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लेखपाल डैशबोर्ड का हुआ शुभारंभ:सिंगल लाग-इन के माध्यम से समस्त कार्यों का सुचारू निस्तारण किया जा सकेगा

अब एक ही पोर्टल से होगा लेखपालों का कामकाज, डैशबोर्ड का हुआ औपचारिक शुभारंभ लखनऊ उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार ने आज सरोजनी नगर तहसील में लेखपाल डैशबोर्ड का शुभारंभ करते हुए कहा कि लेखपालों द्वारा किए जाने वाले समस्त कार्य अब एक ही प्लेटफार्म पर दिखाई देंगे। लेखपालों द्वारा सिंगल लॉगइन के माध्यम से समस्त कार्यों का सुचारू निस्तारण किया जा सकेगा एवं कार्यों की उच्च स्तर से सतत मॉनिटरिंग भी की जा सकेगी।  इस अवसर पर अध्यक्ष, राजस्व परिषद ने कहा कि प्रदेश के 22,000 से अधिक लेखपाल प्रतिदिन नागरिकों के सबसे निकट रहकर भूमि अभिलेख अद्यतन, प्रमाणपत्र सत्यापन और राजस्व संबंधी कार्यों का दायित्व निभाते हैं। अब “लेखपाल डैशबोर्ड” इन सभी कार्यों को ऑनलाइन और अधिक सुव्यवस्थित बनाएगा। अध्यक्ष श्री अनिल कुमार ने विस्तार से बताया कि इस डैशबोर्ड के माध्यम से भूमि अभिलेख संशोधन, आय-जाति-निवास प्रमाणपत्रों की स्थिति, धारा 34, 80, 89 एवं 98 की कार्यवाहियाँ, हल्का मैपिंग और अवकाश स्वीकृति की प्रक्रियाएँ एकल लाग-इन पर उपलब्ध होंगी। उच्चाधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता को वास्तविक समय में देख सकेंगे। अध्यक्ष, राजस्व परिषद इस परियोजना को साकार करने में योगदान देने वाली एनआईसी की तकनीकी टीम, परिषद से सम्बद्ध सभी तहसीलदारों और लेखपालों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि “यह पहल केवल तकनीकी विकास नहीं, बल्कि राजस्व परिवार के हजारों कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास और महीनों की कठिन मेहनत का परिणाम है।  श्री अनिल कुमार ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री जी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राजस्व परिषद प्रदेश की राजस्व संबंधी सभी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि शीघ्र ही “राजस्व निरीक्षक डैशबोर्ड”, “तहसीलदार डैशबोर्ड” तथा “उपजिलाधिकारी डैशबोर्ड” भी विकसित किए जाएंगे। इनके माध्यम से राजस्व प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर कार्य की निगरानी और दक्षता को और अधिक मजबूत किया जाएगा तथा पारदर्शिता और जवाबदेही को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जाएगा।  इस अवसर पर जिलाधिकारी लखनऊ श्री विशाख जी, उप जिलाधिकारी (सरोजनी नगर) श्री अंकित, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्री गंगाराव एवं श्री अनिल यादव तहसीलदार श्री सुखबीर सहित जनपद लखनऊ के विभिन्न तहसीलों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

ट्रंप का बड़ा कदम: चार्ली किर्क हत्याकांड के बाद एंटीफा को किया प्रमुख आतंकवादी संगठन घोषित

