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केंद्र सरकार को घेरा ममता ने, बोली- अमेरिका और चीन के सामने रही कमजोर

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा को बेच दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘‘कभी अमेरिका के सामने तो कभी चीन के सामने भीख मांग रही है''। अन्य राज्यों में बंगाली प्रवासियों पर हमलों से संबंधित सरकारी संकल्प पर राज्य विधानसभा में चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ‘‘तानाशाही मानसिकता'' है। भाजपा ‘‘पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना'' चाहती है। बनर्जी ने जैसे ही इस संकल्प पर बोलना शुरू किया तो हंगामा होने लगा। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा बेच दी है। केंद्र सरकार कभी चीन के सामने गिड़गिड़ा रही है, तो कभी अमेरिका के सामने। वे देश नहीं चला सकते, राष्ट्र के हितों की रक्षा नहीं कर सकते, फिर भी हमें उपदेश देने की हिम्मत रखते हैं।'' मुख्यमंत्री ने भाजपा पर भाजपा शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी श्रमिकों पर कथित हमलों पर चर्चा को रोकने का भी आरोप लगाया। बनर्जी ने दावा किया, ‘‘भाजपा बंगाली प्रवासियों पर हमलों को लेकर चर्चा के खिलाफ क्यों है? ऐसा इसलिए है… क्योंकि ये घटनाएं पार्टी शासित राज्यों में हो रही हैं। वे सच्चाई को दबाना चाहते हैं।'' 'भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है…' सदन में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी पार्टी की नारेबाजी के बीच अपनी बात कहने की कोशिश करते हुए बनर्जी ने पूछा, ‘‘भाजपा मुझे इस सदन में बोलने क्यों नहीं दे रही है?'' उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंदी या किसी अन्य भाषा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है। उनका रवैया औपनिवेशिक और तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। वे पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं।'' भाजपा तानाशाहों की पार्टी है- ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा के ‘‘वैचारिक पूर्वजों'' ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के साथ विश्वासघात किया था। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा तानाशाहों की पार्टी है। उनके पूर्वजों ने भारत की आजादी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, उन्होंने देश के साथ विश्वासघात किया।'' नोकझोंक बढ़ने पर, सत्ता पक्ष के कुछ विधायक विपक्षी दलों की ओर दौड़ पड़े, जिससे मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। हंगामे की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री को अपना भाषण कुछ देर के लिए रोकना पड़ा।  

सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की जल संसाधन विभाग के कामकाज की समीक्षा रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में स्थित लुत्ती बांध के टूटने की घटना पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की गलती किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। श्री साय ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि मैदानी अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में जाकर नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सतत रूप से फील्ड में जाकर बांधों सहित अन्य संरचनाओं का निरंतर निरीक्षण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग की गहन समीक्षा बैठक ली। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने, सभी बांधों की जलभराव क्षमता, वर्तमान सिंचाई स्थिति और आगामी परियोजनाओं की प्रगति आदि के सम्बन्ध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा–निर्देश दिए। साथ ही विशेष रूप से बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 का कड़ाई से पालन करने तथा जिला प्रशासन के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने लक्षित सिंचाई क्षमता और वास्तविक सिंचाई क्षमता के बीच अंतर को कम करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग की अधूरी योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्माणाधीन वृहद परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर बल दिया, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में 04 वृहद परियोजनाएँ, 357 लघु परियोजनाएँ और 300 एनीकेट, इस प्रकार कुल 661 कार्य प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 1036 जीर्णोद्धार कार्य भी चल रहे हैं। इस तरह कुल 1697 कार्य प्रगतिरत हैं, जिनमें लगभग ₹8966 करोड़ की राशि व्यय होगी। इस बैठक में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री रवि मित्तल, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता श्री इंद्रजीत उईके तथा बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग मंडलों के मुख्य अभियंता सहित जल संसाधन विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।

