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NTA का बड़ा फैसला! NEET UG Re-Exam में नए उम्मीदवार नहीं भर पाएंगे फॉर्म

भोपाल. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG री-एग्जाम और परीक्षा शुल्क रिफंड को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एजेंसी के अनुसार री-एग्जाम 21 जून को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इस बार परीक्षा अवधि में 15 मिनट का अतिरिक्त समय जोड़ा गया है। पहले परीक्षा शाम 5:00 बजे तक समाप्त होती थी, लेकिन अब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और अन्य औपचारिकताओं के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। परीक्षा के लिए नहीं देनी होगी अतिरिक्त फीस NTA ने स्पष्ट किया है कि री-एग्जाम में शामिल होने वाले उम्मीदवारों से किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस की जाएगी और दोबारा परीक्षा के लिए भी कोई फीस नहीं देनी होगी। इस तरह री-एग्जाम उम्मीदवारों के लिए पूरी तरह निशुल्क रहेगा। 27 मई तक जमा करनी होगी बैंक डिटेल्स परीक्षा शुल्क का रिफंड प्राप्त करने के लिए उम्मीदवारों को NTA के पोर्टल पर अपनी बैंक जानकारी जमा करनी होगी। इसके लिए एजेंसी ने ऑनलाइन सुविधा शुरू की है। उम्मीदवार लॉगिन आईडी और पासवर्ड की मदद से पोर्टल पर लॉगिन कर ‘रिफंड लिंक’ के माध्यम से अपनी बैंक डिटेल्स भर सकते हैं। बैंक डिटेल्स में खाताधारक का नाम, बैंक का नाम, अकाउंट नंबर और IFSC कोड दर्ज करना अनिवार्य होगा। उम्मीदवार चाहें तो कैंसिल चेक की स्कैन कॉपी भी अपलोड कर सकते हैं। हालांकि यह वैकल्पिक रखा गया है। NTA ने साफ किया है कि एक बार जानकारी सबमिट होने के बाद उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। बैंक डिटेल्स जमा करने की अंतिम तिथि 27 मई निर्धारित की गई है। नए उम्मीदवार नहीं भर सकेंगे फॉर्म NTA के अनुसार री-नीट परीक्षा केवल उन्हीं उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जा रही है जिन्होंने पहले आवेदन किया था। नए अभ्यर्थियों को आवेदन करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही उम्मीदवार अपने चुने गए परीक्षा माध्यम में भी कोई बदलाव नहीं कर पाएंगे। सभी उम्मीदवारों को मिलेगा फीस रिफंड एजेंसी ने कहा है कि रद्द हुई परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले सभी उम्मीदवारों को फीस रिफंड दिया जाएगा, चाहे वे री-एग्जाम में शामिल हों या नहीं। हालांकि रिफंड पाने के लिए पोर्टल पर बैंक जानकारी देना अनिवार्य होगा। परीक्षा केंद्र और शिकायत प्रक्रिया NTA के मुताबिक री-एग्जाम के लिए पहले वाला परीक्षा केंद्र मिलना जरूरी नहीं है। परीक्षा केंद्र उम्मीदवारों द्वारा चुने गए शहरों के आधार पर रैंडम तरीके से आवंटित किए जाएंगे। उम्मीदवार अपने वर्तमान पते को अपडेट कर परीक्षा केंद्र के लिए दो शहरों का विकल्प चुन सकते हैं। एग्जाम सेंटर से जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए उम्मीदवार सबूतों के साथ NTA की आधिकारिक हेल्पडेस्क ईमेल neetug2026@nta.ac.in पर संपर्क कर सकते हैं।