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने एंटीफा संगठन को एक प्रमुख आतंकी संगठन घोषित किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करते हुए कहा कि मुझे हमारे अनेक अमेरिकी देशभक्तों को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैं एंटीफा, एक बीमार, खतरनाक, कट्टरपंथी वामपंथी आपदा को एक प्रमुख आतंकवादी संगठन घोषित कर रहा हूं। ट्रंप ने कहा कि एंटीफा को वित्तपोषित करने वालों की उच्चतम कानूनी मानकों और प्रथाओं के अनुसार गहन जांच की जाए। ट्रंप ने इसलिए लिया एक्शन ट्रंप ने एंटीफा को इसलिए आतंकी संगठन घोषित किया। क्योंकि हाल ही में उनके करीबी चार्ली किर्क की हत्या हुई थी। इसका हत्यारा टायलर रॉबिन्सन वामपंथी राजनीतिक विचारधारा का था। एंटीफा संगठन ऐसे ही वामपंथी विचारधारा को आगे बढ़ा रहा था। एंटीफा दूर-वामपंथी और फासीवाद-विरोधी आंदोलन करता है। ट्रंप ने समूह को वित्त पोषित करने वाले व्यक्तियों और संगठनों की गहन जांच का आह्वान किया।    ट्रंप ने पहले किया था वादा बता दें कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान एंटीफा को एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिह्नित करने का वचन दिया था। उस समय उनके अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने समूह की गतिविधियों को “घरेलू आतंकवाद” बताया था। अब ट्रंप ने करीबी चार्ली किर्क की हत्या के बाद सख्ती करना शुरू कर दिया है। क्या है एंटीफा? एंटीफा (फासीवाद विरोधी) एक औपचारिक संगठन नहीं है। यह एक शिथिल रूप से परिभाषित सामाजिक आंदोलन है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कानून आधिकारिक तौर पर नामित विदेशी आतंकवादी समूहों को “भौतिक सहायता” देने पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन घरेलू संगठनों के लिए कोई समान कानून नहीं है। ‘एंटीफा’ शब्द आम तौर पर वामपंथी, अक्सर अति-वामपंथी, राजनीतिक विचारों वाले व्यक्तियों की एक विस्तृत श्रृंखला को दिखाता है। यह आमतौर पर मुख्यधारा की डेमोक्रेटिक पार्टी के एजेंडे से बाहर होते हैं। इस आंदोलन में एक केंद्रीकृत नेतृत्व संरचना या राष्ट्रीय मुख्यालय का अभाव है, हालांकि कुछ स्थानीय समूह नियमित रूप से मिलते रहते हैं।

सीएसए का 27वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न, 63 मेडल और 649 उपाधियों से चमके छात्र

सीएसए का 27वां दीक्षांत समारोह संपन्न,  वितरित हुए 63 पदक एवं 649 उपाधियां, छात्र हुए प्रफुल्लित कानपुर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के ऑडिटोरियम हॉल (कैलाश भवन) में आज कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की श्री राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी की अध्यक्षता में 27वें दीक्षांत समारोह का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर 63 मेधावियों को पदक एवं पुरस्कार दिए गए।कुल 649 छात्र छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गई।उपाधियां और मेडल पाकर छात्र-छात्राएं झूम उठे। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 14 छात्र छात्राओं को कुलाधिपति स्वर्ण पदक , 14 छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय रजत पदक, 14 छात्र छात्राओं को विश्वविद्यालय कांस्य पदक एवं 21 छात्र छात्राओं को प्रायोजित स्वर्ण पदक से नवाजा गया। कुल 49 छात्र छात्राओं को 63 पदक दिए गए।प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि आईसीएआर  के  महानिदेशक डॉ एम एल जाट और विशिष्ट अतिथि श्री बलदेव सिंह औलख मा. राज्यमंत्री कृषि,कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान उत्तर प्रदेश सरकार एवं विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर आनंद कुमार सिंह ने मेधावियों को पदक दिए।  इस दौरान पदक धारकों की तस्वीर कुलाधिपति महोदया एवं अतिथियों के साथ ली गई। इस अवसर पर एक से अधिक पदक कई छात्र छात्राओं को मिले। राज्यपाल एवं कुलाधिपति महोदया द्वारा इस अवसर पर संबिलियन विद्यालय/माध्यमिक विद्यालय कानपुर नगर,कानपुर देहात, रायबरेली एवं फतेहपुर के विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी 03 छात्र-छात्राओं सहित 13 को प्रमाणपत्र,पुस्तकें, पेन, एवं बैग आदि भेंट की। तथा सभी को चॉकलेट भी दी ।तथा 05 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट भेंट की। इन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों में एक को मोमेंटो एवं प्रमाण पत्र प्रथम स्थान प्राप्त करने पर दिया गया। जबकि रावतपुर प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक को गवर्नर हाउस से आई पुस्तके भी भेंट की गई। तथा पांच पुस्तके जिला प्रशासन को भी दी गई।सर्व प्रथम कुलपति ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत की। तथा शिक्षण, शोध एवं प्रसार कार्यों के नवाचारो के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि आईसीएआर के महानिदेशक डॉ एम एल जाट ने छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं दी। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि इस विश्वविद्यालय द्वारा दलहन, तिलहन एवं खाद्यान्न फसलों की 300 से अधिक प्रजातियां निकालकर कृषि क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किया है। तथा हरित क्रांति में इस विश्वविद्यालय का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने उपस्थित वैज्ञानिकों तथा छात्रों से कहा कि हमें मांग के अनुरूप शोध करने की आवश्यकता है तथा दलहन और तिलहन फसलों में आत्मनिर्भर होना जरूरी है,साथ ही वैज्ञानिकों से आवाहन किया कि जलवायु अनुकूल प्रजातियां का विकास करें।उन्होंने गुणवत्ता युक्त कृषि उत्पाद के लिए कृषि विविधीकरण पर बल दिया। इस अवसर पर कुलाधिपति एवं श्रीराज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी ने डिजिलॉकर में 649 डिग्रियों को अपलोड किया। तथा सभी उपाधि धारक छात्र छात्राओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की रैंकिंग सुधारने की अति आवश्यकता है। इसके लिए वैज्ञानिकों/अधिकारियों/छात्र छात्राओं को अथक मेहनत करनी होगी। उपाधि धारक छात्र छात्राओं का आवाहन करते हुए कहा कि देश में आपके नवाचारों की अति आवश्यकता है साथ ही उन्होंने उपस्थित वैज्ञानिकों से कहा कि श्रीअन्न (मिलेट्स)  के क्षेत्रफल को बढ़ावा दिया जाए। डिग्री धारक छात्र छात्राओं से कहा कि वह अपने गांव में अपने खेतों पर जैविक और प्राकृतिक खेती करें। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि लागत को कम किया जाए तथा गौ आधारित प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती को अपनाया जाए।  उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में ड्रोन दीदी एवं कृषि सखियों के भी चयन से  कृषि उत्पादकता  में वृद्धि होगी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ विनीता सिंह ने किया। इस अवसर पर विधायक एव बोर्ड के सदस्य, श्री सुरेन्द्र मैथानी जी,अवधेश कुमार सिंह , विधायक नीलिमा कटियार जी,जिला प्रशासन के अधिकारी गण,सभी अधिष्ठाता गण, निदेशक गण, विभागाध्यक्ष एवं सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

