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ममता बनर्जी के लिए बढ़ी मुश्किलें, TMC के कई सांसद BJP में जाने की तैयारी में?

कलकत्ता बंगाल में बदलाव हो गया. अब बदलाव के दायरे का विस्तार हो रहा है. बंगाल में 206 सीटों के साथ भाजपा ने सरकार बना ली. ममता बनर्जी की टीएमसी 80 पर ही अटक गई. ममता अब भी मानने को तैयार नहीं कि उनकी हार स्वाभाविक है. यह 15 साल से जनता के भीतर पनप रहे असंतोष और आक्रोश की स्वाभाविक परिणति है. पर, ममता टीएमसी की हार को भाजपा और चुनाव आयोग की साजिश मानती हैं. वे अपनी हार पर रोज ही विलाप के अंदाज में दोनों को खरी-खोटी सुनाती हैं. अब तो हालत यह हो गई है कि टीएमसी के उनके साथी भी भरोसेमंद नहीं रहे. नगर निकायों के पार्षद थोक में इस्तीफा दे रहे हैं. टीएमसी के ज्यादातर सांसद और विधायक भाजपा के संपर्क में हैं. पार्टी की बैठकों-कार्यक्रमों में उनकी गैरहाजिरी इसका संकेत है. ममता को भी अब लगने लगा है कि उनके लोग जान-बूझ कर दूरी बना रहे हैं. तभी तो उन्हें कहना पड़ रहा है कि जिन्हें जाना है, वे चले जाएं. बचे-खुचे लोगों से वे टीएमसी को पुनर्जीवित कर लेंगी।  पार्षदों के थोक में इस्तीफे विधानसभा चुनावों में हार के बाद नगरपालिकाओं में टीएमसी पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया है. आधा दर्जन से अधिक नगरपालिकाओं में थोक के भाव टीएमसी पार्षदों के इस्तीफे हुए हैं. यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. फालता सीट पर आए नतीजे के बाद डायमंड हार्बर में भी पार्षदों के इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है. पार्षदों के इस्तीफे की शुरुआत उत्तर 24 परगना जिले के भाटपाड़ा से हुई थी. कुल 35 में 30 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफे सौंप दिए. इसी तरह हालीशहर के 23 पार्षदों में 16 ने एक साथ इस्तीफा दे दिया. उत्तर बैरकपुर, गारुलिया और डायमंड हार्बर में इस्तीफों का सिलसिला जारी है. कई और नगरपालिकाओं और निगमों में भी टीएमसी पार्षदों ने इस्तीफे दिए हैं. कोलकाता नगर निगम में भी टीएमसी के पार्षद पाला बदलने को बेताब दिखते हैं. ममता बनर्जी के खिलाफ बगावती तेवर देखने को मिले।  कब होगा दल बदल! रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल सांसदों की संख्या को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। दरअसल, चर्चाएं इस बात को लेकर हैं कि दल बदल कानून से बचने के लिए कितने सांसदों की जरूतर होगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसे लेकर मॉनसून सत्र तक स्थिति साफ हो सकती है। कहा यह भी जा रहा है कि दल बदल के कथित प्रयासों में लगे कई सांसद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के करीबी हैं। विधायक बना रहे हैं दूरी चुनाव में हार के बाद 20 मई को पहली बार टीएमसी ने प्रदर्शन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में टीएमसी विधायक शामिल नहीं हुए थे। यह घटनाक्रम पार्टी के आंतरिक विचार-विमर्श के एक दिन बाद सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर जनता से जुड़ने के लिए सड़क पर उतरने की राजनीति की ओर लौटने की आवश्यकता पर चर्चा हुई थी। हालांकि, 80 विधायकों में से केवल 35 ही कार्यक्रम में पहुंचे, जिससे राजनीतिक गलियारों में संगठन के भीतर संभावित मतभेदों को लेकर अटकलें तेज हो गईं। यह ऐसे समय में हुआ है जब पार्टी चुनावी हार के बाद खुद को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष के नेता पद के लिए पार्टी की पसंद माने जा रहे शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने आंतरिक कलह की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि कई विधायक संगठनात्मक जिम्मेदारियों और अन्य व्यावहारिक कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। एजेंसी वार्ता के अनुसार, फलता में भाजपा की जीत के बाद डायमंड हार्बर नगर पालिका में टीएमसी के आठ पार्षदों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए। डायमंड हार्बर नगर पालिका में टीएमसी के 16 पार्षद थे। इस शहरी स्थानीय निकाय में दूसरी किसी पार्टी का एक भी पार्षद नहीं था। आठ पार्षदों ने सोमवार को अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए अपने इस्तीफे सौंपे हैं। बैठकों व कार्यक्रमों से दूरी ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से अब तक जितनी बैठकें की हैं, उनमें पार्टी के सभी विधायक नहीं शामिल हुए. शामिल न होने की कोई वजह बताना भी विधायकों ने मुनासिब नहीं समझा. चूंकि बैठकें टीएमसी चीफ ममता ने बुलाई थीं, इसलिए सबकी उपस्थिति जरूरी थी. खासकर तब, जब पार्टी के सामने अस्तित्व का खतरा पैदा हो गया है. टीएमसी के सांसद भी ममता से दूरी बनाने लगे हैं. चुनाव परिणाम आने के बाद ममता की बुलाई पहली ही बैठक से 10-12 नवनिर्वाचित विधायक नदारद रहे. विरोध प्रदर्शनों में सभी विधायकों की भागीदारी ममता बनर्जी सुनिश्चित नहीं कर पाईं।  अभिषेक के नेतृत्व पर प्रश्न इतना ही नहीं, अब तो ममता बनर्जी और उनके भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर भी सांसद-विधायक खुल कर सवाल उठाने लगे हैं. टीएमसी के सामने 2021 के बाद यह दूसरा बड़ा संकट है. कालीघाट में हुई समीक्षा बैठकों में कुणाल घोष, रितुव्रत बनर्जी जैसे वरिष्ठ विधायकों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के फैसलों पर सीधे सवाल उठाए. विधायकों का मानना है कि बंद कमरों में रणनीति बनाने से पार्टी फिर से मजबूत नहीं होगी. इसके लिए कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतरना होगा. बागी नेताओं का आरोप है कि बंद कमरे में आलाकमान द्वारा लिए गए फैसले जबरदस्ती नेताओं पर थोपे गए, जिससे जमीनी स्तर के नेताओं और पार्षदों ने पार्टी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है।  MP काकोली के तल्ख तेवर टीएमसी के संकट को इससे भी समझा जा सकता है. ममता ने 4 बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार से लोकसभा में मुख्य सचेतक का पद छीन कर कल्याण बनर्जी को दे दिया. इससे काकोली की नाराज हुईं. ममता का यह फैसला उन्हें पार्टी के भीतर अपना अपमान लगा. भाजपा ने उनकी नाराजगी को भुना लिया. केंद्र सरकार ने काकोली को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की ‘Y’ श्रेणी की सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराई है. इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर उन्हें यह सुरक्षा दी गई है. सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अब टीएमसी के लिए राजनीतिक रणनीति बनाने वाली आई-पैक (I-PAC) के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया है. काकोली की नाराजगी सामान्य बात … Read more

