samacharsecretary.com

‘इमरान खान को दिख रहा है साफ’—पाक मंत्री का बड़ा दावा, 70 फीसदी रोशनी बरकरार

इस्लामाबाद पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने सोमवार को दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत दुरुस्त है, चिंता की कोई बात नहीं है, और चश्मे के साथ उनकी एक आंख की रोशनी 70 फीसदी बची है। इसके साथ ही उन्होंने पीटीआई शासित केपी में किए जा रहे रोड ब्लॉक को भी गैर कानूनी करार दिया। कानून मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक की दूसरी आंख की रोशनी 6/6 है। तरार ने कहा, "चिंता की कोई बात नहीं है।" पंजाब के शाहदरा में बार एसोसिएशन फिरोजवाला को संबोधित करते हुए, तरार ने इमरान की सेहत के बारे में “नवीनतम रिपोर्ट जो जमा करनी थी” का जिक्र किया। मंत्री ने कहा कि बार एसोसिएशन आने से पहले उन्होंने पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (एजीपी) मंसूर उस्मान अवान और “संबंधित” लोगों से इस बारे में चर्चा की थी। इसके साथ ही उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई सरकार के राज में जगह-जगह किए गए घेराव और प्रदर्शन को भी गलत बताया। उन्होंने कहा, "मेडिकल टीम ने विपक्षी नेताओं और पीटीआई संस्थापक के निजी चिकित्सकों को उनकी सेहत के बारे में जानकारी दे दी है। मोटरवे और जीटी रोड को बंद करना गैर-कानूनी है।" कानून मंत्री ने धमकी भरे अंदाज में खैबर पख्तूनख्वा सरकार से संविधान और कानून का पालन करने की अपील की। ​​उन्होंने पीटीआई लीडरशिप से अपील की कि वे केपी में अपनी सरकार से सड़कें खोलने के लिए कहें। तरार ने कहा, "शिकायत मत करो, अगर सड़कें नहीं खोली गईं तो फेडरल सरकार कार्रवाई करने के लिए मजबूर होगी।" कानून मंत्री ने कहा कि देश की आर्थिक स्थिरता के लिए राजनीतिक स्थिरता जरूरी है। तरार का यह बयान सुप्रीम कोर्ट (एससी) को खान के खराब विजन की जानकारी देने के बाद आया है। कोर्ट को वकील ने बताया था कि इमरान की दाहिनी आंख में सिर्फ 15 फीसदी रोशनी बची है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 16 फरवरी (सोमवार) से पहले उनकी जांच के लिए एक मेडिकल टीम बनाई थी। इसके बाद, पांच डॉक्टरों की एक टीम रविवार को रावलपिंडी की अदियाला जेल पहुंची। जेल में बंद इमरान खान की आंखें जांची, ब्लड सैंपल लिए और उनका ब्लड प्रेशर चेक किया। हालांकि, पीटीआई ने उनके परिवार और निजी चिकित्सकों के बिना किए गए चेक-अप को खारिज कर दिया था।

