presso और Wagon R की कीमत में भारी कटौती, अब और सस्ती हुईं कारें

मुंबई  देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने आज अपने कारों की कीमतों में भारी कटौती का ऐलान किया है. कंपनी ने घोषणा की है कि, मारुति वैगनआर से लेकर ऑल्टो और इग्निस जैसी छोटी कारों की कीमत में तकरीबन 1.29 लाख रुपये तक की कटौती की गई है. कारों की कीमत में ये कटौती आगामी 22 सितंबर से लागू होगी.  मारुति सुजुकी द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि, हाल ही में हुए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST Reforms) सुधारों का फायदा ग्राहकों तक सीधे पहुंचाया जाएगा. जिसके तहत कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो में शामिल मॉडलों की कीमत में कटौती की घोषणा की है. तो आइये देखें किस कार के दाम में कितनी कटौती की गई है.  किस कार की कीमत में कितनी कटौती: मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के सीनियर एक्जीक्यूटिव ऑफिसर, (मार्केटिंग एंड सेल्स) पार्थो बनर्जी ने आज प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि, कारों की कीमत में कटौती हालिया जीएसटी सुधारों के तहत की गई है. कीमतों में कटौती के चलते वाहन के फीचर्स और टेक्नोलॉजी इत्यादि में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है. इस नए प्राइस अपडेट के बाद अब ऑल्टो के10 मारुति सुजुकी की सबसे सस्ती कार नहीं रही है. बल्कि अब कंपनी के पोर्टफोलियो को Maruti S-Presso सबसे सस्ती कार हो गई है. इस कार की कीमत में सबसे ज्यादा 1,29,600 रुपये की कटौती की गई है. यहां पर कारों की एक्स-शोरूम कीमत दी गई है.  अन्य कारों की कीमत में कटौती मारुति सुजुकी ने अपनी मशहूर कार स्विफ्ट की कीमत में 84,600 रुपये की कटौती का ऐलान किया है. अब स्विफ्ट की शुरुआती कीमत केवल 5.79 लाख रुपये हो गई है. बता दें कि, हाल ही में स्विफ्ट के थर्ड जेनरेशन मॉडल को लॉन्च किया गया था. उस वक्त इस कार को 6.49 लाख रुपये में पेश किया गया था.  इसके अलावा बलेनो के दाम 86,100 रुपये तक घट गए हैं. इसकी शुरुआती कीमत केवल 5.99 लाख रुपये रह गई है. हालिया लॉन्च कंपनी की पहली 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग वाली कार मारुति डिजायर की कीमत में भी कंपनी ने कटौती की है. इस कार के कीमत में अधिकतम 87,700 रुपये की कटौती की गई है. अब मारुति डिजायर केवल 6.26 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में आती है.  यूटिलिटी व्हीकल रेंज में भी भारी कटौती मारुति सुजुकी ने अपने एसयूवी और एमपीवी रेंज की कीमतों में भी भारी कटौती की है. कंपनी की सबसे सस्ती एसयूवी Fronx की कीमत में 1,12,600 रुपये की कटौती की गई है. अब फ्रोंक्स की शुरुआती कीमत 6.85 लाख रुपये हो गई है. इसके अलावा ब्रेजा के दाम 1,12,700 रुपये तक घट गए हैं, अब आप ब्रेजा को 8.26 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में घर ला सकते हैं.  एमपीवी की बात करें तो Maruti Ertiga की कीमत में 46,400 रुपये की कटौती की गई है. इसकी शुरुआती कीमत अब 8.80 लाख रुपये है. वहीं XL6 की खरीद पर ग्राहक 52,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं. अब एसयूवी स्टाइल वाली ये एमपीवी 11.52 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में आती है. इसके अलावा वैन सेग्मेंट की Maruti Eeco की कीमत 68,000 रुपये घट कर केवल 5.18 लाख रुपये रह गई है. GST स्लैब क्या सुधार हुआ है? बीते 4 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक में फैसला लिया गया था कि, अब देश में चार के बजाय केवल दो जीएसटी स्लैब (5% और 18%) की रहेंगे. इसके अलावा लग्ज़री और सिन गुड्स पर 40% जीएसटी लागू होगा. इस नए स्ट्रक्चर के तहत 4,000 मिमी से कम लंबाई वाली 1,200 सीसी तक की पेट्रोल कारें और 1,500 सीसी तक की डीजल कारों पर केवल 18% जीएसटी लगेगी. पहले इन कारों पर 28% जीएसटी लागू होता है.  वहीं 4 मीटर से लंबी और लग्ज़री सेग्मेंट की कारें 40% जीएसटी के दायरे में आएंगी. लग्ज़री कारों की कीमत में भी भारी कटौती हुई है. क्योंकि पहले इन पर 28% जीएसटी और तकरीबन 22% सेस (Cess) लगता था. जिसके बाद कुल टैक्स लगभग 50% हो जाता था. लेकिन अब इन पर कोई अतिरिक्त सेस या उपकर नहीं लगाया जा रहा है. 

भोपाल को मेट्रो की सौगात: अक्टूबर से शुरू होगी सेवा, हाईटेक डिपो बनकर तैयार

भोपाल  अक्टूबर में भोपाल मेट्रो(Bhopal Metro) का कमर्शियल रन शुरू होने के साथ ही सुभाष नगर डिपो का उपयोग बढ़ जाएगा। अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ डिजाइन किए इस डिपो की छत पर सोलर पैनल लगाने की योजना है ताकि ऊर्जा की जरूरतों को पूरा कर सके। इसे एक पर्यावरण-अनुकूल डिपो बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह डिपो मेट्रो के ऑरेंज लाइन (करोद से एम्स) के लिए बनाया है। 140 करोड़ रुपए हुए खर्च सुभाष नगर डिपो का निर्माण जुलाई 2023 में पूरा हो गया था। यह मेट्रो परियोजना के पहले चरण में सबसे पहले पूरे होने वाले काम में से एक था। यह डिपो सुभाष नगर में स्थित है. जो कि ऑरेंज लाइन के एक छोर के पास है। यह ट्रेनों की आवाजाही को आसान बनाता है। इसमें कई रैम्प और ट्रैक बनाए गए हैं जो मेट्रो ट्रेनों को मुख्य लाइन से डिपो तक लाते और ले जाते हैं। भोपाल को मिलेंगे 27 रैक सुभाष नगर मेट्रो डिपों में मेट्रो ट्रेनों की दैनिक जांच, मरम्मत और धुलाई का काम किया जाएगा। यहां ट्रेनों की स्वचालित धुलाई के लिए वॉशिंग प्लांट भी बनाया गया है। ट्रेनों की नियमित तकनीकी जांच के लिए इंस्पेक्शन शेड और मरम्मत के लिए रिपेयर वर्कशॉप भी बनाया गया है। डिपो को ऐसे डिजाइन किया गया है कि भविष्य में बढ़ने वाली ट्रेनों की संख्या को भी संभाल सके। भोपाल मेट्रो क्यों है खास? सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम सितंबर के मध्य में निरीक्षण करेगी। साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म, आधुनिक टिकटिंग सिस्टम और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था भोपाल मेट्रो को खास बनाएंगे। यह मेट्रो न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। प्रायोरिटी कॉरिडोर पर तेजी से काम भोपाल मेट्रो के पहले चरण में प्रायोरिटी कॉरिडोर पर काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। इस कॉरिडोर में स्टेशनों के कॉनकोर्स लेवल पर कंट्रोल रूम, सिस्टम रूम और यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं का निर्माण चल रहा है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म लेवल पर भी काम जोरों पर है।  सुभाष नगर में मेट्रो डिपो के साथ-साथ एडमिन बिल्डिंग में कंट्रोल रूम और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम रूम तैयार किए जा रहे हैं। अधिकारियों का लक्ष्य है कि 30 सितंबर तक प्रायोरिटी कॉरिडोर का सारा काम पूरा हो जाए। सीएमआरएस की टीम करेगी निरीक्षण मेट्रो संचालन से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम 15 सितंबर के बाद भोपाल पहुंचेगी। यह टीम मेट्रो के डिपो, ट्रेन और मेन लाइन का निरीक्षण करेगी। इंदौर मेट्रो की तर्ज पर भोपाल में भी दो चरणों में निरीक्षण होगा। पहले चरण में डिपो और ट्रेन की जांच होगी, जबकि दूसरे चरण में मेन लाइन का निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए मेट्रो प्रबंधन ने सभी जरूरी दस्तावेज सीएमआरएस के पोर्टल पर अपलोड कर दिए हैं। निरीक्षण की तारीख जल्द ही तय की जाएगी। डिपो और मेन लाइन का काम पूरा मेट्रो के डिपो और मेन लाइन का अधिकांश काम पूरा हो चुका है। डिपो में ट्रेनों के रखरखाव और संचालन से जुड़े सभी जरूरी सिस्टम तैयार हैं। मेन लाइन पर भी निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि अक्टूबर में मेट्रो को प्रायोरिटी कॉरिडोर पर दौड़ाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी टीमें दिन-रात काम कर रही हैं। भोपालवासियों के लिए क्या होगा खास? भोपाल मेट्रो के शुरू होने से शहरवासियों को यातायात का एक आधुनिक, तेज और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। सुभाष नगर से एम्स तक का सफर आसान और समय की बचत करने वाला होगा। मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं जैसे कि साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म, टिकटिंग सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध होगी। यह मेट्रो न केवल भोपाल की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएगी, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल होगी। भोपाल मेट्रो का भविष्य पहले चरण की सफलता के बाद भोपाल मेट्रो के अगले चरणों पर भी काम शुरू होगा, जिससे शहर के अन्य हिस्सों को भी मेट्रो से जोड़ा जाएगा। यह प्रोजेक्ट भोपाल को एक स्मार्ट और आधुनिक शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अक्टूबर में मेट्रो के शुरू होने का इंतजार भोपालवासियों को बेसब्री से है। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है, शहर में उत्साह बढ़ता जा रहा है। भोपाल मेट्रो के फायदे 1. तेज और समय की बचत     ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी।     सुभाष नगर से एम्स तक का सफर मिनटों में तय होगा।  2. सुविधाजनक यात्रा     साफ-सुथरे प्लेटफॉर्म, एस्केलेटर, लिफ्ट और आधुनिक टिकटिंग सिस्टम।     यात्रियों के लिए आरामदायक कोच और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था।  3. ट्रैफिक दबाव में कमी     सड़कों पर निजी गाड़ियों का बोझ घटेगा।     शहर के मुख्य मार्गों पर जाम की समस्या कम होगी।  4. पर्यावरण के लिए फायदेमंद     प्रदूषण और धुएं का स्तर घटेगा।     इलेक्ट्रिक आधारित मेट्रो, ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देगी।  5. आर्थिक और सामाजिक विकास     मेट्रो स्टेशन के आसपास बिज़नेस और रोजगार के नए अवसर।     शहर का बुनियादी ढांचा और इमेज स्मार्ट सिटी जैसी होगी।  6. सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन     महिलाओं, छात्रों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित यात्रा का विकल्प।     जीपीएस और सीसीटीवी आधारित निगरानी।  कुल मिलाकर, भोपाल मेट्रो न सिर्फ़ यात्रियों के लिए आरामदायक सफर देगी, बल्कि शहर को स्मार्ट और प्रदूषण मुक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

सेवा पखवाड़ा अभियान में स्वयं सेवी संस्थाएँ बढ़ चढ़कर हो शामिल: स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह

महिलाओं के संर्वागीण विकास में मध्यप्रदेश पीछे नहीं : स्कूल शिक्षा मंत्री  सिंह सेवा पखवाड़ा अभियान में स्वयं सेवी संस्थाएँ बढ़ चढ़कर हो शामिल: स्कूल शिक्षा मंत्री  सिंह मध्यप्रदेश महिलाओं के विकास में अग्रणी: स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह का बयान भोपाल स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रदेश में शुरू हुए सेवा पखवाड़ा अभियान में स्वयं सेवी संगठन कल्याण के कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें। इस प्रयास से हम समाज के अधिकतम लोगों की सेवा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि सेवा पखवाड़े में नारी सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री  सिंह बुधवार को विदिशा में 'स्वस्थ नारी सशक्त परिवार' अभियान के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। स्कूल शिक्षा मंत्री  सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के कल्याण के साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक योजनाएं चलाई हैं। जरूरत इस बात की है कि इन योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र महिला तक पहुँचे। इसके लिये हम सबको मिलकर समन्वय के साथ प्रयास करना पड़ेगा। शिशुओं के स्वास्थ्य की चर्चा करते हुए मंत्री  सिंह ने कहाकि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिये महिलाओं को जागरूक किया जाना जरूरी है। उन्होंने पखवाड़े के दौरान महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये नवाचार किये जाने पर भी जोर दिया। कार्यक्रम को विधायक  मुकेश टंडन ने भी संबोधित किया। कलेक्टर  अंशुल गुप्ता ने जानकारी दी कि जिले में महिलाओं, बालिकाओं और शिशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिये कैम्प आयोजित किये जायेंगे। जिला प्रशासन का प्रयास होगा की अधिक से अधिक नागरिक कैम्प में शामिल हो। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मती गीता कैलाश रधुवंशी, विदिशा नगर पालिका अध्यक्ष मती प्रीति राकेश शर्मा एवं जनप्रतिनिधि मौजूद थे। रक्तदाताओं से की चर्चा स्कूल शिक्षा मंत्री ने रक्तदान करने वाले व्यक्तियों से चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया। रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र वितरित किये गये। कार्यक्रम स्थल पर स्वास्थ्य से जुड़ी जाँच के लिये बनाये गये स्टॉलों पर पहुँचकर व्यवस्था की जानकारी ली। कार्यक्रम स्थल में टीबी रोग, सिकल सेल,एनीमिया, शुगर, बीपी सहित विभिन्न प्रकार की जाँच की व्यवस्था की गई थी।  

