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बंगाल में हड़कंप: कल्याण बनर्जी घायल, चंडीतला थाने के सामने बवाल

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित चंडीतला पुलिस स्टेशन के सामने तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी पर हमले की जानकारी सामने आई है. टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया और उनके सिर पर पत्थर या गेंद जैसी चीज (वस्तु) मारकर चोट पहुंचाई है. जबकि बीजेपी का कहना है कि वह घायल नहीं  हुए हैं, सिर्फ ड्रामा कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, कल्याण बनर्जी अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के संबंध और गिरफ्तार टीएमसी नेता, कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर चंडीतला थाना ज्ञापन देने पहुंचे थे. इसी दौरान ज्ञापन सौंपने से पहले ही तृणमूल और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नारेबाजी शुरू हो गई. बीजेपी-टीएमसी के बीच नारेबाजी बताया जा रहा है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तृणमूल समर्थकों के खिलाफ "चोर-चोर" के नारे लगाए, जिसके बाद माहौल और गर्म हो गया. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए गए. बताया जा रहा है कि इसी दौरान किसी ने उन पर गेंद या पत्थर जैसी चीज से हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में चोट लग गई. कल्याण बनर्जी सिर पर भीगा हुआ रूमाल रखे कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि चंडीतला थाने में डिपुटेशन (ज्ञापन) देने जाते वक्त उन पर हमला किया गया. उन्होंने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने जा रहे लोगों पर हमला किया गया. ध्यान भटकाना चाहते हैं कल्याण: बीजेपी वहीं, बीजेपी ने कल्याण के खुद के चोट लगने के दावों को झूठा करार दिया है. बीजेपी का कहना है कि वह (कल्याण बनर्जी) ड्रामा कर रहे हैं. उन्हें चोट

एकादशी ही नहीं! अन्न न खाने के 5 बड़े नियम

 सनातन धर्म में व्रत, उपवास और नियमों का गहरा महत्व है. जब भी बिना अन्न खाए उपवास रखने की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम एकादशी का आता है. हिंदू धर्म में एकादशी के दिन चावल या भारी भोजन का त्याग करना अनिवार्य माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे धर्मग्रंथों और स्मृतियों में सिर्फ एकादशी ही नहीं, बल्कि 5 अन्य ऐसे बेहद खास और संवेदनशील मौके बताए गए हैं, जब सामान्य व्यक्ति को अन्न ग्रहण करने से सख्त परहेज करना चाहिए? पौराणिक शास्त्रों के सूत्रों के अनुसार, इन विशेष अवसरों पर भोजन करने से पुण्य का नाश होता है और दोष लगता है. आइए जानते हैं एकादशी के अलावा वो कौन से 5 मौके हैं, जब रसोई में अन्न की जगह फलाहार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण (Eclipse) शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के सूतक काल से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे भोजन दूषित हो जाता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस दौरान बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे पका हुआ भोजन सही नहीं रहता है. कन्यादान: महादान के संकल्प से पहले का संयम हिंदू विवाह पद्धति में कन्यादान को संसार के सबसे बड़े और पवित्र पुण्यों में गिना गया है. माता-पिता अपनी लाडली को किसी अन्य कुल को सौंपते समय एक महान संकल्प लेते हैं. शास्त्रों का नियम है कि जिस दिन घर में यह महादान होना हो, उस दिन माता पिता को कन्यादान या फेरे पूरे होने तक अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. इस मांगलिक कार्य से पहले अन्न ग्रहण करना धार्मिक दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया है. संकल्प की पवित्रता बनाए रखने के लिए इस नियम का कड़ाई से पालन किया जाता है. हरिजन्मकाले: प्रभु के प्राकट्य और जन्मोत्सव का पावन दिन भगवान राम का जन्मोत्सव (रामनवमी), भगवान कृष्ण की जन्मतिथि (जन्माष्टमी), इसके साथ ही नरसिंह जयंती, हनुमान जयंती और जानकी नवमी जैसे पावन अवसर 'हरिजन्मकाले' की श्रेणी में आते हैं. यह वो समय होता है जब साक्षात ईश्वर ने पृथ्वी पर अवतार लिया था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन देवी-देवताओं के जन्मोत्सव के दिन दोपहर या मध्यरात्रि तक उपवास रखना चाहिए. इस दिन अन्न खाने के बजाय शुद्ध सात्विक फलाहार या दूध का सेवन करना अधिक शुभ माना जाता है. द्विजभोजने: संत और ब्राह्मण की थाली से पहले स्वयं का त्याग भारतीय संस्कृति में अतिथि और संतों को साक्षात नारायण का रूप माना गया है. धर्म शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि यदि आपके द्वार पर कोई साधु, संत, ब्राह्मण या अतिथि खाने के लिए आमंत्रित है, तो द्विजभोजने के नियम का पालन करें. इसका सीधा अर्थ है कि जब तक आए हुए अतिथि आदरपूर्वक भोजन न कर लें, तब तक घर के सदस्यों को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. उनके भोजन करने से पहले खुद पेट भर लेना मर्यादा के खिलाफ और दोषपूर्ण माना गया है. प्राणप्रयाणे: शोक और सूतक का समय मानव जीवन का सबसे अंतिम और कड़वा सच मृत्यु है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब परिवार में या किसी करीबी के यहां किसी के प्राण चले जाए तो वह समय बेहद शोक और संयम का होता है. किसी की मृत्यु होने पर या अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने तक घर में चूल्हा जलाना या अन्न ग्रहण करना पूरी तरह वर्जित माना गया है. यह समय सूतक का होता है और मानसिक रूप से गहरे शोक का, इसलिए इस दौरान भोजन से दूरी बनाकर मृतक के प्रति सम्मान और संवेदना प्रकट करनी चाहिए.  