मोदी के इजरायल दौरे से पहले नेतन्याहू का बड़ा बयान—भारत दुनिया की ताकतवर शक्ति

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह इजरायल के दौरे पर जाएंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा कई मायनों में खास होगा। यह दौरा सुरक्षा, काउंटर-टेररिज़्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई टेक्नोलॉजी में आपसी रिश्तों को मजबूत करने की कोशिशों के बीच हो रहा है। यह इसीलिए भी खास है क्योंकि PM मोदी 2017 के बाद, यानी 9 सालों में पहली बार इजरायल जा रहे हैं। इससे पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत और इजरायल के संबंधों पर चर्चा करते हुए इसे बेहद अहम बताया है। हालांकि भारत ने इस दौरे की आधिकारिक घोषणा नहीं है, लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के न्योते के बाद पीएम मोदी आगामी 24-25 फरवरी को इजरायल की यात्रा पर रवाना हो सकते हैं। दौरे से पहले नेतन्याहू ने भी इसके संकेत दिए हैं। हाल ही में मेजर अमेरिकन ज्यूइश ऑर्गेनाइजेशन के प्रेसिडेंट के कॉन्फ्रेंस में अपने भाषण में, नेतन्याहू ने देशों के बीच मजबूत रिश्तों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "संसद में भाषण होने वाला है। अगले हफ्ते यहां कौन आ रहा है? नरेंद्र मोदी।" उन्होंने आगे कहा, “इजरायल और भारत के बीच बहुत अच्छे संबंध है, और हम हर तरह के सहयोग पर बात करेंगे।” उन्होंने आगे भारत को एक पावरफुल देश बताया। नेतन्याहू ने कहा, “जैसा की आप जानते हैं, भारत कोई छोटा देश नहीं है। यहां 1.4 बिलियन लोग रहते हैं। भारत बहुत पावरफुल है, बहुत पॉपुलर है।… मैं चाहता हूं कि आप सभी इसे जानें।" उन्होंने भारत में इजरायल की प्रसिद्धि की भी बात कही। किन मुद्दों पर होगी चर्चा? पीएम मोदी के दौरे पर उनके और नेतन्याहू के बीच बातचीत रक्षा सहयोग के साथ-साथ काउंटर-टेररिज़्म की कोशिशों को तेज करने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। दोनों नेताओं ने हाल के दिनों में आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करने की बात कही है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम रिसर्च और एडवांस्ड एग्रीकल्चर जैसे उभरते हुए क्षेत्रों के भी समझौतों की उम्मीद है।  

भरोसे पर लगा दाग! डिप्टी मैनेजर ने लॉकर साफ कर सट्टेबाजी में गंवाए करोड़ों

बेंगलुरु कर्नाटक के बेंगलुरु में इंडियन बैंक के एक डिप्टी मैनेजर पर ग्राहकों के सोने के आभूषणों की हेराफेरी करने और उन्हें बिना अनुमति के गिरवी रखने का आरोप है। जब्त किए गए सोने का कुल वजन लगभग 2,780 ग्राम है, जिसकी अनुमानित कीमत 3.5 करोड़ रुपये से अधिक है।   बैंक लॉकर में सोना रखना अब भी सुरक्षित है या नहीं? यह सवाल बेंगलुरु के एक चौंकाने वाले मामले ने सबके मन में उठा दिया है। जहां लोग बैंक को सबसे भरोसेमंद जगह मानते हैं, वहां ही बैंक का उप प्रबंधक (डिप्टी मैनेजर) ग्राहकों के सोने का सेंधमार निकला। रिपोर्ट के अनुसार डिप्टी मैनेजर ने कथित तौर पर 15 ग्राहकों के लॉकर से करीब 2.78 किलो (2,780 ग्राम) सोने के आभूषण चुराए, उन्हें बिना अनुमति गिरवी रखा और मिली रकम ऑनलाइन सट्टेबाजी में उड़ा दी। पुलिस के अनुसार, कर्नाटक के बेंगलुरु में इंडियन बैंक के एक उप प्रबंधक (डिप्टी मैनेजर) पर ग्राहकों के सोने के आभूषणों की हेराफेरी करने और उन्हें बिना अनुमति के गिरवी रखने का आरोप है। जब्त किए गए सोने का कुल वजन लगभग 2,780 ग्राम है, जिसकी अनुमानित कीमत 3.5 करोड़ रुपये से अधिक है। खबर के मुताबिक, बैंक के मुख्य प्रबंधक ने 5 फरवरी को बेंगलुरु के गिरिनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद यह धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। पुलिस ने जांच में पाया कि आरोपी ने उच्च अधिकारियों को बताए बिना बैंक लॉकरों से ग्राहकों के 2,780 ग्राम सोने के आभूषण निकाल लिए और उन्हें एक फाइनेंस कंपनी के पास गिरवी रख दिया। जांच के दौरान प्रारंभिक सबूत मिले हैं कि इस तरीके से प्राप्त पैसे को आरोपी ने ऑनलाइन सट्टेबाजी (ऑनलाइन बेटिंग/जुआ) पर खर्च कर दिया था। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) लोकेश बी जगलासर ने बताया कि आरोपी उप प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया गया है। हम बाकी सोना बरामद करने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक करीब 700 ग्राम सोना बरामद हो चुका है। उन्होंने आगे बताया कि फाइनेंस कंपनी से जरूरी सहयोग नहीं मिल रहा है, इसलिए हम अदालत का रुख करेंगे और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे। फिलहाल मामले की जांच अभी जारी है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।  

रिपुन बोरा ने छोड़ी कांग्रेस, हिमंता बिस्वा सरमा बोले—अब क्या बचा पार्टी में?