भगवान विष्णु पर बयान को लेकर CJI गवई ने जताई सफाई, VHP ने की संयम की अपील

नई दिल्ली  खजुराहो के प्रसिद्ध जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की मरम्मत करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बीआर गवई ने एक टिप्पणी कर दी थी। इसको लेकर सोशल मीडिया पर जमकर बवाल हो रहा था। यही नहीं विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन ने भी चीफ जस्टिस को नसीहत दी थी कि वाणी पर संयम रखना चाहिए। अब इस मामले में खुद चीफ जस्टिस बीआर गवई का बयान आया है और उन्होंने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मेरे बयान को सोशल मीडिया पर गलत ढंग से पेश किया गया। उन्होंने कहा कि किसी ने मुझे अगले दिन बताया कि मेरी टिप्पणी को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं। चीफ जस्टिस ने यह टिप्पणी किसी मामले की सुनवाई के दौरान की। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं चीफ जस्टिस बीआर गवई को बीते 10 सालों से जानता हूं। वह हर धार्मिक स्थल जाते हैं और सभी का आदर करते हैं। मेहता ने कहा कि यह एक गंभीर मसला है। उन्होंने कहा कि हमने न्यूटन का लॉ पढ़ा है कि हर ऐक्शन का रिएक्शन होता है। लेकिन आज तो हर ऐक्शन पर सोशल मीडिया में गलत रिएक्शन होता है। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस तो अकसर सभी धर्मों के स्थलों पर जाते हैं। वह सभी का आदर करते हैं। वहीं कपिल सिब्बल भी इस दौरान मौजूद थे। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजों का सामना तो हम हर दिन करते हैं। इस तरह किसी को बदनाम नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि नेपाल में भी ऐसी ही चीजें हुई थीं। बता दें कि मूर्ति की मरम्मत की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने याची को झिड़कते हुए कहा था कि आपकी अर्जी जनहित याचिका नहीं है बल्कि प्रचार याचिका है। उन्होंने कहा था कि यदि आप भगवान विष्णु के इतने कट्टर भक्त हैं तो फिर उन्हीं से प्रार्थना कीजिए। उनकी टिप्पणी का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा था और लोग उनकी आलोचना कर रहे थे। क्या कहा था चीफ जस्टिस ने, जिस पर मचा इतना बवाल इसी को लेकर विश्व हिंदू परिषद का भी गुरुवार को बयान आया। संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने चीफ जस्टिस के नाम एक लेटर लिखा था। उन्होंने लिखा था, 'परसों सर्वोच्च न्यायालय में खजुराहो के प्रसिद्ध जावरी मंदिर में स्थित भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की मरम्मत के लिए याचिका की सुनवाई थी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी की, मूर्ति की मरम्मत के लिए भगवान से ही प्रार्थना कीजिए। आप कहते हैं कि आप भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हैं, तो अब उन्हीं से प्रार्थना कीजिए। न्यायालय न्याय का मंदिर है। भारतीय समाज की न्यायालयों में श्रद्धा और विश्वास है। हम सब का कर्तव्य है कि यह विश्वास ना सिर्फ बना रहे वरन् और मजबूत हो।' VHP बोली- जजों को भी रखना होगा वाणी पर संयम इसके आगे नसीहत देते हुए विश्व हिंदू परिषद ने कहा, 'हम सब का यह भी कर्तव्य है कि अपनी वाणी में संयम रखें। विशेष तौर पर न्यायालय के अंदर। यह जिम्मेवारी मुकदमा लड़ने वालों की है, वकीलों की है और उतनी ही न्यायाधीशों की भी है। हमको लगता है कि मुख्य न्यायाधीश की मौखिक टिप्पणी ने हिन्दू धर्म की आस्थाओं का उपहास उड़ाया गया है। अच्छा होगा अगर इस तरह की टिप्पणी करने से बचा जाए।'  

तालिबान का इंटरनेट प्रतिबंध: अफगान नागरिकों की डिजिटल दुनिया ठप्प

जलालाबाद अफगानिस्तान में तालिबान ने अजीबोगरीब फरमान जारी किया है। तालिबानी शासन ने "अनैतिकता रोकने" के नाम पर पूरे देश में इंटरनेल और  फाइबर-ऑप्टिक सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे पूरे देश में खलबली मच गई है। तालिबान द्वारा शुरू की गई यह सख्ती अब पूरे देश में लागू हो चुकी है। देश के सर्वोच्च नेता द्वारा फाइबर-ऑप्टिक इंटरनेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कई और प्रांत इंटरनेट सेवाओं से कट गए हैं। 4 साल से सत्ता में है तालिबान तालिबान ने अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता संभाली थी। इसके बाद यह पहली बार है जब इस तरह का व्यापक प्रतिबंध लगाया गया है। इस फैसले से अब सरकारी दफ्तरों, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों के घरों में Wi-Fi इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप हो गई है। हालांकि मोबाइल इंटरनेट सेवा अब भी चालू है। अधिकारियों का कहना है कि "जरूरी कार्यों" के लिए वैकल्पिक उपायों की तलाश की जा रही है। मंगलवार को उत्तरी बल्ख प्रांत में Wi-Fi सेवा के बंद होने की पुष्टि की गई, वहीं देश के अन्य हिस्सों से भी भारी व्यवधान की खबरें मिल रही हैं। गुरुवार को बघलान, बदख्शान, कुंदुज़, नंगरहार और तखार जैसे प्रांतों में इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई। अफगान मीडिया ने की निंदा अफगान मीडिया समर्थन संगठन (AMSO) ने इस प्रतिबंध की कड़ी निंदा की और अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। संगठन ने कहा, "तालिबान नेता के आदेश पर उठाया गया यह कदम न केवल लाखों नागरिकों की मुफ्त सूचना और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को बाधित करता है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया कार्यों के लिए भी एक गंभीर खतरा है। पिछले वर्ष, संचार मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह अलोकोज़ई ने TOLO न्यूज़ को बताया था कि अफगानिस्तान में 1,800 किलोमीटर से अधिक लंबा फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क है, और इसमें 488 किलोमीटर और जोड़ने की मंजूरी भी दी गई थी। नंगरहार संस्कृति निदेशालय के सिद्दीकुल्लाह कुरैशी ने एसोसिएटेड प्रेस को इस प्रतिबंध की पुष्टि की। कुंदुज़ के राज्यपाल कार्यालय ने एक आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में इंटरनेट बंदी की सूचना साझा की।

