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रूस का बड़ा बयान: तेल के मुद्दे पर भारतीय दोस्त कभी नहीं बदलेंगे

नई दिल्ली रूस ने कहा है कि इस बात पर भरोसे की कोई वजह नहीं है कि 'दोस्त' भारत अपना रुख बदल सकता है। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा। इससे पहले रूस ने कहा था कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। ट्रंप ने कहा है कि भारत अब अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया झाकारोवा ने कहा कि इस बात पर भरोसा करने का कोई कारण नहीं है कि भारत ऐसा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति का किसी स्वतंत्र देश को यह बताना कि वह किसके साथ व्यापार कर सकता है, कोई नई बात नहीं है। रूस के पास इस बात को मानने का कोई कारण नहीं है कि हमारे भारतीय मित्रों ने अपना रुख बदल लिया है।' उन्होंने कहा, 'हम इस बात से सहमत है कि भारत का रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। हम भारत में हमारे साझेदारों के साथ इस क्षेत्र में करीबी सहयोग को जारी रखने के लिए तैयार हैं।' रूस बोला- भारत स्वतंत्र है क्रेमलिन ने  कहा कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और विविधता लाने के उसके फैसले में कुछ भी नया नहीं है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'हम और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि रूस, भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला एकमात्र देश नहीं है। भारत हमेशा से अन्य देशों से भी ये उत्पाद खरीदता रहा है, इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता।' इससे एक दिन पहले पेसकोव ने स्पष्ट किया था कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। रूस के नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के प्रमुख विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने कहा कि भारतीय तेल शोधन संयंत्र रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। उन्होंने तकनीकी कारण बताते हुए कहा, 'अमेरिका जिस 'शेल ऑयल' का निर्यात करता है, वह हल्के श्रेणी का होता है। इसके विपरीत, रूस भारी और सल्फर युक्त 'यूराल्स' तेल की आपूर्ति करता है। भारतीय तेल शोधन संयंत्रों के ढांचे के अनुसार, उन्हें अमेरिकी तेल को अन्य श्रेणी के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। ऐसे में रूस के तेल को पूरी तरह अमेरिका से बदलना संभव नहीं होगा।'

SC का ममता सरकार को झटका, 31 मार्च तक कर्मचारियों को DA भुगतान करने का निर्देश

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक राहत लेकर आया है। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने ममता बनर्जी सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए 31 मार्च 2026 तक महंगाई भत्ते (DA) के कुल बकाया का 25 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दिया है। यह आदेश उस दिन आया है जब बंगाल विधानसभा में लेखानुदान पेश किया जाना है। इससे राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित DA बकाया का एक-चौथाई हिस्सा 31 मार्च तक चुकाया जाए। शेष 75 प्रतिशत बकाया राशि के भुगतान का तरीका और समय सीमा तय करने के लिए अदालत ने एक उच्च स्तरीय चार सदस्यीय समिति बनाने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि पिछले साल 16 मई को कोर्ट ने तीन महीने के भीतर यह भुगतान करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार ने फंड की कमी का हवाला देकर 6 महीने की मोहलत मांगी थी। कोर्ट ने बार-बार मिल रही तारीखों पर कड़ा रुख अपनाते हुए अब अंतिम समय सीमा तय कर दी है। DA खैरात नहीं, अधिकार है: शुभेंदु अधिकारी विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों की जीत बताया। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी आज गलत साबित हुई हैं। सालों तक उन्होंने दावा किया कि DA कोई अधिकार नहीं है, बल्कि एक दान है। आज शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह कर्मचारियों का हक है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों को उनके हक से वंचित करने के लिए नामी वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन अंततः न्याय की जीत हुई।" केंद्र और राज्य के बीच बढ़ता अंतर पश्चिम बंगाल में DA को लेकर विवाद काफी गहरा है। वर्तमान स्थिति यह है कि 1 अप्रैल 2025 से बंगाल के कर्मचारियों का DA मूल वेतन का 18 प्रतिशत तय किया गया था। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले DA और राज्य सरकार के कर्मचारियों के बीच अब भी करीब 37 से 40 प्रतिशत का बड़ा अंतर बना हुआ है। आपको बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों को 55 प्रतिशत डीए मिलता है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, इसलिए राज्य सरकार ने वर्तमान में केवल लेखानुदान पेश करने का निर्णय लिया है। पूर्ण बजट नई सरकार के गठन के बाद आएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने ममता सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि 25% बकाया चुकाने के लिए राज्य को हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा।