गर्मी से राहत! छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में तापमान में गिरावट, रायपुर में आंधी-बारिश की चेतावनी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में नौपता के बीच बारिश और बदली ने लोगों को राहत दी है. रायपुर, राजनांदगांव और बिलासपुर जैसे प्रमुख शहरों के तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से नीचे आ गए हैं. राजधानी में रविवार को आकाश मेघमय रहने और बारिश की संभावना जताई गई है. प्रदेश के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ अंधड़ और बिजली गिरने होने के आसार हैं.  प्रदेश में शनिवार को एक दो स्थानों पर हल्की से माध्यम बारिश हुई. सबसे ज्यादा तापमान दुर्ग में 42.6 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम पेंड्रा रोड में 24.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ. मौसम विज्ञानी एच.पी. चंद्रा के मुताबिक, एक द्रोणिका मध्य पाकिस्तान से अंदरुनी उड़ीसा तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर छत्तीसगढ़ होते हुए 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर 1.5 किलोमीटर से 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है. एक पश्चिमी विक्षोभ 78 डिग्री पूर्व में स्थित है. प्रदेश में बंगाल की खाड़ी से नमी का आगमन लगातार जारी है. आंधी-बारिश से अधिकतम तापमान में हल्की गिरावट संभावित है.  रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? मौसम विभाग ने रायपुर शहर के लिए पूर्वानुमान जारी किया है. रविवार को आकाश आंशिक मेघमय रहने की सम्भावना जताई गई है. आंधी और वर्षा की संभावना है. दिन में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस और रात के वक्त तापमान 28 डिग्री के आसपास रह सकता है.