बड़े त्योहारों पर होगी सफर आसान, नवरात्र से दिवाली तक स्पेशल ट्रेन सेवा

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे ने यात्रियों को नवरात्र और दिवाली का तोहफा दिया है। रेलवे ने 26 सितंबर से नवंबर के अंत तक स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। भारतीय रेल अधिकारियों का दावा है कि दिवाली, छठ पूजा समेत फेस्टिव सीजन में करीब 6000 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की प्लानिंग है। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता के अनुसार ये स्पेशल ट्रेनें उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, और असम समेत देश के विभिन्न राज्यों के लिए होंगी। जिससे त्यौहारों पर घर लौट रहे लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। स्पेशल ट्रेनों के अलावा लोगों की भीड़ का अंदाजा लगाते हुए स्टेशनों पर खास अरेंजमेंट किए जा रहे हैं।   हर राज्य के यात्रियों लिए स्पेशल प्लान रेलवे मंत्रालय के अनुसार 26 सितंबर से 5 नवंबर के बीच जबलपुर से दानापुर के बीच स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। ये ट्रेन हर बुधवार और शुक्रवार को चलेगी। इसी तरह मुंबई सेंट्रल से काठगोदाम के बीच 1 अक्टूबर से, उघना से सूबेदारगंज के बीच 3 अक्टूबर से और बान्द्रा टर्मिनस से बदनी के बीच 6 अक्टूबर से स्पेशल ट्रेन चलाई जाएंगी। दिवाली और छठ पर ट्रेनों में होती है ज्यादा भीड़ जानकारी के अनुसार आनंद विहार-भागलपुर के बीच स्पेशल पूजा स्पेशल ट्रेन चलाई जाएंगी। ये ट्रेन 20 सितंबर से 30 नवंबर तक रोजाना चलेगी। वहीं, 2 अक्टूबर से 6 नवंबर तक कोलकाता से लखनऊ के बीच स्पेशल ट्रेन चलेगी। दिवाली और छठ के लिए 27 सितंबर से एक नवंबर तक प्रत्येक शनिवार को मऊ और उधना के बीच स्पेशल ट्रेन चलेगी। बता दें फेस्टिवल सीजन में ट्रेनों में काफी भीड़ होती है। यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कुछ डिब्बे रिजर्व में रखे हैं जिन्हें आखिरी में भीड़भाड़ वाले रूट पर चलाया जाएगा।

