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सफाई में लापरवाही पर सैलजा का वार, CM नायब सिंह से की कड़ी कार्रवाई की मांग

हरियाणा  कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव व सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर सिरसा संसदीय क्षेत्र में नहरी-नालों की सफाई, घग्गर नदी तटबंधों की मज़बूतीकरण और अमृत योजना में लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कदम उठाए जाते तो न तो बाढ़ का इतना बड़ा संकट खड़ा होता और न ही किसानों को भारी क्षति उठानी पड़ती। सैलजा ने याद दिलाया कि मई-जून में ही उन्होंने नहरी नालों की सफाई और तटबंधों की मजबूतीकरण का आग्रह किया था। 30 जून तक अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी जारी हुए थे और तीन जुलाई को सिरसा में हुई दिशा की बैठक में भी मामला उठाया गया था, मगर धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में सिरसा, फतेहाबाद और जींद के दौरे के दौरान सांसद ने पाया कि नहरी नालों व सीवरेज की समय पर सफाई न होने से फसलें जलमग्न हो गईं और आवासीय क्षेत्र भी प्रभावित हुए। उन्होंने हिसार-घग्गर ट्रेन मार्ग से जुड़े गांवों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए कहा कि हजारों एकड़ फसल पानी में डूबकर नष्ट हो गई। सांसद ने सरकार द्वारा घोषित मुआवजा राशि को किसानों के साथ मज़ाक बताते हुए उचित और पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की। सैलजा ने सिरसा नगर की अमृत योजना पर भी सवाल उठाए और कहा कि सीवर सफाई न होने से बारिश में नागरिकों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल करोड़ों रुपये जारी होने के बावजूद नहरों-नालों की सफाई केवल कागजों में होती है। उन्होंने सरकार से संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए।

फिल्मी सितारों की महफ़िल: चंकी पांडे होंगे होस्ट, रज़ा मुराद-दिलीप सेन को मिलेगा लाइफ टाइम अचीवमेंट

जयपुर 20 सितंबर को जयपुर के दीप स्मृति ऑडिटोरियम में 13वां राजस्थान फिल्म फेस्टिवल आयोजित होगा। इस बार होस्टिंग का जिम्मा चंकी पांडे, सुमित व्यास और डेजी शाह संभालेंगे। कार्यक्रम में रजा मुराद और दिलीप सेन को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। जयपुर एक बार फिर सिनेमा प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। 20 सितंबर को मानसरोवर स्थित दीप स्मृति ऑडिटोरियम में राजस्थान फिल्म फेस्टिवल (आरएफएफ) का 13वां संस्करण आयोजित किया जाएगा। इस बार आयोजन कई मायनों में खास होगा क्योंकि इसकी मेजबानी बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता चंकी पांडे और राजस्थान के लोकप्रिय एक्टर सुमित व्यास करेंगे। इनके साथ बॉलीवुड अभिनेत्री डेजी शाह भी होस्टिंग टीम का हिस्सा होंगी। फेस्टिवल की फाउंडर संजना शर्मा ने बताया कि शो को दर्शकों के लिए मनोरंजक और यादगार बनाने हेतु विशेष होस्टिंग कॉम्बिनेशन तैयार किया गया है। चंकी पांडे अपने अनोखे ह्यूमर से दर्शकों को बांधेंगे, सुमित व्यास राजस्थानी अंदाज से कार्यक्रम को रंगीन बनाएंगे और डेजी शाह अपनी ऊर्जा और करिश्मे से चार चांद लगाएंगी। गौरतलब है कि पिछले वर्ष इस शो की मेजबानी अरबाज खान ने की थी। इस अवसर पर बॉलीवुड अभिनेता राजा मुराद और संगीतकार दिलीप सेन को भारतीय सिनेमा में उनके अद्वितीय योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया जाएगा। गौरतलब है कि रजा मुराद ने अपने पांच दशक से भी ज्यादा के करियर में 250 से ज्यादा फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। वहीं दिलीप सेन और समीर सेन की संगीतकार जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को 1800 से अधिक गीत दिए हैं। फेस्टिवल में नौ राज्यों की 14 क्षेत्रीय फिल्में और आठ राजस्थानी फिल्में प्रतिस्पर्धा करेंगी। अवॉर्ड नाइट में अभिनेत्री चारु असोपा, कोरियोग्राफर अजीत सिंह तंवर, पॉप सिंगर कोमल कोरा, लोक गायक मोती खान, मॉडल स्वाति जांगिड़ और साउथ एक्ट्रेस मीनाक्षी गोस्वामी अपने परफॉर्मेंस से शाम को खास बनाएंगे। 19 सितम्बर को आरएफएफ सोशल स्पॉट लाइट का आयोजन होगा, जिसकी मेजबानी अभिनेत्री चारु असोपा करेंगी। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में अभिनेत्री भाग्यश्री शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में डिजिटल क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर्स और कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इंटर स्कूल/कॉलेज डांस कॉम्पिटिशन भी आयोजित होगा। प्रोग्रामिंग हेड अनिल जैन ने बताया कि यह फेस्टिवल कंचन कैसेट्स एंड सीरीज (के-सीरीज) की पहल है और 2013 से लगातार जयपुर में आयोजित हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थानी सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और क्षेत्रीय कलाकारों को प्रोत्साहन देना है। फाउंडर संजना शर्मा ने कहा कि यह फेस्टिवल सिर्फ एक अवॉर्ड शो नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा और संस्कृति का संगम है, जो विविधता में एकता का संदेश देता है।

