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स्मार्ट पुलिसिंग में एआई बनेगा ‘फोर्स मल्टीप्लायर’, अपराध रोकथाम में मिलेगी नई गति

 जयपुर  29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दूसरे दिन गुरुवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 'एआई फॉर स्मार्ट पुलिसिंग एंड पब्लिक सेफ्टी' विषय पर प्लेनरी सत्र आयोजित किया गया। सत्र की अध्यक्षता ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गोपेश अग्रवाल ने की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम एआई के उपयोग से पुलिसिंग अब प्रतिक्रियात्मक (रिएक्टिव) से निवारक (प्रिवेंटिव) स्वरूप की ओर बढ़ रही है। इससे अपराधों में कमी आई है तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया समय भी घटा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश के सभी राज्यों की पुलिस एआई का उपयोग कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को मानव संसाधन के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पुलिसिंग में 'फोर्स मल्टीप्लायर' के रूप में देखा जाना चाहिए। स्वदेशी और जिम्मेदार एआई इस्तेमाल से सुरक्षित होगी पुलिसिंग सत्र के पैनलिस्ट डॉ. अमनदीप कपूर, निदेशक, ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, जयपुर ने कहा कि एआई के किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने एआई, ब्लॉकचेन, डेटा कंप्यूटिंग, सीसीटीएनएस 2.0, ई-साक्ष्य, एजेंटिक एआई, एज-आधारित एलएलएम, म्यूल हंटिंग ऐप तथा डार्क वेब जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि ये तकनीकें आधुनिक पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित एवं व्यापक स्तर पर एआई के उपयोग के लिए संप्रभु, जिम्मेदार और स्वदेशी एआई का विकास आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बीपीआरएंडडी इस दिशा में प्रशिक्षण प्रदान करने तथा आवश्यक प्रणालियां विकसित करने का कार्य कर रहा है। संतुलित और सुरक्षित एआई अपनाने पर विशेषज्ञों ने दिया जोर पैनलिस्ट कोम्मी किशोर, पुलिस अधीक्षक, एलुरु (आंध्र प्रदेश) ने कहा कि वर्तमान समय में सभी पुलिस बलों का एआई से परिचित होना आवश्यक है। उन्होंने पुलिस द्वारा उपयोग में लाई जा रही विभिन्न जांच संबंधी एप्लीकेशंस का उल्लेख करते हुए भाषा अनुवाद की उपयोगिता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआई के उपयोग से दोषसिद्धि (कन्विक्शन) की दर में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में एआई के बढ़ते उपयोग के बीच बहुत तेजी और बहुत धीमी गति से आगे बढ़ने के बजाय संतुलित एवं चरणबद्ध तरीके से इसे अपनाना आवश्यक है। बिना उचित नियमन के नवाचार जोखिमपूर्ण हो सकता है तथा पुलिस जांच में 'एल्गोरिद्मिक बायस' से बचना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य पुलिसिंग को प्रोएक्टिव बनाना होना चाहिए, केवल प्रिडिक्टिव नहीं। डेटा फ्यूजन सेंटर से मजबूत होगी जांच व्यवस्था पैनलिस्ट सलमान ताज, निदेशक, सीडीटीआई, हैदराबाद ने कहा कि पुलिसिंग से संबंधित अधिकांश डेटा विभिन्न प्लेटफॉर्म पर बिखरा हुआ है, जिसे एकीकृत कर डेटा फ्यूजन सेंटर के माध्यम से एक स्थान पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीडियो एनालिटिक्स में एआई का उपयोग पुलिस जांच को अधिक सटीक और प्रभावी बना सकता है। उन्होंने एआई डेटा की संप्रभुता को सुरक्षित एवं विश्वसनीय उपयोग के लिए अनिवार्य बताया। सत्र के समापन पर विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद हुआ। अंत में राजस्थान पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) श्री विजय कुमार सिंह ने सभी पैनलिस्टों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। सत्र में एआई आधारित स्मार्ट पुलिसिंग, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना तथा आधुनिक जांच प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार एवं संतुलित उपयोग पर विशेष बल दिया गया।  

छत्तीसगढ़ में अवैध खनन पर सख्ती, CM साय के निर्देश पर JCB और वाहन जब्त, लाखों की पेनाल्टी

