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पेंशन पुनर्बहाली के लिए रमेश बैस से मिले पेंशनभोगी प्राध्यापक

पेंशन पुनर्बहाली के लिए रमेश बैस से मिले पेंशनभोगी प्राध्यापक रायपुर  छत्तीसगढ़ अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक पेंशनर्स संघ के प्रतिनिधि मंडल ने महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा वरिष्ठ नेता रमेश बैस से भेंट कर राज्य सरकार के अचानक पेंशन बंद करने के अमानवीय निर्णय से उपजी परिस्थितियों से उन्हें अवगत कराया। इस अवसर पर प्राध्यापक पेंशनर संघ तथा वर्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों के प्रादेशिक संघ द्वारा उन्हें  ज्ञापन भी दिए। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और राज्य सरकार के इस निर्णय पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए अपने स्तर से पेंशन पुनर्बहाली हेतु मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से चर्चा करने का आश्वासन दिया। छत्तीसगढ़ अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक पेंशनर्स संघ के अध्यक्ष डॉ हरिनारायण दुबे, महासचिव डॉ डी एन शर्मा, डॉ  ए आर वर्मा, डॉ सरोज प्रकाश तथा प्रादेशिक अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ के महासचिव डॉ सुभाष चंद्राकर व कोषाध्यक्ष डॉ राजेंद्र शुक्ला प्रतिनिधि मंडल में शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 सितंबर 2026 को एक आदेश जारी कर प्रदेश के 13 शत–प्रतिशत अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों से सेवानिवृत हुए प्राध्यापकों व कर्मचारियों की 40 साल से निरंतर मिल रही पेंशन को अचानक बंद कर दिया। इसके फलस्वरुप पेंशनर्स के समक्ष रोटी, दवा और रोजाना के खर्चे के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस आदेश से सेवानिवृत प्राध्यापक व कर्मचारी ही प्रभावित नहीं होंगे बल्कि वर्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों व कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति पर उन्हें पेंशन व ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिल पाएगा ।

उन्नत उपकरण सहायता योजना से टोकेश्वरी साहू को मिली राहत, बुनाई का काम हुआ आसान

सेवा की कहानी उन्नत उपकरण सहायता योजना से टोकेश्वरी साहू को बुनाई कार्य में मिली सहूलियत नए उन्नत करघे और सहायक उपकरण मिलने से आसान हुआ पारंपरिक बुनाई का काम, उत्पादन क्षमता बढ़ाने का मिला अवसर रायपुर,   हाथकरघा विभाग द्वारा संचालित उन्नत उपकरण सहायता योजना पारंपरिक बुनकरों के लिए आधुनिक सुविधाओं का माध्यम बन रही है। योजना के तहत बुनकरों को नए उन्नत करघे और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनका कार्य आसान होने के साथ उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि हो रही है। योजना का लाभ राजनांदगांव जिले  के  मुख्यालय में गायत्री नगर वार्ड क्रमांक 13 निवासी एवं आशा नगर उप समिति की सदस्य श्रीमती टोकेश्वरी साहू को भी मिला है। श्रीमती टोकेश्वरी साहू लंबे समय से बुनाई कार्य से जुड़ी हुई हैं। पहले उन्हें लकड़ी की मशीन से काम करना पड़ता था। पारंपरिक मशीन से कार्य करने में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। काम में अधिक समय और मेहनत लगती थी तथा उत्पादन को बेहतर बनाना भी चुनौतीपूर्ण था। उन्नत उपकरण सहायता योजना के तहत उन्हें लोहे का नया उन्नत करघा उपलब्ध कराया गया। आधुनिक करघा मिलने से अब उनके बुनाई कार्य में काफी सहूलियत हो रही है। पहले की तुलना में काम करना आसान हुआ है और वे बेहतर गुणवत्ता के साथ अधिक उत्पादन करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इस उन्नत उपकरण सहायता योजना पारंपरिक बुनकरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, उनके कार्य को सुविधाजनक बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। श्रीमती साहू ने बताया कि उन्नत करघा मिलने से बुनाई कार्य में समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। अब वे अधिक सुविधा के साथ अपना काम कर पा रही हैं। आधुनिक उपकरण से उन्हें अपने कार्य को विस्तार देने और उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिला है। योजना से मिली सहायता उनके लिए आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है। योजना के माध्यम से बुनकरों को अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ बेहतर आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।श्रीमती टोकेश्वरी साहू ने उन्नत उपकरण सहायता योजना के तहत नया उन्नत करघा एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की इस सहायता से उनके बुनाई कार्य में नई सुविधा और आत्मविश्वास आया है।