नमाज और सड़क विवाद पर मौलाना साजिद रशीदी का बयान वायरल, बयान पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIIA) के प्रमुख मौलाना साजिद रशीदी ने सड़क पर नमाज को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया है। रशीदी ने शिफ्ट में नमाज को जायज बताते हुए कहा कि सड़क नापाक होती है और इसलिए वहां मुसलमानों के इबादत नहीं करनी चाहिए। रशीदी ने कहा कि सड़क पर जानवर भी चलते हैं और लोग थूकते, पेशाब भी करते हैं। उन्होंने मुसलमानों को उकसाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ पार्टियां उन्हें पिटवाना चाहती हैं। एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में मौलाना रशीदी ने सड़क पर नमाज ना पढ़ने की सीएम योगी की हिदायत का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'योगी जी का बयान बिलकुल सही है। हमने कोरोना काल में भी नमाजे शिफ्ट में पढ़ी है। उन्हें पता है कि शिफ्ट में नमाज हो सकती है, इसलिए उन्होंने ऐसा बयान दिया है। पूरे देश और प्रदेश में किसी मौलवी ने उनका खंडन नहीं किया। कोई खंडन कर रहा है तो वह कांग्रेस-सपा के लोग या उनसे जुड़े नेता। उनको पता नहीं दीन के बारे में कि नमाज शिफ्ट में भी पढ़ने का प्रावधान है।' मौलाना साजिद रशीदी ने इस्लाम के दो सिद्धांतों का जिक्र करते हुए बताया कि क्यों सड़क पर नमाज पढ़ना जायज नहीं है। उन्होंने कहा, 'इस्लाम का बुनियादी सिद्धांत है कि नमाज नापाक जगह पर नहीं पढ़ी जा सकती है। सड़क पाक नहीं हो सकती है, कैसे पाक होगी जब उस पर लोग, जानवर चलते हैं, थूकते हैं और पेशाब भी करते हैं। सबकुछ होता है तो कैसे नमाज होगी। दूसरा सिद्धांत यह है कि वह मुसलमान नहीं हो सकता है जिससे किसी दूसरे को तकलीफ पहुंचे। अगर आप सगर जाम कर रहे हैं तो तकलीफ होती है लोगों को। एंबुलेंस फंस रही है, किसी को कहीं जाना है।' अपराध में शामिल थे मुसलमान: रशीदी मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि कुछ समय पहले तक अधिकतर मुसलमान अपराधों में लिप्त थे, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद अब वे शिक्षा की राह पर जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'कुछ साल पहले तक तो मुसलमान गोली भी चलाता था, डकैत भी था। कैराना (पश्चिमी यूपी का एक इलाका) का तो पूरा क्षेत्र इसी में लगा था। 60-70 फीसदी यही करते थे। आज है कोई? अब मुसलमान ने सोच लिया है कि सही जिंदगी जीने का तरीका शिक्षा है।' रशीदी ने कहा कि पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने जो फ्री हैंड दिया था मुसलमानों को उससे कई कमियां आ गईं। उससे मुसलमानों का भला नहीं हुआ, शिक्षा से दूर हो गए। रोजगार छोड़ दिया, लूट-पाट वाली बुराइयां आ गईं। आज मुसलमान 15-20 साल से और जब से भाजपा सरकार आई है मुसलमानों ने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया है। चाहे गरीब मजदूर है वह भी पढ़ा रहा है। बुलडोजर ऐक्शन पर क्या कहा रशीदी ने कहा कि बुलडोजर ऐक्शन उन लोगों के खिलाफ ही हो रहा है जो गलत काम में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा, 'जब मैं रेप, चोरी, डकैती, बदमाशी में नहीं पकड़ा जाऊंगा तो क्यों बुलडोजर चलेगा। बुलडोजर तो उस पर चलता है ना जो गलती करता है। मुसलमानों की खैर इसी में है कि सही रास्ते पर चलें। पहले कोई मुसलमान लड़का थाने में आ गया तो नेता का फोन आता था कि इसे छोड़ दो हमारा आदमी है। वह बाहर निकल कर एक और मर्डर करता था, एक और करता था, कातिल बन जाता था। बदमाश बन जाता था, उसे पीछे से समर्थन था। आज तो सीधा एनकाउंटर है। कौन बदमाशी करेगा। अक्लमंदी इसी में है कि हवा के खिलाफ मत चलो।' सपा से जुड़े एक सवाल पर रशीदी ने कहा कि, हमें नहीं चाहिए ऐसी पार्टी जिसका मकसद यह हो कि मुसलमान नमाज के लिए सड़क पर उतरे, उनकी पिटाई हो, मुकदमे लगे, जेल जाएं और उनके घर टूटे। अखिलेश यादव बनवा देंगे घर किसी का। आजम खान को तो बचा नहीं पाए।

क्या बदलने वाला है कर्नाटक का CM? सिद्धारमैया की दिल्ली दौड़ और DK शिवकुमार के पोस्टर चर्चा में

बेंगलुरु  कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर खींचतान की खबरों के बीच अब कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को 26 मई यानी मंगलवार को दिल्ली पहुंचने का फरमान जारी किया गया है। चर्चा है कि यहां सिद्धारमैया और पार्टी आलाकमान के बीच बंद कमरे में एक अहम बैठक होगी। इससे पहले सिद्धारमैया ने कहा था कि वे सिर्फ आलाकमान के बुलाने पर ही दिल्ली जाएंगे। वहीं, डीके शिवकुमार ने हाल ही में कहा है कि आलाकमान जो भी फैसला करेगा, दोनों नेता उसका पूरी तरह पालन करेंगे। ऐसे में यह बैठक कर्नाटक कांग्रेस के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। इससे CM पद को लेकर जारी सस्पेंस भी खत्म हो सकता है। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के 3 साल पूरे कर लिए हैं। इससे पहले सरकार बनने के समय से ही चर्चा है कि सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच पावर-शेयरिंग का फॉर्मूला तय हुआ था। इसके बाद जब सरकार ने ढाई साल पूरे किए, तब से ही शिवकुमार का खेमा लगातार उनको CM बनाने की मांग कर रहा है। बीते साल नवंबर में तनाव तब चरम पर पहुंच गया था जब शिवकुमार ने खुलकर अपनी मांग सामने रखी थी। डीके शिवकुमार के लिए लगे पोस्टर्स अब एक बार फिर कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में मैसूर में शिवकुमार के जन्मदिन के जश्न के दौरान उनके समर्थकों ने खास केक काटा, जिस पर लिखा था- ‘नेक्स्ट सीएम डी के बॉस’, यानी ‘अगले मुख्यमंत्री डीके बॉस।’ वहीं राजधानी बेंगलुरु से लेकर बेलगावी तक, पूरे कर्नाटक में शिवकुमार के बड़े-बड़े पोस्टरों और कट-आउट्स भी लगाए गए हैं जिनमें ऐसे ही नारे लिखे हैं। दिल्ली दरबार में किन मुद्दों पर होगी बातचीत? न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस सूत्रों ने बताया है कि दिल्ली में होने वाली बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेता शामिल हो सकते हैं। इस दौरान दोनों गुटों के बीच जारी तनाव को कम करने की कोशिश की जाएगी। वहीं राज्य में कैबिनेट में भी बड़े फेरबदल पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार के 3 साल पूरे होने पर कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है और नए और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है, ताकि दोनों गुटों के विधायकों को संतुष्ट रखा जा सके।