असम असम में कांग्रेस इकाई के चीफ रहे रिपुन बोरा के इस्तीफे के बाद सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के आखिरी हिंदू नेता ने भी पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने कहा कि वह ऐसे व्यक्ति थे जो कि बिना परिवारवाद के राजनीति में आए थे। असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कांग्रेस पर करारा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि भूपेन बोरा कांग्रेस के ऐसे आखिरी हिंदू नेता थे जो कि किसी के दम पर राजनीति में नहीं आए थे। उन्होंने कहा कि बोरा के इस्तीफे का संदेश यही है कि कांग्रेस किसी सामान्य व्यक्ति को फलते-फूलते नहीं देखना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल तुष्टीकरण कि राजनीति करना जानती है। सरमा ने कहा कि भूपेन ने बीजेपी जॉइन करने को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है। सरमा ने कहा कि मंगलवार की शाम को वह बोरा के घर जाएंगे। अगर वह चाहेंगे तो बीजेपी उन्हें स्वीकार करेगी और सुरक्षित सीट भी देगी। सरमा ने कहा, असम में कांग्रेस की स्थिति खराब है। कांग्रेस के कई कार्यालयों में मीटिंग भी एक खास समुदाय की प्रार्थना के साथ शुरू होती है। असम में कांग्रेस बहुत तेजी से बदल रही है। लोग इसे देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई बीजेपी में आना चाहता है तो उसके लिए पार्टी के अंदर चर्चा करनी पड़ेगी क्योंकि यहां कोई वैकेंसी नहीं है। बता दें कि बोरा जुलाई 2021 से प्रदेश में पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे, उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस के बड़े नेताओं जिनमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल हैं, को भेज दिया है। उन्होंने 2006 से 2016 तक असम विधानसभा में बिहपुरिया सीट का प्रतिनिधित्व किया था। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद बोरा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से अपना नाम भी हटा दिया। बोरा का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब असम में कांग्रेस ने राज्य भर के लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए 'बदलाव की यात्रा' शुरू की थी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रोंगानोडी सीट से कांग्रेस टिकट के एक बड़े दावेदार भी थे, वह प्रदेश पार्टी अध्यक्ष गौरव गोगोई के साथ परिवर्तन यात्रा में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे थे। बोरा ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, " मैंने अपना इस्तीफ़ा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेज दिया है, और मैंने अपने कारण विस्तृत में बताये हैं। मैंने अपनी ज़िंदगी के 32 साल पार्टी को दिये हैं, और ज़ाहिर है, मैंने राजनीति से रिटायरमेंट लेने के लिए इस्तीफ़ा नहीं दिया है। " उन्होंने कहा कि इस पुरानी पार्टी के भविष्य को लेकर कुछ कारण हैं और उन्होंने पार्टी हाईकमान को अपने इस्तीफ़े के कारण बता दिए हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा में शामिल होंगे, श्री बोरा ने कहा कि उन्होंने अभी अपने भविष्य के कदम के बारे में कोई फ़ैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा, " मैंने आपको वह सब कुछ बता दिया है, जो मैं बता सकता था। हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी ने मुझे कुछ भी ऑफ़र नहीं किया है। मैं जो भी फ़ैसला लूंगा, मैं असम के लोगों को सही समय पर बता दूंगा। " पार्टी के अदंरूनी लोगों ने इशारा किया कि पार्टी के आम कार्यकर्ता के बीच राय में मतभेद हैं। हाल ही में पार्टी हाईकमान ने हालांकि श्री बोरा को दूसरी क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों के साथ गठबंधन से जुड़े मामलों को देखने के लिए कहा था, लेकिन श्री गौरव गोगोई के करीबी कुछ दूसरे पार्टी नेताओं के दखल से उन्हें नुकसान हुआ है।  