मुख्यमंत्री ने उज्जैन में महिला कर्मयोगी बहनों को नि:शुल्क ई-साइकिलें बांटी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है। मध्यप्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण को गति देने के लिए संकल्पित है। प्रदेश की सभी माताएं-बहनें अपने जीवन में सुख-समृद्धि, आनंद और वैभव प्राप्त करें। दुनिया में पेट्रोल-डीजल से दाम बढ़ रहे हैं। महिला कर्मयोगी बहनों को नि:शुल्क मिलीं ई-साइकिलें शक्ति प्रदान करेंगी। वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में इलेक्ट्रिक व्हीकल सबसे अच्छा विकल्प हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को उज्जैन में 40 महिला कर्मयोगी बहनों को ई-साइकिलें बांटने के बाद जन समुदाय को संबोधित कर रहे थे। साइकिलें उज्जैन जिला प्रशासन ने सीएसआर फंड के माध्यम से उपलब्ध कराई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ई-साइकिलें उपलब्ध कराने वाली कंपनी के प्रयास को सराहा और लाभ प्राप्त करने वाली बहनों के बधाई दी। आमजन के परिश्रम से जल संरक्षण के कार्यों में मध्यप्रदेश बना नंबर-1 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार जल संवर्धन की दिशा में लगातार तीसरे वर्ष विकास कार्यों को गति दे रही है। प्रदेश में जल गंगा संरक्षण महाभियान के जरिए गुड़ी पड़वा से लेकर 30 जून तक लगभग 10 हजार करोड़ से अधिक लागत के कार्य शामिल हैं। इनमें नदी, तालाब, पोखर, कुएं, बावड़ियों के जीर्णोद्धार के कार्य किए जा रहे हैं। प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों पर जल संरक्षण के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। जल संरक्षण के कार्यों के लिए मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिला है। यह प्रदेशवासियों के परिश्रम का फल है। भोजशाला के निर्णय का सभी वर्ग के लोगों ने किया सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार स्थित भोजशाला में गंगा दशहरा उत्सव धूमधाम से मनाया गया है। भोजशाला के संबंध में आए उच्च न्यायालय के फैसले का हिंदू-मुस्लिम सहित सभी वर्ग के लोगों ने सम्मान किया है। पहले अयोध्या में प्रभु राम के मंदिर निर्माण और वर्तमान में धार की भोजशाला को लेकर हमारे मतों में भिन्नता हो सकती है। राज्य सरकार न्यायालय के निर्णय को सफलतापूर्वक लागू करा रही है।  