करमा तिहार के रंग में डूबा मुख्यमंत्री निवास

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ आदिवासी कंवर समाज युवा प्रभाग रायपुर द्वारा आयोजित प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत – 2025 करमा तिहार कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इस संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। ऐसे पर्व और परंपराएँ समाज को एकजुट होने का अवसर देती हैं, जिससे स्नेह, सद्भाव एवं सौहार्द की भावना विकसित होती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि कंवर समाज के युवाओं द्वारा राजधानी रायपुर में करमा तिहार का आयोजन किया जा रहा है। हमारी आदिवासी संस्कृति में अनेक प्रकार के करमा तिहार मनाए जाते हैं। आज एकादशी का करमा तिहार है, जो हमारी कुंवारी बेटियों का पर्व है। इस करमा तिहार का उद्देश्य है कि हमारी बेटियों को उत्तम वर और उत्तम गृहस्थ जीवन मिले। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर बेटियाँ अच्छे वर और अच्छे घर की कामना करती हैं। इसके बाद दशहरा करमा का पर्व आता है, जिसमें विवाह के पश्चात पहली बार जब बेटी मायके आती है, तो वह उपवास रखकर विजयादशमी का पर्व मनाती है। इसी प्रकार जियुत पुत्रिका करमा मनाया जाता है, जिसमें माताएँ पुत्र-पुत्रियों के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। यह एक कठिन व्रत होता है, जिसमें माताएँ चौबीस घंटे तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास करती हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यदि छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां अंग्रेजों के विरुद्ध 12 आदिवासी क्रांतियाँ हुईं। हमारी सरकार नया रायपुर स्थित ट्राइबल म्यूजियम में आदिवासी संस्कृति के महानायकों की छवि को आमजन की जागरूकता के लिए प्रदर्शित करने मॉडल के रूप में उकेरा जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित किया जा रहा है। उनके करकमलों से इस म्यूजियम का शुभारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार आदिवासी समाज के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देती रही है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आजादी के लगभग 40 वर्षों बाद आदिवासी विभाग का पृथक मंत्रालय बनाकर आदिवासी समाज के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हीं के बताए मार्ग पर वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी आदिवासी समाज के बेहतरी एवं समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं विशेष पिछड़ी जनजाति समाज के लिए पीएम जनमन योजना का संचालन कर रहे हैं, जिससे हितग्राहियों को शत-प्रतिशत योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह ने बस्तर, सरगुजा एवं मध्य क्षेत्र प्राधिकरण का गठन कर विकास को गति प्रदान करने का कार्य किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि युवा आदिवासियों को स्वरोजगार से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से हमने नई उद्योग नीति बनाई है, जिसमें बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आदिवासी बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। इसके लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना राज्य में ही की जा रही है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी आदिवासी संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली परंपरा रही है। इसी परंपरा के निर्वहन में आज हम करमा तिहार मना रहे हैं। हमारी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। साय जी के नेतृत्व में ही बस्तर संभाग में बस्तर पांडुम के नाम से ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिसकी चर्चा पूरे भारत में हुई। श्री कश्यप ने इस अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। संरक्षक, अखिल भारतीय कंवर समाज विकास समिति पमशाला, जशपुर, श्रीमती कौशिल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज और प्रकृति एक-दूसरे के अभिन्न अंग हैं। आदिवासी समाज के लिए प्रकृति सदैव आराध्य रही है। करमा पर्व प्रकृति प्रेम का पर्व है। हमारी संस्कृति अत्यंत गौरवशाली रही है और उसका संरक्षण तथा समय के साथ संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि समाज की महिलाएँ आगे आकर इस संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सभी को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।  

भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक अमित क्षत्रिय को नासा में नई जिम्मेदारी, अंतरिक्ष मिशन की अगुवाई

