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उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ! 100 यूनिट के बाद नहीं मिलेगी राहत

बिलासपुर छत्तीसगढ़ के रहवासियों को बीते 6 साल 5 माह से बिजली उपभोक्ताओं को चार सौ यूनिट तक की खपत पर सीधे पचास प्रतिशत की छूट मिल रही थी. इसलिए उनका बिल आधा आता था. अब सरकार ने एक अगस्त से छूट को समाप्त कर दिया है, जिसका असर सितबंर में हाथ में आने वाले बिजली बिल में दिखेगा. उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 558 से 1223 रुपए अधिक बिजली बिल का भुगतान करना होगा. राज्य सरकार द्वारा 1 मार्च 2019 से घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 400 यूनिट तक बिजली की खपत करने पर सीधे 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही थी. इस छूट का लाभ कम यूनिट से अधिक यूनिट तक खपत करने वाले सभी उपभोक्ताओं को मिलता था. इसमें चार सौ यूनिट से अधिक खपत करने वालों को भी चार सौ यूनिट तक आधी छूट मिलती थी. वहीं चार सौ यूनिट से अधिक की खपत की बिलिंग पूरे दर से की जाती थी. इस छूट के बाद उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल में 558 रुपए से 1223 रुपए तक की छूट मिलती थी. जिससे उनको काफी राहत मिल रही थी. यह छूट अगले माह से समाप्त हो रही है. प्रदेश सरकार ने एक अगस्त से बिजली बिल हॉफ योजना को बंद करने का निर्णय लिया है. घरेलू उपभोक्ताओं को उसका लाभ नहीं मिलेगा. इसलिए अगस्त पेड सितंबर के बिजली बिल में लोगों को पहले मिलने वाले बिजली बिल का दोगुना बिल मिलेगा. जो उनका मासिक बजट बिगाड़ने वाला होगा. जिसका सीधा असर गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. उनको प्रतिमाह खपत के हिसाब से 558 से 1223 रुपए अधिक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ेगा. वहीं राज्य सरकार द्वारा 100 यूनिट से कम खपत करने वाले उपभोक्ताओं को ही पचास प्रतिशत छूट का लाभ देने की घोषणा की गई है. उपभोक्ताओं को लगेगा तिहरा प्रहार सितंबर माह में उपभोक्ताओं को बिजली बिल के मामले में तिहरा प्रहार पड़ेगा. अगस्त में उसम भरी गर्मी से राहत पाने के लिए लोगों ने धड़ल्ले से कूलर और एसी का उपयोग किया. जिससे खपत बढ़ गई. वहीं राज्य सरकार ने एक जुलाई से बिजली दर में वृद्धि कर दी है. इसलिए उपभोक्ताओं को 14 पैसे प्रति यूनिट अधिक बिल का भुगतान करना पड़ रहा है. एक अगस्त से बिजली बिल हॉफ योजना को बंद कर दिया गया है. जिसका सीधा असर हजारों घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. 100 यूनिट में सब्सिडी, खपत करने वाले कम सिटी सर्किल के दोनों डिवीजन में घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या 91,648 है. सभी को पहले पचास प्रतिशत छूट का लाभ मिल रहा था. जो एक अगस्त से समाप्त हो गया है. शासन ने सिर्फ 100 यूनिट और उससे कम खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को ही बिजली बिल हॉफ योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया है. शहरी क्षेत्र में आजकल सौ यूनिट से कम खपत करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या काफी कम है. इसलिए योजना का लाभ गिनती के लोगों को मिल सकेगा.

तीन दिनों का ट्रैफिक जाम, हिमाचल में सप्लाई संकट पैदा

कुल्लू  हिमाचल प्रदेश में बारिश का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा। भारी बारिश के चलते बानला में हुए भूस्खलन ने चंडीगढ़-मनाली हाईवे को पूरी तरह ठप कर दिया है। यहां कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। हिमाचल में कई सड़कें टूट गई हैं और नदियां उफान पर हैं। ऐसे में यात्रियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। भूस्खलन ने रोकी रफ्तार कुल्लू जिले के बानला में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिसने चंडीगढ़-मनाली हाईवे को अवरुद्ध कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि सड़क की मरम्मत का काम जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन प्रकृति के इस प्रकोप के आगे अभी राहत की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। ब्यास नदी के उफान ने हाईवे का एक हिस्सा बहा दिया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। मौसम विभाग की चेतावनी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने हिमाचल के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। चंबा, कांगड़ा और मंडी में आज और कल भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। अगले दो-तीन दिन तक हिमाचल में बारिश का सिलसिला ऐसे ही जारी रहेगा। यात्रियों की मुश्किलें पिछले तीन दिनों से मंडी जिले के पंडोह से ऑट तक हाईवे बंद है। सैकड़ों ट्रक और कारें सड़क पर फंसी हैं और ड्राइवरों का सब्र जवाब दे रहा है। सब्जियां और सामान खराब हो रहे हैं, जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। अमृतसर से कुल्लू-मनाली जा रहे ड्राइवर गुरविंदर सिंह ने बताया, "चार दिन हो गए, हम यहीं फंसे हैं। सड़क की हालत खराब है और टोल टैक्स के 260 रुपये भी वसूल रहे हैं। प्रशासन से कोई जवाब नहीं मिल रहा।" वहीं, ड्राइवर बबलू ठाकुर ने कहा, "घर पहुंचना मुश्किल हो गया है। सड़कें टूटी हैं, नदियां उफान पर हैं। प्रशासन ने खाने-पीने या ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं की। कुछ ढाबे वाले और लंगर वालों की मदद से जैसे-तैसे गुजारा हो रहा है।" प्रशासन का एक्शन कुल्लू की उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने बताया कि जिले के कई हिस्सों को खाली कराया जा रहा है। लगातार बारिश से नेशनल हाईवे कई जगह क्षतिग्रस्त है। ब्यास नदी का जलस्तर बहुत ऊंचा है। लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील है। उन्होंने बताया कि बिंदु ढांक में हाईवे को भारी नुकसान पहुंचा है और बहंग में कुछ दुकानें और रेस्तरां पानी की चपेट में हैं।

पार्टी लाइन से हटकर बोलना पड़ा भारी, विधायक चौधरी पर कार्रवाई के संकेत

जयपुर डीग जिले की कामां विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक नौक्षम चौधरी पर उनके विवादित बयान को लेकर पार्टी ने सख्ती दिखाई है। विधायक द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में "कांग्रेस प्रधान को हटाकर बीजेपी समर्थित प्रधान बनाने" की बात कहे जाने के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। नोक्षम का बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया। कांग्रेस विधानसभा में इस बयान को भुनाएगी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इसे लेकर बयान जारी किया। डोटासरा ने कहा-  'जो बात कांग्रेस पार्टी कह रही है उसकी साक्ष्य खुद सत्ताधारी दल की विधायक दे रही हैं। कामां से भाजपा विधायक नौक्षम चौधरी जी ने स्वीकार किया है कि भरतपुर में कांग्रेस से जुड़े प्रधानों को मनगढ़ंत आरोप लगाकर पद से हटाया है और नियमों को ताक पर रखकर बहुमत के खिलाफ उनकी जगह भाजपा से जुड़े प्रधानों को बैठा दिया गया। इसका साफ मतलब है कि भाजपा ने राजनीतिक दुर्भावना से कार्रवाई करते हुए जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को सत्ता के दुरुपयोग से हटाया गया। भाजपा ने संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की खुलेआम हत्या की है।'  कांग्रेस इसे विधानसभा में भी मुद्दा बनाने की तैयारी कर चुकी है। बीजेपी अध्यक्ष बोले यह हमारी परंपरा नहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस मुद्दे पर कहा, "भाजपा की परंपरा चुने हुए जनप्रतिनिधियों को हटाने की नहीं रही है, यह कांग्रेस की कार्यशैली रही है। विधायक से इस बयान पर जवाब तलब किया गया है। उन्हें बुलाया गया है, वे आकर अपना पक्ष रखेंगी।" क्या कहा था विधायक ने? कामां विधायक नौक्षम चौधरी ने कामां और पहाड़ी पंचायत समितियों में बीजेपी प्रधान बनने के बाद प्रेस वार्ता की थी। इसमें उन्होंने बिना नाम लिए पार्टी के एक मंत्री पर भी सवाल उठाए और कहा, "नगर पंचायत में कांग्रेस का प्रधान क्यों है? बीजेपी समर्थित कार्यकर्ता को प्रधान बनाइए, ताकि हम भी कह सकें कि कांग्रेस का प्रधान हटाकर बीजेपी का बनाया गया है।" पार्टी कर सकती है अनुशासनात्मक कार्रवाई बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इस बयान को गंभीरता से लिया है और संकेत दिए हैं कि यदि विधायक का जवाब असंतोषजनक रहा तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।  

ट्रंप के दबाव के बावजूद PM मोदी ने ठोकी मुट्ठी, आत्मनिर्भर भारत की ताकत दिखाई

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत के भारी टैरिफ के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि बताते हुए चट्टान की तरह दृढ़ रुख अपनाया है. 27 अगस्त से प्रभावी इन टैरिफ में 25 प्रतिशत पहले से लागू था, जबकि अतिरिक्त 25 प्रतिशत रूस से तेल आयात के लिए दंड के रूप में लगाया गया है. भारत ने इसे ‘अनुचित, अनुचित और अनुचित’ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है. विशेषज्ञों के अनुसार 2024-25 में भारत का अमेरिका को निर्यात 86.5 अरब डॉलर था जो जीडीपी का मात्र दो प्रतिशत है लेकिन टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, चमड़ा और सीफूड जैसे श्रम आधारित क्षेत्रों पर इसका गहरा असर पड़ेगा. बावजूद इसके पीएम मोदी की सरकार इसे अवसर में बदलने की रणनीति पर काम कर रही है, जहां स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को दीर्घकालिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है. मोदी ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था- कठिनाइयों के समय राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दें. दुनिया में आर्थिक स्वार्थ बढ़ रहा है. हर कोई अपने एजेंडे में व्यस्त है. उन्होंने किसानों और कृषि क्षेत्र की रक्षा के लिए कोई भी कीमत चुकाने की भी बात कही. देश के जीडीपी में किसानों और कृषि क्षेत्र का योगदान 18 प्रतिशत है. विदेश मंत्रालय का रुख विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत की ऊर्जा खरीद बाजार की उपलब्धता और वैश्विक स्थिति से निर्देशित है जो 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करती है. 2024-25 में भारत का रूस से तेल आयात 8.8 करोड़ मीट्रिक टन रहा, जो कुल आयात का 36 प्रतिशत है. टैरिफ से भारत का अमेरिकी निर्यात 40-55 प्रतिशत गिर सकता है, जिससे जीडीपी वृद्धि छह प्रतिशत से नीचे आ सकती है. लेकिन सरकार का मानना है कि मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स और 7-8 प्रतिशत की विकास दर के साथ भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर बढ़ता रहेगा. क्या पीएम मोदी है नाराज? इस बीच, एक जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर ऑलगेमाइन जितुंग (FAZ) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप ने हाल के हफ्तों में मोदी को चार बार फोन किया, लेकिन प्रधानमंत्री ने कॉल नहीं उठाया. रिपोर्ट के अनुसार यह मोदी की नाराजगी और सावधानी को दर्शाता है. ट्रंप ने भारत को मृत अर्थव्यवस्था कहा था, जो मोदी को अपमानजनक लगा. FAZ ने कहा कि ट्रंप की सामान्य रणनीति- शिकायत, धमकी और दबाव रही है. लेकिन पीएम मोदी के सामने यह इस बार विफल हो रही है. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की दिल्ली यात्रा भी रद्द हो गई है. रिपोर्ट में विशेषज्ञ मार्क फ्रेजियर ने कहा कि अमेरिका का इंडो-पैसिफिक गठबंधन ढह रहा है. इस गठबंधन में भारत अहम भूमिका निभाता था. भारत अब चीन के साथ संबंध सुधार रहा है. पीएम मोदी चीन के तियानजिन में होने जा रहे SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होने जा रहे हैं. उनकी यह चीन यात्रा सात साल बाद हो रही है. वहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेताओं से मिलेंगे. यह ट्रिपल एक्सिस अमेरिका को चेकमेट करने की क्षमता रखता है. संघ का मिला साथ इधर, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भी मोदी के स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के विचार का समर्थन किया है. बुधवार को RSS के शताब्दी समारोह के दौरान भागवत ने कहा- आत्मनिर्भरता सभी समस्याओं का समाधान है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से होना चाहिए. उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पाद खरीदने और दबाव में झुकने से बचने का आह्वान किया. भागवत का यह बयान डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के ठीक बाद आया, जो मोदी और RSS के एकमत होने का संकेत देता है. RSS ने हमेशा से स्वदेशी को बढ़ावा दिया है और अब यह रणनीति अमेरिकी दबाव के खिलाफ हथियार बन रही है.भारत अमेरिका के साथ संवाद के द्वार खुले रखे हुए है, लेकिन रिश्तों को डायवर्सिफाई करने पर जोर दे रहा है. यूके के साथ सफल ट्रेड डील के बाद पीएम मोदी की टीम यूरोपीय संघ के साथ समझौते पर काम कर रही है. भारत ने इलेक्ट्रिक वेहिकल निर्यात 100 देशों में शुरू किया है, जो उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता दर्शाता है. सरकार निर्यातकों के लिए ब्याज सब्सिडी और ऋण गारंटी जैसे राहत पैकेज पर विचार कर रही है. अमेरिकी नीति के लिए सेल्फ गोल विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी नीति के लिए सेल्फ गोल है, क्योंकि भारत, चीन के खिलाफ महत्वपूर्ण साझेदार है. लेकिन ट्रंप प्रशासन रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत को निशाना बना रहा है. डोनाल्ड ट्रंप की दोहरी नीति पर भारत ने पर्दाफाश किया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, यूरोपीय संघ रूस से एलएनजी खरीदता है, फिर भी उन्हें सजा नहीं मिली. जयशंकर ने खुलासा किया कि अमेरिका ने खुद भारत को रूसी तेल खरीदने को कहा था ताकि वैश्विक तेज बाजार को स्थिर रखा जा सके. यह विवाद अमेरिका-भारत संबंधों को नुकसान पहुंचा रहा है. द्विपक्षीय व्यापार 131.8 अरब डॉलर था, लेकिन 50 प्रतिशत टैरिफ से लाखों नौकरियां खतरे में हैं. भारत ने रूसी तेल आयात बंद करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि इससे ईंधन कीमतें 9-12 अरब प्रति डॉलर तक बढ़ सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.  

सिंगर सुचित्रा ने लगाया मंगेतर पर गंभीर आरोप: घर छीना और किया मारपीट

मुंबई  सिंगर सुचित्रा ने अपने मंगेतर  शुनमुगराज, जो चेन्नई हाई कोर्ट के वकील हैं पर कई सीरियस आरोप लगाए हैं. सुचित्रा ने शुनमुगराज पर घरेलू हिंसा, फाइनेंशियल फ्रॉड और उनका चेन्नई वाला घर हड़पने के आरोप लगाए हैं. घर से निकाला गया, आना पड़ा मुंबई हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है. इसमें उन्होंने बताया कि उन्हें इमोशनली और फिजिकली अब्यूज किया गया है और वो अब लीगल एक्शन लेने वाली हैं. सुचित्रा ने दावा किया कि उन्हें चेन्नई स्थित उनके घर से निकाल दिया गया था. इसके बाद कुछ महीने पहले उन्हें नौकरी मिल गई और वे मुंबई आ गईं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'चाहे कर्म कुछ भी हो, मैं एक औरत होने के नाते हार नहीं मानूंगी. शुनमुगराज ने मेरी मेहनत की कमाई चुरा ली. जो मैंने उन गानों के जरिए बड़ी मुश्किल से कमाई थी जो आप लोगों ने पसंद किए थे. गाना मुश्किल नहीं है. लेकिन प्रोफेशनलिज्म को बनाए रखना, फ्लर्ट्स को इग्नोर करना, काउच से दूरना और सुरक्षित रहना.' आगे सुचित्रा ने लिखा, 'एक हिंसक आदमी तभी डरावना लगता है जब वो फिजिकली आपके करीब हो. अब में शुनमुगराज के शारीरिक दुर्व्यहार से दूर हूं. मैं उसे गिराने के लिए हर डिजिटल टूल को यूज करूंगी. आप इसके बारे में तब तक नहीं सुनते जबतक मैं बताना नहीं चाहूंगी. लेकिन मुझे एहसास हुआ कि मुझे खुद से और अपने गानों से शुनमुगराज से कहीं ज्यादा प्यार है. मैं उसका तब तक पीछा करूंगी जब तक वो मेरा एक-एक पैसा वापस नहीं कर देता है.' जूतों से सिंगर को पीटा सिंगर ने कहा, 'सुचि लीक्स एपिसोड के बाद मुझे लगा इससे बुरा क्या होगा. लेकिन ये हुआ.  मुझे प्यार हो गया. मुझे कई बार मारा गया. उसने मुझे WWF रेसलर की तरह जूतों से लात मारी. मैं एक कोने में बैठकर रोती रहती थी और उसके सामने गिड़गिड़ाती थी.' बता दें कि 2016 में सामने आए सुचि लीक्स विवाद में एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट से प्राइवेट और अश्लील कंटेंट  लीक होने का मामला शामिल था. इससे कई तमिल हस्तियां प्रभावित हुईं.

टीकमगढ़ बंगले में मौत की कहानी, विधायक पुत्र के घर नौकरानी मिली घायल हालत में

टीकमगढ़  टीकमगढ़ जिले की खरगापुर कांग्रेस विधायक के बेटे छतरपुर स्थित बंगले में एक 20 साल की युवती की मौत हो गई. शव बंगले के पीछे वाले हिस्से में आम के पेड़ से लटका मिला. मृतक युवती के चेहरे पर चोट के निशान थे. सिविल लाइन थाना पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है. यह घटना सोमवार सुबह करीब 8 बजे की बताई जा रही है, लेकिन इसकी भनक किसी को नहीं लगी. आनन-फानन में मृतका का पोस्टमॉर्टम करवाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. घटना की जानकारी बुधवार शाम को शहर की सनसिटी कॉलोनी में काम करने वाली महिलाओं के माध्यम से फैली. विधायक चंदा सिंह गौर के बेटे अभियंत सिंह गौर से सवाल किए गए तो उन्होंने कहा, ''घटना के समय मैं जिला मुख्यालय से बाहर दिल्ली में था. घर पर मेरी पत्नी और 17 साल का बेटा थे, जिन्होंने फोन पर मुझे सूचना दी. मैं अगले दिन पहुंचा. मुझे नहीं पता कि सपना रैकवार ने यह घातक कदम क्यों उठाया? वह फोन नहीं चलाती थी और न ही कभी परेशान दिखती थी. वह मेरी नौकरानी नहीं, बल्कि बेटी की तरह थी. वह 5 साल की उम्र से हमारे साथ रह रही थी. हम उसकी शादी के लिए रिश्ता भी ढूंढ रहे थे.''  छतरपुर की सनसिटी कॉलोनी में विधायक पुत्र का बंगला. मृतका सपना के पिता भोला रैकवार उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के बेलाताल निवासी थे. घटना के बाद सपना की मां आई थी, लेकिन उन्होंने अभी तक पुलिस को कोई बयान नहीं दिया है.  पुलिस ने अभियंत सिंह गौर के बंगले पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज की जांच के लिए डीवीआर जब्त कर लिया है. सिविल लाइन थाना पुलिस सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है. पुलिस प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या का मामला बता रही है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृतिका के परिजनों के बयानों से यह स्पष्ट हो सकता है कि यदि सपना ने आत्महत्या की, तो इसका कारण क्या था?

रजनी ताई उपासने को मंत्री रजवाड़े ने दी श्रद्धांजलि

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजनीति और समाज सेवा जगत के लिए दुःखद समाचार सामने आया है। रायपुर की पहली महिला विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सच्चिदानंद उपासने की पूज्य माताजी रजनी ताई उपासने के निधन पर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मंत्री रजवाड़े ने अपने शोक संदेश में कहा कि रजनी ताई उपासने का निधन अत्यंत दुःखद है। उन्होंने जनसेवा और समाजहित के लिए जो योगदान दिया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी सादगी और समर्पण ने उन्हें जनता के बीच विशेष स्थान दिलाया। लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि इस दुःख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवारजनों के साथ हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को यह अपूरणीय क्षति सहन करने की शक्ति प्रदान करें। गौरतलब है कि रजनी ताई उपासने 1977 में रायपुर से जनता पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर शहर की पहली महिला विधायक बनी थीं। राजनीति में आने से पहले से ही वे जनसंघ की सक्रिय कार्यकर्ता रहीं और कई आंदोलनों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके निधन से रायपुर ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर है।

भोपाल में आया विजेता घोड़ा: ऊंची दीवारें और नदियां भी नहीं रोक सकीं

भोपाल  घुड़सवारी की दुनिया में देश का नंबर-1 घोड़ा इस वक्त भोपाल में है। नाम है- मावलिन। उम्र 12 साल, कद 6.5 फीट और कीमत 70 लाख रुपए। घोड़ा ‘मावलिन’ का जन्म आयरलैंड में हुआ लेकिन अब यह मध्यप्रदेश राज्य घुड़सवारी अकादमी, बिशनखेड़ी का स्टार परफॉर्मर है। इसे लंबी दौड़, नदी और ऊंची-ऊंची दीवारें लांघने में महारत हासिल है। यह अब तक 7 इंटरनेशनल और 20 नेशनल मेडल जीत चुका है। एशियन चैम्पियनशिप का प्रतिनिधित्व कर चुके राजू सिंह इसके मुख्य राइडर हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने 2007 में मप्र राज्य घुड़सवारी अकादमी की स्थापना की थी। इसकी शुरुआत 10 घोड़ों से अंकुर मैदान पर हुई। बाद में बिशनखेड़ी में शिफ्ट हुई। अब देश की महत्वपूर्ण अकादमी बन चुकी है। एशियन चैम्पियनशिप सहित कई देशों में चमके यहां के घोड़े घुड़सवारी सबसे कठिन, प्रतिष्ठित ओलंपिक इवेंट है। इसमें घोड़ा और घुड़सवार कई बाधाएं पार करते हैं। इनमें नदी-नाले, ऊंची दीवारें लांघना और लंबी दौड़ के साथ जंपिंग भी अहम है। यही कारण है कि इस इवेंट के लिए ऑलराउंडर घोड़ों की जरूरत होती है। अकादमी में ऐसे छह ऑलराउंडर घोड़े है- मावलिन, मातकाली, प्रियंका, कैरेबियन बॉय, जावा और शिवालिक। इनकी जयपुर में ट्रेनिंग चल रही है। क्योंकि वहां की रेतीली जमीन बरसात में भी अभ्यास के लिए अनुकूल होती है। हाल में खरीदे गए तीन विदेशी घोड़े अकादमी ने 2023 में तीन विदेशी घोड़े खरीदे हैं। इनमें मावलिन-जावा को आयरलैंड से, जबकि ल्यूक को जर्मनी से लिया गया है। जावा 7 साल और ल्यूक 12 साल का है। अकादमी के खाते में 300 मेडल मप्र घुड़सवारी अकादमी ने साल 2024-25 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 7 मेडल और राष्ट्रीय स्तर पर 28 मेडल जीते। कुल मिलाकर अकादमी के खाते में अब तक 300 से ज्यादा मेडल दर्ज हो चुके हैं। राजू और मावलिन की जोड़ी स्टार है।

छत्तीसगढ़ राजनीति को बड़ा झटका, रजनी ताई उपासने नहीं रहीं

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए आज का दिन बेहद दुखद रहा। रायपुर शहर की पहली महिला विधायक रजनी ताई उपासने का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थीं। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। 1977 में बना था ऐतिहासिक रिकॉर्ड रजनी ताई उपासने ने 1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी की ओर से रायपुर सीट से जीत हासिल की थी। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी शारदा चरण तिवारी को हराकर इतिहास रचा था। इसी के साथ वे रायपुर शहर से चुनकर आने वाली पहली महिला विधायक बनीं। राजनीति से पहले भी रही सक्रिय सियासत में औपचारिक प्रवेश से पहले रजनी ताई जनसंघ की सक्रिय कार्यकर्ता रहीं। वे कई आंदोलनों से जुड़ी रहीं और अपने संघर्ष व समर्पण से उन्होंने राजनीतिक जगत में पहचान बनाई। रायपुर को अब तक मिलीं सिर्फ वही महिला विधायक रायपुर विधानसभा क्षेत्र के लोकतांत्रिक इतिहास में आज तक किसी अन्य महिला को विधायक बनने का अवसर नहीं मिला। रजनी ताई उपासने ही अब तक रायपुर शहर की इकलौती महिला विधायक रही हैं। उन्होंने 46 वर्ष की उम्र में विधानसभा पहुंचकर नई मिसाल कायम की थी। सादगी और समर्पण की मिसाल रजनी ताई का राजनीतिक जीवन हमेशा सादगी और सेवा की भावना से जुड़ा रहा। जनता के बीच वे एक सहज और मिलनसार नेता के रूप में जानी जाती थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ने एक सादगीपूर्ण और समर्पित नेता को खो दिया है।

मध्य प्रदेश में मौसम का कहर: उज्जैन की नदियां उफान पर, 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

उज्जैन/ धार /खरगोन /खंडवा  मध्यप्रदेश में गुरुवार से फिर तेज बारिश का दौर शुरू होगा। मानसून ट्रफ की एक्टिविटी होने से खरगोन, खंडवा समेत 10 जिलों में भारी बारिश हो सकती है।उज्जैन में शिप्रा नदी उफान पर है। घाटों पर बने मंदिर पानी में डूब गए हैं। धार के मनावर में गुरुवार सुबह तेज पानी गिरा। स्कूल, कॉलेज और दफ्तर जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट में अगले 24 घंटे में ढाई से साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। वहीं, भोपाल-इंदौर में रिमझिम बारिश हो सकती है। प्रदेश के बीचोंबीच से गुजर रही मानसून ट्रफ सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया- बुधवार को एक मानसून ट्रफ प्रदेश के बीचोंबीच से गुजरी। एक अन्य ट्रफ की सक्रियता भी देखने को मिली। वहीं, बंगाल की खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया एक्टिव हो रहा है। इसका अगले कुछ दिन में असर देखने को मिलेगा। ऐसे में प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश का दौर बना रहेगा। गुना-मंडला में 53 इंच से ज्यादा पानी गिरा इस बार बारिश के मामले में गुना सबसे बेहतर है। यहां औसत 53.8 इंच पानी गिर चुका है। वहीं, मंडला में 53.1 इंच बारिश हुई है। अशोकनगर में 50.5 इंच, शिवपुरी में 49.9 इंच और रायसेन में 49.6 इंच बारिश हुई है। सबसे कम बारिश वाले 5 जिलों में सभी इंदौर संभाग के हैं। इंदौर में अब तक औसत 16.5 इंच बारिश हुई है। बुरहानपुर में 19 इंच, खरगोन में 19.1 इंच, खंडवा में 19.6 इंच और बड़वानी में 20.1 इंच पानी गिरा है। एमपी में अब तक 35.6 इंच बारिश प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 35.9 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 29.2 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 6.7 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। इस हिसाब से कोटे की 97 प्रतिशत तक बारिश हो चुकी है। 1.1 इंच बारिश होते ही इस बार भी बारिश का कोटा फुल हो जाएगा। पिछली बार 44 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। इंदौर में 1944 में गिरा था 28 इंच पानी इंदौर में अगस्त महीने में औसत 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड है, जो साल 1944 में दर्ज किया गया था। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 22 अगस्त 2020 को बना था। इस दिन साढ़े 10 इंच पानी गिरा था। पिछले 10 साल में दो बार 17 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इंदौर में अगस्त महीने की औसत बारिश 10 से 11 इंच है। महीने में 12 से 13 दिन तक बारिश होती है।