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छत्तीसगढ़ तप रहा आग की तरह, नौतपा शुरू होते ही रायपुर में पारा 45°C

रायपुर नौतपा की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ में गर्मी और ज्यादा बढ़ने वाली है। मौसम विभाग ने मध्य छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में अगले 4 दिनों तक हीटवेव चलने की संभावना जताई है। राजधानी रायपुर में पारा 45 डिग्री तक पहुंच गया है। यहां रात में हवा भी हल्की गर्म चल रही है। फिलहाल प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क है और तापमान में कोई बड़ी गिरावट नहीं हुई है। बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में अधिकतम तापमान में खास बदलाव नहीं हुआ।सबसे ज्यादा तापमान राजनांदगांव में 45.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। राजनांदगांव सबसे गर्म, अंबिकापुर सबसे ठंडा बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में सबसे अधिक तापमान राजनांदगांव में 45.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुसार नौतपा के शुरुआती दिनों में रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बलौदाबाजार और महासमुंद जैसे जिलों में तेज धूप और लू का असर अधिक रहेगा। अगले 4 दिन तक राहत के आसार नहीं मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 4 दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट संभव है। हालांकि फिलहाल प्रदेश में सूखा और बेहद गर्म मौसम बना रहेगा। रायपुर के लिए जारी पूर्वानुमान में आसमान साफ रहने और दिनभर गर्म हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। भीषण गर्मी से चमगादड़ों की मौत कोरबा जिले में भीषण गर्मी और हीटस्ट्रोक के कारण करीब 200 चमगादड़ों की मौत हो गई। पाली विकासखंड के नौकोनिया तालाब क्षेत्र में सैकड़ों चमगादड़ पेड़ों से गिरकर मर गए। वन विभाग ने लू के कारण उनकी मौत की पुष्टि की है। इलाके में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी जारी बिलासपुर में तापमान 44 डिग्री पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में बाहर निकलने से बचने, ज्यादा पानी पीने और शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह दी गई है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

उत्तर प्रदेश में नई व्यवस्था लागू, योगी सरकार ने जिलों के लिए जारी किए सख्त निर्देश

 लखनऊ यूपी में लोगों की समस्याओं को लेकर सीएम योगी ने बड़ा फैसला लिया है. अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में हर सप्ताह विकास खंड स्तर पर विशेष चौपाल लगाई जाएगी, जहां जमीन विवाद, घरेलू हिंसा, पुलिस शिकायत, अवैध वसूली और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं का तुरंत निस्तारण करने की कोशिश होगी।  सीएम योगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक समीक्षा बैठक में अधिकारियों से दो टूक कहा कि जनता की समस्या का औपचारिक निस्तारण नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान होना चाहिए. यानी अब सिर्फ फाइल बंद कर देना काफी नहीं होगा. अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिकायतकर्ता को वास्तव में राहत मिली या नहीं. सरकार की योजना के मुताबिक हर विकास खंड में सप्ताह में एक दिन चौपाल लगेगी. इसमें जिले के बड़े अधिकारी भी मौजूद रहेंगे. लोगों की शिकायतें सीधे सुनी जाएंगी और मौके पर कार्रवाई की जाएगी।  किन समस्याओं पर होगा फोकस सरकार ने साफ किया है कि इन चौपालों में सिर्फ सामान्य शिकायतें नहीं, बल्कि रोजमर्रा की बड़ी परेशानियों पर खास फोकस रहेगा. इनमें प्रमुख रूप से राजस्व और जमीन विवाद, घरेलू हिंसा के मामले,  पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज न करना,  अवैध वसूली की शिकायतें, सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलना पेंशन, राशन, आवास और आयुष्मान जैसी योजनाओं से जुड़ी दिक्कतों पर सुनवाई होगी.  सरकार चाहती है कि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचे और उन्हें महीनों तक अधिकारियों के चक्कर न काटने पड़ें।  अफसरों को मिला सख्त संदेश बैठक में मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को साफ चेतावनी दी कि शिकायतों को हल्के में लेने की आदत अब नहीं चलेगी. उन्होंने कहा कि आईजीआरएस और सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए. कई बार देखा गया है कि अधिकारी सिर्फ जवाब अपलोड कर मामले को बंद कर देते हैं, जबकि जमीन पर समस्या जस की तस बनी रहती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  त्योहारों को लेकर भी सख्त निर्देश बैठक में सिर्फ चौपाल योजना ही नहीं, बल्कि आने वाले गंगा दशहरा और बकरीद को लेकर भी बड़े निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि बकरीद पर सार्वजनिक स्थलों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी. प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूरी तरह रोक रहेगी और कुर्बानी सिर्फ तय स्थानों पर ही की जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि किसी भी नई परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा. इसके साथ ही नमाज को लेकर भी निर्देश दिए गए कि सड़क जाम करके नमाज पढ़ने की अनुमति किसी भी हालत में नहीं दी जाए. नमाज सिर्फ पारंपरिक स्थानों पर ही अदा होगी।  खुले में मांस बिक्री और अवैध स्लॉटर हाउस पर सख्ती सरकार ने त्योहारों के दौरान साफ-सफाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि खुले में मांस की बिक्री नहीं होनी चाहिए. अवैध स्लॉटर हाउस किसी भी हालत में संचालित न हों. साथ ही वैध बूचड़खानों में भी तय क्षमता से अधिक पशु रखने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. बैठक में अलीगढ़, बिजनौर, सहारनपुर, रामपुर और संभल जैसे संवेदनशील जिलों के अधिकारियों से अलग से बात की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों की घटनाओं का अध्ययन किया जाए और संभावित उपद्रवियों की सूची पहले से तैयार रखी जाए. जरूरत पड़ने पर निषेधात्मक कार्रवाई भी की जाए. साथ ही सभी जिलों में पीस कमेटी की बैठकों और फ्लैग मार्च बढ़ाने के निर्देश दिए गए. साथ ही तेज गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए छायादार स्थान और मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।  बिना नंबर प्लेट वाहनों पर चलेगा अभियान बैठक में सड़क सुरक्षा और अपराध नियंत्रण पर भी चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने के आदेश दिए. इसके अलावा अवैध खनन पर भी सरकार ने सख्त रुख दिखाया. टास्क फोर्स बनाकर कार्रवाई करने और किसी भी दबाव में न आने के निर्देश दिए गए. मुख्यमंत्री ने कहा कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई हो, लेकिन आम नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।  भू-माफियाओं पर और सख्त होगी कार्रवाई सरकार ने भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान तेज करने के भी निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध कब्जा करने वालों पर कार्रवाई हो, लेकिन किसी भी आम नागरिक के वैध अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए. इसी दौरान जिन जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति नहीं है, वहां जल्द तैनाती करने के भी निर्देश दिए गए. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर, आईजी, एसएसपी और एसपी मौजूद रहे। 