Camel Milk से तैयार हुआ खास पनीर, बीकानेर वैज्ञानिकों की रिसर्च ने बढ़ाई उम्मीदें

बीकानेर रेगिस्तान की पहचान माने जाने वाले ऊंट अब केवल परिवहन या दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे. बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी) के वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध से विशेष प्रकार का पनीर तैयार कर एक नई उपलब्धि हासिल की है. यह पनीर ऊंटनी और गाय के दूध के मिश्रण से बनाया गया है, जो प्रोटीन, खनिज तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर बताया जा रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प बन सकता है. बीकानेर के वैज्ञानिकों की यह पहल न केवल डेयरी क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है, बल्कि रेगिस्तानी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।  एनआरसीसी के वैज्ञानिक डॉ. मितुल बुंबडिया और डॉ. राजेंद्र कुमार ने प्रयोगशाला स्तर पर सिट्रिक अम्ल की सहायता से इस विशेष पनीर को तैयार किया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, ऊंटनी के दूध में सामान्य गाय या भैंस के दूध की तुलना में प्रोटीन की संरचना अलग होती है, जिसके कारण इसे सीधे फाड़कर पनीर बनाना संभव नहीं होता. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने ऊंटनी के दूध में 30 प्रतिशत गाय का दूध मिलाकर उसकी जमावट क्षमता बढ़ाई. तैयार पनीर में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ऊंटनी के दूध का है।  पनीर को सात दिनों तक रखा जा सकता है सुरक्षित वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पनीर का स्वाद हल्का नमकीन है और इसे पांच से सात दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है. खास बात यह है कि यह पनीर पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ स्वास्थ्यवर्धक भी माना जा रहा है. ऊंटनी के दूध में प्राकृतिक रूप से कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. यही कारण है कि इस उत्पाद को औषधीय गुणों वाला दुग्ध उत्पाद भी माना जा रहा है।  ऊंटनी के दूध से तैयार पनीर लोगों के लिए बेहतर विकल्प डेयरी प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण इकाई के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि भारत में पनीर का उपयोग दैनिक भोजन से लेकर कई प्रकार के व्यंजनों में बड़े स्तर पर किया जाता है. ऐसे में ऊंटनी के दूध से तैयार यह पनीर लोगों के लिए एक नया और स्वास्थ्यप्रद विकल्प साबित हो सकता है. उन्होंने बताया कि यदि बाजार में इसकी मांग बढ़ती है, तो बड़े स्तर पर उत्पादन की दिशा में भी काम किया जाएगा।  ऐसे तैयार होता है ऊंटनी के दूध से पनीर पनीर तैयार करने की प्रक्रिया भी वैज्ञानिकों ने साझा की है. सबसे पहले ऊंटनी के दूध को करीब 90 डिग्री तापमान तक गर्म किया जाता है. इसके बाद इसे थोड़ा ठंडा कर विशेष अनुपात में तैयार मिश्रण के साथ फाड़ा जाता है, जिससे पनीर तैयार हो जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे शोध और प्रयोगों के बाद उन्हें अच्छे परिणाम मिले हैं और उच्च गुणवत्ता वाला पनीर तैयार करने में सफलता मिली है. एनआरसीसी अब इस तकनीक को पशुपालकों और किसानों तक पहुंचाने की तैयारी भी कर रहा है. यदि कोई किसान या पशुपालक ऊंटनी के दूध से पनीर बनाना सीखना चाहता है, तो वह केंद्र में आकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है. इससे ऊंट पालन से जुड़े लोगों की आय बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। 