वाशिंगटन  अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारतीय-अमेरिकी अमित क्षत्रिय को  ‘अन्वेषण-केंद्रित' नया सह-प्रशासक नियुक्त किया है। नासा में 20 साल सेवा दे चुके क्षत्रिय हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अन्वेषण प्रणाली विकास मिशन निदेशालय (ईएसडीएमडी) में चंद्रमा और मंगल से जुड़े अभियान कार्यक्रमों के उप-प्रभारी थे। नासा के एक बयान में कहा कि कार्यवाहक नासा प्रशासक सीन पी डफी ने बुधवार को अमित क्षत्रिय को नासा का अन्वेषण केंद्रित नया सह-प्रशासक नियुक्त किया। विस्कॉन्सिन में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर जन्मे एवं कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) तथा ऑस्टिन स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त क्षत्रिय इतिहास में मिशन नियंत्रण उड़ान निदेशक के रूप में सेवा करने वाले लगभग 100 लोगों में से एक हैं। नासा की वेबसाइट पर उनके प्रोफाइल के अनुसार, वह 2003 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी से जुड़े थे। क्षत्रिय को अंतरिक्ष स्टेशन के 50वें अभियान के वास्ते प्रमुख उड़ान निदेशक के रूप में उनके कार्यों के लिए नासा उत्कृष्ट नेतृत्व पदक से सम्मानित किया गया था।   नासा ने कहा कि अपनी नयी भूमिका में वह एजेंसी में सर्वोच्च रैंक वाले सिविल सेवक के रूप में तथा डफी के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में काम करेंगे। कैलटेक के पूर्व छात्र के ब्लॉग के अनुसार, क्षत्रिय के पिता इंजीनियर थे और उनकी मां केमिस्ट थीं – दोनों ही भारतीय प्रवासी थे – जिन्होंने गणित और विज्ञान में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। क्षत्रिय और उनकी पत्नी के तीन बच्चे हैं।     

प्याज महंगा नहीं होगा! जानें किन शहरों में मिल रही सब्सिडी और वजह

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने महंगाई को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। अब दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में ₹24 प्रति किलोग्राम की दर से सब्सिडी वाला प्याज बेचा जाएगा, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस पहल की शुरुआत की है।   24 रुपए प्रति किलो बिकेगा प्याज केंद्र सरकार ने दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में ₹24 प्रति किलोग्राम की discounted rate पर प्याज की बिक्री शुरू कर दी है। इसके लिए मोबाइल वैन का इस्तेमाल किया जा रहा है। शुरुआती चरण में नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार जैसी सरकारी एजेंसियों के ज़रिए लगभग 25 टन प्याज बेचा जाएगा। सरकार का कहना है कि जिन शहरों में प्याज का रिटेल रेट ₹30 प्रति किलो से ज्यादा है, वहां यह सब्सिडी वाला प्याज बेचा जाएगा। यह योजना शुक्रवार से चेन्नई, गुवाहाटी और कोलकाता में भी शुरू होगी और दिसंबर तक जारी रहेगी। सरकार का बफर स्टॉक सरकार के पास अभी 3 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है, जिसे Price Stabilisation Fund (PSF) योजना के तहत औसतन ₹15 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया था। यह स्टॉक मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश से खरीदे गए रबी (सर्दियों) प्याज का है। इस प्याज को ₹24 प्रति किलो की दर पर बेचने से सरकार को लागत वसूलने में भी मदद मिलेगी।   महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि सरकार की पहली प्राथमिकता खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना है। हाल के महीनों में सरकार के हस्तक्षेप से महंगाई को कम करने में मदद मिली है। जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति 1.55% पर आ गई थी, जो पिछले 8 सालों में सबसे कम थी। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि फसल वर्ष 2024-25 में प्याज का घरेलू उत्पादन 27% बढ़कर 30.77 मिलियन टन होने का अनुमान है। उन्होंने यह भी साफ किया कि प्याज के निर्यात पर कोई रोक नहीं है।  