सीएम डॉ. यादव से प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात, न्याय का दिया भरोसा

सबके साथ न्याय करेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव से प्रतिनिधिमंडल ने की भेंट भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से गुरुवार को केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ विधायक हेमन्त खंडेलवाल, बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव सहित अनुसूचित जनजाति समुदाय के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी ग्राम में बीते दिनों हुए घटनाक्रम की जानकारी देकर जनजातीय समुदाय के साथ हुई कार्यवाही की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अपनी मांगों का एक ज्ञापन भी दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कराई जा रही है। सबके साथ न्याय होगा। उन्होंने कहा कि हम आपसी संवाद से मामले का व्यावहारिक समाधान निकालेंगे।  

रूस-यूक्रेन युद्ध में फिर बढ़ेगा तनाव, जेलेंस्की ने रूसी तेल ठिकानों पर हमले की दी चेतावनी

कीव  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 अक्टूबर 2026 को ट्रुथ सोशल पर अचानक 'एनर्जी सीजफायर' की घोषणा की. उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन दोनों ने एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर सहमति जताई है. लेकिन यह घोषणा कीव के लिए नई खबर थी।  राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में साफ कहा कि रिफाइनरियों पर हमले का ब्लॉक खत्म. हम कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि यूक्रेन ने ट्रंप की घोषणा के बाद दो-तीन दिन तक रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोके रखे लेकिन रूस ने यूक्रेन के बिजलीघरों, गैस सुविधाओं और ऊर्जा ग्रिड पर हमले जारी रखे।  इस दौरान रूस ने 14 अक्टूबर की रात 39 बैलिस्टिक मिसाइलें और 120 से ज्यादा ड्रोन दागे. कीव और खारकीव समेत कई जगहों पर 26 ऊर्जा सुविधाएं और चार तेल-गैस ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए. 6 लाख लोग बिना बिजली के हैं।  हमलों का असर और आंकड़े यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोन हमलों ने रूसी तेल रिफाइनिंग क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार 2026 में रूसी रिफाइनरियों पर हर तीन दिन में एक सफल हमला हुआ. कुछ अनुमानों में रूस की रिफाइनिंग क्षमता का आधा हिस्सा प्रभावित हुआ और डीजल उत्पादन करीब 30 प्रतिशत घटा।  रूस में ईंधन की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई. रूस के हमलों ने यूक्रेन की बिजली क्षमता को युद्ध-पूर्व स्तर से बहुत नीचे ला दिया है. सर्दियों से पहले यह अभियान और तेज हो रहा है. जेलेंस्की का रुख साफ है. वे कहते हैं कि अगर रूस यूक्रेन के ऊर्जा सिस्टम पर हमले बंद करे तो कीव भी रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोक सकता है. लेकिन एकतरफा रियायत वे नहीं देंगे. उन्होंने अमेरिका से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर और सख्त प्रतिबंधों की मांग भी की।  ट्रंप के प्रभाव पर सवाल ट्रंप ने रूसी डीजल आयात के लिए प्रतिबंधों में ढील दी थी ताकि अमेरिकी ईंधन कीमतें घटे. उन्होंने यूक्रेन पर रिफाइनरी हमले रोकने का दबाव भी बढ़ाया. लेकिन रूस ने युद्धविराम का पालन नहीं किया और जेलेंस्की ने अपने अभियान को फिर शुरू करने का फैसला लिया।  इससे लगता है कि कीव अमेरिकी दबाव के बावजूद अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने पर अड़ा है. ऊर्जा ठिकाने आधुनिक युद्ध में महत्वपूर्ण लक्ष्य बन गए हैं क्योंकि ये युद्ध अर्थव्यवस्था और नागरिक मनोबल दोनों को प्रभावित करते हैं. यह घटना दिखाती है कि युद्धविराम की घोषणाएं तब तक प्रभावी नहीं होतीं जब तक दोनों पक्ष वास्तव में सहमत न हों और उन्हें लागू करने का दबाव न हो। 

बेटियों के लिए खास पहल, वीबी-जी रामजी से तैयार हुआ प्रदेश का पहला सौर ऊर्जा संचालित शौचालय

