samacharsecretary.com

गरीबी से करोड़ों के विवाद तक: जानें ग्वालियर के कुक रविंद्र सिंह की संघर्ष भरी कहानी

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक होटल में काम करने वाले कुक हेल्पर रविंद्र सिंह चौहान को आयकर विभाग ने 46 करोड़ रुपए का नोटिस भेज दिया. जबकि रविंद्र सिंह चौहान की सैलरी महज 8 से 10 हजार रुपए है. अचानक इतने बड़े नोटिस ने उनकी जिंदगी उलट-पुलट कर दी है. रविंद्र सिंह चौहान को समझ ही नहीं आया कि ये सब आखिर हुआ कैसे? दरअसल, भिंड के रहने वाले रविंद्र सिंह चौहान का कहना है कि वह सिर्फ खाना बनाने का काम करते हैं. उनके अकाउंट में कभी सालभर में तीन लाख रुपए का लेन-देन भी नहीं हुआ, लेकिन उनके नाम से 46 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन दिखाया गया. रविंद्र सिंह चौहान ने भिंड स्थित पंजाब नेशनल बैंक से अपने खाते का पिछले पांच वर्षों का बैंक स्टेटमेंट निकलवाया. स्टेटमेंट में कुल लेन-देन तीन लाख रुपये से भी कम पाया गया, जो उन्हें काफी अजीब लगा. इस संदेह के चलते उन्होंने बैंक मैनेजर से मामले की गहराई से जांच कराने के लिए कहा. फर्जी खाता और करोड़ों का लेनदेन जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ ये हुआ कि रविंद्र सिंह चौहान के नाम से दिल्ली के उत्तम नगर में एक और खाता मौजूद था और हैरान करने वाली बात ये थी कि उस खाते में अभी भी 12.5 लाख रुपये जमा हैं. जांच में सामने आया कि टोल कंपनी में काम करने के दौरान उनके सुपरवाइजर ने पीएफ के नाम पर उनके कागज लेकर फर्जी अकाउंट खुलवा दिया था. इसी खाते से करोड़ों का लेन-देन हुआ. हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया रविंद्र सिंह चौहान ने थाने और एजेंसियों से शिकायत की, लेकिन कोई मदद नहीं मिली. अब उन्होंने ग्वालियर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस मामले में यह भी सामने आया है कि रविंद्र के नाम पर भिंड और दिल्ली में दो खाते खुले हुए हैं, जिनमें से दिल्ली वाला खाता एक ट्रेडिंग कंपनी से जुड़ा हुआ है. अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट से उसे आयकर विभाग के इस भारी-भरकम नोटिस से राहत मिलती है या नहीं.  

ग्रांट की मांग, माछीवाड़ा में शुरू होंगे विकास के नए प्रोजेक्ट्स

समराला नगर कौंसिल माछीवाड़ा के प्रधान मोहित कुंदरा ने आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा से मिलकर ऐतिहासिक कस्बा माछीवाड़ा के सौंदर्यीकरण के लिए वित्तीय ग्रांट की मांग की। प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहित कुंदरा ने मंत्री अमन अरोड़ा को बताया कि ऐतिहासिक माछीवाड़ा कस्बा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की चरण स्पर्श प्राप्त पावन धरती है। इसलिए इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे के दर्शन के लिए देश और विदेश से बड़ी संख्या में सिख संगतें और अन्य श्रद्धालु आते-जाते रहते हैं।  ऐसे हालात में इस कस्बे के सौंदर्यीकरण की अत्यंत आवश्यकता है, ताकि संगतें यहां आकर प्रसन्नता महसूस कर सकें। उन्होंने कहा कि चरण कंवल चौक से गुरु घर तक जाने वाली सड़क जर्जर हालत में है और उसकी तुरंत मरम्मत की जरूरत है, जिस पर करीब 90 लाख रुपये की लागत का अनुमान है। इस मार्ग के सौंदर्यीकरण के लिए लाइटें लगाने का भी प्रस्ताव है। उन्होंने मंत्री से मांग की कि सरकार मुख्य सड़क और सजावटी गेट बनाने की मंज़ूरी दे। मंत्री अमन अरोड़ा ने नगर कौंसिल प्रधान मोहित कुंदरा को आश्वस्त किया कि विकास कार्यों के लिए सरकार फंडों की कोई कमी नहीं आने देगी।