चोटिल पैट कमिंस: वनडे सीरीज से बाहर, एशेज में खेलने की उम्मीदें कम

ऑस्ट्रेलिया  ऑस्ट्रेलिया के टेस्ट और वनडे कप्तान पैट कमिंस 2025 के सभी सीमित ओवर के क्रिकेट मैचों से बाहर हो गए है। कमिंस को कैरेबियाई दौरे के दौरान चोट लगी थी जिसके बाद स्कैन में उनकी लम्बर बोन में खिंचाव का पता चला। कमिंस अब न्यूजीलैंड और भारत के खिलाफ आगामी सीमित ओवर की श्रृंखला से चूक जाएंगे। जिसमें भारत के खिलाफ 19 अक्टूबर से शुरू होने वाले तीन वनडे मैच भी शामिल है।    कमिंस ने चोट के बारे में अपनी भावनाएं सांझा करते हुए कहा, 'अपने करियर के इस पड़ाव पर मुझे लगता है कि मैं 18 या 19 साल की उम्र के मुकाबले अब शायद थोड़ी तेजी से लय पकड़ सकता हूं। उस समय आपको शायद लगता होगा कि आपको कुछ [शेफील्ड] शील्ड मैच या वनडे मैच खेलने की जरूरत है। मुझे पूरा विश्वास है कि अगर मुझे शील्ड मैच खेलने का मौका नहीं भी मिला तो भी मैं लय पकड़ सकता हूं। रिहैब सही से करू तो बड़ी एशेज सीरीज के लिए मैं कुछ जोखिम उठाने और थोड़ा आक्रामक होने के लिए तैयार हूं। इससे बड़ी कोई और सीरीज नहीं।' कैरेबियाई और ऑस्ट्रेलिया में टी20 और वनडे सहित कई सफेद गेंद के मैचों से चूकने के बावजूद कमिंस रिहैबिलिटेशन पर ध्यान केंद्रित करेंगे और उनका लक्ष्य पांच टेस्ट मैचों की एशेज सीरीज के लिए फिट होना होगा। हालांकि सीरीज से पहले कमिंस को जरूरी आराम की कमी खलेगी और हो सकता है कि वह सीधे अंतरराष्ट्रीय मैदान पर लौटने से पहले केवल एक या दो शेफील्ड शील्ड मैच ही खेल पाएं।  ऑस्ट्रेलियाई चयनकर्ताओं ने पहले ही कुछ बदलाव कर लिए है। ऑलराउंडर कैमरन ग्रीन को न्यूजीलैंड टी20 सीरीज के लिए आराम दिया है ताकि वह शेफील्ड शील्ड में लंबे स्पैल डाल सकें। इसके अलावा ब्यू वेबस्टर को एक अतिरिक्त सीम गेंदबाजी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है जो तेज गेंदबाजी में योगदान दे सकते है। जिससे कमिंस की अनुपस्थिति में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी में और गहराई आ सकती है।   

किम जोंग का जूठा गिलास गायब, बॉडीगार्ड्स ने फिंगरप्रिंट भी मिटाए, वीडियो चौंकाने वाला

