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आधार सेवा हुई स्मार्ट: गूगल मैप पर एक क्लिक में खोजें नजदीकी सेंटर

नई दिल्ली आधार कार्ड में किसी अपडेट के लिए या फिर नया बनवाने के लिए अकसर लोगों को सेंटर खोजने पड़ते हैं। इसमें उनका काफी वक्त खराब होता है और कई बार तो वे ऐसे पुराने आधार केंद्रों पर पहुंच जाते हैं, जहां पहले कभी काम हुआ करता था, लेकिन अब बंद हो गया है। ऐसी स्थिति से लोगों को बचाने के लिए अब UIDAI ने गूगल के साथ हाथ मिला लिया है। यह पाठक के तौर पर आपके लिए जरूरी और काम की खबर है। इसके चलते अब यदि आपको आधार कार्ड से जुड़ा कोई काम कराना हो तो आसानी से सेंटर पहुंच सकते हैं। इसके लिए आपको बस गूगल मैप पर सर्च करना होगा। यहां आपको आपके नजदीकी आधार केंद्र दिखेंगे। आईटी मिनिस्ट्री की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार अगले कुछ महीनों में गूगल मैप में यह फीचर आ जाएगा। यही नहीं गूगल मैप पर आधार सेंटर सर्च करने पर यह भी पता चलेगा कि किस केंद्र पर वयस्कों का नामांकन होता है। कहां बच्चों का आधार कार्ड बन सकता है और कहां सिर्फ आधार कार्ड में पता या मोबाइल नंबर ही अपडेट हो पाएगा। आईटी मंत्रालय का कहना है कि लोगों को यह भी जानकारी मिल पाएगी कि आधार सेंटर दिव्यांग फ्रेंडली है, वहां पार्किंग की सुविधा है या नहीं। सेंटर कब से तक खुलता है और किन दिनों में छुट्टी रहती है। ऐसी समस्त जानकारियां लोगों को सेंटर सर्च के दौरान ही मिल जाएंगी। े UIDAI का कहना है कि देश भर में 60 हजार आधार सेवा केंद्र हैं। इन तक पहुंचने में लोगों को अकसर परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार गलत जानकारी होने के चलते लोग भटकते रहते हैं। ऐसे में सभी केंद्रों की पूरी जानकारी हो और कहां क्या सेवा प्रदान की जाती है। इसके बारे में पता हो तो लोगों को सुविधा रहेगी। अहम बात यह है कि गूगल मैप पर सिर्फ आधिकारिक आधार सेंटर ही दिखाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों को आधार कार्ड के नाम पर किसी तरह की अवैध वसूली अथवा ठगी से बचाया जा सके। कई बार आधार से जुड़ी सर्विसेज देने के नाम पर रकम वसूलने के मामले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में लोगों को सुविधाजनक और पारदर्शी व्यवस्था देने के लिए यह फैसला लिया गया है। UIDAI के सीईओ ने बताया, 'हमारा फोकस इस बात पर रहा है कि कैसे आधार नंबर होल्डर्स के लिए प्रक्रिया आसान की जाए। अब इस कोलैबरेशन से लोगों को आसानी से आधार केंद्र पहुंचने में मदद मिलेगी।' गूगल इंडिया के स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप कंट्री हेड रोली अग्रवाल ने कहा कि इससे लाखों लोगों को फायदा मिलेगा। जनता और जरूरी सरकारी संस्थानों के बीच गैप खत्म होगा। आधार कार्ड बनवाना है तो आपके काम की हैं ये बातें… – अब आप आसानी से आधार कार्ड पहुंच सकेंगे। इसके लिए आपको गूगल मैप पर बस यह सर्च करना होगा कि आपके आसपास कौन सा आधार सेवा केंद्र है। आप सही स्थान पर पहुंचेंगे और समय बचेगा। – इसके अलावा UIDAI के वैध केंद्र पर जाने से आप ठगे जाने से भी बच सकेंगे। यही नहीं मैप में ही आपको यह जानकारी भी मिल सकेगी कि किस सेंटर में क्या-क्या सुविधा मिलती है। पार्किंग आदि की सुविधा है या नहीं।  