छात्रों के लिए बड़ा अपडेट! 28 मई की CUET UG परीक्षा स्थगित, जल्द आएगी नई डेट

 लखनऊ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (यूजी) के तहत 28 मई को होने वाली परीक्षा को ईद-उल-अजहा (बकरीद) के चलते स्थगित कर दिया है। यह परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जानी थी। अब जल्द ही इसकी नई तिथि घोषित की जाएगी। इसकी सूचना रविवार को एनटीए ने अपनी वेबसाइट पर जारी की है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे एनटीए की अधिकारिक वेबसाइट (https://nta.ac.in) और https://cuet.nta.nic.in/) को नियमित रूप से देखते रहें। क्यों टाली गई परीक्षा NTA के मुताबिक, सरकार की ओर से ईद-उल-जुहा (बकरीद) की छुट्टी की तारीख में बदलाव किया गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए 28 मई 2026 को होने वाली CUET-UG परीक्षा की दोनों शिफ्ट्स को स्थगित कर दिया गया है।  दोनों शिफ्ट्स प्रभावित एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि 28 मई को निर्धारित सुबह और दोपहर दोनों शिफ्ट्स की परीक्षाएं अब नहीं होंगी. इस दिन परीक्षा देने वाले सभी उम्मीदवारों पर यह फैसला लागू होगा. न्यूज एजेंसी ANI ने भी इस जानकारी अपने एक्स हैंडल से शेयर किया है।  नई तारीख का इंतजार NTA ने कहा है कि प्रभावित उम्मीदवारों के लिए नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाएगी. छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें, ताकि उन्हें ताजा अपडेट मिल सके।  क्या है CUET-UG परीक्षा CUET-UG (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) देशभर में आयोजित होने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा है. इसके जरिए केंद्रीय, राज्य और निजी विश्वविद्यालयों समेत 280 से ज्यादा संस्थानों में स्नातक कोर्स में दाखिला मिलता है।  आधिकारिक नोटिस भी जारी NTA ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी किया है, जिसमें 22 मई के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के मेमोरेंडम का हवाला दिया गया है. साथ ही छात्रों को हेल्पलाइन नंबर और ईमेल के जरिए सहायता लेने की सुविधा भी दी गई है.

फाल्टा के नतीजों ने बढ़ाई ममता-राहुल की टेंशन, आखिर BJP ने कैसे पलट दिया खेल?