सबलगढ़ में चीते की दहशत, जंगल से निकलकर सड़क पर चलता नजर आया ‘राजा’

मुरैना  सबलगढ़ क्षेत्र में एक बार फिर चीते की मौजूदगी से लोगों में दहशत फैल गई है। घाटी नीचे के इलाके सालई गांव में सुबह अचानक सड़क पर एक चीता टहलता हुआ नजर आया। इस नजारे को देखकर ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने चीते को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। शावक के होने की आशंका जानकारी के मुताबिक यह वही मादा चीता ‘केपी-1’ का शावक होने की आशंका है, जो कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर लंबे समय से मुरैना जिले के सबलगढ़ क्षेत्र में घूम रहा है। वन विभाग का मानना है कि यह चीता अपने सुरक्षित क्षेत्र से भटक कर घाटी नीचे के इलाके में पहुंच गया है। यह रामपुर कला और सालई गांव के पास देखा गया। ग्रामीणों ने जैसे ही सड़क पर चीते को देखा, आसपास के लोगों को सतर्क कर दिया। कुछ देर के लिए गांव में दहशत का माहौल बन गया। वन विभाग की टीम रख रही है नजर वन विभाग और चीता मित्रों की टीम लगातार इस इलाके पर नजर बनाए हुए है। टीम ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले खेतों में न जाएं, बच्चों को भी खुले में न छोड़ें। चीते के पास जाने या उसे परेशान करने की कोशिश बिल्कुल न करें। साथ ही ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि किसी भी तरह की गतिविधि या चीते के मूवमेंट की सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि उसकी सुरक्षित ट्रैकिंग की जा सके। कई बार पार्क की सीमा से निकल जाते हैं बाहर कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते पिछले कुछ महीनों में कई बार पार्क की सीमाओं से बाहर निकलकर आसपास के गांवों में देखे गए हैं। हालांकि अब तक किसी तरह की जनहानि या नुकसान की खबर नहीं आई है। वन विभाग के मुताबिक चीते आमतौर पर इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा और ग्रामीणों की सावधानी बेहद जरूरी है। लोगों में है उत्सुकता सबलगढ़ क्षेत्र में चीते के आने से जहां दहशत का माहौल है, वहीं लोग इसे नजदीक से देखने के लिए उत्सुक भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वन विभाग की गाइडलाइन का पालन किया जाए तो किसी भी तरह के खतरे से बचा जा सकता है। ग्रामीणों से लगातार शांति और सतर्कता बनाए रखने की अपील की जा रही है।

बस्तर में इन्वेस्टमेंट की नई पहल, CM विष्णुदेव साय करेंगे छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट का उद्घाटन