अखिलेश यादव का बड़ा दांव: मथुरा, आगरा और हाथरस के लिए अलग चुनावी घोषणा पत्र

लखनऊ  सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि उनकी सरकार में आगरा, हाथरस एवं मथुरा के विकास के लिए शुरू की गई तमाम योजनाएं भाजपा सरकार में अब बर्बाद हो गई हैं। समाजवादी पार्टी का 2027 के चुनावों में इन तीनों जनपदों का अलग घोषणा पत्र होगा, जिसमें नई विकास योजनाओं की घोषणा होगी।अखिलेश यादव ने आगरा, मथुरा और हाथरस के कार्यकर्ताओं की बैठक में अपना चुनावी प्लान बताया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म स्थान मथुरा की पवित्रता बनाए रखना है। भाजपा तो सिर्फ सत्ता का दुरुपयोग कर मथुरा की जनता को गुमराह कर रही है जबकि सच्चाई यह है कि मथुरा में विकास कार्य समाजवादी सरकार में ही हुए थे। चुनाव 2027 की तैयारी में अभी से जुट जाने का आह्वान करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कार्यकर्ता भाजपा की साजिशों से सावधान रहें। जनता 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने का मन बना चुकी है, बस प्रत्येक कार्यकर्ता को सक्रिय, सतर्क और सावधान रहना होगा। सपा प्रमुख ने कहा कि पीडीए पंचायतों से समाज में जाग्रति हुई है और लोगों को उसकी ताकत का एहसास भी हुआ है। पीडीए की ताकत से भाजपा घबड़ाई हुई है। उसे चुनाव में हार का डर दिखने लगा है। मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी न हो, इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वोट बनवाने, वोट डलवाने के साथ इस पर भी निगाह रखनी है कि अपने लोगों को वोट कटने न पाए। भाजपा मतदाता सूची में हेरफेर करके और मतदान में धांधली करने की साज़िश करती है। कार्यकर्ताओं को जनता के दुख दर्द में हमेशा साथ रहना चाहिए। एकजुट होकर परस्पर सहयोगी बनकर चुनाव में बूथ स्तर तक सफलता हासिल करनी है। बैठक में सांसद रामजी लाल सुमन, बाबू सिंह कुशवाहा, देवेश शाक्य सहित राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल, वरिष्ठ नेता संजय लाठर, रामऔतार सैनी व आरएस कुशवाहा मौजूद रहे।  

50 करोड़ की टैक्स चोरी का मामला! सोम डिस्टलरी के 8 ठिकानों पर छापा, 14 करोड़ वसूले गए

भोपाल  शराब कंपनी सोम डिस्टलरी के भोपाल-इंदौर कार्यालय और रायसेन जिले की फैक्ट्री समेत 8 ठिकानाें पर कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज की टीम ने छापेमारी की। दो दिन से चल रही इस कार्रवाई के बीच कंपनी ने गुरुवार को 14 करोड़ रुपए जमा कर दिए। विभागीय जानकारों का कहना है, प्रारंभिक जांच में करीब 50 करोड़ रुपए की कर चोरी उजागर होने की संभावना है। जांच में कच्चे बिल आदि मिले हैं। कम्प्यूटर में दर्ज रेकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। स्टॉक का मिलान किया जा रहा है। इम्पोर्ट लाइसेंस में हेराफेरी कर कस्टम ड्यूटी की चोरी सेन्ट्रल एक्साइज विभाग (Central Excise department) के इंदौर कमिश्नरेट को शराब की बॉटल्स के इम्पोर्ट लाइसेंस में हेराफेरी कर कस्टम ड्यूटी चुराने की सूचना मिली थी। इस पर विभाग ने भोपाल समेत ग्रुप की दो यूनिट को जांच में लगाया। सोम डिस्टलरी की रायसेन जिले के सेहतगंज और गोचरा चक की यूनिट, भोपाल के एमपी नगर स्थित दफ्तर में दबिश दी। सूत्र बताते हैं, जांच में पता चला है कि इम्पोर्ट में बॉटल्स का स्टॉक कम दिखाया गया। एक्सपोर्ट एप्लिकेशन भी कम्पलीट नहीं मिली। इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट में भारी गड़बड़ी मिली है। छापेमारी जारी है। बता दें, पहले भी आयकर विभाग सहित अन्य एजेंसियों ने सोम ग्रुप पर छापा मारकर बड़ी कर चोरी उजागर की थी। बीयर की बोतलें-डिब्बे आयात किए सीमा शुल्क विभाग ने एक बयान जारी कर खुलासा किया कि सोम डिस्टिलरीज (som distillery) एंड ब्रुअरीज लिमिटेड ने अग्रिम प्राधिकरण योजना से जारी करीब 350 अग्रिम प्राधिकरणों के तहत बीयर की खाली कांच की बोतलें और बीयर के डिब्बे आयात किए थे। कंपनी ने इन सामग्रियों को शराब के साथ पैक कर घरेलू बाजार में भेजा। इसलिए जांच शुरू की गई है।

दिल्ली और बॉम्बे हाईकोर्ट को बम की धमकी, ई-मेल के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