22 सितंबर से लागू हो रही नई जीएसटी दरों को लेकर सीएम योगी ने की प्रेस वार्ता

जीएसटी रिफॉर्म देशवासियों के लिए मोदी जी का दीवाली गिफ्ट : मुख्यमंत्री 22 सितंबर से लागू हो रही नई जीएसटी दरों को लेकर सीएम योगी ने की प्रेस वार्ता  जीएसटी रिफॉर्म्स के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का जताया आभार  मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के निर्णय को महंगाई से राहत और व्यापार को गति देने वाला बताया  सीएम बोले- जीएसटी रिफॉर्म्स रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा उपभोक्ताओं, किसानों, कारोबारियों और आम परिवारों तक सभी को मिलेगी राहतः मुख्यमंत्री  स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने की टैक्स रिफॉर्म की घोषणा और 20 दिनों में आ गए उसके परिणामः सीएम  2017 से पहले थे कई जटिल कर, जीएसटी ने इन्हें समाहित कर वन नेशन, वन टैक्स की व्यवस्था दीः योगी आदित्यनाथ  देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के नाते उत्तर प्रदेश को जीएसटी सुधारों का मिलेगा सबसे ज्यादा लाभः मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रेस वार्ता करते हुए हालिया जीएसटी रिफॉर्म्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों के लिए एक बड़ा दीवाली गिफ्ट करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी का यह निर्णय देशवासियों को महंगाई से राहत और व्यापार को गति देने वाला है। यह केवल टैक्स सुधार नहीं बल्कि हर नागरिक के जीवन को सरल बनाने वाला दीपावली का उपहार है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं, किसानों, कारोबारियों और आम परिवारों तक सभी को राहत देने वाले इन सुधारों का लाभ 22 सितम्बर से, यानी शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन से मिलने लगेगा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया। घोषणा के 20 दिनों के अंदर सामने आए परिणाम  मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री जी ने जिस टैक्स रिफॉर्म की घोषणा की थी, उसके परिणाम महज 20 दिनों में सामने आ गए। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में 3 सितम्बर को लिए गए फैसले अब लागू हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टैक्स सुधार नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने वाला व्यापक अभियान है। जीएसटी में अब तक का सबसे बड़ा रिफॉर्म मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने से पहले देश में अलग-अलग कर लागू थे जिनमें वैट, सेल टैक्स, सेवा कर, उत्पाद शुल्क, एंट्री टैक्स और मनोरंजन कर जैसे जटिल कर उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर भारी पड़ते थे। जीएसटी ने इन्हें समाहित कर देश को वन नेशन, वन टैक्स की व्यवस्था दी। अब जीएसटी में सबसे बड़ा सुधार किया गया है। पहले चार स्लैब—5%, 12%, 18% और 28% लागू थे। लेकिन अब सिर्फ दो स्लैब—5% और 18%—को रखा गया है। 12% और 28% की दरें समाप्त कर दी गई हैं। कुछ विलासिता की वस्तुओं पर 40% टैक्स यथावत रहेगा। इससे आम उपभोक्ता को सीधी राहत मिलेगी। रसोई से लेकर कृषि, मकान निर्माण से लेकर बड़े हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, उद्योग और व्यापार—हर क्षेत्र को लाभ मिलेगा। घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सामान्य गृहस्थ परिवार को अब घरेलू खर्चों में सीधी राहत मिलेगी। दूध, दही, पनीर, शैम्पू, टूथपेस्ट, साबुन, साइकिल और बच्चों से जुड़े सामान पर केवल 5% या 0% टैक्स लगेगा। इससे न सिर्फ रोज़मर्रा के खर्च कम होंगे बल्कि उपभोक्ता की क्रय क्षमता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ज्यादा खरीद सकेगा तो खपत बढ़ेगी और बाजार में मांग बढ़ने से उत्पादन में तेजी आएगी। किसानों और ग्रामीण भारत को फायदा मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुधार किसानों और ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी ऐतिहासिक है। ट्रैक्टर, टायर, कीटनाशक और सिंचाई उपकरणों पर टैक्स घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल किसानों को राहत देगा बल्कि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। बीमा और इलाज होगा सस्ता मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर लगने वाला जीएसटी पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा दवाइयों, ऑक्सीजन और जांच किट पर भी टैक्स घटाया गया है। इससे इलाज सस्ता होगा और हर सामान्य नागरिक को राहत मिलेगी। सरकार ने वाहनों की खरीद-फरोख्त पर भी राहत दी है। पहले कार और बाइक पर 28% जीएसटी लगता था, अब इसे घटाकर 18% कर दिया गया है। यानी सीधे 10% की कटौती। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से न केवल आम नागरिक की गाड़ी खरीदने की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ऑटोमोबाइल सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा। उत्पादन बढ़ेगा, नए रोजगार उत्पन्न होंगे और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। शिक्षा क्षेत्र को भी फायदा मुख्यमंत्री ने बताया क नोटबुक, पेंसिल और अन्य शिक्षण सामग्री पर टैक्स पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। यह फैसला छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जहां एक ओर आम उपभोक्ताओं और विद्यार्थियों को छूट दी है, वहीं तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पादों पर टैक्स दर बढ़ाकर 40% कर दी गई है। टैक्स प्रणाली हुई और पारदर्शी मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) के लिए टैक्स रजिस्ट्रेशन ऑटो-अप्रूव कर दिया गया है। टैक्स रिफंड की प्रक्रिया भी तेज की गई है। साथ ही रिस्क-आधारित कंप्लायंस और श्रम सुधार भी लागू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जीएसटी से पहले देश का टैक्स संग्रह केवल 7 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 22.8 लाख करोड़ रुपये हो गया है। टैक्स पेयर्स की संख्या भी 65 लाख से बढ़कर 1.51 करोड़ हो गई है। टैक्स सुधार से मजबूत हुई अर्थव्यवस्था मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में टैक्स संग्रह की ऐतिहासिक वृद्धि से देश के हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा उत्पादन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं। 2014 के पहले देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे, अब 160 हैं। मेट्रो नेटवर्क 248 किमी से बढ़कर 1,013 किमी हो गया। वंदे भारत ट्रेनों की संख्या 144 तक पहुंची है। रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ से बढ़कर 1,27,000 करोड़ रुपये हो गया। रक्षा निर्यात 686 करोड़ से बढ़कर 23,600 करोड़ रुपये तक पहुंचा। गरीब कल्याणकारी योजनाओं तक सीधा लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि टैक्स सुधारों का लाभ गरीब कल्याणकारी योजनाओं में भी … Read more

