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राहु गोचर का असर: शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश से 5 राशियों को बड़ा लाभ

 राहु का गोचर ज्योतिष में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह अचानक बदलाव, सफलता और अप्रत्याशित लाभ का कारक ग्रह है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 1 मई को राहु का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश हो चुका है, जो कि 2 अगस्त तक रहेगा. राहु का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कई राशियों के जीवन में बड़ा परिवर्तन लेकर आया है. यह गोचर खासतौर पर करियर, धन और सामाजिक प्रतिष्ठा के मामलों में प्रभाव डालेगा. आइए जानते हैं किन 5 राशियों को इस गोचर से सबसे ज्यादा लाभ मिलने वाला है और उनके जीवन में क्या बदलाव देखने को मिलेंगे. मेष राशि राहु का यह गोचर मेष राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से बेहद लाभकारी साबित हो सकता है. अचानक धन लाभ के योग बनेंगे और लंबे समय से रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं. करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो भविष्य में प्रमोशन का रास्ता खोलेंगी. हालांकि, निर्णय लेते समय जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा, नहीं तो नुकसान भी हो सकता है. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय करियर ग्रोथ का संकेत दे रहा है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई नौकरी का अवसर मिल सकता है. व्यापारियों को नए क्लाइंट और बड़े प्रोजेक्ट मिल सकते हैं. इस दौरान आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स आपको सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगी. सिंह राशि सिंह राशि वालों के लिए राहु का यह गोचर सामाजिक प्रतिष्ठा और पहचान बढ़ाने वाला रहेगा. आपके काम की सराहना होगी और आप किसी बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं. आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी. निवेश से लाभ मिलने की संभावना है, लेकिन सोच-समझकर निवेश करना बेहतर रहेगा. तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए यह समय नए अवसरों का रहेगा. खासकर विदेश से जुड़े कामों में सफलता मिल सकती है. करियर में बदलाव के योग बन रहे हैं, जो आपके लिए फायदेमंद साबित होंगे. आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा और पुराने कर्ज से राहत मिल सकती है. कुंभ राशि कुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर बेहद शुभ माना जा रहा है, क्योंकि राहु का संबंध इस राशि से विशेष रूप से होता है. इस दौरान आय के नए स्रोत बनेंगे और करियर में तेजी से उन्नति होगी. बिजनेस में विस्तार के योग हैं और साझेदारी से भी लाभ मिल सकता है.

परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानकी और नकद फसलों पर दे रहे हैं जोर