बीजिंग उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बीजिंग में हाल ही में हुई मुलाकात चर्चा का विषय तो बनी ही, लेकिन उसके बाद सामने आए एक वीडियो ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। इस वीडियो में किम जोंग की टीम बैठक के बाद जिस तरीके से कुर्सी, टेबल, और यहां तक कि गिलास तक को साफ करती नजर आई, उसने सुरक्षा और जासूसी को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हुआ बीजिंग में? किम जोंग उन और पुतिन की मुलाकात बीजिंग की एक हाई-प्रोफाइल विक्ट्री डे परेड के बाद हुई थी। यह किम का कोविड-19 महामारी के बाद पहला चीन दौरा था। पुतिन से बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने दोस्ती की गर्मजोशी दिखाई और उत्तर कोरिया की ओर से रूस को यूक्रेन युद्ध में दिए गए समर्थन पर चर्चा भी हुई। लेकिन जब यह बैठक खत्म हुई, तभी किम के स्टाफ ने बेहद सावधानी से वह गिलास उठाया जिससे उन्होंने पीया था, कुर्सी के हैंडल और बैकरेस्ट को चमकाया गया, टेबल तक को ऐसे साफ किया गया जैसे वहां कोई फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन हो रही हो।   जैसे क्राइम सीन हो! वीडियो में एक स्टाफ मेंबर किम की कुर्सी को कपड़े से पोछता नजर आता है, जबकि दूसरा उनका गिलास संभाल कर ट्रे में रख देता है। यह सब इतनी बारीकी से किया गया कि जैसे कोई सबूत मिटा रहा हो। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे एक 'फॉरेंसिक क्लीनअप' कहा जा रहा है, यानी किम के डीएनए या बॉयोलॉजिकल ट्रेस (जैसे बाल, त्वचा, थूक आदि) कहीं पीछे न छूट जाएं।   DNA से डर क्यों? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति के डीएनए या बॉडी फ्लूइड्स से उसकी हेल्थ, जेनेटिक स्थिति और यहां तक कि गंभीर बीमारियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। जब बात किसी राष्ट्राध्यक्ष की हो, तो यह डेटा दुश्मन देशों के लिए "सोने की खान" हो सकता है। इसलिए उनके बॉयोलॉजिकल ट्रेसेज़ को मिटा देना या वापस ले जाना एक सुरक्षा रणनीति बन चुकी है।   पुतिन भी पीछे नहीं किम जोंग उन ही नहीं, बल्कि व्लादिमीर पुतिन भी अपनी सेहत से जुड़ी जानकारी छुपाने को लेकर उतने ही सख्त हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब भी पुतिन विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो उनके साथ एक 'पूप सूटकेस' (Poo Suitcase) जाता है – जिसमें उनके मल-मूत्र को एकत्र कर सील कर मॉस्को भेजा जाता है। फ्रांसीसी मैगजीन 'Paris Match' के मुताबिक, 2017 से ही यह प्रोटोकॉल जारी है। इसका मकसद यही है कि कोई विदेशी खुफिया एजेंसी उनके मल या यूरिन से हेल्थ रिपोर्ट न निकाल ले। इससे यह भी साफ होता है कि सिर्फ गुप्त दस्तावेज़ ही नहीं, अब बॉडी फ्लूइड्स भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा हैं। सिर्फ सुरक्षा या कुछ और? कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि किम और पुतिन का यह व्यवहार केवल सेहत की जानकारी छिपाने तक सीमित नहीं है। यह एक कूटनीतिक संकेत भी हो सकता है – यह दिखाने के लिए कि वे किसी पर भरोसा नहीं करते, चाहे वह चीन हो या रूस। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भरोसे की जगह सतर्कता ने ले ली है, खासकर तब जब वैश्विक राजनीति में टेंशन बढ़ रही है। किम की बेटी भी आईं साथ इस मीटिंग में एक और खास बात थी – किम जोंग उन की बेटी किम जू ऐ पहली बार किसी विदेशी दौरे पर उनके साथ दिखीं। इससे उत्तर कोरिया की अगली पीढ़ी के लीडरशिप को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।  बढ़ती दोस्ती या रणनीतिक चाल? किम और पुतिन की बातचीत में गर्मजोशी जरूर नजर आई – दोनों ने एक-दूसरे के लिए सम्मान जताया और किम ने तो यह तक कहा कि "अगर मैं रूस के लिए कुछ कर सकता हूं, तो यह मेरा फर्ज होगा।" लेकिन जब एक नेता की टीम उसके छूए हर सामान को मिटा दे, तो यह साफ है कि दोस्ती के दिखावे के पीछे रणनीति और शंका दोनों छिपी होती है।  

स्‍मार्टफोन-लैपटॉप खरीदने से पहले जानें: अभी लें या 22 सितंबर तक रुकें?

