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मौत के वक्त पहने कपड़ों से मिला अहम सुराग, ट्विशा शर्मा केस में बढ़ा सस्पेंस

भोपाल मॉडल और फिल्म एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा भले ही पंचतत्व में विलीन हो गईं पर अपने पीछे अनेक सवाल छोड़ गई हैं। उनकी डेथ मिस्ट्री अभी सुलझी नहीं है। भोपाल एम्स AIIMS में दिल्ली एम्स की टीम ने उनके शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया और नमूने, फोटोग्राफ, वीडियो आदि लिए। फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार गुप्ता की टीम द्वारा किए गए इस दूसरे पोस्टमार्टम से मामले में कुछ खुलासे की उम्मीद है। इधर ट्विशा की मौत की ​हकीकत जल्द सामने के लिए भोपाल पुलिस भी जुटी है। जहां एक ओर आरोपी पति समर्थ सिंह से सख्ती से पूछताछ की जा रही है वहीं अभी तक मिले साक्ष्यों की पड़ताल भी पुलिस कर रही है। इस बीच मौत के समय पहने ट्विशा की शॉर्ट्स की जेब से मिली एक चाबी ने मामले से संबंधित सभी लोगों को उलझा दिया है। यह फॉक्सवैगन कार की चाबी है जबकि ट्विशा को ड्राइविंग आती ही नहीं थी। कार किसकी है, उसके पास चाबी कैसे आई, अब इन सवालों से पुलिस रूबरू है। ट्विशा शर्मा केस की सीबीआई जांच मंजूर की जा चुकी है पर अभी केंद्रीय एजेंसी ने मामला अपने हाथ में नहीं लिया है। अभी भोपाल पुलिस ही मामले की जांच कर रही है। पुलिस एक एक कर वारदात के सभी सबूतों, घटनाक्रमों की कड़ी जोड़ रही है। भोपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक ट्विशा का मोबाइल फोन पहले ही जब्त किया जा चुका है। उसके मोबाइल की कॉल डिटेल्स निकलवाई जा रही है। ट्विशा शर्मा के चैट की जांच भी चल रही है। कभी घर की कार तक नहीं चलाई पुलिस ने मौत के समय पहने ट्विशा के कपड़े भी जब्त किए थे। अधिकारियों ने बताया कि उसकी शॉर्ट्स की जेब से एक फॉक्सवैगन की चाबी भी मिली थी। इससे पुलिस के साथ ही ट्विशा के ससुरालवाले, मायका पक्ष और अन्य परिचित, रिश्तेदार, दोस्त भी उलझन में पड़ गए। दरअसल ट्विशा शर्मा को ड्राइविंग ही नहीं आती थी। ससुरालवालों के मुताबिक उसने कभी घर की कार तक नहीं चलाई। ऐसे में ट्विशा शर्मा के पास कार की चाबी मिलने पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। फॉक्सवैगन कार किसकी ससुराल वाले तो इस मुद्दे की जांच पर खासा जोर दे रहे हैं। सास गिरीबाला सिंह ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा है कि यह फॉक्सवैगन कार किसकी है, इसकी चाबी ट्विशा के पास कैसे आई, इन तथ्यों का पता लगाना बहुत जरूरी है। पुलिस भी इस मुद्दे की अहमियत जानती है। ट्विशा के पास कार की चाबी कैसे पहुंची, इसकी जांच की जा रही है।

नामांकन रद्द होने से बदला चुनावी गणित, पंजाब निकाय चुनाव में BJP की रणनीति पर नजर