रेखा सरकार का बड़ा फैसला, आय सीमा बढ़ी; डिजिटल पेमेंट वालों को मिलेगा राशन लाभ

नई दिल्ली दिल्‍ली कैबिनेट की बैठक में आज राशन वितरण प्रणाली को लेकर एक बड़ा और बेहद अहम फैसला लिया गया है, जिसने राजधानी के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है. सरकार ने राशन कार्ड के लिए जरूरी सालाना आय की सीमा को सीधे 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया है. दिल्‍ली सरकार का मानना है कि पहले तय की गई 1 लाख रुपये की मूल आय की सीमा बहुत कम थी, जिससे कई जरूरतमंद परिवार इस योजना के दायरे से बाहर हो गए थे. मत्रभ्‍ मंजिंदर सिंह सिरसा ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि इस फैसले से दिल्‍ली के लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा. इसके साथ ही, राशन वितरण में पारदर्शिता लाने और हर तरह की धांधली को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने अब राशन के लेन-देन में केवल डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है।  रेखा गुप्‍ता कैबिनेट फैसले की 5 मुख्य बातें • आय की सीमा में भारी बढ़ोतरी: राशन कार्ड के लिए एलिजिबिल्‍टी की वार्षिक आय सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर अब 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है. • लाखों नए परिवारों को लाभ: इस फैसले के बाद मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग के लाखों नए लाभार्थी इस सरकारी राशन योजना के दायरे में आ जाएंगे. • डिजिटल करेंसी से सीधा भुगतान: राशन योजना में भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए अब केवल डिजिटल करेंसी का ही इस्तेमाल किया जाएगा. • सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर: डिजिटल करेंसी लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी, जिसका इस्तेमाल वे सिर्फ राशन खरीदने के लिए कर सकेंगे. • बिचौलियों और धांधली पर लगाम: इस तकनीक-आधारित व्यवस्था से कोटेदारों की मनमानी, राशन की कालाबाजारी और फर्जी लाभार्थियों की धांधली पूरी तरह बंद हो जाएगी. क्यों खास है यह फैसला और क्या होगा इसका असर? सरकार का यह फैसला दोहरे मोर्चे पर काम करने वाला है—पहला सामाजिक कल्याण का विस्तार और दूसरा तकनीक के जरिए पूरी व्यवस्था का शुद्धीकरण. अब तक 1 लाख रुपये की सालाना आय की सीमा बेहद व्यावहारिक नहीं रह गई थी क्योंकि महंगाई के इस दौर में इतनी आय वाला परिवार भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करता है. आय की सीमा को ढाई लाख करने से समाज के एक बहुत बड़े कामकाजी वर्ग (जैसे सुरक्षाकर्मी, ऑटो चालक, छोटे दुकानदार) को मुफ्त या किफायती राशन की सुरक्षा मिल सकेगी।  दूसरा और सबसे क्रांतिकारी कदम है डिजिटल करेंसी (e-RUPI या सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी – CBDC) का अनिवार्य इस्तेमाल. अभी तक कई जगहों पर शिकायतें आती थीं कि कोटेदार राशन डकार जाते हैं या लाभार्थियों को बाजार में बेचने पर मजबूर करते हैं. अब जब सरकार सीधे खाते में राशन की डिजिटल करेंसी भेजेगी, तो लाभार्थी उसका इस्तेमाल केवल राशन की दुकान पर ही कर पाएगा. इससे कैश की हेराफेरी खत्म होगी और राशन वितरण प्रणाली 100% पारदर्शी हो जाएगी।  सवाल-जवाब सरकार को राशन के लिए आय की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये क्यों करनी पड़ी? सरकार के अनुसार, पहले तय की गई 1 लाख रुपये की मूल आय सीमा बहुत कम थी. वर्तमान आर्थिक स्थितियों और महंगाई को देखते हुए बुनियादी आय को कम आका गया था, जिससे कई वास्तविक जरूरतमंद राशन के लाभ से वंचित रह जाते थे. अब ढाई लाख की सीमा होने से लाखों छूटे हुए परिवारों को सुरक्षा कवच मिलेगा।  राशन वितरण में डिजिटल करेंसी कैसे काम करेगी और लाभार्थियों को इससे क्या फायदा होगा? सरकार लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे राशन के मूल्य के बराबर डिजिटल करेंसी ट्रांसफर करेगी. यह करेंसी डायरेक्ट अकाउंट में जाएगी, जिससे लाभार्थी राशन की अधिकृत दुकान पर जाकर भुगतान कर सकेंगे. इससे लाभार्थियों को अपनी जेब से नकद खर्च नहीं करना पड़ेगा और वे बिना किसी कटौती के पूरा राशन ले सकेंगे।  इस नई व्यवस्था से राशन वितरण में होने वाली धांधली पर कैसे लगाम लगेगी? डिजिटल करेंसी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह ‘पर्पज-स्पेसिफिक’ (विशेष उद्देश्य के लिए) होती है. यानी राशन के लिए मिली डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल किसी अन्य काम या सामान को खरीदने में नहीं किया जा सकता. इससे राशन की कालाबाजारी, कोटेदारों द्वारा फर्जी अंगूठा लगवाना और बिचौलियों का कमीशन पूरी तरह बंद हो जाएगा। 

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने नव आरक्षकों को राष्ट्रसेवा, अनुशासन, संवेदनशीलता एवं जनविश्वास के साथ कार्य करने का दिया संदेश

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष सशस्त्र बल के गौरवशाली इतिहास एवं अनुशासित परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इंदौर स्थित रुस्तमजी सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय परिसर में आरएपीटीसी इंदौर एवं 15वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल इंदौर के नव आरक्षकों का संयुक्त दीक्षांत परेड समारोह अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा उपस्थित रहे। इस गरिमामय आयोजन की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशकविशेष सशस्त्र बल मुख्यालयभोपाल चंचल शेखरद्वारा की गई। नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने कहा कि आज का दिन केवल एक औपचारिक दीक्षांत समारोह नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण, परिश्रम एवं राष्ट्रसेवा के संकल्प का गौरवपूर्ण उत्सव है। उन्होंने कहा कि आज से नव आरक्षक केवल पुलिस बल का हिस्सा नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, कानून की गरिमा एवं राष्ट्र की सुरक्षा के प्रहरी बन गए हैं। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि रुस्तमजी सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय का नाम मध्यप्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक एवं सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संस्थापक के.एफ. रुस्तमजी के नाम पर रखा गया है, जिनका मध्यप्रदेश पुलिस की व्यवस्थाओं, कल्याणकारी गतिविधियों एवं संस्थागत ढाँचे को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि रुस्तमजी जैसे महान अधिकारियों की विरासत से प्रेरणा लेकर नव आरक्षकों को सेवा, अनुशासन एवं कर्तव्यनिष्ठा के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए।  मकवाणा ने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना, साहस एवं जनता के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने नव आरक्षकों से कहा कि तिरंगे के समक्ष ली गई शपथ को वे अपने जीवन का सर्वोच्च आदर्श बनाएं तथा हर परिस्थिति में कानून, संविधान एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण अवधि में नव आरक्षकों ने शारीरिक दक्षता के साथ-साथ आउटडोर ड्रिल, हथियार संचालन, फील्ड क्राफ्ट, कानून-व्यवस्था नियंत्रण, साइबर अपराध, आपदा प्रबंधन एवं आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े विभिन्न विषयों में दक्षता प्राप्त की है। चुनाव ड्यूटी एवं अन्य कानून-व्यवस्था संबंधी व्यवस्थाओं में सहभागिता के माध्यम से उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा केवल शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनशील जनसेवा का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जब कोई पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास आए, तो उसे वर्दी में कठोरता नहीं बल्कि सुरक्षा, विश्वास, सहानुभूति एवं न्याय का भरोसा दिखाई देना चाहिए। समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को भी यह विश्वास होना चाहिए कि पुलिस उसके साथ खड़ी है। डीजीपी ने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस की जिम्मेदारियाँ अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं तनावपूर्ण हैं। पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा हार्टफुलनेस संस्था के साथ एमओयू कर ध्यान एवं योग आधारित कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि पुलिस बल मानसिक रूप से अधिक संतुलित एवं सक्षम बन सके। विशेष सशस्त्र बल के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए  मकवाणा ने कहा कि चंबल क्षेत्र में दस्यु उन्मूलन से लेकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना तक विशेष सशस्त्र बल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव ड्यूटी का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदान केंद्र पर हार्ट अटैक से पीड़ित अधिकारी को सीपीआर प्रशिक्षित जवानों ने तत्काल सहायता देकर उसका जीवन बचाया। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण पुलिस बल की मानवीय संवेदनशीलता एवं सेवा भावना को प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी केवल कानून के रक्षक नहीं, बल्कि शांति, विश्वास एवं सुरक्षा के दूत हैं। उनके निर्णय, व्यवहार एवं कार्यशैली से पुलिस विभाग की छवि निर्मित होती है। उन्होंने नव आरक्षकों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे अपने आचरण, अनुशासन एवं सेवा भावना से जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत करेंगे। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षण संस्थानों के अधिकारियों, प्रशिक्षकों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने नव आरक्षकों को शारीरिक रूप से सक्षम, मानसिक रूप से दृढ़ एवं नैतिक रूप से जागरूक पुलिसकर्मी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम के अंतर्गत आरएपीटीसी इंदौर के 482 तथा 15वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल इंदौर के 135 नव आरक्षकों सहित कुल 617 नव आरक्षकों का दीक्षांत पुलिस महानिरीक्षक  चन्द्रशेखर सोलंकी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नव आरक्षकों द्वारा प्रस्तुत अनुशासित, आकर्षक एवं सशक्त परेड ने उपस्थित सभी गणमान्यजनों को विशेष रूप से प्रभावित किया। परेड उपरांत नव आरक्षकों ने राष्ट्र, संविधान एवं जनसेवा के प्रति पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने की शपथ ली। इसके पश्चात अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसएएफ  चंचल शेखर ने प्रशिक्षण की संरचना एवं उपलब्धियों का संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण किया। समारोह में परेड निष्क्रमण उपरांत नव आरक्षकों द्वारा साइलेंट ड्रिल, पीटी डिस्प्ले एवं यूएसी का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। अश्वरोही दल द्वारा प्रस्तुत विशेष गतिविधियों ने उपस्थितजनों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में बीएसएफ बैंड, प्रथम वाहिनी बैंड एवं 15वीं वाहिनी बैंड द्वारा आकर्षक प्रस्तुति दी गई। समारोह में पुलिस आयुक्त इंदौर  संतोष सिंह, पुलिस महानिरीक्षक ग्रामीण  अनुराग, पुलिस उप महानिरीक्षक एसएएफ इंदौर,  अमित सिंह, बीएसएफ पुलिस महानिरीक्षक  तेजिन्दर सिंह सिद्धू, पुलिस उप महानिरीक्षक आरएपीटीसी  धर्मेंद्र सिंह भदौरिया, इंदौर जोन एसएएफ के कमांडेंट और अन्य पुलिस अधिकारीगण के साथ सेवानिवृत्त अधिकारीगण, परिवारजन एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।  