जैन दर्शन में आगम प्रमाण विमर्श

नई दिल्ली जैनदर्शन विभाग , श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय  में प्रो.अनेकान्त कुमार जैन जी के कुशल निर्देशन में 'जैनदर्शने आगमप्रमाणविमर्श:' विषय पर महत्त्वपूर्ण शोध कार्य करने के लिए शोध छात्र प्रशांत जैन की मौखिक परीक्षा दिनाँक 4/2/26 को सकुशल सम्पन्न हुई । इस अवसर पर बाह्य परीक्षक प्रो आनंद प्रकाश त्रिपाठी जी,तथा संकाय प्रमुख प्रो.अरावमुदन जी,विभागाध्यक्ष प्रो वीरसागर जैन , रशियन स्कॉलर डॉ नतालिया तथा संकाय के अनेक विद्वानों ने विषय पर अनेक जिज्ञासाएं रखीं तथा गहन शास्त्रीय चर्चाएं हुईं । आदरणीय कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक जी सहित सभी ने इस स्तरीय शोध कार्य की प्रशंसा की , प्रशांत जैन को आशीर्वाद दिया और उसके उज्जवल भविष्य की कामना की ।

जैनदर्शन विभाग में आचार्य कुंदकुंद जयंती का आयोजन

नई दिल्ली श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के जैनदर्शन विभाग द्वारा वसंत पंचमी पर्व के शुभ अवसर पर आचार्य कुंदकुंद जयंती का आयोजन श्रद्धा एवं विद्वत्तापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।          इस अवसर पर जैनदर्शन की दार्शनिक परंपरा और आचार्य कुंदकुंद के योगदान पर सारगर्भित चर्चा की गई। कार्यक्रम का संयोजन करते हुए प्रो. अनेकांत कुमार जैन जी ने कहा कि आचार्य कुन्दकुन्द भारतीय ज्ञान परंपरा के स्तंभ थे ।  उनकी कृतियों में ज्ञान की वह क्रांति थी कि अनेक लोग जिन्होंने उनका स्वाध्याय किया , इस परंपरा में दीक्षित हो गए ।       मंगलाचरण का सस्वर पाठ शोधार्थी श्रुति जैन एवं अंजलि जैन ने किया,जिसमें उन्होंने आचार्य कुन्दकुन्द के सभी ग्रंथों के मंगलाचरण का एक गुलदस्ता प्रस्तुत किया । जिससे कार्यक्रम का शुभारंभ आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में देश-विदेश में सुविख्यात विद्वान तथा जैनदर्शन के वरिष्ठ मनीषी विभागाध्यक्ष प्रो. वीर सागर जैन जी ने आचार्य कुंदकुंद के अमूल्य योगदान पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने आचार्य कुंदकुंद को जैन दर्शन का आधार-स्तंभ बताते हुए कहा कि उन्होंने ने जैन दर्शन के मूल तत्वज्ञान की रक्षा की और आत्मा-केंद्रित दर्शन को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। एक शिलालेख में उल्लेख मिलता है कि कुंदकुंदाचार्य वर्धमान चारित्र के धनी थे और वहीं से पञ्चम स्वर्ग में लौकान्तिक देव के रूप में उत्पन्न हुए। उन्होंने यह भी बताया कि आचार्य कुंदकुंद साक्षात विदेह क्षेत्र गए थे, जहाँ उन्होंने उस समय विद्यमान तीर्थंकरों के दर्शन किए, और सात दिन वहाँ निवास किया तथा समवसरण में उनके प्रवचन सुने, यह प्रसंग उनके उच्च आध्यात्मिक स्तर और तपस्वी जीवन का प्रमाण है। समयसार ग्रंथ पर उन्होंने गहन चर्चा करते हुए उसकी गाथा 3 और गाथा 320 का सार प्रस्तुत किया ।कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी ज़ेबा अफ़रीन द्वारा किया गया। उन्होंने संक्षिप्त एवं प्रभावपूर्ण शब्दों में शिक्षकगण एवं सभी उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर आचार्य कुन्दकुन्द आधारित क्विज का संचालन शोधार्थी श्रुति जैन ने किया । वसंत पंचमी के इस पावन अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम जैन दर्शन की ज्ञान-परंपरा को सजीव करता हुआ विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को और अधिक सुदृढ़ बनाने वाला सिद्ध हुआ।

‘पीएम मोदी के साथ कुछ भी हो सकता था’, स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा में किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली  संसद के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है जब लोकसभा अध्यक्ष ने खुद यह स्वीकार किया है कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और सम्मान को सदन के भीतर ही खतरा था. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने ही कल (बुधवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से रोका था. बिरला ने आशंका जताई कि अगर पीएम मोदी कल सदन में आते, तो उनके साथ कोई “अप्रत्याशित और अप्रिय घटना” घट सकती थी. स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि उन्हें खुफिया जानकारी और सदन के भीतर के हालात से यह इनपुट मिला था कि कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के आसन (कुर्सी) तक जाकर हंगामा करने और किसी अनहोनी को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा, “मेरे पास जानकारी आई कि कांग्रेस के सांसद पीएम के आसन पर जाकर अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. मुझे डर था कि प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी हो सकता है. अगर वह घटना हो जाती, तो वह बेहद अप्रिय होती और लोकतंत्र के लिए काला दिन साबित होती.” ‘मैंने पीएम से आग्रह किया: आप मत आइए’ ओम बिरला ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा, “इस संभावित खतरे और टकराव को टालने के लिए मैंने खुद पीएम से आग्रह किया कि वो सदन में न आएं.” बता दें क‍ि बुधवार शाम को विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम मोदी की खाली कुर्सी को घेर लिया था, जिसके बाद बीजेपी ने आरोप लगाया था कि विपक्ष पीएम पर ‘हमला’ करना चाहता था. अब स्पीकर के इस बयान ने बीजेपी के उन आरोपों की पुष्टि कर दी है कि कल सदन के भीतर का माहौल प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से सामान्य नहीं था. बीजेपी ने पूछा- क्‍या पीएम पर हमला करने का इरादा था ? बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और बृजमोहन अग्रवाल ने विपक्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंध लगाने और उन पर ‘हमला’ करने की साजिश का बेहद गंभीर आरोप लगाया था. मनोज तिवारी ने तीखा सवाल किया कि विपक्षी सांसद हार की बौखलाहट में पीएम की कुर्सी तक क्यों आए? क्या इनका इरादा पीएम पर हमला करना था? वहीं, बृजमोहन अग्रवाल ने इसे कांग्रेस की ‘प्री-प्लान’ साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि महिला सांसदों को ढाल बनाकर पीएम को घेरना और भाषण से रोकना न केवल सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि पूरे सदन की अवमानना है, जिस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

चुनावी बजट: महिलाओं को ₹500 अतिरिक्त, गिग वर्कर्स की भी होगी मदद, ममता सरकार का बड़ा ऐलान

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ रुपये का अंतरिम बजट पेश किया. इस बजट में सबसे बड़ा ऐलान ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को लेकर हुआ है. राज्य की 2.42 करोड़ महिलाओं के लिए मासिक सहायता राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. यह बढ़ी हुई राशि फरवरी 2026 से ही लागू हो जाएगी. इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. क्या है बंगाल बजट की अन्य बड़ी घोषणाएं? पश्चिम बंगाल बजट में केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों पर भी फोकस किया गया है. गिग वर्कर्स यानी जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को अब ‘स्वास्थ्य साथी’ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा. इसके अलावा आंगनवाड़ी वर्कर्स और सहायिकाओं के मानदेय में अप्रैल 2026 से 1000 रुपये की वृद्धि की जाएगी. बेरोजगारी दूर करने के लिए युवाओं को 1500 रुपये प्रति माह का भत्ता देने की नई योजना भी शुरू होगी. ‘लक्ष्मी भंडार’ के बदले समीकरण लक्ष्मी भंडार योजना ममता बनर्जी की सबसे सफल योजनाओं में से एक मानी जाती है. वर्तमान में इसमें सामान्य वर्ग को 1000 और एससी-एसटी वर्ग को 1200 रुपये मिलते हैं. अब 500 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी. जानकारों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं के भारी मतदान ने एनडीए की जीत तय की थी. इसी पैटर्न को देखते हुए बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. महिलाओं को लुभाने की मची होड़ आजकल राजनीति में महिलाएं नई ‘किंगमेकर’ बनकर उभरी हैं. पश्चिम बंगाल ही नहीं, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी यही ट्रेंड दिख रहा है. महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के तहत 2.5 करोड़ महिलाओं को दिसंबर और जनवरी की किस्त एक साथ देने का फैसला किया है. तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने भी ‘कलैग्नार मगलिर उरीमई थिट्टम’ योजना का दायरा बढ़ा दिया है. सभी पार्टियां जानती हैं कि महिलाओं का वोट जीत की गारंटी है.

मेघालय में कोयला खदान में भीषण धमाका, 10 मजदूरों की दर्दनाक मौत

 शिलॉन्ग मेघालय के ताशखाई इलाके में स्थित एक कोयला खदान में भीषण धमाका होने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुर्घटना में कम से कम 10 मजदूरों की मौत होने की जानकारी सामने आई है. हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया. जानकारी के मुताबिक, ताशखाई की कोयला खदान में अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिसके कारण खदान के अंदर काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए. धमाका इतना तेज था कि खदान के अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया. आशंका जताई जा रही है कि मृतकों में सभी मजदूर असम के रहने वाले थे, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है.   स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृत मजदूरों में से एक असम के कटिगारा क्षेत्र के बिहारा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है. हादसे की सूचना मिलते ही मेघालय पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया. खदान के अंदर फंसे अन्य मजदूरों की तलाश के लिए सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. प्रशासन ने आसपास के इलाके को घेरकर सुरक्षा बढ़ा दी है, ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए. अधिकारियों का कहना है कि धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. शुरुआती तौर पर खदान में गैस रिसाव या तकनीकी खामी को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. इस हादसे के बाद मजदूरों की सुरक्षा और अवैध खनन गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं, मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने की बात भी कही गई है.

रूस-अमेरिका परमाणु संधि खत्म, 50 साल बाद कोई समझौता नहीं; क्या इस फैसले से बढ़ेगा वैश्विक खतरा?

मॉस्को  दुनिया को हिला देने वाली एक खबर सामने आई है. अमेरिका और रूस के बीच दशकों से चले आ रहे परमाणु हथियार नियंत्रण का सबसे अहम समझौता अब खत्म हो गया है. यह वही संधि थी जिसने दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु ताकतवर देशों के हथियारों की सीमा तय कर रखी थी. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. समझौता खत्म होने के बाद दुनिया में टेंशन बढ़ गई है. रूस के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा सुरक्षा अधिकारी दिमित्री मेदवेदेव ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि इस संधि का खत्म होना दुनिया को तबाही की ओर धकेल सकता है और ‘डूम्सडे क्लॉक’ यानी मानव विनाश का खतरा तेज हो सकता है. CNN की रिपोर्ट के अनुसार शीत युद्ध के दौर के बाद से ही रूस अपनी सुपरपावर छवि को बनाए रखने की कोशिश करता रहा है. सोवियत संघ के टूटने के बाद रूस का वैश्विक प्रभाव कमजोर जरूर हुआ लेकिन परमाणु ताकत के कारण उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका बनी रही. साल 2010 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति मेदवेदेव ने न्यू START संधि पर हस्ताक्षर किए थे. इस संधि के तहत दोनों देशों को अधिकतम 1550 तैनात परमाणु हथियार रखने की अनुमति थी. यह समझौता वैश्विक शांति के लिए बेहद अहम माना गया था. लेकिन अब इसके खत्म होने के साथ ही दुनिया एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश करती नजर आ रही है. सबसे पहले- New START संधि क्या है? न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START) परमाणु हथियारों की होड़ को रोकने के लिए 2010 में किया गया एक ऐतिहासिक समझौता था। 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने इस पर साइन किए थे। यह संधि 2011 में लागू हुई थी। इसका उद्देश्य उन रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करना था, जो किसी देश के प्रमुख राजनीतिक, सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होते हैं। तैनात हथियार वे माने जाते हैं जो सक्रिय सेवा में हों और तुरंत इस्तेमाल किए जा सकें। संधि कैसे बनी? पूरी कहानी परमाणु हथियारों पर रोक लगाने की कोशिश शीत युद्ध के समय से चली आ रही है। 1969 से अमेरिका और सोवियत संघ (बाद में रूस) ने कई दौर की बातें कीं।     1970 के दशक में SALT समझौते: हथियारों की संख्या पर सीमा लगाई, लेकिन कम नहीं किए।     1991 में START I: पहली बड़ी कटौती, जॉर्ज बुश और गोर्बाचेव के समय। हजारों हथियार कम हुए।     1993 में START II: और कटौती, लेकिन पूरी तरह लागू नहीं हुई।     2002 में SORT (मॉस्को संधि): बुश और पुतिन ने वारहेड्स 1,700-2200 तक कम करने पर सहमति, लेकिन जांच-पड़ताल कम थी। फिर आई न्यू स्टार्ट। 2009 में बराक ओबामा (अमेरिका) और दिमित्री मेदवेदेव (रूस) ने बात शुरू की। 8 अप्रैल 2010 को प्राग (चेक गणराज्य) में हस्ताक्षर हुए। अमेरिकी सीनेट ने 2010 में मंजूरी दे दी थी। रूसी संसद ने 2011 में दी। आखिरकार संधि 5 फरवरी 2011 से लागू हुई। इसका मूल समय 10 साल तक ही था। हालांकि इसे एक बार 5 साल बढ़ाने का प्रावधान भी था, जो 2021 में जो बाइडेन ने इस्तेमाल किया और 2026 तक बढ़ा दिया। 2021 के बाद क्या हुआ? 2023 में रूस ने संधि में हिस्सा रोक दिया जैसे निरीक्षण बंद कर दिए, लेकिन सीमाओं का पालन करने का दावा जारी रखा। वजह बताई कि यूक्रेन युद्ध में अमेरिका मदद कर रहा है। आखिरकार आज (5 फरवरी 2026) संधि खत्म हो गई। अब दोनों देश स्वतंत्र हैं – जितने चाहें हथियार बढ़ा सकते हैं। रूस बोला- अब परमाणु हथियारों की सीमा से मुक्त रूस ने कहा है कि वह अब अमेरिका के साथ रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करने वाली न्यू स्टार्ट संधि से अब बंधा नहीं है, क्योंकि यह संधि गुरुवार को समाप्त हो रही है। इस बयान से वैश्विक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए “गंभीर क्षण” करार दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि अमेरिका ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें दोनों देशों से 12 महीने तक संधि के तहत मिसाइलों और तैनात परमाणु वारहेड्स की सीमाओं का पालन जारी रखने की बात कही गई थी। मंत्रालय ने कहा- हम मानते हैं कि न्यू स्टार्ट संधि के पक्षकार अब इसके तहत किसी भी दायित्व या पारस्परिक घोषणाओं से बंधे नहीं हैं। हमारी बातों को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है, जो गलत और अफसोसजनक है। संधि खत्म होने के संभावित असर संधि की अवधि समाप्त होने के साथ ही रूस और अमेरिका दोनों के लिए मिसाइलों की संख्या बढ़ाने और सैकड़ों अतिरिक्त रणनीतिक वारहेड्स तैनात करने का रास्ता खुल जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करना तकनीकी और लॉजिस्टिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा और इसमें समय लगेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले संकेत दिए थे कि वे संधि के विस्तार पर विचार कर सकते हैं, लेकिन जनवरी में उन्होंने कहा था कि अगर यह खत्म होती है तो कोई बेहतर समझौता किया जाएगा। ट्रंप ने भविष्य की किसी भी परमाणु वार्ता में चीन को शामिल करने की भी बात कही है। परमाणु हथियारों का मौजूदा संतुलन रूस और अमेरिका मिलकर दुनिया के 90 प्रतिशत से अधिक परमाणु हथियारों का भंडार रखते हैं। जनवरी 2025 तक रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 परमाणु वारहेड्स थे। फ्रांस और ब्रिटेन के पास क्रमशः 290 और 225 वारहेड्स हैं, जबकि चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार माने जाते हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि न्यू स्टार्ट के खत्म होने से एक नई हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है, जिसमें चीन के परमाणु विस्तार का भी असर पड़ेगा। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा के अनुसार सबसे अधिकतम स्थिति में दोनों देश अपनी तैनात परमाणु क्षमताओं को लगभग दोगुना कर सकते हैं। पोप लियो ने भी चेताया संधि की समाप्ति से पहले, पोप लियो ने दोनों देशों से अपील की कि वे हथियारों पर लगी सीमाओं को न … Read more

राष्‍ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में PM ने नहीं दिया रिप्‍लाई, लोकसभा से पारित हुआ भाषण, 2004 के बाद पहली बार

 नई दिल्ली  लोकसभा के लिए गुरुवार 5 फरवरी 2026 का दिन अप्रत्‍याशित रहा. प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण को लोकसभा से पारित कर दिया गया. साल 2004 के बाद यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही राष्‍ट्रपति के अभिभाषण को लोकसभा से पारित कर दिया गया है. इससे पहले जून 2004 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हंगामे की वजह से राष्‍ट्रपति के अभिभाषण पर जारी बहस में हिस्‍सा नहीं ले सके थे. उनको अपनी बात कहने का मौका नहीं मिला था. उनकी स्‍पीच के बिना ही राष्‍ट्रपति के अभिभाषण को लोकसभा से पारित कर दिया गया था. बजट सत्र के दौरान संसद में जारी गतिरोध के बीच गुरुवार 5 फरवरी 2026 को लोकसभा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त सत्र में दिए गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही पारित कर दिया. यह 2004 के बाद पहली बार हुआ है, जब सदन ने परंपरा से हटकर बिना प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया के प्रस्ताव को मंजूरी दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार 4 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, लेकिन विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही. हालात को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. इसके बाद गुरुवार को स्‍पीकर ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पढ़कर सुनाया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, हालांकि इस दौरान भी विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी. लोकसभा में भारी हंगामे के चलते आज भी कार्यवाही स्थगित हुई है। इसके साथ ही अब तय हो गया है कि लोकसभा में पीएम नरेंद्र मोदी का भाषण नहीं होगा। वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देने वाले थे, लेकिन हंगामे के चलते ऐसा नहीं हो सका। उनके भाषण के लिए बुधवार शाम 5 बजे का समय तय था, लेकिन कांग्रेस समेत विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। अब उनके भाषण के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है। 2004 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। 2004 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह भी अपना भाषण नहीं दे सके थे। इस बार कुल तीन सांसद ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा में अपनी स्पीच पूरी कर सके। राष्ट्रपति की ओर से संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया जाता है और फिर उस पर परिचर्चा होती है। इस चर्चा के अंत में पीएम के जवाब देने की परंपरा रही है, लेकिन 2004 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है, जब प्रधानमंत्री के बिना ही राष्ट्रपति के भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होगा। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष के सुझावों को सदन में रखा, जिन्हें खारिज कर दिया गया। इसके बाद स्पीकर ने धन्यवाद प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा और उसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। हालांकि इस बीच लोकसभा सांसदों की ओर से नारेबाजी जारी रही। हंगामे के बीच ही धन्यवाद प्रस्ताव मंजूर, कार्य़वाही करनी पड़ी स्थगित हंगामे के चलते स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी का आज शाम को राज्यसभा में भाषण होने वाला है। जानकारी मिल रही है कि इस दौरान भी विपक्ष की ओर से हंगामा हो सकता है। दरअसल वह लोकसभा में बुधवार को ही बोलने वाले थे, लेकिन विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते ऐसा नहीं हो सका। विपक्षी नेताओं का कहना था कि यदि नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया गया है तो फिर पीएम को भी अवसर नहीं देंगे। राहुल गांधी को लोकसभा में भाषण से क्यों रोका गया था? गौरतलब है कि राहुल गांधी पूर्व आर्मी चीफ एम.एम नरवणे की एक पुस्तक का हवाला देते हुए लोकसभा में बोलना चाह रहे थे। यह पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई है और इसके चलते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और होम मिनिस्टर अमित शाह ने इस पर आपत्ति जताई थी। अंत में उन्हें इस पर भाषण देने से रोक दिया गया था। इसी को लेकर कांग्रेस हमलावर है और उसका कहना है कि यह विपक्ष के नेता के अधिकार का हनन है। तब से ही विपक्ष का कहना था कि हम पीएम मोदी को भी भाषण नहीं देने देंगे और अंत में प्रधानमंत्री की स्पीच के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया। लोकसभा में नहीं थमा हंगामा गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में INDIA गठबंधन के सांसदों ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए, जिसके चलते सदन को फिर स्थगित करना पड़ा. विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया गया, जबकि वह 2020 के चीन गतिरोध पर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमए नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देना चाहते थे. सरकार और विपक्ष के बीच टकराव मंगलवार को उस समय और तेज हो गया, जब कांग्रेस के आठ सांसदों को अनुशासनहीन व्यवहार के चलते बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया. इसके बाद से विपक्षी दल लगातार सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे विधायी कामकाज प्रभावित हुआ है. 21 साल पुरानी याद ताजा संसदीय परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब एक अहम प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें सरकार अपनी प्राथमिकताओं और विपक्ष के सवालों का समग्र उत्तर देती है. ऐसे में प्रधानमंत्री के बिना जवाब दिए प्रस्ताव का पारित होना असाधारण माना जा रहा है. इस घटनाक्रम के बीच 2004 की यादें भी ताजा हो गई हैं, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने से रोका गया था. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर 10 मार्च 2005 का एक वीडियो साझा किया, जिसमें डॉ. सिंह जून 10, 2004 की उस घटना का जिक्र करते हैं, जब उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया गया था.