वीबी-जी रामजी से बना प्रदेश का पहला सोलर बालिका शौचालय, बेटियों को मिली आधुनिक सुविधाओं की सौगात ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के तहत ग्राम तर्रा में 7 लाख रुपए की लागत से निर्मित शौचालय में सौर ऊर्जा से प्रकाश व्यवस्था दिव्यांग बालिकाओं के लिए विशेष शौचालय और रैंप की सुविधा रायपुर,   विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण (वीबी-जी रामजी) के अंतर्गत संचालित ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के तहत रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत तर्रा के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में प्रदेश का पहला सोलर बालिका शौचालय बनाया गया है। लगभग 7 लाख रुपए की लागत से निर्मित इस आधुनिक शौचालय में सौर ऊर्जा से प्रकाश व्यवस्था के साथ दिव्यांग बालिकाओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे विद्यालय की 70 छात्राओं और दो महिला शिक्षिकाओं को बड़ी राहत मिली है।      मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रदेश की बेटियों के सम्मान के लिए वीबी-जीरामजी के अंतर्गत राज्यव्यापी ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान प्रारम्भ किया है। इस अभियान के तहत 26 जनवरी 2027 के गणतंत्र दिवस तक पूरे राज्य के सभी ग्रामीण शासकीय विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालय का अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य बेटियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना तथा विद्यालयों में उनकी नियमित उपस्थिति और शिक्षा को प्रोत्साहित करना है। सौर ऊर्जा से प्रकाश व्यवस्था, दिव्यांग बालिकाओं के लिए विशेष सुविधा      ग्राम तर्रा में शौचालय निर्माण के लिए वीबी-जी रामजी योजना से 5 लाख रुपए तथा कलेक्टर श्री गौरव सिंह द्वारा गौण खनिज विकास मद से 2 लाख रुपए प्रदान किए गए हैं। भवन की छत पर सोलर पैनल स्थापित किया गया है, जिससे प्रकाश की व्यवस्था होगी। पानी की उपलब्धता के लिए नल एवं सिंटेक्स टंकी लगाई गई है। इसके साथ बालिकाओं की सुविधा के लिए सेनेटरी पैड इंसिनिरेटर भी लगाया गया है। दिव्यांग बालिकाओं की सुविधा के लिए अलग शौचालय, रैंप और सहारे के लिए रेलिंग बनाई गई है। परिसर में पेवर ब्लॉक, पौधरोपण एवं साफ-सफाई की व्यवस्था भी की गई है।  जर्जर शौचालय से मिल रही थी परेशानी, अब छात्राओं में खुशी      ग्राम तर्रा के इस विद्यालय में पूर्व में निर्मित शौचालय पूरी तरह जर्जर हो चुका था। इसके कारण छात्राओं को कई बार शौचालय के उपयोग के लिए घर जाना पड़ता था, जबकि महिला शिक्षिकाओं को पंचायत भवन की सुविधा का सहारा लेना पड़ता था। इस समस्या से छात्राओं की पढ़ाई और स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहे थे। विद्यालय की आवश्यकता को देखते हुए नए शौचालय का निर्माण स्वीकृत किया गया, जिसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों, शिक्षकों और ग्रामीणों के सहयोग से पूर्ण किया गया।      नया शौचालय बनने से छात्राओं में खुशी है। उन्होंने बताया कि पहले शौचालय के अभाव में काफी परेशानी होती थी और कई बार विद्यालय आने का मन भी नहीं करता था। अब स्वच्छ एवं सुविधाजनक शौचालय उपलब्ध होने से वे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगी। महिला शिक्षिकाओं ने भी इस सुविधा के लिए प्रसन्नता व्यक्त की है। अभनपुर जनपद में 94 बालिका शौचालयों के निर्माण की तैयारी      जनपद पंचायत अभनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीं दयानंद देवांगन ने बताया कि ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत जनपद क्षेत्र में 94 बालिका शौचालयों के निर्माण के लिए स्थान चिन्हित किए गए हैं। ग्राम तर्रा में निर्मित बालिका शौचालय की तरह अन्य चिन्हित स्थानों पर भी सुविधाजनक शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। इस शौंचालय को एयरपोर्ट के जैसे बनाया गया है। जिस प्रकार से एयरपोर्ट के शौंचालयों में सभी सुविधाएं दी जाती है, उसी तर्ज पर कलेक्टर श्री गौरव सिंह के मार्गदर्शन में सभी सुविधाओं के साथ बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखने हेतु सेनेटरी पैड इंसिनिरेटर भी लगाया जा रहा है।       ग्राम तर्रा की यह पहल ग्रामीण विद्यालयों में स्वच्छता, नवीकरणीय ऊर्जा और दिव्यांग अनुकूल अधोसंरचना के समन्वय का उदाहरण है। ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के माध्यम से बेटियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश सरकार का नया आदेश, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति और CPCT को लेकर निर्देश जारी