धनबाद के अधीक्षण इंजीनियर सवनीन्द्र कुमार अब रांची में संभालेंगे जिम्मेदारी

धनबाद. झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फेरबदल करते हुए राज्यभर के कई वरीय अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला किया है। इस कड़ी में धनबाद विद्युत आपूर्ति आंचल को भी प्रभावित किया गया है। निगम मुख्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत धनबाद विद्युत आपूर्ति अंचल के विद्युत अधीक्षण अभियंता (ईएसई) सवनीन्द्र कुमार कश्यप का स्थानांतरण रांची कर दिया गया है। मुख्यालय स्तर पर भी बड़े बदलाव किए गए उन्हें तत्काल प्रभाव से रांची निगम मुख्यालय में उप महाप्रबंधक (ग्रामीण परियोजना)-I के महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित किया गया है। इसके साथ ही गिरिडीह राजस्व क्षेत्र के विद्युत अधीक्षण अभियंता प्रवीण उरांव को स्थानांतरित करते हुए देवघर विद्युत आपूर्ति अंचल का नया अधीक्षण अभियंता नियुक्त किया गया है। मुख्यालय स्तर पर भी बड़े बदलाव किए गए हैं, जिसमें विभिन्न महाप्रबंधकों (जीएम) और उप महाप्रबंधकों (डीजीएम) को अतिरिक्त प्रभार सौंपे गए हैं ताकि मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना (एमयूजेवाई) और आरडीएसएस से जुड़े कार्यों को गति दी जा सके। धनबाद से सवनीन्द्र कुमार कश्यप के जाने के बाद अब यहाँ नए अधीक्षण अभियंता की तैनाती को लेकर विभागीय हलचल तेज हो गई है।

पंजाब का सैनिक असम में रहस्यमयी ढंग से गायब, आखिरी लोकेशन डिब्रूगढ़ रेलवे स्टेशन

गुरदासपुर. गुरदासपुर के जदीकी गांव दाखला का 27 साल का आर्मी जवान जसविंदर कुमार 17 मई से शकी हालात में लापता है। जसविंदर कुमार अमृतसर से ट्रेन पकड़कर असम के डिब्रूगढ़ के लिए रवाना हुआ था। उसकी यूनिट डोगरा रेजिमेंट को जानकारी मिली है कि उसे आखिरी बार डिब्रूगढ़ रेलवे स्टेशन पर देखा गया था, लेकिन उसके बाद उसका कोई पता नहीं है। यूनिट के सदस्य उसे ढूंढने के लिए गांव दाखला में उसके घर भी पहुंचे थे और पूछताछ करने के बाद चले गए। इस बीच, सैनिक के परिवार को शक है कि जसविंदर को किसी ने किडनैप कर लिया है क्योंकि 23 मई को एक दिन फोन बजा लेकिन उस पर असम का एक आदमी बात कर रहा था। लगता है, जसविंदर का फोन किसी और के हाथ लग गया है और अब बंद है। जसविंदर के पिता की मौत हो चुकी है और उसकी बूढ़ी मां रो-रोकर गुहार लगा रही है कि उसके बेटे को ढूंढा जाए। जसविंदर की मां का कहना है कि उन्होंने जसविंदर से आखिरी बार तब बात की थी जब वह दिल्ली पहुंचा था। उस समय वह पूरी तरह सेफ था और बाद में पता चला कि वह डिब्रूगढ़ भी पहुंच गया है। लेकिन उसके बाद उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली और उसका फोन भी बंद हो गया। उन्होने बताया कि 21 मई को उसका फोन फिर से काम करने लगा और उसके चाचा ने इस फोन पर बात की थी लेकिन फोन असम के किसी व्यक्ति के हाथ लग गया है। उसके बाद फोन फिर से बंद हो गया, जिससे उन्हें शक है कि जसविंदर को असम के किसी क्रिमिनल गैंग ने किडनैप कर लिया है। हालांकि परिवार को यह भी पता है कि उनकी यूनिट लगातार उसे ढूंढने की कोशिश कर रही है, लेकिन परिवार की मांग है कि इस काम में तेजी लाई जाए।

हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा सिविल सर्विसेस परीक्षा 2027 की कोचिंग हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित- मिर्जा एजाज बेग

रायपुर यूपीएससी द्वारा आयोजित की जाने वाली सिविल सर्विसेस परीक्षा 2027 में भाग लेने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए, हज कमेटी ऑफ़ इंडिया मुंबई में संचालित कोचिंग एवं गाइडेंस सेल में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिये प्रवेश हेतु हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा इच्छुक विद्यार्थियों से ऑनलाईन आवेदन दिनांक 10 जून 2026 तक आमंत्रित किये गये है। ऑनलाइन आवेदन एवं अर्हताओं का संपूर्ण विवरण हज कमेटी ऑफ इंडिया की वेबसाईट www.hajcommittee.gov.in पर उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमेन मिर्ज़ा एजाज बेग ने बताया कि, हज कमेटी ऑफ़ इंडिया मुंबई में, यूपीएससी द्वारा आयोजित की जाने वाली सिविल सर्विसेस परीक्षा में भाग लेने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए कोचिंग एवं गाइडेंस सेल का संचालन किया जाता है । उक्त कोचिंग एवं गाइडेंस सेल में प्रवेश के लिये इच्छुक विद्यार्थियों से ऑनलाईन आवेदन दिनांक 10 जून 2026 तक आमंत्रित किये गये है। अर्हता पूर्ण करने वाले विद्यार्थियो का इंटरेंस टेस्ट दिनांक 28 जून 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी द्वारा रायपुर में आयोजित किया जावेगा। अधिक जानकारी के लिये कार्यालय छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के दूरभाष 0771-4266646 पर संपर्क किया जा सकता है।

लौह अयस्क माफिया पर शिकंजा, दंतेवाड़ा में अवैध खनन नेटवर्क बेनकाब

दंतेवाड़ा. पंडेवार में दो ट्रक और एक जेसीबी की जब्ती के बाद अब लौह अयस्क के बड़े खेल की परतें खुलने लगी हैं। पंडेवार से बैलाडीला तक कई जगह खुले में अयस्क के बड़े-बड़े ढेर मिले हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहाड़ियों से ट्रैक्टरों के जरिए अयस्क नीचे लाया गया। इसके बाद ट्रकों से बाहर भेजने की तैयारी चल रही थी। कई जगह अस्थायी रास्ते भी बनाए गए हैं, जिससे साफ है कि यह काम लंबे समय से चल रहा था। जानकारों के मुताबिक एक ट्रक में 40 से 50 टन तक लौह अयस्क लोड होता है। एक खेप की कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये तक बताई जा रही है। यानी यह सिर्फ छोटे स्तर की चोरी नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क का संकेत माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि खुले में हो रहा इतना बड़ा भंडारण विभागीय निगरानी से कैसे बच गया। पहाड़ियों के नीचे दर्जनों ट्रक लम्प्स जमा होने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौका देखकर माल बाहर भेजने की तैयारी थी। डीएफओ ने जांच टीम भेजने और अवैध भंडारण मिलने पर जब्ती की बात कही है। अब नजर इस बात पर है कि कार्रवाई सिर्फ वाहनों तक सीमित रहती है या पूरे नेटवर्क तक पहुंचती है।