फ्रिज में ये गलती मत करो! वरना रुकेगी बरकत

अमूमन हम सब फ्रिज को सही दिशा में रखने के वास्तु नियमों के बारे में जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि फ्रिज के अंदर की व्यवस्था भी आपके घर की सुख-समृद्धि को प्रभावित करती है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, फ्रिज के भीतर अलग-अलग शेल्फ पर चीजों को सही ढंग से न रखने पर ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है. चूंकि फ्रिज में जल और अग्नि दोनों के तत्व होते हैं, इसलिए इसके अंदर की आंतरिक दिशाओं और शेल्फ का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार फ्रिज के किस शेल्फ पर क्या रखना सबसे शुभ माना जाता है. 1.  सबसे ऊपरी हिस्से में क्या रखें फ्रिज का सबसे ऊपरी हिस्सा (फ्रीजर के ठीक नीचे वाला शेल्फ) सबसे ठंडा और ऊंचाई पर होता है. वास्तु में ऊंचाई को गरिमा और पवित्रता से जोड़ा जाता है. क्या रखें: यहां दूध, दही, पनीर, मक्खन और शुद्ध घी (यदि फ्रिज में रखते हों) जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स रखने चाहिए. दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है, इसे हमेशा ऊंचे और साफ शेल्फ पर ही स्थान दें. वास्तु नियम: इस शेल्फ पर कभी भी बचा हुआ बासी खाना या मांसाहारी चीजें न रखें. 2. बीच के शेल्फ फ्रिज का बीच का हिस्सा घर के मध्य भाग (ब्रह्मस्थान) की तरह संतुलन का प्रतीक होता है. क्या रखें: यहाँ आप रात का बचा हुआ पका हुआ भोजन (ढककर), गूंथा हुआ आटा, दालें या बची हुई मिठाइयां रख सकते हैं. वास्तु नियम: ध्यान रखें कि पका हुआ भोजन कभी भी खुला न छूटे. वास्तु के अनुसार, भोजन को खुला छोड़ने से उसमें नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है, जो सेहत पर असर डालती है. साथ ही, बासी भोजन को 24 घंटे से ज्यादा फ्रिज में न रखें, क्योंकि यह राहु के प्रभाव को बढ़ाता है. 3. सबसे निचला शेल्फ या बास्केट फ्रिज का सबसे निचला हिस्सा जमीन यानी पृथ्वी तत्व से जुड़ा माना जाता है. क्या रखें: प्रकृति से मिलने वाली चीजें जैसे ताजी हरी सब्जियां, जड़ वाली सब्जियां (गाजर, मूली) और फल हमेशा इसी हिस्से में रखने चाहिए.  पृथ्वी तत्व इन चीजों की प्राकृतिक सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखता है. वास्तु नियम: इस बास्केट में कभी भी सड़ रहे फल या गल चुकी सब्जियां जमा न होने दें. सूखी हुई धनिया पत्ती या सड़े हुए नींबू तुरंत फेंक दें, वरना यह घर में बुध और राहु का दोष पैदा करता है, जिससे बरकत रुकती है. 4. फ्रिज का दरवाजा (Refrigerator Door): फ्रिज के दरवाजे में वेंटिलेशन और तापमान में थोड़ा बदलाव होता रहता है, इसलिए यहाँ केवल वही चीजें रखें जो जल्दी खराब नहीं होतीं. क्या रखें: पानी की बोतलें, जूस, नींबू, अदरक, सॉस और अचार जैसी चीजें दरवाजे की शेल्फ में रखें. वास्तु नियम: पानी की बोतलों को हमेशा साफ रखें. अगर आप फ्रिज में सॉस या अचार की बोतलें रख रहे हैं, तो ध्यान दें कि उनकी एक्सपायरी डेट न निकल चुकी हो. बंद या खराब हो चुकी चीजें दरवाजे पर रखने से घर के मुख्य सदस्यों के कामों में रुकावटें आती हैं. फ्रिज के अंदर की एनर्जी को पॉजिटिव रखने के नियम कांच के बर्तनों का इस्तेमाल: प्लास्टिक के डिब्बों की जगह फ्रिज के अंदर खाना रखने के लिए कांच (Glass) या स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करें. वास्तु में कांच को राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव को सोखने वाला माना गया है. 80-20 का नियम: फ्रिज को कभी भी ऊपर तक खचाखच न भरें. अंदर कम से कम 20% जगह हवा के सर्कुलेशन और ऊर्जा के प्रवाह के लिए खाली छोड़नी चाहिए. ठूंस-ठूंस कर भरा फ्रिज मानसिक तनाव और भारीपन का कारण बनता

हीटवेव के बीच पीएम मोदी ने दिया स्वास्थ्य मंत्र, बोले- पानी पीते रहें और आम पन्ना-लस्सी का लें आनंद