चंडीगढ़  पंजाब के निकाय चुनाव में कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है तो कई में आमने-सामने की सीधी टक्कर है। इसकी दो बड़ी वजह सामने आ रही हैं एक तो कई वार्डों में कुछ प्रत्याशियों के प्रचार में धार नहीं दिख रही और दूसरी, कई जगह मुख्य पार्टियों के प्रत्याशी ही मैदान से बाहर हैं। आठ नगर निगमों और 97 नगर परिषदों व नगर पंचायतों की बात करें तो आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी तो लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं मगर भाजपा, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और कांग्रेस जैसे मुख्य सियासी दलों के प्रत्याशी मैदान से बाहर हैं।  शिअद के अध्यक्ष सुखबीर बादल, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग आरोप लगाते हैं कि यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि कई वार्डों में जानबूझकर उनके मजबूत प्रत्याशियों के नामांकन पत्र रद्द कर दिए गए हैं। ऐसा करने का कोई मजबूत आधार भी नहीं बताया जा रहा है। कई प्रत्याशी अपना दुखड़ा लेकर राज्य चुनाव आयोग तक भी पहुंचे थे जिनकी शिकायतें संबंधित जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों को आगामी कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं। उधर, बहुत से वॉर्डों में सिर्फ दो ही प्रत्याशी हैं जबकि बठिंडा नगर निगम के वॉर्ड नंबर 30 और सुनाम नगर परिषद का वॉर्ड नंबर 15, ये दो वॉर्ड ऐसे हैं जहां 10-10 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। आठ नगर निगमों में प्रत्याशियों की स्थिति 105 नगर निकायों में से आठ नगर निगमों के चुनाव सभी दलों के लिए बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल हैं क्योंकि इन निगमों के अंतर्गत बड़ा शहरी क्षेत्र आता है। सभी नगर निगमों में 50-50 वार्ड हैं मगर बहुत वार्डों में मुख्य सियासी दलों के प्रत्याशी ही चुनाव रण से बाहर हैं जबकि आप के प्रत्याशी करीबन हर सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। बरनाला नगर निगम में भाजपा के 26 प्रत्याशी, कांग्रेस के 36 और शिअद के 27 प्रत्याशी, बठिंडा नगर निगम में भाजपा के 42, कांग्रेस के 43 और शिअद के 46 प्रत्याशी, अबोहर नगर निगम में भाजपा के 49, कांग्रेस के 31 और शिअद के 33 प्रत्याशी, बटाला नगर निगम में भाजपा के 22, कांग्रेस के 48 और शिअद के 21 प्रत्याशी, बरनाला नगर निगम में भाजपा व शिअद के 27-27 प्रत्याशी और कांग्रेस के 39 प्रत्याशी, कपूरथला नगर निगम में भाजपा के 33, कांग्रेस के 50, शिअद के 23 प्रत्याशी, मोगा नगर निगम में भाजपा के 40, कांग्रेस के 48 व शिअद के 38 प्रत्याशी और पठानकोट नगर निगम में भाजपा-कांग्रेस के 50-50 जबकि शिअद के 30 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा केंद्रीय योजनाओं के गणित के सहारे भाजपा ने हर नगर निकाय की अलग-अलग रणनीति खास ढंग से बनाई है। भाजपा जानती है कि पंजाब में उनकी सरकार नहीं है लिहाजा पार्टी ने केंद्रीय योजनाओं के गणित के आधार पर अपना होमवर्क किया है। भाजपा ने हर नगर निकाय के लिए हजारों परचे छपवाए हैं जिसमें यह बताया गया है कि संबंधित वार्ड में स्वच्छ भारत मिशन शहरी, अमरूत योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री मानधन श्रम योगी योजना, एक राष्ट्र एक राशन कार्ड योजना व प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत कितने लोगों को लाभ मिला है। यह भी बताया गया है कि इन योजनाओं में साल 2015-16 से साल 2025-26 तक कितने करोड़ संबंधित नगर निकाय के लिए केंद्र सरकार की ओर से पहुंचे। इसके अतिरिक्त मतदाताओं को यह भी बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने अपने 11 साल के कार्यकाल में पंथक, पंजाब व पंजाबियों से जुड़े क्या-क्या बड़े काम किए हैं। इसमें साल 1984 के दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलवाने का भी जिक्र है।  