जशपुर के किसान खेती में बना रहे हैं अलग पहचान परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानकी और नकद फसलों पर दे रहे हैं जोर चाय, नाशपाती, लीची, स्ट्रॉबेरी के बाद अब सेब की खेती में आजमा रहे हैं हाथ रायपुर जशपुर हमेशा फसल विविधताओं के लिए जाना जाता रहा है। यहां के किसान परंपरागत फसलों के साथ उद्यानकी और नकद फसलों पर भी जोर दे रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जशपुर में उद्यानिकी फसलों के लिए अनुकूल वातावरण को देखते हुए किसानों को उद्यानिकी और नगद फसलों के लिए लगातार  प्रोत्साहित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर स्थानीय जिला प्रशासन, नाबार्ड और उद्यानिकी  विभाग द्वारा इस दिशा में विशेष प्रयास किया जा रहा है। किसानों  को उद्यानिकी फसलों के लिए विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इन समन्वित प्रयासों से पिछले दो-ढाई सालों में यहाँ के किसान परंपरागत फसलों के स्थान पर उद्यानिकी एवं नगदी फसलों में रुचि लेने लगे हैं। जशपुर के किसान अब चाय, लीची, स्ट्राबेरी, नाशपाती के साथ सेब के बगान भी तैयार कर रहे हैं। जिला प्रशासन, उद्यानिकी विभाग, रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (त्म्।क्ै) व नाबार्ड के समन्वित प्रयासों से जशपुर ने फलोत्पादन व बागवानी में नई पहचान बनाई है। इन पहलों से स्थानीय किसानों की आय सुदृढ़ हुई है। कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।  जशपुर में सेब उत्पादन वर्ष 2023 में आरंभ हुआ। सेब खेती अब लगभग 410 एकड़ में विस्तारित है, जिसमें लगभग 410 किसान सेब की खेती कर रहे हैं। जिले के मनोर व बगीचा विकासखंड तथा शैला, छतौरी, करदना व छिछली जैसे पंचायतों में लगाए गए सेब के वृक्षों ने इस वर्ष उत्कृष्ट गुणवत्ता व आकार के फल दिए हैं। । स्थानीय किसान बताते हैं कि जशपुर के सेब स्वाद और गुणवत्ता के लिहाज से कश्मीर व हिमाचल के सेबों के समकक्ष हैं। रूरल डेव्हलपमेंट एंड डेव्हलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष श्री राजेश गुप्ता ने बताया कि जशपुर जिले के 410 किसानों ने अपने 1-1 एकड़ जमीन पर सेब की खेती कर रहे हैं।  इसी तरह जिले में नाशपाती के बाग लगभग 3,500 एकड़ में फैले हुए हैं, जहाँ 3,500 से अधिक किसान नाशपाती की खेती कर रहे हैं। जिले के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई, गीधा आदि लाखों में नाशपाती की खेती हो रही है। यहीं से नाशपाती पैक कर दिल्ली, उत्तरप्रदेश और उड़ीसा सहित दूसरे राज्यों में भेजी जाती है। नाशपाती का वार्षिक उत्पादन लगभग 1,75,000 क्विंटल तक पहुँच चुका है। किसानों को नाशपाती से प्रति एकड़ वार्षिक आमदनी लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये मिल रहा है। उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बाजार पहुँच जैसी योजनाएँ हैं, जिनसे किसान आत्मनिर्भर बने हैं और नई फसल विविधिकरण के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण प्राप्त कर रहे हैं। जशपुर में चाय की खेती पहले से होती आ रही है और यहां की चाय पत्ती की गुणवत्ता अच्छी है। अब जशपुर में सेब व नाशपाती उत्पादन के सफल विकास से जशपुर न केवल नए बाजारों के रूप में स्थापित हुआ है बल्कि स्थानीय किसानों के जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। भविष्य में इन फसलों का दायरा और विस्तारित करने की योजना है।