हादसे में खो दी नन्ही जान, लेकिन माता-पिता ने अंगदान कर पेश की मिसाल

तिरुवनंतपुरम केरल से एक बेहद भावुक करने वाली कहानी सामने आई है। यहां पर हादसे में 10 महीने की एक बच्ची बुरी तरह से घायल हो गई। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत के बाद उसके पैरेंट्स ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसके मुरीद प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत तमाम सेलेब्स भी हो गए हैं।   केरल से एक बेहद भावुक करने वाली कहानी सामने आई है। यहां पर हादसे में 10 महीने की एक बच्ची बुरी तरह से घायल हो गई। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बेटी की मौत के बाद उसके पैरेंट्स ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसके मुरीद प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत तमाम सेलेब्स भी हो गए हैं। बच्ची के माता-पिता ने उसका अंगदान करने का फैसला किया। उनके इस फैसले की बदौलत पांच लोगों को नई जिंदगी मिली है। इस बच्ची का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी मौजूद रहे। कौन थी आलिन शेरिन जिस बच्ची का अंगदान किया गया, उसका नाम आलिन शेरिन है। उसके माता-पिता का नाम अरुण अब्राहम और शेरिन एन जॉन है। यह लोग केरल के पाथनमथिट्टा जिले के रहने वाले हैं। पांच फरवरी को आलिन अपनी मां और दादा-दादी के साथ यात्रा कर रही थी। इसी दौरान गलत दिशा से आ रही कार ने उनके वाहन में टक्कर मार दी। इस हादसे में आलिन को बेहद गंभीर चोटें आईं। वहीं, उसकी मां और दादा-दादी भी गंभीर रूप से घायल हैं। शुरुआत में आलिन को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए कोच्चि ले जाया गया। बहुत कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी और डॉक्टरों ने 12 फरवरी को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। बताया गया ग्रीन कॉरिडोर महज दस महीने की बेटी को खोकर आलिन के माता-पिता गहरे दुख में थे। लेकिन इसी दौरान उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जो नजीर बन गया। दोनों ने तय किया कि वह अपनी बच्ची का अंगदान करेंगे। इसके बाद हेल्थकेयर सिस्टम, पुलिस और आम लोगों ने गजब का तालमेल दिखाया। चूंकि सिविल एविएशन रूल्स के चलते रात में हेलिकॉप्टर ट्रांसफर संभव नहीं था। इसलिए केरल सरकार ने एंबुलेंस के जरिए अंगों को भेजने का फैसला किया। आनन-फानन में कोच्चि से तिरुवनंतपुरम के बीच ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। किसे दिए गए अंग इसके लिए कड़े ट्रैफिक प्रतिबंध लागू किए गए। पूरे रास्ते में मैनुअल सिग्नलिंग की व्यवस्था की गई। इसके जरिए 230 किलोमीटर की दूरी मात्र 3 घंटे और 20 मिनट में तय हुई। इसके बाद सुरक्षित तरीके सभी अंग गंतव्य तक पहुंचे। यहां पर एक निजी अस्पताल में छह साल की बच्ची को लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। वहीं, किडनी सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक 10 साल के बच्चे को लगाया गया। हार्ट वॉल्व तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज कैंपस को ट्रांसफर किया गया, जबकि कॉर्निया एक निजी अस्पताल के आई बैंक को डोनेट कर दिया गया। सबने की तारीफ महज 10 महीने की उम्र में बच्ची की दु:खद मौत और उसके माता-पिता द्वारा अंगदान के फैसले की केरल समेत तमाम जगहों पर तारीफ हुई। केरल के राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर ने कहाकि वह बच्ची के माता-पिता के इस फैसले बहुत प्रभावित हुए हैं। उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिससे दूसरों को जीवन मिला है। अभिनेता कमल हासन ने भी पैरेंट्स को संबोधित एक भावुक संदेश लिखा। इस संदेश में उन्होंने लिखा कि बेबी आलिन पांच बच्चों को जिंदगी देकर गई है। अभिनेता मोहनलाल ने भी आलिन को लिटिल एंजेल कहा।  