कलकत्ता पश्च‍िम बंगाल के फाल्टा व‍िधानसभा चुनाव का नतीजा आया और सब शॉक्‍ड रह गए. क्‍योंक‍ि यह सिर्फ एक सीट का रिजल्ट नहीं, मुस्‍ल‍िमों के वोट बैंक को अपना हक समझने वाली पार्टियों के ल‍िए मैसेज है. क्‍योंक‍ि यहां कुल वोट पड़े 2,10,192… और इसमें से 72% वोट अकेले बीजेपी के कैंड‍िडेट को म‍िल गए. सवाल ये क‍ि जब हिंदू आबादी यहां करीब 63से 65% के आसपास है, तो बीजेपी को 71% वोट कैसे मिल गए? व‍िपक्ष इसे ध्रुवीकरण कह सकता है, लेकिन नतीजे बताते हैं क‍ि या तो बीजेपी को एक-एक ह‍िन्‍दू वोट म‍िल गए और व‍िपक्ष को स‍िर्फ मुसलमानों के वोट म‍िले, एक भी ह‍िन्‍दू ने वोट नहीं क‍िया और या फ‍िर तमाम मुसलमानों ने भी खुलकर बीजेपी को सपोर्ट क‍िया. लेकिन असली कहानी इतनी सीधी नहीं है ।  फाल्टा विधानसभा में इस बार र‍िकॉर्ड 87% वोट‍िंग हुई थी. यानी लोगों ने इस बार वोट डालने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी. ये भी नहीं कह सकते क‍ि मुस्‍ल‍िम वोटर घर से नहीं न‍िकले. अब नतीजा भी देख लीजिए. वोटिंग पैटर्न को देखें तो यह मुकाबला कई उम्मीदवारों के बीच था, लेकिन असल बढ़त बीजेपी को तब मिली जब मैदान में मुकाबला पूरी तरह एकतरफा होता दिखाझ बीजेपी ने लगभग हर बूथ पर मजबूत प्रदर्शन किया और बड़े वोट शेयर में तब्दील किया।  क‍िसे क‍ितने वोट म‍िले बीजेपी: 149666 वोट (71.2%) सीपीएम: 40645 वोट (19.34%) कांग्रेस: 10084 वोट (4.8%) टीएमसी: 7778 वोट (3.7%) अन्य/NOTA: बाकी हिस्सा आप सोच रहे होंगे क‍ि इसमें क्‍या खास है. लेकिन ठहरिए! असली पेंच यहीं छुपा है. फाल्टा विधानसभा में हिंदू मतदाता करीब 62 से 65% हैं और मुस्लिम मतदाता लगभग 34% से 36% के बीच हैं।  गणित के सामान्य नियम से भी देखें, तो अगर 100% हिंदू बीजेपी को वोट दे देता, जो कि आज तक कभी नहीं हुआ, तब भी बीजेपी का आंकड़ा 62-65% पर आकर थम जाना चाहिए था. लेकिन देवांग्शु पांडा को मिले हैं 71.2% वोट! यानी सीधे-सीधे हिंदू आबादी के कुल अनुपात से भी 10% से 11% ज्यादा वोट।  तो क्या फाल्टा के मुस्लिमों ने भी चुपके से कमल के बटन पर उंगली दबाई? या फिर कांग्रेस और लेफ्ट का वोट बैंक पूरी तरह मटियामेट होकर बीजेपी में समा गया? और सबसे बड़ा सस्पेंस… दीदी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान को सिर्फ 3.7% वोट क्यों मिले? खेल हुआ कैसे?  तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार जहांगीर खान ने ऐन वक्त पर मुकाबले से अपना नाम वापस ले लिया था या यूं कहें कि वे चुनावी रेस से तकनीकी या राजनीतिक कारणों से बाहर हो गए. लेकिन चूंकि तब तक बैलट पेपर प्रिंट हो चुके थे और ईवीएम सेट हो चुकी थी, इसलिए उनका नाम और सिंबल ‘दो फूल’ मशीन पर मौजूद रहा. नतीजा? मैदान में न होने के बावजूद जहांगीर खान के नाम पर 7,783 वोट (3.7%) पड़ गए. इसमें दिलचस्प बात ये है कि उन्हें ईवीएम से सिर्फ 6,257 वोट मिले, लेकिन पोस्टल बैलट से 1,526 वोट मिले, जो दिखाता है कि सरकारी कर्मचारियों या ड्यूटी पर तैनात लोगों का एक हिस्सा आंख मूंदकर टीएमसी के नाम पर बटन दबा गया।  दीदी के कैंडिडेट का मैदान से हट जाना ही इस चुनाव का टर्निंग पॉइंट बना. डायमंड हार्बर जैसी हाई-प्रोफाइल लोकसभा सीट के तहत आने वाले फाल्टा में टीएमसी का जमीन पर सक्रिय न होना एक बड़ा वैक्यूम पैदा कर गया. जब सत्ताधारी दल का मुख्य चेहरा ही गायब हो गया, तो टीएमसी का जो कोर वोटर था-विशेषकर मुस्लिम आबादी और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी… वे पूरी तरह असमंजस में आ गए।  जहां पुरानी थ्योरी फेल हो गई फाल्टा विधानसभा मुख्य रूप से एक ग्रामीण इलाका है. इसके सामाजिक ढांचे को समझने के लिए हमें इसके डेमोग्राफी के आंकड़ों को देखना होगा।      धार्मिक समीकरण: इस निर्वाचन क्षेत्र में हिंदू मतदाताओं की संख्या लगभग 52% से 65% के बीच है. वहीं मुस्लिम मतदाताओं की आबादी काफी निर्णायक है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 34% से 36% (कुछ अनुमानों में 38% तक) हिस्सा बनाती है. हासिमनगर, गोपालपुर, फतेहपुर, और भदुरा जैसे क्षेत्र मुस्लिम बहुल माने जाते हैं, जहाँ पारंपरिक रूप से टीएमसी की मजबूत पकड़ रही है।      जातीय समीकरण (SC फैक्टर): धार्मिक विभाजन के अलावा, यहां की स्थानीय जातियों में अनुसूचित जाति (SC) का बहुत बड़ा प्रभाव है. 2011 की जनगणना और मतदाता सूची के विश्लेषण के अनुसार, फाल्टा विधानसभा में अनुसूचित जाति (SC) के मतदाताओं की संख्या लगभग 25.66% है. स्थानीय ग्रामीण अंचलों और गांवों (जैसे फाल्टा गांव) में कई जगह SC आबादी 80% से भी अधिक है. शेष लगभग 33% से 35% आबादी सामान्य और अन्य पिछड़ी जातियों जैसे कि महिष्य, सद्गोप व अन्य बंगाली हिंदू समुदाय की है।  तो क्या मुस्लिमों ने भी बीजेपी को वोट दिया? पश्चिम बंगाल में यह राजनीतिक धारणा बहुत मजबूत है कि मुस्लिम समुदाय कभी भी किसी भी परिस्थिति में बीजेपी को वोट नहीं देता. लेकिन फाल्टा में परिस्थितियां बिल्कुल जुदा थीं. जब टीएमसी का उम्मीदवार मैदान में सक्रिय नहीं था, तो मुस्लिम मतदाताओं के सामने सबसे बड़ा संकट यह था कि उनका पारंपरिक ठिकाना गायब था. उनके पास दो ही रास्ते बचे थे या तो वे कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला या सीपीआई(एम) के शंभू नाथ कुर्मी की तरफ जाएं, या फिर स्थानीय सत्ता विरोधी लहर का हिस्सा बन जाएं . आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस को मात्र 10,084 वोट (4.8%) मिले और सीपीआई(एम) को 40,645 वोट (19.34%) मिले. अगर मुस्लिम आबादी ने एकमुश्त लेफ्ट या कांग्रेस को वोट दिया होता, तो इन दोनों पार्टियों का योग बहुत बड़ा होता. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ग्राउंड रिपोर्ट इशारा करती है कि मुस्लिम बहुल पॉकेट्स (जैसे हासिमनगर और फतेहपुर) के कुछ हिस्सों में, विशेषकर युवा मुस्लिम मतदाताओं ने, रोजगार, स्थानीय विकास और केंद्रीय योजनाओं के प्रभाव में आकर पहली बार ‘कमल’ का बटन दबाया. हालांकि यह कोई सामूहिक बदलाव नहीं था, लेकिन इस ‘साइलेंट शिफ्ट’ ने बीजेपी के वोट शेयर को अप्रत्याशित ऊंचाई पर पहुंचा दिया . हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण 71.2% के जादुई आंकड़े के पीछे की जो दूसरी और सबसे सटीक थ्योरी है वह है हिंदू वोटों का शत-प्रतिशत कंसॉलिडेशन. जब किसी क्षेत्र में 87% मतदान होता है, तो इसका मतलब है कि सामान्य … Read more

सोमवार को महंगाई का डबल अटैक, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े; दिल्ली-कोलकाता में नई कीमतें लागू

नई दिल्ली  सोमवार को ईंधन की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की गई, जिससे पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई, जो दो सप्ताह से भी कम समय में चौथी बढ़ोतरी है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है। प्रमुख शहरों में अब क्या है पेट्रोल की कीमत? अगर बात करें भारत के प्रमुख शहरों में तेल की कीमतों की तो दिल्ली में 102.12 रुपये, कोलकाता में 113.51, मुंबई में 111.21, नोएडा में 101.9 रुपये, बेंगलुरु में 110.6 रुपये, भूवनेश्वर में 108.8 रुपये, चंडीगढ़ में 101.5 रुपये, जयपुर में 113.4 रुपये, लखनऊ में 101.9 रुपये, पटना में 113.5 रुपये प्रति लीटर है। प्रमुख शहरों में अब क्या है डीजल की कीमत? अगर बात करें भारत के प्रमुख शहरों में डीजल के कीमत की तो नई दिल्ली में 95.2 रुपये, कोलकाता में 99.8 रुपये, मुंबई में 97.8 रुपये, चेन्नई में 99.6 रुपये, गुड़गांव में 95.4 रुपये, नोएडा में 95.4 रुपये, बेंगलुरु में 98.5 रुपये, भुवनेश्वर में 100.6 रुपये, चंडीगढ़ में 89.5 रुपये, हैदराबाद में 103.8 रुपये, जयपुर में 98.4 रुपये, लखनऊ में 95.4 रुपये, पटना में 99.5 रुपेय प्रति लीटर है। इस महीने यह चौथी बढ़ोतरी ईंधन की कीमतों में इस महीने में यह चौथी बढ़ोतरी है। 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया। इससे पहले 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे महंगा किया गया था। जबकि, 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में एवरेज 90 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी। 15 मई को भी कीमतों में ₹3 प्रति लीटर का भारी इजाफा किया गया था। अधिकतर राज्यों में पेट्रोल 100 के पार उत्तर प्रदेश में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत ₹102.76 और पश्चिम बंगाल में ₹114.20 पर पहुंच गई है। आंध्र प्रदेश में पेट्रोल ₹117.35 वहीं, असम में ₹106.21, मध्य प्रदेश में ₹115.77,बिहार में ₹114.79, राजस्थान में ₹113.93 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। महाराष्ट्र में एक लीटर पेट्रोल की कीमत ₹113.05, दिल्ली में ₹102.11, छत्तीसगढ़ में ₹109.59, गुजरात में ₹102.92, हरियाणा में ₹103.57, हिमाचल प्रदेश में ₹101.64 और जम्मू और कश्मीर में ₹108.47 प्रति लीटर हो गई है। झारखंड में 1 लीटर पेट्रोल का दाम आज से ₹107.02, केरल में ₹114.31, मणिपुर में ₹114.76, मिजोरम में ₹104.74,ओडिशा में ₹110.30, पंजाब में ₹105.90, सिक्किम में ₹109.88 हो गया है। वहीं, तेलंगाना में ₹116.78, त्रिपुरा में ₹104.89, उत्तराखंड में ₹100.96 एक लीटर पेट्रोल का दाम अब इस रेट पर है। इन राज्यों में डीजल भी 100 के पार mypetrolprice के मुताबिक आंध्र प्रदेश में डीजल की कीमत ₹105.92 पर पहुंच गई है। बिहार में भी कई शहरों में डीजल के दाम 100 रुपये लीटर के पार पहुंच गए हैं। अररिया में, औरंगाबाद, बांका, भागलपुर में डीजल 100 के पार है। छत्तीसगढ़ में डीजल के रेट 100 के पार पहुंच गया है। गुजरात के राजकोट में डीजल 100.01 रुपये लीटर है। झारखंड, केरल, मध्यप्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के कुछ शहरों में डीजल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है। क्यों बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम ईरान युद्ध के चलते तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार, कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा था। चुनाव से पहले सरकार की कोशिशें कीमतें स्थिर रखने के लिए सरकार ने पहले ही पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 प्रति लीटर की कटौती कर दी थी। पेट्रोल पर यह ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से पहले एक लीटर पेट्रोल पर कुल ₹21.90 एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी, जो घटकर ₹11.90 रह गई। इसी तरह, डीजल पर कुल केंद्रीय उत्पाद शुल्क ₹17.8 से घटकर ₹7.8 पर आ गया। इसी निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पिछले शनिवार को बढ़ी थी कीमतें पेट्रोल-डीजल की कीमतें पिछले शनिवार को बढ़ी थी, जब पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे और डीजल की कीमत में 91 पैसे की वृद्धि की गई थी। शनिवार को ही दिल्ली में सीएनजी की कीमत में भी 1 रुपया प्रति किलोग्राम की वृद्धि के साथ 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। क्यों दोबारा बढ़ी ईंधन की कीमतें? अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज पर नियंत्रण कर लिया। जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है। होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। पिछले कई हफ्तों से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत की तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल को पुरानी कीमतों पर ही बेच रही थी। लेकिन पिछले दो हफ्तों से तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। अनुमानों के अनुसार, तीनों तेल और गैस कंपनियां – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) – प्रतिदिन सामूहिक रूप से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा उठा रही थीं। इसलिए, सरकार को कीमतें बढ़ानी पड़ीं।

पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ समेत मेयर के घर को उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस

लुधियाना  पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ और लुधियाना की मेयर प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर के घर को बम से उड़ने की धमकी भरा मेल मिला है. यह मेल सोमवार की सुबह लुधियाना नगर निगम कमिश्नर की सरकारी ईमेल आईडी पर आया है. इस मेल में कहा गया है कि लुधियाना की मेयर प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर के घर को दोपहर 1:11 पर बम से उड़ा दिया जाएगा जबकि रात 9:11 पर दिलजीत दोसांझ के घर पर हमला होगा. यह मेल खालिस्‍तान नेशनल आर्मी की तरफ से भेजा गया बताया जा रहा है।  पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह-सुबह नगर निगम कमिश्नर के आधिकारिक ईमेल अकाउंट पर एक धमकी भरा मेल आया. बता दें कि इससे पहले पंजाब के कई स्कूलों को भी बम से उड़ाने की धमकियां दी जा चुकी हैं।  इस ईमेल में लिखा था कि लुधियाना की मेयर और सिंगर दिलजीत दोसांझ के ठिकानों पर जोरदार धमाके किए जाएंगे. धमकी देने वाले ने इस हरकत को अंजाम देने के लिए बकायदा एक खास तारीख और समय का भी जिक्र किया था।  ईमेल में खास लोगों और संगठन के नामों का भी हवाला सूत्रों ने बताया कि इस ईमेल में कुछ खास लोगों और एक संगठन के नामों का भी हवाला दिया गया है. पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स की टीमें इस ईमेल की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके।  बम की इस खौफनाक धमकी के मिलते ही प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गया. सुरक्षा के मद्देनजर मेयर के कैंप ऑफिस और शहर के सभी संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया है।  क्या लिखा है धमकी भरे ईमेल में? सुबह करीब 7:28 बजे आई ईमेल आईडी का विषय "B"0mb Blast – Mayor Office Ludhiana!" रखा गया है। ईमेल में धमाकों का समय भी निर्धारित किया गया है। दोपहर 1:11 बजे लुधियाना मेयर पर हमले की धमकी दी गई है। इसके साथ ही रात 9:11 बजे दिलजीत दोसांझ के लुधियाना स्थित घर पर धमाके की चेतावनी दी है। हमलावरों ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि “कोई भी मदद दिलजीत दोसांझ करेगा, मारा जाएगा।” 1984 के दंगों का जिक्र, 6 जून तक का अल्टीमेटम ईमेल में 1984 के सिख दंगों का हवाला देते हुए "खून का बदला खून" की बात लिखी गई है। धमकी देने वालों ने लिखा है कि 6 जून तक बम धमाकों के जरिए निशाना बनाया जाएगा। किसने भेजी है यह धमकी? ईमेल के अंत में इसे 'खालिस्तान नेशनल आर्मी' (KHALISTAN National ARMY) की तरफ से भेजा गया बताया गया है। इसमें भेजने वालों के रूप में दो नाम लिखे गए हैं: 1. इंजीनियर गुरनख सिंह (रुकन शाहवाला) 2. डॉ. गुरनिरवैर सिंह (खान राजादा) पुलिस महकमा और साइबर सेल पूरी तरह अलर्ट धमकी के बाद पुलिस महकमा और साइबर सेल पूरी तरह अलर्ट पर है। ईमेल के आईपी एड्रेस और सेंडर को ट्रेस करने की त्वरित जांच शुरू कर दी गई है। मेयर कार्यालय और महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा कड़ी किए जाने की संभावना है। जांच में जुटी पुलिस और खुफिया एजेंसियां लुधियाना पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस धमकी की गंभीरता को परखने और ईमेल भेजने वाले के आईपी एड्रेस को ट्रैक करने में जुट गई हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक जांच के दौरान किसी भी जगह से कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है।  इसके बावजूद, प्रशासन इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है और पूरी सतर्कता के साथ चप्पे-चप्पे पर सर्च ऑपरेशन और चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।   

मेडिकल साइंस का कमाल… चीन में मौजूद डॉक्टर ने हैदराबाद में किया ऑपरेशन

हैदराबाद तकनीक और मेडिकल साइंस ने एक बार फिर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने दुनियाभर का ध्यान खींच लिया है. चीन के वुहान में मौजूद भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने हैदराबाद में मौजूद एक मरीज की रोबोट की मदद से सफल सर्जरी की. खास बात यह रही कि डॉक्टर और मरीज के बीच करीब 3000 किलोमीटर की दूरी थी।  रिपोर्ट के मुताबिक, यह यूरेट्रल रीइम्प्लांटेशन सर्जरी थी, जिसमें यूरेटर (किडनी से यूरिन ब्लैडर तक ले जाने वाली नली) को दोबारा ब्लैडर से जोड़ा गया. यह ऑपरेशन चीन में विकसित रोबोटिक तकनीक और हाई-स्पीड 5G इंटरनेट की मदद से किया गया. पूरा ऑपरेशन करीब 90 मिनट तक चला. इस दौरान वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल और हैदराबाद की मेडिकल टीम के बीच लगातार समन्वय बना रहा।  इस उपलब्धि को भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया. उन्होंने लिखा कि भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने वुहान में बैठकर हैदराबाद के मरीज की सिर्फ 90 मिनट में रोबोट-असिस्टेड सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की।  ऑपरेशन शुरू होने से पहले वुहान और हैदराबाद के डॉक्टरों ने ऑनलाइन मरीज की मेडिकल रिपोर्ट्स की संयुक्त समीक्षा की. इसके बाद रोबोटिक आर्म्स की मूवमेंट को लेकर पूरी योजना तैयार की गई. हैदराबाद में मौजूद मेडिकल स्टाफ ने मरीज को एनेस्थीसिया दिया और ऑपरेशन थिएटर में रोबोटिक सिस्टम को तैयार किया।  इस रोबोटिक सिस्टम में बेहद बारीक सर्जिकल उपकरण और हाई-डेफिनिशन 3D कैमरे लगे थे, जो हैदराबाद से लाइव तस्वीरें वुहान भेज रहे थे. डॉ. गौस वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल में एक कंट्रोल कंसोल पर बैठे थे, जहां से उन्होंने पूरे ऑपरेशन के दौरान रोबोटिक आर्म्स को नियंत्रित किया।   200 मिलीसेकंड यानी 0.2 सेकंड रोबोट ले रहे थे निर्देश रिपोर्ट के अनुसार, 5G नेटवर्क की मदद से डॉक्टर के निर्देश सिर्फ 200 मिलीसेकंड यानी 0.2 सेकंड के भीतर हैदराबाद पहुंच रहे थे. इतनी कम देरी की वजह से रोबोटिक आर्म्स लगभग उसी समय डॉक्टर के हाथों की हरकतों को दोहरा पा रहे थे. यही वजह रही कि हजारों किलोमीटर दूर बैठने के बावजूद सर्जरी के दौरान सटीकता और नियंत्रण बनाए रखा जा सका।  हैदराबाद में मौजूद डॉक्टरों की टीम भी पूरे समय ऑपरेशन थिएटर में मौजूद रही और किसी भी इमरजेंसी स्थिति में तुरंत मदद के लिए तैयार थी.यह सर्जरी International Hepato-Pancreato-Biliary Association के चीनी चैप्टर की 10वीं कांग्रेस के दौरान दिखाई गई 26 सर्जरी में से एक थी. इनमें भारत, ब्राजील, जॉर्जिया, ग्रीस और उज्बेकिस्तान के विशेषज्ञों के साथ लाइव अंतरराष्ट्रीय रिमोट सर्जरी भी शामिल थीं।  टोंगजी हॉस्पिटल में सर्जरी विभाग के निदेशक चेन शियाओपिंग ने कहा कि AI, रोबोटिक्स और अगली पीढ़ी की कम्युनिकेशन तकनीकें दुनिया भर के हेल्थकेयर सिस्टम को तेजी से बदल रही हैं। 

सोमवार को बाजार में बुल्स का दमदार कमबैक, खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी तेजी