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा सख्त और सतत अभियान चलाया जा रहा है। शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभिन्न जिलों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध रेत, पत्थर, मिट्टी एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में संलिप्त वाहनों को जब्त किया गया है। वाहनों को जब्त कर नियमानुसार अर्थदंड एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। शासन का उद्देश्य प्रदेश के खनिज संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना तथा अवैध उत्खनन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करना है। राजनांदगांव में 52 मामलों में कार्रवाई, 18.95 लाख रुपये का अर्थदंड इसी क्रम में राजनांदगांव जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक अवैध रेत उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के 52 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए 18 लाख 95 हजार 600 रुपये का अर्थदंड वसूला गया है। इनमें अवैध उत्खनन के 9, परिवहन के 41 तथा भंडारण के 2 प्रकरण शामिल हैं। वहीं डोंगरगढ़ तहसील के ग्राम आसरा में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान नदी में रेत उत्खनन प्रतिबंधित पाया गया तथा मौके पर कोई अवैध गतिविधि नहीं मिली। बालोद में चेन माउंटेड मशीन जब्त बालोद जिले के ग्राम कसही में अवैध पत्थर उत्खनन करते पाए जाने पर एक चेन माउंटेड (PC-130-7) मशीन को जब्त कर सील किया गया। संबंधित पक्ष वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कार्रवाई प्रारंभ की गई है। बलरामपुर में टिपर और 90 घनमीटर रेत जब्त बलरामपुर जिले में खनिज विभाग ने राजपुर क्षेत्र के ग्राम नरसिंहपुर और बसंतपुर में कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त एक टिपर जब्त किया। वहीं बसंतपुर स्थित फ्लाई ऐश ब्रिक्स इकाई में अवैध रूप से भंडारित लगभग 90 घनमीटर रेत भी जब्त कर संचालक को नोटिस जारी किया गया। सरगुजा में जेसीबी, ट्रैक्टर और टिपर सहित छह वाहन जब्त सरगुजा जिले में शिकायतों के आधार पर विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अवैध मिट्टी, मुरूम, रेत एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में प्रयुक्त जेसीबी, ट्रैक्टर और टिपर सहित छह वाहनों को जब्त किया गया। सभी मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा संशोधित छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत कार्रवाई की जा रही है। संशोधित नियमों के अनुसार अब शमन शुल्क न्यूनतम 25 हजार रुपये अथवा 2 हजार रुपये प्रति टन, जो भी अधिक होगा, के आधार पर वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त खनिज का बाजार मूल्य भी वसूला जाएगा। नियमित गश्त और संयुक्त अभियान आगे भी रहेंगे जारी खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश में अवैध खनिज गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नियमित गश्त, आकस्मिक निरीक्षण और संयुक्त प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