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 11 सितंबर को बस्तर में आयोजित होने वाले छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट का शुभारंभ करेंगे। यह आयोजन क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति देने के साथ-साथ अवसरों के नए द्वार खोलने वाला साबित होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में बस्तर का विकास सदैव अग्रणी रहा है। इन्वेस्टर कनेक्ट इसी संकल्प को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समावेशी विकास की इस सोच के अंतर्गत उद्योग और निवेश को केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित न रखकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे मूलभूत क्षेत्रों से जोड़ा गया है, ताकि बस्तर का विकास केवल औद्योगिक प्रगति तक सीमित न रहकर सामाजिक उन्नति का आधार भी बन सके। इन्वेस्टर कनेक्ट न केवल बस्तर में नए उद्योगों और व्यापक रोजगार के अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि विकास की प्रत्येक उपलब्धि का लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुँचे और वे इस प्रगति यात्रा के सक्रिय भागीदार बनें।  ये भी लिया गया फैसला इसी के साथ मंत्रिपरिषद की बैठक में पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोत की निर्भरता को कम करने और गैर पारंपरिक स्त्रोत आधारित ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सौर ऊर्जा नीति में आवश्यक संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। नई व्यवस्था के अनुसार संशोधित नीति अब 2030 तक लागू रहेगी या फिर जब तक राज्य सरकार नई सौर ऊर्जा नीति जारी नहीं करती। उद्योगों को लाभ के लिए निर्णय उद्योगों को लाभ देने के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया। सौर ऊर्जा परियोजनाओं को अब राज्य की औद्योगिक नीति के तहत प्राथमिकता उद्योग का दर्जा मिलेगा। इसके तहत निवेशकों को कई तरह की रियायतें और प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इसके तहत ब्याज अनुदान के अलावा पूंजी लागत पर अनुदान (सूक्ष्म उद्योग), जीएसटी प्रतिपूर्ति (लघु, मध्यम और बड़े उद्योग), बिजली शुल्क में छूट, स्टाम्प शुल्क में छूट, परियोजना रिपोर्ट तैयार करने पर अनुदान, भूमि उपयोग बदलने की फीस में छूट, भूमि बैंक से जमीन लेने पर शुल्क में रियायत मिलेगी। इसी के साथ अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक और तृतीय लिंग समुदाय के उद्यमियों को जमीन के प्रीमियम में छूट, दिव्यांगों को रोजगार देने पर अनुदान, मेगा और अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान किया गया है। मीडियाकर्मियों के लिए बड़ा ऐलान मंत्रिपरिषद की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लोक सेवा आयोग की सदस्य एवं कार्यकारी अध्यक्ष रीता शांडिल्य को लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ वरिष्ठ मीडिया कर्मी सम्मान निधि के तहत सेवानिवृत्त हो चुके मीडिया कर्मियों को दी जाने वाली सम्मान राशि 10 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इसकी घोषणा वर्ष 2025-26 के बजट में की गई थी।   

वकालत और गणवेश के अपमान के आरोप में हाईकोर्ट ने जॉली LLB-3 के डायरेक्टर्स को जोड़ा केस में

जबलपुर   अक्षय कुमार व अरशद वारसी अभिनीत फिल्म जॉली एलएलबी-थ्री के गाने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. फिल्म के गाने 'भाई वकील है' को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए फिल्म के निर्माता व निर्देशक को मामले में पार्टी बनाए जाने के आदेश जारी किए हैं. क्या है फिल्म जॉली LLB-3 का मामला? दरअसल, जबलपुर के अधिवक्ता प्रांजल तिवारी की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि फिल्म के ट्रेलर और गाने 'मेरा भाई वकील' में न्यायपालिका व वकालत के पेशे को अपमानजनक तरीके से चित्रित किया गया है. इससे समूचे विधि जगत व न्याय तंत्र की गरिमा को ठेस पहुंची है. गाने के बोल के माध्यम से वकालत जैसे नोबल प्रोफेशन को बदनाम करने का कुत्सित प्रयास किया गया है. गाने के बोल '' रगो में तिगड़मबाजी है, हर ताले की चाबी है, हर केस की पैकेज डील है, फिक्र ना कर तेरा भाई वकील है और इसके आगे को बोलों को अनुचित और अपमानजनक बताया गया है. 'वकालत के पेशे और गणवेश का अपमान' याचिका में कहा गया है कि 'भाई वकील है' गाने में अभिनेता अक्षय कुमार व अरशद वारसी द्वारा वकालत का बैंड पहनकर नाचना भी मानहानिकारक है. याचिका में इसे लेकर तर्क दिया गया है कि हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में प्रकरण की पैरवी के दौरान वकील बैंड लगाते हैं और गाउन पहनते हैं. इससे साफ है कि वकालत के गणवेश की अपनी महत्ता है, जिसे इस तरह मनोरंजन के नाम पर अपमानित नहीं किया जाना चाहिए. फिल्म के डायरेक्टर्स के साथ सरकार को भी बनाया पार्टी याचिका में राज्य शासन, प्रमुख सचिव गृह विभाग, सचिव सूचना व प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली और चेयरमैन सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टिफिकेशन को पक्षकार बनाया गया है. युगलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद ये आदेश जारी किए हैं. युगलपीठ ने कहा है कि फिल्म के निर्माता व निर्देशक को भी आवश्यक पक्षकार बनाए बिना मामले का निपटारा नहीं हो सकता है. याचिकाकर्ता की तरफ अधिवक्ता प्रमोद ठाकरे ने पैरवी की. युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 12 सितम्बर को निर्धारित की है.  