भोपाल   मध्यप्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा बुधवार को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-3 या समकक्ष पदों पर पदोन्नति देने के संबंध में एक नया आदेश जारी किया गया है. इस आदेश के तहत कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता, परीक्षण अवधि, कंप्यूटर दक्षता और सीपीसीटी परीक्षा से जुड़ी शर्तों को बहुत ही सरल भाषा में स्पष्ट किया गया है, जिससे कर्मचारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया में आने वाली सभी प्रकार की कठिनाइयों का समय पर निराकरण किया जा सके।  प्रमोशन के लिए जरूरी शर्तें सामान्य प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार ​सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति पाने के लिए कर्मचारियों के पास जरूरी शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ मान्यता प्राप्त संस्थानों से एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा यानी सीपीसीटी का स्कोर कार्ड होना अनिवार्य किया गया है. वहीं इस सीपीसीटी स्कोर कार्ड की वैधता कुल 7 वर्ष निर्धारित की गई है. जिन कर्मचारियों के पास यह योग्यता होती है, उन्हें 2 वर्ष की परीक्षण अवधि पर पदोन्नति दी जाएगी, जिसके दौरान उन्हें सीपीसीटी परीक्षा पास करनी होगी और मान्यता प्राप्त संस्था से 1 वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा या समकक्ष कोर्स प्राप्त करना होगा।  परीक्षा पास करने के लिए ये है तय समय सीमा ​यदि कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 2 वर्ष की निर्धारित परीक्षण अवधि में अपनी आवश्यक योग्यता प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसकी परीक्षण अवधि में अधिकतम तीन वर्ष की और वृद्धि की जा सकेगी, जो किसी भी स्थिति में कुल पांच वर्ष की अवधि से अधिक नहीं होगी. यदि पांच वर्ष की कुल परीक्षण अवधि पूरी होने के बाद भी संबंधित कर्मचारी द्वारा अपेक्षित योग्यता प्राप्त नहीं की जाती है, तो उसे अनिवार्य रूप से उसके मूल चतुर्थ श्रेणी पद पर वापस कर दिया जाएगा।  ​45 वर्ष से अधिक आयु वाले बता दें कि कर्मचारियों के लिए बड़ी छूट ​चतुर्थ श्रेणी के ऐसे शासकीय सेवक जो अपनी पदोन्नति की तिथि तक 45 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं, उन्हें सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति के लिए सीपीसीटी स्कोर कार्ड जमा करने से छूट प्रदान की जाती है, हालांकि उनके लिए कंप्यूटर दक्षता की अनिवार्यता पहले की तरह ही बनी रहेगी. हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह विशेष छूट केवल विभागीय पदोन्नति के मामलों में ही लागू होगी और सीधी भर्ती या अन्य माध्यमों से होने वाली नियुक्तियों पर इस छूट का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा. साथ ही उन भर्तियों में सीपीसीटी और डिप्लोमा की अहर्ता पूरी तरह अनिवार्य रहेगी। 

इंदौर DAVV में गर्भ संस्कार की ट्रेनिंग, योग से लेकर भ्रूण विकास तक की मिलेगी शिक्षा