भारत की ‘धांसू’ मोटरसाइकिल का इजराइल में जलवा, मोदी-नेतन्याहू ने किया खास पोज

नई दिल्ली रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) एक ऐसा इंडियन मोटरसाइकिल ब्रांड है जिसने दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है। चेन्नई की इस बाइक बनाने वाली कंपनी ने यूरोप, नॉर्थ अमेरिका और साउथ एशिया के मार्केट में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। हालांकि, कंपनी को अभी सेंट्रल एशिया और मिडिल ईस्ट के मार्केट में गहराई तक जाना बाकी है। येरुशलम (Jerusalem) में एक टेक एग्जीबिशन में रॉयल एनफील्ड ने गोअन क्लासिक 350 को शोकेस किया है। इस इवेंट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू शामिल रहे।   इन दोनों प्रधानमंत्री ने इस मोटरसाइकिल के साथ फोटो खिंचवाने का फैसला किया। PM मोदी इजराइल के दो दिन के दौरे पर हैं, क्योंकि दोनों देश ट्रेड के साथ-साथ कल्चर के मामले में भी रिश्ते बढ़ाने के तरीके ढूंढ रहे हैं। चलिए रॉयल एनफील्ड गोअन क्लासिक 350 के बारे में डिटेल से जानते हैं। रॉयल एनफील्ड गोअन क्लासिक 350 रॉयल एनफील्ड गोअन क्लासिक 350, क्लासिक 350 का बॉबर-स्टाइल लाइफस्टाइल वर्जन है, जिसमें इसके कोर पार्ट्स शेयर किए गए हैं। इसकी खासियतों में टियरड्रॉप शेप का फ्यूल टैंक, कर्व्ड फेंडर, एक फ्लोटिंग सीट और सबसे जरूरी, लंबे एप-हैंगर हैंडलबार शामिल हैं। बाइक में 349 cc, सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड इंजन है जो 20.2 bhp और 27 Nm का पीक टॉर्क देता है। इसे 5-स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है। गोअन क्लासिक 350 एक डबल क्रैडल फ्रेम पर बनी है जिसे टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क और डुअल शॉक एब्जॉर्बर से सस्पेंड किया गया है। बाइक में 19-इंच के फ्रंट और 16-इंच के रियर वायर-स्पोक व्हील हैं जिनमें ट्यूबलेस टायर हैं। ब्रेकिंग का काम 300 mm के फ्रंट और 270 mm के रियर डिस्क ब्रेक करते हैं, जिन्हें डुअल-चैनल ABS से मदद मिलती है। इसमें LED लाइट, ट्रिपर नेविगेशन और गियर पोजीशन इंडिकेटर लगे हैं। अभी किन मार्केट में एक्सपोर्ट हो रही भारत के साथ-साथ, गोअन क्लासिक को यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और नॉर्थ अमेरिका जैसे विदेशी मार्केट में भी भेजा जाता है। यह बाइक एक खास पेशकश है जो खास तौर पर डेवलप्ड मार्केट को टारगेट करती है और रॉयल एनफील्ड की बड़ी ग्लोबल स्ट्रेटेजी का हिस्सा है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक गोअन क्लासिक की सेल्स या एक्सपोर्ट के सही आंकड़े नहीं बताए हैं। एनफील्ड अभी दुनिया भर के 80 देशों में काम करती है। रॉयल एनफील्ड की इलेक्ट्रिक बाइक रॉयल एनफील्ड की पहली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का इंतजार सभी को है। कई बार टेस्टिंग के दौरान की फोटोज भी सामने आ चुकी है। साथ ही, कंपनी भी इसे शोकेस कर चुकी है। अब लग रहा है कि ये इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। दरअसल, ये इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल अब प्रोडक्शन के करीब आती दिख रही है। आने वाली फ्लाइंग फ्ली (FF C6) को अब चेन्नई में बिना किसी कवर के टेस्टिंग करते हुए देखा गया है, जिससे अब तक की सबसे साफ झलक मिलती है कि भारत के लिए ब्रांड की पहली EV क्या हो सकती है। साथ ही, ये नई झलक इस बात का इशारा है कि लॉन्च की तैयारियां एडवांस स्टेज में हैं।

