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प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के स्वाभिमान को दी नई पहचान: जगदीश देवड़ा

"प्रधानमंत्री जी के जन्म दिवस पर विशेष" भोपाल  भारत के नागरिक भाग्यशाली हैं कि वे भारत का नवनिर्माण होता देख रहे हैं। हर क्षेत्र में नया भारत बन रहा है। इन गौरवशाली क्षणों का श्रेय यशस्वी, सशक्त और विश्व दृष्ट‍ि सम्पन्न प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाता है। उन्होंने भारत के स्वाभिमान को जगाया है और आत्म-विश्वास को मजबूत किया है।  माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 75वें जन्म दिवस पर मध्यप्रदेश के नागरिकों की ओर से कोटि-कोटि बधाइयां और शुभकामनाएं। वे दीर्घायु हों और हमेशा हमें नेतृत्व प्रदान करते रहें। वे अपने जन्म दिवस पर मध्यप्रदेश को ऐसा उपहार देने आये हैं, जिससे प्रदेश और देश के इतिहास में एक नया पन्ना जुड़ रहा है। देश की महत्वाकांक्षी "पीएम मित्र पार्क परियोजना" का भूमि-पूजन हो रहा है। यह पार्क मध्यप्रदेश के लिये अनमोल उपहार साबित होगा। हमारे कपास उत्पादक किसानों का जीवन बदलेगा और समृद्ध‍ि के नये द्वार खुलेंगे। प्रधानमंत्री मोदी भारत के लिए वरदान साबित हुए हैं। भारत निराशा में डूबा राष्ट्र बनता जा रहा था। युवाओं में भी निराशा थी। व्यापार डूब रहा था। भ्रष्टाचार फैल रहा था। हमारी कोई वैश्व‍िक पहचान नहीं थी। अर्थव्यवस्था में हम पिछड़ गये थे। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही उन्होंने अविलंब विकासोन्मुखी कार्यों की शुरूआत कर दी। राष्ट्रवादी मूल्यों और संस्कृति में वे अच्छी तरह पल्लवित थे। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आज भारत बदल रहा है। हर क्षेत्र में नये परिवर्तन हो रहे हैं। हमारी नीचे जाती अर्थव्यवस्था अब विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री मोदी एक युग-दृष्टा हैं। वे भविष्य को पहचान लेते हैं और आने वाली चुनौतियों से निपटने की रणनीतियां तैयार रखते हैं। उन्होने विश्वपटल पर भारत की पहचान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। मोदी जी का जीवन हमें निरंतर प्रेरणा देता है। साधारण परिवार में जन्म लेकर देशहित को सर्वोपरि मानते हुए वे जिस तरह जनसेवा के पथ पर अग्रसर हुए, वह असाधारण है। बचपन से ही राष्ट्रप्रेम और सेवा-भावना उनकी शक्ति रही। आज जब हम 21वीं सदी के भारत की कल्पना करते हैं, तब मोदी जी का व्यक्तित्व और कार्यशैली एक मार्गदर्शक दीपस्तंभ के रूप में सामने आते हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने भारत को केवल ‘विकास’ की दिशा में आगे नहीं बढ़ाया, बल्कि ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत तक मोदी जी की हर पहल जनता के कल्याण और देश को मजबूत बनाने का सशक्त कदम है। उन्होंने स्वदेशी अपनाने के लिये समस्त भारतीयों को प्रेरित किया है। मोदी को देश की युवा शक्त‍ि और उनके कार्य कौशल पर अटूट भरोसा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने भारत की साख को इतना ऊँचा उठाया है कि आज पूरा विश्व भारत के नेतृत्व को सम्मान की दृष्टि से देखता है। G20 की अध्यक्षता, अंतरिक्ष विज्ञान में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ, सीमा सुरक्षा की सुदृढ़ता और गरीब कल्याण की योजनाएँ उनके नेतृत्व की गाथा को अमर कर रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर से विश्व पटल पर भारत की एक अलग छवि बनी है। मध्यप्रदेश में भी मोदी जी की नीतियों और दूरदर्शिता का सीधा लाभ जनता को मिला है। प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि नि:शुल्क राशन, जैसी योजनाओं ने करोड़ों परिवारों का जीवन बदला है। गाँव-गाँव तक सड़क, बिजली, पानी और डिजिटल कनेक्टिविटी पहुँचाना मोदी जी के संकल्प और अथक परिश्रम का परिणाम है। वे केवल राजनेता नहीं, बल्कि एक संकल्प और नवाचार के अद्वितीय प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि ईमानदारी, राष्ट्रनिष्ठा और कठोर परिश्रम से असंभव को भी संभव किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी वैश्विक लोकप्रियता साबित करते हुए दुनिया के सबसे पसंदीदा नेता बनने का गौरव हासिल किया है। एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में पीएम मोदी को 75 प्रतिशत ‘अप्रूवल रेटिंग’ मिली है। यह रेटिंग उन्हें 20 देशों के शीर्ष नेताओं की सूची में सबसे ऊपर रखती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी की लोकप्रियता का कारण उनकी मजबूत अंतरराष्ट्रीय छवि, निर्णय लेने की क्षमता और भारत के घरेलू और वैश्विक हितों पर आधारित स्पष्ट नीतियां हैं। यह इस बात का संकेत है कि भारत न केवल वैश्विक राजनीति में तेजी से उभर रहा है बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी स्वीकृति मिल रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर और जीएसटी सुधार से पूरे विश्व में भारत के प्रति दृष्ट‍िकोण बदल गया है। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होने सबका विश्वास जीता है। हर वर्ग को राष्ट्र निर्माण के लिये प्रेरित और प्रोत्साहित करने के कई कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्णयों का परिणाम अब हमारे सामने आने लगा है। उदाहरण के लिए भारत अब डिजिटल इंडिया के रूप में जाना जाने लगा है। लोक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिये उठाये गये कदमों का सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा है। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच गांव-गांव तक हुई है। 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020' देश के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव है जिसे पूरे भारत में सराहा गया है। नीति में बुनियादी शिक्षा में सुधार, स्कूल संरचनाओं में बदलाव, चार वर्षीय अंतःविषय स्नातक कार्यक्रम और देश में शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकृत करने का प्रस्ताव है। ये सब भारत को एक वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विकास का हर क्षेत्र बदल रहा है। अभी भारत को विश्व गुरू बनने का सपना पूरा करना है। हम सब संकल्प लें कि प्रधानमंत्री मोदी जी के आदर्शों पर कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। मध्यप्रदेश की जनता की ओर से एक बार फिर हमारे लोकप्रिय यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जन्म दिवस की कोशिट: शुभकामनाएं। 

शराब घोटाले की गुत्थी सुलझी? ED ने चैतन्य बघेल को मास्टरमाइंड बताया, चार्जशीट में दर्ज कई बड़े दावे

रायपुर, छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने बड़ा आरोप लगाते हुए राज्य में हुए ‘शराब घोटाले’ के सिडिकेट का मास्टरमाइंड (मुखिया) बताया है और कहा है कि उन्होंने ही घोटाले से अर्जित लगभग 1000 करोड़ रुपए की आय को इधर-उधर किया था। ईडी ने इस बात का दावा सोमवार को जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (VI) डमरुधर चौहान की अदालत में दायर अपनी चौथी पूरक अभियोजन शिकायत (आरोपपत्र) मे किया। इसमें उसने दावा किया कि चैतन्य ने जानबूझकर अपराध की आय को छिपाने, कब्जा करने, अधिग्रहण करने और इसका उपयोग करने में सहायता की और गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर साजिश रची। ईडी द्वारा दाखिल इस आरोप पत्र में बताया गया है कि, ‘इस सिंडिकेट (गिरोह) में शीर्ष स्तर पर चैतन्य का नियंत्रण था, और उसकी भूमिका केवल प्रतीकात्मक ही नहीं, बल्कि प्रभावशाली और निर्णायक भी थी। वह सिंडिकेट द्वारा एकत्रित सभी अवैध धन का हिसाब रखने के लिए जिम्मेदार था। धन के संग्रह और वितरण से संबंधित सभी बड़े फैसले उसके (चैतन्य के) निर्देशों के तहत लिए जाते थे। मुख्यमंत्री के बेटे के रूप में उनकी स्थिति ने उन्हें सिंडिकेट का नियंत्रक बना दिया।' इसमें कहा गया है, ‘जांच से यह भी पता चला है कि चैतन्य बघेल अपराध की आय के प्राप्तकर्ता हैं, जिसे उन्होंने अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में लगाया और वे इस प्रकार विकसित की गई इन संपत्तियों को बेदाग संपत्ति के रूप में पेश कर रहे हैं और उन पर दावा कर रहे हैं।' अभियोजन शिकायत में कहा गया है कि जांच से पहले ही पता चला है कि अपराध की आय का एक बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू नामक व्यक्ति द्वारा एकत्र किया जा रहा था, जिसने ईडी के सामने अपने बयान में खुलासा किया है कि उसने चैतन्य के साथ मिलकर शराब घोटाले से अर्जित एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की आय को संभाला था। इसमें कहा गया है कि उन्होंने (बंसल ने) स्पष्ट रूप से कहा है कि चैतन्य के निर्देश पर, 2019 से 2022 के बीच की अवधि में कांग्रेस के राज्य इकाई के तत्कालीन कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल और अन्य को बड़ी मात्रा में नकदी पहुंचाई गई थी। अभियोजन शिकायत में कहा गया है कि बंसल कथित तौर पर दीपेन चावड़ा के माध्यम से अनवर ढेबर से अपराध की यह आय एकत्र करते थे और उसके बाद चैतन्य के समन्वय से ये धनराशि राम गोपाल अग्रवाल तक पहुंचाई जाती थी। आरोप पत्र में ईडी ने बताया कि 'बंसल ने अपने बयान में खुलासा करते हुए बताया कि वह भूपेश बघेल को पिछले 25 सालों से जानते हैं और दोनों के पारिवारिक संबंध हैं। वह चैतन्य के साथ नियमित रूप से रायपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास जाया करते थे। उस समय रायपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास की ऐसी ही एक यात्रा के दौरान, भूपेश बघेल ने उन्हें (बंसल को) स्पष्ट रूप से बताया था कि अनवर ढेबर उन्हें कुछ सामान भेजेंगे, और उसे आगे उन्हें रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाना होगा। इसके बाद, चैतन्य बघेल ने नकदी की कथित डिलीवरी से एक दिन पहले उन्हें सूचित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान शब्द नकदी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक कोड वर्ड है।’ अग्रवाल फिलहाल फरार हैं। ईडी ने ने आरोपी लगाते हुए कहा कि चैतन्य शराब गिरोह का केंद्रीय व्यक्ति और नियंत्रक था, जो इससे जुड़ी कमाई पर सीधा नियंत्रण रखता था, अवैध धन के प्रवाह की निगरानी करता था, और अपराध की आय का उपयोग व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपक्रमों के लिए करता था। आरोप पत्र में कहा गया है कि चैतन्य बघेल ने अपनी रियल एस्टेट परियोजना, विट्ठल ग्रीन में 18.90 करोड़ रुपए और अपनी रियल एस्टेट फर्म मेसर्स बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स में 3.10 करोड़ रुपए की आपराधिक आय का उपयोग किया था। अभियोजन शिकायत में कहा गया है कि जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन से वॉट्सएप चैट के रूप में महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत भी बरामद किए गए हैं। ईडी के आरोपों के अनुसार लगभग 2,500 करोड़ रुपए से अधिक का यह शराब घोटाला प्रदेश में साल 2019 से 2022 के बीच हुआ था, जब छत्तीसगढ़ में चैतन्य के पिता भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का शासन था। इसी घोटाले के आरोप में चैतन्य को केंद्रीय एजेंसी ने 18 जुलाई को दुर्ग जिले के भिलाई शहर में स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। ईडी ने अब तक इस मामले में एक अभियोजन शिकायत और चार पूरक अभियोजन शिकायतें दर्ज की हैं और दावा किया है कि कथित घोटाले के परिणामस्वरूप राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और एक शराब गिरोह के लाभार्थियों की जेबें भरी गईं। सोमवार को दायर अभियोजन शिकायत में ईडी ने कहा कि 2019 में छत्तीसगढ़ में नई (कांग्रेस) सरकार के गठन के बाद, एक संगठित शराब गिरोह बनाया गया था। इस गिरोह के दिन-प्रतिदिन के संचालन को संभालने के लिए, तत्कालीन IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर (दोनों को मामले में ईडी द्वारा दायर पिछली अभियोजन शिकायतों में आरोपी के रूप में नामित किया गया है) का चयन किया गया था।  

यूपी के वाहन मालिकों को बड़ी राहत… 5 साल के सभी ई-चालान होंगे माफ

लखनऊ  उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने एक अहम और ऐतिहासिक फैसला लिया है. राज्य में 2017 से 2021 तक बने लाखों ई-चालान अब कानून के तहत स्वतः समाप्त माने जाएंगे. यानी जिन चालानों पर अदालतों में कार्रवाई लंबित थी या जो समय-सीमा से बाहर हो चुके हैं, वे अब मान्य नहीं रहेंगे. इस कदम से प्रदेशभर के वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी. इस फैसले के साथ ही फिटनेस, परमिट, वाहन ट्रांसफर और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) जैसी सेवाओं पर लगे अवरोध हट जाएंगे. यानी अब पुराने ई-चालानों की वजह से वाहन मालिकों को इन सेवाओं में अड़चन नहीं होगी. कितने चालान थे लंबित? परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2021 के बीच कुल 30,52,090 ई-चालान काटे गए थे. इनमें से 17,59,077 पहले ही निस्तारित हो चुके हैं, जबकि 12,93,013 चालान अब तक लंबित हैं. इनमें से 10,84,732 चालान कोर्ट में पेंडिंग हैं जबकि 1,29,163 चालान ऑफिस स्तर पर पेंडिंग हैं. अब ये सभी चालान खुद खत्म हो जाएंगे. एक महीने के भीतर सभी चालानों की स्थिति पोर्टल पर अपडेट कर दी जाएगी और जनता आसानी से ई-चालान पोर्टल पर जाकर अपने वाहन/चालान का स्टेटस देख सकेगी. क्यों लिया गया ये फैसला? परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह द्वारा आदेश में बताया गया कि यह फैसला जनहित, पारदर्शिता और कानून के पालन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. लंबे समय से कोर्ट में पड़े छोटे-मोटे चालानों से न्यायपालिका और प्रवर्तन तंत्र पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा था. इनकी वसूली लगभग असंभव हो चुकी थी. हाई कोर्ट ने भी कई आदेशों में साफ कहा कि ऐसे ई-चालान “by operation of law” अब समाप्त माने जाएंगे. राज्य सरकार ने नए कानून और अदालत के निर्देशों के बाद इसे पोर्टल स्तर पर लागू करने का आदेश जारी किया है. किन पर लागू नहीं होगा यह आदेश? यह राहत टैक्स रिकवरी से जुड़े चालानों पर लागू नहीं होगी. यानी मोटर व्हीकल्स टैक्सेशन एक्ट के तहत बकाया टैक्स वाले मामलों पर कार्रवाई अलग से जारी रहेगी. इसी तरह, गंभीर दुर्घटनाओं, IPC से जुड़े मामलों या शराब पीकर वाहन चलाने जैसे प्रकरण इस दायरे से बाहर रखे गए हैं. इन धाराओं में शामिल चालानों को खत्म नहीं किया जाएगा. जनता को कैसे फायदा होगा? इसका सीधा लाभ वाहन मालिकों को मिल सकेगा क्योंकि इससे वाहन सेवाएं आसान हो जाएंगी. अब फिटनेस, परमिट, ट्रांसफर या HSRP के लिए आवेदन करते समय पुराने ई-चालानों की वजह से रुकावट नहीं आएगी. इसके अलावा लाखों वाहन मालिकों पर से पुराने केस हट जाएंगे और उन्हें कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. खासकर ऑटो, ट्रांसपोर्ट और टैक्सी ऑपरेटरों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है. आगे क्या होगा? 30 दिन के भीतर सभी जिलों के RTO/ARTO दफ्तर लंबित चालानों की स्थिति बदलकर पोर्टल पर “Disposed-Abated” या “Closed-Time Bar” कर देंगे. एक महीने बाद वाहन मालिक पोर्टल पर लॉगिन करके देख सकेंगे कि उनका चालान खत्म हुआ या नहीं. हाई कोर्ट के जिन मामलों में खास तौर पर आदेश दिए गए हैं, वहां सात दिन के भीतर चालान पोर्टल से हटा दिए जाएंगे.

प्रसिद्ध कवि सुरजीत नवदीप का निधन, सीएम साय ने जताया गहरा शोक

रायपुर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य के कवि, धमतरी जिला हिंदी साहित्य समिति के संरक्षक सुरजीत नवदीप के निधन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शोक जताया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि, अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों के लोकप्रिय मंच संचालक, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व सदस्य और धमतरी जिला हिंदी साहित्य समिति के संरक्षक सुरजीत नवदीप के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। यह हिंदी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। सीएम ने कहा, नवदीप जी की सहज हास्य-व्यंग्य शैली, समाज की विसंगतियों पर गहरी दृष्टि और मंचीय उपस्थिति ने हिंदी साहित्य को नई ऊंचाइयां दी। आपकी रचनाएं और आपका व्यक्तित्व सदैव साहित्य प्रेमियों को प्रेरित करता रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति दें।     प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि, अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों के लोकप्रिय मंच संचालक, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व सदस्य और धमतरी जिला हिंदी साहित्य समिति के संरक्षक श्री सुरजीत नवदीप जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। यह हिंदी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

धर्म परिवर्तन और लव जिहाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त कार्रवाई, चार राज्यों से रिपोर्ट तलब

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी कानून पर यूपी-उत्तराखंड समेत 4 राज्यों से जवाब मांगा है. कोर्ट ने इन कानूनों पर रोक लगाने वाली याचिका पर राज्यों से चार हफ्ते में जवाब मांगा है. इस संबंध में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान को नोटिस जारी किया गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते में राज्यों को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है. वहीं, अब अगली सुनवाई 6 हफ्ते बाद होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों के जवाब दाखिल होने के बाद कानून पर रोक लगाने की मांग पर विचार किया जाएगा. याचिकाकर्ताओं में जमीयत उलेमा ए हिंद और सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस जैसे कई संगठन शामिल हैं.   याचिकाओं में कहा गया है कि यह कानून अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखने वाले जोड़ों को परेशान करने का जरिया बन गए है. इनकी आड़ में किसी को भी धर्मांतरण के आरोप में फंसाया जा सकता है. SC ने चार राज्यों से मांगा जवाब लव-जिहाद और गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन के खिलाफ यूपी,उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मध्यप्रदेश और गुजरात में बने कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.  

ट्रम्प-सहबाज शरीफ मुलाकात की अटकलें, UNGA के दौरान हो सकती है बातचीत

वाशिंगटन  यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ की जल्द मुलाकात हो सकती है. यह मुलाकात न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान हो सकती है. पाक पीएम 26 सितंबर को UNGA में अपना भाषण देंगे, इसके बाद दोनों की अलग से मुलाकात की संभावना है. इस दौरान आसीमन मुनीर भी मौजूद रह सकते हैं. सूत्रों के हवाले से बताया कि मुनीर को फील्ड मार्शल का पद दिए जाने के बाद से वह द्विपक्षीय वार्ताओं में सक्रिय रूप से शरीफ के साथ रहे हैं. मुनीर को यह पद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दिया गया, इस दौरान पाकिस्तान के अंदर बहावलपुर और मुरीदके में भारतीय सेना ने आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया था.   इससे कुछ महीने पहले ही मुनीर अमेरिका पहुंचे थे और ट्रंप द्वारा आयोजित डिनर में भी शामिल हुए थे. इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि मुनीर से मिलकर उन्हें सम्मानित महसूस हुआ और दोनों के बीच ईरान-इजराइल संघर्ष से उत्पन्न स्थिति पर बातचीत हुई है. ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि अमेरिका ईरान पर हमला करने के लिए पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है. जब ट्रंप और मुनीर की बैठक हुई थी तब विदेश मंत्री मार्को रुबियो और मध्य पूर्व के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ भी मौजूद थे. मुनीर के साथ पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक भी मौजूद थे.

TMC सांसद यूसुफ पठान की राहत नहीं, हाईकोर्ट ने अतिक्रमण मामले में आवेदन ठुकराया

अहमदाबाद  गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए यूसुफ पठान को अतिक्रमणकारी करार दिया है. पूर्व क्रिकेटर व वर्तमान टीएमसी सांसद यूसुफ पठान पर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप है. हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जल्द ही जमीन को खाली किया जाए. अतिक्रमण के संबंध में यूसुफ पठान की तरफ से याचिका कोर्ट में दायर की गई थी. हाईकोर्ट ने पठान की याचिका खारिज करते हुए उसे अतिक्रमणकारी करार दिया है. वडोदरा के भूखंड को खाली करने का आदेश गुजरात हाईकोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का दोषी पाया है. कोर्ट ने उन्हें विवादित भूखंड को खाली करने का आदेश दिया है. इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सेलिब्रिटी कानून से ऊपर नहीं हो सकते और उन्हें विशेष छूट देना समाज के लिए गलत संदेश देता है. सिंगल बेंच ने की सुनवाई न्यायमूर्ति मोना भट्ट की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया, जिसमें यूसुफ पठान की याचिका खारिज कर दी गई जिसमें उन्होंने अपने बंगले से सटे सरकारी भूखंड पर कब्जा बनाए रखने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने क्या कहा? हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा सेलिब्रिटीज का समाज पर गहरा प्रभाव होता है. यदि उन्हें कानून तोड़ने के बावजूद छूट दी जाती है तो इससे न्यायिक व्यवस्था पर से जनता का भरोसा कमजोर होता है. ऐसे व्यक्तियों की जिम्मेदारी आम नागरिकों से ज्यादा होती है. क्या है मामला यह विवाद वर्ष 2012 में शुरू हुआ था. वडोदरा नगर निगम ने यूसुफ पठान को सरकारी जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया था. पठान ने इस नोटिस को चुनौती दी और गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया. उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि उनके और उनके भाई इरफान पठान की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें वह जमीन खरीदने की अनुमति दी जाए. उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री को भी इस संबंध में आवेदन दिया था. सरकार का क्या रुख रहा यूसुफ पठान की अर्जी को नगर निगम ने राज्य सरकार को भेजा था, लेकिन वर्ष 2014 में सरकार ने भूमि आवंटन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. इसके बावजूद पठान ने जमीन पर कब्जा बनाए रखा, जससे मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंचा।

Vivo Y31 5G सीरीज़ आई मार्केट में, दमदार बैटरी और 50MP कैमरा बना हाइलाइट

नई दिल्ली, Vivo Y31 सीरीज भारत में लॉन्च हो गई है. ये कंपनी की Y-सीरीज में लेटेस्ट एडिशन है, जिसे कंपनी इस हफ्ते लॉन्च किया है. इस सीरीज में दो स्मार्टफोन- Vivo Y31 5G और Vivo Y31 Pro 5G लॉन्च हुए हैं, जो दमदार फीचर्स के साथ आते हैं. दोनों ही फोन्स मिड रेंज बजट यूजर्स को टार्गेट करते हैं. कंपनी ने नॉन-प्रो मॉडल में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया है, जो LED फ्लैश के साथ आता है. वहीं प्रो वेरिएंट में भी कंपनी ने डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया है. दोनों ही फोन्स दो कलर ऑप्शन में उपलब्ध होंगे. आइए जानते हैं इनकी कीमत और खास फीचर्स. कितनी है कीमत? Vivo Y31 5G को कंपनी ने 14,999 रुपये में लॉन्च किया है. ये कीमत फोन के 4GB RAM + 128GB स्टोरेज वेरिएंट की है. वहीं फोन का 6GB RAM + 128GB स्टोरेज वेरिएंट 16,499 रुपये में आता है. स्मार्टफोन रोज रेड और डायमंड ग्रीन कलर में मिलेगा. वहीं Vivo Y31 Pro 5G को कंपनी ने 18,999 रुपये में लॉन्च किया है. ये कीमत फोन के 8GB RAM + 128GB स्टोरेज वेरिएंट की है. वहीं 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 20,999 रुपये है. ये फोन माचा ब्राउन और ड्रीमी वॉइट में आता है. दोनों ही फोन्स को आप फ्लिपकार्ट से खरीद सकते हैं. क्या हैं स्पेसिफिकेशन्स? Vivo Y31 5G डुअल सिम सपोर्ट मिलता है. स्मार्टफोन Android 15 पर बेस्ड FuntouchOS 15 पर काम करता है. इसमें 6.68-inch का LCD डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आता है. स्मार्टफोन Snapdragon 4 Gen 2 प्रोसेसर पर काम करता है. फोन में 50MP + 0.08MP का डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलता है. वहीं फ्रंट में 8MP का सेल्फी कैमरा दिया गया है. स्मार्टफोन 6500mAh की बैटरी और 44W की चार्जिंग सपोर्ट करता है. सिक्योरिटी के लिए इसमें साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है. वहीं प्रो वेरिएंट की बात करें, तो इसमें 6.72-inch का LCD डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. स्मार्टफोन MediaTek Dimensity 7300 प्रोसेसर के साथ आता है. इसमें भी डुअल रियर और 8MP का फ्रंट कैमरा मिलता है. बैटरी भी स्टैंडर्ड मॉडल वाली ही मिलती है.