नई दिल्ली सरकार ने जीएसटी दरों में कटौती की है। इसके बाद तमाम चीजों के दाम घटने वाले हैं। कंस्‍यूमर इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स कैटिगरी में एसी और टीवी खरीदने वालों को फायदा होगा, क्‍योंकि दोनों ही प्रोडक्‍ट्स पर जीएसटी को कम किया गया है, लेकिन बहुत से लोग स्‍मार्टफोन्‍स को लेकर भी उम्‍मीद लगाए बैठे थे। स्‍मार्टफोन्‍स के अलावा टैबलेट और लैपटॉप पर लगने वाले जीएसटी में भी कमी की उम्‍मीद की जा रही थी। हालांकि ऐसा नहीं हाे पाया है। सरकार के फैसले से स्‍मार्टफोन्‍स पर कोई असर नहीं हुआ है। इन पर लगने वाला जीएसटी 18 फीसदी ही रहेगा। टैबलेट और लैपटॉप की कीमतें भी पहले की तरह रहेंगी। अगर आपने नए आईफोन, सैमसंग फोन, टैब या लैपटॉप खरीदने की प्‍लानिंग की है, तो आइए जानते हैं कि क्‍या करना चाहिए। स्‍मार्टफोन्‍स खरीदने का सही टाइम सरकार ने स्‍मार्टफोन पर जीएसटी नहीं कम किया है। यह पहले की तरह ही 18 फीसदी बना रहेगा। अगर आप सैमसंग, ऐपल और दूसरे चीनी ब्रैंड्स के स्‍मार्टफोन खरीदने की तैयारी में हैं तो रुकने की जरूरत नहीं है। आप खरीद सकते हैं। इनकी कीमतों में कोई अंतर नहीं आने वाला है। टैबलेट खरीदने पर क्‍या मिलेगा फायदा ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बहुत से लोग टैबलेट खरीदते हैं। इन पर लगने वाला जीएसटी शुल्‍क भी पहले की ही तरह रहेगा। ऐसे में अगर आप टैब खरीदने की योजना बना रहे हैं तो रुकने की जरूरत नहीं है। आप सैमसंग, ऐपल समेत किसी भी ब्रैंड का टैब लेंगे तो उसमें जीएसटी की वजह से कीमत कम होने वाली नहीं है। लैपटॉप खरीदने पर कितने का फायदा? लैपटॉप खरीदने की प्‍लानिंग कर रहे लोगों को जीएसटी की वजह से कोई फायदा फ‍िलहाल नहीं मिलने वाला है। उन्‍हें पहले की तरह ही 18 फीसदी जीएसटी देना होगा। अगर आप आसुस, लेनोवो, डेल या एचपी का कोई भी मॉडल लेने वाले थे, चाहे वह गेमिंग लैपटॉप ही क्‍यों ना हो, आपको पहले जितनी ही रकम चुकानी होगी। छूट पाने का सिर्फ एक तरीका स्‍मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट पर छूट पाने का फ‍िलहाल सिर्फ एक ही तरीका है, आपको ऑनलाइन सेल का वेट करना चाहिए। इसी महीने से फ्लिपकार्ट और एमेजॉन पर फेस्टिव सेल शुरू हो रही है। सेल में तमाम बैंक कार्डों पर डिस्‍काउंट दिया जाता है। कंपनियां प्राइस में भी ड्रॉप करती हैं। इनके अलावा, ईएमआई की सुविधा भी दी जाती है। ऑनलाइन सेल की मदद से आप स्‍मार्टफोन, लैपटॉप और टैलबेट पर डिस्‍काउंट पा सकते हैं। स्‍मार्टफोन, टैब, लैपटॉप क्‍यों नहीं हुए सस्‍ते इसकी कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। पहले इन चीजों पर 18 फीसदी जीएसटी लगता था। इस स्‍लैब के बाद अब सबसे कम स्‍लैब 5 फीसदी का है। अगर स्‍मार्टफोन, टैब और लैपटॉप पर सिर्फ 5 फीसदी जीएसटी देना पड़ता, तो कीमतों में काफी कमी आ सकती थी, लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।