वायरल फोटो से सनसनी: स्टीफन हॉकिंग एपस्टीन केस में घिरे, नई तस्वीर ने बढ़ाई हलचल

वॉशिंगटन जब से एपस्टीन फाइल जारी हुई हैं, तब से अमेरिका समेत दुनियाभर में हड़कंप मचा हुआ है। कई नामी-गिरामी लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। अब स्टीफन हॉकिंग की एक तस्वीर सामने आई है, जिसने हंगामा खड़ा कर दिया है। जेफरी एपस्टीन की फाइलों से सामने आई इस फोटो में स्टीफन हॉकिंग दो बिकिनी पहनी महिलाओं के बीच में हैं। हॉकिंग के बगल में लेटीं दोनों महिलाओं की पहचान उजागर नहीं हुई है। एक महिला हॉकिंग के दाएं ओर है, तो दूसरी बाएं ओर लेटी है। तीनों के हाथों में पेय पदार्थ है और स्टीफन हॉकिंग वाला ग्लास उनके अलावा महिला ने भी पकड़ रखा है। दोनो महिलाओं के चेहरे को काले रंग से ढक दिया गया है, ताकि पहचान सामने न आए। दोनों ने ब्लैक कलर की बिकिनी पहन रखी है। जेफरी एपस्टीन की फाइलों के नए बैच से सामने आई इस तस्वीर के बारे में यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि तस्वीर कब और कहां ली गई थी, लेकिन इसका खुलासा होने के बाद यह सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैलने लगी। स्टीफन के परिवार ने द पोस्ट को एक बयान में बताया, “प्रोफेसर हॉकिंग ने 20वीं सदी में फिजिक्स में सबसे बड़ा योगदान दिया, साथ ही वे मोटर न्यूरॉन बीमारी से सबसे लंबे समय तक बचने वाले व्यक्ति भी थे। यह एक ऐसी बीमारी थी जो उन्हें कमजोर कर देती थी और जिसके कारण उन्हें वेंटिलेटर, वॉइस सिंथेसाइज़र, व्हीलचेयर और चौबीसों घंटे मेडिकल केयर पर निर्भर रहना पड़ता था।” साल 2018 में हुई थी हॉकिंग की मौत बयान में आगे कहा कि उनकी तरफ से गलत व्यवहार का कोई भी इशारा गलत और बहुत दूर की कौड़ी है। हॉकिंग की 50 साल तक बीमारी से लड़ने के बाद साल 2018 में 76 साल की उम्र में मौत हो गई। वह दुनिया भर में मशहूर साइंटिस्ट्स के एक ग्रुप में शामिल थे, जिन्होंने मार्च 2006 में एपस्टीन द्वारा फंडेड और होस्ट किए गए एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था- यह उस बदनाम फाइनेंसर पर फ्लोरिडा में प्रॉस्टिट्यूशन के लिए लालच देने का आरोप लगने से पांच महीने पहले की बात है। कैरिबियन आइलैंड सेंट थॉमस पर हुई थी कॉन्फ्रेंस यह कॉन्फ्रेंस कैरिबियन आइलैंड सेंट थॉमस पर हुई थी, जो एपस्टीन के बदनाम प्राइवेट आइलैंड के पास है। बता दें कि हॉकिंग का नाम एपस्टीन की फाइलों में तब भी आया था, जब वर्जीनिया गिफ्रे ने आरोप लगाया था कि साइंटिस्ट ने एक बार वर्जिन आइलैंड्स में एक नाबालिग ग्रुप पार्टी में हिस्सा लिया था। फाइलों में मौजूद ईमेल के मुताबिक, एपस्टीन ने गिफ्रे के दोस्तों को कैश इनाम देने की पेशकश की थी, अगर वे उसके दावे को गलत साबित करने में मदद कर सकें। हालांकि, हॉकिंग पर कभी भी किसी गलत काम का ऑफिशियली आरोप नहीं लगाया गया और उनकी मौत 2019 में एपस्टीन के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार होने से पहले हुई थी।