खेल जगत में पंजाब की बेटियों का जलवा, बेसबॉल में शानदार प्रदर्शन पर मिला बड़ा सम्मान

चंडीगढ़  पंजाब बेसबॉल के लिए एक ऐतिहासिक और गर्व के पल में, बेहतरीन खिलाड़ी अमनजोत कौर बैंस, अर्शदीप कौर और वीरपाल को बेसबॉल के क्षेत्र में उनके शानदार योगदान और उपलब्धियों के लिए पंजाब सरकार ने प्रतिष्ठित महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड और 5 लाख रुपये के कैश प्राइज़ से सम्मानित किया है। यह सम्मान पंजाब के सबसे बड़े स्पोर्ट्स अवॉर्ड में से एक माना जाता है और यह स्पोर्ट्स में बेहतरीन काम, लगन और इंटरनेशनल लेवल के परफॉर्मेंस को पहचान देता है। इन खिलाड़ियों ने नेशनल और इंटरनेशनल चैंपियनशिप में अपने शानदार परफॉर्मेंस से पंजाब का नाम रोशन किया है और स्पोर्ट्स में युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा सोर्स बन गई हैं। इनकी उपलब्धियां नीचे दी गई हैं:- अमनजोत कौर बैंस ने गोवा में हुई 29वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, कर्नाटक में हुई 30वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, ओडिशा में हुई 31वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है।  अमनजोत कौर बैंस 2016 में कोरिया के गिजांग शहर में हुए 7वें विमेंस बेसबॉल वर्ल्ड कप में इंडियन विमेंस बेसबॉल टीम की कैप्टन थीं। अर्शदीप कौर ने 2015 में आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी में हुई ऑल इंडिया बेसबॉल यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल, 2015 में गोवा में हुई 29वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता  जो 2016 में कर्नाटक में हुई,  30वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने 2017 में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल, 2017 में ओडिशा में हुई 31वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल और बाद में 2018 में छत्तीसगढ़ में हुई 32वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। उन्होंने कोरिया के गिजांग शहर में हुए 7वें विमेंस बेसबॉल वर्ल्ड कप में भी हिस्सा लिया।  वीरपाल ने 2015 में आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल, 2015 में गोवा में हुई 29वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, 2016 में कर्नाटक में हुई 30वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल और 2017 में ओडिशा में हुई 31वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पंजाब का नाम रोशन किया। उन्होंने 2018 में छत्तीसगढ़ में हुई 32वीं सीनियर नेशनल बेसबॉल चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता, साथ ही 2017 में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने कोरिया के गिजांग शहर में हुई 7वीं महिला बेसबॉल वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में भी भारत को रिप्रेजेंट किया। इस गर्व के मौके पर, पंजाब बेसबॉल एसोसिएशन के सेक्रेटरी इंजीनियर हरबीर सिंह गिल और प्रधान सरदार सुखदेव सिंह औलाख ने तीनों खिलाड़ियों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये सम्मान न केवल खिलाड़ियों और उनके परिवारों के लिए बल्कि पूरे पंजाब बेसबॉल समुदाय के लिए गर्व की बात है।  उन्होंने आगे कहा कि इन लड़कियों की सफलता कई युवा एथलीटों, खासकर लड़कियों को खेलों में सक्रिय रूप से भाग लेने और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी। 