मोटे अनाज (श्रीअन्न) मक्का, बाजरा व ज्वार की खरीद के लिए चल रहा किसानों का पंजीकरण

पहली अक्टूबर से शुरू होगी मोटे अनाज की खरीद  मोटे अनाज (श्रीअन्न)  मक्का, बाजरा व ज्वार की खरीद के लिए चल रहा किसानों का पंजीकरण  डबल इंजन सरकार ने मक्का का 2400, बाजरा का 2775,  ज्वार (हाईब्रिड) का 3699 व ज्वार (मालवांडी) का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3749 रुपये प्रति कुंतल किया है निर्धारित  31 दिसंबर तक किसानों से सुबह 9 से शाम पांच बजे तक की होगी खरीद  लखनऊ डबल इंजन सरकार एक तरफ जहां श्रीअन्न के फायदों के प्रति प्रदेशवासियों को प्रेरित कर रही है तो वहीं किसानों को भी इसकी खेती के फायदे से जोड़ रही है। वर्ष 2025-26 के लिए मोटे अनाजों की खरीद पहली अक्टूबर से प्रारंभ होगी, जो 31 दिसंबर तक चलेगी। 'मोटे अनाज' में शामिल मक्का, बाजरा व ज्वार की खरीद के लिए किसानों का पंजीकरण व नवीनीकरण चल रहा है। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक इसके लिए किसानों को fcs.up.gov.in या ऐप UP KISAN MITRA पर पंजीकरण/नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। खरीद पंजीकृत किसानों से ही की जाएगी।   टोल फ्री नंबर 18001800150 से मदद ले सकते हैं किसान किसान अपनी किसी भी समस्या के लिए टोल फ्री नंबर 18001800150 से मदद ले सकते हैं। इसके अलावा वे जिला खाद्य विपणन अधिकारी, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, विपणन निरीक्षक से भी संपर्क साध सकते हैं। किसानों के आधार लिंक्ड बैंक खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा। वहीं बिचौलियों को रोकने व पारदर्शिता बरतते हुए क्रय केंद्रों पर मोटे अनाज की खरीद ई-पॉप (इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज) डिवाइस के माध्यम से पहले की भांति किसानों का बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिए ही होगी।  सरकार ने बढ़ाया है न्यूनतम समर्थन मूल्य  श्रीअन्न को बढ़ावा देने के साथ ही सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य भी बढ़ाया है। मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2400 रुपये प्रति कुंतल,  बाजरा का 2775 रुपये प्रति कुंतल, ज्वार (हाइब्रिड) का 3699 व ज्वार (मालवांडी) का 3749 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है।  इन जिलों में होगी मक्का खरीद   बदायूं,  बुलंदशहर, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर-देहात, कन्नौज, औरैया, इटावा, बहराइच, गोंडा, बलिया, जौनपुर, फर्रुखाबाद, मीरजापुर, सोनभद्र, देवरिया व ललितपुर में मक्का की खरीद की जाएगी।   बाजरा खरीद वाले जनपद निर्धारित  बदायूं,  बुलंदशहर, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, संभल, रामपुर, अमरोहा, कानपुर नगर-देहात, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, इटावा, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, गाजीपुर, जौनपुर, प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी, मीरजापुर, बलिया, हरदोई व उन्नाव  इन जिलों में होगी ज्वार की खरीद  बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, कानपुर नगर-देहात, फतेहपुर, उन्नाव, हरदोई, मीरजापुर व जालौन में ज्वार की खरीद होगी।  

