samacharsecretary.com

मैच से पहले तैयारी तेज: टीम इंडिया और अफगानिस्तान का आज न्यू चंडीगढ़ में प्रैक्टिस सेशन

न्यू चंडीगढ़ न्यू चंडीगढ़ स्थित महाराजा यादवेंद्र सिंह पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) स्टेडियम में होने वाले भारत और अफगानिस्तान के टेस्ट मैच से पहले दोनों टीमों का आज अभ्यास सत्र आयोजित किया जाएगा। भारतीय टीम सुबह 9:30 बजे मैदान पर पहुंचेगी और दोपहर 12:30 बजे तक अफगानिस्तान की टीम  पहुंचेगी।  भारतीय टीम के अभ्यास के बाद दोपहर 1 बजे अफगानिस्तान की टीम मैदान पर उतरेगी। अफगानिस्तान का प्रैक्टिस सेशन दोपहर 3 बजे तक चलेगा। टीम के खिलाड़ी भी मैच से पहले अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने और मैदान की परिस्थितियों को समझने का प्रयास करेंगे। 6 से 10 जून तक खेला जाएगा भारत-अफगानिस्तान टेस्ट भारत और अफगानिस्तान के बीच 6 से 10 जून तक टेस्ट मैच खेला जाएगा। न्यू चंडीगढ़ स्थित महाराजा यादवेंद्र सिंह पीसीए स्टेडियम पहली बार किसी टेस्ट मैच की मेजबानी करेगा। इसके साथ ही यह भारत का 31वां और पंजाब का तीसरा टेस्ट वेन्यू बन जाएगा। मैच को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में खासा उत्साह है। 250 रुपए से शुरू होगी टिकट पीसीए ने मैच के टिकट 250 रुपए से शुरू रखे हैं। खास बात यह है कि एक टिकट पर दर्शक पांचों दिन मैच का आनंद ले सकेंगे। दर्शक अपनी सुविधा के अनुसार पूरे दिन या किसी एक सत्र के दौरान भी स्टेडियम पहुंच सकते हैं। पीसीए ने अभिभावकों से अपील की है कि वे गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों को स्टेडियम लाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव दिलाएं, ताकि वे अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को मैदान पर खेलते हुए देख सकें। शुभमन गिल करेंगे कप्तानी भारतीय टेस्ट टीम की कमान पंजाब के स्टार बल्लेबाज शुभमन गिल के हाथों में होगी। वहीं पंजाब के ही युवा खिलाड़ी गुरनूर बराड़ भी टीम का हिस्सा हैं। पीसीए ने क्रिकेट प्रशंसकों से बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचकर भारतीय टीम और पंजाब के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने की अपील की है। मुकाबले के दौरान बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

धूल भरी आंधी और बारिश का असर: पंजाब में तापमान गिरेगा, उमस से मिलेगी राहत

चंडीगढ़  पंजाब में आज और कल भी माैसम खराब रहेगा। इससे पहले वीरवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। कई जिलों में तेज धूल भरी आंधी के साथ बारिश हुई जिससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली।  अमृतसर में दोपहर करीब तीन बजे तेज हवाओं और बारिश के बाद तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। पिछले कई दिनों से 40 डिग्री के आसपास पहुंच रहे तापमान से परेशान लोगों ने राहत महसूस की। हालांकि दिन के समय मौसम शुष्क रहने के कारण पंजाब के औसत अधिकतम तापमान में 2.1 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। राज्य में सबसे अधिक 42.5 डिग्री सेल्सियस तापमान बठिंडा में रिकॉर्ड किया गया। न्यूनतम तापमान में भी 1.1 डिग्री की वृद्धि हुई। सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.8 डिग्री सेल्सियस एसबीएस नगर में दर्ज किया गया। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के चलते राज्य का तापमान सामान्य के करीब बना हुआ, जबकि 24 घंटे में तापमान में 2.1 डिग्री की बढ़ौतरी देखने को मिली है। वीरवार को राज्य का अधिकतम तापमान 42 डिग्री तक दर्ज किया गया और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने का अुनमान है।  बठिंडा रहा सबसे गर्म वीरवार को राज्य में सबसे अधिकत तापमान बठिंडा दर्ज किया गया। यहां अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। लुधियाना में लगभग 40.4 डिग्री, पटियाला में 40.6 डिग्री, अमृतसर में 38.8 डिग्री और चंडीगढ़ में लगभग 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अधिकांश जिलों में मौसम शुष्क रहा और केवल कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी या नाममात्र वर्षा दर्ज की गई। जानें कैसा रहेगा मौसम 5 जून- इस दिन राज्य के पश्चिमी हिस्सों जैसे फरीदकोट, फिरोजपुर,मुक्तसर और फाजिल्का में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। जबकि अन्य पूरे राज्य में बारिश और तेज हवाओं के साथ आंधी का असर दिख सकता है। इस दौरान बादल छाए रहने और हल्की वर्षा की स्थिति बन सकती है। 6 जून- इस दिन पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मोगा, मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला और मानसा में बारिश की संभावनाएं बनी हुई हैं। अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। 7-8 जून- इन दिनों में मौसम विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया। अधिकांश हिस्सों में मौसम काफी हद तक सामान्य या साफ रहने की संभावना है, हालांकि कुछ जिलों में हल्के बादल बने रह सकते हैं।  आंधी के दौरान कई स्थानों पर धूल का गुबार छा गया और दृश्यता प्रभावित हुई। बारिश के बाद मौसम साफ हुआ और तापमान में कमी आई। अमृतसर का अधिकतम तापमान 38.8 डिग्री जबकि लुधियाना 40.4 और पटियाला 40.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने शुक्रवार और शनिवार के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ गरज-चमक और बारिश की संभावना है। सात जून को भी कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके बाद आठ और नौ जून को मौसम शुष्क रहने की संभावना है। 10 जून से नए पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम फिर बदल सकता है। 