नई दिल्ली/मुंबई  दिल्ली और बॉम्बे हाईकोर्ट में शुक्रवार दोपहर के दौरान मिली बम-धमकी की सूचना से हड़कंप मच गया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक  एक धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ जिसमें दिल्ली हाईको कोर्ट परिसर में तीन बम रखे होने और दोपहर 2 बजे तक हाईकोर्ट खाली कराने का आदेश दिया गया था. इस धमकी के तुरंत बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में भी बम की धमकी का मेल आया जिसके बाद तुरंत ही कोर्ट परिसर को खाली कराया गया और जजों तथा वकीलों को बाहर निकाला गया. पुलिस ने फौरन सुरक्षा-प्रोटोकॉल लागू करते हुए सभी जजों को कक्षों से बाहर निकाला और वकीलों, स्टाफ तथा लोगों को कोर्ट परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया. मौके पर बम निरोधक दस्ते (Bomb Squad), स्पेशल सेल और दिल्ली पुलिस की कई यूनिट तैनात कर दी गईं और परिसर की बारी-बारी तलाशी चल रही है. पुलिस ने आसपास के इलाकों को भी सील कर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. दिल्ली हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन के सचिव विक्रम सिंह पंवार ने आजतक से बातचीत करते हुए कहा, 'सुरक्षा तंत्र स्थिति का आंकलन कर रहा है. ईमेल को गंभीरता से लिया जा रहा है. फिलहाल घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है.' मेल की मुख्य बातें दिल्ली हाईकोर्ट को लेकर भेजे गए धमकी वाले मेल में दावा किया गया है कि हाईकोर्ट परिसर में 3 बम रखे गए हैं और सभी को दोपहर 2 बजे तक वहां से हटा लिया जाना चाहिए. मेल में एक असामाजिक/आक्रामक राजनीतिक संदेश भी था जिसमें कुछ नेताओं को निशाना बनाने जैसी कड़वी बातें लिखी गईं; कुछ विशिष्ट नामों का भी जिक्र था. अधिकारियों का कहना है कि मेल की भाषा और संदर्भ इस घटना को “इंसाइड जॉब” जैसा बताने की कोशिश करते हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मेल में तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी डीएमके (DMK) का भी जिक्र है. मेल में कहा गया है, "हम प्रस्ताव करते हैं कि डॉ. एझिलान नागनाथन को डीएमके की कमान संभालनी चाहिए." इसके साथ ही, मेल में यह भी धमकी दी गई है कि उदयनिधि स्टालिन के बेटे इनबानिधि उदयनिधि को तेजाब से जलाया जाएगा. मेल में कहा गया है, 'एजेंसियों को इस बात की भनक तक नहीं लगेगी कि यह कोई अंदरूनी साजिश है.उदाहरण के तौर पर, आपके दिल्ली हाईकोर्ट में आज का धमाका पिछले झांसों के संदेह को दूर कर देगा. दोपहर की इस्लामी नमाज़ के तुरंत बाद जज चैंबर में धमाका होगा.' जांच में जुटी पुलिस पुलिस ने मेल को गंभीर मानते हुए उसकी फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है. मेल किस आईपी एड्रेस/सर्वर से भेजा गया, क्या मेल-हेडर में छेड़छाड़ हुई है, और मेल भेजने वाले की पहचान कैसे की जाए, इन पहलुओं पर काम चल रहा है. साथ ही मेल में जिन नामों का जिक्र था, उन पर भी सुरक्षा बढ़ाई जा रही है और सम्बंधित चैनलों को सूचित कर प्रतिक्रिया मांगी गई है.