नई दिल्ली  भारत के विभिन्न हिस्सों में तापमान में भारी बढ़ोतरी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया है कि वे यथासंभव अधिक से अधिक सावधानियां बरतें। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ' मन की बात ' कार्यक्रम के 134वें एपिसोड में कहा, 'इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है। तेज धूप और गर्म हवाएं, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पानी पीते रहिए। धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें। इस दिशा में सरकार के अलग-अलग विभागों ने जो गाइडलाइन जारी की हैं, वो भी भूलिएगा नहीं।' अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है। आपने भी देखा होगा कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है, रसोई का प्रकार बदल जाता है। कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं कच्चे आम उबलने लगते हैं और फिर देसी पेय का दौर शुरू होता है। उन्होंने कहा, 'भारत के पारंपरिक ग्रीष्मकालीन पेय देश के विभिन्न क्षेत्रों की रीति-रिवाजों और संस्कृतियों में गहराई से रचे-बसे हैं। हर पेय एक अनूठी कहानी कहता है, जो मिलकर भारत की जीवंत विविधता को प्रदर्शित करते हैं और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को सुदृढ़ करते हैं।' प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा, 'देसी पेय से आप भी परिचित हैं। अगर आप उत्तर भारत में जाएंगे तो काफी जगह आपको मिलेगा आम पन्ना, कच्चे आम का स्वाद और गर्मी से राहत भी। पंजाब-हरियाणा जाइए तो बड़े गिलास वाली लस्सी मिल जाएगी। राजस्थान और गुजरात में छाछ, जैसे हर खाने की साथी बन जाती है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू के शरबत की बात है, जिससे पेट भी भरता है और ताकत भी मिलती है।' इस दौरान पीएम मोदी ने कोंकण और गोवा के कोकम शरबत, दक्षिण भारत के पानकम, सम्बारम और ओडिशा के बेल पना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ पेय नहीं, बल्कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है। देशवासियों के नाम अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि आप भी गर्मी के दौरान देसी पेजयलों का खूब आनंद लीजिए।

गिरिबाला सिंह से CBI के तीखे सवाल, शरीर पर चोट के निशानों को लेकर साधी चुप्पी

भोपाल. मॉडल और एक्ट्रेस त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह से पूछताछ का दायरा और तेज कर दिया है। 5 दिन की सीबीआई रिमांड के दौरान जांच एजेंसी कथित क्राइम सीन से छेड़छाड़, सीसीटीवी फुटेज, व्हाट्सएप चैट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों के निशानों को लेकर लगातार सवाल पूछ रही है। इन तीखे सवालों के चक्रव्यूह में घिरीं पूर्व जज पूछताछ के दौरान काफी असहज नजर आईं और उन्होंने बेचैनी की शिकायत भी की है। FIR के आरोपों पर स्पष्टीकरण और चोट के निशानों पर फोकस सीबीआई ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में पूर्व जज की भूमिका और घटनास्थल की परिस्थितियों को लेकर अपनी जांच केंद्रित की है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: गंभीर आरोपों पर जवाब तलब: सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने गिरिबाला सिंह के सामने दर्ज एफआईआर (FIR) में लगाए गए आरोपों को रखकर स्पष्टीकरण मांगा है। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि शिकायतकर्ता पक्ष (त्विषा के परिजनों) द्वारा लगाए गए आरोपों के बावजूद उनकी भूमिका को सीमित क्यों माना जाए। शरीर पर मिली चोटों का सस्पेंस: पूछताछ के दौरान सीबीआई ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों का हवाला देते हुए सीधा सवाल किया कि त्विषा के शरीर पर मिले मृत्यु-पूर्व चोटों के निशान कैसे आए? एजेंसी ने यह भी पूछा कि घटना के समय परिवार के कौन-कौन से सदस्य घर में मौजूद थे और क्या ये चोटें सामान्य परिस्थितियों में लग सकती थीं? इन सवालों पर गिरिबाला सिंह अधिकांश समय पूरी तरह खामोश रहीं। डिजिटल साक्ष्य बने जांच का आधार; रिश्तों की कड़वाहट खंगाल रही CBI जांच एजेंसी अब केवल बयानों पर निर्भर न रहकर तकनीकी और वैज्ञानिक सबूतों के जरिए सच का पता लगाने में जुटी है: व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड: सीबीआई ने दोनों पक्षों के बीच हुए व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट्स को पूछताछ का प्रमुख आधार बनाया है। इसके जरिए शादी के बाद त्विषा और उसके ससुराल पक्ष के रिश्तों, कथित विवादों तथा मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के आरोपों पर बारीकी से जानकारी जुटाई जा रही है। गर्भावस्था को लेकर दबाव के आरोप: त्विषा की प्रेग्नेंसी को लेकर परिवार में हुई चर्चाओं और उस पर कथित रूप से डाले जा रहे मानसिक दबाव के आरोपों को लेकर भी पूर्व जज से कई तीखे सवाल पूछे गए हैं। पूर्व जज का दावा: गर्भपात के बाद डिप्रेशन में थीं त्विषा; जांच जारी पूछताछ के दौरान पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने खुद पर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने मामले में एक नई थ्योरी सामने रखते हुए दावा किया है कि गर्भपात (मिसकैरेज) होने के बाद त्विषा गहरे अवसाद (डिप्रेशन) की स्थिति में आ गई थीं, जिसके कारण संभवतः उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया होगा। सीबीआई पूर्व जज द्वारा किए गए इस डिप्रेशन और आत्महत्या की आशंका वाले दावे को अंतिम सच नहीं मान रही है। एजेंसी अब त्विषा के पुराने मेडिकल रिकॉर्ड्स, संबंधित डॉक्टरों के बयानों और उपलब्ध फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर इस दावे की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