पीटरबरो सिटी काउंसिल का फैसला विवादों में, हिंदू मंदिर सौदे पर उठा आक्रोश

लंदन पूर्वी ब्रिटेन के पीटरबरो शहर में एक परिसर में मौजूद 40 साल पुराने हिंदू मंदिर और कम्युनिटी सेंटर के बंद होने का डर है, क्योंकि स्थानीय प्राधिकारियों ने इस भवन को बेचने के फैसले को सही ठहराया है जो मंदिर के लिए किराये पर दिया गया है। भारत हिंदू समाज मंदिर की स्थापना 1986 में शहर के न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स में हुई थी और कैम्ब्रिजशायर, नॉरफॉक तथा लिंकनशायर के बड़े इलाके के 13,000 से अधिक हिंदू यहां दर्शन करने आते हैं। मंदिर प्रशासन पीटरबरो सिटी काउंसिल से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए अभियान चला रहा है। इस महीने की शुरुआत में काउंसिल कैबिनेट की बैठक में यह कहा गया कि "संपत्ति की बिक्री से करदाताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ मूल्य दिलाने की उसकी कानूनी जिम्मेदारी" है। वहीं, मंदिर ने एक बयान में कहा, "हम भारत हिंदू समाज से जुड़े भवन की बिक्री की कड़ी निंदा करते हैं। समुदाय द्वारा बनाई गई संस्था को बंद दरवाजों के पीछे बिना पारदर्शिता या सहमति के नहीं बेचा जाना चाहिए।" इसमें कहा गया, ''यह सिर्फ संपत्ति के बारे में नहीं है, बल्कि विरासत, भरोसे और जवाबदेही के बारे में है। समुदाय जवाब पाने का हक रखता है, गोपनीयता का नहीं। इस फैसले पर सवाल उठाए जाने चाहिए और इसका विरोध किया जाना चाहिए।'' हिंदू काउंसिल यूके, जो ब्रिटिश हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख संस्था है, ने लेबर पार्टी के नेतृत्व वाली पीटरबरो सिटी काउंसिल (पीसीसी) के नए प्रशासन पर मंदिर के ''सामाजिक प्रभाव मूल्य'' को पूर्व में मानने और भारत हिंदू समाज को इसका स्वामित्व हस्तांतरित करने की प्रतिबद्धता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।  