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार सप्ताह के पहले दिन सोमवार को खुलने के साथ ही बमबम नजर आ रहा है और दोनों इंडेक्स तूफानी तेजी के साथ ओपनिंग करने के बाद रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए दिख रहे हैं. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलते ही जहां 800 अंकों से ज्यादा की धुआंधार तेजी लेकर 76000 के स्तर को पार कर गया. तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर करीब 250 अंकों की जोरदार बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा।  खास बात ये है कि तेल कंपनियों ने देश में लगातार चौथी बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी (Petrol-Diesel Price Hike) का झटका दिया है, इसके बाद भी विदेशी कारणों की वजह से बाजार रफ्तार पकड़े हुए नजर आ रहा है।   सेंसेक्स-निफ्टी ने मचाया गदर शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने से पहले ही प्री-ओपनिंग सेशन में सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी के संकेत मिल गए थे. वहीं जब ट्रेडिंग शुरू हुई, तो BSE Sensex खुलते ही 76,000 का स्तर पार कर गया. ये इंडेक्स अपने पिछले शुक्रवार के बंद 75,415 की तुलना में जोरदार रफ्तार पकड़ते हुए 76,135 पर ओपन हुआ और महज पांच मिनट के कारोबार में ही 874 अंक उछलकर 76,289 पर जा पहुंचा।  बात NSE Nifty की करें, तो इसकी चाल भी सेंसेक्स के जैसी ही नजर आई. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,719 के मुकाबले चढ़कर 23,940 के लेवल पर खुला और फिर सेंसेक्स की तरह रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 23,984 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।  शेयर बाजार में तेजी के तीन कारण बात करें, सोमवार को शेयर मार्केट रैली के पीछे के बड़े कारणों के बारे में, तो एक नहीं बल्कि तीन-तीज वजह हैं. इनका सीधा कनेक्शन डोनाल्ड ट्रंप से भी है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान युद्ध खत्म किए जाने और दुनिया की तेल जरूरत को पूरा करने में अहम होर्मुज स्ट्रेट को फिर से जल्द खोले जाने के सिग्नल दिए हैं।  बाजार का सेंटीमेंट बदलने में दूसरा कारण भी इससे जुड़ा हुआ है, क्योंकि ट्रंप के ईरान-अमेरिका के बीच सुलह के संकेतों का सबसे बड़ा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखा, जो इस ग्लोबल टेंशन के बीच दुनिया को डरा रही थीं और महंगाई बढ़ाने में अहम रोल निभा रही थीं. सोमवार को Brent Crude Price 100 डॉलर के नीचे आ गया, जिससे महंगाई कम होने की उम्मीद बढ़ी।  तीसरा कारण भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर आया अपडेट है. दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि India-US Trade Deal को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है. यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा. बता दें रूबियो चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं।  ये 10 शेयर बने मार्केट 'हीरो' शेयर बाजार में तूफानी तेजी के बीच सबसे ज्यादा भागने वाले स्टॉक्स की बात करें, तो बीएसई लार्जकैप कैटेगरी में शामिल M&M Share (2.90%), HDFC Bank Share (2.30%), IndiGo Share (2.10%) की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे. वहीं दूसरी ओर मिडकैप में शामिल Hindustan Petroleum Share (4.20%), Ashok Leyland Share (3.60%), AU Bank Share (2.30%) की तेजी में नजर आए।  इसके अलावा स्मॉलकैप कंपनियों में NH Share (6%), Cohance Share (4.20%), IIFL Share (3%) और Inox Wind Share (2.50%) की उछाल के साथ कारोबार कर रहे थे। 

मैदान पर खेलते-खेलते थम गई धड़कन, 39 वर्षीय क्रिकेटर की मौत से सदमे में फैंस

 बेंगलुरु पूर्व तेज गेंदबाज एसएल अक्षय (SL Akshay) का रविवार को एक क्लब मैच के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वह सिर्फ 39 साल के थे. अक्षय बेंगलुरु में KSCA थर्ड डिवीजन लीग मैच में सैफायर CC की ओर से खेल रहे थे. मैच के दौरान उन्होंने चार ओवर गेंदबाजी की, लेकिन इसके बाद अचानक उन्हें बेचैनी और सीने में दर्द महसूस हुआ।   तबीयत बिगड़ने पर वह मैदान से बाहर चले गए. स्थिति गंभीर होने पर उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके. अक्षय कर्नाटक की उस मजबूत टीम का हिस्सा रहे थे, जिसने 2014-15 सीजन में रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता था. घरेलू क्रिकेट में उन्होंने अपनी तेज गेंदबाजी से पहचान बनाई थी।  ऐसा रहा अक्षय का रिकॉर्ड एसएल अक्षय ने 2011 से 2013 के बीच कर्नाटक के लिए 6 फर्स्ट क्लास, 3 लिस्ट-A और 9 टी20 मुकाबले खेले.फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अक्षय ने 18 विकेट चटकाए और 89 रन बनाए. वहीं लिस्ट-ए क्रिकेट में अक्षय के नाम पर 6 विकेट और 11 रन दर्ज हैं. टी20 क्रिकेट में अक्षर ने 8 विकेट झटकने के अलावा 10 रन स्कोर किए।  एसएसल अक्षय के निधन से भारतीय क्रिकेट में शोक की लहर दौड़ गई है, एसएल अक्षय का करियर ज्यादा लंबा नहीं चला, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ. संन्यास के बाद भी अक्षय लगातार क्रिकेट से जुड़े रहे. वह कोचिंग में सक्रिय थे और कर्नाटक अंडर-19 टीम के साथ युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का काम कर रहे थे।  कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया. KSCA ने बयान जारी कर कहा कि अक्षय ने खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में कर्नाटक क्रिकेट को अहम योगदान दिया और युवा क्रिकेटरों के विकास में उनकी भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी. अक्षय के अचानक निधन की खबर से कर्नाटक क्रिकेट जगत में शोक का माहौल है. कई खिलाड़ियों एवं क्रिकेट प्रेमियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।