आज आसमान में ‘ब्लू मून’ का जादू! चूक गए तो सालों इंतजार

 आज 31 मई 2026 की शाम आसमान में एक बहुत ही खास और दुर्लभ खगोलीय नजारा दिखने वाला है, जिसे ब्लू मून कहा जा रहा है. यदि आप भी इस अनोखी घटना को देखने के लिए उत्साहित हैं, तो यहां इससे जुड़ी पूरी जानकारी जरूर जान लीजिए.. ब्लू मून क्या है? अक्सर लोगों को लगता है कि इस दिन चांद का रंग ब्लू दिखाई देगा, लेकिन यह केवल एक खगोलीय घटना है. जब एक ही कैलेंडर महीने में दो पूर्णिमा पड़ती हैं, तो दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है. चूंकि मई 2026 में 1 मई और 31 मई को दो पूर्णिमा पड़ी हैं, इसलिए आज की पूर्णिमा को ब्लू मून माना जा रहा है. इसे माइक्रो मून भी कहा जा रहा है क्योंकि यह अपनी कक्षा में पृथ्वी से दूर होने के कारण आकार में सामान्य से थोड़ा छोटा प्रतीत हो सकता है. आज का चांद लाल और विशाल क्यों दिखेगा? आज आपको चाँद का रंग नारंगी या हल्का लाल दिखाई दे सकता है, जिसके पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण है: लाल रंग का रहस्य: जब चांद क्षितिज (horizon) के पास होता है, तो उसकी रोशनी को हम तक पहुंचने के लिए पृथ्वी के वायुमंडल की एक मोटी परत को पार करना पड़ता है. इस सफर में नीले रंग की छोटी तरंगें बिखर जाती हैं और केवल लाल व नारंगी रंग की लंबी तरंगें ही हमारी आंखों तक पहुंच पाती हैं. विशाल दिखने की वजह: चांद का बहुत बड़ा दिखना वास्तव में एक ऑप्टिकल इल्यूजन यानी आंखों का धोखा है. जब चांद पेड़ों, पहाड़ों या इमारतों जैसी वस्तुओं के पास होता है, तो हमारा दिमाग संदर्भ के कारण उसे बहुत बड़ा समझने लगता है. असल में, इसके आकार में कोई भौतिक बदलाव नहीं होता है. भारत में कब और कैसे देखें? भारत में आज शाम सूर्यास्त के बाद, लगभग 6:30 बजे से 7:30 बजे के बीच, इसे दक्षिण-पूर्वी आकाश में देखना सबसे अच्छा रहेगा. इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए किसी महंगे टेलीस्कोप या विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है. आप इसे अपनी खुली आँखों से घर की छत या किसी खुले स्थान से देख सकते हैं. आध्यात्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा का दिन ऊर्जा से भरपूर माना जाता है. इस दिन शांति और समृद्धि के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं: चंद्रमा को अर्घ्य देना और ॐ सोमाय नमः मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है. मन की शांति के लिए ध्यान (मेडीटेशन) करना, दान करना और माता लक्ष्मी की पूजा कर उन्हें खीर का भोग लगाना अत्यंत फलदायी माना गया है.