इंदर कौर हत्याकांड में पुलिस को मिले अहम सबूत, फरार आरोपी पर शिकंजा तेज

लुधियाना पंजाबी सिंगर इंदर कौर के लुधियाना में हुए मर्डर केस में हत्यारे सुखविंदर सिंह सुक्खा के खिलाफ पुलिस ने LOC जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस के हाथ कई अहम सबूत भी लगे है जिससे सुक्खा को कनाडा से लुधियाना लाया जाएगा। नेपाल से भी पुलिस कई लिंक खंगाल रही है। इस केस में अभी तक और किन लोगों की शमूलियत है इसे लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस इस मामले की गहनता से जांच में जुटी है। उधर, इंदर कौर के शव का पोस्टमॉर्टम होने के बाद ये सामने आया है कि सिंगर के दो गोलियां लगी है। एक गोली उसकी छाती के दाहिनी तरफ आर पार हुई है और दूसरी गोली माथे में फंसी थी। क्या था पूरा मामला पंजाबी सिंगर इंदर कौर उर्फ यशइंदर कौर की उसके NRI बॉयफ्रेंड सुखविंदर सिंह उर्फ सुक्खी बराड़ ने हत्या कर दी। शादी न करने पर उसने इंदर को लुधियाना में समराला के नजदीक नीलो नहर के किनारे कार में गोली मारी। इसके बाद लाश नीलो नहर और उसकी कार रामपुर गांव के पास नहर में फेंक दी। इंदर कौर की लाश समराला पुलिस को बंद पड़े टोल प्लाजा से 50 मीटर दूर नहर में पड़े सूखे पेड़ से फंसी हुई मिली। जहां लाश बरामद हुई है उससे 7 किलोमीटर दूर रामपुर गांव में नहर से थाना जमालपुर की पुलिस को इंदर की फोर्ड फिगो कार बरामद हुई। आरोपियों ने जहां रात के अंधेरे में कार को नहर में फेंका वहां पर दिन में भी जाने से लोग कतराते हैं। जब पुलिस कार को बरामद करने पहुंची तो गांव के लोग भी सहम गए। उनका कहना है कि इस रास्ते कोई अंजान आदमी आ ही नहीं सकता। उनका कहना है कि जो भी रात को यहां कार फेंकने आए हैं निश्चित तौर पर वो पहले भी आए होंगे। हत्या वाली जगह से 1 किलोमीटर दूर मिली लाश जानकारी के मुताबिक 13 मई की रात को करीब 8:30 बजे इंदर कौर अपनी सफेद रंग की फोर्ड फिगो कार से राशन लेने बाजार गई थी। 9 बजे सुखविंदर ने साजिश के तहत इंदर कौर को फोन करके नीलो नहर के पुल पर बुलाया। वहां सुखविंदर, उसका पिता प्रीतम सिंह और उसके दो दोस्त करमजीत सिंह और रविंदर सिंह रवि पहले से मौजूद थे। बंदूक के दम पर इंदर को कार समेत किया था किडनैप इन सबने मिलकर बंदूक के दम पर इंदर को कार समेत किडनैप कर लिया। इसके बाद उन्होंने इंदर की गोलियां मारकर हत्या कर दी और फिर लाश नहर में फेंक दी। 19 मई को इंदर कौर की लाश नीलो पुल से करीब आधा किमी दूर बंद टोल प्लाजा के पास नहर में पड़े सूखे पेड़ के पास फंसी हुई मिली। 6 दिन पानी में पड़े रहने के कारण शव फूला शव 6 दिन से पानी में पड़े रहने के कारण फूल गया था। इसलिए उसके बाहर निकालने में भी पुलिस को परेशानी हुई। पुलिस की टीम ने जब शव को बाहर निकाला तो उसके लिए उन्हें मेडिकल ग्लव्स पहनने पड़े। नहर के किनारे ग्लव्स अब भी पड़े हुए हैं। नहर में जहां से पुलिस को शव बरामद हुआ वहां पर न तो खून के निशान थे और न ही झाड़ियां टूटी हुई मिलीं।  

HSSC सचिव के रवैये पर हाई कोर्ट नाराज, कोर्ट में पेश न होने पर थमाया अवमानना नोटिस