योगी सरकार का तोहफा: यूपी के शिक्षकों को मिली राहत और नए आदेश का ऐलान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालयों और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब 30 जून या 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी की गणना में एक नोशनल वेतनवृद्धि (काल्पनिक वेतनवृद्धि) जोड़ी जाएगी। वेतनवृद्धि का लाभ पेंशन की गणना में मिलेगा वित्त विभाग द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, जिन कर्मचारियों की वार्षिक वेतनवृद्धि 1 जुलाई या 1 जनवरी को तय होती थी, लेकिन वे उससे ठीक एक दिन पहले यानी 30 जून या 31 दिसंबर को रिटायर हो जाते थे, उन्हें भी इस वेतनवृद्धि का लाभ पेंशन की गणना में मिलेगा। यह प्रावधान 1 जनवरी 2006 से लागू वेतन समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया है। किन्हें तत्काल प्रभाव से लाभ मिलेगा? इसका मतलब यह हुआ कि 1 जनवरी 2006 के बाद से लेकर शासनादेश जारी होने तक 30 जून को रिटायर हुए कर्मचारी भी इस सुविधा के दायरे में आएंगे। हालांकि, उन्हें केवल तत्काल प्रभाव से लाभ मिलेगा, पिछली अवधि का एरियर नहीं दिया जाएगा। यही नियम 1 जनवरी 2016 के बाद रिटायर हुए उन कर्मचारियों पर भी लागू होगा जिनकी रिटायरमेंट तिथि 30 जून या 31 दिसंबर रही और जिनकी वेतनवृद्धि क्रमशः 1 जुलाई या 1 जनवरी को तय थी। कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना शासनादेश के प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। इस फैसले से उच्च शिक्षा में कार्यरत हजारों शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़े डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित ने इसे शिक्षकों के लिए बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को कई बार पत्र लिखकर यह मांग उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में यह सुविधा पहले से लागू थी, अब उच्च शिक्षा में लागू होने से लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो गई है।  

