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दिग्विजय सिंह के बयान से बढ़ा सियासी विवाद, BJP ने साधा निशाना

 भोपाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता से कहीं ज्यादा खतरनाक बहुसंख्यक सांप्रदायिकता होती है। भोपाल में बुधवार को पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बयान दिया, जिसके बाद राजनीति गरमा गई है। नेहरू के विचारों का हवाला देकर कही यह बात नेहरू के विचारों का हवाला देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू मानते थे कि सांप्रदायिकता समाज में नफरत फैलाती है। उन्होंने आगे कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग की सांप्रदायिकता से ज्यादा खतरनाक बहुसंख्यक सांप्रदायिकता होती है और आज देश के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है।  

24 परगना से मालदा तक कार्रवाई, बकरीद से पहले घुसपैठियों पर शिकंजा

कलकत्ता एक ओर जहां पूरे देश में बकरीद की तैयारियां जोरों पर हैं तो दूसरी ओर बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों में हलचल मची हुई है. कई स्टेट बॉर्डर के पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े ग्रुप इकट्ठा होने लगे हैं जो अपने वतन वापस जा रहे हैं।  अपने वतन लौट रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासी            एक बांग्लादेशी प्रवासी महिला रोजीना बीबी ने बताया कि वो डरी हुई हैं. उन्हें कहा, 'हम सात साल पहले अपने पति सैदुल के कैंसर के इलाज के लिए भारत आए थे, क्योंकि इलाज की प्रक्रिया लंबी चली, इसलिए परिवार गैर-कानूनी तौर पर यहीं रह गया. लेकिन नए कानूनी आदेश ने पूरी स्थिति ही बदल दी है. नए निर्देशों के तहत सरकारी कार्रवाई के डर से उनके मकान मालिक ने हाल ही में उनसे घर खाली करने को कहा जिससे उनके पास वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।    बंगाल सरकार का सख्त एक्शन पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'बांग्लादेशी यहां क्यों रहें? वो केंद्र सरकार द्वारा दी गई हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. वो गरीबों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं से फायदा उठा रहे हैं. उन्हें नागरिकता देकर, वोटर आईडी और आधार कार्ड जारी करके और मतदाता के रूप में पंजीकृत करके, यहां उनके वोट मांगे जा रहे थे… ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें अलग किया जाएगा. गृह मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उन्हें वापस भेज दिया जाएगा. बेहतर होगा यदि वो स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं… अन्यथा सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।  हकीमपुर चेक पॉइंट पर प्रवासियों की भीड़                     उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर, मंगलवार सुबह सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते है।  दलाल की मदद से आए भारत              हकीमपुर चेकपॉइंट के पास अपने दो बच्चों के साथ बैठीं 36 वर्षीय सबीना खातून ने बताया कि सालों पहले वह दलालों के जरिए गैर-कानूनी तौर पर भारत में दाखिल हुई थी और बाद में एक भारतीय नागरिक से शादी कर ली. और उसने अपने पति के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके RG कर अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया था. अब नए कानून ने उन्हें एक दिल तोड़ने वाले मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. क्योंकि उसका पति एक भारतीय नागरिक है, इसलिए वह उनके साथ नहीं जा सकता. सबीना और उसके बेबस बच्चे सीमा पर अकेले इंतजार कर रहे हैं. "सतखिरा में मेरा परिवार तो है, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोबारा कैसे मिल पाएंगे," सबीना अपने बच्चों की ओर देखते हुए आंखों में आंसू भरकर कहती है. उसका सवाल है, 'क्या मेरे बच्चे कभी अपने पिता को दोबारा देख पाएंगे?' बॉर्डर चेकपॉइंट के पास जमा हुई भारी भीड़ बंगाल में जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है. इसके साथ ही होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचती नजर आ रही है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।  1. अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़े निर्देश दिए हैं. मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में 'होल्डिंग सेंटर' बनाए गए हैं. पकड़े गए संदिग्ध घुसपैठियों को जेल भेजने के बजाय 30 दिनों तक इन सेंटर्स में रखकर उनकी पहचान और बायोमेट्रिक जांच की जाएगी. इसके बाद उन्हें बीएसएफ (BSF) को सौंपकर उनके देश वापस भेजा जाएगा. डर के कारण कई घुसपैठिए वापस बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे हैं।  2. सीएए (CAA) के तहत नागरिकता: बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए सीएए (CAA) सेंटर बनाए गए हैं, जहाँ बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं. इन सेंटर्स के माध्यम से उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।  3. 5 रुपये में 'माछ-भात' योजना और नई पाबंदियां: चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करते हुए, नई सरकार ने पूरे राज्य में 400 कैंटीन खोलने का फैसला किया है, जहाँ 5 रुपये में मछली-चावल (माछ-भात) मिलेगा. इसके अलावा, स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के 1 किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।  4. टीएमसी (TMC) नेताओं पर जनता का आक्रोश: वसूली, भ्रष्टाचार और बाहुबल के आरोपों के चलते टीएमसी नेताओं के खिलाफ आम लोगों में भारी गुस्सा है. कुछ नेताओं के घरों से भारी मात्रा में कैश मिला है, तो कई नेताओं को जनता द्वारा पीटे जाने और कोर्ट में 'चोर-चोर' के नारे लगने की खबरें हैं।  5. टीएमसी में भारी टूट और बगावत की अटकलें: टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार और पार्टी के दो विधायक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए, जिससे टीएमसी में बड़ी बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि 60 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं और टीएमसी के 12 से 20 सांसद एक साथ बीजेपी में जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से बचा जा सके।  जो CAA के दायरे से बाहर हैं, उन्हें माना जाएगा घुसपैठिया     बीएसएफ के सीनियर अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक मीटिंग में बोलते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे से बाहर हैं, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा. उन्हें पुलिस गिरफ्तार करके बीएसएफ को सौंप देगी.  इसके साथ ही राज्य सरकार ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिससे संदिग्ध अवैध प्रवासियों को कुछ वक्त के लिए वहां रखा जा सके और उन विदेशी कैदियों को रिहा किया जा सके, जो देश-निकाला या अपने देश वापसी का इंतजार कर रहे हैं। 

नई दिल्ली में अवशेषों का 29 मई को सार्वजनिक दर्शन, 31 मई को मंगोलिया में ऐतिहासिक प्रदर्शनी का होगा आयोजन

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल पर सांची स्तूप से भगवान बुद्ध के परम शिष्य अरिहंत, सारिपुत्र एवं महामोद्ल्यायन के पवित्र अवशेष सार्वजनिक दर्शन के लिये मंगोलिया भेजे जा रहे हैं। राजाभोज विमान तल पर गुरुवार, 28 मई को इन पवित्र अवशेषों को राजकीय सम्मान के साथ विशेष विमान द्वारा नई दिल्ली के लिए रवाना किया जाएगा। पहल संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार), पर्यटन और संस्कृति, महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया और इंटरनेशनल बौद्ध कन्फेडरेशन (IBC) के संयुक्त समन्वय से आयोजित की जा रही है। इस ऐतिहासिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करना, साझा आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करना और बौद्ध तीर्थ पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है। यह पहल केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली में अवशेषों का सार्वजनिक दर्शन अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में 29 मई को पवित्र अवशेषों को सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा जाएगा। इस अवसर पर ‘महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया’ के पूज्य भिक्षु पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से 30 मई को मंगोलिया के लिए होंगे रवाना पवित्र अवशेषों को 30 मई के दिन भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के माध्यम से इन पवित्र अवशेषों को मंगोलिया के लिए रवाना किया जाएगा।इस पवित्र यात्रा के दौरान धार्मिक परंपराओं की पवित्रता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये मध्यप्रदेश पर्यटन और महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया का एक प्रतिनिधि दल अवशेषों के साथ रहेगा। मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में 31 मई को पवित्र अवशेषों का होगा सार्वजनिक दर्शन मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में 31 मई 2026 से शुरू होने वाली यह प्रदर्शनी अनुमानित रूप से 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं, भिक्षुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगी। इससे भारत के बौद्ध तीर्थ सर्किट, विशेषकर सांची जैसे स्थलों में वैश्विक रुचि बढ़ेगी और मंगोलिया की अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ाव भी और मजबूत होगा। भारत की बौद्ध विरासत को मंगोलिया जैसे बौद्ध परंपरा से जुड़े देश में ले जाकर यह भारत की “बौद्ध धर्म की जन्मभूमि” के रूप में भूमिका को और सशक्त करती है तथा अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा देती है। मध्यप्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर मध्यप्रदेश के लिए यह वैश्विक मंच पर अपने बौद्ध सर्किट को स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिससे विदेशी पर्यटकों की संख्या, प्रवास अवधि और सांस्कृतिक सहभागिता में वृद्धि होगी। यह पहल दोनों देशों के मठों, सांस्कृतिक संस्थानों और संग्रहालयों के बीच निरंतर सहयोग के नए मार्ग भी खोलेगी, जिससे साझा विरासत पर आधारित दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंध विकसित होंगे। सांची स्तूप: यूनेस्को विश्व धरोहर और आस्था का वैश्विक केंद्र यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'सांची स्तूप' विश्व के सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन बौद्ध स्थलों में से एक है।यहाँ संरक्षित पवित्र अवशेषों को भगवान बुद्ध के प्रतीक स्वरूप अत्यंत श्रद्धा और पूजनीय भाव से देखा जाता है। भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्य सारिपुत्र और महामौद्गल्यायन थे, जिन्हें बुद्ध का "अग्र युग्म" माना जाता था। सारिपुत्र को प्रज्ञा (बुद्धिमत्ता) में और मौद्गल्यायन को अलौकिक शक्तियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। दोनों ही शिष्य बौद्ध संघ के अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ थे और उन्होंने धम्म के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई।इनकी शिक्षाएँ आज भी बौद्ध दर्शन और साधना परंपरा में अत्यंत सम्मान के साथ स्मरण की जाती हैं।विशेष बात यह है कि सांची के 30 किमी के दायरे में कई ऐसे महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल मौजूद हैं, जो भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की गूंज आज भी संजोए हुए हैं।  

HDFC Bank पर बढ़ा संकट! ₹45 करोड़ ट्रांजैक्शन मामले की जांच से शेयर बाजार में मचा हड़कंप