इंदौर  गर्भावस्था के दौरान मां का स्वास्थ्य अच्छा रहे और बच्चे का जन्म सुरक्षित तरीके से हो, इसके लिए सही पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, तनाव प्रबंधन और सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों की अहम भूमिका होती है। इन्हीं पहलुओं को अब विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाने की तैयारी। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के स्कूल ऑफ फिजिकल एजुकेशन के स्कूल ऑफ योगा में गर्भ संस्कार पर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स शुरू किया जाएगा। गर्भ संस्कार पर केंद्रित यह अपनी तरह का पहला कोर्स होगा। जुलाई 2026-27 सत्र से इसे शुरू करने की योजना है। पहले बैच में 30 विद्यार्थियों को प्रवेश देने का प्रस्ताव है। इस पाठ्यक्रम में भारतीय परंपरा में प्रचलित गर्भ संस्कार की अवधारणा को आधुनिक गर्भावस्था देखभाल से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। विद्यार्थियों को गर्भधारण से लेकर प्रसव तक महिला के शरीर में होने वाले बदलावों, भ्रूण के विकास, संतुलित पोषण, योग, प्राणायाम, ध्यान और मां तथा गर्भस्थ शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों में सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं की जानकारी भी दी जाएगी। कोर्स में सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण की योजना भी है। जुलाई से नए सत्र में शुरू करने की तैयारी DAVV के स्कूल ऑफ योगा में गर्भ संस्कार के पीजी डिप्लोमा के साथ तीन सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू करने की योजना है। इनमें योग एवं पोषण, योग एवं नेचुरोपैथी तथा योग एवं एक्यूप्रेशर शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से योग, स्वास्थ्य, पोषण और प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों से जुड़े विषयों की बुनियादी जानकारी दी जाएगी। आयुर्वेद की अवधारणाओं के साथ आधुनिक भ्रूण विज्ञान का अध्ययन स्कूल ऑफ योगा की एचओडी एवं प्रोफेसर सुंधीरा चंदेल ने बताया कि भारतीय परंपरा में गर्भ संस्कार को गर्भस्थ शिशु के विकास के अनुकूल वातावरण तैयार करने की अवधारणा के रूप में देखा जाता है। इसमें सकारात्मक विचारों, संगीत, संवाद, संतुलित भोजन और मां के भावनात्मक स्वास्थ्य को महत्व दिया जाता है। पाठ्यक्रम में गर्भ संस्कार के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पक्षों के साथ आधुनिक भ्रूण विकास से जुड़ी जानकारी भी शामिल होगी। पाठ्यक्रम के तहत आयुर्वेद में वर्णित महीनेवार गर्भ विकास की अवधारणाओं और आधुनिक भ्रूण विज्ञान का तुलनात्मक अध्ययन कराया जाएगा। विद्यार्थियों को महिला और पुरुष प्रजनन तंत्र की संरचना, गर्भधारण की प्रक्रिया तथा प्रजनन से जुड़े हार्मोन की भूमिका के बारे में पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा गर्भावस्था में हृदय और रक्त संचार तंत्र, श्वसन तंत्र, गुर्दों, पाचन तंत्र, मांसपेशियों, हड्डियों और मेटाबॉलिज्म में होने वाले बदलावों को भी समझाया जाएगा। तीनों ट्राइमेस्टर के अनुसार सिखाए जाएंगे योगाभ्यास गर्भावस्था के दौरान महिला की शारीरिक जरूरतें समय के साथ बदलती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम में पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुसार योगाभ्यास में जरूरी बदलाव करना सिखाया जाएगा। पहले ट्राइमेस्टर में हल्के व्यायाम और जोड़ों की गतिशीलता से जुड़े अभ्यासों की जानकारी दी जाएगी। दूसरे ट्राइमेस्टर में शरीर का संतुलन बनाए रखने, कमर को सहारा देने और आरामदायक मुद्राओं पर जोर रहेगा। तीसरे ट्राइमेस्टर में तकिए, कुर्सी और अन्य सहायक साधनों की मदद से संशोधित योगाभ्यास की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, डायाफ्रामेटिक ब्रीदिंग, ध्यान और योग निद्रा जैसे विषय भी शामिल होंगे। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, श्वसन और विश्राम तकनीकों की समझ देना है। गर्भावस्था में किसी भी योग या शारीरिक गतिविधि का चयन महिला की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना जरूरी होगा। अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ मिलेगा व्यावहारिक अनुभव प्रस्तावित पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है। योजना के अनुसार, विद्यार्थियों को अस्पतालों में जाकर चिकित्सकों के साथ काम करने का अवसर दिया जाएगा। इससे वे गर्भावस्था के दौरान होने वाले सामान्य शारीरिक बदलावों, पोषण की जरूरतों, सुरक्षित गतिविधियों और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को व्यावहारिक संदर्भ में समझ सकेंगे। डॉक्टरों के साथ संवाद के जरिए यह जानने में भी मदद मिलेगी कि किन परिस्थितियों में गर्भवती महिला को विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है। इन पाठ्यक्रमों के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को व्यवस्थित शैक्षणिक स्वरूप देने की कोशिश की जाएगी। गर्भ संस्कार का कोर्स इसी दिशा में एक पहल है, जिसमें पारंपरिक अवधारणाओं के साथ आधुनिक भ्रूण विज्ञान, पोषण, योग और गर्भावस्था देखभाल से संबंधित विषयों को शामिल किया जाएगा।