75,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आया उल्कापिंड, न्यू इंग्लैंड में गूंजी जोरदार सोनिक बूम

 नई दिल्ली  शनिवार दोपहर पूर्वोत्तर अमेरिका के आसमान में एक विशाल उल्कापिंड के फटने से जोरदार धमाका हुआ। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस विस्फोट से पैदा हुई सोनिक बूम की ताकत करीब 300 टन टीएनटी के बराबर थी। इस जोरदार आवाज और कंपन ने कई राज्यों के निवासियों को चौंका दिया। यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर 2:06 बजे हुई। चमकीला उल्कापिंड उत्तर-पूर्वी मैसाचुसेट्स और दक्षिण-पूर्वी न्यू हैम्पशायर के ऊपर आसमान में ही टूटकर बिखर गया। इसके फटने से इतनी तेज आवाज हुई कि पूरे न्यू इंग्लैंड क्षेत्र में गूंज सुनाई दी और कई इलाकों में इमारतें तक हिल गईं। नासा की डिप्टी न्यूज चीफ जेनिफर डोरेन ने कहा कि यह उल्कापिंड फिलहाल सक्रिय किसी भी उल्का बौछार का हिस्सा नहीं था। यह एक प्राकृतिक खगोलीय पिंड था, न कि अंतरिक्ष का कचरा या किसी सैटेलाइट के वापस धरती पर गिरने का मामला। इसके टूटने से करीब 300 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकली, जिससे यह भयंकर आवाज पैदा हुई। 75,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार नासा के आंकड़ों के मुताबिक, जब इस उल्कापिंड ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, तब इसकी रफ्तार करीब 1,20,700 किलोमीटर प्रति घंटा थी। जमीन से लगभग 64 किलोमीटर ऊपर आते ही यह भीषण दबाव के कारण टुकड़ों में बंट गया। अमेरिकन मीटियोर सोसाइटी ने बताया कि यह खगोलीय चट्टान लगभग तीन फीट चौड़ी थी। इसने बोस्टन के उत्तर में, मैसाचुसेट्स और न्यू हैम्पशायर की सीमा के पास वायुमंडल में प्रवेश किया। इस घटना की गवाही देने वाले लोगों की रिपोर्ट दक्षिण में डेलावेयर से लेकर उत्तर में मॉन्ट्रियल तक से मिली हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने दिन के उजाले में एक बेहद चमकदार आग का गोला देखने, तेज विस्फोट की आवाज सुनने और जमीन हिलने का दावा किया। आम उल्कापिंडों से काफी बड़ा था आकार अमेरिकन मीटियोर सोसाइटी के प्रोग्राम मॉनिटर रॉबर्ट लंसफोर्ड ने कहा कि यह घटना आम तौर पर दिखने वाले उल्कापिंडों से बहुत बड़ी थी। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से एक सामान्य फायरबॉल से बड़ा था। लंसफोर्ड के अनुसार, इस बात की संभावना बहुत कम है कि इसका कोई भी हिस्सा जमीन तक पहुंचा हो। उन्होंने कहा कि यह जानने के लिए कि क्या इसका कोई टुकड़ा जमीन पर गिरा, हमें इसके रास्ते और गति की और अधिक जानकारी चाहिए होगी। लेकिन अगर यह पूरी तरह हवा में नहीं जला होगा, तो इसका मलबा समुद्र में गिरा होगा। वैसे, अधिकांश उल्कापिंड जमीन पर पहुंचने से पहले ही जलकर राख हो जाते हैं। सोनिक बूम था वजह विस्फोट की भयानक आवाज के बाद घबराए स्थानीय लोगों ने इमारतों के हिलने की शिकायत पुलिस और यूएस जियोलॉजिकल सर्वे से की। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए कई वीडियो में लगातार दो तेज धमाकों की आवाजें सुनी जा सकती हैं, हालांकि जमीन पर नुकसान या आग लगने का कोई निशान नहीं मिला। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने पुष्टि की कि उन्हें क्षेत्र भर के निवासियों से कई शिकायतें मिली हैं, क्या आपने इसे महसूस किया? हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि कोई भूकंपीय गतिविधि का पता नहीं चला, जिससे भूकंप को इस कंपन का कारण होने की संभावना से इनकार किया जा सकता है। नासा ने भी अंत में दोहराया कि यह महज एक प्राकृतिक अंतरिक्षीय घटना थी।

तंबाकू सेवन घटा, लेकिन बढ़ा अल्कोहल का चलन; बिहार के स्वास्थ्य सर्वे ने दिखाई नई तस्वीर