रायपुर में पेट्रोल ₹107.96 पहुंचा, महीने में चौथी बार बढ़े तेल के दाम

रायपुर  देशभर में तेल कंपनियों ने फिर पेट्रोल डीजल के रेट बढ़ा दिए हैं। आज, 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया है। इस बढ़ोतरी के बाद छत्तीसगढ़ के कई जिलों में पेट्रोल का प्राइस 109 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। राजधानी रायपुर में अब 1 लीटर पेट्रोल की कीमत ₹107.96 हो गई है। इससे पहले 15 मई को 3-3 रुपए, 19 मई को 90-90 पैसे और 23 मई को भी 90 पैसे प्रति लीटर रेट बढ़ाए गए थे। इस महीने ये चौथी बार दाम बढ़ा है। ब्लैक मार्केटिंग पर नजर, शिकायत के लिए नंबर जारी फ्यूल संकट और बढ़ती कीमतों के बीच प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। रायपुर कलेक्टर ने पेट्रोल-डीजल की ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। शहर में कहीं भी अधिक कीमत वसूली या अवैध बिक्री की जानकारी मिलने पर लोग 9977222564, 9977222574, 9977222584 और 9977222594 नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। इस महीने चौथी बार फ्यूल के रेट बढ़ें ताजा रेट के मुताबिक, बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में ज्यादा कीमत बढ़ी है। वहीं, रायपुर और कोरबा जैसे शहरों में बाकी जिलों की तुलना में थोड़ी राहत है। नारायणपुर में पेट्रोल ₹109.65 प्रति लीटर, जगदलपुर में ₹109.64, दंतेवाड़ा में ₹109.60 और बीजापुर में ₹109.59 लीटर बिक रहा है। जशपुर में पेट्रोल ₹109.52, सूरजपुर में ₹109.39 और अंबिकापुर में ₹109.09 प्रति लीटर, रायगढ़ में 109.3 रुपए दर्ज किया गया। बता दें कि इस महीने चौथी बार फ्यूल के रेट में इजाफा हुआ है। दुर्ग में पेट्रोल ₹108.29, धमतरी में ₹108.45, महासमुंद में ₹108.64 और बिलासपुर में ₹108.65 प्रति लीटर पहुंच गया है। रायपुर में 108 रुपए से नीचे, लेकिन राहत सीमित राजधानी रायपुर में पेट्रोल की कीमत ₹107.96 प्रति लीटर रिकॉर्ड है। प्रदेश के बड़े शहरों में यह दर अपेक्षाकृत कम है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी के बाद यहां भी वाहन चालकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। कोरबा में सबसे कम कीमत प्रदेश में सबसे कम पेट्रोल कीमत कोरबा में दर्ज की गई, जहां पेट्रोल ₹107.63 प्रति लीटर बिक रहा है। इसके अलावा जांजगीर में ₹108.21 और कवर्धा व रायगढ़ में ₹108.86 प्रति लीटर रेट सामने आया है। दूर के जिलों में ज्यादा कीमत की वजह जानकारों के मुताबिक, बस्तर और सरगुजा संभाग में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट ज्यादा होने के कारण पेट्रोल की कीमतें ज्यादा रहती है। वहीं बड़े शहरों और औद्योगिक जिलों में सप्लाई बेहतर होने से कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर लगातार बढ़ती पेट्रोल कीमतों का असर अब रोजमर्रा के खर्च पर भी दिखाई देने लगा है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल और पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई और यात्री किराए पर भी असर पड़ सकता है। वहीं आम लोग भी लगातार बढ़ते ईंधन खर्च से परेशान नजर आ रहे हैं। ऐसे तय होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, रिफाइनिंग खर्च, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार के वैट को जोड़ने के बाद पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत तय होती है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स की दरें अलग होने के कारण हर शहर में ईंधन के रेट भी अलग-अलग रहते हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां 'डेली प्राइस रिवीजन' यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में समझ सकते हैं:     कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है।     रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है।     केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है।     डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है।     राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती हैं।