अलवर में बड़ा ऑपरेशन, धर्मांतरण के आरोप पर 52 बच्चे छुड़ाए गए

अलवर  राजस्थान के अलवर जिले में धर्मांतरण का बड़ा मामला उजागर हुआ है. पुलिस ने बुधवार शाम उद्योग नगर थाना क्षेत्र के गोलेटा गांव स्थित सैय्यद कॉलोनी में एक हॉस्टल पर छापा मारा. यहां से 52 बच्चों को बरामद किया गया, जिन्हें शिक्षा और पैसों के लालच में धर्म परिवर्तन के लिए गुमराह किया जा रहा था. पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर यह कार्रवाई की गई. मौके से दो लोगों अमृत और सोनू रायसिख को गिरफ्तार किया गया. इनमें से अमृत पर पहले भी सीकर जिले में धर्मांतरण का केस दर्ज हो चुका है. पुलिस के अनुसार एक एनजीओ की आड़ में यह पूरा खेल चलाया जा रहा था. पुलिसवाले दीवार पर चढ़े बच्चों को काफी देर तक समझाते रहे कि वो यहां उनके लिए आए हैं, डरो मत, नीचे आ जाओ। यहां रह रहे बच्चों ने बताया कि उन्हें सिखाया जाता था कि- भगवान को मानोगे तो नर्क में जाओगे। मूर्ति और क्रॉस को पानी में डुबोकर अंतर बताया जाता था। एक संगठन की शिकायत पर बुधवार शाम को एमआईए थाना क्षेत्र की सैय्यद कॉलोनी में एक ईसाई मिशनरी हॉस्टल में कार्रवाई की गई थी। शिक्षा के नाम पर धर्म-परिवर्तन का आरोप आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को हॉस्टल में रखा जाता है। यहां शिक्षा के नाम पर उन्हें पैसे का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। बुधवार शाम को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की शिकायत पर पुलिस ने छापेमारी की। मौके पर पुलिस पहुंची तो हॉस्टल के अंदर भगदड़ मच गई। मौके पर मौजूद 50 से ज्यादा बच्चे बिल्डिंग की 10 फीट से ज्यादा ऊंची दीवार फांदने लगे। डरो मत..आपके लिए आए हैं हॉस्टल की बाउंड्री और दीवार पर चढ़े बच्चे को नीचे उतारने के लिए पुलिसवालों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। उन्हें नीचे उतारने के लिए पुलिसकर्मी काफी देर तक समझाइश करते रहे। पुलिसकर्मियों ने कहा- डरो मत, हम तुम्हारे लिए आए हैं। इस दौरान कुछ बच्चे रोने लगे और डर के कारण चीखने भी लगे। बच्चों का आरोप- डराया जाता था हॉस्टल में रहने वाले बच्चों ने बताया कि उन्हें धर्म और भगवान को नहीं मानने के लिए उकसाया जाता था। उन्हें मौत का भी डर दिखाया जाता था। अब पढ़िए- 2 मासूमों ने हॉस्टल पर क्या आरोप लगाए… आग में जलने के नाम से डराया: हॉस्टल में फादर कहते हैं कि अगर तुम भगवान को मानोगे तो नर्क में जाओगे। आग में जला दिए जाओगे। तुम्हें केवल बाइबल को ही पढ़ना है। हिंदुओं के नकली भगवान हैं। ईसा मसीह की प्रार्थना से हमें स्वर्ग मिलता है और हिंदू देवी-देवताओं के नाम लेने से नर्क मिलता है। असली भगवान तो ईसा मसीह है: फादर कहते हैं ईसा मसीह की प्रार्थना से हमें स्वर्ग मिलता है और हिंदू देवी-देवताओं के नाम लेने से नर्क मिलता है। फादर बाल्टी में पानी भरकर देवी-देवताओं की मूर्तियों को पानी में डालते हैं। पानी में मूर्ति डूब जाती है तो कहते हैं कि तुम्हारा भगवान स्वयं डूब गया है, वो तुम्हें कैसे बचाएगा। अहमदाबाद का रहने वाला है आरोपी फादर पुलिस के अनुसार मौके से अहमदाबाद के रहने वाले अमृत और रामगढ़ (अलवर) के रहने वाले सोनू रायसिख को पकड़ा है। मौके से एक धर्म से जुड़े धार्मिक ग्रंथ और किताबें जब्त की हैं। जानकारी के अनुसार अगस्त महीने में सीकर में ईसाई धर्म गुरु सेल्वाराज उर्फ सेल्बुराज ने कुछ लोगों का धर्म परिवर्तन कराया था। जिसमें अमृत का भी नाम है। जो फिलहाल जमानत पर है। एसपी बोले- सस्ती शिक्षा के नाम पर बुलाते हैं SP सुधीर चौधरी ने बताया कि जिले में कुछ लोगों के अवैध गतिविधियों में लिप्त होने की सूचना मिली। जो गरीबों को सस्ती शिक्षा के नाम पर बुलाते हैं। धर्म को लेकर गलत शिक्षा देकर धर्म परिवर्तन की बात सामने आई है। इस मामले में दो जनों को अरेस्ट किया है, जिनमें अमृत गुजरात का रहने वाला है। जिसके खिलाफ पहले से सीकर में मुकदमा दर्ज है। अब इसकी जमानत कैंसिल कराने का प्रयास करेंगे। जिले में दूसरी जगहों से भी धर्म परिवर्तन कराने की बातें सामने आई हैं। ये गरीब तबके के बच्चों को छात्रावास में रखते थे। बच्चों को साधारण भाषा में ईसाई धर्म की अच्छाई बताकर हिंदू और सिख धर्म की कमी बताते हैं। हो सकता है कि ये बच्चों के माता-पिता को सहायता भी देते हों। ऐसे मामलों में राजस्थान में पहले भी मुकदमे दर्ज हुए हैं। उनकी भी जानकारी मांगी है। भविष्य में ऐसा नहीं हो इसके लिए आमजन को भी सहयोग करने की जरूरत है। हॉस्टल पर छापा मार 52 बच्चे बरामद  छापेमारी के दौरान बच्चे डर के मारे हॉस्टल की दीवार कूदकर भागने लगे. वहीं हिंदू संगठनों ने भी मौके पर पहुंचकर विरोध किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. पुलिस ने हॉस्टल से ईसाई धर्म से जुड़े धार्मिक ग्रंथ और बड़ी मात्रा में लिखने की सामग्री जब्त की है. बच्चों ने पुलिस को बताया कि हॉस्टल में हिंदू देवी-देवताओं को लेकर गलत बातें कही जाती थीं और ईसा मसीह को ही सच्चा भगवान बताया जाता था. बच्चों की उम्र 6 से 17 साल के बीच है. वे अलवर, हनुमानगढ़ और दिल्ली के अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं. शिक्षा और पैसों का लालच देकर धर्म परिवर्तन पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क का संबंध तमिलनाडु, गुजरात और कई अन्य राज्यों से है. पुलिस ने धर्मांतरण करने वालों को चेतावनी दी है और आम लोगों से भी जानकारी देने की अपील की है.