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चेन्नई सुपर किंग्स करेगी बड़ा फेरबदल, 14 करोड़ वाला खिलाड़ी भी बाहर होने की कगार पर

चेन्नई चेन्नई सुपर किंग्स लगातार तीसरा मैच हारकर IPL 2026 में प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है. लगातार तीसरी बार है जब 5 बार की चैंपियन CSK प्लेऑफ में क्वालीफाई नहीं कर पाई. अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही चेन्नई अगले साल कई परिवर्तन करना चाहेंगी. ऐसे में कई प्लेयर्स हैं, जिनको लेकर माना जा रहा है कि चेन्नई उन्हें रिलीज कर देगी।  IPL 2027 से पहले मेगा ऑक्शन होगा, जिसमें सभी फ्रेंचाइजियों के लिए रिटेन करने वाले खिलाड़ियों की संख्या निश्चित होती है. ऐसे में चेन्नई कई प्लेयर्स को रिलीज कर सकती है, जो उनकी योजना में फिट नहीं बैठे या बैठेंगे. वहीं कई को इसलिए अलग किया जा सकता है क्योंकि उनसे पहले टीम दूसरे खिलाड़ियों को प्रायोरिटी देगी।  सरफराज खान सरफराज खान को चेन्नई सुपर किंग्स ने 75 लाख रुपये में खरीदा था. इस सीजन उन्हें 8 मैच खेलने को मिले, जिसमें खेली 7 पारियों में उन्होंने कुल 161 रन बनाए. मेगा ऑक्शन से पहले चेन्नई शायद ही सरफराज को रिटेन करे, हालांकि उनका प्राइस कम ही है लेकिन फिर भी टीम शायद उन्हें रिलीज कर दे।  खलील अहमद खलील अहमद प्रभाव नहीं छोड़ पाए, शुरूआती मैचों में वह बेअसर रहे और फिर चोट के कारण नहीं खेल पाए. उन्होंने 5 मैचों में सिर्फ 2 ही विकेट लिए. चेन्नई की गेंदबाजी इस बार अच्छी नहीं रही. मेगा ऑक्शन से पहले चेन्नई शायद ही खलील को भी रिटेन करे, टीम उन्हें रिलीज कर सकती है।  प्रशांत वीर प्रशांत को चेन्नई सुपर किंग्स ने रिकॉर्ड बोली (14 करोड़ 20 लाख रुपये) लगाकर खरीदा था, लेकिन वह कोई छाप नहीं छोड़ पाए. उन्होंने 6 मैच खेले और सिर्फ एक ही मैच में उन्हें गेंदबाजी दी गई, जिसमें डाले 2 ओवरों में उन्होंने 25 रन दिए और कोई विकेट नहीं लिया. ऐसा नजर आया कि प्रशांत उनकी योजना में फिट नहीं बैठ पा रहे. मेगा ऑक्शन से पहले फ्रेंचाइजी निश्चित संख्या तक ही प्लेयर्स को रिटेन कर सकती हैं, ऐसे में शायद चेन्नई प्रशांत वीर को रिलीज कर दे और अपने पर्स को बढ़ाना चाहे।  मुकेश चौधरी 29 वर्षीय तेज गेंदबाज मुकेश चौधरी 2022 से चेन्नई सुपर किंग्स के लिए ही खेल रहे हैं, इस साल उन्होंने 8 मैचों में 8 ही विकेट लिए. उनका इकॉनमी 8.89 का रहा, लेकिन शायद चेन्नई अब नए खिलाड़ियों को तलाशे. हालांकि मुकेश में शानदार प्रतिभा है, वह इस टीम के महत्वपूर्ण खिलाड़ी रहे हैं लेकिन शायद वह उन खिलाड़ियों में न आएं जिन्हे चेन्नई मेगा ऑक्शन से पहले रिटेन करना चाहे।  स्पेंसर जॉनसन ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज स्पेंसर जॉनसन को भी चेन्नई सुपर किंग्स रिटेन नहीं करना चाहेगी. जॉनसन ने इस साल खेले 3 मैचों में 2 विकेट लिए. जॉनसन को चेन्नई ने रिप्लेसमेंट के तौर पर सीजन के बीच में शामिल किया था, उनका प्राइस 1.5 करोड़ रुपये है. चेन्नई उन्हें अगले संस्करण के लिए होने वाले मेगा ऑक्शन से पहले रिलीज कर सकती है। 

निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण, 34 कार्यों की हुई समीक्षा