कांग्रेस सरकार गिरने के बाद भी दिग्विजय-कमलनाथ में सुलह, मनभेद से इनकार

नई दिल्ली  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ तस्वीर शेयर की। इसके साथ ही लिखा कि कमल नाथ जी और मेरे लगभग 50 वर्षों के पारिवारिक संबंध रहे हैं। हमारे राजनैतिक जीवन में उतार चढ़ाव आते रहे हैं और ये स्वाभाविक भी है। हमारा सारा राजनैतिक जीवन कांग्रेस में रहते हुए विचारधारा की लड़ाई एकजुट हो कर लड़ते हुए बीता है और आगे भी लड़ते रहेंगे। छोटे मोटे मतभेद रहे हैं, लेकिन मनभेद कभी नहीं। उन्होंने आगे लिखा कि कल उनकी मुलाकात हुई। हम दोनों को कांग्रेस पार्टी ने नेतृत्व खूब अवसर दिए और जनता का प्यार सदैव मिलता रहा है। आगे भी हम मिल कर जनता के हित में कांग्रेस के नेतृत्व में सेवा करते रहेंगे।  2020 का विवाद और अब का संदेश मार्च 2020 में जब कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिरी थी, तब पार्टी के भीतर गहरी खींचतान रही। हाल ही में इसको लेकर दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। दिग्विजय और कमलनाथ ने एक-दूसरे को सरकार गिराने के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया था। अब दिग्विजय सिंह की पोस्ट ने संकेत दिया है कि पार्टी आने वाले समय में पुराने विवादों को पीछे छोड़कर एकजुटता की नई तस्वीर पेश करना चाहती है। दोनों नेता एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अरुण दीक्षित का मानना है कि कांग्रेस के नेता अपनी खोई हुई साख वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। सबको पता है कि आपसी टकराव और अहंकार की राजनीति ने ही 2020 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को गिरा दिया था। अब भले ही दोनों नेता एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच यह धारणा बनी हुई है कि उनकी लड़ाई ने ही पार्टी को सत्ता से बाहर किया। दीक्षित का कहना है कि आज दोनों ही नेता राजनीतिक तौर पर हाशिए पर हैं। कांग्रेस को जो नुकसान होना था, वह हो चुका है। सरकार गिरने पर विवाद  कुछ दिन पहले दिए गए एक इंटरव्यू में दिग्विजय सिंह ने कहा था कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच गहराते मतभेद ही 2020 में कांग्रेस सरकार गिरने का कारण बने, इसके जवाब में कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा कि सिंधिया को लगता था दिग्विजय सिंह सरकार चला रहे हैं, इसलिए उन्होंने बगावत की. इस बयानबाजी ने फिर से पुराने घाव हरे कर दिए थे और यह चर्चा जोर पकड़ने लगी थी कि क्या कांग्रेस में भीतर ही भीतर सब कुछ ठीक नहीं है.  सियासी एकजुटता  कमलनाथ और दिग्विजय सिंह दोनों ही मध्य प्रदेश कांग्रेस के आज भी सबसे बड़े और सीनियर चेहरे हैं, उनके बीच सार्वजनिक रूप से एक सकारात्मक संवाद और तस्वीर सामने आना पार्टी कार्यकर्ताओं में एकता का संदेश दे सकता है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह मुलाकात 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद 2028 की तैयारी और पुनर्गठन की शुरुआत हो सकती है. क्योंकि कांग्रेस पार्टी भी यह जानती है कि दोनों की राजनीतिक जड़ें आज भी एमपी में सबसे ज्यादा मजबूत हैं. दिग्विजय और कमलनाथ की मुलाक़ात से यह साफ है कि कांग्रेस अब 2020 की बगावत से उबरकर आंतरिक मतभेदों को सुलझाने और नया जनाधार तैयार करने में जुट गई है.   नई नेतृत्व का एकजुटता से काम करने पर ही होगा फायदा  पत्रकार दीक्षित ने आगे लिखा कि अब केवल तस्वीरें साझा करने या बयान देने से पार्टी को लाभ नहीं मिलने वाला। कांग्रेस का फायदा तभी होगा जब नई नेतृत्व टीम पूरी एकजुटता के साथ काम करेगी और व्यक्तिगत अहंकार को किनारे रखेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, जिन्हें राहुल गांधी ने जिम्मेदारी दी है, उनका सबसे अहम काम टीम बनाना और कार्यकर्ताओं को जोड़ना है। लेकिन, इस दिशा में ठोस प्रयास दिखाई नहीं दे रहे। जब कमांडर कमजोर होता है तो पूरी फौज बिखर जाती है। 