‘अल्फा’ एडवांस बुकिंग सुस्त, पहले दिन 5-8 करोड़ की ओपनिंग का अनुमान

आलिया भट्ट और शर्वरी वाघ की एक्‍शन स्‍पाई फिल्‍म 'अल्‍फा' शुक्रवार 03 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। 'एक था टाइगर' के साथ 2012 में शुरू हुए 'YRF स्पाई यूनिवर्स' की यह 7वीं फिल्‍म है। बुधवार, 01 जुलाई से इसकी एडवांस बुकिंग शुरू गई है, लेकिन पहले 24 घंटों में टिकट बुकिंग के जो आंकड़े आए हैं, वह सुस्‍त हैं। गुरुवार दोपहर 3 बजे तक फिल्‍म के लिए महज 18579 टिकटों की प्री-बुकिंग हुई है। 'धुरंधर' फ्रैंचाइजी की ऐतिहासिक सफलता के बाद देश में जासूसी फिल्‍मों को लेकर एक बहुत ऊंचा पैमाना तय हो चुका है। यही कारण है कि 'अल्‍फा' को ऑनलाइन आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में फिल्‍म को बॉक्‍स ऑफिस पर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। जैसे हालात हैं, कम से कम ओपनिंग डे पर यह 'YRF स्पाई यूनिवर्स' की सबसे कमजोर शुरुआत होने वाली है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि ALPHA यदि 'धुरंधर फ्रैंचाइजी' से पहले रिलीज हुई होती, तो इसकी किस्‍मत कुछ और होती। लेकिन आदित्‍य धर की फिल्‍म को लेकर दर्शकों में जैसा क्रेज रहा है, उसके बाद अब किसी भी स्‍पाई फिल्‍म की तुलना सामान्‍य घटना है। एक और समस्‍या यह है कि फिल्‍म में भले ही बॉबी देओल और अनिल कपूर जैसे दिग्‍गज भी हैं, लेकिन आलिया भट्ट एक ऐसा नाम हैं, जिनकी काबिलियत के बावजूद सोशल मीडिया उनके साथ बेहद बुरा बर्ताव करती रही है। इन सब का असर फिल्‍म पर भी पड़ेगा। 'अल्‍फा' की एडवांस बुकिंग रिपोर्ट Sacnilk के मुताबिक, 'अल्‍फा' के लिए गुरुवार सुबह 10 बजे तक एडवांस बुकिंग से महज ₹44.89 लाख की ग्रॉस कमाई हुई थी। जबकि दोपहर 3 बजे तक यह ₹69.36 लाख तक ही पहुंची है। ब्‍लॉक सीटों को जोड़ दें तो यह आंकड़ा ₹2.06 करोड़ तक पहुंचता है। इस रफ्तार से प्री-बुकिंग की कमाई में बहुत ज्यादा अंतर होता नहीं दिख रहा है। यदि नेशनल मल्‍टीप्‍लेक्‍स चेन्स के शुरुआती डेटा को देखें तो फ‍िल्म अभी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। 24 घंटे पहले, बुधवार दोपहर तक 'अल्फा' के तीन प्रमुख स‍िनेमा चेन्स में 700 टिकट बिके थे। इनमें INOX के 500 से ज्यादा टिकट, PVR के 150 टिकट और सिनेपोलिस के 50 टिकट शामिल हैं। दुखद बात यह है कि प्री-बुकिंग की रफ्तार में वह तेजी नहीं दिख रही है, जिससे उम्‍मीद जगे। बांद्रा में स्पॉट हुईं 'अल्फा गर्ल्स' आलिया भट्ट और शरवरी वाघ, देखिए दोनों कितनी खूबसूरत लग रहीं 'धुरंधर' की सफलता के बाद दर्शकों का नकारात्मक भाव रणवीर सिंह स्‍टारर 'धुरंधर' और 'धुरंधर 2' न सिर्फ बॉक्स ऑफ‍िस पर ब्‍लॉकबस्‍टर रही, बल्‍क‍ि इसने कई नए रिकॉर्ड बनाए। हाल के समय में भारतीय सिनेमा की यह सबसे यादगार फ‍िल्मों में शामिल है। आदित्‍य धर की इस फिल्‍म ने स्पाई-जॉनर के अंदाज और उमंग, दोनों को बदलकर रख दिया है। एक ऐसा बेंचमार्क सेट किया है, जहां तक पहुंचना 'YRF स्पाई यूनिवर्स' की स्टाइलिश और कर्मश‍ियल एक्शन फ‍िल्मों के लिए थोड़ा मुश्‍क‍िल है। 'धुरंधर फ्रैंचाइजी' की कहानी असल जिंदगी से प्रेरित थी। अंदाज रॉ था। यही कारण ही दर्शक और आलोचक, दोनों ने इसकी तारीफ की। ऐसे में अब पर्दे पर दर्शक इस जॉनर की फिल्‍मों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए कंटेंट को लेकर दशर्कों में नाराजगी की भावना है। इसका नकारात्‍मक प्रभाव 'अल्‍फा' के बिजनस पर पड़ेगा। नॉन हॉलिडे रिलीज के कारण भी 'अल्‍फा' पर असर 'अल्फा' एक नॉन-हॉलिडे रिलीज है। यानी यह बिना छुट्टी वाले शुक्रवार को सिनेमाघरों में आ रही है। यदि यह किसी छुट्टी के दिन रिलीज होती, तो ओपनिंग डे इसे ज्यादा कमाई करने का मौका मिलता। लेकिन अब इसे दर्शक की कमी का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही अक्षय कुमार की फ‍िल्‍म 'वेलकम टू द जंगल' भी है, जो फैमिली ऑडियंस को हंसा रही है। इस कारण स्क्रीन शेयरिंग में भी कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। 'अल्फा' बॉक्‍स ऑफिस प्रेडिक्‍शन: पहले दिन कितनी होगी कमाई कुल मिलाकर, 'अल्‍फा' YRF के 'स्पाई यूनिवर्स' की फिल्‍म होने के बावजूद पहले दिन संघर्ष करती हुई दिख रही है। बल्‍क‍ि, यह ओपनिंग डे पर इस फ्रैंचाइजी की सबसे कमजोर फिल्‍म साबित होने वाली है। सुस्‍त एडवांस बुकिंग, 'धुरंधर' के बाद बदली जनभावना और 'वेलकम टू द जंगल' से कंपीटिशन को ध्‍यान में रखते हुए, अनुमान यही है कि ALPHA पहले दिन भारतीय बॉक्‍स ऑफिस ₹5-₹8 करोड़ की नेट कमाई ही कर पाएगी। हां, यदि फिल्‍म वाकई जबरदस्‍त हुई तो वर्ड-ऑफ-माउथ के बूते यह पहले वीकेंड में धूम मचाने का दम भी रखती है। 'YRF स्पाई यूनिवर्स' की फिल्में और ओपनिंग डे पर देश में नेट कमाई:     एक था टाइगर – ₹32.92 करोड़ (2012)     टाइगर जिंदा है – ₹34.10 करोड़ (2017)     वॉर – ₹53.35 करोड़ (2019)     पठान – ₹57.00 करोड़ (2022)     टाइगर 3 – ₹44.50 करोड़ (2023)     वॉर 2 – ₹52.00 करोड़ (2025) YRF ने थ‍िएटर्स और मल्‍टीप्‍लेक्‍स चेन्‍स को दिए हैं खास न‍िर्देश हालांकि, 'अल्‍फा' की रिलीज के लिए YRF ने डिस्ट्रिब्यूशन की खास रणनीति बनाई है। इसके लिए एग्‍ज‍िबिटर्स को साफ निर्देश दिए गए हैं कि कोई शो सुबह जल्दी शुरू नहीं होगा। फिल्‍म का पहला शो शुक्रवार सुबह 9:30 बजे ही शुरू हो। इसके अलावा टिकट की कीमतें भी हिसाब से तय की गई हैं। कोश‍िश यही है कि ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को थ‍िएटर पर खींचा जा सके। स्क्रीन-शेयरिंग के लिए भी कड़े नियम बनाए हैं। इसके लिए 2-स्क्रीन वाले सिनेमाघरों में कम से कम 4 शो, बड़े 4-स्क्रीन वाले मल्टीप्लेक्स में कम से कम 8 शो रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इन सब का कितना फायदा मिलता है, यह रिलीज के बाद ही पता चलेगा।  

