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ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का सुनहरा मौका: पीएम मोदी ने दुनियाभर के निवेशकों से की अपील

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वैश्विक निवेशकों से भारत के बिजली क्षेत्र में 'उत्पादन, निवेश, नवाचार और विस्तार' करने का आह्वान किया। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026' के पहले दिन केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल द्वारा पढ़े गए एक लिखित संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "मैं वैश्विक समुदाय को भारत में निर्माण करने, नवाचार करने, निवेश करने और भारत के साथ आगे बढ़ने के लिए आमंत्रित करता हूं। मुझे विश्वास है कि यह समिट सार्थक संवाद और मजबूत साझेदारी को बढ़ावा देगा, जो भारत की प्रगति को ऊर्जा देगा।" प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस समिट का उद्देश्य पूरे पावर और एनर्जी सेक्टर को एक मंच पर लाना है ताकि विचारों का आदान-प्रदान हो, सहयोग बढ़े और क्षेत्र के विकास के लिए साझा दिशा तय की जा सके। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सतत विकास के साथ आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाने, वैश्विक कनेक्टिविटी मजबूत करने और 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है और सभी तक भरोसेमंद बिजली पहुंच सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने पहले ही 50 प्रतिशत से ज्यादा गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल कर ली है और 2030 तक 500 गीगावाट क्षमता तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। पीएम मोदी ने 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' जैसी पहल का जिक्र करते हुए कहा कि यह वैश्विक सहयोग की दिशा में भारत के विजन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत मजबूत सप्लाई चेन, बैटरी निर्माण, ग्रीन जॉब्स और सुधारों के जरिए एक भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बन रहा है। 'शांति एक्ट 2025' से न्यूक्लियर एनर्जी के नए अवसर खुल रहे हैं, जबकि 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के जरिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है और टिकाऊ खपत को प्रोत्साहन मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने लिखित संदेश में कहा कि बिजली वितरण क्षेत्र में हुए सुधारों से नुकसान (एटी एंड सी लॉस) कम हुआ है और वित्तीय स्थिति में सुधार आया है, जिससे यह सेक्टर और अधिक मजबूत और निवेश के लिए आकर्षक बन गया है।

कतर गैस प्लांट हमला: फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों अलर्ट, ईरान के विदेश मंत्री ने जताया दुख

तेहरान ईरान में सैन्य संघर्ष को 20 दिन हो गए हैं। 19वें दिन इजरायल ने पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने कतर के गैस प्लांट पर हमला किया। कई देशों ने इसकी निंदा की। फ्रांस के राष्ट्रपति ने भी इस पर फिक्र जाहिर की और ऐसा न करने की अपील भी की। उनके इस आग्रह में कुछ ऐसा था जो ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को अच्छा नहीं लगा। उन्होंने मैक्रों के रवैये को 'दुखद' करार दिया। अराघची ने लिखा, "मैक्रों ने ईरान पर इजरायल-यूएस के हमले की निंदा में एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने इजरायल की तब भी निंदा नहीं की थी, जब उसने तेहरान में ईंधन के गोदाम को उड़ा दिया था, जिससे लाखों लोग जहरीले पदार्थों के संपर्क में आ गए थे। अभी भी जो उन्होंने चिंता जाहिर की है उसमें गैस ठिकाने का जिक्र तक नहीं है, जिसके बाद हमने (ईरान) जवाबी कार्रवाई की। ये वाकई दुखद है!" ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इमैनुएल मैक्रों की उस पोस्ट का जवाब दिया जिसमें उन्होंने बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकने की अपील की थी। मैक्रों ने अपने पोस्ट में कहा था, " ईरान और कतर में गैस उत्पादन सुविधाओं पर हुए हमलों के बाद, मैंने कतर के अमीर और राष्ट्रपति ट्रंप से बात की।" उन्होंने बुनियादी ढांचों को निशाना बनाए जाने को गलत ठहराते हुए आगे कहा, "बुनियादी ढांचे—विशेष रूप से ऊर्जा और जल आपूर्ति सुविधाओं—को निशाना बनाने वाले हमलों पर बिना किसी देरी के रोक लगाना हमारे साझा हित में है। आम लोगों और उनकी बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को भी सैन्य तनाव से सुरक्षित रखा जाना चाहिए।" दरअसल, 18 मार्च को इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट 'रास लफान' पर हमला किया था, जिसे दुनिया के कई देश गलत मान रहे हैं। वहीं, 12 मुस्लिम देशों ने खुलकर इसकी आलोचना की। सऊदी की राजधानी रियाद में हुई बैठक के बाद बयान जारी किया गया, जिसमें सऊदी अरब, कतर और यूएई समेत कई देश शामिल हुए। इन देशों ने कहा कि रियाहशी इलाकों पर ईरान का हमला बिल्कुल गलत है और इसे किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता। वहीं, सऊदी ने भी ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। सऊदी के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने दावा किया कि उनका देश ईरान को जवाब देने की पूरी ताकत रखता है। ईरान हमारे सब्र का इम्तिहान न लें।

शांति बहाली पर भारत का जोर, पीएम मोदी ने एक दिन में 4 देशों से साधा संवाद

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार से गुरुवार के बीच दुनिया के चार राष्ट्राध्यक्षों से बात की। बुधवार को कुवैत के क्राउन प्रिंस से तो गुरुवार को ओमान के सुल्तान, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, और मलेशिया के पीएम से पश्चिम एशिया संकट की गंभीर स्थिति पर चर्चा की। पीएम मोदी ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी। पीएम ने अपने मलेशियाई समकक्ष इब्राहिम से बातचीत में कूटनीति और बातचीत को शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा, "मैंने अपने दोस्त मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से बात की। उन्हें और मलेशिया के लोगों को आने वाले हरि राया एदिलफित्री त्योहार के मौके पर दिल से बधाई दी। हमने वेस्ट एशिया के हालात पर चिंता जताई, साथ ही सहमति जताई कि संवाद और डिप्लोमेसी के जरिए ही तनाव कम कर शांति-स्थिरता बहाल की जा सकती है।" फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से हुई बातचीत का विवरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हालात को शांत करने और बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटना बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देश क्षेत्र और दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए आपसी सहयोग जारी रखेंगे। पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान को 'भाई' कहकर संबोधित किया। कहा, "मेरी भाई सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ अच्छी बातचीत हुई और ओमान के लोगों को ईद की अग्रिम बधाई दी। साथ ही हम इस बात पर सहमत हुए कि डी-एस्केलेशन (तनाव कम करने) और उसके बाद शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए संवाद और डिप्लोमेसी को प्राथमिकता देने की जरूरत है। ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की भारत निंदा करता है और भारतीय नागरिकों समेत हजारों लोगों की सुरक्षित वापसी में मदद करने के लिए ओमान की कोशिशों की सराहना करता है। भारत और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और फ्री नेविगेशन के पक्ष में हैं। इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पीएम मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह से बुधवार रात बात की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर बात की और हाल की घटनाओं पर चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने कुवैत पर हुए हमलों की भी कड़ी निंदा की। दोनों नेताओं ने माना कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए लगातार बातचीत जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा के लिए क्राउन प्रिंस का धन्यवाद भी किया, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय रहता है।

ईद पर मसूद अजहर का मैसेज बना चर्चा का विषय, जैश-ए-मोहम्मद में बदलाव के संकेत

नई दिल्ली जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर हमेशा ईद-उल-फितर से पहले अपने समर्थकों और कैडर के लिए मैसेज जारी करता है। एक बार फिर उसने अपने कैडर और समर्थकों के लिए एक ऑडियो क्लिप जारी किया है। हालांकि, भारतीय एजेंसियों के अधिकारी ने इस क्लिप में कुछ अलग नोटिस किया है। एजेंसियों के अनुसार, अपने ईद मैसेज में, अजहर टूटा हुआ लग रहा था और भारत के खिलाफ उसका सामान्य गुस्सा भरा मैसेज भी बहुत कमजोर लग रहा था। जैश-ए-मोहम्मद पर नजर रखने वाली भारतीय एजेंसियों का कहना है कि संगठन के अंदर सब ठीक नहीं है, अजहर बहुत बीमार लग रहा है, इसलिए कई लोग नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं। आतंकी संगठन के अंदर, कई लोगों को लगता है कि मौजूदा हालात से कोई मदद नहीं मिल रही है और यह बहुत सारे कामों को रोक रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि अगर कोई ध्यान दे, तो इस बार लश्कर-ए-तैयबा ज्यादा सक्रिय लग रहा है। लश्कर के नेतृत्व को हमास के सदस्यों के साथ घुलते-मिलते देखा गया है। दूसरी ओर, जैश-ए-मोहम्मद साफ तौर पर शांत है और बड़े कार्यक्रमों से गायब है। इससे जैश के नेतृत्व के अंदर खींचतान का पता चलता है। कई लोगों को एहसास है कि अजहर को बदलना आसान नहीं होगा। ऐसा करने से कैडर का हौसला और भी गिरेगा। हालांकि, दूसरों को लगता है कि अगर सही कमांड नहीं होगी, तो संगठन खत्म होने लगेगा। फिलहाल कोई मजबूत लीडर न होने की वजह से इस संगठन के सदस्यों का बर्ताव भी बदल गया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लॉन्चपैड हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि जैश-ए-मुहम्मद के मुकाबले लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव ज्यादा सक्रिय दिखते हैं। पहले तो लगा कि जैश-ए-मोहम्मद यह दिखाने के लिए नाटक कर रहा है कि अजहर बीमार और टूटा हुआ है। ऐसा माना जा रहा था कि ऐसा जेईएम चीफ को भारतीय सेना के निशाने से बचाने के लिए किया जा रहा था। हालांकि, अब इंटेलिजेंस एजेंसियों ने यह पुष्टि कर दी है कि अजहर के साथ सब ठीक नहीं है और टॉप शीर्ष नेतृत्व बदलने को लेकर बहस कर रहा है। एक और अधिकारी ने कहा कि संगठन इस बात को लेकर दुविधा में है कि अजहर के परिवार के किसी सदस्य को चीफ बनाया जाए या किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे ऑपरेशन का अनुभव हो। अधिकारी ने बताया कि कैडर को एकजुट रखने के लिए परिवार का कोई सदस्य पहला ऑप्शन होगा। हालांकि, आतंकी संगठन को एक मजबूत कमांडर की भी जरूरत है। मिलिट्री मामलों के इंचार्ज अब्दुल जब्बार एक ऑप्शन हो सकता है क्योंकि वह ऑन-ग्राउंड ऑपरेशन देखता है, जिसमें लॉजिस्टिक्स और प्लानिंग भी शामिल है। अजहर के भाई, तल्हा अल सैफ के चुने जाने की उम्मीद कम है, क्योंकि उसका मुख्य काम जैश-ए-मोहम्मद की फंडिंग के लिए डिजिटल वॉलेट मैनेज करने तक ही सीमित रहा है।

LPG को लेकर बढ़ी चिंता, ईरान युद्ध का असर लेकिन सरकार बोली—स्थिति नियंत्रण में

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं। इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक भारत भी इससे अछूता नहीं है। केंद्र सरकार लगभग प्रतिदिन ही लोगों को शांत रहने की अपील कर रही है, लेकिन जनता के बीच में डर बना हुआ है। आज भी पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से एलपीजी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि फिलहाल देश में संतोषजनक मात्रा में एलपीजी मौजूद है। किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के यहां कोई कमी सामने नहीं आई है। इसके अलावा देश में क्रूड ऑयल के भी पर्याप्त भंडार मौजूद हैं। साथ ही पेट्रोल पंपों, घरेलू पीएनजी और गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की सप्लाई भी लगातार जारी है। देश की जनता से शांति की अपील करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने इस संकट के बीच सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को विस्तार बताया। उन्होंने कहा, "कच्चे तेल की स्थिति और रिफाइनरी संचालन सामान्य है। पेट्रोल पंपों पर भी कहीं भी सूखा (ड्राई-आउट) नहीं देखा गया है। घरेलू पीएनजी और सीएनजी की भी पर्याप्त सप्लाई बनी हुई है।" उन्होंने कहा, "हम पिछले कुछ दिनों से व्यापारिक एलपीजी उभोक्ताओं से अपील कर रहे हैं कि जहां तक संभव हो, एलपीजी से सीएनजी की ओर शिफ्ट करें, सरकार इस दिशा में कंपनियों को भी प्रोत्साहन दे रही है।" पीएनजी पर शिफ्ट हो रहे उपभोक्ता: सरकार एलपीजी संकट के बीच में सरकार ने पीएनजी की ओर उपोभोक्ताओं को शिफ्ट करने के काम में तेजी लाई है। इस प्रक्रिया को आसान भी बनाया गया है। सुजाता शर्मा ने बताया, "भारत सरकार ने सभी राज्य सरकारों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त वाणिज्यिक पीएनजी देने का वादा किया है, यह प्रक्रिया पीएनजी नेटवर्क को मजबूत और विस्तार देने में मदद करेगी। हमारे इन संयुक्त प्रयासों से पिछले दो हफ्तों में लगभग 1,25,000 नए घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक कनेक्शन जारी किए गए हैं। पिछले तीन दिनों में 5,600 से अधिक एलपीजी उपभोक्ता पीएनजी में भी शिफ्ट हुए हैं।" पश्चिम एशिया में जारी युद्ध चिंता का विषय: सरकार मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया में तेल रिफाइनरियों और क्रूड ऑयल भंडारों पर होते हमलों को लेकर भी अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि, कहीं भी कोई कमी नहीं है। ऑनलाइन बुकिंग भी बढ़कर 94 फीसदी हो गई है। इसके अलावा 83 फीसदी रिफिल डिलीवरी ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेट’ कोड के माध्यम से की जा रही है। घबराहट में की जाने वाली बुकिंग (पैनिक बुकिंग) में कमी आ रही है। लगभग 17 राज्य सरकारों ने वाणिज्यिक एलपीजी के लिए आवंटन आदेश जारी किए हैं। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति आवंटित की जा चुकी है।" पेट्रोलियम मंत्रालय के अलावा एमईए ने भी इस संकट को लेकर अपना पक्ष रखा। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से केवल भारत ही नहीं लगभग सभी देशों में ऊर्जा का संकट है। उन्होंने बताया कि कतर, से भारत की लभगभ 40 फीसदी से ज्यादा एलपीजी आती है, ऐसे में जब उनकी रिफाइनरियों पर हमला होता है और होर्मुज बंद रहता है, तो भारत में भी इसका असर देखने को मिलता है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार लगातार इसका विकल्प खोजने का प्रयास कर रही है।  

हिमाचल का 40,461 करोड़ का अनुपूरक बजट पारित, विकास और आपदा राहत पर फोकस

शिमला  हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने गुरुवार को वर्ष 2025-26 के लिए 40,461 करोड़ 95 लाख रुपए का अनुपूरक बजट पारित कर दिया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में यह बजट पेश किया, जिसे ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश विनियोग विधेयक, 2026 भी पारित हो गया। इस अनुपूरक बजट में राज्य के विकास कार्यों, आपदा राहत और विभिन्न सामाजिक योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। कुल बजट में से 36,374 करोड़ 61 लाख रुपए राज्य योजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि 4,087 करोड़ रुपए केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के लिए रखे गए हैं। राज्य योजनाओं के तहत सबसे बड़ा हिस्सा, 26,194 करोड़ 95 लाख रुपए, वेतन, पेंशन और अन्य वित्तीय देनदारियों को पूरा करने के लिए तय किया गया है। इसके अलावा बिजली क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए 4,150 करोड़ 14 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग विद्युत उत्पादन बढ़ाने, ट्रांसफार्मरों की मरम्मत और बिजली बोर्ड से जुड़े वित्तीय सुधारों के लिए किया जाएगा। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए 818 करोड़ 20 लाख रुपए निर्धारित किए गए हैं, जबकि जलापूर्ति और सीवरेज योजनाओं के लिए 785 करोड़ 22 लाख रुपए रखे गए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत 657 करोड़ 22 लाख रुपए हिमकेयर, सहारा योजना, मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी और आधुनिक जांच सुविधाओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे। इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 555 करोड़ 89 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि से शिमला में सब्जी मंडी, हमीरपुर में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, नए बस अड्डे, खलीनी फ्लाईओवर और छोटा शिमला से विली पार्क तक अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट जैसे कार्य किए जाएंगे। सड़क, पुल और ग्रामीण संपर्क मार्गों के लिए 453 करोड़ 63 लाख रुपए निर्धारित किए गए हैं। वहीं, हिमाचल पथ परिवहन निगम को यात्रियों को दी जा रही रियायतों के बदले 443 करोड़ 33 लाख रुपए का उपदान दिया जाएगा। शिक्षा और खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए 244 करोड़ 31 लाख रुपए और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय व सामाजिक योजनाओं के लिए 221 करोड़ 53 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय योजनाओं के तहत आपदा प्रबंधन के लिए 2,453 करोड़ 97 लाख रुपए, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए 688 करोड़ 40 लाख रुपए और रेणुकाजी बांध विस्थापितों के मुआवजे के लिए 352 करोड़ 18 लाख रुपए रखे गए हैं। सरकार का कहना है कि यह अनुपूरक बजट राज्य में विकास कार्यों को गति देने, आपदा प्रबंधन को मजबूत करने और आम लोगों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी तरीके से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ईरान के हमलों पर खाड़ी देशों की आपात अपील, UN से तत्काल चर्चा की मांग

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान युद्ध अब भीषण जंग में तब्दील हो गया है। ईरान अमेरिका से बदला लेने के लिए खाड़ी देशों में मौजूद उसके ठिकानो पर हमले कर रहा है। इसके साथ ही, वह कच्चे तेल की प्लांट को भी निशाना बना रहा है, जिससे दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। इन सबसे घबराए खाड़ी देश आनन-फानन में यूनाइटेड नेशन (UN) पहुंचे हैं और तुरंत ही बहस करने की मांग की है। डॉक्युमेंट्स से पता चलता है कि खाड़ी देशों ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में, मिडिल ईस्ट में नागरिकों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ईरान के हमलों को लेकर एक तत्काल बहस का अनुरोध किया है। खाड़ी देशों द्वारा भेजा गया एक राजनयिक नोट में बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बताता है, जिसके मानवाधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ते हैं। ईरान पर अमेरिकी-इजरायल युद्ध का विस्तार, जो अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, ने खाड़ी देशों में ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के रूप में बड़े पैमाने पर ईरानी जवाबी कार्रवाई को जन्म दिया है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने और पूरे क्षेत्र में ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों ने ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है और विश्व स्तर पर मुद्रास्फीति में वृद्धि के डर को हवा दी है। राजनयिक नोट में कहा गया है कि खाड़ी देशों पर किए गए ये बिना किसी उकसावे के हमले – ईरान को दिए गए उनके इस आश्वासन के बावजूद कि उनके क्षेत्र ईरान-विरोधी हमलों के लिए इस्तेमाल नहीं किए जाएंगे – तत्काल ध्यान दिए जाने की मांग करते हैं। खाड़ी देशों द्वारा प्रस्तावित मसौदा प्रस्ताव इन हमलों की कड़ी निंदा करता है और ईरान से तत्काल नागरिक बुनियादी ढांचे और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रोकने का आह्वान करता है। साथ ही यह नागरिकों, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए मुआवजे की भी मांग करता है। परिषद को यह अनुरोध प्राप्त हो गया है और वह इस बहस को आयोजित करने के लिए एक तारीख पर विचार कर रही है। ईरान के हमले के बाद तेल, प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल वहीं, ईरान के कतर में एक प्रमुख प्राकृतिक गैस सुविधा और कुवैत की दो तेल रिफाइनरी पर हमले के बाद वैश्विक तेल एवं प्राकृतिक गैस की कीमतों में बृहस्पतिवार को तेज उछाल आया। कतर की यह गैस सुविधा दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की गैस आपूर्ति करती है। इन हमलों से यह आशंका बढ़ गई है कि टैंकर यातायात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न ऊर्जा संकट अपेक्षा से अधिक लंबा एवं व्यापक हो सकता है जिससे तेल एवं गैस उत्पादन को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो युद्ध से पहले 73 डॉलर प्रति बैरल से कम थी।

विक्रम दुरईस्वामी की चीन में तैनाती, क्या भारत-चीन रिश्तों में आएगी नई गर्माहट?

चीन चीन के साथ संबंधों के फिर से धीरे-धीरे पटरी पर लौटने के बीच भारत ने गुरुवार को अनुभवी राजनयिक विक्रम दोराईस्वामी को भारत का नया राजदूत नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नए राजदूत जल्द ही अपना कार्यभार संभालेंगे। गौरतलब है कि चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों में लंबे समय तक चले तनाव के बाद दुरईस्वामी की राजदूत के रूप में नियुक्ति को काफी अहम माना जा रहा है। भारतीय विदेश सेवा के 1992 बैच के वरिष्ठ अधिकारी दुरईस्वामी, प्रदीप कुमार रावत का स्थान लेंगे। वे इससे पहले भी बीजिंग में भारतीय दूतावास में काम कर चुके हैं और उन्हें विदेश मामलों का खासा अनुभव है। बता दें कि दोराईस्वामी इस समय ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत हैं। कौन हैं दुरईस्वामी? विक्रम के. दुरईस्वामी 23 सितंबर, 2022 से ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने 1992 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल होने से पहले एक वर्ष तक पत्रकार के रूप में काम कर चुके हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री प्राप्त की थी। उनके करियर की शुरुआत 1994 में हांगकांग में सचिव के रूप में हुई, जहां उन्होंने चीनी विश्वविद्यालय के न्यू एशिया येल-इन-एशिया भाषा स्कूल से चीनी भाषा सीखी और इसके बाद 1996 से उन्होंने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में लगभग चार वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। 2000 में नई दिल्ली लौटने पर, उन्हें उप प्रोटोकॉल प्रमुख (औपचारिक) नियुक्त किया गया और बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री के निजी सचिव के रूप में भी कार्य किया। लंबा अनुभव प्राप्त दुरईस्वामी 2011 में विदेश मंत्रालय (MEA) में सार्क (SAARC) प्रभाग के प्रमुख के रूप में लौटे और 2012 में नई दिल्ली में चौथे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समन्वयक रहे। इसके बाद उन्होंने 2012 से 2014 तक विदेश मंत्रालय के अमेरिका प्रभाग के संयुक्त सचिव का पद संभाला। ब्रिटेन आने से पहले, दुरईस्वामी ने अक्टूबर 2020 से सितंबर 2022 तक बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया। जैज संगीत में रुचि अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियों के अलावा उनकी रुचि पढ़ने, खेल, फिटनेस, यात्रा, इतिहास और जैज संगीत में है। वे चीनी, फ्रांसीसी और कुछ हद तक कोरियाई भाषा भी बोलते हैं। उनकी पत्नी संगीता एक शिक्षिका हैं और दोनों का एक 23 वर्षीय पुत्र भी है।  

UP Weather Update: प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश की चेतावनी, इन इलाकों में गिर सकते हैं ओले

नई दिल्ली देशभर में गर्मी का सीजन शुरू हो गया है और अभी से ही तापमान काफी बढ़ गया है। इस बीच, मौसम विभाग ने कई राज्यों में मौसम के बदलने और बारिश व ओलावृष्टि होने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने बताया है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाकों में कल यानी कि 20 मार्च को ओले गिरने का अलर्ट है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 और 20 मार्च को ओले गिरेंगे। इसके अलावा, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, उत्तर पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों में 20 मार्च तक गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने की संभावना है। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में 19 मार्च को, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 व 20 मार्च को, राजस्थान में 19 मार्च को ओले और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा, मध्य और पूर्वी भारत में 22 मार्च तक छिटपुट गरज के साथ तेज हवाएं चलेंगी। मध्य प्रदेश, झारखंड में 19 और 20 मार्च को, छत्तीसगढ़ में 19 मार्च को, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, गंगा के मैदानी इलाकों और ओडिशा में 19 से 21 मार्च, बिहार में 20 मार्च को ओले गिरेंगे। मौसम विभाग के अनुसार, देश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तूफान आने और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के लगातार आने की वजह से अगले हफ्तेभर तक दिन का तापमान सामान्य से कम रहने वाला है। एक राहत की बात यह है कि अगले एक सप्ताह तक किसी भी प्रकार की हीटवेव चलने की संभावना नहीं है। कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में ताजा हिमपात, मैदानी इलाकों में भारी बारिश जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग और सोनमर्ग के पर्यटक स्थलों के साथ-साथ ऊंचाई वाले इलाकों में कई स्थानों पर ताजा बर्फबारी हुई, जबकि मैदानी इलाके भारी बारिश से प्रभावित हुए। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में स्थित गुलमर्ग और मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में स्थित सोनमर्ग, दोनों जगहों पर ताजा बर्फबारी हुई, जो आखिरी रिपोर्ट मिलने तक रुक-रुक कर जारी रही। अधिकारियों ने बताया कि पिछले दिन से गुलमर्ग रिजॉर्ट में लगभग पांच से छह इंच ताजा बर्फ जमा हो चुकी है। शोपियां, बांदीपुरा, कुपवाड़ा में बर्फबारी शोपियां जिले में मुगल रोड तथा पीर की गली, बांदीपुरा में राजदान टॉप और गुरेज तथा कुपवाड़ा में साधना टॉप सहित अन्य अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी ताजा हिमपात हुआ। घाटी के अधिकांश ऊपरी क्षेत्रों में रविवार से रुक-रुक कर हिमपात हो रहा है। इसके विपरीत, श्रीनगर सहित घाटी के मैदानी इलाकों में भारी बारिश हुई। अधिकारियों ने बताया कि बारिश के कारण पूरे क्षेत्र में तापमान में गिरावट आई है। मौसम विभाग ने 20 मार्च तक मौसम में उतार-चढ़ाव की संभावना जताई है। विभाग ने संकेत दिया है कि शुक्रवार तक अधिकांश क्षेत्रों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश या बर्फबारी हो सकती है।

BJP Second List: 111 उम्मीदवारों का ऐलान, सोनारपुर दक्षिण से रूपा गांगुली मैदान में

नई दिल्ली  भाजपा ने 111 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी की, सोनारपुर दक्षिण से चुनाव लड़ेंगीं रूपा गांगुली BJP Candidate List ‍West Bengal 2026: भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अपने 111 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी कर दी है. पहली लिस्ट में जिन लोगों को उम्मीदवार बनाया गया था, उनमें से 2 लोगों को बदल दिया गया है.  भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अपने 111 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी कर दी है. भाजपा की केंद्रीय चुनाव कमेटी की बैठक में इन नामों पर मुहर लगी. पार्टी ने पूर्व में घोषित 144 उम्मीदवारों में से 2 को बदल दिया है. विष्णुपुर (एससी) सीट से अब विश्वजीत खान चुनाव लड़ेंगे. जॉयपुर सीट पर विश्वजीत महतो को उम्मीदवार बनाया गया है. केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय चुनाव समिति के सभी सदस्य शामिल थे. रूपा गांगुली को सोनारपुर दक्षिण से मिला टिकट भाजपा केंद्रीय कार्यालय ने बृहस्पतिवार (19 मार्च 2026) को दूसरी लिस्ट जारी की. पार्टी ने रूपा गांगुली को सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. जयंत गायेन को भांगड़ से टिकट दिया गया है. हिरण्यमय चट्टोपाध्याय को श्यामपुर से मैदान में उतारा गया है.