पंजाब की राजनीति में पोस्टर संग्राम: मजीठिया समर्थकों का पलटवार, शहर में छाए नए पोस्टर

 अमृतसर शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को लेकर मजीठा हल्के में सियासी पोस्टरबाजी लगातार तेज होती जा रही है। कुछ दिन पहले क्षेत्र में मजीठिया को भगोड़ा बताने वाले पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए थे। इसके जवाब में अब उनके समर्थकों की ओर से “टाइगर अभी जिंदा है” लिखे पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद इलाके में राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। समर्थकों का कहना है कि पोस्टरों के जरिए यह संदेश दिया गया है कि राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों के बावजूद बिक्रम सिंह मजीठिया का जनाधार कायम है। वहीं विरोधी दल इसे राजनीतिक संदेशबाजी करार दे रहे हैं। गौरतलब है कि हाल ही में थाना मजीठा में हिरासत में लिए गए अकाली कार्यकर्ता जोबनप्रीत सिंह को छुड़वाने के मामले को लेकर बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। जिसके बाद पुलिस लगातार गिरफ्तारी के लिए रेड कर रही है। इसी के बाद से मजीठिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और पोस्टरबाजी लगातार जारी है। एक ओर विरोधी पक्ष मजीठिया को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर समर्थक पोस्टरों और सार्वजनिक संदेशों के जरिए उनके समर्थन का प्रदर्शन कर रहे हैं। फिलहाल मजीठा हल्के में लगी यह नई पोस्टर श्रृंखला लोगों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

भारतीय टी-20 क्रिकेट की कमान अब श्रेयस अय्यर के हाथों में, सूर्यकुमार यादव की छुट्टी

 नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट में एक बड़ा बदलाव हो गया है. श्रेयस अय्यर को टीम इंडिया का नया T20 कप्तान बना दिया गया है. अब तक यह जिम्मेदारी सूर्यकुमार यादव के पास थी, लेकिन अब उनकी जगह श्रेयस अय्यर टीम की कमान संभालेंगे।  कुछ समय से सूर्यकुमार यादव की कप्तानी और उनके खेल को लेकर काफी सवाल उठ रहे थे. T20 वर्ल्ड कप में और उसके बाद के मैचों में उनका अपना खेल उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. इसके अलावा आईपीएल में भी वो वैसा नहीं खेल पाए जैसी उनसे उम्मीद थी. इन सब बातों को देखते हुए टीम के चुनाव करने वालों ने यानी सेलेक्टर्स ने सोचा कि अब नए कप्तान की तलाश करनी होगी।  श्रेयस अय्यर को क्यों चुना गया? श्रेयस अय्यर काफी समय से भारतीय क्रिकेट में एक भरोसेमंद बल्लेबाज के तौर पर जाने जाते हैं. घरेलू क्रिकेट में और IPL में वो पहले भी कप्तानी कर चुके हैं. मैदान पर वो अच्छी सोच के साथ खेलते हैं और दबाव में भी सही फैसले लेते हैं. इन्हीं खूबियों की वजह से टीम मैनेजमेंट की नजर में वो सबसे सही उम्मीदवार थे।  अब आगे क्या होगा? श्रेयस अय्यर के कप्तान बनने के साथ भारतीय T20 टीम में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है. सबकी नजर अब इस पर रहेगी कि उनके नेतृत्व में टीम आने वाली सीरीज और बड़े टूर्नामेंट में कैसा खेलती है. इसके अलावा टीम में खिलाड़ियों के चुनाव और बल्लेबाजी के क्रम में भी कुछ जरूरी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।  बड़ी जिम्मेदारी है अय्यर के कंधों पर अब श्रेयस अय्यर के सामने सिर्फ रन बनाने की चुनौती नहीं है. उन्हें पूरी टीम को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है. यह फैसला भारतीय क्रिकेट के लिए आने वाले वक्त की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।   