सुप्रीम कोर्ट में SIR पर तीखी टिप्पणी, CJI सूर्यकांत बोले- यह तय करना अदालत का काम नहीं

कोलकाता पश्चिम बंगाल SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। इस बार याचिका दाखिल कर SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने जमकर नाराजगी जताई है। खास बात है कि SIR के मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार और ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग में तकरार जारी है। बार एंड बेंच के अनुसार, मोहम्मद जिमफरहाद नोवाज ने याचिका दाखिल की थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट के इस्तेमाल को चुनौती दी है। इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'आर्टिकल 32 में आप चाहते हैं कि हम यह तय करें कि आपके पिता, माता और आदि कौन हैं। यह आर्टिकल 32 याचिका का मजाक है।' 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची होगी प्रकाशित पीटीआई भाषा के अनुसार, शनिवार को एक अधिकारी ने जानकारी दी है कि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। अधिकारी ने बताया कि नामों की वर्तनी में हुई गलती और विसंगतियों से संबंधित सुनवाई 27 दिसंबर को शुरू हुई और पूरे राज्य में विद्यालयों, क्लब कक्षों और प्रशासनिक भवनों में स्थापित शिविरों में जारी रही। उन्होंने बताया, 'चुनाव अधिकारी अब 21 फरवरी तक दस्तावेजों की जांच करेंगे। अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जानी है।' अधिकारी ने बताया कि सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) के पास लंबित कोई भी दस्तावेज सोमवार तक अपलोड किए जाने चाहिए। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब 58 लाख नाम (मृत/दोहराव /स्थानांतरित मतदाता) ऐसे पाए गए, जिन्हें सूची से हटाना उचित समझा गया और दिसंबर में प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से बाहर रखा गया। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की अंतिम तिथि 14 फरवरी थी, जिसे बाद में निर्वाचन आयोग ने बढ़ाकर 28 फरवरी कर दिया था। ECI का 7 अधिकारियों पर ऐक्शन निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में सात अधिकारियों को गंभीर कदाचार, कर्तव्य में लापरवाही और एसआईआर से जुड़े अधिकारी के के दुरुपयोग के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ये सभी अधिकारी निर्वाचन आयोग के लिए सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। आदेशों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी अपने-अपने विभाग के जरिए इन अधिकारियों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करें और इसकी जानकारी आयोग को दें। मंगलवार तक का समय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव को 17 फरवरी तक उसके निर्देशों का पालन करने को कहा है, जिसमें बीएलओ को बढ़ा हुआ मानदेय देना और जारी एसआईआर के दौरान जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना शामिल है।  

जाति विवाद के बीच भाजपा सांसद का बड़ा कदम, दलित महिला के सम्मान में किया ऐसा काम कि लोग कर रहे तारीफ