झारखंड हादसा: चलती कार पुल धंसने से पानी में समाई, 1 लापता, 4 सुरक्षित

 देवघर झारखंड में मानसून सक्रिय है। इसके चलते बीते मंगलवार को भारी बारिश देखने को मिली। भारी बारिश के बाद देवघर-चितरा मुख्य मार्ग पर आधी रात को दक्षिण बहाल पुल के पास बना अस्थायी रास्ता धंस गया, जिससे एक वैगन आर कार पानी के तेज बहाव में बह गई। जानकारी के मुताबिक इस कार में 5 लोग सवार थे। आनन-फानन में ग्रामीणों ने 4 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन एक व्यक्ति अभी भी लापता बताया जा रहा है। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस जांच में जुट गई है। वहीं, NDRF की टीम व्यक्ति को ढूंढने में जुट गई है। उधर, घटना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि देवघर–चितरा मुख्य मार्ग पर स्थित दक्षिण बहाल पुल पहले से ही क्षतिग्रस्त था। पुल की खराब स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने करीब 1 सप्ताह पहले अस्थायी रास्ता बना लिया था। मजबूरी में उसी अस्थायी रास्ते से वाहन चल रहे थे।  

योगी राज में बेटी और व्यापारी हुए सुरक्षित, तो दिखने लगा प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर

विकसित यूपी @2047 :  आत्मनिर्भर हो रही नारी, बम्पर हुआ व्यापार'  यूपी ले रहा नया अवतार : लक्ष्मी हुईं सुरक्षित तो बढ़ने लगा अर्थ-व्यापार  – योगी राज में बेटी और व्यापारी हुए सुरक्षित, तो दिखने लगा प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर – 2017 से पहले महिला श्रम भागीदारी दर सिर्फ 13.5%, आज बढ़कर 34.5% – औद्योगिक ऋण 3.54 लाख करोड़ से बढ़कर 9.24 लाख करोड़ पहुंचा  – 2047 तक महिला भागीदारी दर पुरुषों के बराबर लाने का योगी सरकार का लक्ष्य – विनिर्माण निर्यात और एफडीआई में देश में नंबर-1 बनेगा यूपी – 2047 तक यूपी की जीडीपी 6 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य, देश की अर्थव्यवस्था में देगा 20% का योगदान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बीते साढ़े आठ साल में किये गये लगातार प्रयासों के फलीभूत प्रदेश में आज बेटी और व्यापारी दोनों सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि लक्ष्मी स्वरूप महिलाएं स्वयं को तेजी से सशक्त बना रही हैं, साथ ही प्रदेश में उद्योग-व्यापार का माहौल स्थापित होने लगा है। इसी सोच के साथ अब सीएम योगी ने "विकसित यूपी @2047" का विजन सामने रखा है, जिसमें आत्मनिर्भर नारी और बम्पर व्यापार को राज्य की प्रगति का मूल आधार माना गया है। 2017 से पहले की स्थिति साल 2017 से पहले प्रदेश कई चुनौतियों से घिरा हुआ था। गुंडाराज, माफिया तंत्र और अपराध ने प्रदेश में सबसे ज्यादा परेशान महिलाओं और उद्यमियों तथा व्यापारियों को कर रखा था। बेटियां स्कूल-कॉलेज जाने से भी डरती थीं, तो वहीं व्यापारी या तो गुंडा टैक्स और रंगदारी देने के मजबूर थे या प्रदेश से पलायन करने को बाध्य। बेरोजगारी दर 6.2 प्रतिशत थी और लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (एलएफपीआर) मात्र 44.6 प्रतिशत रह गया था। सबसे बड़ी चिंता महिला श्रम भागीदारी दर की थी, जो सिर्फ 13.5 प्रतिशत पर अटकी हुई थी। निवेशक प्रदेश में आने से हिचकिचा रहे थे और कई फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर पहुंच चुकी थीं। औद्योगिक गतिविधियां ठप पड़ने लगी थीं और रोजगार का संकट गहराता जा रहा था। 2017 से 2025 : बदलाव की नई इबारत योगी सरकार ने बीते साढ़े आठ साल में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। अपराधी या तो जेल की सलाखों के पीछे नजर आने लगे या परलोक सिधार गये, बचे खुचे अपनी जान की परवाह करते हुए प्रदेश छोड़कर भाग खड़े हुए। इसके बाद महिला सुरक्षा के साथ ही महिलाओं के सशक्तिकरण के द्वार तो खुले ही निवेश के क्षेत्र में भी व्यापक तौर पर बुनियादी बदलाव दिखने शुरू हो गये। प्रदेश का एलएफपीआर 44.6 प्रतिशत से बढ़कर 56.9 प्रतिशत हो गया। महिला श्रम भागीदारी दर में भी ऐतिहासिक उछाल आया और यह 13.5 से बढ़कर सीधे 34.