गंगा दशहरा सिर्फ पर्व नहीं, जल के प्रति कृतज्ञता का संदेश है : डॉ. मोहन यादव

गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व-डॉ. मोहन यादव भोपाल भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में नदियों को मात्र जल स्रोत नहीं, बल्कि देवी के रूप में पूजा जाता है। इनमें गंगा का स्थान सर्वोपरि है। गंगा दशहरा या गंगावतरण ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है। इस दिन को गंगा दशहरा, गंगा दशमी या दशहरा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। दरअसल, गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व है. गंगा यानी पवित्र-साफ जल के इसी महत्व को समझते हुए यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का प्रमुख पैरामीटर बनाते हुए हर घर जल और जल है तो कल है के संकल्प को साकार किया। उनके नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामी गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी ऐतिहासिक पहल हुईं, जिन्होंने देश की जल सुरक्षा को नई दिशा दी है। अमृत सरोवर योजना ने जल संरक्षण को नया आयाम दिया। प्रत्येक जिले में 75 जलाशयों के निर्माण या पुनरुद्धार का लक्ष्य रखा गया। अब तक 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर तैयार हो चुके हैं। इनसे वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और सिंचाई सुविधा बढ़ी है। यह मिशन आजादी का अमृत महोत्सव का हिस्सा है और सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। नमामी गंगे परियोजना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नदी फ्रंट विकास और जैव विविधता संरक्षण के कार्य भी हो रहे हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनाके तहत प्रति बूंद अधिक फसल का मंत्र दिया गया, जिसमें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा मिला। कैच द रेन अभियान ने वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन बनाया। प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा कि पानी बचाना स्वच्छ भारत मिशन की तरह सामूहिक दायित्व है। उनके मार्गदर्शन में लाखों जल संरचनाएं बनीं, चेकडैम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार हुआ। इन प्रयासों का परिणाम साफ दिखता है। भूजल रिचार्ज बढ़ा है, ओवर-एक्सप्लॉइटेड इकाइयों की संख्या घटी है और कई जिलों में जल संकट कम हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी का विजन केवल बुनियादी ढांचा निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि जल संरक्षण को संस्कृति और आदत बनाने का है। वे बच्चों को वाटर वॉरियर्स बनाने और समाज को जिम्मेदार बनाने पर जोर देते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण भारत की विकास यात्रा का अभिन्न अंग बन गया है। ये प्रयास न केवल वर्तमान की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-समृद्ध भारत का आधार तैयार कर रहे हैं। जल संरक्षण अब मात्र नीति नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बन चुका है। मध्यप्रदेश भी, जिसे प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध माना जाता है, जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल कर रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान एक राज्य स्तरीय जन आंदोलन है। वर्ष 2025 में यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक चलाया गया। चालू वर्ष-2026 में भी यह अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन करना है, ताकि प्रदेश जल संकट से मुक्त हो सके।अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों, चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, गहरीकरण, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। नए जल स्रोतों का निर्माण, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पुरानी जल संरचनाओं का पुनरुद्धार अभियान के प्रमुख स्तंभ हैं। प्रदेश में 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम के संधारण, हजारों तालाबों के गहरीकरण, नई जल संरचनाओं का निर्माण और लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है। यहां की अर्थव्यवस्था और किसानों की समृद्धि जल पर निर्भर है। बढ़ती जनसंख्या, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जल प्रदूषण ने जल संकट को गहरा दिया है। इस अभियान का महत्व इन्हीं चुनौतियों के समाधान में निहित है। अभियान से वर्षा जल का अधिकतम संचयन होता है, जिससे सिंचाई सुविधा बढ़ती है। भूजल स्तर में वृद्धि से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी फसल उत्पादन संभव होता है। खेत तालाबों, रिज-टू-वैली मॉडल और जल संरक्षण संरचनाओं से किसानों की आय बढ़ रही है। मध्यप्रदेश में प्राचीन बावड़ियां, तालाब और जल संरचनाएं सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनका जीर्णोद्धार सांस्कृतिक गौरव बढ़ाता है और पर्यटन को बढ़ावा देता है।अभियान जनभागीदारी पर आधारित है। पानी चौपाल जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलें, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे जल संरक्षण की संस्कृति विकसित हो रही है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से सामुदायिक जिम्मेदारी बढ़ रही है। इस अभियान से मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में भारी वृद्धि, नदियों का पुनःप्रवाह और लाखों जल संरचनाओं का निर्माण राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यह अभियान केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प है।यशस्वी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में यह जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में सफल हो रहा है।यह मध्यप्रदेश के भविष्य की नींव है। यह हमें सिखाता है कि जल ही जीवन है और उसकी रक्षा हमारा दायित्व है। यदि हम आज जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां समृद्ध जल संसाधनों का उपयोग कर सकेंगी। प्रदेशवासियों को इस अभियान से जुड़कर जल संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। स्वच्छ, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक इसमें अपना योगदान देगा।  

गर्मी का कहर शुरू, नौतपा के पहले दिन ही हीटवेव अलर्ट; लेकिन राहत की भी खबर

नई दिल्ली आज यानी 25 मई से नौतपाक की शुरुआत हो गई है। यह 2 जून तक जारी रहेगा। यानी इन 9 दिनों में भयंकर गर्मी पड़ने वाली है। हिंदू पंचांग के मुताबिक ये ऐसे 9 दिन होते हैं जिनमें सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं और ऐसे में तेज धूप के साथ ही गर्म हवाएं गर्मी को चरम पर पहुंचा देती हैं। अगर ज्योतिषीय गणना की बात करें तो रोहिणी नक्षत्र लगते ही नौतपा की शुरुआत हो जाती है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर और पश्चिम भारत के कई इलाकों में अधिकतम तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। वहीं 28 से 30 मई के बीच तेज आंधी की भी चेतावनी जारी की गई है। कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी पड़ रही है। रविवार को यहां अधिकतम तापमान 46 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम विभाग का कहना है कि 28 मई तक अभी गर्मी से राहत नहीं मिलने वाली है। इसके बाद बारिश से तापमान में 6 से 7 डिग्री सेल्सियस की कमी आ सकती है। वहीं 25 मई को बादल छाने की संभावना है। हालांकि गर्मी से राहत की संभावना कम ही है। यहां भयंकर लू का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार बिहार, झारखंड और ओडिशा में मौसम करवट ले सकता है। यहां मध्यम बारिश की संभावना है। ओडिशा और झारखंड में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। वहीं दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भयंकर गर्मी का प्रकोप बना रहेगा। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में तापमान 47 से 48 डिग्री तक जा सकता है। राजस्थान के कई इलाकों में तापमान 48 डिग्री तक जाने की संभावना है। कहां है बारिश का अनुमान आईएमडी के मुताबिक पूर्वोत्तर के राज्यों असम, मेघायलय, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में बारिश हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा हवाओं की स्पीड भी 40 से 50 किमी प्रति घंटे तक जा सकती है। बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण के राज्यों में बारिश दक्षिण के राज्यों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और कर्नाटक के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इसके अलावा हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा रह सकती है। आंध्र प्रदेश के रायलसीमा और तेलंगाना में भी बादल छाए रहेंगे और कई जगहों पर बारिश हो सकती है। महाराष्ट्र में 47.2 डिग्री तक पहुंचा पारा कई राज्यों में रविवार को भीषण गर्मी पड़ी जिनमें से महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का ब्रह्मपुरी 47.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सबसे गर्म स्थान रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। हालांकि, मौसम विभाग ने 29 मई से गर्मी से धीरे-धीरे राहत मिलने का अनुमान लगाया है। आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान में कहा, ''अगले सात दिनों तक मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में तथा अगले 3-5 दिनों तक पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है।'' पश्चिमी विक्षोभ दिलाएगा राहत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 28-29 मई को एक नए पश्चिमी विक्षोभ से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जिसके चलते राज्य के कुछ हिस्सों में तेज आंधी, 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के साथ हल्की बारिश हो सकती है। उत्तर प्रदेश में, राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.4 डिग्री अधिक है, और न्यूनतम तापमान 28.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.2 डिग्री अधिक है। बांदा राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.3 डिग्री अधिक है।

फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, मध्यप्रदेश में तेल कीमतों ने तोड़े रिकॉर्ड

भोपाल   ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के हालातों के चलते देश में एक बार फिर पेट्रोल – डीजल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां पेट्रोल – डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तेल कंपनियों ने 25 मई को फिर ईंधन के दाम बढ़ा दिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेट्रोल पर 2.61 रुपए और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, जिसे आम लोगों के जेब पर बड़ा झटका माना जा रहा है। पेट्रोलियम कंपनी की ओर से जारी पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों पर गौर करें तो एमपी के कई शहरों में पेट्रोल के दाम 115 रुपए के करीब पहुंच गए हैं, जबकि डीजल 100 रुपए के पार निकल गया है। भोपाल में सोमवार सुबह 6 बजे से पेट्रोल की प्रति लीटर दर से कीमत 114.65 रुपए और डीजल 99.74 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। उज्जैन में सबसे महंगा पेट्रोल प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन सबसे महंगा हो गया है, जहां पेट्रोल 115.03 रुपए और डीजल 100.11 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया। इंदौर में पेट्रोल 114.54 रुपए और डीजल 99.57 रुपए हो गया है। जबलपुर और ग्वालियर में भी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 11 दिन में चौथी बार बढ़े दाम मई महीने में यह चौथी बार है जब तेल कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई हैं। 15 मई से शुरू हुई बढ़ोतरी के बाद अब तक पेट्रोल-डीजल करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इस महीने कब-कब बढ़े रेट -15 मई को पहली बार 3.14 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 3.11 रूपए प्ति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। -19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 90 पैसे की बढ़ोतरी हुई। -23 मई को 87 रूपए पेट्रोल पर तो वहीं, 91 पैसे डीजल पर बढ़ाए गए। -25 मई यानी आज एक बार फिर पेट्रोल पर 2.61 रूपए और डीजल पर 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। बढ़ेगा मालभाड़ा, महंगी होंगी रोजमर्रा की चीजें डीजल महंगा होने का सीधा असर परिवहन पर पड़ेगा। ट्रक और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने से सब्जियां, फल, राशन और दूसरे जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। स्कूल बस, ऑटो और सार्वजनिक परिवहन का किराया भी बढ़ने के संकेत हैं। खेती-किसानी पर भी असर पड़ेगा। ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने का खर्च बढ़ने से किसानों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर अनाज और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतें बनी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताया जा रहा है। ईरान-अमेरिका तनाव के बाद क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण दाम बढ़ाना जरूरी हो गया था। कमलनाथ का सरकार पर निशाना पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार महंगाई रोकने के बजाय पूरा बोझ जनता पर डाल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कच्चे तेल के दाम कम थे तब जनता को राहत नहीं दी गई और अब लगातार कीमतें बढ़ाई जा रही हैं।