भोपाल लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत प्रदेश में संचालित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति की समीक्षा के लिए 20 मई को मुख्य अभियंताओं के सात दलों द्वारा भोपाल, मण्डला, अशोकनगर, खंडवा, रीवा, नीमच एवं निवाड़ी जिलों में औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में कुल 34 कार्यों का रेंडम आधार पर चयन कर परीक्षण किया गया। निरीक्षित कार्यों में 21 कार्य लोक निर्माण विभाग (सड़क एवं पुल), 6 कार्य परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) के भवन निर्माण, 6 कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम तथा एक कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम से संबंधित था। निरीक्षण दलों से प्राप्त प्रतिवेदनों की समीक्षा बैठक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में प्रमुख अभियंता (सड़क/पुल)  के.पी.एस. राणा, प्रमुख अभियंता (भवन)  एस.आर. बघेल, प्रमुख अभियंता (बीडीसी)  अजय वास्तव, तकनीकी सलाहकार एमपीआरडीसी  आर.के. मेहरा सहित विभाग के समस्त मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं निरीक्षणकर्ता अधिकारी ऑनलाइन उपस्थित रहे। समीक्षा में निवाड़ी जिले में सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय से रियारा धाम तेहरका तक 1.50 किलोमीटर लंबाई की निर्माणाधीन सड़क के संबंध में संबंधित मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग सागर परिक्षेत्र को पुनः निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त 19 अन्य कार्यों में आंशिक सुधार कर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए। बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि निरीक्षण प्रतिवेदनों में की गई अनुशंसाओं का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए तथा पूर्व में किए गए निरीक्षणों की लंबित कार्यवाहियों का निराकरण अगली समीक्षा बैठक से पूर्व पूर्ण किया जाए। समीक्षा में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं लोकपथ ऐप पर प्राप्त शिकायतों के संतोषजनक और समयबद्ध निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को शिकायतकर्ताओं को निराकरण की जानकारी देकर संतुष्टि प्राप्त करने तथा विभागीय रैंकिंग में सुधार के लिये निरंतर प्रयास करने के निर्देश दिए गए। बैठक में वर्षा ऋतु से पूर्व सड़क, पुल एवं भवनों के संधारण कार्य पूर्ण करने, दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट स्थलों के सुधार कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने तथा लोक कल्याण सरोवर योजना के कार्य 30 जून 2026 तक पूर्ण कर विभागीय पोर्टल पर जियो-टैग्ड वाली फोटो अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अतिरिक्त भास्कराचार्य संस्थान द्वारा विकसित किए जा रहे लोक कल्याण सूचकांक मॉड्यूल में समय पर प्रविष्टियां दर्ज करने, सड़क किनारे पौधारोपण करने तथा विभागीय नवाचारों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।  

Rupee Fall पर बोले अरविंद पनगढ़िया- रुपये को गिरने देने से घबराने की जरूरत नहीं

नई दिल्‍ली पिछले कुछ समय से रुपये में तेज गिरावट आई है, जिसे लेकर कुछ एक्‍सपर्ट्स का दावा है कि रुपया 100 लेवल के पार जा सकता है. यह भी खबर आई है कि आरबीआई रुपये को 100 लेवल पर जाने से बचाने के लिए कई प्रयास कर रहा है।  इस बीच, वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने RBI से आग्रह किया है कि 100 लेवल पर जाने से बचाने की कोशिश ना करें. इसे अपनी नीतिगत प्रतिक्रिया निर्धारित न करने दें. 100 सिर्फ एक नंबर है जैसे 99 और 101. उनका तर्क है कि मौजूदा तेल संकट के जवाब में करेंसी का कमजोर होना ही उचित उपाय है।  इकोनॉमिस्‍ट ने कहा कि तेल की कमी चाहे अस्थायी साबित हो या लंबे समय तक चलने वाली, रुपये में गिरावट होने देना ही सबसे व्यावहारिक उपाय होगा. उन्होंने कहा कि अगर तेल की कमी शॉर्टटर्म (3 महीने से एक वर्ष तक) रहती है, तो रुपया अभी गिरावट पर रहेगा, लेकिन तेल आयात बिल कम होने और विदेशी पूंजी द्वारा 'सस्ते' रुपये का लाभ उठाने के लिए भारतीय निवेश की तलाश करने के बाद इसमें काफी सुधार होगा।  रुपये को बचाने की कोशिश बेकार  उन्होंने तर्क दिया कि अगर रुकावट लंबे समय तक चलता है, तो भंडार में कमी या महंगे डॉलर-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से रुपये को बचाने के प्रयास विफल हो जाएंगे. पनगढ़िया ने कहा कि तेल की कमी लंबे समय तक चलने वाली है. ऐसे में गिरावट के अलावा किसी भी अन्य उपाय का सहारा लेना व्यर्थ होगा. रुपये को बचाने के प्रयास से भंडार तब तक कम होता रहेगा जब तक कि वह पूरी तरह समाप्त न हो जाए।  100 रुपये प्रति डॉलर के ऊपर जाना ही होगा इकोनॉमिस्‍ट ने कहा कि डॉलर बांडों को जारी करना और हाई इंटरेस्‍ट वाले NRI डिपॉजिट को भी अस्‍थायी समाधान बताकर खारिज कर दिया. उन्‍होंने कहा कि 100 रुपये प्रति डॉलर का लेवल पार करना ही होगा. पनगढ़िया ने 2013 के मुद्रा संकट से इसकी तुलना की, जब भारत को हाई महंगाई और व्यापक आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ा था।  उन्होंने कहा कि यह 2013 नहीं है. साल 2013 में महंगाई दो अंकों में थी. अब ऐसा नहीं है. इसलिए, अर्थव्यवस्था अवमूल्यन के साथ आने वाले कुछ महंगाई दबाव को अवशोषित करने के लिए अच्छी स्थिति में है. उन्होंने डॉलर बांडों और उच्च ब्याज वाले एनआरआई जमाओं को 'महंगे साधन' बताया है, जो बड़े पैमाने पर लाभ को धनी प्रवासी भारतीयों तक पहुंचाते हैं।  अभी कहां है रुपया?  गौरतलब है कि ये बयान रुपये के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 96.95 पर पहुंचने और बुधवार को रिकॉर्ड निचले स्तर 96.86 पर बंद होने के एक दिन बाद आई है. भू-राजनीतिक तनाव में कमी और केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप के संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद गुरुवार को मुद्रा में 49 पैसे की उछाल आई और यह 96.37 पर बंद हुई। 

उज्जैन में शुरू हुआ खास आकाशीय अवलोकन, 20 रुपए में मिल रहा ग्रहों को करीब से देखने का मौका