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। बेरोजगारी दर घटकर 3 प्रतिशत पर आ गई और अकेले एमएसएमई सेक्टर से 1.65 करोड़ रोजगार सृजित हुए। औद्योगिक ऋण 3.54 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 9.24 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा। इसी दौरान 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर समझौते हुए, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं जमीन पर उतर भी चुकी हैं। उद्योग और व्यापार को मिली नई पहचान योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को नया जीवन मिला है। पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या 14,169 से बढ़कर 27,295 तक हो गई हैं। 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना के अंतर्गत 77 उत्पादों को जीआई टैग मिला है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर पहुंच गया है। एमएसएमई इकाइयों की संख्या 96 लाख हो गई, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। यह न सिर्फ रोजगार सृजन का बड़ा जरिया बना, बल्कि वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश की पहचान भी मजबूत हुई है। 2047 का विजन : आत्मनिर्भर नारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि 'विकसित यूपी @2047' का सबसे अहम स्तंभ महिला सशक्तिकरण है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक प्रदेश में महिला श्रम भागीदारी दर 50 प्रतिशत हो और 2047 तक यह पुरुषों के बराबर पहुंचे। इसके लिए महिलाओं को 'स्टेम' (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथेमेटिक्स) शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। किशोरी कल्याण, पोषण व स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त किया जाएगा। महिला श्रमिकों के लिए 2030 और 2047 तक उनकी जरूरत के हिसाब से हर शहर में हॉस्टल की व्यवस्था की जाएगी। 2047 का विजन : बम्पर व्यापार और निवेश सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक विनिर्माण निर्यात में उत्तर प्रदेश देश में नंबर एक बने और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के मामले में भी शीर्ष पर पहुंचे। प्रदेश की पांच औद्योगिक कंपनियों को फॉर्च्यून ग्लोबल 500 की सूची में शामिल कराने का रोडमैप तैयार है। इसके लिए एयरोस्पेस, डिफेंस प्रोडक्शन, अपैरल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेमीकंडक्टर को रणनीतिक स्तंभ बनाया गया है। ग्रीन और टेक्नोलॉजी आधारित विकास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में भविष्य का उद्योग केवल रोजगार नहीं देगा, बल्कि सतत विकास का मॉडल भी बनेगा। इसी दिशा में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर, नीतिगत ढांचा, टेक्नोलॉजी एडॉप्शन और एमएसएमई को ग्लोबल वैल्यू चेन में शामिल करने पर खास जोर दिया जा रहा है। 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य 'विकसित यूपी @2047' के तहत राज्य ने 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए 2025 से 2047 तक औसतन 16 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखनी होगी। वर्तमान में प्रदेश की जीडीपी 353 बिलियन डॉलर है, जो 2030 तक 1000 बिलियन, 2036 तक 2000 बिलियन और 2047 तक 6000 बिलियन डॉलर तक पहुंचाई जाएगी। उस समय प्रति व्यक्ति आय 26 लाख रुपये तक होगी और यूपी देश की कुल जीडीपी में 20 प्रतिशत योगदान देगा।  