भुवनेश्वर भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने महिला और उसके परिवार से मुलाकात की। उनका हालचाल लिया और साथ में फोटो खिंचवाई। इस मामले की तारीफ हो रही है और कहा जा रहा है कि शांति से किसी विवाद को निपटाने का इससे बेहतर तरीका कोई दूसरा नहीं हो सकता। देश में अकसर ऐसे मामले सामने आते हैं, जब समाज में भेदभाव की शिकायत होती है। इस तरह की घटनाओं में आमतौर पर विवाद को बयानबाजी करके और बढ़ा दिया जाता है। लेकिन ओडिशा के भाजपा सांसद बैजयंत पांडा की तारीफ की जा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने एक दलित महिला के हाथ का बना खाना खुद जाकर खाया। ऐसा कदम उन्होंने तब उठाया, जब दलित महिला के हाथ का बना खाने को लेकर विवाद था और कुछ लोग खाने में ऐतराज कर रहे थे। ऐसे में विवाद ना बढ़े और समाज में वैमनस्य को रोका जा सके। इस इरादे से पांडा उस आंगनवाड़ी केंद्र पहुंच गए, जहां महिला काम करती है। उनके साथ तमाम समर्थक और गांव के लोग भी थे। उन्होंने महिला और उसकी बहन के हाथों का बना खाना खाया। पांडा ने महिला और उसके परिवार से मुलाकात की। उनका हालचाल लिया और साथ में फोटो खिंचवाई। इस मामले की तारीफ हो रही है और कहा जा रहा है कि शांति से किसी विवाद को निपटाने का इससे बेहतर तरीका कोई दूसरा नहीं हो सकता। यह मामला राजनगर के गड़ियामल ग्राम पंचायत के नुआगांव आंगनवाड़ी केंद्र का है। यहां आंगनवाड़ी में काम करने वाली दलित महिला के हाथों का खाना बच्चों को दिए जाने पर कुछ ग्रामीणों ने ऐतराज जताया था। इसे लेकर विवाद बढ़ रहा था। ऐसी स्थिति में बैजयंत पांडा खुद ही आंगनवाड़ी पहुंचे और खाना खाया। भाजपा सांसद अपने साथ कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर पहुंचे थे। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जुट गए थे। उनके इस कदम को एकता और सौहार्द्र के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। यही नहीं उनके इस कदम के बाद गांव के लोगों के व्यवहार में भी सुधार आया है। सोमवार को बच्चे आंगनवाड़ी पहुंचे तो उसी दलित महिला के हाथ का बना खान खाया, जिसे लेकर विवाद था। इसकी तस्वीरें भी बैजयंत पांडा ने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। आंगनवाड़ी वर्कर शर्मिष्ठा सेठी ने कहा कि सांसद ने चावल, दाल, खट्टा और सब्जियां खाईं। इस खाने को मैंने और मेरी बहन ने ही तैयार किया था। सांसद ने खाने की तारीफ भी की। बैजयंत पांडा ओडिशा की केंद्रपाड़ा सीट से लोकसभा के सांसद हैं। वह जब आंगनवाड़ी केंद्र में खाने के लिए बैठे तो उनके साथ शशांक सेठी, संजय राठ, किशोर पांडा जैसे नेता भी खाने के लिए पहुंचे। सांसद के इस व्यवहार की आसपास के लोग तारीफ कर रहे हैं कि कैसे उन्होंने एक विवाद को टाल दिया और समाज में भी एकता का संदेश दिया।  

बंगाल में चुनाव आयोग का सख्त रुख: चुनाव ड्यूटी में लापरवाही पर 7 वरिष्ठ अधिकारी सस्पेंड

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही चुनाव आयोग (ECI) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। चुनावी तैयारियों और ड्यूटी में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोपों के चलते आयोग ने विभिन्न जिलों के 7 राजपत्रित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता के साथ समझौता कर रहे थे। मुख्य सचिव को कड़ा आदेश: तुरंत शुरू करें विभागीय जांच चुनाव आयोग ने इस मामले में केवल निलंबन पर ही संतोष नहीं किया, बल्कि पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि इन सभी 7 अधिकारियों के खिलाफ बिना किसी देरी के अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। आयोग ने राज्य सरकार से इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। माना जा रहा है कि वोटर लिस्ट रिवीजन और ग्राउंड लेवल की तैयारियों में बरती गई अनियमितताओं के कारण यह गाज गिरी है। इन अधिकारियों पर गिरी गाज: मुर्शिदाबाद से लेकर डेबरा तक कार्रवाई निलंबित किए गए अधिकारियों में राजस्व, कृषि और विकास खंडों के महत्वपूर्ण पदों पर तैनात 'असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स' (AERO) शामिल हैं। कार्रवाई की जद में आए प्रमुख नाम इस प्रकार हैं: मुर्शिदाबाद जिले के समसेरगंज से सहायक निदेशक डॉ. सेफौर रहमान और फरक्का के राजस्व अधिकारी नीतीश दास को सस्पेंड किया गया है। वहीं, मयनागुड़ी की दलिया रे चौधरी, सुती विधानसभा क्षेत्र के एसके मुर्शिद आलम, और कैनिंग पुरबो के संयुक्त बीडीओ सत्यजीत दास व जॉयदीप कुंडू पर भी कड़ी कार्रवाई हुई है। इसके अलावा, डेबरा के संयुक्त बीडीओ देबाशीष विश्वास को भी कर्तव्य में लापरवाही का दोषी पाया गया है। चुनाव पूर्व सफाई अभियान की शुरुआत पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए आयोग किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। वोटर लिस्ट में सुधार और मतदान केंद्रों की समीक्षा का काम जोरों पर है। आयोग का मानना है कि यदि जमीनी स्तर के अधिकारी ही निष्पक्ष नहीं रहेंगे, तो लोकतंत्र के इस महापर्व की शुचिता प्रभावित हो सकती है।  