मां, मेरी दौड़ देखी? गुरिंदर वीर ने 100 मीटर में बनाया नया इतिहास

जालंधर  जालंधर के गांव पतिआल के युवा धावक गुरिंदर वीर सिंह ने भारतीय खेल जगत में नया इतिहास रच दिया है। रांची में 23 मई को आयोजित 29वें राष्ट्रीय वरिष्ठ प्रतियोगिता कप में गुरिंदर ने 100 मीटर दौड़ महज 10.09 सेकंड में पूरी कर नया राष्ट्रीय कीर्तिमान अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भी अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है।  गुरिंदर की जीत के बाद पूरे जालंधर में खुशी का माहौल है। अंतिम दौड़ खत्म होते ही घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। करीब 90 वर्षीय दादी चरण कौर ने पोते को लड्डू खिलाकर आशीर्वाद दिया जबकि पिता कमलजीत सिंह की आंखें खुशी से नम हो गईं। दौड़ खत्म होने के तुरंत बाद गुरिंदर ने सबसे पहला फोन अपनी मां गुरविंदर कौर को किया और पूछा मम्मी देखी मेरी दौड़? मां ने जवाब दिया हां बेटा, तूने कमाल कर दिया। बाद में पिता से बात करते हुए गुरिंदर ने मुस्कुराकर कहा डेडी दस्स फेर किदां? बेटे की यह बात सुन परिवार की खुशी और बढ़ गई। पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी हैं पिता गुरिंदर के पिता कमलजीत सिंह पंजाब पुलिस से सहायक उप निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं और वॉलीबॉल खिलाड़ी भी रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि गुरिंदर बचपन से ही गांव की गलियों, खेतों और पगडंडियों में दौड़ता रहता था। 12 साल की उम्र में उसने गंभीरता से अभ्यास शुरू किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। रोज आठ घंटे अभ्यास करते हैं गुरिंदर पिता के अनुसार गुरिंदर रोज करीब आठ घंटे अभ्यास करता था। कई बार परिवार से बात करने तक का समय नहीं होता था। अंतिम दौड़ से पहले उसने अपने सीने पर लगे क्रमांक के पीछे 10.10 सेकंड का लक्ष्य लिख रखा था। कीर्तिमान बनाने के बाद उसने उसी क्रमांक की ओर इशारा कर जश्न मनाया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी गुरिंदर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पंजाब के इस गबरू ने देश और दुनिया में राज्य का नाम रोशन किया है। गुरिंदर के प्रशिक्षक सर्बजीत सिंह ने कहा कि 10.09 सेकंड का समय भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि गुरिंदर ने राष्ट्रमंडल खेलों का अर्हता समय भी पार कर लिया है। अब उनका लक्ष्य ओलंपिक, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतना है। महान धावक मिल्खा सिंह और उसैन बोल्ड को अपना आदर्श मानने वाले गुरिंदर वीर आज पंजाब और देश के युवाओं के लिए नई प्रेरणा बन गए हैं।  

थमा चुनाव प्रचार, अब वोटिंग की बारी! पंजाब के 105 निकायों में कल डाले जाएंगे वोट

चंडीगढ़  पंजाब के 105 नगर निकायों के लिए 26 मई को मतदान होगा और 29 मई को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे। रविवार को चुनावी शोर थम गया और अब रैलियों व सभाओं पर पाबंदी रहेगी और उम्मीदवार घर-घर जाकर प्रचार करेंगे। आज पोलिंग पार्टियां रवाना होंगी। पंजाब के आठ नगर निगमों, 76 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों की सीटों के लिए यह चुनाव हो रहे हैं। चुनाव के लिए 7555 उम्मीदवार मैदान में हैं क्योंकि 79 उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन लिया गया है। 2393 उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया था। इनमें सबसे अधिक उम्मीदवार सत्तापक्ष आम आदमी पार्टी (आप) के चुनाव लड़ रहे हैं जिनकी संख्या 1801 हैं। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के 1550, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 1316, शिरोमणि अकाली दल के 1251, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के 96, 1528 निर्दलीय और 13 अन्य उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। निकाय चुनाव सभी दलों के लिए अहम हैं, क्योंकि इसे 2027 में विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। अकाली दल ने की मतदान का समय बढ़ाने की मांग  शिरोमणि अकाली दल ने राज्य चुनाव आयोग से मतदान का समय बढ़ाने की मांग की है। अकाली नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि मतदान का समय सुबह 8 से 5 बजे की जगह सुबह 7 से शाम 6 बजे तक बढ़ाया जाना चाहिए। चीमा ने कहा कि प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप है जिसका असर मतदान प्रतिशत पर पड़ सकता है। अगर सुबह और शाम के चलते मतदान का समय दो घंटे बढ़ा दिया जाए तो उससे मतदान प्रतिशत में वृद्धि होगी। मौजूदा समय मजदूरों के लिए भी उपयुक्त नहीं है क्योंकि वो काम के कारण अपने मताधिकार का उपयोग नहीं कर पाएंगे।  