किसानों की समस्याओं एवं मांगों का निवारण करने बारे में सीएम को दिया मांग पत्र

चढ़ूनी  भाकियू चढ़ूनी के राष्ट्रीयाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट की व किसानों की 13 समस्याओं एवं मांगों का निवारण करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि हरियाणा के किसान लगातार प्राकृतिक आपदाओं, महंगी खेती लागत और बाजार की अस्थिरता से जूझ रहे हैं। इन परिस्थितियों में किसानों की आजीविका बचाने के लिए सरकार की नीतियां और सहयोग अत्यंत आवश्यक हैं। प्रतिनिधिमंडल में कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष कर्म सिंह मथाना, मीडिया प्रभारी राकेश बैंस, सोशल मीडिया प्रदेशाध्यक्ष संदीप संग्रोहा, युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कासना, महिला प्रदेशाध्यक्ष सुमन हुड्डा, प्रदेशा उपायध्यक्ष सत्यवान नरवाल, संगठन सचिव हरपाल सिंह सुढल, जिलाध्यक्ष पंचकूला नरेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष अंबाला मलकीत सिंह, जिलाध्यक्ष यमुनानगर संजू गुदियाना, जिलाध्यक्ष कुरुक्षेत्र कृष्ण कलालमाजरा, जिलाध्यक्ष कैथल गुरनाम सिंह फरल, जिलाध्यक्ष करनाल अजय राणा, जिलाध्यक्ष सोनीपत अशोक लठवाल, जिलाध्यक्ष झज्जर ममता कादियान, जिलाध्यक्ष महेंद्रगढ़ रंगलाल तंवर, जिलाध्यक्ष रेवाडी समय सिंह, जिलाध्यक्ष भिवानी राकेश आर्य, जिलायध्यक्ष फतेहबाद रणजीत सिंह, जिलाध्यक्ष जींद अनीता सुदकेन, वरिष्ठ किसान नेता सुरेंद्र सिंह लितानी शामिल थे।

विजय शर्मा का ऐलान: छत्तीसगढ़ में SIR लाने की जरूरत, कहा- विकास की रफ्तार बढ़ेगी

रायपुर बिहार और अन्य राज्यों के बाद छत्तीसगढ़ में भी वोट चोरी के आरोपों को लेकर सियासत गर्म है. उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रदेश में एसआईआर होने जरूरत बताई है. साथ ही राहुल गांधी पर भी हमला बोला है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को दो तरह की विरोधाभासी बातें नहीं करनी चाहिए. वह एकबार कहते हैं वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है, दूसरी ओर एसआईआर पर सवाल उठातें हैं. छत्तीसगढ़ में भी एसआईआर होना चाहिए.   गरियाबंद में नक्सली मुठभेड़ को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि हमारे जवानों ने बड़ी सफलता हासिल की है. गरियाबंद के जंगलों में 10 नक्सलियों को न्यूट्रिलाइज किया गया. इनमें 1 करोड़ का इनामी सक्रिय सीसी मेंबर बालकृष्णन उर्फ मनोज मारा गया. साथ ही 25 लाख का इनामी नक्सली प्रमोद उर्फ पांडा भी ढेर हुआ. जवानों की कार्रवाई से छत्तीसगढ़ में सीसी मेंबर की संख्या कम हो रही.

एजाज खान की मुश्किलें बढ़ीं, गैंगस्टर सलमान लाला की पोस्ट पर FIR दर्ज, बोले- गलती हो गई