निखिल गुप्ता का बड़ा दावा: खालिस्तानी निज्जर भी था निशाने पर, अमेरिकी एजेंसी को दी जानकारी

वाशिंगटन अमेरिका में एक सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोपी भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने बड़े दावे किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यूएस ड्रग एनफोर्समेट ऐडमिनिस्ट्रेशन (DEA) को बताया कि कनाडा में मारा गया खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर भी उनके निशाने पर था। हालांकि योजना को अंजाम देने से पहले ही अज्ञात बंदूकधारियों ने निज्जर की हत्या कर दी। दावा किया या है कि निखिल गुप्ता ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया है। बता दें कि भारत से भागकर कनाडा की नागरिकता लेने वाले निज्जर की ब्रिटिश कोलंबिया में 18 जून 2023 में हत्या कर दी गई थी। भारत सरकार ने उस पहलेसे ही आतंकियों की सूची में शामिल कर रखा था। डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के दस्तावेजों के मुतबिक निखिल गुप्ता ने बताया कि उनके कई टारगेट थे और निज्जर भी उनमें से ही एक था। वहीं पन्नूऔर निज्जर आपस में मिले थे। बता दें कि गुरपतवंत सिंह पन्नू विदेश में बैठकर भारत के खिलाफ आग उगलता रहता है। इसके अलावा वह पंजाब को तोड़कर खालिस्तान बनाने के अलगाववादी अजेंडा चलाता है। अमेरिकी वकील ने दावा किया कि निखिल गुप्ता से कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वॉशिंगटन दौरे के दौरान पन्नू की हत्या ना करवाई जाए। जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वॉशिंगटन की यात्रा पर गए थे। हालांकि प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा से दो दिन पहले ही हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हो गई। चेक गणराज्य से प्रत्यर्पित हुए थे गुप्ता गुप्ता को जून 2024 में चेक गणराज्य से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था और उनकी पहली पेशी मजिस्ट्रेट न्यायाधीश जेम्स कॉट के समक्ष मैनहट्टन संघीय अदालत में हुई थी। अदालत में पेशी के दौरान, उन्होंने पूर्व में खुद को निर्दोष बताया था। गुप्ता को चेक गणराज्य में अमेरिका सरकार के अनुरोध पर गिरफ्तार किया गया था। उन पर न्यूयॉर्क में खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने में शामिल होने का आरोप था।पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा दोनों देशों की नागरिकता है। पन्नू की हत्या के बदले मिलने वाली थी बड़ी रकम? अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस का कहना है कि निखिल गुप्ता भारत या फिर कहीं और और से निर्देश प्राप्त करते ते। इसके अलावा इस साजिश में शामिल विकास यादव को भारत सरकार का कर्मचारी बताया गया है। उन्हें रॉ में शामिल किया गया था। दावा किया गया कि यादव के ही निर्देशों पर निखिल गुप्ता सुपारी लेकर हत्या करने वालों से संपर्क करते थे। अमेरकी प्रशासन का कहना है कि यादव ने निखिल गुप्ता को पन्नू की हत्या के बदले 1 लाख डॉलर देने का वादा किया था। जून 2023 में 15 हजार डॉलर एडवांस में भी दिए गए थे। इसके अलावा निखिल गुप्ता को टारगेट का अड्रेस, फोन नंबर और निजी जानकारियां उपलब्ध कराई जाती तीं। गुप्ता को 30 जून 2023 को चेक गणराज्य से गिरफ्तार किया गया था।