टेक्नोलॉजी में साझेदारी बढ़ा रहे भारत और इजरायल, बोले नेतन्याहू—भविष्य इसी का

यरूशलम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ दो दिवसीय दौरे के आखिरी दिन द्विपक्षीय बैठक की और कई समझौतों पर मुहर लगाई। पीएम नेतन्याहू ने बाद में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य नई तकनीक का है। नई तकनीक को लेकर नेतन्याहू ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीक और एआई की मदद से हर छात्र तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और उसे उसकी पूरी क्षमता तक आगे बढ़ने का मौका दिया जा सकता है। पहले जो परेशानियां और सीमाएं थीं, अब वे नहीं रहीं।  उन्होंने आगे कहा कि भविष्य उन्हीं देशों का है जो नई सोच और नए कार्य करने में सक्षम हैं। इजरायल और भारत दोनों ही नए विचार और तकनीक पर जोर दे रहे हैं। दोनों देश बहुत पुरानी और महान सभ्यताएं हैं, जिन्हें अपने इतिहास पर गर्व है, लेकिन वे भविष्य को बेहतर बनाने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल मिलकर यह काम और बेहतर तरीके से कर सकते हैं। अपने संबोधन की शुरुआत इजरायली बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी के दिल छूने वाले अंदाज को बयां कर की। उन्होंने कहा, "यह एक शानदार दौरा है, एक शानदार विजिट का शानदार अंत। यह छोटी लेकिन बहुत ज्यादा फलदायी और दिल को छूने वाली मुलाकात थी। मुझे लगता है कि कल नेसेट में आपके दिल को छूने वाले बयान के बाद इजरायल में सभी भावुक होंगे। मैं आपको बता सकता हूं कि तब से हमें न केवल अपने दिलों में गहराई से देखने का मौका मिला है, बल्कि हमारे दोनों देशों में मौजूद शानदार दिमागों को देखने का भी मौका मिला है।" इसके साथ ही नेतन्याहू ने अपने मित्र पीएम मोदी के काम को भी काबिल-ए-तारिफ करार दिया। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि आपकी सरकार बेहद कुशल है। आप एक मंत्री और एक राजदूत के साथ जो काम कर सकते हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। दोनों देशों के बीच जो सोच और दिलों का जुड़ाव यहां देखने को मिला है, वह आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार-से-सरकार सहयोग, जिसका लंबे समय से इंतजार था, अब नई गति पकड़ेगा और इससे दोनों देशों को एक-दूसरे से पहुंचने वाले फायदों में इजाफा होगा। इजरायली प्रधानमंत्री के बाद भारत के पीएम ने कहा कि भारत जल्द ही इजरायल के साथ पारस्परिक लाभ वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देगा। इजरायल में भी अब भारत का यूपीआई पेमेंट सिस्टम चलेगा, इसे लेकर द्विपक्षीय बैठक में समझौता हुआ है।

दिल्ली दौरे से पहले बड़ा बयान: PM कार्नी ने निज्जर मामले में भारत को दी क्लीन चिट

नई दिल्ली कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने भारत यात्रा से ठीक पहले बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कनाडा में होने वाले हिंसक अपराधों से भारत का कोई संबंध नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब हरदीप सिंह निज्जर मामले को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक कूटनीतिक तनाव बना रहा। कनाडाई अधिकारियों ने स्पष्ट कहा है कि उनके देश में होने वाले हिंसक अपराधों से भारत का कोई लेना-देना नहीं है।कनाडाई अधिकारियों ने दो टूक कहा कि यदि उन्हें लगता कि भारत कनाडा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय हस्तक्षेप कर रहा है, तो प्रधानमंत्री की यह यात्रा संभव नहीं होती। उन्होंने यह भी दोहराया कि कनाडा अपने आंतरिक मामलों में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करता। यह बयान ऐसे समय आया है जब कार्नी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दौरे की शुरुआत भारत से कर रहे हैं। निज्जर विवाद की पृष्ठभूमि खालिस्तानी समर्थक Hardeep Singh Nijjar की हत्या के बाद कनाडा ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे दोनों देशों के संबंधों में भारी खटास आ गई थी। अब कार्नी का यह बयान संकेत देता है कि ओटावा सार्वजनिक तौर पर अपने रुख को संतुलित कर रहा है और सीधे तौर पर भारत को कनाडा के अंदरूनी अपराधों से जोड़ने से बच रहा है। क्यों बिगड़े थे संबंध ? बता दें कि कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री Justin Trudeau ने सितंबर 2023 में कनाडाई संसद में बयान दिया था कि खालिस्तानी समर्थक Hardeep Singh Nijjar की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों की “संभावित संलिप्तता” के विश्वसनीय आरोप मौजूद हैं। निज्जर की जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भारत सरकार ने ट्रूडो के आरोपों को “बेतुका” और “राजनीति से प्रेरित” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। नई दिल्ली ने कहा कि कनाडा ने कोई ठोस सबूत साझा नहीं किया है। भारत ने कनाडा पर अपने देश में चरमपंथी तत्वों को पनाह देने का भी आरोप लगाया। व्यापार को दी जा रही प्राथमिकता पिछले कुछ वर्षों में कथित विदेशी हस्तक्षेप और कूटनीतिक तनाव के कारण भारत-कनाडा संबंधों में ठंडापन आया था। लेकिन अब कनाडा व्यापार और आर्थिक साझेदारी को प्राथमिकता देता नजर आ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, भारत सरकार के साथ वरिष्ठ स्तर पर “परिपक्व और ठोस” बातचीत हुई है और आगे की सार्थक चर्चा के लिए आधार मौजूद है। बिगड़े रिश्तों को सुधारने की कोशिश आर्थिक दृष्टि से भारत और कनाडा के संबंध अहम हैं। वर्तमान में भारत, कनाडा का सातवां सबसे बड़ा वस्तु एवं सेवा व्यापार भागीदार है।कनाडाई सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार 21 अरब डॉलर से अधिक है। विश्लेषकों का मानना है कि कार्नी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच वर्षों से चली आ रही कूटनीतिक परेशानियों को कम करने और आर्थिक संबंधों को नई गति देने का प्रयास है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और मार्क कार्नी के बीच होने वाली संभावित बातचीत को रिश्तों के भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है।