पटना शराबबंदी वाले राज्य बिहार में शराब पीने वाले पुरुषों की संख्या बढ़ गई है। ये चौंकाने वाला खुलासा एक सर्वे में हुआ है। सर्वे में यह भी पता चला है कि बिहार में तंबाकू से भी ज्यादा पुरुष अल्कोहल ले रहे हैं। नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस), 2024 – 25 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या में कमी हुई जबकि अल्कोहल का सेवन करने वाले पुरुषों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 15 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में तंबाकू सेवन में एक प्रतिशत की कमी आई है। पहले 5 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू सेवन करती थी जो कि अब कम होकर चार प्रतिशत हो गई है। वहीं, 48.9 प्रतिशत पुरुषों की जगह अब 45.8 प्रतिशत पुरुष तंबाकू सेवन कर रहे हैं। जबकि, अल्कोहल का सेवन करने वाले पुरुषों की संख्या 15.4 प्रतिशत से बढ़कर 16.5 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, महिलाओं में अल्कोहल सेवन का प्रतिशत पूर्ववत 0.4 प्रतिशत स्थिर है। सात फीसदी से अधिक ग्रामीण मधुमेह की चपेट में सर्वे में पता चला है कि महिला एवं पुरुषों को मिलाकर बिहार के ग्रामीण इलाकों में सात फीसदी से अधिक मधुमेह से पीड़ित हैं। बात मधुमेह की करें तो राज्य स्तर पर महिलाओं के मुकाबले पुरुष मधुमेह से अधिक पीड़ित हैं। हालांकि, पिछले स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुकाबले में मधुमेह की समस्या में कमी दर्ज की गई है। नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस), 2024 – 25 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में संस्थागत प्रसव, स्तनपान सहित अन्य मानकों में सुधार दर्ज किया गया है। एनएफएचएस की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 15 साल एवं उससे अधिक उम्र की महिलाओं में 6.2 प्रतिशत और पुरुष 8 प्रतिशत पुरुषों में 140 से 160 मिलीग्राम तक मधुमेह की शिकायत पाई गई है। जबकि, शहरी क्षेत्रों में समान रूप से 7.3 प्रतिशत महिलाएं और इतने ही पुरुष मधुमेह से पीड़ित हैं। वहीं, राज्य स्तर पर जहां 7.9 प्रतिशत पुरुष मधुमेह से पीड़ित हैं तो वहीं 6.3 महिलाएं मधुमेह से पीड़ित हैं। राज्य स्तर पर पिछले सर्वेक्षण में पुरुषों में मधुमेह 8.3 प्रतिशत तो 6.4 प्रतिशत महिलाओं में मधुमेह पाया गया था। राज्य में संस्थागत प्रसव 76.2% से बढ़कर 81.1 फीसदी एनएफएचएस की नई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में संस्थागत प्रसव 76.2% से बढ़कर 81.1% हो गई है। शहरी क्षेत्रों में 89.9% तो ग्रामीण क्षेत्रों में 80.2 प्रतिशत संस्थागत प्रसव हो रहा है। इनमें सरकारी अस्पतालों में 57.5% हो रहे हैं। प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी 84% प्रसव में मौजूद रहते हैं। वहीं, ऑपरेशन से प्रसव में बढ़ोतरी हुई है। यह 9.7% से बढ़कर 13.2% हो गई है। ऑपरेशन से प्रसव निजी क्षेत्र में बढ़ने (39.6% से बढ़कर 49.3% ) का संकेत रिपोर्ट में है जबकि सरकारी अस्पतालों में कम (3.6% से कम होकर 2.7 %) हुआ है बच्चों के स्वास्थ्य में गुणात्मक परिवर्तन की दृष्टि से राज्य में स्तनपान में बढ़ोतरी हुई है। तीन साल तक के बच्चों में जन्म के पहले एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने वाली महिलाओं की संख्या 31.1% से बढ़कर 51.9% हो गई है। इसी प्रकार, राज्य में 98% लोगों के घरों में बिजली की उपलब्धता, 99.8% लोगों के घरों में पेयजल की उपलब्धता हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 27.1 फीसदी महिलाएं कम वजन की शिकार बिहार के ग्रामीण इलाकों में 27.1 फीसदी महिलाएं कम वजन की शिकार हैं। सूबे में चार से एक व्यक्ति दुबलेपन का शिकार है। रिपोर्ट बताती है कि जहां ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अंडर वेट हैं, वहीं शहरी क्षेत्र में 30 फीसदी महिलाएं और 29.9 फीसदी पुरुष मोटापे के शिकार हैं। इसके अलावा बिहार में चार में से एक व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स मानक से कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से ग्रामीण क्षेत्र लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। वेलनेस सेंटर पर मरीजों के जाने से उनका इलाज हो रहा है। बिहार में 12 हजार वेलेनस सेंटर चलते हैं। मुजफ्फरपुर में 619 वेलेनस सेंटर चल रहे हैं। वेलेनस सेंटर के संचालन की निगरानी स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था जपाइयो कर रही है।