हिमंत सरकार का बड़ा कदम! UCC बिल पर विपक्ष का जोरदार विरोध, आदिवासियों को राहत

गुवाहाटी  असम कैबिनेट की मंजूरी के ठीक दो हफ्ते बाद राज्य सरकार ने सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर दिया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ओर से संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने सदन के पटल पर द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, बिल, 2026 पेश किया। इस बेहद अहम विधेयक पर 27 मई को चर्चा और इसे पारित किए जाने की संभावना है। हालांकि, विपक्षी विधायकों ने असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि इसे प्रस्तुत करने से पहले हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए।  इससे पहले 13 मई को मुख्यमंत्री सरमा के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक हुई थी। तब सरकार ने घोषणा की थी कि 21 से 26 मई तक चलने वाले मौजूदा विधानसभा सत्र के दौरान यह कानून लाया जाएगा। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसे सत्र के अंतिम दिन पेश किया जाएगा। कानून के पांच मुख्य आधार राज्य सरकार के मुताबिक, इस विधेयक के मसौदे को असम की विशिष्ट जनसांख्यिकीय विविधता और सामाजिक ताने-बाने के अनुकूल तैयार किया गया है। यह नया कानून मुख्य रूप से नागरिक समाज से जुड़े पांच बड़े मुद्दों को नियमित करेगा। बहुविवाह का खात्मा: राज्य के भीतर बहुविवाह की प्रथा पर पूरी तरह कानूनी रोक लगेगी। शादी की समान उम्र: विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र का एक तय मानक लागू होना। तलाक और निकाह का पंजीकरण: सभी शादियों और तलाकों का सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होना अनिवार्य होगा। बेटियों को बराबर का हक: पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार। लिव-इन का कानूनी हिसाब: बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़ों यानी लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कड़े नियम और पंजीकरण अनिवार्य। यूसीसी लागू करने वाला तीसरा राज्य बनेगा असम यदि यह विधेयक पास हो जाता है, तो उत्तराखंड और गुजरात के बाद असम देश में यूसीसी विधेयक पारित करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा। उत्तराखंड ने साल 2024 में यूसीसी लागू किया था। वह संविधान के नीति निदेशक तत्वों के तहत ऐसा कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना था। संविधान का अनुच्छेद 44 कहता है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करेगा। इस साल जनवरी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में यूसीसी लागू होने का एक वर्ष पूरा होने पर इसकी सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि इस कानून ने महिलाओं को सशक्त बनाया है और उनकी सुरक्षा बढ़ी है। सीएम धामी ने कहा था कि यूसीसी को लेकर लोगों की तमाम शंकाएं और अफवाहें खत्म हो चुकी हैं। पांच लाख से अधिक मामलों में निजता के उल्लंघन का एक भी मामला सामने नहीं आया है। उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, अब ऑनलाइन माध्यम से रिकॉर्ड संख्या में शादियां पंजीकृत हो रही हैं। महज एक साल में 4,74,447 विवाह ऑनलाइन पंजीकृत किए गए हैं। दूसरी ओर, गुजरात विधानसभा ने भी इसी साल मार्च में महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और समानता देने के उद्देश्य से यूसीसी विधेयक पारित किया है। भाजपा का राष्ट्रव्यापी एजेंडा  ये विधेयक देश भर में समान नागरिक संहिता लागू करने के भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्य के अनुरूप हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में मुर्शिदाबाद की रैली में कहा था कि तुष्टिकरण की राजनीति को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए पश्चिम बंगाल में भी यूसीसी लागू किया जाएगा। हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 126 सदस्यीय विधानसभा में 82 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन में एनडीए की कुल सीटें 102 तक पहुंच गई हैं। विपक्ष का कड़ा विरोध और सियासी सरगर्मी सत्र की शुरुआत से ही इस विधेयक को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सत्ता पक्ष का कहना है कि सरकार ने पहले ही सत्र में यूसीसी लाकर जनता से किया अपना सबसे बड़ा चुनावी वादा निभाया है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और राइजोर दल जैसे विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने कानून को लाने की टाइमिंग और इसके सामाजिक असर को लेकर सदन में विरोध दर्ज कराया है। 