मध्यप्रदेश सरकार पर बढ़ता कर्ज, मई के आखिरी हफ्ते में ₹2800 करोड़ की नई उधारी

भोपाल  सरकार प्रदेश में जारी विकास योजनाओं के लिए 2,800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। वित्त विभाग के बजट निदेशक भास्कर लक्षकार द्वारा इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया गया है। सरकार यह लोन दो अलग-अलग अवधियों और ब्याज दरों के आधार पर आरबीआई के जरिए जुटाएगी। इसमें सरकार 7.64 फीसदी ब्याज दर वाले मध्य प्रदेश एसडीएस 2034 बॉण्ड को दोबारा जारी कर रही है। इसकी अवधि 8 वर्ष की होगी और 1600 करोड़ का यह कर्ज 29 अप्रैल 2034 को वापस चुकाया जाएगा । 1200 करोड़ रुपये के दूसरे ऋण के लिए 7.83 फीसदी ब्याज दर वाले मध्य प्रदेश एसडीएस 2048 बॉण्ड भी दोबारा जारी किए जा रहे हैं । कर्ज की अवधि 22 वर्ष की होगी और इसके भुगतान की तिथि 29 अप्रैल 2048 तय की गई है। दोनों कर्जी पर ब्याज का भुगतान हर वर्ष 29 अक्टूबर और 29 अप्रैल को छमाही आधार पर होगा । वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य सरकार यह कर्ज मध्यप्रदेश राज्य विकास ऋण के तहत आरबीआई के जरिए बॉन्ड जारी कर ले रही है। पहली राशि 1600 करोड़ रुपए की होगी, जिस पर 7.64 प्रतिशत ब्याज दर तय की गई है। वहीं दूसरी राशि 1200 करोड़ रुपए की होगी, जिस पर 7.83 प्रतिशत ब्याज देना होगा। दोनों कर्जों की अदायगी सरकार छह माही किस्तों में अप्रैल और अक्टूबर में करेगी। 2034 और 2048 तक के लिए कर्ज सरकार द्वारा लिया जा रहा पहला कर्ज वर्ष 2034 तक की अवधि के लिए रहेगा, जबकि दूसरा कर्ज 2048 तक यानी 22 वर्षों की अवधि के लिए लिया गया है। दोनों ऋणों के लिए सिक्योरिटी की नीलामी आरबीआई द्वारा कराई जाएगी और भुगतान प्रक्रिया 27 मई 2026 तक पूरी की जाएगी। इस बार अप्रैल से ही कर्ज लेने लगी सरकार प्रदेश सरकार ने इस वित्त वर्ष में अप्रैल से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया था। इससे पहले के वर्षों में आमतौर पर मई से कर्ज उठाने की प्रक्रिया शुरू होती थी। अप्रैल में सरकार ने दो बार चार किस्तों में 4600 करोड़ रुपए का ऋण लिया था। इसके बाद मई में पहले 1800 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया और अब 2800 करोड़ रुपए का नया ऋण उठाया जा रहा है। उत्पादक विकास योजनाओं में खर्च होगी राशि सरकार का कहना है कि बॉन्ड से प्राप्त राशि का उपयोग राज्य की उत्पादक विकास योजनाओं, सिंचाई परियोजनाओं, ऊर्जा, कृषि और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। राजपत्र में जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में मध्यप्रदेश की राजस्व प्राप्ति लगभग 2.79 लाख करोड़ रुपए और राजस्व व्यय भी लगभग 2.79 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। आज होगी बॉण्ड की नीलामी मंगलवार को इन सरकारी बॉण्ड्स की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक के कोर बैंकिंग सॉल्यूशन सिस्टम (ई-कुबेर) पर इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में आयोजित की जाएगी। नीलामी के बाद रिजल्ट की घोषणा उसी दिन होगी और इसके अगले दिन सफल बोली लगाने वालों को राशि का भुगतान बैंकिंग समय में कैश, बैंकर्स चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए करना होगा। 31 मार्च 2026 की स्थिति में प्रदेश सरकार पर कुल कर्ज भार 4,88,714.17 करोड़ रुपये है। इसमें बाजार से लिया गया कर्ज 3,33,278.21 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार से मिले ऋण और एडवांस के 81,152.31 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।