उज्जैन  मध्य प्रदेश का उज्जैन अब विज्ञान और खगोल अध्ययन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है. शहर में मौजूद प्राचीन जीवजी वैधशाला, डोंगला स्थित वरामिहिर वैधशाला, तरामण्डल और विज्ञान केंद्र विज्ञान प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इसी क्रम में प्राचीन जीवजी वैधशाला में 21 मई से विशेष खगोलीय अवलोकन कार्यक्रम की शुरुवात हुई है जो 28 मई तक चलेगी।  इस आयोजन में देश-दुनिया से उज्जैन आने वाले पर्यटकों और विज्ञान में रुचि रखने वालों को 8 इंच टेलिस्कोप से अंतरिक्ष के अद्भुत नजारे दिखाए जा रहे हैं. पर्यटक टेलीस्कोप की मदद से चंद्रमा पर मौजूद गड्ढे, बृहस्पति ग्रह की पत्तियों और उसके उपग्रहों का नजदीक से अवलोकन कर रहे हो।  गाइड दे रहे रोचक जानकारी मौके पर मौजूद गाइड पर्यटकों के साथ वैज्ञानिक महत्व साझा कर रहे हैं और बड़ी रोचक जानकारियां भी दे रहे हैं. जिससे पहले ही दिन बड़ा उत्साह पर्यटकों में देखा गया. हालांकि इसमे 10 साल से कम उम्र के बच्चों को दूर रखा गया है. वहीं वैधशाला के अधीक्षक के अनुसार, ''शुक्र, बृहस्पति और बढ़ते चंद्रमा का अवलोकन भी करवाया जा रहा है. विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम नगरी में पर्यटकों और विद्यार्थियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।  छात्र बोला- अभी तक चंद्रमा के बारे में किताबों में पढ़ा था अनुभव ले चुके पर्यटकों ने चर्चा की. पांचवी कक्षा के हनी ने कहा, ''यह बड़ा ही अद्भुत है, इसमें चंद्रमा की सतह पर गड्ढे, बृहस्पति पर पत्तियां और उसके उपग्रह को बड़ी आसानी से देखा जा रहा है. अभी तक सिर्फ किताबों में पड़ा था लेकिन आज पहली बार इसे करीब से देखकर महसूस किया, यह बहुत ही रोचक था।  कक्षा सातवीं में पढ़ने वाले प्रिंस ने कहा, ''इसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. जो भी कुछ मैंने देखा उसे में अपने दोस्तों से भी शेयर करूंगा और उन्हें भी यहां आने के लिए आग्रह करूंगा.'' वहीं पर्यटक विकास बोले टेलिस्कोप से 8 दिन के लिए दी गई सुविधा का हर किसी को फायदा उठाना चाहिए. यह बहुत ही अद्भुत और रोचक अनुभव रहा।  जीवजी वैधशाला अधीकक्ष ने कहा, ''वर्तमान में आकाश में सायं सूर्यास्त के बाद आप पश्चिम दिशा में लठ्ठू की तरह चमकदार शुक्र ग्रह को देख रहे हैं. पश्चिमी आकाश में लगभग 60 अशं पर चमकदार बृहस्पति ग्रह दिखाई दे रहा है. साथ ही शुक्ल पक्ष का प्रतिदिन बढ़ता हुआ हमारा चन्द्रमा तो आकाश में दिख ही रहा है. इस प्रकार तीन खगोलीय पिण्डों के अवलोकन के लिए एवं अपनी जिज्ञासा के समाधान का यह सबसे शानदार अवसर है।  इन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए शासकीय जीवाजी वैधशाला उज्जैन द्वारा उसे 8 दिन के लिए ग्रीष्मकालीन आकाशीय अवलोकन के नाम से शुरू किया है. हर रोज शाम 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक पर्यटक इसका लाभ उठा सकते हैं. सिर्फ शुक्र ग्रह नीचे की स्थिति में होने के कारण शाम 8:00 बजे के बाद टेलीस्कोप की परिधि से बाहर हो जायेगा. इसलिए इसे शाम 8:00 बजे तक ही दिखाया जा सकेगा. आकाशीय अवलोकन के लिये आकाश का खुला होना आवश्यक है. 20 प्रति व्यक्ति शुल्क रखा गया है। 