जीरो टॉलरेंस नीति पर सख्ती: वित्तीय अनियमितताओं और लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

नगरीय विकास एवं आवास विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति: वित्तीय अनियमितताओं और कर्तव्यहीनता पर कार्यवाही आयुक्त भोंडवे द्वारा विभिन्न नगरीय निकायों के अधिकारियों-कर्मचारियों पर पदावनति, वेतनवृद्धि रोकने एवं पेंशन कटौती की गई कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई भोपाल राज्य शासन के जनहितैषी संकल्पों के अनुरूप नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शासकीय कार्यों में शुचिता, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत कड़े कदम उठाए हैं। आयुक्त संकेत भोंडवे द्वारा विभिन्न नगरीय निकायों में लंबे समय से लंबित जांच प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के पश्चात दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध अत्यंत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के अंतर्गत वित्तीय अनियमितताओं, निर्माण कार्यों में लापरवाही, शासकीय भूमि एवं राजस्व के गबन तथा कोरोना काल में सामग्री क्रय में बरती गई शिथिलता को अक्षम्य मानते हुए संबंधितों को कड़ा दंड दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता के पैसे का दुरुपयोग और शासकीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। प्रशासनिक स्तर पर की गई इस कार्रवाई के अंतर्गत नगर परिषद नगौद में स्टॉप डेम निर्माण कार्य में गंभीर विसंगतियां पाए जाने पर तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी संजय पाण्डेय को प्रथम दृष्टया उत्तरदायी ठहराते हुए 'परिनिंदा' से दंडित किया गया है, जिसके फलस्वरूप वे आगामी एक वर्ष तक पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे। इसी प्रकार, नगर परिषद जैतहरी (जिला अनूपपुर) में वैश्विक महामारी कोरोना के लॉकडाउन काल में सामग्री क्रय में वित्तीय नियमों की अवहेलना करने पर तत्कालीन भंडार प्रभारी मोहित शर्मा, तत्कालीन प्रभारी मुख्य लिपिक सह लेखपाल रजनीश लहंगीर तथा तत्कालीन स्वच्छता प्रभारी संजीव राठौर की चार-चार वार्षिक वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने के आदेश जारी किए गए हैं। जैतहरी में ही शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की भूमि एवं आय को क्षति पहुंचाने के कृत्य में संलिप्तता सिद्ध होने पर राजस्व निरीक्षक अवधेश बीझी तथा प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी भूपेंद्र सिंह की आगामी दो-दो वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकी गई हैं। शासकीय सेवा से निवृत्त हो चुके कर्मियों की जवाबदेही तय करते हुए विभाग ने नगर परिषद जैतहरी के तत्कालीन प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी राम मिलन तिवारी को भूमि संबंधी गड़बड़ियों में दोषी पाते हुए उनकी देय पेंशन से 10 प्रतिशत तथा कोरोना काल की अन्य अनियमितता के लिए 20 प्रतिशत राशि की स्थायी रूप से कटौती करने की गंभीर कार्रवाई की है। इसके अतिरिक्त, नगर परिषद पिपलौदा में नीलामी प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय विसंगतियों हेतु प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी अरुण पाठक की तीन वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकी गई हैं। नगर पालिका परिषद शहडोल में मोहनराम मंदिर तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य में लापरवाही बरतने के कारण उपयंत्री देव कुमार गुप्ता एवं तत्कालीन सहायक यंत्री बृजेन्द्र प्रसाद शर्मा की आगामी तीन-तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकी गई हैं। इसी श्रृंखला में, तालाब संरक्षण योजना के तहत नगर पालिका परिषद धार के देवीसागर तालाब निर्माण में शिथिलता के लिए तत्कालीन उपयंत्री सुधीर ठाकुर एवं सहायक यंत्री देवेन्द्र कोल की एक-एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकी गई है। प्रशासनिक अनुशासन की अवहेलना करने पर सोयतकलां नगर परिषद (जिला आगर मालवा) के तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी अशोक कुमार पांचाल द्वारा माधव चौक स्थित भूखंड मामले में शासन को 9 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाने पर उन्हें राजस्व निरीक्षक के पद से पदावनत (Demote) कर उप राजस्व निरीक्षक बना दिया गया है। साथ ही, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास के यांत्रिकी प्रकोष्ठ में सहायक वर्ग-2 के पद पर पदस्थ शेखर ठाकुर को दीर्घकालिक अनाधिकृत अनुपस्थिति और गंभीर अनुशासनहीनता के कारण तत्काल प्रभाव से अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान की गई है। आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा है कि शासकीय दायित्वों के निर्वहन में किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार अथवा शिथिलता को कतई सहन नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी जनहित में दोषियों के विरुद्ध ऐसी दंडात्मक कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।  