12 अगस्त का सूर्य ग्रहण: इन 4 राशियों पर टूटेगा असर!

 साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है. विज्ञान और ज्योतिष दोनों ही दृष्टिकोण से यह एक बेहद महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है. जब ब्रह्मांड में चक्कर लगाते-लगाते चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच में आ जाता है, तो वह सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देता है. इस स्थिति में चंद्रमा की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है, जिसे हम सूर्य ग्रहण कहते हैं. यह घटना हमेशा अमावस्या के दिन ही घटित होती है. यह सूर्य ग्रहण उत्तरी अमेरिका, आइसलैंड, ग्रीनलैंड और यूरोप के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. भारत में यह ग्रहण न दिखने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. लेकिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ब्रह्मांड में होने वाली इस बड़ी हलचल का असर सभी 12 राशियों पर जरूर पड़ेगा. किस राशि में लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण? यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से कर्क राशि में लगने जा रहा है. इस कारण चार विशेष राशियों मेष, कर्क, तुला और मकर के जातकों को इस अवधि में बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि उन्हें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कुछ बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान मेष राशि (Aries) मेष राशि वाले जातकों के लिए यह ग्रहण पारिवारिक मोर्चे पर परेशानियां लेकर आ सकता है. घर में बेवजह की कलह या माताजी के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं काफी बढ़ सकती हैं. यदि आप संपत्ति या भूमि से जुड़े किसी विवाद में उलझे हैं, तो इस समय बहुत सावधानी से कदम बढ़ाएं. अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें और किसी भी विकट परिस्थिति में धैर्य से काम लें. कर्क राशि (Cancer) चूंकि यह सूर्य ग्रहण इसी राशि में लगने जा रहा है, इसलिए कर्क राशि के जातकों को सबसे अधिक संभलकर रहने की आवश्यकता है. इस दौरान आपको मानसिक तनाव, भ्रम और आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है. सेहत के मामले में लापरवाही बिल्कुल न बरतें, अन्यथा गंभीर बीमारियाँ या दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहेगी. करियर और पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला बहुत सोच-समझकर और पूरे आत्मविश्वास के साथ लें. तुला राशि (Libra) तुला राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में विशेष रूप से सतर्क रहना होगा. इस अवधि में नौकरी छूटने की प्रबल संभावना बन रही है या फिर ऑफिस में किसी बात को लेकर अपमान का सामना करना पड़ सकता है. पैसों के लेनदेन और किसी भी तरह के निवेश से अभी दूर रहें, अन्यथा भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि वाले जातकों के निजी और व्यावसायिक जीवन पर इस ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है. वैवाहिक जीवन में तनाव और जीवनसाथी के साथ मतभेद बढ़ने की आशंका है. इसके साथ ही, यदि आप पार्टनरशिप (साझेदारी) में कोई व्यापार कर रहे हैं, तो इस दौरान बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है. ऐसे में धैर्य और शांति बनाए रखना ही एकमात्र बचाव है. इन राशियों के लिए वरदान साबित होगा यह ग्रहण यह सूर्य ग्रहण हर राशि के लिए मुश्किलें खड़ी नहीं करेगा. ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, मिथुन, कन्या और मीन राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण भाग्य के बंद दरवाजे खोलने वाला साबित हो सकता है. इन राशि के लोगों को करियर में बेहतरीन सुनहरे अवसर, व्यापार में मनमुताबिक वृद्धि, लंबे समय से फंसे हुए धन की वापसी और कार्यस्थल पर उच्च पद-प्रतिष्ठा व सम्मान मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं.