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Imran Khan News: देश छोड़ने के नोटिस के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट जाएंगे एक्टर, जानें क्या है पूरा मामला

बॉलीवुड एक्टर इमरान खान ने मुंबई पुलिस के 'लीव नोटिस' के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट जाने का फैसला किया है. इमरान खान ने सीजेपी प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया था. उन्हें इस प्रोटेस्ट में मुंबई पुलिस ने डिटेन कर लिया था, जिसके बाद अब उन्हें 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का नोटिस भेजा गया है. अभिनेता पर 'फॉरेनर्स एक्ट' का उल्लंघन करने के आरोप हैं. इमरान खान को ये नोटिस फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) द्वारा भेजा गया है. एक्टर इसके खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर करने पर विचार कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने 'MZM लीगल एलएलपी' को अपना कानूनी सलाहकार नियुक्त किया है. हमने MZM लीगल के मैनेजिंग पार्टनर जुल्फिकार मेमन से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस स्तर पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. जानें क्या है पूरा मामला वहीं, अगर इमरान खान से जुड़े इस मामले के बारे में बात की जाए तो हाल ही में एक्टर मुंबई में सीजेपी प्रोटेस्ट में शामिल हुए थे, जिसमें प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था और नियमों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस ने उन्हें डिटेन भी कर लिया गया था और बाद में रिलीव भी कर दिया गया था. अब उन पर कथित तौर पर 'फॉरेनर्स एक्ट' का उल्लंघन करने का आरोप लगा है. जांच में ये बात निकलकर सामने आई कि इमरान खान के पास इंडिया की नागरिकता नहीं है. उनके पास संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता है. वो भारत में एक ओसीआई (OCI) कार्डधारक के रूप में रह रहे हैं. ऐसे में अब जब वो भारतीय नागरिक नहीं तो पुलिस और आव्रजन अधिकारियों ने फॉरेनर्स एक्ट के प्रावधानों के तहत उनके इस एक्शन को विदेशी नागरिकों के लिए तय नियमों का उल्लंघन माना है और उन्हें देश छोड़ने का नोटिस थमा दिया. सीजेपी प्रोटेस्ट में शामिल होने पर क्या बोले थे इमरान खान इमरान खान ने सीजेपी प्रोटेस्ट में शामिल होने पर अपना रिएक्शन भी दिया था. उन्होंने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा था कि वो वहां पर किसी भी पार्टी को रिप्रेजेंट नहीं कर रहे थे. वहां केवल एक नागरिक के तौर पर पहुंचे थे. प्रोटेस्ट में अपनी मांग को लेकर भी उन्होंने कहा था कि उनकी किसी से कोई मांग नहीं थी. वहीं, पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद भी उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें कहते दिखे थे कि वो कभी जेल नहीं गए लेकिन अब हो सकता है. उनका ये वीडियो काफी वायरल हुआ था.बॉलीवुड एक्टर इमरान खान ने मुंबई पुलिस के 'लीव नोटिस' के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट जाने का फैसला किया है. इमरान खान ने सीजेपी प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया था. उन्हें इस प्रोटेस्ट में मुंबई पुलिस ने डिटेन कर लिया था, जिसके बाद अब उन्हें 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का नोटिस भेजा गया है. अभिनेता पर 'फॉरेनर्स एक्ट' का उल्लंघन करने के आरोप हैं. इमरान खान को ये नोटिस फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) द्वारा भेजा गया है. एक्टर इसके खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर करने पर विचार कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने 'MZM लीगल एलएलपी' को अपना कानूनी सलाहकार नियुक्त किया है. हमने MZM लीगल के मैनेजिंग पार्टनर जुल्फिकार मेमन से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस स्तर पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. जानें क्या है पूरा मामला वहीं, अगर इमरान खान से जुड़े इस मामले के बारे में बात की जाए तो हाल ही में एक्टर मुंबई में सीजेपी प्रोटेस्ट में शामिल हुए थे, जिसमें प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था और नियमों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस ने उन्हें डिटेन भी कर लिया गया था और बाद में रिलीव भी कर दिया गया था. अब उन पर कथित तौर पर 'फॉरेनर्स एक्ट' का उल्लंघन करने का आरोप लगा है. जांच में ये बात निकलकर सामने आई कि इमरान खान के पास इंडिया की नागरिकता नहीं है. उनके पास संयुक्त राज्य अमेरिका की नागरिकता है. वो भारत में एक ओसीआई (OCI) कार्डधारक के रूप में रह रहे हैं. ऐसे में अब जब वो भारतीय नागरिक नहीं तो पुलिस और आव्रजन अधिकारियों ने फॉरेनर्स एक्ट के प्रावधानों के तहत उनके इस एक्शन को विदेशी नागरिकों के लिए तय नियमों का उल्लंघन माना है और उन्हें देश छोड़ने का नोटिस थमा दिया. सीजेपी प्रोटेस्ट में शामिल होने पर क्या बोले थे इमरान खान इमरान खान ने सीजेपी प्रोटेस्ट में शामिल होने पर अपना रिएक्शन भी दिया था. उन्होंने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा था कि वो वहां पर किसी भी पार्टी को रिप्रेजेंट नहीं कर रहे थे. वहां केवल एक नागरिक के तौर पर पहुंचे थे. प्रोटेस्ट में अपनी मांग को लेकर भी उन्होंने कहा था कि उनकी किसी से कोई मांग नहीं थी. वहीं, पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद भी उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें कहते दिखे थे कि वो कभी जेल नहीं गए लेकिन अब हो सकता है. उनका ये वीडियो काफी वायरल हुआ था.

एसएसपी ने बिलासपुर के 6 थानेदारों को किया पुरस्कृत, पुलिस विभाग में बढ़ा उत्साह

बिलासपुर. गंभीर अपराधों की विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाकर आरोपियों को सजा दिलाने, अपराधी पकड़ने समेत अन्य बेहतर काम करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को एसएसपी ने सम्मानित किया है। पॉक्सो, हत्या और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मामलों में मजबूत चार्जशीट पेश करने वाले 25 पुलिसकर्मियों को नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिए गए हैं। इन मामलों में अदालतों ने आरोपियों को 20 साल के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा सुनाई है। सम्मान पाने वालों में टीआई देवेश सिंह राठौर का प्रदर्शन प्रमुख रहा। इसके अलावा टीआई प्रदीप आर्य, निलेश पाण्डेय, दामोदर मिश्रा समेत अन्य निरीक्षकों को पुरस्कृत किया गया है। इनाम पाने वाले निरीक्षक रजनीश सिंह को पॉक्सो के एक मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दिलाने पर 2 हजार रुपए दिए गए। निरीक्षक दामोदर मिश्रा को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए और निरीक्षक निलेश पांडेय को पॉक्सो के मामले में 20 साल की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए का पुरस्कार मिला। उप निरीक्षक रामनरेश यादव को एनडीपीएस के मामले में चार आरोपियों को 15-15 साल की सजा दिलाने पर 2 हजार रुपए दिए गए। उप निरीक्षक राज सिंह को हत्या के मामले में उम्रकैद और मीना ठाकुर को पॉक्सो के मामले में 20 साल की सजा दिलाने पर 1- 1 हजार रुपए का पुरस्कार मिला। जीएल चंद्राकर को पॉक्सो के मामले में आठ साल की सजा दिलाने पर 1 हजार रुपए दिए गए। वहीं बसंत साहू को 900 रुपए तथा संतरा चौहान और नारायण ठाकुर को 500-500 रुपए से पुरस्कृत किया गया। एएसआई और हेड कांस्टेबलों को भी मिला पुरस्कार एएसआई गुलाबचंद पटेल और रमेश ओरके को 1-1 हजार रुपए, देवेंद्र तिवारी को 800 रुपए तथा विजय शर्मा को 600 रुपए दिए गए। इसी तरह हेड कांस्टेबल रामायण सिंह और सत्यप्रकाश यादव को 1-1 हजार रुपए, भुवनेश्वर मरावी को 500 रुपए तथा रमेश आदिले और परमेश्वर ठाकुर को 200-200 रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया।

MP में लाडली बहना योजना का पोर्टल फिर खुलने के संकेत, नए नाम जुड़ने का इंतजार

भोपाल  मध्य प्रदेश में 14 अक्टूबर को लाडली बहनों के खाते में उमरिया से सीएम मोहन यादव ने योजना की 41वीं किस्त ट्रांसफर की है। इसके साथ ही लाडली बहना योजना की लभार्थियों के खाते में 1500-1500 रुपए पहुंच गए हैं। योजना की शुरुआत के बाद से नए लाभार्थियों के नाम नहीं जुड़े हैं। अब सरकार के मंत्री ने यह संकेत दिए हैं कि जल्द ही पोर्टल खुलेंगे। लाडली बहना योजना में जुड़ेंगे नए नाम मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि लाडली बहनों के खाते में राशि भेजी गई है। उन्होंने कहा कि सीएम मोहन यादव ने यह भी घोषित किया है कि निकट भविष्य में जो लाडली बहना, लाडली बहना योजना से बच गई हैं। उनके नाम भी लाडली बहना पोर्टल पर अंकित किए जाएंगे। जल्द ही खुलने वाला है पोर्टल मंत्री ने कहा कि लाडली बहना योजना को लेकर पोर्टल जल्द ही खुलने वाला है। नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि जो बहनें इस योजना का लाभ लेने से बच गई हैं, उन्हें हम इस योजना से जोड़ेंगे। वहीं, पोर्टल कब से खुलेंगे, इसे लेकर उन्होंने कहा कि इसकी समय सीमा अभी तय नहीं है। सीएम ने क्या दिए हैं निर्देश मध्य प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने बताया कि सीएम मोहन लाल यादव ने अधिकारियों को यह आकलन करने के निर्देश दिए हैं कि वर्तमान में कितनी पात्र महिलाएं इस योजना के लाभ से बाहर रह गई हैं. इस आंतरिक रिपोर्ट और समीक्षा के बाद पोर्टल को दोबारा खोलने को लेकर आधिकारिक फैसला लिया जाएगा।  योजना में नए नाम जोड़ने की तैयारी के बीच अभी पंजीयन की समय-सीमा घोषित नहीं की गई है. मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल के मुताबिक, पहले योजना में छूटी हुई महिलाओं की संख्या का आकलन किया जाएगा. इसके बाद पंजीयन की प्रक्रिया और पोर्टल खोलने की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।  62000 करोड़ रुपए की राशि भेजी जा चुकी मध्य प्रदेश की 1.25 करोड़ लाडली बहनों को योजना की 41वीं किश्त की सौगात मिल गई है। राज्य सरकार बहनों के बैंक खातों में हर माह 1500 रुपए की राशि ट्रांसफर कर रही है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 62 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि भेजी जा चुकी है। बुधवार को भेजे गए 1834 करोड़ वहीं, बुधवार को उमरिया से सिंगल क्लिक के माध्यम से 1.25 करोड़ पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 41वीं किस्त की 1834 करोड़ की राशि अंतरित की गई है। इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों में प्रदेश के महिला बाल विकास विभाग का बजट केवल 350 करोड़ रुपए था, लेकिन हमारी सरकार ने 47 हजार करोड़ के बजट का प्रावधान महिला कल्याण के लिए किया है। योजना की शुरुआत से नहीं जुड़े हैं नए नाम गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना की शुरुआत 2023 में हुई थी। उस समय लाभार्थियों की संख्या 1.31 करोड़ थी। उम्र की सीमा 60 वर्ष है। समय के साथ लाभार्थियों की संख्या घटती गई। अब मध्य प्रदेश में लभार्थियों की संख्या 1.25 करोड़ है। शुरुआत में योजना की लभार्थियों को 1000 रुपए मिलते थे। अब हर महीने 1500 रुपए मिल रहे हैं। वहीं, राज्य सरकार ने इसे 3000 रुपए तक ले जाने का वादा किया है। लाड़ली बहना योजना: महिलाओं को अब क्या करना चाहिए? जिन महिलाओं का नाम अभी तक योजना में शामिल नहीं हुआ है, उन्हें सरकारी घोषणा पर नजर रखनी चाहिए। फिलहाल पोर्टल खुलने की तारीख तय नहीं हुई है। इसलिए किसी अनधिकृत वेबसाइट या व्यक्ति को पंजीयन के नाम पर पैसे देने से बचें। नए आवेदन शुरू होने पर पात्रता, जरूरी दस्तावेजों और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी आधिकारिक माध्यमों से जांचें। केवल पोर्टल खुलने की घोषणा से यह तय नहीं होता कि हर आवेदक को योजना का लाभ मिल जाएगा। लाभ के लिए निर्धारित शर्तें पूरी करना जरूरी होगा। Ladli Behna Yojana Update का मुख्य बिंदु यह है कि मध्य प्रदेश सरकार छूटी हुई महिलाओं की संख्या जुटाने और उनके पंजीयन की संभावनाओं पर काम कर रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पोर्टल कब खुलेगा और नए नाम जोड़ने के लिए क्या नियम तय किए जाएंगे।

मध्य प्रदेश में मकान-दुकान बनाने वालों को राहत, बिल्डिंग परमिशन में नजूल NOC का झंझट होगा खत्म

भोपाल   मध्य प्रदेश में नया मकान, दुकान या अन्य भवन निर्माण कराने वालों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार भवन निर्माण की अनुमति के लिए आवेदन के साथ नजूल एनओसी (Nazul NOC) की प्रमाणित प्रति जमा करने की अनिवार्यता खत्म करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 में संशोधन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। प्रस्तावित संशोधन पर आम लोगों से 15 दिनों के भीतर दावे-आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। हालांकि, अभी यह बदलाव प्रस्ताव के स्तर पर है। अंतिम अधिसूचना जारी होने और संशोधन लागू होने के बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी होगी। 15 दिन में दे सकेंगे दावे-आपत्तियां और सुझाव नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने भवन निर्माण की अनुमति से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए मसौदा जारी किया है। इसमें आम नागरिकों और संबंधित पक्षों को प्रस्ताव पर अपनी राय देने का अवसर दिया गया है। निर्धारित अवधि में प्राप्त दावे-आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार संशोधन लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। नक्शा पास कराने के लिए नहीं लगानी होगी नजूल NOC की प्रमाणित प्रति प्रस्तावित बदलाव का सबसे बड़ा असर भवन निर्माण का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया पर पड़ेगा। फिलहाल मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के तहत निर्माण अनुमति के आवेदन के साथ नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति देना जरूरी है। यदि प्रस्तावित संशोधन लागू हो जाता है, तो आवेदन के साथ यह दस्तावेज लगाने की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी। इससे आवेदकों को दस्तावेज जुटाने और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। अभी निर्माण अनुमति के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं? मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 के नियम 16 के उपनियम (11) के तहत भवन निर्माण की अनुमति के आवेदन के साथ भू-स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज देने होते हैं। इनमें शामिल हैं:     विक्रय विलेख या पट्टा विलेख: जमीन के स्वामित्व से संबंधित रजिस्ट्री या पट्टे का दस्तावेज।     खसरा, नक्शा और खतौनी अभिलेख: भूमि से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड।     नजूल NOC की प्रमाणित प्रति: मौजूदा नियम के तहत जरूरी दस्तावेज, जिसे हटाने का प्रस्ताव है।     प्रस्तावित संशोधन लागू होने पर तीसरे दस्तावेज की अनिवार्यता समाप्त हो सकती है, जबकि पहले दो श्रेणियों के दस्तावेज देने होंगे। नियम 16 के उपनियम (11) में क्या बदलाव होगा? ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, नियम 16 के उपनियम (11) के खंड (ग) को हटाने का प्रस्ताव है। इसी खंड में नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति जमा करने की अनिवार्यता शामिल है। वहीं, खंड (क) और खंड (ख) में बदलाव प्रस्तावित नहीं है। इसका अर्थ है कि संशोधन लागू होने के बाद भी आवेदकों को रजिस्ट्री या पट्टा विलेख और भूमि से संबंधित खसरा, नक्शा व खतौनी जैसे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। आम लोगों को क्या फायदा होगा? प्रस्तावित बदलाव से मकान, दुकान और अन्य भवन बनवाने वालों के लिए निर्माण अनुमति की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति जुटाने की बाध्यता हटने से कागजी कार्रवाई कम हो सकती है और आवेदन प्रक्रिया में लगने वाला समय बच सकता है। ये है अभी पुराना नियम मप्र भूमि विकास नियम 2012 के नियम 16(11) के तहत निर्माण अनुमति आवेदन के साथ भू-स्वामित्व प्रमाणित करने वाले 3 दस्तावेज अनिवार्य हैं। इनमें विक्रय विलेख या पट्टा विलेख (रजिस्ट्री), खसरा-नक्शा और खतौनी अभिलेख तथा नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति शामिल है। संशोधन के लिए ये प्रस्ताव संशोधन प्रस्ताव के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक नियम 16 के उपनियम (11) के इसी खंड (ग) को पूरी तरह विलोपित किया जाएगा। जबकि खंड क और ख यथावत रहेंगे। यानी अब आवेदकों को केवल रजिस्ट्री/पट्टा और खसरा, खतौनी-नक्शा ही आवेदन के साथ लगाना होगा। 15 दिन में मांगे सुझाव और दावे-आपत्तियां सरकार ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर आम जनता, जानकारों और प्रभावित पक्षों से दावे-आपत्तियां और सुझाव बुलाए हैं। इसके लिए 15 दिन का समय तय किया गया है। जैसे ही यह 15 दिन की समय-सीमा पूरी होगी, सरकार इन सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार करेगी। इसके तुरंत बाद इस संशोधन को अंतिम रूप देकर पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा। इससे आम नागरिकों का समय बचेगा। साथ ही घर बनाने की शुरुआत बिना किसी फालतू कागजी झंझट के हो सकेगी। (Nazul NOC) नजूल एनओसी क्या है? नजूल एनओसी (Nazul NOC) राजस्व विभाग की ओर से जारी किया जाने वाला एक अनापत्ति प्रमाण पत्र है। इससे पता चलता है कि जिस जमीन पर आप घर या दुकान बनाना चाहते हैं, वह सरकारी नजूल जमीन नहीं है। साथ ही, उस पर निर्माण को लेकर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। बिल्डिंग परमिशन देते समय प्रशासन यह दस्तावेज इसलिए मांगता था, ताकि सरकारी या लीज पर दी गई जमीन पर अवैध निर्माण न हो। लेकिन कई बार अपनी रजिस्ट्री वाली जमीन के लिए भी लोगों को यह कागज बनवाने में महीनों लग जाते थे। इसके लिए उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। 1. मध्य प्रदेश में अब बिल्डिंग परमिशन लेने के लिए कौन से दस्तावेज लगेंगे? नए नियम के लागू होने के बाद आपको केवल दो प्रमुख दस्तावेजों की जरूरत होगी। पहला आपकी जमीन का विक्रय विलेख या पट्टा विलेख (रजिस्ट्री)। दूसरा खसरा नक्शा तथा खतौनी अभिलेख। नजूल एनओसी की अनिवार्यता खत्म की जा रही है। 2. एमपी में नजूल एनओसी खत्म करने का यह नया नियम कब से लागू होगा? सरकार ने संशोधन के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर आम जनता से 15 दिन के भीतर दावे-आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। इस 15 दिन की अवधि के बाद प्राप्त सुझावों पर विचार कर इस नियम को औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा। 3. एमपी में नजूल एनओसी खत्म होने से आम आदमी को क्या फायदा मिलेगा? पहले घर या दुकान का नक्शा पास कराने के लिए नजूल विभाग से एनओसी की प्रमाणित प्रति लेना अनिवार्य था। इसमें बहुत समय खराब होता था। दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब इस एनओसी की बाध्यता खत्म होने से बिल्डिंग परमिशन का काम बेहद आसान और तेज गति से हो सकेगा।  

मां कात्यायनी को चढ़ाएं शहद का भोग, जानें पूजा मंत्र और आरती

मां कात्यायनी पूजा विधि और मंत्र:नवरात्रि का छठा दिन 16 अक्टूबर, शुक्रवार को है। मां दुर्गा की छठवीं शक्ति हैं मां कात्यायनी। नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। मान्यता है इनकी पूजा करने से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। साधक को रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। कहा जाता है कि मां कात्यायनी की उपासना करने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने मां भवानी की उपासना की थी और उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनकी बेटी के रूप में जन्म लिया था। इसलिए यह देवी मां कात्यायनी कहलाईं। जानें मां कात्यायनी की पूजा विधि, मुहूर्त, भोग, मंत्र और आरती। मां कात्यायनी का स्वरूप: मां की चार भुजाएं हैं। दाईं ओर का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में है। नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में हैं। मां के बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार है और नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है। मां का वाहन सिंह है। मां कात्यायनी की कैसे करें पूजा: नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा करने के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां कात्यायनी का ध्यान करें। मां कात्यायनी के पूजा की आसान विधि: सबसे पहले पूजा स्थल पर मां कात्यायनी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। अब गंगाजल से पूजा स्थल को पवित्र करें और मां के सामने घी का दीपक जलाएं। मां को रोली, अक्षत, पुष्प और चुनरी आदि अर्पित करें। मां कात्यायनी को शहद या शहद से बनी मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद मां कात्यायनी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में मां की आरती करें और परिवार की तरक्की और सुख-समृद्धि की कामना करें। 16 अक्टूबर 2026 को पूजा का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक। ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:52 बजे से सुबह 05:40 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:51 बजे से शाम 06:16 बजे तक सायाह्न संध्या: शाम 05:51 बजे से रात 07:06 बजे तक मां कात्यायनी का प्रिय भोग: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी का प्रिय भोग शहद है। मां को शहद और शहद से बनी चीजों का भोग लगाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के छठे दिन का शुभ रंग और पुष्प: मां कात्यायनी को लाल प्रिय है। नवरात्रि के छठे दिन लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इस दिन मां को गुड़हल और गुलाब के फूल अर्पित करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और मनवांछित फल देती हैं। मां कात्यायनी बीज मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः ॥ या ॐ ह्रीं नमः ॥ स्तुति मंत्र- चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना । कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी ॥ ध्यान मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ मां कात्यायनी की आरती- जय-जय अम्बे जय कात्यायनी जय जगमाता जग की महारानी बैजनाथ स्थान तुम्हारा वहा वरदाती नाम पुकारा कई नाम है कई धाम है यह स्थान भी तो सुखधाम है हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी कही योगेश्वरी महिमा न्यारी हर जगह उत्सव होते रहते हर मंदिर में भगत हैं कहते कत्यानी रक्षक काया की ग्रंथि काटे मोह माया की झूठे मोह से छुडाने वाली अपना नाम जपाने वाली बृहस्‍पतिवार को पूजा करिए ध्यान कात्यायनी का धरिए हर संकट को दूर करेगी भंडारे भरपूर करेगी जो भी मां को 'चमन' पुकारे कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

अक्टूबर में कब है मां सरस्वती की पूजा? जानें आवाहन की तारीख, पूजन विधि और मंत्र

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि में होने वाली सरस्वती पूजा का विशेष महत्व है। मां सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, विद्या, संगीत और कला की देवी माना जाता है। मां सरस्वती की विशेष रूप से पूजा-अर्चना विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, कलाकार और शिक्षा से जुड़े लोग करते हैं। आमतौर पर मां सरस्वती की पूजा वसंत पंचमी के दिन धूमधाम के साथ की जाती है। लेकिन अक्टूबर महीने में भी नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, जिनमें ज्ञान और विद्या से जुड़ी देवी की आराधना का विशेष महत्व है। अक्टूबर 2026 में सरस्वती पूजा कब है? शारदीय नवरात्रि के दौरान मां सरस्वती पूजा में पहला दिन आवाहन और दूसरा दिन प्रधान पूजा का होता है। 2026 में मां सरस्वती पूजा की पूजा 17 अक्टूबर 2026, शनिवार है। इससे ठीक एक दिन पहले 16 अक्टूबर को मां सरस्वती का आवाहन होगा। सरस्वती आवाहन क्या है? आवाहन का सरल अर्थ है आमंत्रित करना। पूजा की शुरुआत में भक्त मां सरस्वती का ध्यान लगाते हैं और उनसे पूजन स्वीकार करने की प्रार्थना करते हैं। इस दिन देवी का स्वागत किया जाता है। इस बार 16 अक्टूबर 2026 को मूल नक्षत्र में मां सरस्वती का आवाहन दोपहर 03:33 बजे से शाम 05:50 बजे तक होगा। सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? सरस्वती प्रधान पूजा इस उपासना का मुख्य दिन है। इस दिन मां शारदा की पूजा करके विद्या, सद्बुद्धि और सीखने की क्षमता के लिए प्रार्थना की जाती है। इस साल 17 अक्टूबर 2026 को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में पूजा का मुहूर्त दोपहर 03:32 बजे से शाम 05:49 बजे तक रहेगा। सरस्वती पूजा का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती की आराधना करने से व्यक्ति को ज्ञान की प्राप्ति, एकाग्रता और जीवन में सही निर्णय लेने की शक्ति मिलती है। सरस्वती पूजा की विधि: 1. मां सरस्वती की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें। 2. मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर को साफ चौकी पर स्थापित करें। 3. मां को सफेद या पीले फूल, अक्षत, फल, मिठाई और धूप-दीप आदि अर्पित करें। 4. पूजन में अपनी किताबें, कॉपियां, कलम या संगीत से संबंधित सामग्री पूजा स्थल पर रखें। 5. मां सरस्वती के मंत्र का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि व ज्ञान वृद्धि की प्रार्थना करें। 6. अंत में आरती करके प्रसाद बांटें। मां सरस्वती का कौन-सा मंत्र जपें? पूजा के समय मां सरस्वती के प्रसिद्ध मंत्र ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नम:’ का जाप किया जा सकता है।

पटना से दिल्ली का सफर होगा आसान? बुलेट ट्रेन के लिए बिहार के इन 6 शहरों में बन सकते हैं स्टेशन

पटना बिहार के लोगों के लिए आने वाले समय में हाईस्पीड रेल कनेक्टिविटी की बड़ी संभावना बन रही है। दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को पटना और आगे सिलीगुड़ी तक जोड़ने की योजना पर भी चर्चा है। प्रस्तावित विस्तार के तहत बिहार के कई प्रमुख शहरों में स्टेशन बनाने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इस विस्तार और इसके स्टेशनों को लेकर अंतिम मंजूरी तथा आधिकारिक समयसीमा की पुष्टि होना अभी बाकी है। पटना से वाराणसी की दूरी सिमटकर 50 मिनट होने का दावा प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत वाराणसी से पटना का सफर करीब 50 मिनट में पूरा करने की बात कही जा रही है। फिलहाल इस दूरी को तय करने में ट्रेन के प्रकार और परिचालन के अनुसार अधिक समय लगता है। हाईस्पीड रेल सेवा शुरू होने पर बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा का समय काफी कम हो सकता है। इससे नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और दूसरे यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। बिहार के इन शहरों में बन सकते हैं बुलेट ट्रेन स्टेशन दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर को आगे बढ़ाकर बिहार से जोड़ने के प्रस्ताव में कई शहरों को शामिल किए जाने की बात सामने आई है। संभावित स्टेशनों में बक्सर, आरा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार के नाम शामिल हैं। अगर इस विस्तार को मंजूरी मिलती है, तो बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों को हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल इन स्टेशनों को प्रस्तावित योजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए। 865 किलोमीटर का होगा दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली से वाराणसी के बीच प्रस्तावित हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की लंबाई करीब 865 किलोमीटर बताई गई है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 1.21 लाख करोड़ रुपये है। परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर अंतिम मंजूरी के लिए भेजे जाने की जानकारी दी गई है। मंजूरी और आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि अधिग्रहण सहित अन्य कार्यों पर प्रगति निर्भर करेगी। पटना से दिल्ली का सफर भी हो सकता है आसान बुलेट ट्रेन नेटवर्क के विस्तार से बिहार की राजधानी पटना को दिल्ली से तेज रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित योजना के तहत वाराणसी से दिल्ली की यात्रा करीब 3 घंटे 50 मिनट में पूरी होने का अनुमान है। हालांकि, पटना से दिल्ली के बीच यात्रा का सटीक समय तभी स्पष्ट होगा, जब बिहार तक के रूट, स्टेशनों और परिचालन योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। लखनऊ, प्रयागराज और अयोध्या को भी जोड़ने की तैयारी दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के प्रस्तावित रूट में मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही जैसे शहर शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा लखनऊ से अयोध्या के लिए करीब 135 किलोमीटर लंबे लिंक का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इन कनेक्शनों से उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय कम करने की संभावना है। डीपीआर, सर्वे और भूमि अधिग्रहण पर टिकी नजरें परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए तकनीकी समीक्षा, रूट निर्धारण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अहम होगी। रिपोर्ट के अनुसार, कॉरिडोर के लिए ग्राउंड और एरियल LiDAR सर्वे कराया जा चुका है। अब आगे की प्रगति सरकारी मंजूरी और परियोजना से जुड़े अंतिम फैसलों पर निर्भर करेगी। बिहार के यात्रियों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि पटना तक बुलेट ट्रेन का विस्तार कब मंजूर होगा और निर्माण कार्य कब शुरू होगा। बिहार के लिए क्या होगा फायदा? अगर दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर का विस्तार पटना और आगे के शहरों तक होता है, तो इससे यात्रा समय घटने के साथ कारोबार, पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क को भी बढ़ावा मिल सकता है। लेकिन अभी प्रस्तावित रूट, स्टेशनों और यात्रा समय को अंतिम निर्णय के बाद ही निश्चित माना जा सकेगा।  

यूपी में पानी की 513 सैंपल जांच में फेल, 152 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित; जानें नए नियम

लखनऊ  बोतलबंद पानी की गुणवत्ता में खामियों पर राज्य सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। अब मिनरल वाटर और बोतलबंद पेयजल की नई विनिर्माण इकाइयों को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) का प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) मिलने के बाद लाइसेंस जारी किया जाएगा। पहले से संचालित 968 इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक प्रमाणन लेना होगा। तय समयसीमा में प्रमाणन नहीं लेने वाली इकाइयों का लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित कर उत्पादन बंद कराया जाएगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने पिछले एक वर्ष में 811 इकाइयों के निरीक्षण और 660 नमूनों की जांच के बाद यह कदम उठाया है। जांच में 513 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। इनमें 176 नमूने स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाए गए। इस आधार पर 152 इकाइयों के लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित किए गए हैं, जबकि केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त 55 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति केंद्र सरकार से की गई है। खनिजों की मात्रा सामान्य स्तर से मिली कम  एफएसडीए के संयुक्त आयुक्त हरिशंकर सिंह ने बताया कि असुरक्षित नमूनों में ई-कोलाई, कोलीफार्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड जैसे सूक्ष्मजीव पाए गए। वहीं, अधोमानक नमूनों में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों की मात्रा सामान्य स्तर से कम मिली। निरीक्षण के दौरान कुछ इकाइयों में आवश्यक फिल्टर, पराबैंगनी किरणों से शोधन (यूवी) और ओजोनीकरण की सुविधाओं का भी अभाव मिला। इन खामियों के आधार पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में आइएसआइ प्रमाणन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के बाद बीआइएस प्रमाणन की शर्त भी हटा दी गई थी। इसके बाद प्रदेश में बोतलबंद पानी की विनिर्माण इकाइयों की संख्या बढ़कर 968 हो गई। गुणवत्ता और शोधन व्यवस्था में कमियां सामने आने के बाद प्रमाणन को फिर अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डा. रोशन जैकब के अनुसार, बोतलबंद पेयजल की शुद्धता सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ी है। इसलिए सभी विनिर्माण इकाइयों में गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।  

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा बैठक संपन्न

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा बैठक संपन्न आवास जल्द पूरा करने वाले हितग्राहियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश रायपुर,   मंत्रालय महानदी भवन में आज मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अंतर्गत राज्य शहरी विकास अभिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 और 1.0 के क्रियान्वयन एवं प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।         मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के स्वीकृत आवासों का निर्माण कार्य शीघ्रता से पूरा किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि जो हितग्राही अपने आवास का निर्माण कार्य जल्द पूरा कर रहे हैं, उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0         प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0: बैठक में लाभार्थी आधारित निर्माण (BLC) घटक के तहत चल रही आवास निर्माण परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके साथ ही, भागीदारी में किफायती आवास (AHP) घटक के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं के निर्माण स्थल में परिवर्तन के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना 1.0         इस योजना के तहत लाभार्थी आधारित आवास निर्माण घटक के अंतर्गत पूर्व स्वीकृत परियोजनाओं की कटौती के बाद संशोधित परियोजनाओं की स्वीकृति के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। नगरीय प्रशासन विभाग के विभिन्न अन्य प्रस्तावों को भी बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई।        नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत कुल 2,43,087 मकान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 2 लाख 25, हजार 411 आवास पूरी तरह से पूर्ण हो चुके हैं। 17 हजार 368 आवासों का निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। वहीं, बीएलसी घटक के अंतर्गत स्वीकृत 2 लाख 6 हजार 118 मकानों में से 1 लाख 96 हजार 144 मकान पूर्ण हो चुके हैं और 9 हजार 666 आवासों का निर्माण विभिन्न चरणों में जारी है।      बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (राज्य शहरी विकास अभिकरण) सुमित अग्रवाल सहित ऊर्जा, वित्त, आवास एवं पर्यावरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगर तथा ग्राम निवेश, हाउसिंग बोर्ड, हुडको और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए आधार बायोमेट्रिक अनिवार्य करने पर सवाल, दिव्यांग उपभोक्ताओं की परेशानी पर कोर्ट सख्त

नई दिल्ली घर में रसोई गैस का सिलेंडर बुक कराने के लिए अब आधार का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी परेशानी की वजह बन सकता है। खासकर दृष्टिबाधित लोगों के लिए यह प्रक्रिया मुश्किल खड़ी कर रही है। घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी लेने के मकसद से 1 अक्टूबर से लागू किए गए इस नियम पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब सुप्रीम कोर्ट आधार की अनिवार्यता पर सीमाएं तय कर चुका है, तो फिर यह शर्त क्यों लगाई गई? बुधवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने केंद्र सरकार, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) तथा सरकारी तेल कंपनियों को नोटिस जारी किया। वकील पुलकित लूथरा की जनहित याचिका पर सभी पक्षों को दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। दिव्यांग उपभोक्ताओं की परेशानी याचिकाकर्ता की 75% स्थायी दृष्टिबाधितता है। उनका कहना है कि आइरिस यानी आंख की पुतली के आसपास के हिस्से की पहचान से होने वाला सत्यापन उनके और दूसरे दृष्टिबाधित उपभोक्ताओं के लिए मुश्किल है। याचिका में 2018 के सुप्रीम कोर्ट के निजता संबंधी फैसले का हवाला देकर अनिवार्य आधार सत्यापन के कानूनी आधार पर सवाल उठाया गया है। सरकार ने क्या दलील दी? केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि सरकारी सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दिव्यांग लोगों की समस्याओं का ध्यान रखा जाएगा। याचिकाकर्ता के वकील जोहेब हुसैन ने दलील दी कि आधार कानून की धारा 7 के तहत अनिवार्यता सरकारी खजाने से वित्तपोषित सब्सिडी, लाभ या सेवाओं पर लागू होती है। 3.1 करोड़ उपभोक्ताओं पर असर याचिका में 17 सितंबर के मंत्रालयी पत्र और 19 सितंबर की प्रेस रिलीज का हवाला है। इसमें सत्यापन पूरा नहीं करने वालों की रिफिल बुकिंग रोकने और असमर्थ या अनिच्छुक उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य पर 5 या 10 किलो के सिलेंडर तक सीमित करने की आशंका जताई गई है। याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत मांगी, लेकिन कोर्ट ने पहले सरकार का जवाब देखने की बात कही।