samacharsecretary.com

नितिन नवीन की पहली हाजिरी RSS की हाई-लेवल मीटिंग में, भाजपा नेतृत्व में होने वाले बदलाव पर चर्चा

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की महत्वपूर्ण बैठक अगले महीने हरियाणा के समालखा में आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहली बार शिरकत करेंगे। संघ के शताब्दी वर्ष और आगामी राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए इस तीन दिवसीय समागम को बेहद अहम माना जा रहा है। जनवरी 2026 में भाजपा की कमान संभालने के बाद नितिन नवीन का यह पहला आधिकारिक संघ दौरा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बैठक से पहले भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में कुछ बड़े फेरबदल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि समालखा बैठक में भाजपा के प्रतिनिधि मंडल में कई नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। यह बदलाव आगामी चुनावों और संगठन को नई ऊर्जा देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, समालखा बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु संघ के शताब्दी वर्ष (1925-2025) से संबंधित कार्यक्रमों की समीक्षा करना है। देश भर में चलाए गए विभिन्न अभियानों, गृह-संपर्क और शताब्दी निमित्त आयोजनों से प्राप्त अनुभवों को यहां साझा किया जाएगा। संघ नेतृत्व यह देखेगा कि शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों को किस हद तक हासिल किया गया है और आम जनमानस के बीच संघ की पहुंच कितनी बढ़ी है। प्रतिनिधि सभा की इस बैठक में वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही, आगामी वर्ष के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कार्ययोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा होगी। बैठक के दौरान सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्ताव पारित होने की उम्मीद है। मंथन में शामिल होंगे दिग्गज इस बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित संघ के सभी शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। साथ ही, भाजपा सहित संघ से प्रेरित विभिन्न 32 संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी भी इस विचार-मंथन का हिस्सा बनेंगे।

सत्ता की जंग के बीच संतुलन का सवाल: नई नेपाली सरकार भारत-चीन में किसे चुनेगी?

नेपाल नेपाल में बीते साल भ्रष्टाचार विरोधी जेन Z प्रदर्शनों और के पी शर्मा ओली की सरकार गिरने के करीब छह महीने बाद अगले सप्ताह आम चुनाव होने हैं। सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने 5 मार्च को मतदान की घोषणा की थी, जिसके बाद देश में नई सरकार चुनी जाएगी। इस चुनाव पर भारत भी नजरें रख रहा है। भारत में यह सवाल भी उठ रहे हैं कि नेपाल की नई चुनी हुई सरकार भारत और चीन के बीच तालमेल बैठा पाएगी। और अगर इसका जवाब ना है तो नई सरकार चीन और भारत में से किसे ज्यादा तवज्जो देगी? इस सवाल को लेकर जानकारों ने अपने मत रखे हैं। जानकारों का मानना है कि नेपाल में चाहे किसी की भी सरकार बने, वह भारत और चीन के बीच नेपाल की संतुलित नीति को ज्यादा नहीं बदलेगी। इससे पहले नेपाल में मतदान की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है। चुनाव से पहले एक तरफ जहां युवा उम्मीदवार अर्थव्यवस्था में सुधार और पुरानी राजनीतिक जमात को हटाने का वादा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी नेता स्थिरता और सुरक्षा की बात कर रहे हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि चुनाव में किस पार्टी को बहुमत मिल सकता है। जारी रह सकती है गठबंधन की राजनीति नेपाली पत्रकार सुधीर शर्मा के मुताबिक किसी एक पार्टी के लिए पूर्ण बहुमत हासिल करना बहुत मुश्किल होगा, इसलिए गठबंधन की राजनीति जारी रह सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल के भारत और चीन से रिश्ते इस बात पर निर्भर करेंगे कि गठबंधन कैसा होगा और उसमें कौन प्रमुख भूमिका में रहेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि रिश्तों की बुनियाद नहीं बदलेगी, सिर्फ कुछ तरीके बदल सकते हैं। दोनों देशों से कैसे समीकरण? रणनीतिक मायनों में देखा जाए तो भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यह नेपाल के कुल आयात में 63 प्रतिशत यानी 8.6 अरब डॉलर की हिस्सेदारी रखता है। वहीं चीन 13 प्रतिशत यानी 1.8 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा भारत लंबे समय से बहुसंख्यक हिंदू नेपाल को पारंपरिक सहयोगी मानता है और दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। नेपाल दोनों देशों से बुनियादी ढांचे के जरिए भी जुड़ा है। कई जलविद्युत परियोजनाओं के जरिए बिजली भारत को जाती है, जबकि चीन तिब्बत के रास्ते बेल्ट एंड रोड पहल के तहत सड़क, रेलवे और हवाईअड्डों में निवेश कर रहा है। संतुलन बनाने की कोशिश रहेगी जारी दक्षिण एशिया विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन के मुताबिक नेपाल की नेतृत्व व्यवस्था आमतौर पर भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है, भले ही कभी-कभी किसी एक की ओर झुकाव दिखे। उनका मानना है कि अगर युवा नेता सत्ता में आते हैं, तब भी भारत और चीन के साथ नीति में बड़ा अंतर नहीं आएगा। हालांकि उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपना सकती है और बड़े प्रोजेक्ट्स में अपारदर्शी फंडिंग को चुनौती दे सकती है। उनके अनुसार, युवा नेपालियों को ना तो चीन से खास दुश्मनी है और ना ही वे चाहते हैं कि कोई भी देश अपारदर्शी तरीके से नेपाल की राजनीति को प्रभावित करे।

शिक्षा मंत्री बोले—न्यायपालिका सर्वोपरि, NCERT मामले में जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज

नई दिल्ली शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ज्यूडिशियरी का पूरा सम्मान करती है और उसका इंस्टीट्यूशन का अपमान करने का कोई इरादा नहीं है। यह टिप्पणी उस दिन आई जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ज्यूडिशियरी को बदनाम करने के लिए एक सुनियोजित साजिश लगती है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को NCERT के क्लास 8 की किताब में ज्यूडिशियल करप्शन पर एक चैप्टर लाने पर दुख जताया। साथ ही अकाउंटेबिलिटी तय करने और विवादित हिस्से को ड्राफ्ट करने में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ऐक्शन लेने का भरोसा दिलाया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ज्यूडिशियरी का पूरा सम्मान करती है और उसका इंस्टीट्यूशन का अपमान करने का कोई इरादा नहीं है। यह टिप्पणी उस दिन आई जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ज्यूडिशियरी को बदनाम करने के लिए एक सुनियोजित साजिश लगती है और क्लास 8 की NCERT किताब पर पूरी तरह बैन लगा दिया और आदेश दिया कि सभी कॉपियां, फिजिकल और डिजिटल, जब्त कर ली जाएं।  

बढ़ते तनाव में ईरान का बड़ा कदम, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च कर दिखाई ताकत, रेंज जानकर चौंकेंगे

वाशिंगटन अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक नई बैलिस्टिक मिसाइल लांच की है। यह सतह से सतह पर मार करने वाली चौथी पीढ़ी की मिसाइल है। इस नई मिसाइल का नाम खैबर है और इसकी रेंज 2000 किमी है। ईरान ने इसे एक बेहद सीक्रेट जगह पर लांच किया है। बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध का खतरा लगातार बना हुआ है। गुरुवार को दोनों देशों के बीच तीसरे दौर की परमाणु वार्ता हो रही है। बता दें कि अमेरिका लगातार ईरान के खिलाफ युद्ध की तैयारी में जुटा हुआ है। वह लगातार ईरान की समुद्री सीमा पर अपना युद्ध बेड़ा मजबूत करने में जुटा है। इस बीच स्विट्जरलैंड के जेनेवा में ओमान की मध्यस्थता के तहत ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का तीसरा दौर गुरुवार को शुरू हो गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य जमावड़े के कारण दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है।  

न्यूक्लियर ब्लैकमेल पर भारत का सख्त रुख, सेना का बड़ा संदेश

नई दिल्ली वेस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने गुरुवार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भारत अब पाकिस्तान के न्यूक्लियर झांसे से नहीं डरेगा और कहा कि भारत का जवाब पिछली बार से ज्यादा सख्त और मजबूत होगा। पठानकोट में एक खास सम्मान समारोह में बोलते हुए, जनरल ने साफ किया कि भारतीय सेना का टैक्टिकल माइंडसेट जवाबी हमलों से बदलकर जमीन पर निर्णायक जीत हासिल करने की तरफ हो गया है। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर में, हमने उनके (पाकिस्तान के) सभी टेररिस्ट बेस पर हमला किया… उसके बाद, उन्होंने जवाबी कार्रवाई की, और जवाब में, हमने उनके मिलिट्री बेस और एयर बेस तबाह कर दिए। फिर उन्होंने सीजफायर की मांग की, और सिर्फ हमसे ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों से भी, भारत के साथ सीजफायर की मांग की। वे हमसे नहीं लड़ सकते… जवाब ऑपरेशन सिंदूर में हमने जो किया है, उससे भी ज्यादा मजबूत होगा, लेकिन हमें पूरा यकीन है कि हमें पिछली बार से भी ज्यादा सख्त जवाब देना होगा।" 'खतरा अभी टला नहीं है…' उन्होंने आगे कहा, "यह ऑपरेशनल डेमोंस्ट्रेशन सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर में हमारी जीत का जश्न नहीं है, यह तैयारी का एक प्रदर्शन है। खतरा अभी टला नहीं है, और इस बार दुश्मन को पहले से भी ज्यादा जोरदार झटका लगेगा।" बॉर्डर पार से न्यूक्लियर हमले की बार-बार आने वाली धमकियों पर बात करते हुए, लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने उन्हें कमजोरी से पैदा हुआ धोखा बताया। 'शरीफ हमें सख्त ऐक्शन लेने से रोकना चाहते हैं' जनरल ने मजबूती से कहा, "वह (शहबाज शरीफ) हमें कोई भी सख्त ऐक्शन लेने से रोकना चाहते हैं… यह एक तरह का धोखा है जो वह कर रहे हैं, जिसका हमें जवाब देना होगा। हम उनके न्यूक्लियर धोखे से नहीं डरेंगे।" जनरल ने चेतावनी दी कि जहां भारत शांति चाहता है, वहीं पाकिस्तान में मिलिट्री लीडरशिप अपनी अहमियत बनाए रखने के लिए लड़ाई-झगड़े में लगी रहती है। उन्होंने आगाह किया कि खतरा अभी टला नहीं है और अगला झटका पहले से ज्यादा मुश्किल होगा।  

यूनुस विवाद ने पकड़ा तूल, बांग्लादेश में राष्ट्रपति और जमात आमने-सामने

ढाका बांग्लादेश में तारिक रहमान के सत्ता में आने के बाद यूनुस प्रशासन पर लगातार निशाना साधा जा रहा है। यूनुस सरकार के मंत्रियों की संपत्ति, स्वयं यूनुस की संपत्ति में हुई बढ्ढोत्तरी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे थे। इसी बीच राष्ट्रपति शहाबुद्दीन की तरफ से उठाए गए सवालों ने यूनुस के लिए मामले को और भी ज्यादा बिगाड़ दिया है। हालांकि, अब यूनुस के समर्थन में जमात-ए-इस्लामी आ गई है। राष्ट्रपति द्वारा यूनुस के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयान देने के बाद जमात ने राष्ट्रपति शहाबुद्दीन पर तीखा हमला बोला है। फेसबुक पर लिखे एक पोस्ट में जमात प्रमुख और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष शफीकुर रहमान ने राष्ट्रपति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उनके साथ इतना ही गलत हो रहा था, तो वह बताएं कि आखिर उन्होंने शेख हसीना के सत्ता छोड़ने वाले दिन को लेकर सच्चाई क्यों छिपाई। जमात प्रमुख रहमान ने राष्ट्रपति पर हमला बोलते हुए लिखा, "राष्ट्रपति ने 5 अगस्त 2024 से संबंधित कई बातें दबा दीं। उन्होंने अपने वर्तमान बयान में यह स्वीकार नहीं किया कि गिरी हुई और फरार प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बारे में उन्होंने उस दिन उपस्थित नेताओं से क्या कहा था और बाद में राष्ट्र से क्या कहा। उस दिन उन्होंने वह कुछ नहीं कहा जो अब कह रहे हैं।” दरअसल, रहमान यहां पर हसीना के इस्तीफे को लेकर शहाबुद्दीन पर निशाना साध रहे थे। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने 5 अगस्त को हसीना के जाने के बाद देश के नाम दिए अपने संबोधन में कहा था कि उन्होंने हसीना का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, लेकिन दो महीने बाद उन्होंने कहा कि केवल सुना है कि इस्तीफा दिया गया है, लेकिन इसका मेरे पास कोई प्रमाण नहीं है। यूनुस प्रशासन पर क्या कहा था राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने? तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद राष्ट्रपति और आंतरिम सरकार के प्रमुख रह चुके यूनुस के बीच में खींचतान साफतौर पर नजर आई। शहाबुद्दीन ने यूनुस के ऊपर कई बड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यूनुस के द्वारा बांग्लादेश और अमेरिका के बीच में एक गोपनीय समझौता किया गया था। उन्होंने कहा, "अमेरिका के साथ किए गए ऐसे किसी भी समझौते की जानकारी मुझे दी जानी चाहिए थी, लेकिन यूनुस ने ऐसा नहीं किया।" राष्ट्रपति ने बीएनपी का धन्यवाद करते हुए कहा कि प्रदर्शनों के दौरान वह केवल इसलिए राष्ट्रपति बने रह सके क्योंकि बीएनपी के वरिष्ठ नेताओं और सशस्त्र बलों ने उन्हें अपना समर्थन दिया था। उन्होंने कहा, "बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता ने मुझे समर्थन का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि हम संवैधानिक निरंतरता बनाए रखना चाहते हैं। हम किसी भी असंवैधानिक तरीके से राष्ट्रपति को हटाने के पक्ष में नहीं है।" यूनुस पर हमले को लेकर जमात प्रमुख क्यों बोले? बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से जाने के बाद यूनुस प्रशसान ने ही जमात ए इस्लामी और उसके छात्र संगठन छात्र शिविर पर से बैन हटाया था। ऐसा माना जाता रहा है, कि हसीना को सत्ता से उखाड़ फेंकने में इन्हीं दोनों का सबसे बड़ा योगदान है। कई रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया गया कि इन इस्लामिक संगठनों और अंतरिम प्रशासन के बीच पहले से ही एक समझ बन चुकी थी। इसलिए यूनुस प्रशासन ने भी इनका ज्यादा विरोध नहीं किया। अब जबकि यूनुस जा चुके हैं, तो राजनीति की जिम्मेदारी जमात के ऊपर है। यूनुस के ऊपर किसी सवाल का जवाब जमात ही देता नजर आता है।

आधार सेवा हुई स्मार्ट: गूगल मैप पर एक क्लिक में खोजें नजदीकी सेंटर

नई दिल्ली आधार कार्ड में किसी अपडेट के लिए या फिर नया बनवाने के लिए अकसर लोगों को सेंटर खोजने पड़ते हैं। इसमें उनका काफी वक्त खराब होता है और कई बार तो वे ऐसे पुराने आधार केंद्रों पर पहुंच जाते हैं, जहां पहले कभी काम हुआ करता था, लेकिन अब बंद हो गया है। ऐसी स्थिति से लोगों को बचाने के लिए अब UIDAI ने गूगल के साथ हाथ मिला लिया है। यह पाठक के तौर पर आपके लिए जरूरी और काम की खबर है। इसके चलते अब यदि आपको आधार कार्ड से जुड़ा कोई काम कराना हो तो आसानी से सेंटर पहुंच सकते हैं। इसके लिए आपको बस गूगल मैप पर सर्च करना होगा। यहां आपको आपके नजदीकी आधार केंद्र दिखेंगे। आईटी मिनिस्ट्री की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार अगले कुछ महीनों में गूगल मैप में यह फीचर आ जाएगा। यही नहीं गूगल मैप पर आधार सेंटर सर्च करने पर यह भी पता चलेगा कि किस केंद्र पर वयस्कों का नामांकन होता है। कहां बच्चों का आधार कार्ड बन सकता है और कहां सिर्फ आधार कार्ड में पता या मोबाइल नंबर ही अपडेट हो पाएगा। आईटी मंत्रालय का कहना है कि लोगों को यह भी जानकारी मिल पाएगी कि आधार सेंटर दिव्यांग फ्रेंडली है, वहां पार्किंग की सुविधा है या नहीं। सेंटर कब से तक खुलता है और किन दिनों में छुट्टी रहती है। ऐसी समस्त जानकारियां लोगों को सेंटर सर्च के दौरान ही मिल जाएंगी। े UIDAI का कहना है कि देश भर में 60 हजार आधार सेवा केंद्र हैं। इन तक पहुंचने में लोगों को अकसर परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार गलत जानकारी होने के चलते लोग भटकते रहते हैं। ऐसे में सभी केंद्रों की पूरी जानकारी हो और कहां क्या सेवा प्रदान की जाती है। इसके बारे में पता हो तो लोगों को सुविधा रहेगी। अहम बात यह है कि गूगल मैप पर सिर्फ आधिकारिक आधार सेंटर ही दिखाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों को आधार कार्ड के नाम पर किसी तरह की अवैध वसूली अथवा ठगी से बचाया जा सके। कई बार आधार से जुड़ी सर्विसेज देने के नाम पर रकम वसूलने के मामले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में लोगों को सुविधाजनक और पारदर्शी व्यवस्था देने के लिए यह फैसला लिया गया है। UIDAI के सीईओ ने बताया, 'हमारा फोकस इस बात पर रहा है कि कैसे आधार नंबर होल्डर्स के लिए प्रक्रिया आसान की जाए। अब इस कोलैबरेशन से लोगों को आसानी से आधार केंद्र पहुंचने में मदद मिलेगी।' गूगल इंडिया के स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप कंट्री हेड रोली अग्रवाल ने कहा कि इससे लाखों लोगों को फायदा मिलेगा। जनता और जरूरी सरकारी संस्थानों के बीच गैप खत्म होगा। आधार कार्ड बनवाना है तो आपके काम की हैं ये बातें… – अब आप आसानी से आधार कार्ड पहुंच सकेंगे। इसके लिए आपको गूगल मैप पर बस यह सर्च करना होगा कि आपके आसपास कौन सा आधार सेवा केंद्र है। आप सही स्थान पर पहुंचेंगे और समय बचेगा। – इसके अलावा UIDAI के वैध केंद्र पर जाने से आप ठगे जाने से भी बच सकेंगे। यही नहीं मैप में ही आपको यह जानकारी भी मिल सकेगी कि किस सेंटर में क्या-क्या सुविधा मिलती है। पार्किंग आदि की सुविधा है या नहीं।  

भारत की ‘धांसू’ मोटरसाइकिल का इजराइल में जलवा, मोदी-नेतन्याहू ने किया खास पोज

नई दिल्ली रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) एक ऐसा इंडियन मोटरसाइकिल ब्रांड है जिसने दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है। चेन्नई की इस बाइक बनाने वाली कंपनी ने यूरोप, नॉर्थ अमेरिका और साउथ एशिया के मार्केट में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। हालांकि, कंपनी को अभी सेंट्रल एशिया और मिडिल ईस्ट के मार्केट में गहराई तक जाना बाकी है। येरुशलम (Jerusalem) में एक टेक एग्जीबिशन में रॉयल एनफील्ड ने गोअन क्लासिक 350 को शोकेस किया है। इस इवेंट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू शामिल रहे।   इन दोनों प्रधानमंत्री ने इस मोटरसाइकिल के साथ फोटो खिंचवाने का फैसला किया। PM मोदी इजराइल के दो दिन के दौरे पर हैं, क्योंकि दोनों देश ट्रेड के साथ-साथ कल्चर के मामले में भी रिश्ते बढ़ाने के तरीके ढूंढ रहे हैं। चलिए रॉयल एनफील्ड गोअन क्लासिक 350 के बारे में डिटेल से जानते हैं। रॉयल एनफील्ड गोअन क्लासिक 350 रॉयल एनफील्ड गोअन क्लासिक 350, क्लासिक 350 का बॉबर-स्टाइल लाइफस्टाइल वर्जन है, जिसमें इसके कोर पार्ट्स शेयर किए गए हैं। इसकी खासियतों में टियरड्रॉप शेप का फ्यूल टैंक, कर्व्ड फेंडर, एक फ्लोटिंग सीट और सबसे जरूरी, लंबे एप-हैंगर हैंडलबार शामिल हैं। बाइक में 349 cc, सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड इंजन है जो 20.2 bhp और 27 Nm का पीक टॉर्क देता है। इसे 5-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। गोअन क्लासिक 350 एक डबल क्रैडल फ्रेम पर बनी है जिसे टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क और डुअल शॉक एब्जॉर्बर से सस्पेंड किया गया है। बाइक में 19-इंच के फ्रंट और 16-इंच के रियर वायर-स्पोक व्हील हैं जिनमें ट्यूबलेस टायर हैं। ब्रेकिंग का काम 300 mm के फ्रंट और 270 mm के रियर डिस्क ब्रेक करते हैं, जिन्हें डुअल-चैनल ABS से मदद मिलती है। इसमें LED लाइट, ट्रिपर नेविगेशन और गियर पोजीशन इंडिकेटर लगे हैं। अभी किन मार्केट में एक्सपोर्ट हो रही भारत के साथ-साथ, गोअन क्लासिक को यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और नॉर्थ अमेरिका जैसे विदेशी मार्केट में भी भेजा जाता है। यह बाइक एक खास पेशकश है जो खास तौर पर डेवलप्ड मार्केट को टारगेट करती है और रॉयल एनफील्ड की बड़ी ग्लोबल स्ट्रेटेजी का हिस्सा है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक गोअन क्लासिक की सेल्स या एक्सपोर्ट के सही आंकड़े नहीं बताए हैं। एनफील्ड अभी दुनिया भर के 80 देशों में काम करती है। रॉयल एनफील्ड की इलेक्ट्रिक बाइक रॉयल एनफील्ड की पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का इंतजार सभी को है। कई बार टेस्टिंग के दौरान की फोटोज भी सामने आ चुकी है। साथ ही, कंपनी भी इसे शोकेस कर चुकी है। अब लग रहा है कि ये इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। दरअसल, ये इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल अब प्रोडक्शन के करीब आती दिख रही है। आने वाली फ्लाइंग फ्ली (FF C6) को अब चेन्नई में बिना किसी कवर के टेस्टिंग करते हुए देखा गया है, जिससे अब तक की सबसे साफ झलक मिलती है कि भारत के लिए ब्रांड की पहली EV क्या हो सकती है। साथ ही, ये नई झलक इस बात का इशारा है कि लॉन्च की तैयारियां एडवांस स्टेज में हैं।

वायरल फोटो से सनसनी: स्टीफन हॉकिंग एपस्टीन केस में घिरे, नई तस्वीर ने बढ़ाई हलचल

वॉशिंगटन जब से एपस्टीन फाइल जारी हुई हैं, तब से अमेरिका समेत दुनियाभर में हड़कंप मचा हुआ है। कई नामी-गिरामी लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। अब स्टीफन हॉकिंग की एक तस्वीर सामने आई है, जिसने हंगामा खड़ा कर दिया है। जेफरी एपस्टीन की फाइलों से सामने आई इस फोटो में स्टीफन हॉकिंग दो बिकिनी पहनी महिलाओं के बीच में हैं। हॉकिंग के बगल में लेटीं दोनों महिलाओं की पहचान उजागर नहीं हुई है। एक महिला हॉकिंग के दाएं ओर है, तो दूसरी बाएं ओर लेटी है। तीनों के हाथों में पेय पदार्थ है और स्टीफन हॉकिंग वाला ग्लास उनके अलावा महिला ने भी पकड़ रखा है। दोनो महिलाओं के चेहरे को काले रंग से ढक दिया गया है, ताकि पहचान सामने न आए। दोनों ने ब्लैक कलर की बिकिनी पहन रखी है। जेफरी एपस्टीन की फाइलों के नए बैच से सामने आई इस तस्वीर के बारे में यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि तस्वीर कब और कहां ली गई थी, लेकिन इसका खुलासा होने के बाद यह सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैलने लगी। स्टीफन के परिवार ने द पोस्ट को एक बयान में बताया, “प्रोफेसर हॉकिंग ने 20वीं सदी में फिजिक्स में सबसे बड़ा योगदान दिया, साथ ही वे मोटर न्यूरॉन बीमारी से सबसे लंबे समय तक बचने वाले व्यक्ति भी थे। यह एक ऐसी बीमारी थी जो उन्हें कमजोर कर देती थी और जिसके कारण उन्हें वेंटिलेटर, वॉइस सिंथेसाइज़र, व्हीलचेयर और चौबीसों घंटे मेडिकल केयर पर निर्भर रहना पड़ता था।” साल 2018 में हुई थी हॉकिंग की मौत बयान में आगे कहा कि उनकी तरफ से गलत व्यवहार का कोई भी इशारा गलत और बहुत दूर की कौड़ी है। हॉकिंग की 50 साल तक बीमारी से लड़ने के बाद साल 2018 में 76 साल की उम्र में मौत हो गई। वह दुनिया भर में मशहूर साइंटिस्ट्स के एक ग्रुप में शामिल थे, जिन्होंने मार्च 2006 में एपस्टीन द्वारा फंडेड और होस्ट किए गए एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था- यह उस बदनाम फाइनेंसर पर फ्लोरिडा में प्रॉस्टिट्यूशन के लिए लालच देने का आरोप लगने से पांच महीने पहले की बात है। कैरिबियन आइलैंड सेंट थॉमस पर हुई थी कॉन्फ्रेंस यह कॉन्फ्रेंस कैरिबियन आइलैंड सेंट थॉमस पर हुई थी, जो एपस्टीन के बदनाम प्राइवेट आइलैंड के पास है। बता दें कि हॉकिंग का नाम एपस्टीन की फाइलों में तब भी आया था, जब वर्जीनिया गिफ्रे ने आरोप लगाया था कि साइंटिस्ट ने एक बार वर्जिन आइलैंड्स में एक नाबालिग ग्रुप पार्टी में हिस्सा लिया था। फाइलों में मौजूद ईमेल के मुताबिक, एपस्टीन ने गिफ्रे के दोस्तों को कैश इनाम देने की पेशकश की थी, अगर वे उसके दावे को गलत साबित करने में मदद कर सकें। हालांकि, हॉकिंग पर कभी भी किसी गलत काम का ऑफिशियली आरोप नहीं लगाया गया और उनकी मौत 2019 में एपस्टीन के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार होने से पहले हुई थी।

पीटरबरो सिटी काउंसिल का फैसला विवादों में, हिंदू मंदिर सौदे पर उठा आक्रोश

लंदन पूर्वी ब्रिटेन के पीटरबरो शहर में एक परिसर में मौजूद 40 साल पुराने हिंदू मंदिर और कम्युनिटी सेंटर के बंद होने का डर है, क्योंकि स्थानीय प्राधिकारियों ने इस भवन को बेचने के फैसले को सही ठहराया है जो मंदिर के लिए किराये पर दिया गया है। भारत हिंदू समाज मंदिर की स्थापना 1986 में शहर के न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स में हुई थी और कैम्ब्रिजशायर, नॉरफॉक तथा लिंकनशायर के बड़े इलाके के 13,000 से अधिक हिंदू यहां दर्शन करने आते हैं। मंदिर प्रशासन पीटरबरो सिटी काउंसिल से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए अभियान चला रहा है। इस महीने की शुरुआत में काउंसिल कैबिनेट की बैठक में यह कहा गया कि "संपत्ति की बिक्री से करदाताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ मूल्य दिलाने की उसकी कानूनी जिम्मेदारी" है। वहीं, मंदिर ने एक बयान में कहा, "हम भारत हिंदू समाज से जुड़े भवन की बिक्री की कड़ी निंदा करते हैं। समुदाय द्वारा बनाई गई संस्था को बंद दरवाजों के पीछे बिना पारदर्शिता या सहमति के नहीं बेचा जाना चाहिए।" इसमें कहा गया, ''यह सिर्फ संपत्ति के बारे में नहीं है, बल्कि विरासत, भरोसे और जवाबदेही के बारे में है। समुदाय जवाब पाने का हक रखता है, गोपनीयता का नहीं। इस फैसले पर सवाल उठाए जाने चाहिए और इसका विरोध किया जाना चाहिए।'' हिंदू काउंसिल यूके, जो ब्रिटिश हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख संस्था है, ने लेबर पार्टी के नेतृत्व वाली पीटरबरो सिटी काउंसिल (पीसीसी) के नए प्रशासन पर मंदिर के ''सामाजिक प्रभाव मूल्य'' को पूर्व में मानने और भारत हिंदू समाज को इसका स्वामित्व हस्तांतरित करने की प्रतिबद्धता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।