आश्विन कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार को महंत अवेद्यनाथ जी की स्मृति में होगी श्रद्धांजलि सभा

सामाजिक समरसता और राम मंदिर के लिए युगों तक याद रहेंगे राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ आश्विन कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार को महंत अवेद्यनाथ जी की स्मृति में होगी श्रद्धांजलि सभा गोरखनाथ मंदिर में जारी श्रद्धांजलि सप्ताह का होगा समापन, सीएम योगी सहित कई संतजन रहेंगे मौजूद गोरखपुर  गोरक्षपीठ में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर जारी साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह गुरुवार (11 सितंबर) को संपन्न हो जाएगा। आश्विन कृष्ण चतुर्थी, गुरुवार को वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के विराट व्यक्तित्व का स्मरण कर उन्हें शब्दों और भावों की श्रद्धांजलि दी जाएगी। सामाजिक समरसता को ही आजीवन ध्येय मानने वाले श्रीराम मंदिर आंदोलन के नायक ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ का स्मरण सदैव एक ऐसे संत के रूप में होता है जिनमें समूचे राष्ट्र के सनातनियों की आस्था है।  नाथपंथ की लोक कल्याण की परंपरा को धर्म के साथ राजनीति से भी संबद्ध कर महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने पांच बार मानीराम विधानसभा और चार बार गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी किया।  श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए हुए आंदोलन को निर्णायक पड़ाव देने के लिए इस राष्ट्रसंत को निश्चित ही युगों-युगों तक याद किया जाएगा। 18 मई 1919 को गढ़वाल (उत्तराखंड) के ग्राम कांडी में जन्में महंत अवेद्यनाथ का बचपन से ही धर्म, अध्यात्म के प्रति गहरा झुकाव था। उनके इस जुड़ाव को विस्तृत आयाम नाथपंथ के विश्वविख्यात गोरक्षपीठ में महंत दिग्विजयनाथ के सानिध्य में मिला। गोरक्षपीठ में उनकी विधिवत दीक्षा 8 फरवरी 1942 को हुई और वर्ष 1969 में महंत दिग्विजयनाथ की आश्विन तृतीया को चिर समाधि के बाद 29 सितंबर को वह गोरखनाथ मंदिर के महंत व पीठाधीश्वर बने। योग व दर्शन के मर्मज्ञ पीठाधीश्वर के रूप में उन्होंने अपने गुरुदेव के लोक कल्याणकारी व सामाजिक समरसता के आदर्शों का फलक और विस्तारित किया। यह सिलसिला 2014 में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को उनके चिर समाधिस्थ होने तक अनवरत जारी रहा। अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों का योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है। महंत दिग्विजयनाथ ने अपने जीवनकाल में मंदिर आंदोलन में क्रांतिकारी नवसंचार किया तो उनके बाद इसकी कमान संभाली महंत अवेद्यनाथ ने। नब्बे के दशक में उनके ही नेतृत्व में श्रीराम मंदिर आंदोलन को समग्र, व्यापक और निर्णायक मोड़ मिला। आंदोलन की ज्वाला गांव-गांव तक प्रज्वलित हुई। महंत अवेद्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष के रूप में आंदोलन में संतो, राजनीतिज्ञों और आमजन को एकसूत्र में पिरोया। यह भी सुखद संयोग है कि पांच सदी के इंतजार के बाद अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण उनके शिष्य योगी आदित्यनाथ की देखरेख में हुआ है। महंत अवेद्यनाथ वास्तविक अर्थों में धर्माचार्य थे। धर्म के मूल मर्म सामाजिक समरसता को उन्होंने अपने जीवनपथ का उद्देश्य बनाया। आजीवन उन्होंने हिन्दू समाज से छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करने के लिए वृहद अभियान चलाया। अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बरहपंथ योगी महासभा के अध्यक्ष के रूप में महंतजी ने देशभर के संतों को भी अपने इसी अभियान से जोड़ा। अपने स्पष्ट विचारों के चलते पूरे देश के संत समाज में अति सम्माननीय रहे महंत अवेद्यनाथ दक्षिण भारत के मीनाक्षीपुरम में दलित समाज के सामूहिक धर्मांतरण की घटना से बहुत दुखी हुए। इस तरह की पुनरावृत्ति उत्तर भारत में न हो, इसी कारण से धर्म के साथ उन्होंने राजनीति की भी राह चुनी। उनका ध्येय हिन्दू समाज की कुरीतियों को दूर कर पूरे समाज को एकजुट करना था। इसे लेकर उन्होंने दलित बस्तियों में सहभोज अभियान शुरू किया जहां जातिगत विभेद से परे सभी लोग एक पंगत में भोजन करते। काशी में डोमराजा के घर संत समाज के साथ भोजन कर महंतजी ने सामाजिक समरसता का देशव्यापी संदेश दिया। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने दलित कामेश्वर चौपाल के हाथों राम मंदिर के भूमिपूजन की पहली ईंट रखवाई। महंत अवेद्यनाथ सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए प्रभु श्रीराम और देवी दुर्गा के उद्धरणों से संदेश देते थे। ऐसे संदेश उनकी दिनचर्या में शामिल थे। महंतलोगों को व्यावहारिक रूप में समझाते थे कि प्रभु श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर खाए, निषादराज को गले लगाया, गिद्धराज जटायु का अंतिम संस्कार अपने हाथों किया, वनवास के दौरान वनवासियों से मित्रता की तो इसके पीछे उनकी सोच समरस समाज की स्थापना ही थी। वह बताते थे कि देवी दुर्गा की आठ भुजाएं समाज के चारों वर्णों से दो-दो भुजाओं की प्रतीक हैं। समाज के ये चारों वर्ण एकजुट हो जाएंगे तो वह भी देवी दुर्गा की भांति इतने सशक्त होंगे कि किसी भी शक्तिशाली पर नियंत्रण पा लेंगे। ठीक वैसे ही जैसे अष्टभुजी देवी दुर्गा सबसे तेज तर्रार और शक्तिशाली जीव शेर पर सवारी करती हैं।  महंत अवेद्यनाथ के नाम राजनीति के क्षेत्र में भी अनूठा रिकार्ड है। उन्होंने पांच बार (1962, 1967, 1969, 1974 व 1977) मानीराम विधानसभा सीट और चार बार (1970, 1989,1991 व 1996) गोरखपुर सदर संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व किया था। वह अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के उपाध्यक्ष व महासचिव के रूप में भी प्रतिष्ठित रहे।