आरटीई उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी, 22 जिलों में 687 स्कूलों की पहचान

 हिसार आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत सीटें न दिखाने वाले निजी स्कूलों पर शिक्षा निदेशालय की टेढ़ी नजर है। इस कड़ी में शिक्षा निदेशालय ने 22 जिलों के अंदर सर्वे कर 687 स्कूलों की पहचान की है, जोकि 3 साल से उच्च अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर शिक्षा के नाम पर दुकानें चला रहे थे। सर्वे रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि 687 स्कूलों के पास न मान्यता से संबंधित दस्तावेज मिले और न ही विशेष समयाविधि तक दाखिले करने के अधिकार से कोई संबंधित दस्तावेज मिले। जिस पर निदेशालय ने उपरोक्त स्कूलों से दाखिले की शक्ति छीनने का फैसला लिया है। साथ ही सभी उपायुक्त को भी पत्र जारी करने का फैसला लिया है, जोकि गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर आगामी कार्रवाई करेंगे। 413 निजी स्कूलों ने दिखाई 3 हजार सीटें प्रदेश में 1100 स्कूलों को सर्च किया था। जिनके पास मान्यता से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले थे। सरकार ने स्कूलों को दस्तावेज पूरे करने का समय दिया। जिस पर प्रदेश में 413 निजी स्कूलों ने मान्यता से संबंधित दस्तावेज पूरे कर दिया। साथ ही आरटीई के तहत 3 हजार सीटें भी दिखाई। जिसके बाद सरकार ने शेष 600 से अधिक स्कूलों पर कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए है। सरकार ने इस बार एक किलोमीटर का दायरा ही रखा है। जिसके दायरे में विद्यार्थी निजी स्कूल में उपरोक्त योजना के तहत आवेदन कर सकेगा। 6 जुलाई तक विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 भी जारी कर दिया है। किसी तरह की कोई शिकायत हो तो अभिभावक उपरोक्त हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज करवा सकता है। समस्या की ये सुनवाई करेगी कमेटी     पहले अभिभावक खंड स्तर पर गठित कमेटी में अपनी शिकायत रख सकते हैं।     जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी व डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी पर अपील लगा सकते हैं     इसके बाद भी समस्या का निदान नहीं हुआ तो संयुक्त निदेशक प्रशासनिक शाखा के पास शिकायत रख सकते हैं पंचकूला के मौलिक शिक्षा निदेशक मनिता मलिक ने कहा कि हमने प्रदेश के 687 निजी स्कूलों को जांचा है, जिनके पास मान्यता से संबंधित एक भी दस्तावेज नहीं मिले। समय देने पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए है। जिसके बाद अब एमआइएस पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। साथ ही डीसी को भी स्पष्ट कहा जाएगा कि वे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर कार्रवाई करें।  

घर की चाबियां कहां रखें? वास्तु शास्त्र के ये नियम दिलाएंगे शुभ फल

घर में मौजूद हर छोटी-बड़ी वस्तु का वास्तु शास्त्र में अपना महत्व बताया गया है. माना जाता है कि वस्तुओं को सही दिशा और सही स्थान पर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. इन्हीं वस्तुओं में चाबियां भी शामिल हैं. वास्तु शास्त्री बिमलेश कुमार बताते हैं कि आमतौर पर लोग चाबियों को सिर्फ ताला खोलने का साधन समझते हैं, लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार ये सुरक्षा, जिम्मेदारी और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं. इसलिए उनके अनुसार चाबियों को रखने से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है. किस दिशा में रखें घर की चाबियां? वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की मुख्य चाबियां पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है. यह दिशा स्थिरता और सुरक्षा से जुड़ी मानी जाती है. कहा जाता है कि इस स्थान पर चाबियां रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और महत्वपूर्ण कार्यों में स्थिरता आती है. चाबियों को रखने के लिए लकड़ी के की-होल्डर या छोटे बॉक्स का उपयोग करना भी अच्छा माना जाता है. मुख्य द्वार के पास रखें व्यवस्थित की-होल्डर घर के प्रवेश द्वार के पास साफ और व्यवस्थित की-होल्डर लगाना लाभकारी माना जाता है. इससे चाबियां सुरक्षित रहती हैं और बार-बार खोजने की परेशानी भी नहीं होती. वास्तु के अनुसार व्यवस्थित वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है, जबकि बिखराव नकारात्मकता बढ़ा सकता है. रसोईघर में चाबियां रखने से बचें वास्तु मान्यताओं के मुताबिक रसोईघर में चाबियां रखना उचित नहीं माना जाता. रसोई अग्नि तत्व का स्थान है और चाबियां धातु की बनी होती हैं. इन दोनों तत्वों का असंतुलन घर के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. इसलिए चाबियों के लिए अलग स्थान निर्धारित करना बेहतर माना जाता है. पूजा स्थल से रखें दूर कई लोग सुविधा के लिए पूजा घर के आसपास चाबियां रख देते हैं, लेकिन वास्तु में इसे उचित नहीं माना गया है. पूजा स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है, इसलिए वहां केवल पूजा से जुड़ी वस्तुएं ही रखना बेहतर माना जाता है. पुरानी और बेकार चाबियां हटाएं घर में पड़ी जंग लगी, टूटी हुई या किसी काम की न रहने वाली चाबियों को लंबे समय तक संभालकर रखने से बचना चाहिए. ऐसी वस्तुओं को समय-समय पर हटाने से घर में स्वच्छता और सकारात्मकता बनी रहती है. वास्तु के अनुसार अनुपयोगी वस्तुएं रुकी हुई ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती हैं. हालांकि वास्तु नियम आस्था और परंपराओं पर आधारित होते हैं, लेकिन घर को व्यवस्थित और साफ-सुथरा रखना हर दृष्टि से लाभदायक माना जाता है.

स्टूल में खून दिखे तो न करें नजरअंदाज, जानें रंग क्या बताता है और कब तुरंत डॉक्टर से मिलें