चंडीगढ़. हरियाणा की सरकारी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन के सचिव चिन्मय गर्ग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अवमानना कार्रवाई शुरू करने के संकेत दिए हैं। अदालत ने सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मामलों में अदालत के आदेशों को हल्के में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। मामला हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई के समय हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक बाल्यान अदालत में पेश हुए। उन्होंने न्यायालय को बताया कि आयोग के सचिव की ओर से जो हलफनामा दाखिल किया गया है, वह अदालत द्वारा उठाए गए सवालों और निर्देशों का संतोषजनक उत्तर नहीं देता। राज्य पक्ष ने कहा कि कुछ तथ्यों को और स्पष्ट करने की आवश्यकता है तथा विस्तृत जवाब तैयार करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाए। इस पर जस्टिस संदीप मौदगिल ने राज्य सरकार को राहत देते हुए नया हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय तो दे दिया, लेकिन साथ ही सख्त टिप्पणी भी की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह “अंतिम अवसर” होगा और इसके बाद किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 तय कर दी। सुनवाई के दौरान सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया जब अदालत ने पाया कि एचएसएससी सचिव चिन्मय गर्ग स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं हुए हैं। न्यायालय ने इस पर तुरंत राज्य के वकील से स्पष्टीकरण मांगा। अदालत को बताया गया कि सचिव उस समय एडवोकेट जनरल, हरियाणा के कार्यालय में मौजूद थे। यह जानकारी मिलते ही हाई कोर्ट ने तीखी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि पिछली सुनवाई में सचिव को व्यक्तिगत उपस्थिति से कोई छूट नहीं दी गई थी। इसके बावजूद उनका अदालत में उपस्थित न होना न्यायिक आदेशों की अनदेखी माना जाएगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि जब कोई अधिकारी अदालत के समक्ष जवाबदेह होता है, तब उसका यह दायित्व बनता है कि वह स्वयं उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करे। केवल हलफनामा दाखिल कर देने से जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि सचिव ने न्यायालय के आदेशों की “जानबूझकर और इरादतन अवहेलना” की है। अदालत ने माना कि न केवल समय पर स्पष्ट जवाब दाखिल नहीं किया गया बल्कि न्यायालय में अनुपस्थित रहकर सुनवाई प्रक्रिया को भी प्रभावित किया गया। इसी आधार पर सचिव के खिलाफ अवमानना कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि मामले को अत्यावश्यक श्रेणी में सूचीबद्ध किया जाए ।

नशा तस्करी पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन, ड्रोन नेटवर्क की निगरानी पर NCB को निर्देश

चंडीगढ़. पंजाब में लगातार बढ़ रहे नशे के कारोबार, सीमा पार से ड्रोन के जरिए हो रही तस्करी और हथियारों की सप्लाई को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशकों के साथ-साथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को आदेश जारी किए हैं। आदेशों में साफ कहा है कि वे हर तीन महीने में ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों, बरामदगी, नशे के निस्तारण और नशा मुक्ति अभियानों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि रिपोर्ट में किसी प्रकार की लापरवाही, कमी या गंभीर स्थिति सामने आती है तो मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश उस जनहित याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया, जिसे अदालत ने स्वयं संज्ञान लेते हुए शुरू किया था। हाई कोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान अदालत ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित एक खबर के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया था। खबर में सीमा सुरक्षा बल द्वारा पंजाब में बढ़ती ड्रग तस्करी और सीमा पार से ड्रोन के जरिए भेजे जा रहे नशीले पदार्थों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। समाचार रिपोर्ट में बताया गया था कि बीएसएफ ने पंजाब पुलिस को 75 ऐसे व्यक्तियों की सूची सौंपी थी, जो कथित रूप से ड्रग तस्करी में शामिल पाए गए थे। इसके साथ ही यह भी सामने आया था कि वर्ष 2023 के दौरान सीमा क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से भारत भेजे जा रहे लगभग 755 किलोग्राम नशीले पदार्थ बरामद किए गए। इतना ही नहीं, तस्करी के इस नेटवर्क के साथ हथियारों की सप्लाई भी जुड़ी हुई मिली और कई राइफल तथा पिस्तौल भी जब्त की गईं। सरकारों व एनसीबी ने दी थी स्टेटस रिपोर्ट मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब, हरियाणा और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की ओर से अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई। इन रिपोर्टों में बताया गया कि राज्य सरकारों और एजेंसियों द्वारा नशे की रोकथाम, ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई, जब्त मादक पदार्थों के सुरक्षित निस्तारण और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। अदालत ने इन रिपोर्टों का अवलोकन करने के बाद कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी लगातार निगरानी और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। हर तीन महीने में देंगे विस्तृत रिपोर्ट खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के डीजीपी व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक नियमित रूप से यह जानकारी देंगे कि कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई, कितनी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद हुए, उनका निस्तारण कैसे किया गया और नशा मुक्ति के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने यह जिम्मेदारी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से तय की है ताकि भविष्य में इन रिपोर्टों की न्यायिक समीक्षा की जा सके।

कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई पर खुशवंत साहेब का तंज, ‘जनसेवा नहीं, जेब सेवा चाहिए’

रायपुर. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को लेकर टीएस सिंहदेव और दीपक बैज में ठन गई है. इस पर दोनों के बीच चल रही बयानबाजी पर खुशवंत साहेब ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में कई गुट हैं. टीएस सिंहदेव गुट, दीपक बैज गुट, भूपेश गुट ना जाने और इनके कितने गुट सामने आएंगे कांग्रेस में. लगातार गुटबाजी चल रही है. जब चुनाव होता है, तब कांग्रेस में कुर्सी तोड़ कार्यक्रम चलता है. ये सिर्फ भ्रष्टाचार जानते हैं. खुशवंत साहेब ने कहा कि कांग्रेस हमेशा परिवारवाद की पार्टी रही है. ये अपने परिवार को ही नहीं संभाल पा रहे और देश संभालने की बात करते हैं. भारत जोड़ने की बात करते हैं, पहले अपनी पार्टी को तो जोड़ लें. आपस में युद्ध कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि इनके पास कोई विचारधारा, कोई सोच नहीं है. जेब भरने और भ्रष्टाचार करने के लिए सरकार में आना चाहते हैं. सीएम के दिल्ली दौरे पर मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दिल्ली विकास और उन्नति के लिए जाते हैं. पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करते हैं. छत्तीसगढ़ के लिए सौगात लेकर आते हैं. कांग्रेस पहले खुद को संभाल ले. केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर बीजेपी के घर-घर संपर्क अभियान चलाए जाने पर मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि हमारा तो सुशासन तिहार चारों तरफ चल रहा है. जन चौपाल लगाकर सीधे जनता से बात कर रहे हैं. जनता खुश है. वहीं कांग्रेस के पिटाई वाले बयान पर उन्होंने कहा कि जनता उन्हें पहले ही पिट चुकी है. 2023 और 2024 के चुनाव में भी पिट चुके हैं. आने वाले 2028 के चुनाव में भी जनता इन्हें कूटेगी-पिटेगी. इनके कार्यकर्ता और नेता ही एक-दूसरे को पिट रहे हैं. पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि पर खुशवंत साहेब ने कहा कि दूसरे देशों से तुलना करें, वहां कीमतें कैसे बढ़ रही हैं, और भारत में कीमत कितनी बढ़ रही हैं. पीएम मोदी चाहते हैं कि जनता को ज्यादा दिक्कत न हो, इसलिए ज्यादा दाम नहीं बढ़ रहे. कांग्रेस को समझना चाहिए कि युद्ध की स्थिति के कारण समस्याएं आ रही हैं. पढ़े-लिखे हैं, तो समझना चाहिए. भाजपा प्रशिक्षण शिविर को लेकर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि भाजपा एक विचारधारा पर चलने वाली पार्टी है, अनेकों प्रकार के संगठनात्मक कार्य चलते रहते हैं. आज जिला प्रशिक्षण शिविर चल रहा है. प्रत्येक जिले में प्रशिक्षण शिविर लग रहा. कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण होगा, उन्हें जानकारी मिलेगी.