भोजशाला में ऐतिहासिक पल, CM पहली बार करेंगे मां वाग्देवी के दर्शन

धार  भोजशाला इन दिनों पूरी तरह भगवामय नजर आ रही है। मां सरस्वती मंदिर के रूप में मान्यता मिलने के बाद यहां लगातार धार्मिक आयोजन हो रहे हैं और देशभर से श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ गया है। सोमवार को इस ऐतिहासिक स्थल पर एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं भोजशाला पहुंचकर गर्भगृह में विराजित मां वाग्देवी के दर्शन और पूजन करेंगे। इतिहास में पहली बार इतिहास में यह पहला (Historic Day) अवसर माना जा रहा है, जब मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए कोई राजनीतिक हस्ती भोजशाला में विधिवत दर्शन-पूजन करने पहुंचेगी। इसे लेकर हिंदू समाज और स्थानीय नागरिकों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है।  वसंत पंचमी की तर्ज पर सजी भोजशाला धारभोजशाला परिसर को बसंत पंचमी की तर्ज पर सजाया गया है। परिसर और आसपास के क्षेत्र में भगवा ध्वज, पताकाएं और स्वागत बैनर लगाए गए हैं, जिससे पूरा वातावरण धार्मिक आस्था और उत्सव की भावना से सराबोर हो उठा है। अटल से मोदी तक कई दिग्गज कर चुके हैं दर्शन भोजशाला लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र रही है। यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, अशोक सिघल, प्रवीण तोगडिय़ा, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा और शिवराज सिंह चौहान जैसे कई बड़े नेता और हिंदू संगठनों से जुड़े चेहरे दर्शन कर चुके हैं। पीएम तक पहुंच चुके हैं भोजशाला वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भोजशाला पहुंच चुके हैं। अब बतौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दौरा राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री इस अवसर पर 'भोजसरस्वती लोक' जैसी बड़ी घोषणा भी कर सकते हैं। 900 मीटर तक जनता के बीच पैदल चलेंगे मुख्यमंत्री निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सोमवार सुबह करीब 10 बजे हेलीकॉप्टर से धार पहुंचेंगे। डीआरपी लाइन हेलीपेड से वाहन द्वारा राजवाड़ा पहुंचने के बाद वहां से भोजशाला तक भव्य रोड शो निकलेगा। करीब 900 मीटर लंबा यह मार्ग पूरी तरह स्वागत द्वारों, बैनरों और धार्मिक सजावट से सुसज्जित किया गया है। रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, साधु-संत और स्थानीय नागरिक मौजूद रहेंगे। भोजशाला पहुंचने पर मुख्यमंत्री पुलिस चौकी के सामने मुख्य प्रवेश द्वार से पैदल गर्भगृह तक जाएंगे और मां वाग्देवी का पूजन-अर्चन करेंगे। मुख्यमंत्री का धार प्रवास दो घंटे से अधिक समय तक रहने की संभावना है। धारेश्वर और मां गढ़ कालिका के भी करेंगे दर्शन मुख्यमंत्री अपने धार दौरे के दौरान धारेश्वर मंदिर और मां गढ़ कालिका मंदिर में भी दर्शन-पूजन करेंगे। देवीजी मंदिर क्षेत्र में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत विशेष श्रमदान कार्यक्रम रखा गया है। मुख्यमंत्री घाट की साफ-सफाई में भी हिस्सा लेंगे और जल संरक्षण का संदेश देंगे। गंगा दशहरा आयोजन में हितग्राहियों को देंगे सौगात मुख्यमंत्री का यह दौरा शासकीय कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसे 'गंगा दशहरा कार्यक्रम' नाम दिया गया है। मुख्य आयोजन मोती बाग चौक पर होगा, जहां विशाल वाटरप्रूफ डोम और भव्य मंच तैयार किया गया है। सभा के दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित करेंगे। साथ ही विकास कार्यों और नई परियोजनाओं की घोषणाएं भी संभव मानी जा रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं।

इबोला संकट के बीच कांगो में बवाल, जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