मंत्रिमंडल गठन के साथ ही संकट! विभाग आवंटन से नाराज रेड्डी ने छोड़ा पद

 बेंगलुरु कर्नाटक में नई सरकार के गठन और विभागों के बंटवारे के तुरंत बाद कांग्रेस के भीतर का आंतरिक असंतोष एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल गया है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नवनियुक्त कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।  रेड्डी ने खुलेआम अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि उनसे किया गया वादा पूरा नहीं किया गया, जिसके चलते वे यह बड़ा कदम उठा रहे हैं. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे कैबिनेट छोड़ रहे हैं, लेकिन विधायक (MLA) और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहेंगे।  प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रामलिंगा रेड्डी ने उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार पर सीधा निशाना साधा. रेड्डी ने दावा किया, "डीके शिवकुमार खुद मेरे घर आए थे और कहा था कि जब मैं सीएम बनूंगा, तो मैं इस मंत्रालय (बेंगलुरु विकास) को छोड़ दूंगा और आप इसे संभाल लेना." रेड्डी के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह से ठीक एक दिन पहले भी जब वे शिवकुमार से मिले, तो उन्हें दोबारा आश्वस्त किया गया था कि बेंगलुरु से जुड़ा पोर्टफोलियो उन्हीं को मिलेगा।  रेड्डी ने भावुक होते हुए कहा, "मैंने कभी इस विभाग की मांग खुद से नहीं की थी, लेकिन मुझे बार-बार इसका भरोसा दिया गया था. दो बार वादा करने के बाद अब मुझे जल संसाधन विभाग दे दिया गया. मैं इस फैसले से बेहद निराश हूं और इसीलिए इस्तीफा दे रहा हूं।  समर्थक के हाथ भेजा इस्तीफा, पत्र में लिखी बड़ी बात रामलिंगा रेड्डी ने अपना इस्तीफा सीधे मुख्यमंत्री को सौंपने के बजाय अपने एक समर्थक के जरिए मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भिजवाया है. अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा, "मैं कैबिनेट में मंत्री पद देने के लिए आपका और कांग्रेस पार्टी का आभार व्यक्त करता हूं. हालांकि, चूंकि मैं अपनी अंतरात्मा के खिलाफ काम करने में असमर्थ हूं, इसलिए मैं मंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं. कृपया इसे स्वीकार करें।  राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चा तेज है कि रामलिंगा रेड्डी ने अपने त्यागपत्र में 'माननीय मुख्यमंत्री' के रूप में डी. के. शिवकुमार को संबोधित किया है, जो राज्य के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा करता है. हालांकि, रेड्डी ने मीडिया से कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से न तो शिवकुमार से नाराज हैं और ना ही सिद्धारमैया से।  दरअसल, रामलिंगा रेड्डी 'बेंगलुरु शहरी विकास'  विभाग की मांग कर रहे थे. वे इस महत्वपूर्ण विभाग पर अपनी कमान चाहते थे, लेकिन मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने यह जिम्मेदारी ब्याटरायनपुरा के विधायक कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंप दी। 

मध्यप्रदेश से राज्यसभा की जंग तय, कांग्रेस की मीनाक्षी बनाम BJP के तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल

भोपाल  राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है, जिसमें मध्य प्रदेश से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया गया है. इस फैसले के साथ ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, खासकर इसलिए क्योंकि इस बार दो मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों को दोबारा मौका नहीं दिया गया. पार्टी ने अन्य राज्यों में भी कई अहम नामों की घोषणा की है. मध्य प्रदेश में दो सीटों पर उम्मीदवार उतारकर बीजेपी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है, जिसके चलते क्रॉस वोटिंग की भी संभावना पर नजर रखी जा रही है।  MP से दो उम्मीदवार, चुनाव होगा दिलचस्प बीजेपी ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटों के लिए तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को टिकट दिया है. दोनों उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से यहां चुनाव होना तय माना जा रहा है, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर नजर बढ़ गई है।  केंद्रीय मंत्रियों को नहीं मिला मौका इस बार पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कूरियन को राज्यसभा नहीं भेजा है. दोनों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है, लेकिन नए सिरे से उन्हें मौका नहीं दिया गया. इस फैसले को भविष्य के राजनीतिक बदलावों के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।  तरुण चुग: संगठन के मजबूत रणनीतिकार तरुण चुग वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी के अनुभवी संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं. पंजाब के अमृतसर से आने वाले चुग ने आरएसएस से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी और संगठन के विभिन्न स्तरों पर काम किया है. वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी भूमिका निभा चुके हैं और कई राज्यों में संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।  तरुण चुग भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में राष्ट्रीय महासचिव हैं. वे पार्टी के संगठनात्मक रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं और कई राज्यों में चुनावी प्रबंधन व संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. तरुण चुग ने बेहद कम उम्र (लगभग 9 वर्ष) में RSS से जुड़कर सामाजिक कार्यों की शुरुआत की।  इसके बाद वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई.     1989–1994: ABVP में जिला सचिव और राज्य कार्यकारिणी सदस्य     1993: अमृतसर में BJYM (भारतीय जनता युवा मोर्चा) के जिला अध्यक्ष बने तरुण चुग ने युवा राजनीति से अपने करियर को मजबूती दी और धीरे-धीरे संगठन में बड़े पदों तक पहुंचे     1997: पंजाब BJP युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष     राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य (BJYM)     राज्य महासचिव (युवा मोर्चा) उन्होंने युवाओं को जोड़ने के लिए “युवा चेतना यात्रा” का नेतृत्व किया, जो 2100 किमी लंबी थी।  BJP संगठन में प्रमुख पद तरुण चुग संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं:     प्रदेश भाजपा प्रशिक्षण प्रकोष्ठ संयोजक     राज्य मीडिया एवं प्रशिक्षण प्रकोष्ठ प्रभारी     राज्य भाजपा सचिव     पंजाब भाजपा महासचिव     राष्ट्रीय महासचिव (वर्तमान) जिम्मेदारियां और क्षेत्रीय प्रभारी तरुण चुग को पार्टी ने कई महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी है:     जम्मू-कश्मीर प्रभारी     लद्दाख प्रभारी     तेलंगाना प्रभारी     अंडमान-निकोबार प्रभारी     दिल्ली भाजपा सह-प्रभारी राजनीतिक महत्व वे चुनावी रणनीति, बूथ प्रबंधन और संगठन विस्तार में अहम भूमिका निभाते हैं. तरुण चुग का राज्यसभा के लिए चयन कई कारणों से अहम माना जा रहा है. इसे संगठन को महत्व देने के संकेत के साथ-साथ पंजाब और उत्तर भारत में राजनीतिक संतुलन और भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।  रजनीश अग्रवाल को भी मिला मौका रजनीश अग्रवाल, जो वर्तमान में मध्य प्रदेश बीजेपी में प्रदेश मंत्री हैं, को भी राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया है. उनकी नियुक्ति को प्रदेश संगठन में सक्रिय भूमिका और पार्टी के प्रति समर्पण का परिणाम माना जा रहा है।  अन्य राज्यों में भी बड़े नाम बीजेपी ने अन्य राज्यों के लिए भी उम्मीदवारों की घोषणा की है. राजस्थान से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजा जा रहा है. मणिपुर से ए. शारदा देवी को टिकट दिया गया है, जबकि ओडिशा में देबाशीष सामंतराय को उम्मीदवार बनाया गया है, जो पहले बीजेडी से जुड़े थे।  गुजरात में बीजेपी मजबूत स्थिति में गुजरात में बीजेपी ने चारों सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है. यह पहली बार होगा जब गुजरात से कांग्रेस का कोई भी राज्यसभा सदस्य नहीं होगा।  पंजाब राजनीति से जुड़ा फैसला रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा में अवसर नहीं मिलने से यह संकेत मिल रहा है कि वे पंजाब विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने पहले ही संकेत दिया था कि वे पंजाब लौटकर राजनीति में सक्रिय होंगे।  मंत्रीमंडल फेरबदल के संकेत दो केंद्रीय मंत्रियों को राज्यसभा टिकट न मिलने और “एक व्यक्ति, एक पद” की नीति को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि केंद्र सरकार में जल्द फेरबदल हो सकता है. कुछ नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।  बीजेपी की रणनीतिक चाल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने इस सूची के माध्यम से संगठन और नेतृत्व के संतुलन को ध्यान में रखा है. अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों को मौका देकर पार्टी ने भविष्य की रणनीति तैयार की है।  राज्यसभा चुनाव पर सभी की नजर अब सभी की नजर राज्यसभा चुनाव पर टिकी हुई है, जहां क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभा सकते हैं. मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में यह चुनाव आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम को दिशा दे सकता है। 