जानिए बिजली लाइनों से कितनी होनी चाहिए सुरक्षित दूरी

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आम जनता से जागरुक होने की अपील की है। इस संबंध में कंपनी ने सुरक्षा संबंधी मापदंड जारी किए हैं। विद्युत सुरक्षा की दृष्टि से विद्युत लाईनों से धरातल, भवनों से सुरक्षित दूरी आदि के लिए केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा मापदंड निर्धारित किये हैं।  क्रं. विवरण एल.टी. लाईन 11 के.व्ही. लाईन 33 के.व्ही. लाईन 1. ऐसा क्षेत्र जहाँ वाहन, टैफिक न हो, वहाँ जमीन से कंडक्टर की दूरी। 4.6 मीटर 5.2 मीटर 5.2 मीटर 2. सड़क के समानांतर विद्युत लाईनों के निचले कंडक्टर से जमीन की दूरी। 5.5 मीटर 5.8 मीटर 5.8 मीटर 3. सड़क क्रॉसिंग करती विद्युत लाईनों के निचले कंडक्टर की जमीन से दूरी। 5.8 मीटर 6.1 मीटर 6.1 मीटर 4. किसी मकान के ऊपर से गुजरने वाली लाईन के निचले कंडक्टर एवं मकान के सबसे ऊँपर हिस्से के बीच की दूरी 2.5 मीटर 3.7 मीटर 3.7 मीटर   5. किसी मकान के पास से गुजरने वाली लाईन के सबसे नजदीकी कंडक्टर की मकान से दूरी। 1.2 मीटर 2 मीटर 2 मीटर   6. लाईन एवं पेड़ की डाली के बीच की दूरी 1.2 मीटर 2 मीटर 2 मीटर नागरिकों से अपील है कि अपने आवासीय परिसर अथवा स्थापनाओं से विद्युत लाइनो की दूरी निर्धारित मापदंड अनुसार रखें। निम्नदाब और मध्यदाब स्थापनाओं में प्रायः व्यक्ति विद्युतमय चालक के सीधे सम्पर्क में आता है, जबकि उच्च दाब स्थापनाओं में वह विद्युतमय चालक से सीधे सम्पर्क में आने के पूर्व ही फ्लेश ओव्हर डिस्टेंस में आने से स्पार्क हो कर झुलस जाता है। इस प्रकार दुर्घटना का घातक तथा गैर घातक होना दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के ‘‘डिग्री आफ बन्र्स’’ पर निर्भर रहता है। निम्नदाब अथवा मध्यदाब स्थापनाओं में सुरक्षा के लिए साधारण केवल फ्यूज लगाए जाते हैं। साधारण फ्यूज अपनी क्षमता से अधिक करंट बहने पर ही गर्म हो कर पिघल जाता है, इसमें कुछ समय लगता है और यही समय ‘‘दुर्घटनाग्रस्त’’ होने के लिए घातक सिद्ध होता है, परन्तु अर्थिंग सही हो तो फ्यूज अतिशीघ्र उड़ जाता है। इसी कारण से विद्युत स्थापनाओं में अर्थिंग व्यवस्था अति महत्वपूर्ण हो जाती है। घरेलू स्थापनाओं में विद्युत दुर्घटनाएं मुख्यतः वायरिंग एवं फिटिंग में खराबी आने से तथा उपकरणों में खराबी आने से लीकेज या शार्ट–सर्किट के कारण होती है। बिजली उपभोक्ताओं से अपील है कि वे आई.एस.आई. मार्क के उपकरण ही उपयोग में लाएं। विद्युत सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान दें कंपनी ने आम लोगों को विद्युत सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान देने अपील की है। भवन निर्माण, कॉलोनी के निर्माण और रोड के विस्तार के दौरान अक्सर यह देखने में आया है कि बिजली के खम्बों को सड़क के बीच में खड़ा कर दिया जाता है या कॉलोनी के विद्युतीकरण के दौरान कालोनाइज़र अपनी सुविधा से बिजली के खम्बों को लगा देता है तथा सड़क विस्तार के दौरान सड़क को ऊंचा कर दिया जाता है। इस दौरान विद्युत सुरक्षा के मापदण्डों का ध्यान नहीं रखा जाता है। कई बार यह पाया जाता है कि रोड ऊंची कर ली जाती है परन्तु बिजली के खम्बों से रोड के बीच का विस्तार और दूरी को ध्यान में नहीं रखा जाता तथा सुरक्षा के नियमों को अनदेखा कर दिया जाता है। फलस्वरूप दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और कभी–कभी दुर्घटनाएं हो भी जाती है। इस संबंध में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने मैदानी अधिकारियों से कहा है कि इस प्रकार के नियम विरूद्ध कार्यों की रोकथाम की जाए और मैदानी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में विद्युत सुरक्षा एवं विद्युत प्रदाय सुचारू रखने के लिए विद्युत अधिनियम 2003 में जो प्रावधान दिए गए हैं, उनके अनुसार कार्यवाही की जाए। भवन निर्माण और विस्तार के दौरान यदि कोई भवन निर्माता/संस्था निर्धारित प्रावधान के अनुसार काम नहीं करता है तो संबंधित संस्थाओं अथवा व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाए। कंपनी ने अपने मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि विद्युत लाइनों की पेट्रोलिंग कराते समय यदि कहीं रोड, भवन, स्ट्रक्चर का निर्माण नियम विरूद्ध होता हुआ पाया जाता है तो संबंधित उपभोक्ता, एजेन्सी और भवन स्वामी को विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार सुरक्षित अंतराल रखने के लिये रजिस्टर्ड नोटिस जारी करें तथा नोटिस की अवधि के दौरान सुरक्षित अंतराल बनाये रखने के लिये कार्यवाही नहीं किये जाने पर उसके विरूद्ध वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार त्वरित कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें। नई लाइनों के निर्माण के दौरान रोड, भवन या स्ट्रक्चर से उक्त नियमानुसार निर्धारित सुरक्षित अंतराल रखते हुए ही कार्य कराए जाएं। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बनने वाली सड़क मार्गों के ऊपर से गुजरने वाली लाइनों का अंतराल यदि प्रस्तावित सड़क के कारण कम हो रहा है तो विद्युत लाइन के खम्बों की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव कम्पनी के प्रचलित नियमानुसार संबंधित एजेन्सी को नोटिस के साथ भेजें और साथ ही सुनिश्चित करें कि निर्धारित सुरक्षित अंतराल मेन्टेन करने के बाद ही उस लोकेशन पर सड़क निर्माण हों। सड़कों की बार–बार मरम्मत से सड़कों की ऊंचाई बढ़ने से लाइनों और सड़क के बीच अंतराल कम होता जाता है। अतः इस ओर विशेष ध्यान देकर ऐसी लोकेशनों पर लाइन की ऊंचाई बढ़ाने हेतु संबंधित एजेन्सी से सम्पर्क कर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करें। नवीन कॉलोनियों में विद्युत प्रदाय करने के लिए रोड, वाटर सप्लाई, सीवेज लाइन आदि के निर्माण के साथ–साथ उपकेन्द्र तथा लाइनों का विस्तार भी प्राथमिकता के आधार पर हो ताकि भवन निर्माण का कार्य लाइनों से सुरक्षात्मक दूरी (अंतराल) रखते हुए नियमानुसार हो सके।   