मुंबई भारत के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC (HDFC Bank) को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आने के बाद शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। बुधवार को बैंक के शेयर करीब 2% तक टूट गए और इंट्राडे कारोबार में ₹761 के स्तर तक पहुंच गए। गिरावट की वजह एक कथित आंतरिक जांच बताई जा रही है, जिसमें ₹45 करोड़ के भुगतान को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। यह मामला बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियमों के पालन को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। हालांकि, HDFC बैंक ने पेमेंट संबंधित गड़बड़ी की आशंकाओं और मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आइए जरा विस्तार से इस मामले की गहराई को समझते हैं।  रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Maharashtra State Road Development Corporation) यानी MSRDC से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक ने इस सरकारी एजेंसी को तय ब्याज दर से ज्यादा रिटर्न देने के लिए कथित तौर पर एक अलग व्यवस्था बनाई। कहा जा रहा है कि अतिरिक्त ब्याज सीधे खाते में देने के बजाय इसे मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया और रोड सेफ्टी कैंपेन के नाम पर कुछ वेंडर्स के जरिए भुगतान किया गया। बताया जा रहा है कि बैंक के मार्केटिंग विभाग की FY25 की इंटरनल ऑडिट के दौरान इस लेनदेन पर सवाल उठे। ऑडिट रिपोर्ट में विभाग की कार्यप्रणाली को असंतोषजनक बताया गया, जिसके बाद बैंक की ऑडिट कमेटी ने आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू करने का फैसला लिया। इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर गया कि कथित फैसलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक के CEO शशिधर जगदीशन (Sashidhar Jagdishan) उन चर्चाओं में शामिल थे, जिनमें MSRDC को अतिरिक्त रिटर्न देने के विकल्पों पर विचार हुआ था। हालांकि, अभी तक बैंक की ओर से किसी भी तरह की आधिकारिक गलती स्वीकार नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार साल 2021 में HDFC बैंक ने MSRDC के बड़े डिपॉजिट को आकर्षित करने की कोशिश की थी। उस समय बैंक सेविंग अकाउंट पर लगभग 3.5% ब्याज दे रहा था, जबकि दूसरी वित्तीय संस्थाएं 6% या उससे ज्यादा रिटर्न ऑफर कर रही थीं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि MSRDC ने लगभग 6.01% रिटर्न की मांग रखी थी, जिसके बाद बैंक के अंदर विशेष व्यवस्था तैयार की गई। बताया जा रहा है कि बैंक ने कुछ समय के लिए 4.5% तक का स्पेशल इंटरेस्ट रेट भी मंजूर किया था, लेकिन अपेक्षित डिपॉजिट नहीं आने के बाद यह व्यवस्था बंद कर दी गई। इसके बाद कथित तौर पर अतिरिक्त ब्याज को मार्केटिंग स्पेंड के जरिए एडजस्ट करने की योजना बनाई गई। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कई दस्तावेज लीगल और कंप्लायंस टीम से बिना मंजूरी के तैयार किए गए थे। साथ ही RBI के नियमों के संभावित उल्लंघन की बात भी कही गई है। नियमों के मुताबिक बैंक किसी खास ग्राहक को अलग से तय ब्याज दर नहीं दे सकते। वहीं, बैंक की एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन पॉलिसी के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है। फिलहाल, इस मामले बैंक ने खारिज कर दिया है। मामले पर बैंक का आधिकारिक बयान HDFC बैंक ने बुधवार को ₹45 करोड़ पेमेंट मामले को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। बैंक ने कहा कि उसके पास मजबूत आंतरिक निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं, जो सभी प्रक्रियाओं को तय नियमों के तहत संचालित करते हैं। बैंक के प्रवक्ता ने कहा, “हम चुनिंदा जानकारी के आधार पर लगाए गए किसी भी गलत काम या जिम्मेदारी से जुड़े आरोपों को सख्ती से खारिज करते हैं। सभी मामलों को स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संभाला जाता है और किसी भी आंतरिक समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।” बैंक की यह सफाई उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ने ₹45 करोड़ के भुगतान की औपचारिक आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू की है। शेयर परफॉर्मेंस हालिया इंटरनल जांच से जुड़ी खबरों के बाद निवेशकों में थोड़ी चिंता बढ़ी है, जिसका असर शेयर पर साफ दिखाई दिया। HDFC बैंक के शेयर में आज 27 मई 2026 दबाव देखने को मिला और NSE पर यह स्टॉक 2.22% की गिरावट के साथ ₹761.60 पर बंद हुआ। इस खबर के सामने आने के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बैंकिंग सेक्टर में भरोसा सबसे बड़ा आधार माना जाता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिर भी इस पूरे मामले ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग पारदर्शिता पर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

भ्रष्टाचार और लापरवाही पर गिरी गाज, राजस्व विभाग में सख्त कार्रवाई

पटना  बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने भ्रष्टाचार को लेकर कड़ा रुख अपना रखा रहा है। भ्रष्टाचार को लेकर नीतीश कुमार की तरह सम्राट सरकार भी जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इसी के तहत आज बुधवार को 14 अंचल अधिकारियों (सीओ) पर कार्रवाई की गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने एक साथ 14 सीओ पर एक्शन लेते हुए सस्पेंड कर दिया गया है। 14 अंचल अधिकारियों पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने लिया एक्शन मिली जानकारी के मुताबिक, मिली जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग मामलों में ये कार्रवाई की गई है। ये कार्रवाई भ्रष्टाचार के मामले में, काम में लापरवाही के मामले में, काम में अनियमितता को लेकर भी कार्रवाई की गई है। मंत्री दिलीप जायसवाल ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े 14 अंचल अधिकारियों पर कार्रवाई की है। दानापुर, पाटलिपुत्र, राघोपुर सहित 14 सीओ के खिलाफ हुई कार्रवाई मंत्री दिलीप जायसवाल ने पत्थरघट के सीओ राकेश कुमार, पाटलिपुत्र के सीओ अनुज कुमार, दानापुर के सीओ चंदन कुमार, सिसवन के सीओ पंकज कुमार, राघोपुर के अंचल अधिकारी संजीव कुमार त्रिवेदी सहित 14 सीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की है। लापरवाही और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: मंत्री दिलीप जायसवाल इस मामले पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लापरवाही और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि दो ढाई महीने तक विभाग में हड़ताल चली। इस वजह से पूरे विभाग में करीब 37 लाख आवेदन लंबित थे। जब मैंने इस विभाग का कार्य संभाला तो इसे एक चुनौती के रूप में लिया। अच्छा काम करने वालों को सम्मानित किया जाएगा: दिलीप जायसवाल दिलीप जायसवाल ने कहा कि हम सीओ के कामों की समीक्षा कर रहे हैं। जो अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। और जो काम में लापरवाही कर रहे हैं, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन पुलों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

रायपुर लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने आज सेतु परिक्षेत्र के अधिकारियों की बैठक लेकर प्रदेशभर में निर्माणाधीन पुलों, रेलवे ओवरब्रिजेस और फ्लाईओवर्स के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विभागीय मुख्यालय निर्माण भवन में आयोजित बैठक में नागरिकों की सुविधा, बारहमासी संपर्क, तेज और सुव्यवस्थित यातायात के लिए पुलों, रेलवे ओवरब्रिजेस और फ्लाईओवर्स के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने इनके प्रस्ताव और कार्ययोजना तैयार करते समय यातायात के दबाव, दोनों ओर की सड़कों, तथा आसपास स्थित वर्तमान पुलों व फ्लाईओवर्स के साथ ही भविष्य की जरुरतों का भी ध्यान रखने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी और सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता भी एस.के. कोरी भी बैठक में मौजूद थे। सभी सेतु संभागों के अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता और अनुविभागीय अभियंता भी बैठक में उपस्थित थे। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में स्वीकृत कार्यों के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया मिशन मोड में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने मैदानी स्तर पर वन व्यपवर्तन, भू-अर्जन और इलेक्ट्रिक पोल शिफ्टिंग के लंबित मामलों से यथासमय शासन को अवगत कराने को कहा, जिससे इनके निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर से सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त होने के बाद तकनीकी स्वीकृति, भू-अर्जन और निविदा की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से तेजी से पूर्ण कर कार्यारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों के लिए अर्जित भूमि का तत्काल नामांतरण भी कराने को कहा। विभागीय सचिव ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 और पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत कार्यों की प्राथमिकता सूची तैयार कर 10 जून तक भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने 31 जुलाई तक इन सभी कार्यो के प्राक्कलन भी भेजने को कहा। उन्होंने अप्रारंभ कार्यों की निविदा प्रक्रिया आगामी एक-दो महीने में पूर्ण कर बरसात के तुरंत बाद कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों का परीक्षण कर हर महीने भुगतान सुनिश्चित करने के साथ ही 30 अप्रैल तक किए कार्यों का भुगतान तत्काल करने को कहा। श्री बंसल ने सेतु परिक्षेत्र के सभी कार्यपालन अभियंताओं और एसडीओ को अपने क्षेत्र में चल रहे सभी कार्यों और उनके कार्यस्थलों की पूरी जानकारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने फील्ड का नियमित दौरा कर ठेकेदारों से सख्ती से काम कराने और उन्हें समय-सीमा में पूर्ण कराने को कहा। उन्होंने काम में ढिलाई, लापरवाही और लेट-लतीफी करने वाले ठेकेदारों के विरूद्ध नियमानुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने मार्च-2026 तक पूर्ण हुए कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्र और फाइनल बिल समीक्षा के लिए शासन को भेजने के भी निर्देश दिए।

योगी सरकार का बड़ा कदम: ‘चहक’ और ‘कलांकुर’ से निखरेगी बच्चों की शुरुआती शिक्षा

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के बाद अब प्री-प्राइमरी शिक्षा के ढांचे को भी जड़ से मजबूत करने में जुट गई है। राज्य के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल और गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण शुरू कर दिया गया है। ‘चहक-1, 2, 3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, और 'बिग बुक' जैसी विशेष तौर पर तैयार सामग्रियों के माध्यम से अब प्रदेश के लाखों नौनिहालों को उनकी शुरुआती शिक्षा का एक नया, रचनात्मक और बेहतर माहौल मिलने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के विजन को मिली गति योगी सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसके तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को बच्चों के सीखने की मुख्य बुनियाद माना गया है। उत्तर प्रदेश में अब आंगनबाड़ी केंद्रों को सिर्फ पोषण और बुनियादी देखभाल तक सीमित न रखकर, उन्हें आधुनिक और गतिविधि आधारित शिक्षा के जीवंत केंद्रों के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है 'चहक' और 'कलांकुर' से निखरेगी बच्चों की रचनात्मकता विशेषज्ञों के अनुसार, 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास के लिए सबसे संवेदनशील समय होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए 'चहक' श्रृंखला की पुस्तिकाएं बच्चों में भाषा के विकास और बुनियादी दक्षताओं को बढ़ाएंगी, जबकि ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ जैसी सामग्री उनकी सोच, जिज्ञासा और रचनात्मकता को नई उड़ान देगी। इसके साथ ही, बड़ी तस्वीरों वाली 'बिग बुक' और 'टीचर गाइड' के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी शिक्षण की आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। किताब वितरण ऐप' से होगी डिजिटल मॉनिटरिंग पूरी वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए योगी सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। इस अभियान के तहत सामग्री के वितरण की रीयल-टाइम निगरानी के लिए ‘किताब वितरण ऐप’ लागू किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) से लेकर डायट मेंटर्स और प्रधानाध्यापकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे सीधे शासन स्तर पर यह ट्रैक किया जा सके कि किस बालवाटिका तक सामग्री पहुंच चुकी है। प्री-प्राइमरी शिक्षा को मिला नया संस्थागत स्वरूप उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है जब प्री-प्राइमरी शिक्षा को इतने व्यापक पैमाने पर एक मजबूत संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। पहले जहाँ सरकारी तंत्र का पूरा ध्यान केवल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर केंद्रित रहता था, वहीं अब बच्चों की शुरुआती नींव को मजबूत करने पर समान प्राथमिकता दी जा रही है। 'ऑपरेशन कायाकल्प' और 'निपुण भारत' जैसी बड़ी योजनाओं की सफलता के बाद, प्री-प्राइमरी स्तर पर किया जा रहा यह सुधार आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को देश के शिक्षा मॉडल में सबसे आगे खड़ा कर सकता है। कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह कदम ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जिन्हें अब निजी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बचपन में ही आधुनिक और रचनात्मक शिक्षा का अधिकार मिल रहा है।

एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए अनुरोध की प्रक्रिया अब और अधिक सरल एवं तेज गति से होगी संपन्न

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में "एयर एम्बुलेंस एमपी" पोर्टल एवं मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत किसी भी नागरिक को समय पर उपचार के अभाव में जीवन न गंवाना पड़े। नए पोर्टल एवं मोबाइल ऐप के माध्यम से एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए अनुरोध की प्रक्रिया अब और अधिक सरल एवं तेज होगी। पोर्टल में एयर एम्बुलेंस फ्लीट की रियल टाइम ट्रैकिंग, सेवा अनुरोधों का सुगम डिजिटल प्रवाह, सेवा प्रदाताओं को तत्परता के लिये रियल टाइम नोटिफिकेशन तथा अनुमोदन प्राधिकारी को समयबद्ध स्वीकृति के लिए अलर्ट जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा गंभीर एवं आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को शीघ्र स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश में यह सेवा अब तक 140 जीवनरक्षक मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है। इनमें नवजात शिशुओं, हृदय रोग, ट्रॉमा, न्यूरोलॉजिकल आपात स्थितियों एवं अंग प्रत्यारोपण से जुड़े मामलों का सफल एयर मेडिकल ट्रांसफर शामिल है। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के अंतर्गत आयुष्मान भारत कार्डधारकों एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को निःशुल्क एयर एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे स्वास्थ्य संस्थानों से दूरी एवं आर्थिक स्थिति जीवनरक्षक उपचार में बाधा नहीं बने।   सेवा के संचालन के लिए भोपाल में 24×7 एयर मेडिकल ऑपरेशन व्यवस्था स्थापित की गई है। इसके अंतर्गत एक फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट "बीचक्राफ्ट किंग एयर सी -90" तथा एक मल्टी इंजन हेलीकॉप्टर "एडबल्यू -109" लगातार स्टैंडबाय पर उपलब्ध हैं, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल, आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस, फ्लाईओला एविएशन के सीएमडी एस. राम ओला और फ्लाईओला एविएशन की डायरेक्टर कॉर्पोरेट अफेयर्स डॉ. मोनिका तिवारी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। 

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने रायपुर परिक्षेत्र के दोनों मंडलों के कार्यों की समीक्षा की

रायपुर लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज रायपुर परिक्षेत्र के दोनों मंडलों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर में पीडब्लूडी मुख्यालय निर्माण भवन में आयोजित बैठक में अधिकारियों से दोनों मंडलों में स्वीकृत, निर्माणाधीन और निविदा प्रक्रिया की प्रगति की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बरसात के पहले सभी सड़कों की मरम्मत कर उन्हें गड्डामुक्त करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, मुख्य अभियंता श्री पी.एम. कश्यप और श्री टी.आर. कुंजाम भी बैठक में मौजूद थे। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में अधिकारियों को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 और पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत कार्यों की प्राथमिकता सूची तैयार कर 10 जून तक भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने 31 जुलाई तक इन सभी कार्यो के प्राक्कलन भी भेजने को कहा। उन्होंने शासकीय राशि के सदुपयोग और निर्माण कार्यों से ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को लाभान्वित करने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की पूर्ण उपयोगिता (Functionality) व टिकाऊपन (Sustainability) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने हर निर्माण कार्य में निर्माण और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर जोर देते हुए कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा। विभागीय सचिव ने अनुविभागीय अधिकारियों से लेकर प्रमुख अभियंता तक सभी अधिकारियों को प्रत्येक मंगलवार को दिनभर मुख्यालय में ही रहने के निर्देश दिए। उन्होंने रायपुर परिक्षेत्र में भवन और सड़क निर्माण के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को भविष्य की जरुरतों के अनुरूप सभी सड़क खंडों पर फ्लाई-ओवर्स की समग्र योजनाओं के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क चौड़ीकरण की परियोजनाओं में पुल-पुलियों तथा राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा पड़ने पर उनके भी चौड़ीकरण की कार्ययोजना के साथ काम करने को कहा।  श्री बंसल ने कहा कि गुणवत्ता और समय-सीमा में काम सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभागीय अधिकारी अपने सुव्यवस्थित और समयबद्ध कार्यों से नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच विभाग की अच्छी छवि बनाएं। सभी कार्यों को पूरी जवाबदेही, सक्रियता और गंभीरता से अंजाम दें। उन्होंने रायपुर और नवा रायपुर में कार्यों की सहूलियत और विभाग के कार्यों में प्रशासनिक कसावट के लिए रायपुर मंडल क्रमांक-1 के चारों संभागों को पुनर्गठित कर कार्यक्षेत्रों का नए सिरे से विभाजन करने को कहा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को शहर के बीच बनने वाली सड़कों के निर्माण के पहले संबधित नगरीय निकाय से समन्वय कर भविष्य के लिए नालियों, अंडरग्राउंड केबल फिटिंग, पाइपलाइन इत्यादि के लिए अग्रिम प्रावधान करने को कहा, ताकि सड़कों की बार-बार खुदाई की जरूरत न पड़े। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र के सड़कों की स्थिति की पूरी जानकारी रखते हुए परफार्मेंस गारंटी वाली सड़कों में सुधार की जरूरत पर संबंधित ठेकेदारों से तत्काल मरम्मत कराने को कहा।  लोक निर्माण विभाग के सचिव ने नई सड़कों के प्रस्ताव तैयार करते समय अगले दस वर्षों के ट्रैफिक, आबादी की जरूरत और आसपास संभावित विकास परियोजनाओं को ध्यान में रखने को कहा। उन्होंने भवनों में अच्छी गुणवत्ता की निर्माण सामग्री, खिड़की, दरवाजे, टाइल्स, पेंट, पुट्टी, सेनिटरी फिटिंग, नल, इलेक्ट्रिक फिटिंग इत्यादि का उपयोग करते हुए सभी भवनों में दिव्यांगों के लिए रैंप और रेलिंग के भी प्रावधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने भवन के साथ ही पूरे परिसर में समुचित पहुंच मार्ग, हरियाली, साफ-सफाई और बाउंड्री-वॉल की कार्ययोजना पर जोर दिया, ताकि भवनों की ज्यादा से ज्यादा उपयोगिता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने शहर की सभी सड़कों के किनारे और डिवाइडर्स पर झाड़ियों, घास-फूस व कचरों को हटाकर अच्छी साफ-सफाई रखने को कहा। उन्होंने रायपुर नगर निगम के साथ मिलकर सड़क के दोनों किनारों की नालियों की सफाई कराने के निर्देश दिए, ताकि बारिश के पानी के कारण सड़कों पर जल का जमाव न हो। उन्होंने लोक निर्माण विभाग की संपत्तियों, पोल्स व डिवाइडर्स पर अनाधिकृत विज्ञापन, बैनर, पोस्टर, होर्डिंग और फ्लेक्स लगाने वालों पर संपत्ति विरूपण की कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए। रायपुर परिक्षेत्र के दोनों मंडलों के अधीक्षण अभियंता, सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता तथा अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।

नेतरहाट तराई के गांव में पानी के लिए हाहाकार, 300 लोगों की जिंदगी प्रभावित

लातेहार नेतरहाट की तराई में बसे सुदूरवर्ती नैना गांव में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। 18 मई को गांव का एकमात्र सरकारी कुआं अचानक तेज आवाज के साथ धंस गया। इस घटना के बाद गांव में नल-जल योजना के तहत होने वाली पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है। करीब 50 परिवारों और लगभग 300 की आबादी वाले इस गांव के लिए यही कुआं जीवनरेखा था। गनीमत रही कि हादसे के वक्त वहां कोई मौजूद नहीं था, नहीं तो बड़ा नुकसान हो सकता था। कुआं धंसने के बाद गांव में पानी को लेकर हाहाकार की स्थिति बन गई है और ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है। नदी पर बढ़ी निर्भरता, महिलाएं-बच्चे परेशान कुएं के ध्वस्त होने के बाद अब नैना गांव के लोगों को पीने और घरेलू जरूरतों के लिए नदी और अन्य अस्थायी जलस्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है। चिलचिलाती गर्मी के बीच कई ग्रामीणों को रोज लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है। गांव की महिलाएं शकुंतला देवी, विमला देवी और मनीता देवी ने बताया कि पहले पानी घर तक पहुंच जाता था, जिससे राहत रहती थी। अब सुबह-शाम पानी के लिए दूर नदी तक जाना मजबूरी बन गया है। उन्होंने कहा कि गर्मी के इस मौसम में परेशानी और बढ़ गई है। पानी की कमी के कारण खाना बनाने, पशुओं को पानी पिलाने और अन्य दैनिक कार्यों में भी दिक्कत हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले से बुनियादी सुविधाओं की कमी रही है, लेकिन अब पानी जैसी जरूरी सुविधा भी बाधित हो गई है। विभाग ने जांच व जल्द समाधान का दिया भरोसा गांव के उमेश महतो समेत अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक जलस्रोत की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि नैना गांव में यही एक भरोसेमंद सरकारी जलस्रोत था। इसके ध्वस्त होने के बाद पूरा गांव संकट में आ गया है। ग्रामीणों ने कुएं की मरम्मत कराने या नए कुएं अथवा बोरिंग की व्यवस्था जल्द कराने की मांग उठाई है। समस्या को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखी जा रही है। फिलहाल नैना गांव के लोग भीषण गर्मी में राहत के लिए प्रशासनिक पहल का इंतजार बेसब्री से कर रहे हैं सूचना मिलने के बाद विभाग गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है। संबंधित कनीय अभियंता को मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी व पानी की आपूर्ति बहाल करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। दीपक कुमार महतो, कार्यपालक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता विभाग लातेहार।