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जनता को राहत: सरकार ने 12% टैक्स स्लैब घटाकर 5% किया, 99% वस्तुएं होंगी सस्ती

चेन्नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि सरकार ने 12 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाली 99 प्रतिशत वस्तुओं पर कर को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। इससे लोगों पर कर का बोझ कम होगा। ट्रेड एडं इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के ज्वाइंट कॉन्क्लेव में लोगों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, "सरकार ने जीएसटी सुधार के तहत टैक्स स्लैब की संख्या को चार (5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत) से घटाकर दो (5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत) कर दिया गया है।" वित्त मंत्री ने आगे कहा, "जब लोगों को लगा कि सरकार ज्यादा टैक्स लगा रही है तो प्रधानमंत्री मोदी ने टैक्स के बोझ को घटाने के लिए कदम उठाए। जीएसटी में कटौती का हमारे 140 करोड़ नागरिकों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री दिवाली से पहले देश को यह छूट देना चाहते थे, लेकिन हमें नवरात्रि से पहले ही इसकी घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है। यह सभी भारतीयों की जीत है।" वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने 18 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाली 90 प्रतिशत वस्तुओं पर कर को घटाकर 5 प्रतिशत या शून्य कर दिया है। इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने बताया कि 2017 में केवल 65 लाख लोग की जीएसटी का भुगतान कर रहे थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 1.5 करोड़ पर पहुंच गई है। साथ ही जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 22.08 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है, जो कि 2018 में 7.18 लाख करोड़ रुपए था। जीएसटी में कटौती का श्रेय राज्यों के साथ साझा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के मंत्री जीएसटी परिषद की शुरुआत से ही इसका हिस्सा रहे हैं, और यह निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया है। इस सफलता में राज्य सरकारों की भी भूमिका है। हमने 350 से ज्यादा वस्तुओं पर कर कम किया है और कर ढांचे को केवल दो स्लैब तक सीमित कर दिया है। नए जीएसटी सुधार 22 सितंबर से लागू होंगे। नए जीएसटी ढांचे में सरकार ने 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो स्लैब रखे हैं। वहीं, लग्जरी और सिन गुड्स पर 40 प्रतिशत का अलग से टैक्स लगाया जाएगा।

नए युग की ओर यूपी: हाई-टेक उद्योग देंगे राज्य को विश्वस्तरीय पहचान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार 'विकसित उत्तर प्रदेश-समर्थ उत्तर प्रदेश @2047' विजन को साकार करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर रही है। इस रूपरेखा में तीन मिशन- समग्र विकास, आर्थिक नेतृत्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा तीन थीम- अर्थ शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मत है कि अगले 22 साल में उत्तर प्रदेश की ग्लोबल पहचान भविष्योन्मुखी उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किए बगैर नहीं प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए सरकार का विशेष ध्यान एआई, बायोटेक, ग्रीन एनर्जी और एग्रीटेक आधारित उद्योगों पर है। इसके साथ ही सरकार प्रदेश के 12 प्रमुख सेक्टर (कृषि, औद्योगिक विकास, आईटी व इमर्जिंग टेक, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, नगर व ग्राम्य विकास, सतत विकास, पशुधन, पर्यटन, अवस्थापना और सुरक्षा-सुशासन) के जरिए भविष्य के उद्योगों की रूपरेखा तैयार करने में जुटी हुई है। इस व्यापक खाके का आर्थिक लक्ष्य 2030 तक प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। 2017 से पूर्व उत्तर प्रदेश की गिनती बीमारू और विकास की दौड़ में पिछड़े राज्य की बन चुकी थी। सुरक्षा तंत्र की कमजोरी, निवेश के लिए असुरक्षित माहौल, हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और कौशल विकास की अनुपस्थिति के कारण निवेशकों का विश्वास घटा हुआ था। पुलिस सशक्तिकरण और स्मार्ट मॉनिटरिंग का ढांचा न होने से अपराध पर नियंत्रण ढीला था। यही कारण था कि रोजगार और उद्योग दोनों ही सीमित स्तर पर ठहर गए थे। यहां तक कि अधिकांश उद्यमी अन्य राज्यों की ओर पलायन कर चुके थे। योगी सरकार ने 2017 के बाद से कानून-व्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार किए। पुलिस भर्ती और आधुनिकीकरण, स्मार्ट निगरानी नेटवर्क, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई से प्रदेश का सुरक्षा वातावरण पूरी तरह बदल गया। ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ जैसी पहलों ने सजा दर बढ़ाई और निवेशकों के लिए विश्वासपूर्ण माहौल तैयार किया। इसका सीधा असर उद्योग और व्यापार पर पड़ा और प्रदेश निवेश का सुरक्षित गढ़ बन सका। यही वजह रही कि 2023 में आयोजित यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देश-विदेश की नामचीन कंपनियों ने यूपी में 45 लाख करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रख दिया। इसमें से 15 लाख करोड़ के निवेश धरातल पर उतर भी चुके हैं। यूपी ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) नीति लागू करके नोएडा और लखनऊ जैसे शहरों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का नया केंद्र बनाने की पहल की है। इस नीति का उद्देश्य फॉर्च्यून 500 कंपनियों को आकर्षित करना है ताकि प्रदेश में उच्च वेतन वाली नौकरियां, आरएंडडी, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसी उच्च मूल्य सेवाएं विकसित हो सकें। राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जा रही जमीन, टैक्स छूट और बुनियादी ढांचे की सुविधा ने घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है। प्रदेश अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), बायोटेक, अक्षय ऊर्जा, एग्रीटेक, क्वांटम, साइबर सिक्योरिटी और मेटावर्स जैसे भविष्य के उद्योगों को अपनी अर्थव्यवस्था का आधार बना रहा है। एआई से उत्पादकता बढ़ेगी, जबकि अक्षय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी में नए विनिर्माण क्लस्टर और रोजगार सृजित होंगे। बायोटेक और हेल्थ-टेक पार्क राज्य को फार्मा और मेडिकल रिसर्च का हब बनाएंगे। एग्रीटेक और वर्टिकल फार्मिंग किसानों की आय बढ़ाकर ग्रामीण समृद्धि को मजबूत करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च मूल्य सेवाएं, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीटेक सुधार प्रदेश को 6 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएंगे। जीसीसी और आईटी-एआई हब से सेवाओं का निर्यात बढ़ेगा, रिन्यूएबल और ई-मोबिलिटी क्लस्टर से विनिर्माण व एक्सपोर्ट में तेजी आएगी और कृषि आधारित प्रोसेसिंग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बायोटेक और मेडिकल आरएंडडी से विशेषीकृत रोजगार और निर्यात अवसर खुलेंगे। योगी सरकार का यह विजन रोजगार सृजन पर केंद्रित है। प्रत्यक्ष तौर पर लाखों उच्च-वेतन नौकरियां ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और आईटी हब से मिलेंगी। वहीं, रिन्यूएबल, स्मार्ट सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन में लाखों मध्यम और निम्न-कुशल नौकरियां बनेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में एग्रीटेक और कोल्ड चेन से स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और शहरी पलायन कम होगा। स्किल-विकास योजनाएं और प्राइवेट पार्टनरशिप इस रोजगार रोडमैप को व्यवहार्य बनाएंगी। 2047 तक उत्तर प्रदेश को 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य को लगातार 16 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी। इस विज़न के अंतर्गत प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में प्रदेश का योगदान लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंचेगा। यह केवल तभी संभव होगा जब निजी और सार्वजनिक निवेश, क्लस्टर-बिल्डिंग, मानव संसाधन विकास और सुरक्षित निवेश माहौल निरंतर बनाए रखा जाए।

अमित शाह बोले – राजभाषा सम्मेलन देश में नई प्रेरणा और उत्साह का संचार कर रहा

गांधीनगर हिंदी दिवस के अवसर पर गुजरात की राजधानी गांधीनगर में 5वां अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिरकत की और देशभर से आए राजभाषा और भारतीय भाषाओं के विद्वानों का स्वागत किया। अपने संबोधन में केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए विशेष अवसर है, क्योंकि पूरे देश से राजभाषा और भारतीय भाषा के उत्साही लोग एकत्रित हुए हैं। यह मेरा संसदीय क्षेत्र भी है और मैं आप सभी का हार्दिक स्वागत करता हूं। उन्होंने सम्मेलन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह समारोह पहले हमेशा दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया जाता था, लेकिन पिछले पांच वर्षों से इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित करने की परंपरा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि 2021 के बाद 5वां अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन दिल्ली के बाहर हो रहा है। पिछले चार सम्मेलनों के अपने अनुभव से हम जानते हैं कि यह नए दृष्टिकोण, ऊर्जा और प्रेरणा लेकर आता है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इस बदलाव से हमें राजभाषा और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच संवादिता और आदान-प्रदान का शानदार अवसर मिला है। उन्होंने गुजरात की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भले ही यह हिंदी भाषी राज्य नहीं है, लेकिन यहां हिंदी को हमेशा से अपनाने और आगे बढ़ाने की परंपरा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसी महान विभूतियों ने न केवल हिंदी को स्वीकार किया, बल्कि इसके प्रचार-प्रसार में भी अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जब सारा कामकाज जनता की भाषा में होता है तो जनता के साथ संपर्क अपने आप बढ़ जाता है। सारथी एक अनुवाद की प्रणाली है। यह हिंदी से भारत की सभी भाषाओं में सरलता से अनुवाद करने की व्यवस्था है। मैं गर्व के साथ देशभर की सभी सरकारों को कहना चाहता हूं कि आप अपनी भाषा में हमें पत्र दीजिए और गृह मंत्रालय आपकी ही भाषा में जवाब देगा, हम यह व्यवस्था कर चुके हैं। आने वाले दिनों में हम इसे और समृद्ध करेंगे। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि आज हिंदी दिवस के अवसर पर, मैं आप सभी का हार्दिक अभिनंदन करता हूं और गुजरात की पावन धरती पर आपका स्वागत करता हूं। आज गांधीनगर में 5वां अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन आयोजित हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राजभाषा विभाग ने डिजिटल हिंदी शब्दकोश 'सिंधु' जैसे प्रयास किए हैं। इन प्रयासों के माध्यम से शब्दकोश 'सिंधु' में 7 लाख से अधिक शब्द शामिल किए गए हैं।

एमपी ट्रांसको के 412 सब स्टेस्शन में कैपेसिटर बैंक क्रियाशील : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि विद्युत उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) अपने अधिकांश एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशनों में कैपेसिटर बैंकों की स्थापना कर चुकी है। कंपनी के 417 सबस्टेशन में से 412 सबस्टेशन में विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं। इसके अतिरिक्त पुराने सबस्टेशनों में भी आवश्यकता अनुसार नए कैपेसिटर बैंकों की स्थापना के साथ मौजूदा क्षमता में वृद्धि की जा रही है। उन्होंने एमपी ट्रांसको के इस अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज की गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। 9278.5 एम.व्ही.ए.आर.की स्थापित क्षमता वर्तमान में राज्य में स्थित एम.पी. ट्रांसको के 220 के.व्ही. सबस्टेशनों पर 145 के.व्ही. स्तर के 32 कैपेसिटर बैंक एवं 132 के.व्ही. सबस्टेशनों पर 36 के.व्ही. स्तर के 719 कैपेसिटर बैंक क्रियाशील हैं। कुल मिलाकर प्रदेश में एम.पी. ट्रांसको 751 कैपेसिटर बैंकों तथा 9278.5 एम.व्ही.ए.आर. की संयुक्त स्थापित क्षमता के साथ उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर उच्च गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति उपलब्ध करा रही है। 52 पुराने कैपेसिटर बैंकों की क्षमता वृद्धि ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश में 52 ऐसे पुराने कैपेसिटर बैंकों की पहचान की है, जिनकी समयावधि आयु पूर्ण हो चुकी है और वे अब अपेक्षित कैपेसिटिव लोड प्रदान करने में सक्षम नहीं हैं। इन सबस्टेशनों में अधिक एमवीएआर क्षमता के कैपेसिटर बैंकों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस आवश्यकता की पूर्ति के लिये कंपनी ने अभियान चलाकर इन स्थानों पर कैपेसिटर बैंकों का प्रतिस्थापन एवं क्षमता वृद्धि की जा रही है, ताकि एमपी ट्रांसकों के सभी सबस्टेशनों से गुणवत्तापूर्ण और मानक वोल्टेज में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। कैपेसिटर बैंक से मिलता है लाभ एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों से विद्युत आपूर्ति के दौरान पॉवर ट्रांसफार्मर्स पर प्रायः इंडक्टिव लोड (सिंचाई मोटरें एवं घरेलू उपकरण) होता है, जिससे वोल्टेज में कमी आती है और विद्युत गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस समस्या के समाधान के लिये कैपेसिटर बैंक लगाए जाते हैं, जो अपने कैपेसिटिव लोड के माध्यम से उस इंडक्टिव प्रभाव को संतुलित कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप पॉवर फैक्टर में सुधार होता है और उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति होती है।  

कांग्रेस घुसपैठियों की रक्षक, देश विरोधियों की हमदर्द – पीएम मोदी का आरोप

असम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को असम के दरांग में एक जनसभा को संबोधित करते हुए जनता को कांग्रेस के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग हमारी सेना की बजाय आतंकियों को पालने वालों के एजेंडों को आगे बढ़ाते हैं। पाकिस्तान का झूठ कांग्रेस का एजेंडा बन जाता है। इसलिए आपको कांग्रेस के प्रति हमेशा सतर्क रहना चाहिए। पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब पूरा देश आतंक से लहूलुहान होता था और कांग्रेस चुपचाप खड़ी रहती थी। आज हमारी सेना 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाती है, पाकिस्तान के कोने-कोने से आतंक को उखाड़ फेंकती है, लेकिन कांग्रेस के लोग पाकिस्तान की सेना के साथ खड़े हो जाते हैं। कांग्रेस के लोग हमारी सेना की बजाय आतंकियों को पालने वालों के एजेंडों को आगे बढ़ाते हैं। पाकिस्तान का झूठ कांग्रेस का एजेंडा बन जाता है, इसलिए आपको कांग्रेस के प्रति हमेशा सतर्क रहना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस के लिए अपने वोट बैंक का हित सबसे बड़ा है। कांग्रेस देशहित की कभी परवाह नहीं करती है। आज कांग्रेस देशविरोधियों और घुसपैठियों की भी रक्षक बन चुकी है। जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब वह घुसपैठ को बढ़ावा देती थी और आज कांग्रेस चाहती है कि घुसपैठिए हमेशा के लिए भारत में बस जाए और भारत का भविष्य घुसपैठिए तय करें।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "दशकों तक कांग्रेस ने असम पर शासन किया, फिर भी उन्होंने 60-65 वर्षों में ब्रह्मपुत्र नदी पर केवल तीन पुल बनाए। इसके विपरीत, जब आपने हमें अवसर दिया, तो हमने केवल एक दशक में छह नए पुल बनाए। यह स्वाभाविक है कि आप हमारे प्रयासों की सराहना करेंगे और हमें अपना समर्थन देंगे। केवल नौ दिनों में नवरात्रि के पहले दिन, जीएसटी दरों में उल्लेखनीय गिरावट आने वाली है, जिससे देश के लोगों को काफी लाभ होगा। इस कमी से सीमेंट, बीमा, मोटरसाइकिल और कारों की कीमतों में भारी कमी आएगी।"

प्रदेश में कचरे के निष्पादन के लिये नगरीय निकायों को किया जा रहा है प्रोत्साहित

भोपाल में बेकार कपड़े को रिसायकल करके उच्च गुणवत्ता का तैयार किया जा रहा है फाइबर पीपीपी मॉडल पर तैयार किया गया है अत्याधुनिक प्लांट भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास विभाग नगरीय निकायों को कचरे के उचित निष्पादन के लिये लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। प्रदेश के अनेक नगरीय निकायों ने इस दिशा में अभिनव पहल भी की है। इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। भोपाल नगर निगम ने कपड़े के रूप में अपशिष्ट प्रबंधन के लिये पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मॉडल) टेक्सटाइल रिकवरी फेसिलिटी (टीआरएफ) सेंटर स्थापित किया है। यह पहल वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण (रिसायकल) को बढ़ावा देने दी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नगर निगम भोपाल की इस परियोजना का संपूर्ण खर्च कंपनी द्वारा वहन किया गया है और लगभग 2 करोड़ रूपये की लागत से यह अत्याधुनिक प्लांट तैयार किया गया है। निगम को इसके एवज में प्रति माह 22 हजार रूपये की रायल्टी प्राप्त होगी। यह टीआरएफ यूनिट प्रति घंटा एक टन बेकार कपड़ा अपशिष्ट प्रोसेस करने की क्षमता रखता है। इस यूनिट में एकत्रित पुराने कपड़ों को छटाई और 7-स्टेज डीथ्रेडिंग यूनिट की आधुनिक प्रक्रिया से गुजार कर उच्च गुणवत्ता का कॉटन और फाइबर तैयार किया जा रहा है। इस प्लांट के सॉफ्ट टायज, किक बैग्स, क्रिकेट पैड्स, रंगीन कॉटन, सफेद कॉटन और पॉलीएस्टर फाइबर जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं। इससे न केवल राजधानी भोपाल में केवल कपड़ा अपशिष्ट का पुन: उपयोग संभव हुआ है, बल्कि अनेक लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। पर्यावरण संरक्षण फाइबर सायकल टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड की यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह परियोजना भोपाल को स्वच्छ और हरित शहर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। यह यूनिट प्रदेश के अन्य नगरों के लिये भी एक प्रेरक मॉडल बन गयी है। इस इकाई की कुल क्षमता 10 टन प्रति दिन है। भोपाल नगर निगम महापौर श्रीमती मालती राय ने भी इकाई का दौरा कर इसकी कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की है। इस इकाई को नगर निगम ने सिर्फ जमीन उपलब्ध कराई है। सारा निवेश कंपनी की तरफ से किया गया है।  

शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति और विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर दी शुभकामनाएं भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति और विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटक है। ऐसे में जीनगर समाज द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिये किए जा रहे कार्य प्रशंसनीय और सराहनीय हैं। समाजहित में किये जा रहे इस कार्य में राज्य सरकार आपके साथ है। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने रविवार को भोपाल में अखिल भारतीय जीनगर समाज द्वारा आयोजित प्रतिभावान विद्यार्थी सम्मान समारोह में सहभागिता की। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया एवं उपस्थित विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा समाज बंधुओं को संबोधित किया। सामाजिक बंधुओं ने उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा का भी सम्मान किया। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि समाज के बच्चों से मैं यह विशेष तौर पर कहना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा के लिए पूर्ण समर्पित और संकल्पित है। उन्होंने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।  

खाद्य निगम घोटाले पर गिरी गाज: बिहार सरकार ने 12 अफसरों को किया सस्पेंड

पटना खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने राज्य खाद्य निगम के छह सहायक प्रबंधक एवं छह गुणवत्ता नियंत्रक को खराब गुणवत्ता के खाद्यान्न की आपूर्ति किए जाने के संबंध में विभागीय जांचोपरांत निलंबन की कार्रवाई की है। इससे पूर्व विभाग द्वारा कल छह आपूर्ति निरीक्षकों/प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को निलंबित किया गया था।  खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग पूरे राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुकानों में खाद्यान्नों की गुणवत्ता, मात्रा एवं समय पर खाद्यान्न की उपलब्धता के संबंध में राज्यव्यापी 'जीरो ऑफिस डे 'अभियान के तहत निरीक्षण अभियान चला रहा है। अब तक राज्य में राज्य के कुल 53,869 सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों में से 49,209 सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों का निरीक्षण कार्य संपन्न कर लिया गया है।  इस निरीक्षण अभियान के तहत खाद्यान्न की मात्रा, गुणवत्ता एवं सही समय पर खाद्यान्न की उपलब्धता के संबंध में शिकायत निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अब तक कुल 10,735 सर्वजानिक जन वितरण प्रणाली दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, 108 प्राथमिक की दर्ज की गई है तथा 178 सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुकानों का लाइसेंस रद्द किया गया है।   

इजरायल पर खाड़ी देशों का पलटवार! कतर हमले के बाद सऊदी-UAE का नया गठबंधन तैयार

दोहा  कतर की राजधानी दोहा पर इजरायल के हालिया हमले ने पूरे अरब जगत को झकझोर दिया है। इस हमले को लेकर सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, ओमान और कुवैत जैसे खाड़ी देशों ने कड़ी नाराज़गी जताई है। अब इन देशों में विचार हो रहा है कि वे एकजुट होकर इजरायल को कड़ा जवाब दें । चाहे वह कूटनीतिक, सैन्य या  आर्थिक मोर्चे पर क्यों न हो। कई विशेषज्ञ इसे  ‘इस्लामिक नाटो’ जैसे गठबंधन की दिशा में पहला कदम मान रहे हैं। कतर पर हमले ने बढ़ाई खाड़ी की बेचैनी   जून 2025 में  ईरान ने कतर स्थित अमेरिकी बेस  को निशाना बनाया था। सितंबर में इजरायल ने दोहा में हमास के राजनीतिक ठिकानों  पर हमला कर दिया। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कहा-“यह सिर्फ कतर पर नहीं, पूरे अरब पर हमला है। जवाब सामूहिक होगा।”  दोहा में होने वाले अरब और इस्लामी शिखर सम्मेलन में इस पर बड़ा फैसला संभव है।   खाड़ी देशों की प्रतिक्रियाएं  सऊदी अरब ने कहा कि यह हमला अस्वीकार्य है। यूएई राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद 24 घंटे के भीतर दोहा पहुँचे और तुरंत कूटनीतिक हलचल शुरू कर दी। विशेषज्ञ मानते हैं कि खाड़ी देश अब ऐसे कदम उठाना चाहते हैं जिससे “भविष्य में इजरायली हमलों की संभावना ही खत्म हो जाए।” कुवैत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बदर अल-सैफ ने कहा –“अगर हम अब एकजुट नहीं हुए तो अगला निशाना अन्य खाड़ी देश होंगे।”    कूटनीतिक विकल्प  यूएई अब्राहम समझौते में अपनी भागीदारी घटा सकता है, जिसके तहत इजरायल और अरब देशों के बीच रिश्ते सामान्य हुए थे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद  में कतर पहले ही इजरायली हमलों की निंदा का सर्वसम्मत प्रस्ताव पास करवा चुका है। कतर यह भी सोच रहा है कि वह  अमेरिका और उसके विरोधियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका से हट जाए।    क्या बनेगा 'इस्लामिक नाटो'? खाड़ी देशों के बीच पहले से ही पारस्परिक रक्षा संधि  है। 1980 के दशक का Peninsula Shield Force  समझौता अब सक्रिय किया जा सकता है। वायु और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को एकीकृत  करने की तैयारी पर विचार हो रहा है। अधिकांश खाड़ी देश अमेरिकी हथियारों पर निर्भर हैं, लेकिन अब वे अपनी रक्षा क्षमता में विविधता लाने  की कोशिश कर सकते हैं।    इजरायल के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार  सऊदी अरब, कतर, कुवैत और यूएई के पास  खरबों डॉलर के संप्रभु धन कोष  हैं। इनका इस्तेमाल इजरायल की सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचाने के लिए किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अरब देश उन कंपनियों का  बहिष्कार  कर सकते हैं, जिनकी इजरायल की अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी है। यह संदेश भी दिया जा सकता है कि  “अगर हम असुरक्षित हैं और इसका कारण इजरायल है, तो हमारा पैसा कहीं और जाएगा।”  

सुभाष घई ने कश्मीर को बताया गौरव, फिल्मकारों से की घाटी में फिल्म शूटिंग की अपील

मुंबई,  मशहूर फिल्म निर्माता सुभाष घई हाल ही में कश्मीर गए थे, जहां उन्होंने कश्मीर के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। इसकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए उन्होंने कश्मीर को देश का गौरव बताया और दूसरे फिल्म निर्माताओं से घाटी में शूटिंग करने की अपील की। सोशल मीडिया पोस्ट में सुभाष घई ने सिनेमा के जरिए कश्मीर घाटी में पर्यटन को बढ़ावा देने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि कश्मीर की मनमोहक सुंदरता को पर्दे पर दिखाकर फिल्म और पर्यटन दोनों को सपोर्ट कर सकते हैं। रविवार को निर्देशक सुभाष घई ने इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर करते हुए लिखा, “कश्मीर में सिनेमा और फिल्म शूटिंग के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कश्मीर के एक प्रतिनिधिमंडल से मिलना मेरे लिए सुखद अनुभव रहा। कश्मीर के लोग और सरकार पूरी तरह समर्पित हैं कि वे भारत और दुनियाभर के फिल्म निर्माताओं को आमंत्रित कर अपने खूबसूरत कश्मीर और भारत के गौरव को फिल्मों में दिखाएं।” इससे पहले सुभाष घई ने सोशल मीडिया पर साची बिंद्रा के लिए पोस्ट लिखी थी। इसमें उन्होंने साची की खूब तारीफ की और बताया कि परिवार का हिस्सा होने के बावजूद कभी भी फिल्मों में काम के लिए मदद नहीं मांगी, न ही कभी संपर्क किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “कृपया इसे नेपोटिज्म न कहें। ये अभिनेत्री साची बिंद्रा हैं, जो अपनी पहली फिल्म ‘मन्नू क्या करेगा’ की मुख्य अभिनेत्री हैं, और वह मेरी पारिवारिक सदस्य हैं, लेकिन यकीन मानिए, साची आज तक फिल्मों में अभिनय के लिए मुझसे कभी किसी तरह की मदद के लिए नहीं मिलीं। जब मैंने परिवार के साथ उनकी फिल्म देखी, तो मैं पर्दे पर उनका शानदार अभिनय देखकर दंग रह गया। मुझे उन पर गर्व है। इतनी मनोरंजक फिल्म के लिए उन्हें और उनकी टीम को बधाई। मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ है।” सुभाष घई ‘कालीचरण’, ‘विश्वनाथ’, ‘कर्ज’, ‘हीरो’, ‘विधाता’, ‘मेरी जंग’, ‘कर्मा’, ‘राम लखन’, ‘सौदागर’, ‘खलनायक’, ‘परदेस’, और ‘ताल’ जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। कमर्शियल सिनेमा में सफलता के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कुछ दिनों पहले कहा था कि सही कास्टिंग और निर्देशक का विषय पर गहरी समझ होना सबसे महत्वपूर्ण है।