MP के एरण को मिलेगी नई पहचान, विदेशों से वापस आएंगी प्राचीन मूर्तियां और पुरावशेष

सागर  भारत सरकार द्वारा देश के 15 लिविंग कल्चरल स्पेस की सूची में सागर के एरण को शामिल किए जाने के बाद एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी हो रही है. एरण एक ऐसा स्थान है, जहां हड़प्पा के समकालीन ताम्र पाषाण कालीन संस्कृति से लेकर गुप्तकालीन वास्तुकला के एक से बढ़कर एक उदाहरण है. एरण को भारत सरकार की DESH (डेवलपमेंट ऑफ एक्सकैवेशन साइट्स एंड हेरिटेज कॉम्प्लेक्स) योजना के तहत देश के उन 15 पुरास्थलों में शामिल किया गया है. जिन्हें लिविंग कल्चरल स्पेस के तौर पर विकसित किया जाएगा।  ऐसे में एरण के पुरावशेष जो अंग्रेजों के समय कोलकाता और लंदन म्यूजियम ले जाए गए हैं. उनको फिर से एरण में वापस ले जाने की चर्चा तेज हो गयी है. इसी कड़ी में सबसे पहली मांग कोलकाता के नेशनल म्यूजियम ले जाए गए समुद्रगुप्त के अभिलेख को वापस लाने की मांग ने जोर पकड़ा है. खास बात ये है कि इस मुहिम में पुरातत्वविद और जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं और एरण के वैभवशाली इतिहास को अपने मूल स्थान पर वापस देखना चाहते हैं।  समुद्रगुप्त के अभिलेख कोलकाता म्यूजियम से आएंगे वापस! एरण को लिविंग कल्चरल स्पेस में शामिल किए जाने के साथ ही यहां के पुरातत्वविद और हेरिटेज लवर इस बात की मांग उठाने लगे हैं कि जब एरण को एक पर्यटन और पुरातत्व महत्व के स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है. तो एरण की वो मूर्तियां और पुरावशेष जो देश विदेश ले जाए गए हैं, उनको वापस लाया जाए. इस सिलसिले में सबसे पहला नाम समुद्रगुप्त के अभिलेख का सामने आया है. दरअसल समुद्रगुप्त का अभिलेख एरण के विष्णु मंदिर के पास मिला था।  जिसका उल्लेख ब्रिटिश अफसर जो इंजीनियर होने के साथ साथ भारतीय पुरातत्व के विद्वान के रूप में मशहूर हुए, उन्होंने अपनी किताब टूर रिपोर्ट बुंदेलखंड एंड मालवा में किया है. ये अभिलेख जनरल एलेक्जेंडर कनिंघम 1874-75 को मिला था और वो इस अभिलेख को एरण से कोलकाता से कोलकाता ले गए थे. जहां वो नेशनल म्यूजियम में रखा गया है. ये अभिलेख गुप्तकालीन ब्राह्मी और संस्कृत भाषा में लिखा गया है. इस अभिलेख की चौड़ाई 9 इंच, 3 फीट 1 इंच ऊंचा है. इसमें उकेरे गए अक्षरों का आकार आधे इंच का है।  क्या लिखा है समुद्रगुप्त अभिलेख में एरण के मूल निवासी और इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष प्रो. मोहनलाल चढ़ार बताते हैं कि, ''इस अभिलेख में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां हैं. इसमें समुद्रगुप्त को वीरता और नीति और तुष्टि में कुबेर के समान और क्रोधित होने पर यम के समान बताया गया है. समुद्रगुप्त को भक्ति नीति, पराक्रम से राजा की उपाधि के माध्यम से अपनी कीर्ति बढ़ाने वाला बताया गया है. समुद्रगुप्त को स्वर्णदान करने में राजा प्रथु एवं राघव से बताया गया है. लेख में समुद्रगुप्त को संपूर्ण पृथ्वी के संपूर्ण राज्यों को जीतकर वैभव प्रदान करने वाला बताया गया है. लेख के अनुसार समुद्रगुप्त के न्याय और पराक्रम से प्रसन्न होकर उसके पिता चंद्गगुप्त प्रथम ने उसे राजा शब्द से अभिषेक कर सम्मानित किया था और उत्रराधिकारी नियुक्त किया।  