पुर्तगाल में तूफानों का कहर: 200 KMPH की रफ्तार से बवंडर और 95 KMPH की स्पीड वाला तूफान, 11 की मौत

लिस्बन पुर्तगाल में लगातार आ रहे तूफानों ने जनवरी के अंत से अब तक 11 लोगों की जान ले ली है। ताजा घटना में 64 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह हादसा दक्षिणी पुर्तगाल के सेरपा क्षेत्र में पियास के पास अमोरेइरा बांध के नजदीक हुआ। व्यक्ति सड़क पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी बाढ़ का तेज पानी उसकी कार को बहा ले गया। समाचार एजेंसी लूसा के मुताबिक, जिस सड़क से वह गुजर रहा था वहां पानी तेजी से भर रहा था। अचानक आई बाढ़ अपने चरम पर थी और तेज बहाव में कार बह गई। यह जानकारी राष्ट्रीय रिपब्लिकन गार्ड के एक अधिकारी के हवाले से दी गई। हाल के दिनों में पुर्तगाल लगातार कई तूफानी प्रणालियों की चपेट में रहा है। इससे देशभर में भारी नुकसान हुआ है। अब तक तूफान क्रिस्टिन सबसे ज्यादा विनाशकारी साबित हुआ है। इसके बाद तूफान लियोनार्डो ने बुधवार से देश को प्रभावित करना शुरू किया। इससे पहले पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुईस मोंटेनेग्रो ने तूफान क्रिस्टिन के बाद परिवारों और कारोबारियों की मदद के लिए 2.5 बिलियन यूरो के सहायता पैकेज की घोषणा की थी। इस तूफान में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई थी और पूरे देश में भारी तबाही हुई थी। इसके बाद सरकार ने राष्ट्रीय आपदा की स्थिति को और आगे बढ़ाने का फैसला किया। यूरोप के कुछ देशों पर इन दिनों प्रकृति का कहर बरप रहा है. समुद्री तूफान की वजह से व्‍यापक नुकसान हुआ है. एक सप्‍ताह पहले 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली क्रिस्टिन स्‍टॉर्म ने जमक तबाही मचाई थी. अब लियानार्डो स्‍टॉर्म का खतरा मंडरा रहा है. मौसम विभाग ने पुर्तगाल और स्‍पेन के लिए अलर्ट जारी किया है. लियानार्डो तूफान की वजह से बाढ़ जैसे हालात बनने का खतरा है तो दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट सिस्‍टम के चरमराने की आशंका भी जताई गई है. मौसमी हालात को देखते हुए वेदर एक्‍सपर्ट ने लोगों से घरों में रहने और यात्रा से बचने की सलाह दी है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके. पिछले कुछ दिनों में आए भयानक तूफान की वजह से पुर्तगाल में 11 लोगों की मौत होने की सूचना है, जबकि व्‍यापक पैमाने पर संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा है. पुर्तगाल और स्पेन ने स्टॉर्म लियोनार्डो के चलते यात्रियों और नागरिकों के लिए आपात चेतावनी जारी की है. तूफान के कारण भारी बारिश, तेज हवाएं और तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. पुर्तगाल के मौसम विभाग आईपीएमए के अनुसार, देश के कई हिस्सों में हवा की रफ्तार 95 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि दक्षिणी तटों पर तेज बारिश से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है. स्पेन में विशेष रूप से आंदालूसिया क्षेत्र में हालात गंभीर बने हुए हैं, जहां रेड और एंबर अलर्ट जारी किए गए हैं. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम से ट्रांसपोर्ट सर्विसेज बाधित हो सकती हैं, बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और संपत्ति को नुकसान पहुंचने का खतरा है. हालांकि, यह तूफान पिछले सप्ताह आए स्टॉर्म क्रिस्टिन जितना शक्तिशाली नहीं है, फिर भी पहले से भरे नदी-नालों के कारण बाढ़ का जोखिम अधिक बना हुआ है. तटीय क्षेत्रों में ऊंची लहरों और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की भी संभावना जताई गई है. प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, आधिकारिक मौसम अपडेट पर नजर रखने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है. पुर्तगाल में 11 लोगों की मौत पुर्तगाल में लगातार आ रहे तूफानों ने जनवरी के अंत से अब तक 11 लोगों की जान ले ली है. ताजा घटना में 64 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई. यह हादसा दक्षिणी पुर्तगाल के सेरपा क्षेत्र में पियास के पास अमोरेइरा बांध के नजदीक हुआ. व्यक्ति सड़क पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी बाढ़ का तेज पानी उसकी कार को बहा ले गया. न्‍यूज एजेंसी लूसा के मुताबिक, जिस सड़क से वे गुजर रहे थे, वहां पानी तेजी से भर रहा था. अचानक आई बाढ़ अपने चरम पर थी और तेज बहाव में कार बह गई. यह जानकारी राष्ट्रीय रिपब्लिकन गार्ड के एक अधिकारी के हवाले से दी गई. हाल के दिनों में पुर्तगाल लगातार कई तूफानी सिस्‍टम्‍स की चपेट में रहा है. इससे देशभर में भारी नुकसान हुआ है. अब तक तूफान क्रिस्टिन सबसे ज्यादा विनाशकारी साबित हुआ है. इसके बाद तूफान लियोनार्डो ने बुधवार से देश को प्रभावित करना शुरू किया. इससे पहले पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुईस मोंटेनेग्रो ने तूफान क्रिस्टिन के बाद परिवारों और कारोबारियों की मदद के लिए 2.5 बिलियन यूरो के सहायता पैकेज की घोषणा की थी. इस तूफान में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई थी और पूरे देश में भारी तबाही हुई थी. इसके बाद सरकार ने राष्ट्रीय आपदा की स्थिति को और आगे बढ़ाने का फैसला किया. सरकारी सहायता मंत्रिपरिषद की आपात बैठक के बाद सरकार ने यह पैकेज घोषित किया और राष्ट्रीय आपदा की स्थिति को 8 फरवरी तक बढ़ा दिया. इस पैकेज में घरों के पुनर्निर्माण के लिए सहायता, परिवारों को आय सहायता, कारोबारियों को नकदी मदद और कर व ऋण भुगतान में राहत शामिल है. बीमा रहित मुख्य घरों, कृषि और वानिकी कार्यों के लिए सीधे अनुदान दिए जाएंगे, जिनकी राशि अधिकतम 10 हजार यूरो तक हो सकती है. जिन परिवारों को आय का नुकसान हुआ है, उन्हें प्रति व्यक्ति 537 यूरो तक की मदद मिलेगी. एक परिवार को अधिकतम 10,075 यूरो तक सहायता दी जा सकेगी. प्रभावित इलाकों के कारोबारियों को छह महीने तक सामाजिक सुरक्षा अंशदान में छूट मिलेगी. इसके अलावा तीन महीने के लिए एक सरल अस्थायी छंटनी योजना तक पहुंच का लाभ मिलेगा. कारोबार और मुख्य घरों के ऋण पर 90 दिनों की मोहलत दी जाएगी, जिसे जरूरत पड़ने पर 12 महीने तक बढ़ाया जा सकता है.