इंदौर  एक्टर एजाज खान ने इंदौर के गैंगस्टर सलमान लाला की मौत के बारे में एक विवादास्पद वीडियो शेयर करने को लेकर मध्य प्रदेश पुलिस से माफी मांग ली. यह माफी तब आई जब पुलिस ने कहा कि एक्टर पर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए केस दर्ज किया.  इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए एक नए वीडियो में एजाज खान ने दावा किया कि उन्हें गुमराह करके यह विश्वास दिलाया गया था कि लाला एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है. उन्होंने कहा कि बाद में मुझे मध्य प्रदेश पुलिस और अन्य लोगों से पता चला कि वह एक वांछित अपराधी था जिसकी डूबने से मौत हो गई.  'बिग बॉस 7' में नज़र आ चुके रियलिटी टीवी एक्टर ने कहा कि जैसे ही उन्हें सच्चाई पता चली, उन्होंने तुरंत "गलत वीडियो" हटा दिया. एजाज खान ने कहा, "मैं इस वीडियो के लिए पुलिस से माफी मांगता हूं. मैं संविधान में दृढ़ विश्वास रखता हूं और जांच में पूरा सहयोग करूंगा. एक अपराधी का कोई धर्म नहीं होता. एक अपराधी बस एक अपराधी होता है." एडिशनल डीसीपी  राजेश दंडोतिया ने बताया कि स्थानीय निवासी इरशाद हकीम ने 9 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर खान के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. अधिकारी ने बताया कि खान ने अपने इंस्टाग्राम 'स्टोरी' फीचर के ज़रिए लाला की मौत के बारे में एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें कथित तौर पर समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने वाली आपत्तिजनक बातें थीं. पुलिस ने बताया कि उन्होंने पिछले महीने सीहोर बाईपास रोड पर ड्रग्स के एक मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया था, जबकि सलमान लाला भागने में कामयाब रहा. बाद में उसका शव एक तालाब से बरामद किया गया. सलमान लाला के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि वह एक अनुभवी तैराक था और समुद्र में भी तैर चुका था और पुलिस पर हिरासत में उसकी हत्या करने का आरोप लगाया. एडीसीपी दंडोतिया ने इस आरोप को निराधार बताते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि गैंगस्टर की मौत पानी में डूबने से हुई थी. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सलमान लाला के खिलाफ 32 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.  

अब स्कूलों पर भी लागू होगा ESI एक्ट, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

रायपुर राज्य के निजी, सहायता प्राप्त और आंशिक सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों पर भी कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 (ईएसआई एक्ट) लागू होगा. यह फैसला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रदेश के विभिन्न स्कूलों द्वारा ईएसआई अंशदान से बचने के लिए दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया है. स्कूलों की ओर से दायर याचिका पर जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई, जिसमें आए फैसले के बाद अब प्रदेश के 8 हजार से अधिक स्कूलों को ईएसआई एक्ट का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा. दरअसल, राज्य सरकार ने 27 अक्टूबर 2005 को एक अधिसूचना जारी कर शिक्षा संस्थानों को भी ईएसआई एक्ट के दायरे में लाने का फैसला किया था. इसके तहत जिन स्कूलों में 20 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, उन्हें 1 अप्रैल 2006 से इस अधिनियम के तहत अंशदान देना अनिवार्य किया गया था. कई स्कूलों ने इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की थीं. लेकिन अब कोर्ट के फैसले के बाद इन याचिकाओं को निरस्त कर दिया गया है, और सभी संबंधित संस्थानों को ईएसआई में पंजीकरण और अंशदान देना होगा. छत्तीसगढ़ में सत्र 2024-25 की स्थिति में कुल 56802 स्कूल हैं, जिनमें से 7382 निजी, 413 अनुदान प्राप्त और 180 अन्य स्कूल हैं. इस फैसले से प्रदेश के करीब 7975 निजी और अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान ईएसआई के दायरे में आ जाएंगे, जिससे इन संस्थानों में कार्यरत 96,500 से अधिक शिक्षण कर्मचारी और 50 हजार से ज्यादा गैर-शिक्षण कर्मचारी को बीमारी, मातृत्व और दुर्घटना की स्थिति में कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी. सरकार ने दी बड़ी दलील सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और ईएसआईसी की तरफ से दलील दी गई कि अधिनियम का उद्देश्य श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देना है, न कि केवल औद्योगिक संस्थानों तक सीमित रहना. 20 से अधिक कर्मचारियों वाले किसी भी प्रतिष्ठान पर यह कानून लागू किया जा सकता है. सरकार का तर्क था कि यदि इस अधिनियम को शिक्षा संस्थानों से बाहर रखा गया, तो हजारों कर्मचारी अपने कानूनी अधिकारों और लाभों से वंचित रह जाएंगे.