मल में खून आना (Rectal Bleeding) एक ऐसा लक्षण है जिसे अक्सर लोग बवासीर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, हर बार इसका कारण बवासीर नहीं होता। कई बार यह पाचन तंत्र की गंभीर समस्याओं जैसे इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD), डाइवर्टिकुलर डिजीज, पेट या आंतों में अल्सर, पॉलीप्स और यहां तक कि कोलोरेक्टल कैंसर का संकेत भी हो सकता है। डॉक्टर्स के मुताबिक स्टूल में खून का रंग बीमारी के कारण का महत्वपूर्ण संकेत देता है। चमकीला लाल खून आमतौर पर गुदा या निचली आंत से संबंधित समस्याओं की ओर इशारा करता है, जबकि गहरा लाल, मैरून या काला टार जैसा मल ऊपरी पाचन तंत्र में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। व्यक्ति को यदि पेट दर्द, कमजोरी, चक्कर आना, मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मल में खून आना क्या बीमारी है? क्लिवलैंड क्लीनिक के मुताबिक मल में खून आने की स्थिति को रेक्टल ब्लीडिंग के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब होता है कि गुदा (रेक्टम) या पाचन तंत्र के किसी हिस्से से खून का निकलना, जो कि मल के साथ दिखाई देता है। यह ब्लड अलग-अलग रंग जैसे कि चमकीला लाल, गहरा लाल, मैरून या काला रंग का दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार खून का रंग यह बताने में मदद करता है कि ब्लीडिंग पाचन तंत्र के किस हिस्से से हो रही है। मल में खून कौन से रंग का दिखाई दे सकता है? मल में खून का रंग और बनावट डॉक्टरों को संभावित कारण पहचानने में मदद करते हैं। चमकीला लाल खून  हेल्थडायरेक्ट के अनुसार यदि टॉयलेट पेपर, कमोड या स्टूल की सतह पर चमकीला लाल खून दिखाई दे, तो यह आमतौर पर गुदा या निचले कोलन से होने वाली ब्लीडिंग का संकेत होता है। इसके सामान्य कारण में बवासीर (Hemorrhoids), एनल फिशर (गुदा में दरार), रेक्टल इंफेक्शन और निचले कोलन की सूजन को शामिल किया जाता है। मल में खून आने के कारण  एनसीबीआई के मुताबिक यदि स्टूल गहरे लाल या मैरून रंग का दिखाई दे तो यह बड़ी आंत या छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। इसके संभावित कारण में डाइवर्टिकुलर डिजीज, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD), कोलन पॉलीप्स और कोलोरेक्टल कैंसर को शामिल किया जाता है। काला और चिपचिपा मल (Black, Tarry Stool) क्लिवलैंड क्लीनिक के मुताबिक यदि मल कोलतार (Tar) की तरह काला और चिपचिपा दिखे तो यह ऊपरी पाचन तंत्र जैसे पेट या छोटी आंत में ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। पेट का अल्सर, गैस्ट्राइटिस, इसोफेगल वैरीसीज, पेट या डुओडेनम में ब्लीडिंग इसके संभावित कारण हो सकते हैं। मल में खून आने के क्या कारण हो सकते हैं?     बवासीर – एनआईएच के अनुसार बवासीर Rectal Bleeding का सबसे आम कारण माना जाता है। इसमें गुदा या मलाशय की नसों में सूजन आ जाती है। इससे व्यक्ति को मल त्याग करते समय दर्द, खुजली या चमकीला लाल खून दिखाई देता है।     गुदा में दरार होना (Anal Fissure) – एनसीबीआई के अनुसार कब्ज या कठोर मल के कारण गुदा की त्वचा में छोटी-छोटी दरार बन सकती है, जिससे खून निकल सकता है।     इंफ्लामेटरी बाउल डिजीज – क्रोहन और कोलाइटिस के मुताबिक क्रोहन रोग (Crohn's Disease) और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी स्थितियां आंतों में सूजन पैदा करती हैं। जिसकी वजह से व्यक्ति को मल में खून, पेट दर्द, दस्त और लगातार वजन कम होने की समस्या का सामना करना पड़ता है।     डाइवर्टिकुलर डिजीज (Diverticular Disease) – एनएचएस के मुताबिक बड़ी आंत की दीवार में छोटे पाउच बन जाने को डाइवर्टिकुला कहा जाता है। इनके फटने या सूजन होने पर ब्लीडिंग हो सकती है।     कोलन कैंसर (Colon Cancer) – अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार कुछ मामलों में मल में खून आना कोलन कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। विशेष रूप से यदि इसके साथ वजन घटना, कमजोरी या मल त्याग की आदतों में बदलाव भी हो। मल में खून आने के कारण किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? क्लिवलैंड क्लीनिक के अनुसार आगे बताए संकेतों या लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और इनके महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।     बार-बार मल में खून आना     काला या टार जैसा मल     लगातार पेट दर्द     अचानक वजन घटना     चक्कर आना या कमजोरी     एनीमिया के लक्षण     मल त्याग की आदतों में बदलाव मल में खून आना एक ऐसा लक्षण है जिसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि इसके पीछे बवासीर जैसी सामान्य समस्या हो सकती है, लेकिन कई बार अन्य गंभीर कारण भी इसकी वजह बन सकते हैं। यदि स्टूल में बार-बार खून दिखाई दे, काला मल आए या वजन कम होने जैसे लक्षण हों, तो बिना देरी किए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। हमने इस लेख की समीक्षा कैसे की हमारी टीम हेल्थ और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार रिसर्च करती है और भरोसेमंद स्रोतों के आधार पर कंटेंट तैयार करती है। हर आर्टिकल अनुभवी मेडिकल एक्सपर्ट्स द्वारा रिव्यू किया जाता है, ताकि आपको सही, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी मिल सके।

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, 22 जिलों के 687 गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिले बंद

हिसार. आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत सीटें न दिखाने वाले निजी स्कूलों पर शिक्षा निदेशालय की टेढ़ी नजर है। इस कड़ी में शिक्षा निदेशालय ने 22 जिलों के अंदर सर्वे कर 687 स्कूलों की पहचान की है, जोकि 3 साल से उच्च अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर शिक्षा के नाम पर दुकानें चला रहे थे। सर्वे रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि 687 स्कूलों के पास न मान्यता से संबंधित दस्तावेज मिले और न ही विशेष समयाविधि तक दाखिले करने के अधिकार से कोई संबंधित दस्तावेज मिले। जिस पर निदेशालय ने उपरोक्त स्कूलों से दाखिले की शक्ति छीनने का फैसला लिया है। साथ ही सभी उपायुक्त को भी पत्र जारी करने का फैसला लिया है, जोकि गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर आगामी कार्रवाई करेंगे। 413 निजी स्कूलों ने दिखाई 3 हजार सीटें प्रदेश में 1100 स्कूलों को सर्च किया था। जिनके पास मान्यता से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले थे। सरकार ने स्कूलों को दस्तावेज पूरे करने का समय दिया। जिस पर प्रदेश में 413 निजी स्कूलों ने मान्यता से संबंधित दस्तावेज पूरे कर दिया। साथ ही आरटीई के तहत 3 हजार सीटें भी दिखाई। जिसके बाद सरकार ने शेष 600 से अधिक स्कूलों पर कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए है। सरकार ने इस बार एक किलोमीटर का दायरा ही रखा है। जिसके दायरे में विद्यार्थी निजी स्कूल में उपरोक्त योजना के तहत आवेदन कर सकेगा। 6 जुलाई तक विद्यार्थी आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 भी जारी कर दिया है। किसी तरह की कोई शिकायत हो तो अभिभावक उपरोक्त हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज करवा सकता है। समस्या की ये सुनवाई करेगी कमेटी पहले अभिभावक खंड स्तर पर गठित कमेटी में अपनी शिकायत रख सकते हैं। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी व डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी पर अपील लगा सकते हैं इसके बाद भी समस्या का निदान नहीं हुआ तो संयुक्त निदेशक प्रशासनिक शाखा के पास शिकायत रख सकते हैं पंचकूला के मौलिक शिक्षा निदेशक मनिता मलिक ने कहा कि हमने प्रदेश के 687 निजी स्कूलों को जांचा है, जिनके पास मान्यता से संबंधित एक भी दस्तावेज नहीं मिले। समय देने पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए है। जिसके बाद अब एमआइएस पोर्टल बंद कर दिया जाएगा। साथ ही डीसी को भी स्पष्ट कहा जाएगा कि वे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर कार्रवाई करें।

पंजाब की महिलाओं को मिली बड़ी सौगात, बैंक अकाउंट में पहुंचे ₹3,000

लुधियाना. पंजाब सरकार की बहुप्रतीक्षित मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना का बुधवार को औपचारिक शुभारंभ होते ही प्रदेश की लाखों महिलाओं के मोबाइल फोन पर बैंक मैसेज आने लगे हैं। जैसे ही खातों में तीन-तीन हजार रुपये और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिलाओं के खातों में 4,500 रुपये जमा होने के संदेश पहुंचे, महिलाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। पूरे दिन महिलाएं एक-दूसरे से यही पूछती रहीं कि उनके खाते में पैसे आए या नहीं। योजना के शुभारंभ के अवसर पर लुधियाना के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों ने बड़ी स्क्रीन लगाकर मुख्यमंत्री का लाइव संबोधन दिखाया। कार्यक्रम के बाद देर शाम से महिलाओं के खातों में राशि ट्रांसफर होने का सिलसिला शुरू हो गया। चार वर्ष बाद योजना पर हुआ अमल गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने 18 वर्ष से अधिक आयु की प्रत्येक महिला को हर माह एक हजार रुपये तथा एससी वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था। लगभग चार वर्ष बाद सरकार ने इस योजना को अमलीजामा पहनाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की कि एक जुलाई से योजना लागू मानी जाएगी और शुरुआत में तीन माह की राशि एक साथ लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी। इसी कारण सामान्य श्रेणी की महिलाओं को 3000 रुपये और एससी वर्ग की महिलाओं को 4500 रुपये मिल रहे हैं। महिलाओं ने शाम आठ बजे तक किया इंतजार बसंत विहार, काकोवाल रोड निवासी माधुरी ने बताया कि वह सुबह से ही बैंक खाते में राशि आने का इंतजार कर रही थीं। शाम तक पैसा नहीं पहुंचने पर थोड़ी निराशा हुई, लेकिन रात करीब आठ बजे तीन हजार रुपये जमा होने का मैसेज मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए यह सरकार की सराहनीय पहल है। इसी क्षेत्र की गीता ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले योजना का फार्म भरा था। दोपहर से ही वह बार-बार मोबाइल पर बैंक मैसेज देख रही थीं। आखिरकार रात करीब आठ बजे उनके खाते में भी तीन हजार रुपये जमा होने का संदेश मिला। उन्होंने कहा कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ में कमजोर मानसून पर मुख्यमंत्री साय की सलाह, बारिश देखकर करें खेती, सरकार हर कदम पर साथ