सैलजा का दावा: हरियाणा में अपराधियों पर नियंत्रण खो गया, कानून-व्यवस्था ध्वस्त

सिरसा  सिरसा की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने हरियाणा की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस की लापरवाही से अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सैलजा ने कहा कि सोमवार को सोनीपत, पलवल, बहादुरगढ़ और पानीपत में हुई चार हत्याएं इस बात का सबूत हैं कि अपराध पर काबू पाने में सरकार पूरी तरह नाकाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव-गांव और शहर-शहर में फैला नशे का नेटवर्क युवाओं को बर्बाद कर रहा है और अपराध को बढ़ावा दे रहा है। यह कारोबार सरकार की शह पर फल-फूल रहा है। एसपीआई रिपोर्ट में हरियाणा असुरक्षित सैलजा ने कहा कि सोशल प्रोग्रेस इंडेक्स (एसपीआई) रिपोर्ट ने हरियाणा को असुरक्षित राज्यों में गिना है। अपहरण, हत्या, लूट और महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। सांसद ने कहा कि पुलिस प्रशासन राजनीतिक दबाव में पंगु हो चुका है। अपराधियों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि लापता लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। भाजपा सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग सैलजा ने मांग की कि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई हो, नशे के नेटवर्क को तोड़ा जाए और पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा के 11 साल के शासनकाल में अपराध ही अपराध बढ़े हैं और जनता अब भय व असुरक्षा में नहीं जी सकती। कांग्रेस इस लड़ाई को मजबूती से लड़ेगी।

महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का फटकार, जल्द कराए जाएं चुनाव

मुंबई  महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव कराने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि 31 जनवरी 2026 तक महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाएं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग स्थानीय निकाय के चुनाव की तारीख आगे नहीं बढ़ाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्टूबर तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरा किए जाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि कर्मचारियों को रिटर्निंग ऑफिसर के तौर पर तुरंत नियुक्त करे. राज्य निर्वाचन आयोग दो सप्ताह में कर्मचारियों की लिस्ट मुख्य सचिव को सौंपनी है. राज्य चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ईवीएम की उपलब्धता पर 31 नवंबर तक सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करें. कोर्ट ने पूछा- क्या हो चुके चुनाव? यह आदेश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने दिया है. कोर्ट ने मई में स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए एक अंतरिम आदेश पारित किया था, जो ओबीसी के लिए आरक्षण लागू करने से संबंधित मुकदमेबाजी के कारण 2022 से रुके हुए थे. कोर्ट ने पूछा कि क्या चुनाव हो चुके हैं? मई में आदेश दिया गया था कि चुनाव 4 महीने (सितंबर के अंत तक) में होने थे. महाराष्ट्र के वकील ने कोर्ट को बताया कि प्रक्रिया चल रही है, परिसीमन हो चुका है. राज्य चुनाव आयोग कुछ समय बढ़ाने की मांग कर रहा है, इसके लिए एक अर्जी भी दाखिल की गई है. SC ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि हम आपको जनवरी तक का समय क्यों दें? महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कहा गया कि 29 नगर निगम हैं, पहली बार एक साथ चुनाव हो रहे हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए महाराष्ट्र सरकार के वकील से कहा कि आपकी निष्क्रियता आपकी अक्षमता को दर्शाती है, हमें कारण बताया जाए. महाराष्ट्र सरकार के वकील ने कहा कि हमारे पास 65,000 ईवीएम मशीनें हैं, 50,000 और चाहिए, इसके लिए हमने ऑर्डर दे दिए हैं.