योगी सरकार का एक्शन मोड जारी, IAS और PCS अधिकारियों का हुआ ट्रांसफर

 लखनऊ योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार ऐक्शन मोड में है। यूपी की प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से सरकार ने एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले किए हैं। मुरादाबाद के संयुक्त मजिस्ट्रेट रहे आईएएस राम मोहन मीणा को सीडीओ प्रतापगढ़ बनाया गया है। इसके साथ ही प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग दायित्व संभाल रहे 19 पीसीएस अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। सुल्तानपुर के मुख्य राजस्व अधिकारी के पद पर सृष्टि धवन को तैनाती दी गई है। सुशील प्रताप सिंह कुलसचिव भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, अपर निदेशक सस्कृति निदेशालय, संयक्त सचिव एलडीए, दुर्गेश मिश्रा को अपर नगर आयुक्त गोरखपुर नगर निगम, ब्रजेश कुमार सिंह को अपर जिलाधिकारी (नगर) मेरठ, अनिरूद्ध प्रताप सिंह को एडीएम एफआर मुजफ्फरनगर बनाया गया है। पीसीएस अधिकारी आलोक कुमार वर्मा अपर आयुक्त वाराणसी, सृष्टि धवन को मुख्य राजस्व अधिकारी सुल्तानपुर के पद पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। मनोज कुमार सिंह को नगर मजिस्ट्रेट उन्नाव, राजीव राज को एडीएम एफआर जालौन, गौरव रंजन श्रीवास्तव को अपर नगर आयुक्त गोरखपुर नगर निगम, अनुपम मिश्रा को उपसचिव उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, सीमा पांडे को अपर नगर आयुक्त, वाराणसी नगर निगम, नितीश कुमार सिंह को एडीएम प्रशासन बुलंदशहर बनाये गए हैं प्रमोद कुमार पांडे को अपर आयुक्त आजमगढ़ मंडल, आयुष चौधरी को एडीएम एफआर सीतापुर, सुनील कुमार त्रिवेदी को मुख्य राजस्व अधिकारी गाजीपुर, संजय कुमार को नगर मजिस्ट्रेट हरदोई, अजीत कुमार सिंह को एडीएम एफआर गौतमबुद्धनगर, सुरेश कुमार पाल को मुख्य राजस्व अधिकारी बलिया और त्रिभुवन को एडीएम एफआर बदायूं के पद पर तैनाती दी गई है। इसके पहले हुए थे दो एडीजी समेत 9 आईपीएस के ट्रांसफर इसके पहले गुरुवार को शासन ने कानपुर और आगरा जोन के एडीजी समेत नौ आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया था। एडीजी कानपुर जोन के पद पर तैनात रहे आलोक सिंह को डीजी पीएसी मुख्यालय के साथ डीजी विशेष सुरक्षा बल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। एडीजी आगरा जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ को एडीजी कानपुर जोन बनाया गया है। वहीं एडीजी अपराध रहे एसके भगत आगरा जोन के नए एडीजी नियुक्त किए गए हैं। शासन ने डीजी नागरिक सुरक्षा के साथ डीजी विशेष सुरक्षा बल का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे डीके ठाकुर को डीजी होमगार्ड के पद पर तैनाती दी है। उन्हें डीजी नागरिक सुरक्षा का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। डीजी सीआईडी के साथ डीजी साइबर क्राइम का भी पदभार संभाल रहे बिनोद कुमार सिंह को इन पदों के साथ-साथ डीजी यूपी-112 को भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह अब तिहरी जिम्मेदारी संभालेंगे।

हीटवेव के बीच पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, दफ्तरों के नए टाइम टेबल से लोगों को मिलेगी राहत

चंडीगढ़  भीषण गर्मी के मद्देनजर लोगों को राहत देने के उद्देश्य से अहम फैसला लेते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब सरकार के सभी दफ्तरों, स्कूलों और कॉलेजों का समय बदलने की घोषणा की है। जनहित में नए समय के अनुसार कामकाज का समय मौजूदा सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे की बजाय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक होगा। 25 मई से लागू होगा बदला हुआ समय इस फैसले की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि बदला हुआ समय 25 मई से लागू होगा और अगले आदेशों तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा, "यह फैसला आम लोगों की सुविधा के लिए लिया गया है ताकि वे पूरे पंजाब में पड़ रही भीषण गर्मी के दौरान सरकारी दफ्तरों में आसानी से अपने काम करवा सकें। हर किसी की भलाई सुनिश्चित करने के लिए सभी भागीदारों के साथ विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है।" छुट्टी लिए बिना पूरे होंगे सरकारी काम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि बदले हुए समय से लोग अपने काम से छुट्टी लिए बिना सुबह-सुबह अपने सरकारी काम पूरे कर सकेंगे। उन्होंने कहा, "इस कदम से कर्मचारियों को भी बड़ा फायदा होगा, क्योंकि वे दिन में तापमान बढ़ने से पहले अपनी ड्यूटी खत्म कर सकेंगे।" मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अब कर्मचारियों को अपने बच्चों के साथ बिताने के लिए अधिक समय मिलेगा, जो स्कूलों और कॉलेजों के बदले हुए समय के कारण लगभग उसी समय घर लौटेंगे। उन्होंने कहा, "यह फैसला पंजाब सरकार की लोक-पक्षीय पहुंच और नागरिकों के दैनिक जीवन को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।" बिजली बचाने के लिए उठाया गया कदम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि यह नया समय प्रदेश भर के स्कूलों व कॉलेजों के साथ-साथ पंजाब सरकार के सभी दफ्तरों पर लागू होगा। उन्होंने आगे कहा, "पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पी.एस.पी.सी.एल.) के आंकड़ों के अनुसार बिजली का पीक लोड दोपहर 1:00 बजे के बाद शुरू होता है, इसलिए दफ्तरों का नया समय बिजली की खपत को कम करने और बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव को घटाने में भी मदद करेगा।" समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि जनता की सुविधाओं की रक्षा और लोगों की भलाई सुनिश्चित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।

पीएचएफ पर खिलाड़ियों का असंतोष, शिविर भत्ता घटाकर 3.5 डॉलर किए जाने का मामला

कराची  पाकिस्तान के हॉकी खिलाड़ियों की आर्थिक परेशानियां जारी हैं। उन्हें पाकिस्तान हाकी महासंघ (पीएचएफ) से अभी तक बकाया राशि नहीं मिली है। इस साल अगस्त में नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले एफआइएच विश्व कप से पहले पाक हॉकी खिलाड़ियों के दैनिक प्रशिक्षण शिविर भत्ते में भी कटौती की गई है। राष्ट्रीय महासंघ (पीएचएफ) के अंतरिम निकाय ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों और अधिकारियों को अब विदेशी दौरों पर प्रतिदिन 110 डालर (लगभग 30647 पाकिस्तानी रुपये) का भत्ता मिलेगा। हालांकि खिलाड़ियों ने शिकायत की है कि उनके प्रशिक्षण शिविर भत्ते को 11 डॉलर (लगभग 3000 पाकिस्तानी रुपये) से घटाकर 3.5 डालर (लगभग 1000 रुपये) कर दिया गया है। पीएचएफ के एक सूत्र के अनुसार अनुभवी खिलाड़ियों ने पीएचएफ से प्रशिक्षण शिविर की अवधि के लिए मिलने वाले भत्ते की पुष्टि करने को कहा था। पाकिस्तान ने गुरुवार को बेल्जियम और इंग्लैंड में अगले महीने होने वाले एफआइएच प्रो लीग मैचों के लिए अपनी 20 सदस्यीय टीम की घोषणा की, लेकिन कप्तान का नाम नहीं बताया। पीएचएफ के इस रवैये से भी खिलाड़ी नाखुश हैं। शकील अम्माद बट पिछले साल की शुरुआत से ही पाकिस्तान की कप्तानी कर रहे हैं। एफआइएच प्रो लीग का तीसरा चरण 13 से 27 जून तक निर्धारित है, जिसमें पाकिस्तान बेल्जियम, स्पेन, इंग्लैंड और अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी भारत के विरुद्ध खेलेगा।

साहिबगंज-पाकुड़ बॉर्डर पर रोजमर्रा की तरह चल रही आवाजाही, प्रशासन ने बताया शांत माहौल

साहिबगंज  पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचलों के बीच झारखंड-बंगाल सीमा पर सुरक्षा और आम जनजीवन को लेकर चल रही तरह-तरह की चर्चाओं के बीच जमीनी हकीकत पूरी तरह सामान्य है. प्रभात खबर की टीम ने साहिबगंज और पाकुड़ जिले से सटे बरहरवा, राजमहल और पाकुड़ के सीमावर्ती इलाकों में ‘ग्राउंड जीरो’ पर जाकर वास्तविक हालातों की पड़ताल की, जिसमें बॉर्डर पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और रोजमर्रा की तरह पाई गई. नाव, ट्रेन और बसों से सामान्य आवाजाही ग्राउंड जीरो पड़ताल के दौरान पाया गया कि झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच आम लोगों और वाहनों का आवागमन सामान्य दिनों की तरह ही जारी है. बरहरवा रेल रूट, राजमहल गंगा घाट और पाकुड़ से जुड़े विभिन्न सड़क मार्गों पर यात्रियों को किसी भी तरह की अतिरिक्त रोक-टोक या विशेष सघन जांच अभियान जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ रहा है. सीमावर्ती हाट-बाजारों में भी व्यापारिक गतिविधियां नियमित रूप से चल रही हैं और नदी मार्ग से नावों के जरिए लोग सामान्य रूप से आ-जा रहे हैं. हालांकि स्थानीय पुलिस की सामान्य गश्त जरूर देखने को मिली, लेकिन बॉर्डर को लेकर किसी विशेष पाबंदी जैसी कोई तस्वीर नहीं है. बंगाल से दुकानदारों के पलायन की चर्चा महज अफवाह ज्ञात हो कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के हावड़ा सहित अन्य शहरी इलाकों में सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाने की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई थी. इसके बाद से यह चर्चा तेज थी कि वहां से उजाड़े गए बड़ी संख्या में फुटपाथी दुकानदार और अन्य लोग झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में प्रवेश कर रहे हैं. लेकिन प्रभात खबर की इस ग्राउंड रिपोर्टिंग में इन दावों की किसी भी स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है. साहिबगंज और पाकुड़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसी कोई असामान्य या बड़े पैमाने पर आवाजाही नहीं देखी गई है और न ही स्थानीय प्रशासन या क्षेत्रीय सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है, जिससे साफ है कि यह चर्चा महज एक अटकलें और अफवाह है. भारत-बांग्लादेश से सटे मालदा बॉर्डर पर बीएसएफ का कड़ा पहरा झारखंड-बंगाल बॉर्डर पर जहां सामान्य स्थिति है, वहीं दूसरी ओर भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सुरक्षा बेहद सख्त दिखी. सीमा सुरक्षा बल (BSF) की गतिविधियां पहले की तुलना में काफी सक्रिय हो चुकी हैं. महदीपुर, कालियाचक और वैष्णवनगर जैसे बेहद संवेदनशील और नदी-खेतों से जुड़े ओपन बॉर्डर वाले इलाकों में बीएसएफ द्वारा गश्त और चौकसी काफी बढ़ा दी गई है. खासकर रात के वक्त फ्लडलाइट और आधुनिक सर्विलांस उपकरणों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है. प्रशासन की अफवाहों से बचने की अपील मालदा के गुलाबगंज जीरो पॉइंट पर भी फिलहाल सुरक्षात्मक सतर्कता के बीच गतिविधियां सामान्य हैं, जहां भारतीय परिवार अपने वैध पहचान पत्र दिखाकर रोजाना की तरह आ-जा रहे हैं. इस पूरी स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों के जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से चलने वाली किसी भी अपुष्ट खबर और अफवाह पर ध्यान न दें. झारखंड-बंगाल अंतरराज्यीय सीमा पर पूरी तरह शांति और सामान्य माहौल है, जबकि देश की सुरक्षा के मद्देनजर भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ पूरी तरह अलर्ट मोड में काम कर रही है.