पहाड़ों में कहर: बादल फटने से तबाही, लापता हुए 10 लोग

उत्तराखंड धीरे-धीरे सितंबर का महीना बीतने वाला है, लेकिन मानसूनी आफत अभी खत्म नहीं हुई है। देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर आसमानी आफत आई है। गुरुवार सुबह ही चमोली में बादल फट गया। इससे चमोली और नंदानगर में भीषण बरसात शुरू हो गई है। मलबा आने से कई घर तबाह हो गए हैं। प्रशासन में राहत और बचाव दल को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया है। अभी तक 6 घर तबाह हो गए हैं। वहीं 10 लोगों के लापता होने की खबर है। हाल ही में देहरादून के सहशस्त्र धारा में बादल फटने की घटना हुई थी। बताया जा रहा है कि कुंतरी और धुर्मा गांव में बादल फटे हैं। भारी बारिश का अलर्ट जारी मौसम विभाग ने उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। देहरादून, ऋषिकेश, पोढ़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी, हरिद्वार समेत कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी हुई है। प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है। नदी के किनारे बसे लोगों से सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की जा रही है।   2 लोगों को किया रेस्क्यू सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए घटना स्थल पर पहुंच गए। अभी तक 2 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि कई जानवर भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। । मौके पर मेडिकल टीमें और तीन एम्बुलेंस भेजी गई हैं। क्या बोले डीएम? चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि चमोली जिले के नंदानगर घाट क्षेत्र में बुधवार रात बादल फटने से नुकसान हुआ। नंदानगर के कुंत्री लंगाफली वार्ड में छह घर मलबे में दब गए। जिलाधिकारी ने कहा कि 2 को बचा लिया गया है। राहत और बचाव कार्य जारी है।  

सुपर हिट जोड़ी की कहानी: प्रतीका रावल ने साझा किया स्मृति मंधाना के साथ सफलता का रहस्य

नई दिल्ली  शीर्ष क्रम की बल्लेबाज प्रतीका रावल का मानना ​​है कि स्टार सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना के साथ उनकी स्वाभाविक समझ है। इसके कारण वह दोनों भारत को लगातार अच्छी शुरुआत देने में सफल रही हैं। दिल्ली की इस क्रिकेटर ने पिछले साल दिसंबर में वनडे में पदार्पण किया था और वह बहुत कम समय में शीर्ष क्रम में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली बल्लेबाजों में से एक बन गई हैं। उन्होंने कहा कि मंधाना भी उनकी तरह अंतर्मुखी हैं, लेकिन उनके बीच बहुत अच्छा तालमेल है। प्रतीका ने मुल्लांपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे में मंधाना के साथ शतकीय साझेदारी की और दूसरे मैच में भी इस स्टार क्रिकेटर के साथ पहले विकेट के लिए 70 रन जोड़े थे। भारत ने यह मैच रिकॉर्ड 102 रन से जीता। भारतीय टीम में जगह बनाने के बाद से छह अर्धशतक और एक शतक जड़ने वाली इस 25 वर्षीय क्रिकेटर ने जियो हॉटस्टार से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह (समझ) काफी आसान और स्वाभाविक है। हमें पारी के बीच में ज्यादा बात नहीं करनी पड़ती। वह वही करती है जिसमें वह सर्वश्रेष्ठ है और मैं वही करती हूं जिसमें मैं सर्वश्रेष्ठ हूं। हमारे बीच एक समझ है जो स्वाभाविक लगती है, बनावटी नहीं।’’ उन्होंने कहा,‘‘मैदान के बाहर भी, वह (मंधाना) अंतर्मुखी हैं और मैं भी, इसलिए हमें एक दूसरे को समझने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करने पड़ते हैं। हम पहले से ही एक दूसरे को लेकर अच्छी समझ रखते हैं।’’ प्रतीका ने कहा कि उन्हें मंधाना के साथ बल्लेबाजी करना अच्छा लगता है और दोनों खिलाड़ी गेंद दर गेंद पारी को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘खेलते समय हमारा ध्यान केवल अगली गेंद पर होता है। मुझे उनके साथ बल्लेबाजी करने में मजा आता है। जिस तरह से वह खेलती है उससे काफी प्रेरणा मिलती है।’’  

टीम इंडिया का सख्त रुख: सुपर 4 मुकाबले में नहीं होगा हाथ मिलाना, पाकिस्तान का अगला कदम क्या होगा?

नई दिल्ली एशिया कप में बुधवार को पाकिस्तान बनाम यूएई के मैच से पहले खूब ड्रामा हुआ। पीसीबी की तरफ से टूर्नामेंट के बॉयकॉट की गीदड़भभकी और तमाम नौटंकियों के बाद आखिरकार एक घंटे की देरी में मैच हुआ। जिस रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट को हटाने के लिए पाकिस्तान ने इतना सारा ड्रामा किया, वो टूर्नामेंट से हटना तो दूर, बुधवार के मैच में भी रेफरी की भूमिका में दिखे। खैर मैच हुआ और पाकिस्तान ने आसानी से जीत हासिल कर सुपर-4 में जगह बना ली। अब रविवार यानी 21 सितंबर को दोनों चिर-प्रतिद्वंद्वी भारत और पाकिस्तान एक बार फिर आमने-सामने होंगे। लीग नहीं, सुपर 4 के मुकाबले में। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान उस मैच में भी ड्रामा करेगा? इसका जवाब है- नहीं। पाकिस्तान ने बुधवार की ड्रामेबाजी के बाद न सिर्फ यूएई से मैच खेलने को तैयार हुआ बल्कि आने वाले सुपर-4 मैच में भारत के 'नो-हैंडशेक' वाले रुख को मानने के लिए भी तैयार हो गया। संयोग से यूएई से मैच जीतने के बाद पाकिस्तानी टीम सुपर 4 में पहुंच गई है जहां उसका मुकाबला भारत से होगा। भारतीय टीम का रुख साफ है। वह सुपर-4 मैच में भी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाएगी। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बुधवार को आईसीसी के क्रिकेट महाप्रबंधक वसीम खान ने पीसीबी और पायक्रॉफ्ट के बीच मध्यस्थता की। उस दौरान पायक्रॉफ्ट ने कथित तौर पर पाकिस्तानी अधिकारियों से कहा कि उन्होंने तो सलमान अली आगा को शर्मिंदगी से बचाया क्योंकि भारत ने पहले ही कह रखा था कि सूर्यकुमार यादव उनसे हाथ नहीं मिलाएंगे। पाकिस्तान की इन सारी पैंतरेबाजियों और नौटंकी की शुरुआत 14 सितंबर को भारत के खिलाफ मैच से हुई। टॉस के दौरान दोनों कप्तानों ने हाथ नहीं मिलाए। भारत ने एकतरफा मुकाबले में पाकिस्तान को बुरी तरह पीटा। पाकिस्तानियों को हार का गम तो था ही। गम और बढ़ गया जब मैच जीतने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी टीम से हाथ नहीं मिलाए। वे इंतजार करते रह गए। कप्तान आगा और कोच माइक हेसन भारतीय ड्रेसिंग रूम की तरफ भी बढ़े लेकिन दरवाजा बंद हो गया तो उन्हें लौटना पड़ा। एक तो मैच में हार, ऊपर से भारतीयों का हाथ मिलाने से इनकार। पाकिस्तान इससे बौखला गया। बौखलाहट और बढ़ गई जब मैच के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने जीत को पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों और ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारत के जांबाजों को समर्पित कर दिया। फिर क्या था। पाकिस्तान की नौटंकी शुरू हो गई। पहले उसने मैच रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट से भारतीय टीम के हाथ नहीं मिलाने की शिकायत की। फिर रेफरी के खिलाफ ही आईसीसी में शिकायत कर दी। आरोप लगाया कि उन्होंने ही टॉस के दौरान पाकिस्तानी कप्तान को भारतीय समकक्ष से हाथ नहीं मिलाने को कहा था। पायक्रॉफ्ट को टूर्नामेंट से हटाने की मांग करते हुए बहिष्कार की धमकी भी दी। आखिरकार तमाम नौटंकियों के बाद पाकिस्तान की धमकी गीदड़भभकी ही साबित हुई।  

