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मोदी के नाम नई उपलब्धि: लंबे कार्यकाल के साथ बनाया खास रिकॉर्ड

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। वे भारत में सरकार के प्रमुख (मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री मिलाकर) के रूप में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले राजनेता बन गए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए प्रधानमंत्री को बधाई दी। आज प्रधानमंत्री मोदी ने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। सरकार के प्रमुख के रूप में सार्वजनिक कार्यालय में 8,931 दिन पूरे कर पीएम मोदी ने यह नया मील का पत्थर स्थापित किया है। राजनाथ सिंह ने इसे देश के प्रति उनके अटूट समर्पण और 'राष्ट्र प्रथम' की नीति का परिणाम बताया। रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री के अब तक के सफर को रेखांकित करते हुए कहा कि पीएम मोदी का जीवन देश और उसके लोगों के प्रति पूर्ण भक्ति का उदाहरण है। उनके कार्यकाल की शुरुआत गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में हुई, जहां उन्होंने विकास के नए मानक स्थापित किए। मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक का उनका सफर निरंतर सेवा और जनकल्याण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन में ईमानदारी और प्रत्येक नागरिक के प्रति उनके अथक परिश्रम का प्रतिबिंब है। उन्होंने लिखा, "हृदय की गहराइयों से मोदी जी को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई। उनका नेतृत्व सत्यनिष्ठा और सेवा की भावना से ओत-प्रोत है।"

विदेश में भारत की झलक: इजरायल में ‘लिटल इंडिया’, जहां मिलती हैं देसी मिठाइयां और हिंदी बोलते लोग

इजराइल के दक्षिणी डिमोना शहर पर ईरान के एक मिसाइल हमले में शनिवार को कम से कम 47 लोग घायल हो गए। बचाव सेवाओं ने यह जानकारी दी। यह शहर अपने परमाणु केंद्र के गुंबदनुमा ढांचे के लिए प्रसिद्ध है और इसे 'लिटिल इंडिया' के नाम से भी जाना जाता है। मेगन डेविड अदोम (एमडीए) बचाव सेवाओं और स्थानीय निवासियों ने बताया कि घायलों में 12 वर्षीय एक लड़का भी शामिल है, जो छर्रे लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। उन्होंने बताया कि 30 वर्ष की आयु के आसपास की एक महिला कांच के टुकड़े लगने से घायल हो गयी है जबकि 31 अन्य लोग छर्रों से हल्की चोट लगने या आश्रय स्थल की ओर भागते समय गिरने से घायल हो गए। इसके अलावा 14 लोगों का बेर्शेबा के सोरोका अस्पताल में बेचैनी के लिए इलाज किया गया। क्यों कहा जाता है 'लिटल इंडिया' इस शहर में लगभग 7500 भारतीय-यहूदी रहते हैं। इनकी आबादी शहर की कुल आबादी की 30 फीसदी की करीब है। यहां लोग बड़े आराम से मराठी और हिंदी बोलते हैं। लोगों में क्रिकेट लोकप्रिय हैं। खाने-पीने के शौक भी एकदम भारतीय हैं। यहां दुकानों पर आपको आसानी से सोनपापड़ी, गुलाब जामुन, पापड़ी चाट, जलेबी और भेलपूरी मिल जाएगी। जानकारी के मुताबिक 1950 और 60 के दशक में भारतीय यहूदी बड़ी संख्या में इजरायल पहुंचे थे और यहीं बस गए। हालांकि उनपर भारतीय संस्कृति का रंग अब भी चढ़ा हुआ है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, ''मिसाइल एक सामुदायिक भवन पर गिरी और उसके प्रभाव से आसपास के पुराने मकान ढह गए। अधिकांश लोग आश्रय स्थलों में थे, इसलिए उन्हें ज्यादा चोट नहीं आयी, सिवाय उस लड़के के जो बाहर रह गया था।' इजराइल डिफेंस फोर्सेज' (आईडीएफ) ने बताया कि वह इस बात की जांच कर रहा है कि ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को रोका क्यों नहीं जा सका। सेना के अनुसार, वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइल को रोकने की कोशिश की, लेकिन 'इंटरसेप्टर' उसे मार गिराने में सफल नहीं हो सके। उसने कहा, ''इस घटना की जांच की जाएगी।'' संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने हमले के बाद ''अधिकतम सैन्य संयम'' बरतने की अपील की। उसने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आईएईए को इजराइल के डिमोना शहर में मिसाइल गिरने की जानकारी है, लेकिन नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र को नुकसान होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं।'' वहीं, ईरान ने कहा कि उसने डिमोना को नतांज परमाणु संवर्धन केंद्र पर पहले हुए हमले के जवाब में निशाना बनाया। हालांकि, आईडीएफ ने इस बात से इनकार किया कि उसने उसी दिन पहले नतांज पर हमला किया था।

कमांडो कैंप बना निशाना: असम में उग्रवादी हमले में 4 जवान जख्मी

तिनसुकिया. असम के तिनसुकिया जिले में रविवार को बड़ा उग्रवादी हमला हुआ है। इसमें पुलिस कमांडो कैंप में ग्रेनेड फेंका गया। अधिकारियों ने बताया कि हमले में चार जवान घायल हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक अल्फा उग्रवादियों ने इस हमले को अंजाम दिया है। असम के तिनसुकिया जिले में रविवार को बड़ा उग्रवादी हमला हुआ है। इसमें पुलिस कमांडो कैंप में ग्रेनेड फेंका गया। अधिकारियों ने बताया कि हमले में चार जवान घायल हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक अल्फा उग्रवादियों ने इस हमले को अंजाम दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक यह हमला शनिवार देर रात करीब दो बजे हुआ और 20 मिनट तक चला। कैंप में मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि करीब दो बजकर एक मिनट पर हमने पहला धमाका सुना। इसके बाद लगातार धमाकों की आवाज आती रही। संदेह है कि यह धमाके मोर्टार से हो रहे थे। असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर है कैंप हमला लेखापानी पुलिस थाना के जगुन चौकी के अंतर्गत 10 मील क्षेत्र के पास स्थित शिविर में हुआ। यह असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा के करीब एक संवेदनशील क्षेत्र है। अधिकारियों ने बताया कि कम से कम पांच आरपीजी गोले शिविर पर दागे गए, जिनमें से चार कथित रूप से शिविर के अंदर फटे। उन्होंने आगे बताया कि धमाकों के बाद फायरिंग हुई। फिलहाल कैंप में ही इलाज घायल कमांडोज का फिलहाल कैंप में ही इलाज किया जा रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी चोट कितनी गंभीर है। अधिकारियों ने अभी तक हुई नुकसान को लेकर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। तिनसुकिया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मयंक कुमार झा के नेतृत्व में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक टीम घटना के तुरंत बाद वहां पहुंची। अधिकारियों ने कहाकि इस हमले के बाद तिनसुकिया जिले और ऊपरी असम के अन्य हिस्सों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पिछले साल अक्टूबर में भी हुई थी घटना गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में एक इसी प्रकार की घटना हुई थी। तब संदिग्ध आतंकवादियों ने तिनसुकिया के ककोपाठार में भारतीय सेना कैंप पर गोलीबारी की थी, जिसमें तीन सैनिक घायल हो गए थे। उस समय एक सेना बयान के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने रात के लगभग मध्यरात्रि में चलती हुई गाड़ी से कैंप पर गोलीबारी की। सेना ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और पास के आवासीय क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की। अधिकारियों ने बताया था कि गोलीबारी के आदान-प्रदान के बाद हमलावर घटनास्थल से भाग गए। सेना ने बाद में पुष्टि की कि घायल कर्मियों को मामूली चोटें आई थीं और क्षेत्र को शीघ्र ही सुरक्षित कर लिया गया। प्रतिबंधित आतंकवादी समूह यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट ने उस हमले की जिम्मेदारी ली थी। अब ताजा मामले की टाइमलाइन और विधानसभा चुनावों से पहले की रणनीति को देखकर अधिकारियों को संदेह है कि हाल की हमले के पीछे भी वही संगठन हो सकता है।

कतर हेलीकॉप्टर क्रैश: छह लोगों की गई जान, एक की तलाश जारी

दोहा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कतर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कतर के क्षेत्रीय जल में रविवार तड़के हेलीकॉप्टर दुर्घटना हुई, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। इस बात की पुष्टि कतर के आंतरिक मंत्रालय की। मंत्रालय ने बताया कि हादसे में एक व्यक्ति अभी भी लापता है और उसकी तलाश जारी है। दुर्घटना के बाद बचाव और खोज अभियान तेज कर दिया गया है। आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि बचाव और खोज अभियान जारी है और अधिकारी अभी एक लापता व्यक्ति को ढूंढने में जुटे हैं। हादसे के बाद तटीय सुरक्षा और रेस्क्यू टीमों ने तेजी से काम शुरू किया, लेकिन समुद्री हालात बचाव कार्य को चुनौती दे रहे हैं। अधिकारी हर संभव संसाधन लगा कर इस मिशन को सफल बनाने की कोशिश में हैं। बता दें कि इस हादसे की जानकारी पहले कतर के रक्षा मंत्रालय ने दी थी। बचाव कार्य में लगे कई यूनिट्स कतर सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि इस हादसे के बाद लापता व्यक्ति की खोज और हालात का आकलन करने के लिए कई यूनिट्स को लगाया गया है। रेस्क्यू जहाज, निगरानी उपकरण और प्रशिक्षित कर्मी खोज क्षेत्र में तैनात हैं ताकि बचाव के मौके बढ़ सकें। मौसम और समुद्री हालात पर भी नजर जहां एक ओर समुद्री हालात बचाव कार्य में बाधा डार रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कतर सरकार मौसम और समुद्री हालात पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि ये बचाव कार्य की सुरक्षा और गति को प्रभावित कर सकते हैं। कतर सरकार ने कहा है कि सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर खोज और बचाव कार्य को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से जारी रखा जाएगा।  

अमेरिका में उठी आवाज: ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ को लेकर नरसंहार घोषित करने की मांग तेज

वाशिंगटन. अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें मांग की गई है कि पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा 25 मार्च 1971 को बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को 'युद्ध अपराध और नरसंहार' माना जाए। ओहायो से डेमोक्रेट सांसद लैंड्समैन ने शुक्रवार को यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे अब विदेश मामलों की समिति को भेज दिया गया है। क्या था ऑपरेशन सर्चलाइट प्रस्ताव में कहा गया है कि 25 मार्च 1971 की रात पाकिस्तान सरकार ने शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया और उसकी सेना ने जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा से प्रेरित उग्र इस्लामी समूहों के साथ मिलकर पूर्वी पाकिस्तान में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' नाम से एक व्यापक दमन अभियान शुरू किया, जिसमें नागरिकों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया। इसमें यह भी कहा गया है कि 28 मार्च 1971 को ढाका में अमेरिका के महावाणिज्य दूत आर्चर ब्लड ने वाशिंगटन को ''चुनिंदा नरसंहार'' शीर्षक से एक टेलीग्राम भेजा था, जिसमें उन्होंने लिखा था, ''पाकिस्तानी सेना के समर्थन से गैर-बंगाली मुसलमान गरीब बस्तियों पर संगठित हमले कर रहे हैं और बंगालियों तथा हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं।'' जब बांग्लादेश पाकिस्तान का ही हिस्सा था तब 1970 में पहली बार पूर्वी पाकिस्तान में चुनाव हुए। इसमें शेख मुजीबुर्रहमान की जीत हुई। याह्या खान और जुल्फिकार अली भुट्टो इसके खिलाफ थे। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी फौज लोगों पर टूट पड़ी। आवामी लीग के लोगों को ढूंढ ढूंढकर मारा जाने लगा। जल्द ही यह हिंसा अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढने लगी। आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के इस ऑपरेशन सर्चलाइट में 30 लाख लोग मारे गए थे और 4 लाख महिलाओं के साथ रेप हुआ था। ब्लड टेलिग्राम लैंड्समैन ने बताया कि छह अप्रैल 1971 को आर्चर ब्लड ने अमेरिकी सरकार की चुप्पी पर आपत्ति जताते हुए एक संदेश भेजा था, जिस पर ढाका वाणिज्य दूतावास के 20 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। इसे बाद में ''ब्लड टेलीग्राम'' के नाम से जाना गया। उस टेलीग्राम में कहा गया था, ''लेकिन हमने इस आधार पर हस्तक्षेप न करने का फैसला किया है कि अवामी संघर्ष, जिसमें दुर्भाग्यवश नरसंहार शब्द लागू होता है, एक संप्रभु देश का आंतरिक मामला है।'' लैंड्समैन द्वारा लाए गए प्रस्ताव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से आग्रह किया गया है कि वह 25 मार्च 1971 को बांग्लादेश के लोगों के खिलाफ पाकिस्तानी सशस्त्र बलों द्वारा किए गए अत्याचारों की निंदा करे। प्रस्ताव में कहा गया है कि ''पाकिस्तानी सेना और उसके इस्लामी सहयोगियों ने धर्म और लिंग की परवाह किए बिना जातीय बंगालियों की हत्या की, उनके नेताओं, बुद्धिजीवियों, पेशेवरों और छात्रों को मार डाला और हजारों महिलाओं को यौन दासता के लिए मजबूर किया।'' इसमें यह भी कहा गया है कि ''उन्होंने विशेष रूप से धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया, जिनके खिलाफ सामूहिक हत्याएं, सामूहिक बलात्कार, जबरन धर्मांतरण और जबरन निष्कासन जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया।' प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि किसी भी जातीय या धार्मिक समुदाय को उसके सदस्यों द्वारा किए गए अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि वह 1971 में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और उसके सहयोगी जमात-ए-इस्लामी द्वारा बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और नरसंहार के रूप में मान्यता दें।

भारत-चीन रिश्तों में नई पहल: तिब्बत में पहली बार खुला व्यापार, जून से कारोबार शुरू

पिथौरागढ़. चीन ने भारतीय व्यापारियों को बड़ा सरप्राइज दिया है। उसने अपनी अधीन तिब्बती क्षेत्र तकलाकोट में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारतीय व्यापारियों के लिए पक्की दुकानें तैयार की हैं। पहली बार भारतीय व्यापारी पक्की दुकानों में बैठकर कारोबार कर सकेंगे। सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय व्यापारी चीन के इस कदम से काफी उत्साहित हैं। पिथौरागढ़ जिला प्रशासन का कहना है कि संभव है कि जून से भारतीय व्यापारियों को आवंटित हो सकती हैं। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 300 किमी दूर स्थित इस बॉर्डर पॉइंट पर वर्षों से व्यापार होता रहा है, लेकिन अब सुविधाएं अपग्रेड हो रही हैं। भारत-चीन व्यापार समिति के महासचिव दौलत रायपा के अनुसार, वर्ष 2019 तक जब व्यापार जारी रहा, तब तक भारतीय व्यापारियों के लिए यहां पक्की दुकानों की व्यवस्था नहीं थी। वे अस्थायी दुकानों के माध्यम से नेपाली व्यापारियों के साथ मिलकर कारोबार करते थे। अब तकलाकोट में सभी व्यापारियों के लिए अलग-अलग पक्की दुकानें बनाई जा रही हैं। जिला प्रशासन भी रेडी पिथौरागढ़ डीएम आशीष भटगांई ने विभागों को विस्तृत प्लान तैयार करने के आदेश दिए। बीएसएनएल को सीमा क्षेत्र में नेटवर्क-संचार सुदृढ़ करने को कहा। गुंजी में शौचालय, पर्यटन सुविधाएँ विकसित करने के लिए जिला पंचायत और पर्यटन विभाग सक्रिय। पूर्व की तरह ट्रेड सुचारू बनाने पर फोकस। क्या है तकलाकोट का महत्व? लिपुलेख दर्रे के पास स्थित तकलाकोट उत्तराखंड का प्रमुख ट्रेड हब है। ऊनी कपड़े, नमक, घी जैसे सामान का आदान-प्रदान होता है। यह कदम सीमा व्यापार को बूस्ट देगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत करेगा। तकलाकोट में भारत और चीन के बीच कोरोना काल से व्यापार बंद है। आखिरी बार वर्ष 2019 में दोनों देशों के व्यापारियों के बीच कारोबार हुआ था। छह साल के लंबे अंतराल के बाद अब व्यापार शुरू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं, जिससे स्थानीय व्यापारी उत्साहित हैं।

ऊर्जा संकट के बीच खुशखबरी: अमेरिका से LPG लेकर मंगलुरु पहुंचा जहाज

न्यू मंगलौर. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के बीच भारत के लिए राहत भरी खबरें सामने आई हैं। अमेरिका के टेक्सास से एलपीजी (LPG) लेकर चला एक बड़ा कार्गो जहाज कर्नाटक के न्यू मंगलौर पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंच गया है। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय जहाज और नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। न्यू मंगलौर पोर्ट पर अमेरिका से आए इस एलपीजी जहाज का आगमन ऐसे समय में हुआ है जब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में तनाव के कारण वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हैं। शिपिंग मंत्रालय ने इस संकट के दौरान ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 14 से 31 मार्च तक कच्चे तेल और एलपीजी के लिए कार्गो शुल्क माफ करने का भी एलान किया है। शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव, राजेश कुमार सिन्हा ने एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में देश को आश्वस्त करते हुए कहा, "पिछले 24 घंटों में किसी भी समुद्री अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हमारे सभी 22 जहाज और 611 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। हम लगातार उनकी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और वर्तमान में किसी भी बंदरगाह पर जाम की स्थिति नहीं है।" कम हुई रसोई गैस की पैनिक बुकिंग पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि देश में एलपीजी संकट अब नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के बीच मची 'पैनिक बुकिंग' में भारी गिरावट आई है। गुरुवार को केवल 55 लाख बुकिंग दर्ज की गई, जो संकट के शुरुआती दिनों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने साफ किया कि देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और कोई भी वितरण केंद्र खाली नहीं है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार जोखिम भरे रास्तों से भी सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है। बुधवार को यह भारतीय कच्चा तेल टैंकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर सुरक्षित पहुंचा। लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर ये दो भारतीय जहाज 16 और 17 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत पहुंचे थे।

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: सऊदी अरब ने ईरानी अफसरों को निकाला बाहर

नई दिल्ली. अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में जिस तरह से हमले किए हैं उससे अरब के समीकरण ही बिगड़ गए हैं। सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के अधिकारियों को तत्काल देश छोड़ने का फरमान सुना दिया है। सऊदी अरब ने कहा है कि ईरान के सभी अधिकारी 24 घंटे के अंदर देश छोड़ दें। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने रविवार सुबह यह आदेश जारी किया है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने सभी अंतरराष्ट्रीय समझौतों को उल्लंघन किया है। एक अच्छे पड़ोसी को अपने पड़ोसी की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। ईरान ने बीजिंग समझौते और यूएन सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन किया है। सऊदी अरब ने कहा कि तेहरान ने जो कुछ भी किया है उससे इस्लामिक एकता खतरे में पड़ गई है। सऊदी अरब ने कहा कि बार-बार समझाने के बाद भी ईरान अपने पड़ोसी देशों को निशाना बना रहा है। आने वाले समय में उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सऊदी अरब ने साफ कहा है कि अपनी सुरक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने से परहेज नहीं किया जाएगा। इस आदेश के कुछ देर बाद ही सऊदी अरब प्रशासन ने ईरानी ड्रोन को मार गिराने की भी पुष्टि की है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि रियाद की तरफ तीन बैलिस्टिक मिसाइल छोड़ी गई थीं जिन्हें असामान में ही ध्वस्त कर दिया गया।

पेट्रोलियम मंत्रालय का नया आदेश: 50% ज्यादा LPG मिलेगा, पर इन नियमों का रखना होगा ध्यान

नई दिल्ली सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वाणिज्यिक एलपीजी का अतिरिक्त 20 फीसदी आवंटन मंजूर किया है। इससे कुल आवंटन बढ़कर 50 फीसदी हो गया है। घरेलू उत्पादन में सुधार के कारण स्थिति सामान्य हो रही है। पश्चिम एशिया में तीन सप्ताह के युद्ध से भारत की ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई थी। वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को युद्ध के कारण पहले एलपीजी आपूर्ति में कटौती की गई थी। घरेलू रसोई को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया गया था। बाद में उनकी आपूर्ति का एक पांचवां हिस्सा बहाल किया गया। सरकार ने राज्यों द्वारा पाइप गैस परियोजनाओं में तेजी लाने पर 10 फीसदी अतिरिक्त आपूर्ति की पेशकश की थी। सरकार ने शनिवार को रेस्तरां, होटल, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, सामुदायिक रसोई और रियायती खाद्य आउटलेट्स के लिए 20 फीसदी बढ़ी हुई आपूर्ति की घोषणा की। सरकार की ओर से एलपीजी के मामले में प्रवासी श्रमिकों को मदद पहुंचाने का भी भरोसा दिया गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि कमर्शियल सिलिंडर का अतिरिक्त आवंटन वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के तेल कंपनियों के साथ पंजीकरण और पाइप्ड प्राकृतिक गैस कनेक्शन के लिए आवेदन करने पर निर्भर करेगा। एक आधिकारिक बयान में यह भी बताया गया कि घरेलू एलपीजी आपूर्ति स्थिर है और फिलहाल कोई कमी नहीं है। पश्चिम एशिया संकट के बाद क्या बदलाव किया गया था, अब क्या बदला? पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव (ईरान-इस्राइल संघर्ष) के कारण पैदा हुई एलपीजी की किल्लत को कम करने के लिए, भारत सरकार ने कमर्शियल (19 किलो) एलपीजी सिलिंडर का कोटा बढ़ाकर 50% कर दिया है। यह कदम होटल, रेस्तरां, और छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए उठाया गया है, क्योंकि पश्चिम एशिया में जंग शुरू होने के बाद दिल्ली सहित कई राज्यों में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई सामान्य खपत का केवल 20% (लगभग 1,800 सिलेंडर/दिन) ही सीमित कर दी गई थी, ताकि घरेलू रसोई गैस की प्राथमिकता सुनिश्चित की जा सके। अब केंद्र सरकार ने अतिरिक्त कोटा जारी करते हुए इसे बढ़ाकर 50% कर दिया है। आपूर्ति दबाव कम करने के उपाय सरकार आपूर्ति दबाव कम करने के लिए पाइप प्राकृतिक गैस (पीएनजी) की ओर बदलाव को बढ़ावा दे रही है। विशेष रूप से वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए पीएनजी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्यों से शहर गैस वितरण नेटवर्क के लिए अनुमोदन में तेजी लाने का आग्रह किया गया है। सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है। खुदरा दुकानों पर कोई ईंधन की कमी नहीं बताई गई है। प्राकृतिक गैस आपूर्ति और अन्य कदम घरेलू पीएनजी और संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) परिवहन सहित प्राथमिकता वाले खंडों को प्राकृतिक गैस की पूरी आपूर्ति मिल रही है। औद्योगिक उपभोक्ताओं को उनकी सामान्य आपूर्ति का करीब 80 फीसदी प्राप्त हो रहा है। अतिरिक्त कदमों में घरेलू एलपीजी उत्पादन में वृद्धि शामिल है। बुकिंग अंतराल भी बढ़ाया गया है ताकि उपभोक्ताओं को सुविधा हो। राज्यों को वैकल्पिक ईंधन विकल्प प्रदान करने के लिए अतिरिक्त केरोसिन आपूर्ति भी की गई है। निगरानी और समुद्री क्षेत्र की स्थिति राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। देशभर में 3,500 से अधिक छापे मारे गए हैं। इन छापों के परिणामस्वरूप करीब 1,400 एलपीजी सिलिंडर जब्त किए गए हैं। अधिकांश राज्यों ने आपूर्ति और वितरण की निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष और जिला स्तरीय निगरानी समितियां स्थापित की हैं। समुद्री क्षेत्र में, सरकार ने बताया कि 22 भारतीय-ध्वज वाले जहाज और 611 नाविक पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में बने हुए हैं। पिछले 24 घंटों में कोई अप्रिय घटना रिपोर्ट नहीं हुई है।

अखाड़ा परिषद का बड़ा फैसला, अर्धकुंभ 2027 और महाकुंभ 2028 में बिना पहचान पत्र के नहीं होंगे साधु संतों का प्रवेश

हरिद्वार साल 2027 में हरिद्वार में अर्ध कुंभ और 2028 में उज्जैन में महाकुंभ का आयोजन होने वाला है। यह दोनों ही आयोजन सुव्यवस्थित तथा पारदर्शी तरीके से हो सकें इसके लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से एक बड़ा निर्णय लिया गया है। दरअसल भारतीय खड़ा परिषद एवं श्रीमनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री महेंद्र रवींद्र पुरी नहीं निर्णय लिया है कि हरिद्वार अर्धकुंभ और सिंहस्थ महाकुंभ में किसी भी साधु संत को बिना आधिकारिक पहचान के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सभी को अपना आधार कार्ड अनिवार्य रूप से अपने साथ रखना होगा। अखाड़ा परिषद का बड़ा निर्णय श्री महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि यह निर्णय अखाड़ा परिषद की ओर से इसलिए लिया गया है ताकि फर्जी साधुओं पर अंकुश लगाया जा सके। जो भी भगवाधारी बिना पहचान पत्र के मिलेंगे उनकी विशेष जांच की जाएगी और अगर आवश्यकता पड़ी तो उन्हें मेले में प्रवेश से रोका भी जाएगा। अखाड़ा अध्यक्ष के मुताबिक यह दोनों ही मिले सनातन धर्म की आस्था, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। फर्जी साधुओं की मौजूदगी से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती है। उन्होंने सभी अखाड़ों से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वह सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के झांसे में ना आएं।