रायपुर. अल नीनो के असर से मानसून के कमजोर होने पर मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि किसानों के साथ सरकार है. मौसम विभाग ने पहले से ही बता दिया है कि मानसून कमजोर रहेगा. हम भी किसानों को लगातार अवगत करा रहे हैं कि मानसून के हिसाब से खेती-किसानी की योजना बनाएं. जांजगीर चांपा और सक्ती के दौरे पर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आज सक्ती जा रहे हैं, वहाँ पर भाजपा जिला कार्यालय का भूमिपूजन है. इस दौरान मंत्रालय में गत दिवस हुई समीक्षा बैठक के संबंध में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस साल के बजट में पाँच मिशन बनाये हैं, उसमे एक AI मिशन भी है. जिस तरह से AI की उपलब्धता हर क्षेत्र में बढ़ रही हैं, उसके प्रभावी उपयोग पर चर्चा हुई है. चरण पादुका को लेकर जारी टेंडर पर हाईकोर्ट के रोक लगाए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि संज्ञान लिए हैं. पिछली कांग्रेस सरकार में योजना बंद हुई थी. अब हमारी सरकार ने फिर से शुरू किया है. लगातार हर साल इसका लाभ देंगे. वहीं IIM में 4 और 5 जुलाई को होने वाले चिंतन शिविर के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि चिंतन शिविर का यह तीसरा साल होगा. गुड गवर्नेंस को लेकर चर्चा होगी. सरकार के कामकाज पर फोकस रहेगा. उससे सरकार चलाने में बहुत मदद मिलती है.

3 जुलाई को रायपुर में दौड़ेगा छत्तीसगढ़, भव्य ‘सहकार संकल्प दौड़’ का होगा आयोजन SEO-Friendly Title 2: रायपुर में 3 जुलाई को ‘सहकार संकल्प दौड़’, हजारों प्रतिभागियों के साथ दौड़ेगा छत्तीसगढ़ SEO-Friendly Title 3:

3 जुलाई को रायपुर में दौड़ेगा छत्तीसगढ़, होगा भव्य 'सहकार संकल्प दौड़' का आयोजन सहकारिता, स्वास्थ्य और समृद्धि का संदेश देने एक साथ जुटेंगे प्रदेशवासी रायपुर,   छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता विभाग द्वारा सहकारिता की भावना को जन-जन तक पहुंचाने और स्वस्थ एवं समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण के उद्देश्य से 3 जुलाई को राजधानी रायपुर में 'सहकार संकल्प दौड़' का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन "सहकारिता की भावना के साथ, एक कदम समृद्ध छत्तीसगढ़ की ओर" थीम पर आधारित होगा। इसका उद्देश्य लोगों में सहयोग, एकता, स्वास्थ्य और सामूहिक विकास का संदेश देना है। सुबह 6 बजे मरीन ड्राइव से होगी शुरुआत सहकार संकल्प दौड़ का आयोजन 3 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 6 बजे रायपुर के मरीन ड्राइव (तेलीबांधा) में किया जाएगा। इसमें प्रदेशभर से नागरिक, युवा, विद्यार्थी, किसान, सहकारी संस्थाओं के सदस्य और विभिन्न वर्गों के लोग भाग लेंगे। विजेताओं को मिलेंगे आकर्षक पुरस्कार दौड़ में पुरुष और महिला वर्ग के प्रतिभागियों के लिए प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इससे नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा। सहकारिता और स्वस्थ जीवन का संदेश सहकार संकल्प दौड़ केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि जनजागरण का अभियान है। इसके माध्यम से सहकारिता को मजबूत बनाने, समाज में सहयोग की भावना विकसित करने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का संदेश दिया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य "सहकारिता से समृद्धि", "साथ चलें, साथ बढ़ें" और "स्वस्थ समाज, समृद्ध प्रदेश" के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है। अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता विभाग ने प्रदेश के सभी नागरिकों से इस आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लेने की अपील की है। विभाग का मानना है कि जनभागीदारी से ही सहकारिता का अभियान और अधिक मजबूत होगा तथा समृद्ध और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प साकार होगा।