संकट में आंगनवाड़ी सेवाएं: कर्मियों की कमी से बच्चों का भविष्य अधर में

चंडीगढ़ हरियाणा के गांवों में आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों और माताओं के लिए पोषण और शिक्षा का अहम केंद्र होते हैं। लेकिन राज्य के हजारों आंगनवाड़ी केंद्रों में कार्यकर्ता ‘दीदी’ महीनों से नदारद हैं। कहीं एक कार्यकर्ता को दो-दो केंद्र देखने पड़ रहे हैं, तो कई जगह सहायिका अकेले ही बच्चों की देखभाल कर रहीं हैं। इसका सीधा असर केंद्रों पर मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। प्रदेश में कुल 25,962 आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इन पर कार्यरत 25,962 कार्यकर्ता और 25,450 सहायिकाओं में से 23,106 कार्यकर्ता और 20,641 सहायिकाओं के पद भरे हैं। इसका मतलब है कि 2,856 कार्यकर्ता और करीब 4,800 सहायिकाएं लंबे समय से रिक्त हैं। जिलावार स्थिति देखें तो सबसे गंभीर हाल सोनीपत का है, जहां 252 कार्यकर्ता और 378 सहायिका पद खाली हैं। झज्जर, जींद, करनाल और नूंह में भी बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं। हिसार में 146 कार्यकर्ता और 287 सहायिकाओं के पद खाली हैं, जबकि रेवाड़ी और सिरसा में 250 से ज्यादा सहायिका पद रिक्त हैं। सात जिले सोनीपत, झज्जर, जींद, हिसार, करनाल, नूंह और रेवाड़ी में ही आधे से अधिक रिक्तियां केंद्रित हैं। इसके उलट पंचकूला और चरखी दादरी जैसे छोटे जिलों में रिक्तियां अपेक्षाकृत कम हैं। चरखी दादरी में 65 कार्यकर्ता और 109 सहायिका, जबकि पंचकूला में 61 कार्यकर्ता और 111 सहायिका पद रिक्त हैं।   आंकड़े एक नजर 25962 हरियाणा में कुल हैं आंगनवाड़ी केंद्र कार्यकर्ता और 4,800 सहायिका के पद खाली सोनीपत, झज्जर, जींद, हिसार, करनाल, नूंह, रेवाड़ी हैं ज्यादा प्रभावित सरकार की दोहरी रणनीति महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने बताया कि इन रिक्तियों को भरने के लिए दोहरी रणनीति बनाई गई है। पहले, आंगनवाड़ी सहायिकाओं को कार्यकर्ता पद पर प्रमोशन दिया जाएगा। अब तक 25 प्रतिशत प्रमोशन कोटा था, जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके बाद शेष रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। सरकार का दावा है कि यह कदम रिक्तियां भरने के साथ-साथ लंबे समय से काम कर रही सहायिकाओं को प्रोत्साहन भी देगा। विपक्ष हमलावर- गुणवत्ता पर असर विशेषज्ञों का कहना है कि रिक्तियों के कारण कई कार्यकर्ता तीन-तीन केंद्र संभालने को मजबूर हैं। इससे बच्चों को समय नहीं मिल पाता और पोषण कार्यक्रम भी प्रभावित होते हैं। पूर्व मंत्री और झज्जर विधायक गीता भुक्कल ने सरकार पर निशाना साधा है और कहा कि सरकार बार-बार वादे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर भर्ती की गति बेहद धीमी है। वर्षों से पद खाली हैं और महिलाएं व बच्चे बुनियादी सेवाओं से वंचित हैं।