ईरानी विदेश मंत्री का सख्त संदेश: खामेनेई के बाद भी कायम रहेगा सत्ता ढांचा, ट्रंप को दो टूक जवाब

वाशिंगटन अमेरिकी मीडिया में Donald Trump के सामने Ali Khamenei को निशाना बनाने का विकल्प रखे जाने की खबर पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि सुप्रीम लीडर की हत्या से कुछ नहीं बदलेगा, क्योंकि व्यवस्था व्यक्ति नहीं बल्कि सिस्टम पर आधारित है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि देश की इस्लामिक शासन व्यवस्था किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। उन्होंने बताया कि यदि सुप्रीम लीडर Ali Khamenei को हटाने या मारने की कोशिश की जाती है, तब भी सिस्टम के भीतर तय प्रक्रिया से नया नेता चुना जाएगा। उन्होंने 1989 में Ruhollah Khomeini की मृत्यु का उदाहरण देते हुए कहा कि 24 घंटे के भीतर नए सुप्रीम लीडर का चयन कर लिया गया था। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि Donald Trump के सामने खामेनेई को निशाना बनाने का विकल्प भी रखा गया। हालांकि, ईरान ने इसे “सिस्टम को न समझने वाली सोच” बताया। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ी हुई है और परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव चरम पर है। ईरान ने कहा है कि वह “युद्ध और शांति दोनों विकल्पों के लिए तैयार” है, लेकिन वह संतुलित परमाणु समझौते की उम्मीद भी रखता है। लेबनान के शिया संगठन Hezbollah ने खामेनेई को नुकसान पहुंचाने की कोशिश को “रेडलाइन” बताया है। समूह ने संकेत दिया है कि यदि सुप्रीम लीडर पर हमला हुआ तो वह सैन्य कार्रवाई में शामिल हो सकता है।  

UN मंच पर भारत का पलटवार: IMF लोन से ज्यादा J&K पर खर्च, पाकिस्तान को आईना

संयुक्त राष्ट्र भारतीय डिप्लोमैट अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में जोरदार लताड़ लगाई। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि पाकिस्तान सपनों की दुनिया में है। हमारे जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए बजट पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष बेलआउट से भी बड़ा है। ऐसा पहली बार नहीं है जब वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने राग अलाप रहा हो। अक्सर पाकिस्तान एक ही मुद्दे को लेकर भारत पर निशाना साधने की कोशिश करता है। ताजा मामले में जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का राग अलापा, तो यूएन के मंच पर भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने जमकर क्लास लगाई। पाकिस्तान को जवाब देते हुए अनुपमा सिंह ने कहा, "भारत, पाकिस्तान और ओआईसी की हाई-लेवल मीटिंग में भारत के बारे में कही गई बातों के जवाब में अपने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर है। हम इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। ओआईसी, पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को दोहराकर, सिर्फ यह दिखाता है कि उसने खुद को एक सदस्य के कब्जे में कितना गहराई से आने दिया है और खुद को एक देश की राजनीतिक मजबूरियों के लिए एक ईगो चैंबर बना लिया है। पाकिस्तान के लगातार प्रोपेगेंडा से अब जलन की बू आ रही है।" भारतीय अधिकारी ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा, "शायद पाकिस्तान को यह यकीन नहीं हो रहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट आईएमएफ से मांगे गए हालिया बेलआउट पैकेज से दोगुने से भी ज्यादा है। आखिर में, पाकिस्तान की लगातार स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म के जरिए इलाके को अस्थिर करने की कोशिशों के बावजूद, जम्मू-कश्मीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक तौर पर आगे बढ़ रहा है। पाकिस्तान के लिए अच्छा होगा कि वह ऐसे प्लेटफॉर्म पर दिखावा करने के बजाय अपने बढ़ते अंदरूनी संकट को ठीक करने पर ध्यान दे। दुनिया जरूर उसके दिखावे को समझ सकती है।" पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देते हुए अनुपमा सिंह ने कहा, "हम ऐसे प्रोपेगेंडा को बढ़ावा नहीं देना चाहते, लेकिन हम इसे फैक्ट्स के साथ खत्म करने के लिए कुछ बातें जरूर कहेंगे। जम्मू और कश्मीर भारत का एक जरूरी और अटूट हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान की कोई भी मनगढ़ंत बातें या प्रोपेगेंडा इस पक्की बात को नहीं बदल सकता कि जम्मू-कश्मीर का भारत में शामिल होना पूरी तरह से वैध और पक्का था और यह भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक था।" पीओके को लेकर पाकिस्तान पर पलटवार करते हुए भारतीय अधिकारी ने कहा, "इस इलाके से जुड़ा एकमात्र विवाद पाकिस्तान का भारतीय इलाकों पर गैर-कानूनी कब्जा है। हम पाकिस्तान से इन इलाकों को खाली करने की अपील करते हैं, जिन पर उसने जबरदस्ती कब्जा किया हुआ है। ऐसे देश से लोकतंत्र पर भाषण सुनना वाकई मुश्किल है, जहां की सरकारें शायद ही कभी अपना कार्यकाल पूरा करती हैं।" उन्होंने कहा, "ये बातें खोखली लगती हैं। जम्मू-कश्मीर में आम चुनाव और विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग इस बात का सबूत है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने पाकिस्तान की फैलाई आतंकवाद और हिंसा की सोच को नकार दिया है और विकास और लोकतंत्र के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। पिछले साल जम्मू-कश्मीर में दुनिया के सबसे ऊंचे पुल चिनाब रेल ब्रिज की शुरुआत हुई है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान जरूर भ्रम में है।"

नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: करोड़ों की हशीश-गांजा बरामद

जगदलपुर ओडिशा पुलिस ने नशे के कारोबार पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए करीब 200 करोड़ रुपये की हशीश और पांच करोड़ रुपये का गांजा जब्त किया है। यह कार्रवाई कोरापुट जिले के झोलापुट जलाशय के पास जंगलों के बीच बने एक गुप्त डिपो में की गई। ओडिशा पुलिस के अनुसार, देश में यह पहली बार है जब एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में गांजा और उससे तैयार की गई हशीश बरामद हुई है। जांच में सामने आया है कि नशे का यह डिपो ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर रणनीतिक रूप से तैयार किया गया था, ताकि पुलिस की निगरानी से बचते हुए कच्चे माल और तैयार उत्पाद की आवाजाही हो सके। यहां गांजे से तेल निकालकर हशीश तैयार की जा रही थी, जिसे देश के कई राज्यों में सप्लाई करने के लिए पूरा नेटवर्क खड़ा किया गया था। इस मामले में हरियाणा से पहुंचे दो पैडलरों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि डिपो चलाने वाले मुख्य आरोपितों की तलाश जारी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बस्तर से सटे ओडिशा के मलकानगिरी और कोरापुट जिले लंबे समय से गांजा उत्पादन के लिए कुख्यात रहे हैं। दुर्गम पहाड़ी और जंगल इलाकों में गांजे की फसल उगाई जाती है, जिसे स्थानीय नेटवर्क के जरिए देशभर में भेजा जाता है। इस सप्लाई चेन में जगदलपुर एक प्रमुख ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है, जहां से माल मध्य भारत और उत्तर भारत के बाजारों तक पहुंचाया जाता है। हशीश क्या है? हशीश गांजे से निकाले गए रेज़िन (तेल) से तैयार की जाने वाली एक गाढ़ी और महंगी नशीली वस्तु है। इसकी मात्रा कम होती है, लेकिन नशे की तीव्रता अधिक होती है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत काफी ऊंची होती है। गांजे की तुलना में इसे छिपाकर ले जाना आसान होता है, यही वजह है कि तस्कर अब गांजे को प्रोसेस कर हशीश में बदलने लगे हैं।  

बलूचिस्तान में बढ़ा तनाव: ISI ने मुख्यालय के आसपास चलाया बुलडोजर, रात का कर्फ्यू सख्त

इस्लामाबाद पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान के नुश्की जिले के काजियाबाद इलाके में आईएसएआई मुख्यालय के पास कई घर गिरा दिए हैं। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इन घरों में रहने वाले लोगों को कई दिन पहले ही नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें कहा गया था कि वे घर छोड़ दें। इन नोटिस में लिखा गया था कि तय समयसीमा के भीतर यदि ये लोग घरों से बाहर नहीं निकले तो इमारतों को जमींदोज कर दिया जाएगा। बीते कुछ दिनों में पाकिस्तानी सेना ने कई घरों को गिरा दिया है। इन घरों को विस्फोटक और अन्य भारी उपकरण लगाकर गिराया गया है। माना जा रहा है कि आईएसआई के पास बनी इन इमारतों से हमला होने का खतरा था। इसलिए उन्हें गिरा दिया गया है। कहा जा रहा है कि जिन इमारतों को गिराया गया है, उनमें से एक मकान बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के नेता बशीर जेब बलोच का पैतृक आवास है। इसके अलावा भी कई राजनीतिक लोगों के घरों को गिराया गया है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के ऑपरेशन हेरॉफ के बाद पाकिस्तान ने यह कार्रवाई की है। माना जा रहा है कि इस इलाके में पाकिस्तान को बलूचों से डर सता रहा था। इसी के चलते उसने उनके घर तक गिरा दिए हैं। यही नहीं बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट में तो कहा गया है कि कच्छ और ग्वादर जैसे इलाकों में भी इमारतों को जमींदोज किया गया है। हर दिन शाम 6 बजे के बाद लगेगा कर्फ्यू नुश्की के काजियाबाद के लोगों का कहना है कि प्रशासन ने हर दिन शाम को 6 बजे के बाद यहां कर्फ्यू लगाने का फैसला भी लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार सुरक्षा बलों ने चेतावनी दी है कि जब तक यहां के लोग पाकिस्तान के समर्थन में रैली नहीं निकालते हैं और अपने घरों में पाकिस्तानी झंडा नहीं फहराते हैं। तब तक कर्फ्यू हर दिन लगता रहेगा। वित्तीय संस्थानों पर भी यह बात लागू की गई है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने 31 जनवरी को कई शहरों में ऑपरेशन हेराफ लॉन्च किया था। इसमें उसने बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था। उसके बाद ही पाकिस्तान ने यह ऐक्शन लिया है। पूरे नुश्की शहर को ही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने घेरा था बता दें कि एक साथ कई शहरों में हमले करके पाकिस्तान को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने करारा झटका दिया है। उसके बाद से ही पाकिस्तानी सरकार और सेना बौखलाए हुए हैं। दरअसल बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने हमलों के दौरान नुश्की शहर को ही घेर लिया था। माना जा रहा है कि इसी के चलते पाकिस्तानी सेना ने यह ऐक्शन लिया है। इसके अलावा आईएसआई के मुख्यालय पर भी हमले का डर है।