जनता पर महंगाई की मार जारी, पंजाब-चंडीगढ़ में फिर बढ़े तेल के दाम

पटियाला  पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार भारी बढ़ोतरी हुई है। सोमवार को पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर तक इजाफा हुआ। चंडीगढ़ में अब पेट्रोल 101.50 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। वहीं डीजल का दाम 89 रुपये हो गया है।   पिछले 10 दिनों में चौथी बार ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं। बढ़ोतरी के बाद मोगा में पेट्रोल 105.67 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। वहीं डीजल 95.58 रुपये प्रति लीटर हो गया है। लगातार बढ़ते दामों से परेशान लोगों का कहना हे कि इस बढ़ोतरी से आम जनता पर सीधा असर पड़ रहा है। अब हर चीज महंगी हो जाएगी।  बढ़ोतरी के बाद जालंधर में पेट्रोल 104.80 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं डीजल के दाम 2.71 बढ़कर 94.75 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। पहली बार पेट्रोल ने 100 रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।   जालंधर के पेट्रोल पंप पर पहुंचे लोगों ने बढ़ती कीमतों पर नाराजगी जताई। सुखजीत सिंह ने कहा कि मजदूरी कर घर का पेट पालते हैं। लगातार बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सब्जियां, दूध और रोजमर्रा का सामान भी महंगा हो जाएगा। लोगों ने सरकार से आम जनता की परेशानियों को देखते हुए राहत देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जितनी दिहाड़ी मिलती है उतने का तो पेट्रोल लग जाता है। सुनील कुमार और बिजली का काम करने वाले साहिब प्रीत सिंह ने भी कहा कि ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से महंगाई तेजी से बढ़ रही है और इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।   वहीं पंजाब के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है। पंजाब पेट्रोल डीलर एसोसिएशन ने मुख्य सचिव को इस संबध में पत्र लिखा है और मांग की है कि सप्लाई सही करने के लिए तेल कंपनियों को निर्देश जारी किए जाने चाहिए। अगर सप्लाई न हुई तो आगे स्थिति बिगड़ सकती है। साथ ही मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को भी पत्र भी की कॉपी भेजी है। क्यों बढ़ रहे हैं दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, कमजोर होता रुपया और आयात लागत बढ़ने की वजह से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। रिफाइनिंग मार्जिन में बदलाव का असर भी ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है। लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने के बाद अब सरकारी तेल कंपनियां धीरे-धीरे बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं।    

शपथ ग्रहण समारोह में मोदी-शिवराज की खास बातचीत, अब चर्चा में दिल्ली वाला बुलावा

भोपाल  मुझे 13 दिसंबर, 2023 मध्य प्रदेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण का दिन स्पष्ट याद है। मैंने प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेतृत्व का मुख्यमंत्री के रूप में स्वागत किया और जैसे ही मोहन यादव ने शपथ ली, स्वाभाविक रूप से सबका ध्यान उन पर चला गया। बाद में प्रधानमंत्री मेरे पास आए और धीरे से कहा- शिवराज, समय निकालकर दिल्ली आओ। आपसे कुछ बातें करनी हैं। इसके छह महीने बाद नौ जून, 2024 को मैंने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। मुझे कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय सौंपा गया। तब मुझे अहसास हुआ प्रधानमंत्री ने उस शपथग्रहण समारोह के दौरान ही मेरे लिए योजना बना ली थी।’ यह अंश है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ का, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कई संस्मरणों को शामिल किया है। पुस्तक में शिवराज सिंह के प्रधानमंत्री मोदी के साथ तीन दशकों से अधिक पुराने आत्मीय संबंधों का हृदयस्पर्शी वर्णन है। इसमें घटनाओं का संकलन नहीं, बल्कि अनुभवों की वह यात्रा है, जो 1991-92 की एकता यात्रा से प्रारंभ होकर वर्ष 2025 में उनके तीसरे कार्यकाल तक विस्तृत है। पुस्तक में और क्या शिवराज सिंह ने पुस्तक में कहा है कि पहलगाम हमले के बाद कैबिनेट बैठक के बाद उनके मन में पुस्तक लिखने का विचार आया। तब प्रधानमंत्री सऊदी अरब के राजकीय दौरे पर थे। लेकिन सूचना मिलने पर वह कार्यक्रम को बीच में ही रोककर अगले दिन भारत लौट आए। उन्होंने लिखा, ‘30 अप्रैल, 2025 को कैबिनेट बैठक के वातावरण में तनाव था, और मेरे मन में बार-बार एक ही प्रश्न उठ रहा था-इन कठिन क्षणों का बोझ मोदीजी पर कितना भारी पड़ रहा होगा? लेकिन मैंने उन्हें अंदाज में कमरे में आते देखा। उनके मन-मानस पर क्रोध और विचलन का नामोनिशान नहीं था। अपनी शांत, परंतु दृढ़निश्चयी आवाज में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस बार का ऑपरेशन अलग होगा। सर्जिकल स्ट्राइक्स और एयरस्ट्राइक्स से अलग होगा। जिन्होंने यह हरकत करने की जुर्रत की है, वे दुनिया के किसी भी कोने में छुपे हों, हम उन्हें और उनके आकाओं को नहीं छोड़ेंगे।’ ये क्रोध में बोले गए शब्द नहीं, बल्कि अडिग संकल्प और दृढ़ नेतृत्व के परिचायक थे। जब शिवराज सिंह चौहान को लिस्ट में नहीं मिला उनका नाम पीटीआई भाषा ने किताब में वर्णित अंशों के हवाले से लिखा, जब भाजपा ने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की, तो चौहान ने सोचा कि पहले उन सीटों के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाएंगे, जहां भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही थी। उन्होंने लिखा, 'मेरा नाम शुरुआती सूचियों में शामिल नहीं था।' पुराने बयान का जिक्र किताब के अनुसार, इसी दौरान एक जनसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने राज्य में विकास का उल्लेख करते हुए कहा था, 'अगर हम नहीं रहे, तो हमें बहुत याद किया जाएगा।' उन्होंने लिखा कि विपक्ष ने इस बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया और यह प्रचारित किया कि चौहान का राजनीतिक करियर समाप्त हो गया है। चौहान ने लिखा कि विपक्ष के कुछ लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। मौजूदा कृषि मंत्री चौहान ने कहा, 'उन्होंने (विपक्ष ने) यह तक कह दिया कि मामाजी का तो राजनीतिक अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है।' चौहान ने किताब में लिखा कि कांग्रेस पार्टी ने 'गलत सूचना' को अपनी चुनावी रणनीति का मुख्य आधार बना लिया और उनके बयान को 'तोड़-मरोड़कर पेश' करते हुए सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। उन्होंने लिखा, 'शायद वे हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराना चाहते थे। मुझे भी लगा कि हमें अपने कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और गलत धारणा को तोड़ने के लिए कुछ करना चाहिए।' केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि जब वह उस समय को याद करते हैं, तो उन्हें कांग्रेस की 'मजाक उड़ाने वाली बातें' याद नहीं आतीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की 'गहरी भावनात्मक संवेदनशीलता' सामने आती है। जब पीएम मोदी का फोन आया उन्होंने कहा कि चुनाव अभियान के बीच बेहद व्यस्त होने के बावजूद भाजपा के वरिष्ठ नेता मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया। चौहान ने किताब में लिखा, 'उन्होंने (मोदी ने) मुझे मुख्यमंत्री के रूप में संबोधित नहीं किया। बहुत गर्मजोशी और स्नेह के साथ उन्होंने कहा, 'आज मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा हूं, न ही चुनावों के संदर्भ में फोन कर रहा हूं। मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।' उन्होंने किताब में कहा कि प्रधानमंत्री ने बहुत ही नरमी से पूछा, 'आप इतने चिंतित क्यों हो? अगर आपका कोई आध्यात्मिक मार्गदर्शक या गुरु है, जिनका आप सम्मान करते हैं, तो उनके पास जाकर मार्गदर्शन लें। कुछ समय एकांत में बिताएं और अपने मन को शांत, संतुलित एवं स्थिर रखें।' चौहान ने लिखा कि उन्हें लगा कि शायद प्रधानमंत्री यह सोच रहे थे कि 'मुझे कुछ आश्वासन की जरूरत हो सकती है'। शिवराज सिंह चौहान ने क्या रिप्लाई दिया केंद्रीय मंत्री ने लिखा, 'मैंने उनसे कहा, 'भाई साहब, मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं सिर्फ काम करना चाहता हूं।' चौहान के अनुसार, इसपर मोदी ने जवाब दिया, 'नहीं शिवराज, एक-दो दिन अकेले रहिए, अपना ध्यान रखिए, अपनी मानसिक स्थिति का ख्याल रखें और फिर काम में जुट जाएं।' भाजपा के वरिष्ठ नेता ने लिखा, 'वह (मोदी) चाहते थे कि मैं कुछ समय के लिए रुकूं, अपने ऊपर ध्यान दूं और आंतरिक शक्ति को फिर से जागृत करुं, उनका स्नेह मेरे मन को गहराई से छू गया। जो नेता पूरे देश की जिम्मेदारियों का भार उठाए हुए हैं, वह मेरे व्यक्तिगत मानसिक हालात की भी चिंता कर रहे थे; यही वास्तविक संवेदनशीलता है।' सलाह मान उत्तराखंड गए चार बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे चौहान ने लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री की सलाह मान ली और उत्तराखंड चले गए। चौहान ने लिखा, 'ऋषिकेश से थोड़ी दूरी पर, मैं गंगा के किनारे एकांत में घंटों बैठा रहा। बहते पानी और अडिग पहाड़ों को देखते हुए मेरा मन धीरे-धीरे शांत होने लगा। तब मैं पूरी तरह समझ गया कि मोदी जी क्या चाहते थे। उनका स्नेह केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि रणनीतिक भी था।' केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि मोदी अच्छी तरह समझते थे कि यदि भ्रामक मीडिया रिपोर्टों से उनका (चौहान) मनोबल कमजोर हुआ, तो उसका असर भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी … Read more

मंत्री विश्वास सारंग ने करोड़ों के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन, क्षेत्र को मिलेगी नई सौगात