बांग्लादेश की संसद में अल्पसंख्यकों की संख्या सिर्फ 4, कितने हैं हिंदू? तारिक रहमान ने बुलंद किया एकता का नारा

ढाका  बांग्लादेश में हाल ही में हुए आम चुनावों के नतीजे सामने आ चुके हैं। चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP को बंपर जीत मिली है, जिसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे, रहमान का PM बनना तय माना जा रहा है। उनकी पार्टी को गुरुवार के चुनावों में 209 सीटों के साथ संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला है। हालांकि अल्पसंख्यकों की बात करें तो उन्हें चुनाव में महज 4 सीटें मिली हैं। आम चुनावों में विजयी चारों अल्पसंख्यक BNP से हैं। हिंदुओं की बात की जाए तो नए बांग्लादेशी संसद में उनका प्रतिनिधित्व ना के बराबर होगा। चुनाव में महज 2 हिंदू उम्मीदवारों को जीत मिल पाई। इन उम्मीदवारों के नाम गोयेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी हैं, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। दोनों ने अपनी अपनी सीट पर जमात के उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की है। जानकारी के मुताबिक जहां रॉय BNP की पॉलिसी बनाने वाली स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं, वहीं चौधरी पार्टी के प्रमुख वाइस प्रेसिडेंट में से एक होने के साथ-साथ इसके टॉप लीडरशिप के सीनियर सलाहकार और रणनीतिकार भी हैं। इसके अलावा तीसरे विजयी अल्पसंख्यक उम्मीदवार सचिन प्रू हैं, जो BNP के सीनियर लीडर है। वे बौद्ध धर्म से आते हैं। वहीं चौथे माइनॉरिटी कैंडिडेट, दीपेन दीवान भी बौद्ध धर्म से आते हैं और उन्होंने दक्षिण-पूर्वी रंगमती पहाड़ी जिले की सीट से जीत हासिल की है। 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने लड़ा था चुनाव गौरतलब है कि 17 करोड़ जनसंख्या वाले बांग्लादेश में 8 फीसदी आबादी हिंदू है। देश के चुनाव आयोग के मुताबिक हालिया चुनावों में 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, जिनमें 10 महिलाएं शामिल थीं। बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी (CPB) ने सबसे ज्यादा 17 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। इसके बाद लेफ्ट-विंग बांग्लादेश साम्यबादी दल (BSD) ने आठ, बांग्लादेश माइनॉरिटी जनता पार्टी (BMJP) ने आठ और लेफ्ट-विंग बांग्लादेश समाजवादी दल (BASOD) ने सात अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। BNP ने छह और जातीय पार्टी ने चार अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को उतारा था। इसके अलावा जमात-ए-इस्लामी ने इतिहास में पहली बार एक माइनॉरिटी हिंदू कैंडिडेट को नॉमिनेट किया था। तारिक रहमान ने दिया है भरोसा बता दें कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के शासन काल में बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए नरक समान बन गया था। यहां हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले, हिंसा और क्रूरता की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। अब बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान ने बांग्लादेश में किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता देने की बात कही है। रहमान जल्द ही अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की जगह लेंगे। संसदीय चुनावों में भारी जीत के एक दिन बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 60 वर्षीय रहमान ने कहा, "हमारे रास्ते और विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के हित में हमें एकजुट रहना होगा। मैं दृढ़ता से मानता हूं कि राष्ट्रीय एकता हमारी सामूहिक ताकत है, जबकि विभाजन हमारी कमजोरी।" रहमान ने कहा कि शांति और कानून-व्यवस्था किसी भी कीमत पर बनाए रखनी होगी।