आज तक माओवादी लगाते थे पोस्टर, अब पुलिस ने संभाली कमान — वॉन्टेड नक्सलियों के लिए ग्रामीणों से सहयोग की अपील

खांजूर/ कांकेर कांकेर जिले में पुलिस ने अंदरूनी गांवों में वांछित माओवादियों के बैनर लगाकर उन पर इनाम घोषित किया है। पुलिस ने बुधवार को परलकोट क्षेत्र के अंदरूनी और माओवादी प्रभावित इलाकों में एक अनोखी पहल शुरू की। पुलिस ने यहां के गांवों और जंगलों में वांछित माओवादियों के पोस्टर और बैनर लगाए हैं, ताकि स्थानीय लोगों की मदद से इन माओवादियों को पकड़ा जा सके। इस कदम को माओवाद के खिलाफ लड़ाई में एक नया मोड़ माना जा रहा है। इन पोस्टरों में वांछित माओवादियों की तस्वीरें, उनके नाम और उन पर घोषित इनाम की जानकारी दी गई है। साथ ही, पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें इन माओवादियों के बारे में कोई भी जानकारी मिले, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें। जानकारी देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी। अक्सर, स्थानीय लोग माओवादियों के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, लेकिन डर की वजह से वे पुलिस को नहीं बताते। इन पोस्टरों से न केवल उन्हें जानकारी मिलेगी, बल्कि उन्हें यह भी एहसास होगा कि उनकी मदद से इन अपराधियों को पकड़ा जा सकता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य माओवादियों को उनके अपने गढ़ में ही कमजोर करना है। जब स्थानीय आबादी उनके खिलाफ हो जाएगी और उनके बारे में जानकारी देना शुरू कर देगी, तो उनके लिए छिपना और अपनी गतिविधियों को अंजाम देना मुश्किल हो जाएगा। पुलिस को सफलता की उम्मीद यह पहला मौका नहीं है जब पुलिस ने इस तरह की रणनीति अपनाई है, लेकिन इस बार इसे और बड़े पैमाने पर और व्यवस्थित तरीके से लागू किया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि इस पहल से उन्हें वांछित माओवादियों को पकड़ने में बड़ी सफलता मिलेगी और क्षेत्र में शांति बहाल करने में मदद मिलेगी। यह देखना बाकी है कि यह पहल कितनी प्रभावी साबित होती है, लेकिन यह साफ है कि पुलिस माओवाद के खिलाफ लड़ाई में नए और रचनात्मक तरीके अपना रही है। पोस्टर में पांच लाख के इनामी माओवादियों के नाम पुलिस द्वारा एक बैनर में माओवादी बसंती आंचल, पुष्पा हेमला, रामा कुंजाम, श्रवण मरकर, विश्वनाथ, रामको मंडावी, रानी उर्फ उमा, जानकी सोरी पर पांच-पांच लाख रुपये और मनीषा कोर्राम, जमली मंडावी, कुमारी मंगली, कमला पददा दर्रो पर एक-एक लाख का इनाम घोषित है। इसके अलावा, अन्य स्थानों पर अलग-अलग माओवादियों के नाम और इनाम का भी उल्लेख किया गया है।