मंत्री विश्वास सारंग ने किया करोड़ों की लागत से होने वाले विकास कार्यों का भूमि-पूजन वार्ड 78 में सीवेज परियोजना से हजारों परिवारों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ भोपाल  सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने  नरेला विधानसभा अंतर्गत वार्ड 78, विश्वकर्मा नगर में 23 करोड़ से अधिक की लागत से होने वाली सीवेज परियोजना एवं अन्य विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। मंत्री सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार मध्यप्रदेश में विकास और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रही है। हर वर्ग के कल्याण और हर क्षेत्र का समुचित विकास सरकार की प्राथमिकता है। मंत्री सारंग ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल विकास कार्य करना नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन को सुगम भी बनाना है। मंत्री सारंग ने कहा कि इस परियोजना से स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी, जलभराव एवं गंदगी की समस्या से राहत मिलेगी तथा नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्राप्त होगा। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। हज़ारों परिवारों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ वार्ड 78 स्थित विश्वकर्मा नगर में 23 करोड़ से अधिक की लागत से निर्माण होने वाली इस परियोजना के अंतर्गत 13 करोड़ रुपये की लागत से 42 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क बनाया जाएगा तथा 9 करोड़ रुपये की लागत से 8079 हाउस सीवर कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे, जिससे लगभग 35,306 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। परियोजना पूर्ण होने के बाद क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वच्छता, आधुनिक सीवेज व्यवस्था और सुगम नागरिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। इससे न केवल जनजीवन अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनेगा बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास को भी नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में मंत्री सारंग का क्षेत्रवासियों द्वारा पुष्पवर्षा एवं माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। और क्षेत्रवासियों ने करोड़ों की लागत से होने वाले इन विकास कार्यों की सौगात के लिए आभार व्यक्त किया।  