अभिलेख में समुद्रगुप्त की पत्नी दत्तदेवी का उल्लेख प्रो, मोहनलाल चढ़ार बताते हैं कि, ''इस अभिलेख में समुद्रगुप्त के साथ उनकी पत्नी दत्तदेवी का भी उल्लेख है. उसे उच्च कुल वाली कुलवधु राजलक्ष्मी एवं पतिव्रता नारी के रूप में बताया गया है. समुद्रगुप्त दत्तदेवी के अनेक पुत्र और पौत्रों की जानकारी अभिलेख में मिलती है. अभिलेख में कहा गया है कि दत्तदेवी गुप्त वंश में राजलक्ष्मी के रूप में आयी और उसके आने के पश्चात इस राजवंश में आमोद प्रमोद का वातावरण हो गया. अभिलेख के अनुसार दत्तदेवी के विवाह के समय वह अपने साथ हाथी घोड़े रत्न धन्य धान्य से युक्त होकर आयी थी. लेख में समुद्गगुप्त को अनेक युद्धों में विजय करने वाला, ओजस्वी यश प्राप्त करने वाला, युद्ध क्षेत्र में उर्जावान एवं कुशल बताया गया है।  एरिकेण नाम से एरण का उल्लेख जनरल एलेक्जेंडर कनिंघम के अनुसार, ''इस अभिलेख को विष्णु मंदिर की स्थापना से संबंधित बताया गया है. समुद्रगुप्त ने ऐरिकेण प्रदेश को अपना स्वभोग नगर बनाया था, इसकी जानकारी अभिलेख में मिलती है. अभिलेख में समुद्गगुप्त के नाम का उल्लेख है. एरण का नाम एरिकेण लिखा गया है. एरण क्षेत्र को नगर एवं प्रदेश शब्दों के साथ उल्लेख किया गया है. अभिलेख में उल्लेख मिलता है कि समुद्ग गुप्त के पराक्रम से उसके शत्रु सपने में भी आतंकित रहते थे।  समुद्रगुप्त वृद्धावस्था के दिनों में पत्नी, उससे उत्पन्न पुत्रों व बहुओं और पौत्रों के साथ आमोद पूर्वक रहने के लिए एरण आया था. अभिलेख एरण में किए गए किसी निर्माण कार्य का उल्लेख करता है, लेकिन अभिलेख के अंश से ये स्पष्ट नहीं होता है कि निर्माण कार्य क्या था अथवा किस देवता से संबंधित था. अभिलेख के सुरक्षित अंश में कोई तिथि नहीं दी गई है. यदि तिथि दी गई होगी, तो वह नष्ट हो चुकी है. अभिलेख की पांचवीं पंक्ति ’स्वभोगनगऐरिकिण प्रदेशे’ का अर्थ प्रो. कृष्णदत्त वाजपेयी ने 'अपने आमोद-प्रमोद के नगर ऐरिकिण क्षेत्र के नगर ऐरिकिण प्रदेशे' माना है।  सागर सांसद बढ़ाएगी मुहिम को आगे सांसद लता वानखेड़े का कहना है कि, ''सागर संसदीय क्षेत्र में एरण महत्वपूर्ण पुरास्थल है. सबसे पहले मैं मुख्यमंत्री का धन्यवाद करना चाहूंगी कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उसे मध्य प्रदेश के कैलेंडर में शामिल कर महोत्सव की शुरुआत कराई है. इसके अलावा मैं लगातार केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लेकर एरण के विकास के लिए अनुरोध किया है और उसी का नतीजा है कि आज एरण लिविंग कल्चरल स्पेस के रूप में जाना जाएगा. मुझे जानकारी मिली है कि, एरण की कई पुरातत्व महत्व की मूर्तियां अलग-अलग जगह पर ले जायी गयी हैं. एरण से लंदन मूर्तियां ले जाई गई हैं और समुद्रगुप्त का प्रसिद्ध अभिलेख कोलकाता म्यूजियम ले जाया गया है. मैं इन सब को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार के माध्यम से प्रयास करूंगी। 

Dhanteras 2026: धनतेरस पर कब करें पूजा और खरीदारी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Dhanteras 2026 : हर साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है. इस धन त्रयोदशी भी कहो जाता है. इस दिन भगवान धनवंतरी, कुबेर महाराज और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन इनके विधिवत पूजन और कुछ खास चीजों की खरीदारी से धनधान्य और सुख-संपन्नता में वृद्धि होती है. आइए जानते हैं इस साल धनतेरस का त्योहार किस तारीख को मनाया जाएगा और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है. धनतेरस 2026 का शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह करीब 9:30 बजे शुरू होगी. इस तिथि का समापन 7 नवंबर 2026 को सुबह करीब 11:45 बजे होगा. ऐसे में धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. खरीदारी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? धनतेरस पर नई चीजों की खरीदारी बेहद शुभ मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, झाड़ू और धनिया खरीदकर घर लाने से सुख-संपन्नता बढ़ती है. बहुत सारे लोग अपने जरूरत की चीजें भी इस दिन खरीदकर लाते हैं. किसी नए काम की शुरुआत करना भी इस दिन लाभकारी माना गया है. धनतेरस का शुभ मुहूर्त खरीदारी का मुहूर्त- 6 नवंबर को सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 6:18 बजे से रात 8:10 बजे तक धनतेरस पूजा की विधि धनतेरस के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें. फिर एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान धनवंतरी और कुबेर महाराज की प्रतिमा स्थापित करें. इनके साथ मां लक्ष्मी की संयुक्त पूजा भी की जा सकती है. इनके समक्ष घी का दीपक जलाएं. गेहूं की एक कटोरी चौकी पर रखें. इसके बाद भगवान को कुमकुम और चंदन से तिलक करें. उन्हें फल, फूल और मिठाई अर्पित करें. फिर इनके मंत्रों का जाप करें. अंत में सभी देवी-देवताओं की आरती करें और हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि की कामना करें. धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है? धनतेरस पर खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन सोना-चांदी, पीतल के बर्तन या नए बर्तन, झाड़ू, धनिया, पीली कौड़ी और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा खरीदना शुभ माना जाता है. इसके अलावा, आप चाहें तो कोई गैजेट, इलेक्ट्रोनिक आइटम या घर की जरूरत का कोई सामान भी खरीदकर ला सकते हैं. मान्यता है कि धनतेरस पर इन चीजों की खरीदारी से धनधान्य में और सुख-संपन्नता में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है.

किसानों के लिए राहत की खबर, रबी सीजन के बीज उपलब्ध; अधिकृत विक्रय केंद्रों से करें खरीदारी

रबी फसलों के बीज का पर्याप्त भण्डारण,किसान अधिकृत विक्रय केन्दों में बीज प्राप्त करें भोपाल  किसानों को आगामी रबी मौसम के लिए गुणवत्तापूर्ण  बीज का पर्याप्त भण्डारण उपलब्ध है। जिलों में शासकीय एवं अन्य अधिकृत संस्थाओं के पास उपलब्ध है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा जिलों में बीज की उपलब्धता की निरंतर समीक्षा की जा रही है। किसानों की मांग एवं आवश्यकता के अनुसार बीज की पर्याप्त उपलब्धता है। किसानों से आग्रह है कि वे अधिकृत विक्रय केन्द्रों एवं संबंधित सहकारी संस्थाओं से प्रमाणित बीज क्रय कर सकते हैं। बीज खरीदते समय टैग, बिल एवं बीज की वैधता जांच कर लें। किसी भी प्रकार की अनियमितता या निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बीज विक्रय होने पर संबंधित जिले के कृषि विभाग के अधिकारियों को सूचना दें। जिलों में मध्यप्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम में 91452 क्विंटल, शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में 12403 क्विंटल, बीज संघ में 652739 क्विंटल, राष्ट्रीय बीज निगम में 255718 क्विंटल, अन्य अधिकृत संस्थाओं में 190839 क्विंटल इस प्रकार संस्थागत में 1203191 क्विंटल एवं निजी बीज संस्थाओं में 2548843 क्विंटल उपलब्ध है। इस प्रकार कुल 3751994 (सैतींस लाख इक्यावन हजार नौ सौ चौरान्वे) क्विंटल चना, मसूर, सरसों, अलसी, मटर, गेहूं एवं जौ बीज उपलब्ध हैं।