 बुनिया दुनिया एक बार फिर महामारी के खतरे का सामना कर रही है. अफ्रीका के कुछ देशों में इबोला वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इबोला वायरस को इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी  घोषित किया है. WHO प्रमुख ने बताया कि कांगो में इबोला के 900 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 101 मामलों की पुष्टि की गई है।  कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के इतुरी प्रांत में रवामपारा और मोंगबवालु इलाकों में उपचार केंद्रों को जलाए जाने की घटना भी सामने आई है. जहां सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. कुछ समुदायों में बढ़ता विरोध महामारी से निपटने की कोशिशों को और जटिल बना रहा है।  लोगों के गुस्से की बड़ी वजह इबोला से संदिग्ध मौतों के अंतिम संस्कार को लेकर बनाए गए सख्त नियम माने जा रहे हैं. क्योंकि बीमारी के और फैलाव को रोकने के लिए प्रशासन जहां संभव हो, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया खुद संभाल रहा है।   लोग स्थानीय सरकार की विफलता और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती जैसी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, इबोला को लेकर जांच प्रक्रिया में खामियों का मामला भी सामने आया है. कई चुनौतियों और गलतियों की वजह से संक्रमण की पहचान में देरी हुई है।   कई लोगों ने इस बीमारी के फैलने की गति को लेकर चिंता व्यक्त की है, खासकर इसलिए कि इबोला को अभी भी उन वायरसों में से एक माना जाता है जिनकी मृत्यु दर बहुत अधिक है और जिन देशों में इसका प्रकोप हुआ है वहां सामाजिक जीवन पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में वर्तमान में इबोला के 82 पुष्ट मामले और 7 मौतें दर्ज की गई हैं, साथ ही लगभग 750 संदिग्ध मामले और 177 संदिग्ध मौतें भी निगरानी में हैं। वहीं, पड़ोसी देश युगांडा में 5 मामलों की पुष्टि हुई है, जो सीमा पार संक्रमण फैलने के बढ़ते खतरे का संकेत देता है। अफ्रीकी संघ (एयू) ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस प्रकोप को नियंत्रण में नहीं लाया गया तो क्षेत्र के कम से कम 10 देश – जिनमें इथियोपिया, केन्या, रवांडा और दक्षिण सूडान शामिल हैं – प्रभावित होने के जोखिम का सामना कर सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना ​​है कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की सीमाओं और क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को देखते हुए, बीमारियों के प्रकोप के राष्ट्रीय सीमाओं से परे फैलने का खतरा बहुत वास्तविक है, जो मध्य और पूर्वी अफ्रीका में स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। * एक संबंधित घटनाक्रम में, अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मध्य और पूर्वी अफ्रीका में तेजी से फैल रहे इबोला प्रकोप से निपटने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए 314 मिलियन डॉलर से अधिक की तत्काल धनराशि की अपील जारी की है। योजना के अनुसार, उपर्युक्त धनराशि का अधिकांश हिस्सा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा को बीमारी के उपचार, महामारी विज्ञान निगरानी, ​​​​नियंत्रण और प्रसार की रोकथाम के लिए आवंटित किया जाएगा। प्राथमिकता वाले उपायों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट प्रबंधन प्रणाली की स्थापना, क्षेत्र के देशों के बीच समन्वित सीमा नियंत्रण को मजबूत करना, इबोला बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए विशेष रूप से एक वैक्सीन पर अनुसंधान में तेजी लाना, अतिरिक्त त्वरित प्रतिक्रिया टीमों की तैनाती और व्यापक प्रकोप की आशंका में आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति का भंडारण करना शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इबोला के खतरे का स्तर बढ़ाकर "बहुत उच्च" कर दिया है, जबकि कई पड़ोसी देश इस प्रकोप को पूरे क्षेत्र में फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य नियंत्रणों को कड़ा करने और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से यात्रा पर प्रतिबंध लगाने सहित निवारक उपायों को बढ़ा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि इस आउटब्रेक का जोखिम कांगो के लिए बहुत ज्यादा है। लेकिन दुनिया के बाकी देशों में फैलने का खतरा अभी कम है। इस आउटब्रेक को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जा चुका है। स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले पूर्वी कांगो में स्वास्थ्य कर्मी और ईबोला ट्रीटमेंट सेंटरों पर हमले हो रहे हैं। पिछले हफ्ते दो शहरों में दो केंद्रों को आग लगा दी गई। इस इलाके में सालों से सशस्त्र विद्रोही समूहों की हिंसा, लोगों का विस्थापन और सरकार की नाकामी चल रही है। अंतरराष्ट्रीय मदद में कटौती ने स्वास्थ्य सुविधाओं को और कमजोर कर दिया है। लोगों में गुस्सा और शक की भावना है। कई लोग विदेशी मदद समूहों पर भरोसा नहीं करते। एक घटना में रवाम्पारा में युवकों का एक समूह अपने दोस्त का शव वापस लेने के लिए केंद्र जलाने आया। वे आरोप लगा रहे थे कि मदद करने वाले लोग ईबोला के बारे में झूठ बोल रहे हैं। दफनाने की प्रक्रिया पर विवाद ईबोला फैलने से रोकने के लिए सरकार और मदद एजेंसियां संदिग्ध मरीजों के दफनाने का जिम्मा खुद ले रही हैं। पारंपरिक तरीके में परिवार वाले शव को तैयार करते हैं और लोग जमा होते हैं, जो संक्रमण बढ़ा सकता है। इस वजह से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। अब उत्तर-पूर्वी कांगो में शोक सभा और 50 से ज्यादा लोगों के जमा होने पर पाबंदी लगा दी गई है। कुछ दफनों की सुरक्षा के लिए सैनिक और पुलिस तैनात किए गए हैं। क्या है इलाके की स्थिति बताया जाता है कि पूर्वी कांगो में कई विद्रोही समूह सक्रिय हैं। कुछ विदेशी देशों से जुड़े हैं, कुछ ISIS से लिंक रखते हैं। रवांडा समर्थित M23 विद्रोही कुछ हिस्सों पर काबिज हैं। इटूरी प्रांत में कांगो सरकार का नियंत्रण है, लेकिन वह कमजोर है। एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस (ADF) नामक युगांडन इस्लामिस्ट समूह यहां हमले करता रहता है। डॉक्टर विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार, सुरक्षा की वजह से डॉक्टर और नर्स भाग गए हैं। स्वास्थ्य केंद्र ओवरलोड हो गए हैं और कुछ जगहों पर हालात बहुत खराब हैं। UN के मुताबिक, इटूरी में करीब 10 लाख लोग हिंसा से विस्थापित हो चुके हैं। बुनिया शहर के आसपास के डिस्प्लेसमेंट कैंप्स में फैलने का डर है, जहां पहले मामले आए थे। सामग्री की कमी मदद करने वाली टीमों के पास जरूरी उपकरण नहीं हैं – फेस शील्ड, प्रोटेक्टिव सूट, … Read more