बारिश के मौसम में बिजली व्यवस्था दुरुस्त रखने पर जोर, कर्मचारियों के लिए भी जारी हुए सख्त निर्देश

मॉनसून में उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के सभी प्रबंध करें अनुमति उपरांत ही मुख्यालय छोड़ें कार्मिक भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के जिलों में विद्युत आपूर्ति और ऑपरेशन एंड मेन्टीनेंस से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नियंत्रणकर्ता अधिकारी से अनुमति लेकर ही कार्यस्थल / मुख्यालय छोड़ें। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि प्री-मॉनसून बारिश की बौछारें शुरू हो गईं हैं और अनेक बार आँधी और चक्रवाती तूफान और प्राकृतिक आपदा को देखते हुए कंपनी के मैदानी अफसरों से कहा गया है कि वे विद्युत आपूर्ति और रखरखाव तथा ऑपरेशन्स को देखते हुए सतर्कता और सजगता से काम करें। कोई कार्मिक अवकाश पर जाता है तो उसके स्थान पर वैकल्पिक कार्मिक की तैनाती की व्यवस्था पहले से ही करें। कंपनी ने कहा है कि गत वर्षों में पूरे जून माह की शिकायतों के आकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस दौरान कॉल सेन्टर में एफओसी (विद्युत अवरोध) से संबंधित उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत शिकायतों की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए काल सेन्टर के ऑपरेशनल एवं सुपरवाइजरी स्टॉफ को और अधिक सजगता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने सभी मैदानी कार्मिकों को उपभोक्ताओं को अनवरत् और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में विद्युत आपूर्ति बहाल रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। किसी भी आकस्मिक स्थिति में उपभोक्ता कंपनी के कॉल सेन्टर नंबर 1912 पर संपर्क कर सकते हैं।  मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा है कि आपदा के समय संपर्क करने के लिये लाइनमैनों के मोबाइल नंबर आदि की जानकारी अपडेट रखी जाए। मैदानी अधिकारियों से कहा गया है कि वे जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से सपंर्क और समन्वय बनाये रखें। बारिश के दौरान इन बातों का रखे ध्यान मॉनसूनी मौसम के दौरान हवा में नमी के कारण करंट लगने की आशंका ज्यादा रहती है। करंट से लोगों की मौत हो जाती है। लेकिन ज्यादातर मौतों को टाला जा सकता है। ज्यादातर मौतें घरों में अर्थिंग नहीं होने या कमजोर अर्थिंग की वजह से होती है। अर्थिंग या तो स्थानीय स्रोत से प्राप्त की जा सकती है या घर पर ही गहरा गढ़डा खोदकर खुद बनाई जा सकती है।     बारिश में बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें           घर में अर्थिंग की उचित व्यवस्था करें।          हरे रंग के तार को हमेशा याद रखें। इसके बिना कभी बिजली उपकरण का प्रयोग न करें। खास कर जब यह पानी के स्रोत को छू रहा हो। पानी करंट के प्रवाह की गति को बढ़ा देता है, इसलिए नमी वाले माहौल में अतिरिक्त सावधानी रखें।          दो पिन वाले बिना अर्थिंग के उपकरणों का प्रयोग न करें।          तीन पिन वाले प्लग का प्रयोग करते समय ध्यान रखें कि तीनों तार जुड़े हों और पिनें खराब न हों।          तारों को सॉकेट में लगाने के लिए माचिस की तीलियों का प्रयोग न करें।          किसी भी तार को तब तक न छुएं, जब तक बिजली बंद न कर दी गई हो ।          अर्थिग के तार को न्यूट्रल के विकल्प के तौर पर प्रयोग न करें।          सभी जोड़ों पर बिजली वाली टेप लगाएं, न कि सेलोटेप या बेंडेड ।          गीज़र के पानी का प्रयोग करने से पहले गीज़र बंद कर दें।          हीटर प्लेट का प्रयोग नंगी तार के साथ न करें।          घर पर सूखी रबर की चप्पलें पहनें।          घर पर मिनी सर्किट ब्रेकर और अर्थ लीक सर्किट ब्रेकर का प्रयोग करें।          मेटलिक बिजली उपकरण पानी के नल के पास न रखें।          रबर के मैट और रबर की टांगों वाले कूलर स्टैंड बिजली उपकरणें को सुरक्षित बना सकते हैं।          केवल सुरक्षित तारें और फ्यूज का ही प्रयोग करें।          अर्थिंग की जांच हर छह महीने में करते रहें।          किसी भी आम टेस्टर से करंट के लीक होने का पता लगाया जा सकता है।          फ्रिज के हैंडल पर कपड़ा बांध कर रखें।          प्रत्येक बिजली उपकरण के साथ बताए गए निर्देश पढ़ें।  

एक तरफ Layoffs, दूसरी तरफ AI पर भारी खर्च! Amazon की रणनीति पर उठे सवाल

 नई दिल्ली दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक ऐमेजॉन इस समय एक अजीब दोराहे पर खड़ी नजर आ रही है. एक तरफ कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हजारों कर्मचारियों की नौकरी जा रही है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐमेजॉन ने करीब 30,000 नौकरियां खत्म कर दी हैं. लेकिन इसी दौरान कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और नई टेक्नोलॉजी पर भारी निवेश जारी रखा है. यही वजह है कि अब कंपनी के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है।  अमेरिका के सिएटल शहर में हुई एक सिटी काउंसिल हियरिंग में ऐमेजॉन के कुछ इंजीनियर्स ने खुलकर अपनी ही कंपनी के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि जिस समय कंपनी बड़े-बड़े AI डेटा सेंटर बना रही है, उसी समय कर्मचारियों की छंटनी करना गलत है।  रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर्स निवेश कर रहा है. ऐसे में 30 हजार लोगों की छंटनी पर कई सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि ये पूरे वर्कगफोर्स का 8.6% है जो काफी ज्यादा है।  इन इंजीनियर्स ने सिर्फ नौकरी कटौती पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि  डेटा सेंटर को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि ये डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और संसाधन खपत करते हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर असर पड़ता है।  दरअसल, Amazon ही नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री इस समय AI रेस में लगी हुई है. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एनवीडिया जैसी कंपनियां भी इसी दौड़ में हैं. हर कंपनी चाहती है कि वह AI में आगे निकले, और इसके लिए अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं।  लेकिन इस दौड़ की कीमत कौन चुका रहा है? यही सवाल अब कर्मचारियों और आम लोगों के बीच उठने लगा है. Amazon के अंदर जो विरोध दिख रहा है, वह एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है।  हाल के दिनों में अमेरिका और यूरोप में एआई और डेटा सेंटर के खिलाफ कई जगहों पर प्रदर्शन भी हुए हैं. लोगों को डर है कि AI नौकरियां खत्म करेगा और साथ ही पर्यावरण पर भी भारी दबाव डालेगा।  Amazon के मामले में यह विरोध इसलिए और खास है क्योंकि यह कंपनी के अंदर से ही उठ रहा है. आम तौर पर कर्मचारी अपनी कंपनी के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल नहीं उठाते, लेकिन यहां मामला अलग है।  विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई पर हो रहा भारी खर्च अभी कंपनियों के लिए कमाई में नहीं बदल पा रहा है. यानी कंपनियां पहले पैसा लगा रही हैं, लेकिन उसका फायदा तुरंत नहीं मिल रहा. ऐसे में लागत कम करने के लिए नौकरी कटौती का रास्ता अपनाया जा रहा है।  यही वजह है कि अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या AI का यह मॉडल टिकाऊ है या नहीं. Amazon की यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की नहीं है. यह उस पूरी टेक दुनिया की तस्वीर दिखाती है, जहां भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए आज के कर्मचारियों की कीमत चुकाई जा रही है।  आने वाले समय में यह साफ होगा कि AI वाकई उतना बड़ा बदलाव लाता है जितना दावा किया जा रहा है, या फिर यह भी एक महंगा प्रयोग साबित होता है. लेकिन फिलहाल इतना जरूर है कि Amazon के अंदर उठी यह आवाज अब पूरी दुनिया में गूंज रही है।   