Super El Niño:भट्टी बनेगा भारत, भीषण गर्मी से मच सकता है हाहाकार

नई दिल्ली एक बात ये कि इस साल गर्मी ज्यादा पड़ेगी क्योंकि ‘एल नीन्यो’ असर डालेगा. ये शायद आपने सुना हो, लेकिन अब तो कह रहे हैं कि इस साल का ‘एल नीन्यो’, ‘सुपर एल नीन्यो’ होने वाला है यानी गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. तो ये सुपर एल नीन्यो क्या बला है? ज्यादातर पब्लिक तो ये भी नहीं समझती कि एल नीन्यो क्या होता है? पहले तो वही समझ लेना चाहिए, उसके बाद समझेंगे कि सुपर एल नीन्यो क्या होता है. तो एल नीन्यो स्पेनिश भाषा में छोटे बच्चे को कहते हैं. छोटे लड़के को या बालक. जी हां, ये बालक कुछ सालों में लौट कर आता रहता है और भारत में गर्मी बढ़ा जाता है. तो स्पैनिश में नाम क्यों है? स्पेन का हमारी गर्मी से क्या लेना-देना? तो वैसे तो स्पेन का एल नीन्यो से भी कोई लेना-देना नहीं है।  ये नाम एल नीन्यो इसलिए स्पेन की भाषा में है क्योंकि दक्षिण अमेरिका के ज्यादातर देशों पर स्पेन का राज हुआ करता था. जैसे भारत में अंग्रेजों का राज हुआ करता था, तो यहां अंग्रेजी भाषा उनके साथ आई, लेकिन भारत में पहले से लोग रहते थे और हमारी अपनी भाषाएं भी थीं. लेकिन दक्षिण अमेरिका के बड़े से महाद्वीप पर बहुत ज्यादा आबादी नहीं थी. सारा जंगल था. कुछ मूल निवासी वहां के रहा करते थे. तो स्पेन और पुर्तगाल जैसे यूरोप के देशों के लोग वहां गए और बस गए और राज किया तो उनकी भाषाएं दक्षिण अमेरिका की भी भाषाएं हो गईं।  अभी से दिखने लगा है एल नीन्यो का असर. नामकरण जान लेते हैं जैसे ब्राजील में पुर्तगाल की भाषा बोली जाती है. लेकिन बाकी दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के ज़्यादातर देशों में स्पेन की भाषा स्पैनिश बोली जाती है और स्पैनिश में छोटे लड़के को कहते हैं एल नीन्यो. ये नाम दिया गया है मौसम के एक बदलाव को. जो हर कुछ साल में वहां दक्षिण अमेरिका के पूर्व के हिस्से में होता है. अब समझने वाली बात ये है कि ये छोटा बालक अगर दक्षिण अमेरिका के पानी में उथल-पुथल मचाता है, तो भारत में गर्मी क्यों बढ़ जाती है? नक्शे से समझिए एल नीन्यो की ज्योग्राफी तो जरा नक्शा देख लेते हैं. एक तो नक्शा हमें ऐसे देखने की आदत है, जिसमें उत्तर और दक्षिण अमेरिका बाईं तरफ होते हैं यानी पश्चिम में और ऑस्ट्रेलिया और जापान दाईं तरफ होते हैं यानी पूर्व में. स्कूल से ऐसे ही देखते आ रहे हैं और इस नक्शे में दक्षिण अमेरिका भारत के पश्चिम में होता है. लेकिन, दुनिया तो गोल है. तो नक्शे को अगर ऐसे खींचे पूर्व की तरफ से तो ऑस्ट्रेलिया के और आगे जाने पर क्या आएगा? दक्षिण अमेरिका ही आ जाएगा. और दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच में है साउथ पैसिफिक ओशियन या दक्षिण प्रशांत महासागर. यानी दाहिनी तरफ पूर्व में दक्षिण अमेरिका का किनारा है – पेरू और एक्वाडोर जैसे देश. बाईं तरफ यानी पश्चिम में एशिया और ऑस्ट्रेलिया है. अब भारत इस नक्शे पर बाईं तरफ है यानी पश्चिम में, प्रशांत से काफी दूर, हिंद महासागर के पास।  एल नीन्यो क्यों बनता है? सामान्य दिनों में क्या होता है कि प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से यानी दक्षिण अमेरिका के पास का पानी ठंडा रहता है. वहां ठंडा पानी ऊपर आता रहता है. जबकि पश्चिमी हिस्से यानी इंडोनेशिया और फिलीपींस के पास का पानी बहुत गर्म रहता है. हवाएं चलती है पूर्व से पश्चिम की तरफ यानी दक्षिण अमेरिका से एशिया की चरफ. इन हवाओं को कहते हैं ट्रेड विंड्स. ये हवाएं गर्म पानी को पश्चिम की तरफ धकेलती रहती हैं. यानी दक्षिण अमेरिका से एशिया वाली साइड पर गर्म पानी धकेलती रहती हैं. इस वजह से पूर्व में ठंडा पानी ऊपर आता रहता है, यानी प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका की तरफ ठंडा पानी ऊपर आता रहता है और गर्म पानी एशिया की तरफ जाता रहता है. लेकिन हर 2 से 7 साल में कभी-कभी ट्रेड विंड्स यानी ये वाली हलाएं कमजोर पड़ जाती हैं. इसको कहते हैं एल नीन्यो।  …फिर भारत में नहीं होती है बारिश जैसे किसी ने हवा का स्विच ऑफ कर दिया हो. तो वो गर्म पानी जो पश्चिम में जमा था, एशिया की तरफ जमा था वो अब पूर्व की तरफ यानी दक्षिण अमेरिका की ओर बहने लगता है. यानी पूरे प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. 0.5 डिग्री या उससे भी ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे क्या होता है कि समुद्र के ऊपर की हवा गर्म हो जाती है. गर्म हवा ऊपर उठती है, बादल बनते हैं, बारिश होती है. लेकिन ये सब वहीं दक्षिण अमेरिका के पास हो जाता है, क्योंकि हवाएं इस तरफ़ चल ही नहीं रही होतीं तो बादल एशिया की तरफ आते ही नहीं वो वहीं पर बरस जाते हैं. दक्षिण अमेरिका में बारिश ही बारिश हो जाती है।  कैसे प्रभावित होता है भारत का मौसम? अब भारत पर आइए. हमारा मॉनसून पश्चिम की तरफ से आता है. मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम हवाओं से आता है. मतलब अरब सागर और हिंद महासागर के ऊपर से हवाएं आती हैं समुद्र के पाली की नमी लेकर. और जून से सितंबर तक भारी बारिश लाती हैं. एल नीन्यो होने प्रशांत महासागर में गर्म पानी की वजह से ये हवा का पूरा पैटर्न बदल जाता है. वो हवाएं जो भारत की तरफ नम हवा लाती हैं, वे कमजोर पड़ जाती हैं या रास्ता बदल लेती हैं. तो भारत के ऊपर भी बादल कम बनते हैं. आसमान ज़्यादातर साफ रहता है. अप्रैल, मई, जून के महीनों में सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं. कोई बादल छांव नहीं देता. जमीन तेजी से गर्म होती है. खासकर उत्तर भारत, मध्य भारत, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, मध्य प्रदेश आदि इलाकों में।  2 साल पहले भी हुई थी घटना 2023 में भी जब एल नीन्यो मजबूत था, तो भारत के कई शहरों में तापमान 45-48 डिग्री तक पहुंच गया था. मानसून कमजोर रहा, बारिश कम हुई, और गर्मी लंबी खिंच गई थी. यानी दूर प्रशांत महासागर में पानी गर्म होने से हवा की एक लंबी चेन चलती है जो हजारों किलोमीटर दूर भारत तक असर … Read more

चुनावी रणनीति में जुटी BJP, पंजाब अध्यक्ष पद पर सिख नेता को मिल सकती है कमान

चंडीगढ़  पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। पार्टी जल्द ही पंजाब इकाई को नया अध्यक्ष दे सकती है और इस बार किसी सिख चेहरे को जिम्मेदारी सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ का तीन साल का कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा मई के अंत या जून की शुरुआत में की जा सकती है। हालांकि, जाखड़ आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभाते रहेंगे। सूत्रों के अनुसार नायब सिंह सैनी भी पंजाब में लगातार सक्रिय हैं और पार्टी कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। माना जा रहा है कि वह पंजाब भाजपा के लिए सिख चेहरे को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। नए अध्यक्ष पद की दौड़ में कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू प्रमुख माने जा रहे हैं। बिट्टू पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं और पार्टी उन्हें सिख समुदाय में मजबूत चेहरा मानती है। इसके अलावा पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल का नाम भी चर्चा में है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह  अपने नजदीकी केवल ढिल्लों के नाम को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं फिरोजपुर के राय सिख नेता मंजीत राय का नाम भी चर्चाओं में है। संगठनात्मक स्तर पर लंबे समय से सक्रिय रहे मंजीत राय की मालवा क्षेत्र में मजबूत पकड़ बताई जा रही है। अमृतसर से जुड़े पूर्व नौकरशाह और भाजपा नेता जगमोहन राजू का नाम भी चर्चा में है। राजू 2022 में सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में आए थे और वर्तमान में पंजाब भाजपा के महासचिव हैं। पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी नजदीकियों की भी चर्चा है। इसके अलावा राज्यसभा सांसद सतनाम संधू, पूर्व विधायक राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी और फतेह जंग बाजवा के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि हिंदू चेहरे भी पूरी तरह दौड़ से बाहर नहीं हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता तरुण चुघ का नाम भी पार्टी में चर्चा में बना हुआ है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंजाब की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा सिख नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। राज्य में सिख समुदाय निर्णायक भूमिका में है और भाजपा 2027 चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के प्रयास में जुटी है।

मध्यप्रदेश का ‘लग्जरी आम’ बना चर्चा में, एक आम की कीमत सुन रह जाएंगे हैरान

भोपाल  आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता। इसका गाढ़ा रस और मिठास हर किसी को लुभाता है। आमों के मामले में भी मध्यप्रदेश देश के प्रमुख राज्यों में हैं। प्रदेश की जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और विविध भौगोलिक परिस्थितियां आम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती है। यही कारण है कि यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, केसर, आम्रपाली, अल्फांसो और तोतापरी जैसी अनेक प्रसिद्ध किस्में मिलती हैं। एमपी की एक किस्म तो इतनी प्रसिद्ध है कि विदेशों में इसकी सबसे ज्यादा डिमांड है। यह विशेष किस्म है "नूरजहां'' आम। इसे "किंग ऑफ मैंगो" भी कहा जाता है। प्रदेश के जनजातीय बहुल आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पैदा होने वाला नूरजहां आम अपने विशाल आकार, अद्वितीय स्वाद और आकर्षक स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। इसे दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाता है। सामान्यतः एक नूरजहां आम का वजन लगभग 2 से 5 किलोग्राम तक होता है। यह 3 हजार रुपए प्रति नग के रेट में बेचा जाता है। खूब महंगा होने के बाद भी लजीज नूरजहां को खरीदने के लिए विदेशों में लोग टूट पड़ते हैं। "नूरजहां'' आम केवल अपने आकार के कारण ही नहीं, बल्कि अपनी दुर्लभता के कारण भी विशेष माना जाता है। इसके पेड़ों पर सीमित संख्या में फल आते हैं, इसलिए इसकी कीमत सामान्य आमों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। एक ही फल ही हजारों रुपए में बिकता है। यही कारण है कि यह आम किसानों के लिए लाभकारी फसल के रूप में उभर रहा है। कट्ठीवाड़ा का मौसम और वातावरण नूरजहां आम के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है, जिससे यहां पैदा होने वाले फल विशेष गुणवत्ता वाले होते हैं। माना जाता है कि नूरजहां आम की यह प्रजाति वर्षों पहले अफगानिस्तान से भारत पहुंची और बाद में पांचवें – छठवें दशक में मध्यप्रदेश के मालवा तथा आदिवासी अंचल झाबुआ में विकसित हुई। आलीराजपुर जिले के ग्राम जूना कट्टीवाड़ा स्थित शिव (बावड़ी) आम फार्म के किसान भरतराजसिंह जादव बताते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय रणवीरसिंह जादव लगभग 55 से 60 वर्ष पूर्व गुजरात के बनमाह क्षेत्र से नूरजहां आम का पौधा लेकर आए थे। उन्होंने अपने खेत में इस पौधे को लगाया और वर्षों की मेहनत से इसे संरक्षित किया। यही पौधा आगे चलकर पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया। जादव के अनुसार उनके पिता ने ग्राफ्टिंग तकनीक से एक विशेष पौधा तैयार किया था, जिसकी वर्तमान आयु लगभग 20 से 25 वर्ष है। इसके साथ ही स्वयं भरतराजसिंह जादव द्वारा तैयार किए गए 11 ग्राफ्टेड पौधे आज 3 से 5 वर्ष की अवस्था में विकसित हो रहे हैं। नूरजहां आम अब मध्यप्रदेश की विशेष पहचान बन चुकी है। इसकी विशिष्टता को देखते हुए वर्ष 1999 तथा 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों ने न केवल किसानों का उत्साह बढ़ाया बल्कि आलीराजपुर जिले को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई। धीरे-धीरे यह आम मध्यप्रदेश की उद्यानिकी पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। नूरजहां आम का इतिहास मालवा और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि मुगलकाल में बड़े आकार और विशेष स्वाद वाले आमों को शाही बागों में विशेष महत्व दिया जाता था। इसी परंपरा से जुड़ी यह किस्म समय के साथ गुजरात और झाबुआ-आलीराजपुर अंचल तक पहुंची। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और तापमान नूरजहाँ के लिए अनुकूल सिद्ध हुए, जिसके कारण यह किस्म यहां अच्छी तरह विकसित हुई। झाबुआ और आलीराजपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका संरक्षण किसानों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी किया जाता रहा है। नूरजहां आम की मांग विशेष रूप से बड़े शहरों और विदेशों में अधिक है। यहां के बाजारों में एक आम की कीमत 1500 से शुरु होकर 3000 तक होती है। नूरजहां का आकार इतना बड़ा होता है कि एक ही आम पूरे परिवार के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसका रंग, सुगंध और मिठास लोगों को पहली नजर में आकर्षित कर लेते हैं। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भारतीय प्रीमियम आमों के रूप में इसकी अच्छी मांग विदेशों में नूरजहां आम की विशेष मांग है। खासतौर पर संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भारतीय प्रीमियम आमों के रूप में इसकी अच्छी मांग रहती है। वहां बड़े आकार और आकर्षक स्वरूप वाले फलों को विशेष पसंद किया जाता है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा तथा यूनाइटेड किंगडम में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी नूरजहां आम अत्यंत लोकप्रिय हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भी इसकी विशेष पहचान बन रही है। हालांकि नूरजहां आम का उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, इसलिए इसका निर्यात बड़े पैमाने पर नहीं हो पाता, लेकिन इसकी विशिष्टता और दुर्लभता इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में “लक्ज़री मैंगो” की पहचान दिला रही है। विदेशी बाजारों में यह आम आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

ईंधन कीमतों पर बड़ा झटका संभव, IMF की रिपोर्ट ने दिए संकेत

मुंबई  पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की पहली डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और मशहूर अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने भारत को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर जून तक यह संघर्ष जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ऐसा हुआ तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई और आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ सकते हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक मध्य-पूर्व पर निर्भर है। ऐसे में ईरान युद्ध और हार्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में सप्लाई रुकावट का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। गीता गोपीनाथ ने कहा कि यह सिर्फ महंगे तेल का मामला नहीं है, बल्कि अब सप्लाई शॉक की स्थिति बन रही है, यानी तेल, LPG, LNG और खाद की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। अगर सप्लाई चेन टूटती है, तो उसे सामान्य होने में 2 से 3 महीने तक लग सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात में कच्चा तेल 110 डॉलर से बढ़कर 140 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत में ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और खेती की लागत तेजी से बढ़ेगी। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, ट्रक किराया बढ़ेगा और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो जाएंगी। गीता गोपीनाथ का मानना है कि सरकार हमेशा लोगों को पूरी तरह राहत नहीं दे पाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ बोझ सरकार उठाएगी, लेकिन कुछ कीमतों का असर जनता और कंपनियों को भी झेलना पड़ेगा, यानी आने वाले समय में पेट्रोल पंप पर कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने साफ कहा कि अब हम ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां महंगाई लगातार बढ़ सकती है। रुपये की कमजोरी पर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया। हाल के महीनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 91 से गिरकर करीब 97 तक पहुंच गया है और बाजार में चर्चा है कि यह 100 के स्तर तक जा सकता है। लेकिन, गीता गोपीनाथ ने कहा कि असली चिंता सिर्फ रुपये का आंकड़ा नहीं है। उनके मुताबिक, कमजोर रुपया आयात कम करने में मदद करता है और यह आर्थिक संतुलन बनाने का एक तरीका है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार और RBI जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करेंगे, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, उन्होंने लोगों से घबराने की अपील नहीं की। उनका कहना है कि भारत की घरेलू मांग मजबूत है, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार भी अभी मजबूत स्थिति में है। लेकिन, अगर युद्ध लंबा खिंचता है और तेल 140 डॉलर पर टिक जाता है, तो यह सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा आर्थिक संकट बन सकता है। एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले महीनों में सरकार को गरीब परिवारों और छोटे कारोबारियों के लिए राहत पैकेज, कैश ट्रांसफर और लोन सपोर्ट जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पश्चिम एशिया का तनाव जल्द खत्म होगा या दुनिया को एक नए आर्थिक झटके का सामना करना पड़ेगा।

Honda City Facelift 2026 की एंट्री, जानिए कीमत, नए फीचर्स और माइलेज डिटेल

 नई दिल्ली  Honda Cars India ने भारतीय बाजार में अपनी 2026 सिटी कार को लॉन्च कर दिया है। इस सेडार कार के अपडेटेड वर्जन की शुरुआती कीमत 11,99,900 (एक्स-शोरूम) रखी गई है। साल 2023 के बाद इस कार में किया गया यह दूसरा बड़ा अपडेट है। इसके साथ ही कंपनी ने अपनी नई ZR-V SUV को भी पहली बार पेश किया है। डिजाइन और फीचर्स यह कार पेट्रोल और e:HEV स्ट्रॉंग हाइब्रिड दोनों विकल्पों में उपल्बध होगी। इस सेगमेंट में यह 4594mm की लंबाई के साथ सबसे लंबी सेडार कार है। इसके सामने के हिस्से में नई ब्लेड आई सिग्नेचर LED लाइटिंग, Bi-LED प्रोजेक्टर हेडलैंप्स, फ्रंट ग्रिल से जुड़ा सेंटर लाइट बार और नए डिजाइन का बंपर दिया गया है। पीछे की तरफ Z-शेप वाली वाली LED टेल लैंप्स और स्पोर्टी ट्रंक लिप स्पॉइलर मिलता है। इसमें नए 16-इंच के ड्यूल-टोन अलॉय व्हील्स दिए गए हैं। कार में नया रंग क्रिस्टल ब्लैक पर्ल भी जोड़ा गया है। कैसा है इंटीरियर और सेफ्टी? कार के अंदर आइवरी और ब्लैक टू-टोन इंटीरियर दिया गया है। इसमें 25.6 सेमी (10.1 इंच) की फ्लोटिंग टचस्क्रीन, 360-डिग्री मल्टी व्यू कैमरा, वेंटिलेटेड सीट्स, वेलकम एंबिएंट लाइट और आगे-पीछे USB-C चार्जिंग पोर्ट्स दिए गए हैं। इसमें Honda SENSING इंटेलिजेंट ADAS तकनीक दी गई है जिसमें कोलिजन मिटिगेशन ब्रेकगिं, एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन कीप असिस्ट जैसे सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं। इंजन विकल्प और माइलेज पहला है स्ट्रॉंग हाइब्रिड (e:HEV), यह दो मोटरों वाला हाइब्रिड सिस्टम है। यह 126PS की पावर और 0 से 3000 rpm 253nm का टॉर्क देता है और इसका माइलेज 27.26kmpl है। यह कार चलाने समय अपने आप ही EV, Hybrid, और इंजन ड्राइव मोट्स के बीच बदलता रहता है। प्योर पेट्रोल इंजन ऑप्शन इसमें 1.5 लीटर का i-VTEC पेट्रोल इंजन दिया गया है। इसके साथ 6-स्पीड मैनुअल (MT) या 7-स्पीड CVT गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है। यह स्पोर्टी परफॉर्मेंस और अच्छे माइलेज का संतुलन देता है। यह 6600 rpm पर 121 PS का पावर और 4300 rpm पर 145 nm का टॉर्क देता है। MT के साथ इसका माइलेज 17.77kmpl तो वहीं CVT के साथ इसका माइलेज 17.97kmpl है। क्या है वेरिएंट ऑप्शन? City Petrol, यह कार MT में चार वेरिएंट्स SV, V, ZX और ZX+ में उपलब्ध है। वहीं CVT ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन में यह तीन वेरिएंट्स V, ZX और ZX+ में मिलेगी। दूसरा है City e:HEV, यह स्ट्रॉंग हाइब्रिड मॉडल एक टॉप वेरिंट ZX+ में आता है। इस पर कई सारे वॉरंटी ऑफर्स भी दिए जा रहे हैं। वारंटी की जानकारी पहली है स्टैंडर्ड वारंटी जिसमें कार पर 3 साल कि अनलिमिटेड किमी की स्टैंडर्ड वारंटी दी जा रही है। अगला है एक्सटेंडेड वारंटी जिसे ग्राहक 7 साल तक बढ़वा सकते हैं। इसके बाद है एनीटाइम वारंटी जिसमें कार खरीदने की तारीख से इसे 10 साल या 1,20,000 किमी तक के लिए भी किया जा सकता है। e:HEV वेरिएंट में लिथियम-आयन बैटरी पर 8 साल या 1,60,000 किमी की स्टैंडर्ड वारंटी मिलती है। इसके अलावा, हाइब्रिड सिस्टम के पार्ट्स पर नई 5 साल या 1 लाख किमी की वारंटी दी जा रही है। इसकी बिक्री और ग्राहकों को डिलीवरी शुरू कर दी गई है। नई होंडा सिटी की कीमत (Price – Ex-Showroom, Delhi)   वेरिएंट (Grade) मैनुअल (MT) ऑटोमैटिक (CVT) हाइब्रिड (e:HEV) SV ₹11,99,900 — — V ₹13,29,900 ₹14,29,900 — ZX ₹15,25,900 ₹16,25,900 — ZX+ ₹16,14,900 ₹17,14,900 ₹20,99,900