झुग्गी-झोपड़ी पर बुलडोजर कार्रवाई: रांची में भाकपा माले ने जताया विरोध

रांची झारखंड में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी- लेनिनवादी) की रांची नगर कमेटी के सुहैल अंसारी ने कहा कि रांची के हटिया में एचईसी की जमीन से अतिक्रमण हटाने के नाम पर 30-40 वर्षों से रह रहे लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाकर 100 से अधिक घरों को तोड़ जाने की घटना को गलत बताया और कड़ा रोष व्यक्त किया है। भाकपा माले ने कहा कि रांची राज्य की राजधानी है और रोजगार की संभावनाओं से भरा शहर है इसलिए विभिन्न जिलों से लोग सुनहरे भविष्य की तलाश में यहां आते हैं। इनमें असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, घरेलू काम करने वाली महिलाएं, निर्माण मजदूरों और सफाई कर्मियों के लिए ये झुग्गियां जीवन का आधार हैं, उनके बिना वैकल्पिक रहने की व्यवस्था किए बुलडोजर चलाना अनुचित है। भाकपा माले ने सरकार से मांग की है कि जिन लोगों के घर उजड़े हैं, उनके लिए तुरंत रहने की व्यवस्था की जाए। साथ ही, जहां ये झुग्गियां थीं, वहां की सड़क, बिजली, पानी और राशन जैसी बुनियादी सुविधाएं पुन: बहाल कराई जाएं। भाकपा माले ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के नफरती एजेंडे को बाबूलाल मरांडी बढ़ावा दे रहे हैं। भाजपा के विधानसभा क्षेत्र में भी इसी तरह की कार्रवाई हुई, जिसमें सैकड़ों लोग बेघर हुए, लेकिन भाजपा ने ध्यान नहीं दिया। भाजपा केवल बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाकर जनता को भ्रमित कर रही है। भाकपा माले रांची नगर कमेटी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया तो उनका आंदोलन और तेज होगा।  

कलेक्टर का सख्त आदेश: छिंदवाड़ा में ई-अटेंडेंस में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, शिक्षक होंगे जिम्मेदार

छिंदवाड़ा  ई-अटेंडेंस (e-attendance) नहीं लगाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई तय है, ई अटेंडेंस नहीं भरने वाले वि‌द्यालय इंचार्ज की सूची मांगते हुए छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा है कि उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की उपस्थिति एवं समय पालन शिक्षा की गुणवत्ता का मूल आधार है, इसलिए इस व्यवस्था में ढिलाई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्ट्रेट में हुई बैठक कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने  कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी जीएस बघेल, सहायक संचालक शिक्षा जनजातीय कार्य विभाग उमेश सातनकर, डीपीसी जगदीश इड़पाचे, जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, एपीसी, बीआरसीसी उपस्थित रहे।  जेईई एवं नीट परीक्षा की तैयारी जेईई एवं नीट (JEE-NEET Exam) की तैयारी तेज समीक्षा बैठक के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी जीएस बघेल ने सरकारी स्कूलों में संचालित जेईई एवं नीट कक्षाओं की वार्षिक कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी विकासखंडों में शिक्षक-विद्यार्थियों के वॉट्सएप ग्रुप बनाकर ऑनलाइन टेस्ट लिए जाएंगे। उनका रिकॉर्ड संधारित किया जाएगा। विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार नया पाठ्यक्रम कक्षा 11 वीं और 12 वीं के साथ जोड़ा गया है। पालकों के घरों में होगी पेरेंट-टीचर मीटिंग कलेक्टर ने नवाचार करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षकों को निर्देश दिए कि अब पेरेंट-टीचर मीटिंग (Parent-teacher meeting) सीधे पालकों के घरों में आयोजित होगी। प्रत्येक 15 दिन में कम से कम एक पालक के घर में बैठक की व्यवस्था की जाएगी, ताकि अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। कलेक्टर ने शिक्षकों से आत्ममंथन करते हुए वेतन अनुरूप कार्य करने की उमीद की है। उन्होंने कहा कि हर शिक्षक को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि उन्हें जो वेतन और सुविधाएं मिलती हैं, क्या वे उसके अनुरुप अपने कर्तव्यों का इमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं। नियमित संचालित हों रेमेडियल कक्षाएं कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने रेमेडियल कक्षाएं लगातार संचालित करने के निर्देश देते हुए कमजोर वि‌द्यार्थियों की कमियों को दूर करने के निर्देश दिए ताकि वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं करने वाले अतिथि शिक्षकों पर कार्यवाही करने के दिए निर्देश भी दिए हैं, उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथि शिक्षक यदि अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं कर रहे हैं तो उन्हें तत्काल हटाया जाए। उन्होंने अतिथि शिक्षकों को नियमित और समय पर कक्षाएं नहीं लेने पर सेवाएं समाप्त करने की हिदादयत दी।