‘IPL खत्म, अब भविष्य देखो’— Googleई की उड़ान और उदय कोटक के बयान ने खींचा ध्यान

मुंबई  दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां भविष्य की दिशा आज लिए जा रहे फैसलों से तय हो रही है. टेक्नोलॉजी,पूंजी और निवेश का खेल अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक हो गया है. इसी संदर्भ में गूगल का हालिया कदम बेहद महत्वपूर्ण है. जिस कंपनी के पास पहले से ही भारी नकद भंडार है. जिसने लगातार मुनाफे के नए रिकॉर्ड बनाए हैं. वही कंपनी बाजार से अतिरिक्त 80 अरब डॉलर जुटाने जा रही है. उदय कोटक ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस तरफ ध्यान दिलाया है और देसी कंपनियों को चेताया है. आईपीएल का मजा खत्म हुआ, अब भविष्य की तरफ देख लो. गूगल के आंकड़े अपने आप में चौंकाने वाले हैं. सालाना मुनाफा लगभग 160 अरब डॉलर, एक तिमाही का मुनाफा 62 अरब डॉलर और कुल मार्केट वैल्यू 4.5 खरब डॉलर. इतना मार्केट कैप तो निफ्टी 50 और सेंसेक्स की कंपनियों को मिलाकर भी नहीं है।  यहां सबसे अहम सवाल उठता है कि जब इतनी बड़ी और मजबूत कंपनी भी भविष्य को लेकर इतनी आक्रामक तैयारी कर रही है तो हम क्या कर रहे हैं. क्या हम भी उसी स्तर की तत्परता और दूरदृष्टि दिखा रहे हैं? हम अपनी स्थिति को देखें तो एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आता है. एक तरफ राजनीतिक स्थिरता और ताकत अपने चरम पर है. मजबूत नेतृत्व,लगातार चुनावी जीत और लगभग एकदलीय प्रभुत्व जैसी स्थिति है. कुल मिलाकर मोदी सरकार बेहद स्थिर है. दूसरी तरफ आर्थिक मोर्चे पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. ईरान वॉर ने चुनौतियां और बढ़ा दी है. विकास दर भले ही स्थिर दिखती हो लेकिन तीन चीजें चिंता पैदा कर रही है।  कुछ लोगों को आर्थिक स्थिति गिरने की बात पचती नहीं है. वे तुरंत बताने लगते हैं कि भारत बड़ी इकॉनमी में सबसे तेज बढ़ने वाला देश है. हमारी जीडीपी 6 परसेंट के ऊपर है. लेकिन सच्चाई इतनी चमकीली नहीं है. अगर दुनिया के सभी देशों के देखें तो भारत से ज्यादा जीडीपी वृद्धि दर नाइजर और इथियोपिया की है. प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के मामले में भी हम आठवें स्थान पर हैं. बांग्लादेश हमसे आगे है. हाल ही में पश्चिम एशिया जंग के कारण रुपया पिछले एक साल में लगभग 12% गिरा है और यह लगातार सातवां साल है जब इसमें गिरावट आई है. यह एक अजीब स्थिति है. महंगाई काबू में है. चालू खाता घाटा संतुलित है. विकास की गति भी ठीक है फिर भी मुद्रा कमजोर बनी हुई है।  आर्थिक विकास का असली इंजन निवेश होता है. खासतौर पर प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और विदेशी निवेश (FDI). यही निवेश नई टेक्नोलॉजी लाता है,रोजगार पैदा करता है और देश को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ता है. लेकिन अपने देश में प्राइवेट सेक्टर का निवेश उतनी तेजी से बढ़ नहीं रहा है. सरकार ने बजट में विकास के काम के लिए 11 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है लेकिन सिर्फ सरकारी निवेश से काम नहीं चलेगा. इस पूरी तस्वीर को अगर गूगल के उदाहरण के साथ जोड़कर देखें तो फर्क साफ दिखाई देता है. वहां कंपनियां यह मानकर चल रही हैं कि भविष्य अनिश्चित है, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और टेक्नोलॉजी तेजी से बदलेगी. इसलिए अभी से निवेश बढ़ाना जरूरी है. वहीं भारत में कई बार यह धारणा दिखती है कि हमारा बाजार इतना बड़ा है कि निवेशक खुद ही आएंगे. लेकिन वास्तविकता यह है कि निवेशक भरोसे और रिटर्न की गारंटी मिलने पर ही आते हैं।  सीआईआई रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट सेक्टर ने सितंबर में 7.7 लाख करोड़ निवेश किया है. ये अच्छा संकेत है. लेकिन पिछले एक दशक के आंकड़े को देखें तो कॉरपोरेट निवेश जीडीपी के 12 प्रतिशत पर स्थिर है. इसे हर हाल में बढ़ाना होगा. हमारे पास एक विशाल बाजार, युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और वैश्विक स्तर पर बढ़ती रणनीतिक अहमियत है. लेकिन इन फायदों को वास्तविक आर्थिक ताकत में बदलने की जरूरत है।