धार भोजशाला विवाद पर बड़ा निर्णय, हाई कोर्ट ने परिसर को सरस्वती मंदिर घोषित किया

धार  अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद धार्मिक स्थलों से जुड़े सबसे अहम फैसलों में से एक में फैसले में 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह कहा कि धार में स्थित विवादित भोजशाला-कमल मौला परिसर मूल रूप से एक हिंदू धार्मिक और शैक्षिक ढांचा है – यह देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित एक मंदिर और संस्कृत सीखने का एक केंद्र है, जिसकी स्थापना परमार वंश के राजा भोज के शासनकाल में 1034 ईस्वी में हुई थी। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच द्वारा दिया गया 242 पन्नों का यह फैसला, आपस में टकराने वाले धार्मिक दावों के पारंपरिक निर्धारण से कहीं आगे जाता है। कोर्ट ने कथित तौर पर पुरातात्विक सर्वेक्षणों, शिलालेखों, वास्तुशिल्प अवशेषों, ऐतिहासिक साहित्य, औपनिवेशिक गजेटियरों, विधायी इतिहास, संवैधानिक सिद्धांतों, हिंदू बंदोबस्ती कानून, इस्लामी वक्फ़ सिद्धांत और अयोध्या फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विकसित न्यायिक ढांचे की गहन जांच-पड़ताल की। इस फैसले का मूल यह है कि कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि भोजशाला में मौजूद मौजूदा ढांचा, पहले से मौजूद एक मंदिर परिसर को नष्ट करने और उसमें बदलाव करने के बाद बनाया गया था, और यह कि इस जगह पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता "कभी खत्म नहीं हुई"। बेंच ने आखिरकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 2003 में बनाई गई उस व्यवस्था को रद्द कर दिया, जिसके तहत परिसर के अंदर हिंदू पूजा-अर्चना पर रोक लगाते हुए शुक्रवार की नमाज की इजाजत दी गई थी। साथ ही, कोर्ट ने आपस में टकराने वाले धार्मिक दावों में संतुलन बनाने की कोशिश की – हालांकि यह बहुत ज्यादा भरोसेमंद नहीं लगी – और यह टिप्पणी की कि मुस्लिम समुदाय धार जिले में एक मस्जिद बनाने के लिए किसी दूसरी जगह के आवंटन के लिए राज्य सरकार से आवेदन कर सकता है। इस फैसले के गहरे कानूनी और राजनीतिक प्रभाव होने की संभावना है, ऐसा न केवल भोजशाला के बारे में इसके निष्कर्षों की वजह से है, बल्कि इसलिए भी है क्योंकि कोर्ट ने जिस संवैधानिक और साक्ष्य-आधारित कार्यप्रणाली को अपनाया है – वह स्पष्ट रूप से अयोध्या फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के विवादास्पद सिद्धांतों से प्रेरित है और उनका विस्तार करती है। 1991 के 'पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम' को रद्द करना नागरिकों और कानूनी जानकारों के लिए जिस बात को समझना और आत्मसात करना सबसे ज्यादा ज़ररी है, वह यह है कि कोर्ट खुद एक मौजूदा कानून – 1991 के 'पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम' – के साथ क्या कर रहे हैं। 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद पारित यह कानून- जिसे नरसिम्हा राव सरकार द्वारा पेश किए जाने के बाद विधायिका का जबरदस्त समर्थन मिला था (संयोग से, जिस समय यह गैर-कानूनी काम हुआ था, उस समय भी यही सरकार सत्ता में थी)- फिलहाल भारत के सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक चुनौती का सामना कर रहा है। विडंबना यह है कि आखिरी बार इस "कानून को दी गई चुनौती" पर शीर्ष अदालत ने दिसंबर 2024 में सुनवाई की थी, जब यह तय हुआ था कि इस मामले पर चार हफ्तों बाद सुनवाई होगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ, लेकिन भोजशाला जैसे फैसले एक बार फिर इस कानून को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का 12 दिसंबर, 2024 का आदेश- भले ही यह निचली अदालतों के लिए था- उनसे यह कहता है कि वे पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 को दी गई चुनौती पर फैसला आने तक, पूजा स्थलों के धार्मिक स्वरूप को चुनौती देने वाले मामलों में कोई भी नया मुकदमा दर्ज न करें और न ही कोई प्रभावी आदेश (सर्वेक्षण के आदेशों सहित) पारित करें। यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने पारित किया था, जिसमें न्यायमूर्ति पी.वी. संजय कुमार और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन शामिल थे, उस समय न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया था कि इस तरह की कार्यवाही पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का उल्लंघन करती है। यह कानून पूजा स्थलों के धार्मिक स्वरूप को बदलने पर रोक लगाता है, जैसा कि वे 15 अगस्त, 1947 को थे। दिसंबर 2024 में अदालत का यह हस्तक्षेप- सालों की पेंडेंसी और देरी के बाद (इन याचिकाओं पर 2021 में नोटिस जारी किया गया था)- ऐसे समय में आया, जब धार्मिक स्थलों की स्थिति को चुनौती देने वाली याचिकाओं और मुकदमों की बाढ़ सी आ गई थी, इनमें से कई स्थल मध्यकालीन मस्जिदें और दरगाहें हैं। उस समय, उत्तर प्रदेश में 16वीं सदी की संभल जामा मस्जिद के संबंध में एक निचली अदालत द्वारा नवंबर 2024 में दिए गए सर्वेक्षण के आदेश ने सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा दिया था, जिसका नतीजा नवंबर में हुई हिंसक झड़पों के रूप में सामने आया, जिसमें चार लोगों की जान चली गई थी। हालांकि अदालत ने उस समय कहा था कि वह इस कानून – पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991- को दी गई चुनौतियों पर सुनवाई शुरू करेगी, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। इन घटनाक्रमों के बारे में विस्तार से यहां पढ़ें। PWA 1991 का संदर्भ और व्यापक निहितार्थ 1991 का अधिनियम पूजा स्थलों के धार्मिक स्वरूप में बदलाव को रोकने के लिए लाया गया था, जिसमें केवल बाबरी मस्जिद स्थल को अपवाद के तौर पर रखा गया था, जो अयोध्या विवाद का विषय था। यह अधिनियम, जिसे अब लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, यह सुनिश्चित करना चाहता है कि धार्मिक स्थलों- विशेषकर ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों- की स्थिति को लेकर 15 अगस्त, 1947 के बाद कोई नया कानूनी विवाद शुरू न हो। इस महत्वपूर्ण संदर्भ को यहां पढ़ें: ‘राम विलास पासवान ने कब और कैसे पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के पक्ष में जोरदार वकालत की थी।’ बिहार के एक कद्दावर नेता- जिन्हें भारतीय राजनीति का ‘मौसम विज्ञानी’ भी कहा जाता था- राम विलास पासवान (जो उस समय नेशनल फ्रंट के सदस्य थे) ने विपक्ष की बेंच से प्रस्तावित कानून के समर्थन में जोरदार भाषण दिया। उन्होंने पूजा स्थलों को ढहाने की BJP की विनाशकारी राजनीति (बाबरी मस्जिद, 6 दिसंबर, 1991) की तीखी आलोचना की और इस मामले में कांग्रेस को भी नहीं बख्शा। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बारे में, और … Read more

शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, बोले- अब हर मौत का हिसाब होगा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर हुए हमलों को लेकर ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने चेतावनी दे दी है कि 2021 चुनाव के बाद हुए कथित हमलों की कानूनी जांच की जाएगी। साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी कानून हाथ में नहीं लेने की हिदायत दी है। खास बात है कि 2026 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद अधिकारी पहली बार रविवार को नंदीग्राम पहुंचे थे। हमलों का रखा है रिकॉर्ड नंदीग्राम में अधिकारी ने कहा कि भाजपा ने उसके कार्यकर्ताओं पर हुए तृणमूल कांग्रेस के कथित हमलों का रिकॉर्ड रखा है। उन्होंने कहा, '2021 विधानसभा चुनावों के बाद कई भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को तोड़ा गया और कई पार्टी समर्थकों को मारा गया। सभी का हिसाब रखा गया है और सभी को कानूनी न्याय मिलेगा।' उन्होंने कहा, 'अगर आप चाहें, तो तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों की ईंटें खींच लें, लेकिन ऐसा कभी नहीं करना। भाजपा ऐसे कामों को बढ़ावा नहीं देती है। मुझे सब याद है और मैं किसी भी बात को नहीं छोड़ूंगा।' मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा, 'मेरे लिए वोट करने में कई लोग मारे गए हैं।' उन्होंने कहा, 'मैंने पूरा रिकॉर्ड रखा है। भरोसा कीजिए, मैं नंदीग्राम का कर्ज चुकाऊंगा।' नंदीग्राम से वादा रविवार को नंदीग्राम में आयोजित रैली में, अधिकारी ने विधायक पद से अपने इस्तीफे को लेकर समर्थकों के बीच फैली चिंताओं को दूर करने की कोशिश की और इस बात पर जोर दिया कि सीट छोड़ने से इस क्षेत्र से उनका जुड़ाव कमजोर नहीं होगा। नंदीग्राम को अपना 'घर' और अपने राजनीतिक उत्थान की जन्मस्थली बताते हुए अधिकारी ने कहा कि 2003 से संघर्ष के दौरान बना उनका रिश्ता भवानीपुर जाने के बावजूद पहले की तरह कायम रहेगा। अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। जीत के बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट खाली कर दी। इससे पहले 2021 में भी नंदीग्राम में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को मामलू अंतर से हरा दिया। हालांकि, 2026 में उन्होंने बनर्जी के सामने ही 15 हजार से ज्यादा मतों से जीत दर्ज की है। छोटे भाई को दी जिम्मेदारी खास बात है कि सीएम अधिकारी ने नंदीग्राम की जिम्मेदारी छोटे भाई सोमेंदु अधिकारी को दी है। उन्होंने कहा, 'फिलहाल मेरे ऊपर पूरे राज्य की ज़िम्मेदारी है। सरकार चलाने के काम के दबाव के कारण मैंने सोमेंदु अधिकारी को यह खास जिम्मेदारी सौंपी है। नंदीग्राम में पंचायत, प्रशासन और जनता की सेवा से जुड़े मामलों में पांच विधायक उनकी मदद करेंगे।'

खेल और अध्यात्म जगत की हस्तियां होंगी सम्मानित, हरमनप्रीत-कौच बलदेव सिंह को पद्मश्री

चंडीगढ़  पंजाब की तीन हस्तियों को आज पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इनमें हॉकी कोच बलदेव सिंह, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और संत निरंजन दास शामिल हैं। बलदेव सिंह एक अनुभवी हॉकी कोच हैं जिन्होंने 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया है। साथ ही एक प्रमुख महिला हॉकी प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की। वहीं प्रसिद्ध महिला क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर ने कप्तान के रूप में भारत को महिला विश्व कप में जीत दिलाई और टी20 क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय शतक बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनकर इतिहास रचा। आध्यात्मिक नेता संत निरंजन दास ने सरवन दास चैरिटेबल आई हॉस्पिटल और सरवन दास मॉडल स्कूल की स्थापना की। सभी लोगों को भय और गरीबी से मुक्त जीवन जीने का उपदेश दिया। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर तीनों को पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी और अब सोमवार को सम्मानित किया जाएगा। स्वच्छता के सिपाही इंदरजीत सिद्धू को राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु करेंगी सम्मानित चंडीगढ़ के लिए आज गर्व का क्षण होगा जब सेक्टर-49 की सड़कों पर रोज सुबह झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश देने वाले 88 वर्षीय रिटायर्ड डीआईजी इंदरजीत सिंह सिद्धू को राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु पहले सिविल इनवेस्टिचर समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी। पंजाब पुलिस से 1996 में सेवानिवृत्त हुए इंदरजीत सिंह सिद्धू पिछले कुछ वर्षों से रोज सुबह पांच बजे उठकर खुद सड़कों की सफाई करते हैं। उनका कहना है कि वह किसी पर दबाव डालने के बजाय खुद उदाहरण पेश कर लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। पिछले वर्ष उनका सफाई करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसके बाद वह देशभर में चर्चा का विषय बन गए। मूलरूप से पंजाब के संगरूर निवासी सिद्धू आतंकवाद के दौर में अमृतसर में एसपी सिटी जैसे अहम पदों पर तैनात रहे। पत्नी के निधन और बेटे के विदेश में बसने के बाद भी उन्होंने समाज सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा। वह कहते हैं कि जब तक शरीर साथ देगा, सफाई अभियान जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिका यात्रा के दौरान बेटे की ओर से सड़क पर कागज फेंकने से रोकने की घटना ने उन्हें स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया।