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भारत में बिटक्वाइन निवेश पर सरकार की सख्ती, 5 नए नियमों की घोषणा

दिल्ली भारत में बिटकॉइन और क्रिप्टो ट्रेडिंग करने वालों के लिए सरकार ने 5 सख्त नियम लागू कर दिए हैं. FIU-IND के निर्देशों के तहत अब लोकेशन ट्रैकिंग, लाइव सेल्फी KYC, VPN पर रोक, फंड्स के स्रोत की जानकारी और बेनेफिशियरी डिटेल अनिवार्य होगी. नियमों के उल्लंघन पर अकाउंट फ्रीज हो सकता है. भारत में बिटक्वाइन या क्रिप्टो ट्रेडिंग करने वालों की अब खैर नहीं है. भारत में बिटकॉइन (Bitcoin), एथेरियम (ETH) या अन्य किसी भी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों के लिए सरकार और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) ने 5 सख्त नियमों को लागू कर दिया है. ये नियम इसलिए लागू किए गए हैं, ताकि देश में मनी लॉन्ड्रिंग और ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए क्रिप्टो एक्सचेंजों (Crypto Exchanges) पर नकेल कसी जा सके. अब किसी भी भारतीय एक्सचेंज (जैसे WazirX, CoinDCX, CoinSwitch) या भारत में रजिस्टर्ड विदेशी एक्सचेंज पर ट्रेडिंग करना पहले जैसा आसान नहीं रहा. लोकेशन ट्रैकिंग सबसे बड़ा बदलाव ‘लोकेशन’ को लेकर है. अब जब भी आप किसी क्रिप्टो ऐप में लॉगिन करेंगे, तो ऐप आपसे आपकी Live Location का एक्सेस मांगेगा. यदि आप लोकेशन एक्सेस नहीं देते हैं या आप भारत की सीमा से बाहर (IP Address) पाए जाते हैं, तो आपका अकाउंट फ्रीज हो सकता है. सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना कि यूजर भारत के नियमों के दायरे में है. लाइव सेल्फी अब सिर्फ आधार कार्ड या पैन कार्ड अपलोड करना अब काफी नहीं है. केवाईसी (KYC) को और सख्त बनाते हुए अब ‘Liveness Check’ अनिवार्य कर दिया गया है. अब आपको ऐप पर अपनी लाइव सेल्फी खींचनी होगी और कई बार वीडियो वेरिफिकेशन भी देना पड़ सकता है. यह कदम फर्जी अकाउंट्स को बंद करने के लिए उठाया गया है. VPN का इस्तेमाल प्रतिबंधित अक्सर ट्रेडर अपनी पहचान छिपाने के लिए VPN (Virtual Private Network) का इस्तेमाल करते है. नए नियमों के मुताबिक, अगर सिस्टम ने डिटेक्ट किया कि आप VPN का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो एक्सचेंज को आपका ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक करने का आदेश है. फंड्स का स्रोत अगर आप एक निश्चित सीमा (जैसे 50,000 रुपये या उससे अधिक) से ज्यादा का निवेश करते हैं, तो आपको यह बताना होगा कि यह पैसा कहां से आया है. एक्सचेंज आपसे बैंक स्टेटमेंट या सैलरी स्लिप मांग सकता है. बेनेफिशियरी की जानकारी क्रिप्टो ट्रांसफर के नियमों (Travel Rule) को कड़ाई से लागू किया जा रहा है. अगर आप अपने वॉलेट से किसी और के वॉलेट में क्रिप्टो भेज रहे हैं, तो आपको सामने वाले (रिसीवर) का नाम, पता और वॉलेट डीटेल्स एक्सचेंज को देनी होंगी. बिना पूरी जानकारी के ट्रांजैक्शन फेल हो जाएगा.

THAAD और आयरन डोम को पीछे छोड़ देगा नया एयर डिफेंस सिस्टम, F-35, Su-57, J-35 होंगे नाकाम

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के बाद एयर डिफेंस सिस्‍टम को आधुनिक बनाने की जरूरत शिद्दत से महसूस हुई. इसके बाद भारत ने मिशन सुदर्शन चक्र बनाने का ऐलान किया. मिशन के तहत DRDO के साथ ही डिफेंस से जुड़ी अन्‍य एजेंसियां मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी की मदद से रडार डेवलप करने में जुटी हैं. हाल के दिनों में स्‍टील्‍थ एरियल थ्रेट (5th जेनरेशन फाइटर जेट समेत) का खतरा काफी बढ़ गया है. भारत के पड़ोस में स्थित चीन के पास पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का बड़ा बेड़ा है. माना जाता है कि चीनी सेना के पास ऐसे ड्रोन सिस्‍टम भी है, जो स्‍टील्‍थ है. बता दें कि स्‍टील्‍थ डिवाइस का रडार क्रॉस सेक्‍शन (RCS) काफी कम होता है, जिस वजह से सामान्‍य रडार या एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए इसे इंटरसेप्‍ट करना काफी मुश्किल है. ऐसे में संघर्ष या युद्ध की स्थिति में दुश्‍मनों को बढ़त मिल जाती है. रूस-यूक्रेन वॉर और इजरायल का गाजा और ईरान पर अटैक के बाद स्‍टील्‍थ वॉर-प्‍लेन, ड्रोन और मिसाइल की डिमांड बढ़ गई है. ऐसे में दुनिया के तमाम देश पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल समेत अन्‍य डिफंस इक्विपमेंट डेवलप करने में जुटे हैं. भारत भी इसमें पीछे नहीं रहना चाहता है. एक तरफ 5th जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है तो दूसरी तरफ पांचवीं पीढ़ी (स्‍टील्‍थ) के खतरों से निपटने की दिशा में भी लगातार काम किया जा रहा है. इस क्रम में भारत को बड़ी सफलता मिली है. भारत एंटी स्‍टील्‍थ रडार ग्रिड बना रहा है. भारत की वायु रक्षा प्रणाली जल्द ही एक महत्वपूर्ण तकनीकी बढ़त हासिल करने जा रही है. देश के उभरते एयर डिफेंस आर्किटेक्चर में पैसिव कोहेरेंट लोकेशन रडार (PCLR) को शामिल किया जा रहा है, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर के ‘एंटी-स्टेल्थ रडार ग्रिड’ या लो ऑब्ज़र्वेबल डिटेक्शन नेटवर्क (LODN) का अहम हिस्सा माना जा रहा है. इस नेटवर्क का उद्देश्य आधुनिक स्टेल्थ और लो-ऑब्जर्वेबल हवाई खतरों का प्रभावी ढंग से पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना है. भारत का यह मल्‍टी-लेयर्ड डिटेक्शन फ्रेमवर्क विभिन्न फ्रीक्वेंसी बैंड और डिटेक्शन सिद्धांतों पर आधारित सेंसरों को एक साथ जोड़ता है. इसमें पहले से मौजूद और प्रस्तावित VHF बैंड सर्विलांस रडार, लंबी दूरी के लो-लेवल रडार और वोस्तोक-डी (Vostok-D) जैसे सिस्टम शामिल हैं. PCLR की तैनाती से उन डिटेक्शन गैप्स को भरने में मदद मिलेगी, जिनका फायदा आमतौर पर स्टील्थ एयरक्राफ्ट उठाते हैं. बता दें कि यह सिस्‍टम अमेरिकी THAAD और इजरायली आयरन डोम से एक कदम आगे की बात है. मतलब ये भारतीय एयर डिफेंस सिस्‍टम के सामने बौने हो जाएंगे. PCLR पारंपरिक रडार सिस्टम से बिल्कुल अलग सिद्धांत पर काम करता है. यह कोई भी रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल खुद प्रसारित नहीं करता. इसके बजाय यह वातावरण में पहले से मौजूद सिग्नलों (खासतौर पर कमर्शियल FM रेडियो ब्रॉडकास्ट) का इस्तेमाल करता है. जब कोई हवाई लक्ष्य (Aerial Threat) इन सिग्नलों को बाधित करता है या परावर्तित करता है, तो PCLR उस बदलाव का विश्लेषण कर विमान की मौजूदगी और मूवमेंट का पता लगाता है. इस वजह से यह सिस्टम पूरी तरह से साइलेंट रहते हुए निगरानी करने में सक्षम होता है. एयर डिफेंस सिस्टम क्या है? एयर डिफेंस सिस्टम ऐसी सैन्य व्यवस्था है, जिसका मकसद देश की हवाई सीमा में घुसने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों का समय रहते पता लगाना और उन्हें नष्ट करना होता है. यह सिस्टम देश के अहम सैन्य ठिकानों, शहरों और नागरिक इलाकों को हवाई हमलों से बचाने का काम करता है. एयर डिफेंस सिस्टम के मुख्य हिस्से कौन-कौन से होते हैं? एयर डिफेंस सिस्टम मुख्य रूप से तीन हिस्सों पर आधारित होता है – पहला, रडार और सेंसर, जो हवा में मौजूद किसी भी संदिग्ध वस्तु का पता लगाते हैं. दूसरा, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, जो रडार से मिले डेटा का विश्लेषण कर खतरे का आकलन करता है. तीसरा, इंटरसेप्टर हथियार जैसे मिसाइलें या गन सिस्टम, जो दुश्मन के लक्ष्य को मार गिराते हैं. एयर डिफेंस सिस्टम कैसे काम करता है? जैसे ही रडार किसी दुश्मन विमान या मिसाइल को पकड़ता है, उसकी गति, दिशा और ऊंचाई की जानकारी कमांड सेंटर को भेजी जाती है. इसके बाद खतरे के स्तर के अनुसार फैसला लिया जाता है कि उसे ट्रैक किया जाए या तुरंत नष्ट किया जाए. जरूरत पड़ने पर एयर डिफेंस मिसाइल दागी जाती है, जो हवा में ही लक्ष्य को नष्ट कर देती है. भारत के लिए एयर डिफेंस सिस्टम क्यों जरूरी है? भारत की सीमाएं लंबी हैं और पड़ोसी देशों से सुरक्षा चुनौतियां बनी रहती हैं. आधुनिक युद्ध में मिसाइल और ड्रोन का खतरा तेजी से बढ़ा है. ऐसे में एयर डिफेंस सिस्टम भारत को अचानक होने वाले हवाई हमलों से बचाने, रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा करने और देश की संप्रभुता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है. भारत में कौन-कौन से प्रमुख एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं? भारत के पास स्वदेशी और विदेशी तकनीक से बने कई एयर डिफेंस सिस्टम हैं. इनमें आकाश मिसाइल सिस्टम, S-400 ट्रायम्फ, बराक-8 और स्पाइडर जैसे सिस्टम शामिल हैं. ये अलग-अलग ऊंचाई और दूरी पर आने वाले खतरों से निपटने में सक्षम हैं और मिलकर देश की मजबूत हवाई सुरक्षा कवच तैयार करते हैं. India Anti Stealth Radar Grid: एंटी स्‍टील्‍थ रडार ग्रिड के अस्‍तित्‍व में आने के बाद अमेरिकी F-35, रूसी Su-57 और चीन के J-35 जैसे पांचवी पीढ़ी के विमानों को इंटरसेप्‍ट कर उसके हमले को नाकाम बनाना आसान हो जाएगा. (फाइल फोटो/Reuters) दुश्‍मन कैसे होंगे चारों खाने चित्‍त? PCLR को एक पैसिव मल्टीस्टैटिक रडार के रूप में डिजाइन किया गया है. इसमें भौगोलिक रूप से अलग-अलग स्थानों पर लगे रिसीवर एक ही लक्ष्य को विभिन्न कोणों से ट्रैक करते हैं. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्‍ट्रक्‍चर दुश्मन के लिए सिस्टम को समझना, उसकी लोकेशन पहचानना या उसे निष्क्रिय करना बेहद कठिन बना देती है. चूंकि इसमें कोई एक ट्रांसमीटर नहीं होता, इसलिए इसे दबाने या निशाना बनाने का कोई स्पष्ट बिंदु नहीं होता. इस रडार की एक और बड़ी ताकत इसका लो-फ्रीक्वेंसी सिग्नलों पर निर्भर होना है. आधुनिक स्टील्थ विमान आमतौर पर हाई-फ्रीक्वेंसी रडार से बचने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, … Read more

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया तय, RAC टिकट न मिलने की चेतावनी

नई दिल्ली Vande Bharat Sleeper Express का इंतजार खत्म होने वाला है। नई रेल अगले सप्ताह से पटरियों पर दौड़ सकती है। इसी बीच खबर है कि यात्रियों को नई ट्रेन में RAC यानी रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी। साथ ही इसका किराया राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों से ज्यादा हो सकता है। स्लीपर ट्रेन की शुरुआत गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर होने जा रही है। वंदे भारत सीरीज की यह पहली स्लीपर ट्रेन होगी। अब तक दौड़ रहीं ट्रेनें चेयर कार हैं।  रिपोर्ट के अनुसार, यात्री को कम से कम 400 किमी दूरी के बराबर किराया देना होगा। 9 जनवरी को जारी सर्कुलर के हवाले से बताया गया, 'कम से कम 400 किमी दूरी का भुगतान करना होगा…। सिर्फ कन्फर्म टिकट ही इस ट्रेन के लिए जारी किए जाएंगे। RAC/वेटलिस्ट/पार्शियली कन्फर्म्ड टिकट का कोई प्रावधान नहीं होगा। सभी उपलब्ध बर्थ एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) से उपलब्ध होंगी।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाने जा रहे हैं। अन्य ट्रेनों की तरह वंदे भारत स्लीपर में महिलाओं, दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोटा होगा। कितना होगा किराया 3एसी के लिए यात्रियों को 2.4 रुपये प्रति किमी, 2एसी के लिए 3.1 रुपये प्रति किमी और 1एसी के लिए 3.8 रुपये प्रति किमी होगा। ऐसे में ट्रेन का न्यूनतम किराया थर्ड एसी के लिए 960 रुपये, सेकंड एसी के लिए 1240 रुपये और फर्स्ट एसी के लिए 1520 रुपये होगा। हालांकि, इसमें GST यानी वस्तु एवं सेवा कर शामिल नहीं है। यह फिलहाल दोनों शहरों के बीच 120-130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी तथा असम और पश्चिम बंगाल के प्रमुख जिलों को कवर करेगी। दोनों राज्यों में इस साल चुनाव होने वाले हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पावरप्वॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी थी, जिसके अनुसार 16 डिब्बों वाली इस ट्रेन में 11 डिब्बे थर्ड एसी, चार डिब्बे सेकंड एसी और एक डिब्बा फर्स्ट एसी शामिल हैं। कुल 823 सीटों में से 611 थर्ड एसी में, 188 सेकंड एसी में और 24 फर्स्ट एसी में हैं। ट्रेन में उपलब्ध अन्य विशेषताओं में बेहतर कुशनिंग के साथ एर्गोनॉमिक रूप से डिजाइन किए गए बर्थ, सुगम आवागमन के लिए वेस्टिब्यूल वाले स्वचालित दरवाजे, बेहतर सस्पेंशन और शोर कम करके बेहतर यात्रा आराम, स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच), आपातकालीन टॉक-बैक प्रणाली और उच्च स्वच्छता मानकों को बनाए रखने के लिए कीटाणुनाशक तकनीक शामिल हैं।

ऑस्ट्रेलिया में आतंक के खिलाफ बड़ा कदम, PM अल्बनीज़ ला सकते हैं नया सख्त कानून

कैनबरा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने दिसंबर में हुए बोंडी आतंकी हमले के बाद बड़ा फैसला लेते हुए संसद का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की है। सरकार हेट स्पीच, चरमपंथ और हथियारों पर सख्त कानून लाने जा रही है। संसद के दोनों सदन 19 और 20 जनवरी को बैठेंगे, जबकि पहले संसद का सत्र 2 फरवरी को शुरू होना था। प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “बोंडी बीच के आतंकियों के दिमाग में नफरत थी और उनके हाथों में बंदूकें थीं। यह कानून दोनों से निपटेगा, और हमें दोनों से निपटना ही होगा।” सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला “कॉम्बैटिंग एंटीसेमिटिज़्म, हेट एंड एक्सट्रीमिज़्म बिल” व्यापक सुधारों का पैकेज है। इसमें नफरत से जुड़े अपराधों पर सख्त सज़ा, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने वाले हेट प्रीचर्स के खिलाफ नए गंभीर अपराध, और डराने-धमकाने व उकसावे पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान शामिल है। साथ ही प्रतिबंधित प्रतीकों पर रोक को और मजबूत किया जाएगा। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो गृह मंत्री को नफरत फैलाने वालों का वीज़ा रद्द करने या अस्वीकार करने का अधिक अधिकार मिलेगा। इसके अलावा सरकार संगठनों को “प्रतिबंधित हेट ग्रुप” घोषित कर सकेगी। सरकार इस विधेयक पर बहस से पहले बोंडी आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए संसद में शोक प्रस्ताव भी लाएगी। नए कानून के तहत नेशनल गन्स बायबैक स्कीम भी शुरू की जाएगी, जिसका मकसद ऑस्ट्रेलियाई सड़कों से अवैध हथियारों को हटाना है। प्रधानमंत्री ने कहा, “हम चाहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया ऐसा देश बना रहे जहां हर व्यक्ति को अपनी पहचान पर गर्व करने का अधिकार हो। लेकिन नफरत, हिंसा और समाज को बांटने वाला व्यवहार गैरकानूनी होगा।”गौरतलब है कि 8 जनवरी को ही प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने बोंडी हमले के बाद देश में यहूदी विरोध और सामाजिक सौहार्द से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए रॉयल कमीशन गठित करने की घोषणा की थी। यह ऑस्ट्रेलिया में जांच का सर्वोच्च स्तर है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व हाईकोर्ट जज वर्जीनिया बेल करेंगी। आयोग की रिपोर्ट दिसंबर के मध्य तक आने की उम्मीद है।

वैष्णो देवी यात्रियों के लिए शुभ समाचार, जानिए कब दर्शन के लिए खुलेगी पुरानी गुफा

कटड़ा वैष्णो देवी भवन पर पुरानी गुफा के कपाट मकर संक्रांति के उपलक्ष पर बुधवार को विधीबद पूजा अर्चना के साथ खोले जाएंगे। हालांकि श्रद्धालुओं को उस समय ही पुरानी गुफा से दर्शन को मौका मिलेगा ,जब भवन में श्रद्धलुओं की कतारों में गिरावट होगी। 14 जनवरी बुधवार  विद्वानों द्वारा मंत्र उच्चारण के बाद पुरानी गुफा के कपाट खोल दिए जाएंगे। जिस दौरान श्राइन बोर्ड के आला अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

ट्रेड डील को लेकर भारत-अमेरिका वार्ता तेज, अमेरिकी राजदूत ने दी बैठक की जानकारी

नई दिल्ली भारत और अमेरिका लगातार ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं और अगली बैठक मंगलवार को प्रस्तावित है। यह बयान नई दिल्ली में हाल ही में नियुक्त हुए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की ओर से सोमवार को दिया गया। अमेरिकी दूतावास में कार्यभार संभालने के दौरान स्टाफ और पत्रकारों से बातचीत करते हुए गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शुभकामनाएं भेजी हैं। गोर ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच दोस्ती असली है और भारत एवं अमेरिका का रिश्ता केवल आपसी हितों पर केंद्रित नहीं है, बल्कि बल्कि उच्चतम स्तर पर बने रिश्तों से भी बंधे हुए हैं।" उन्होंने आगे कहा,"सच्चे मित्र कई मुद्दों पर असहमत हो सकते हैं, लेकिन आखिर में आपसी मतभेद को सुलझा ही लेते हैं।" गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार काफी महत्वपूर्ण है और इसके अलावा दोनों देश सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ, एनर्जी, टेक्नोलॉजी, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। उन्होंने आगे बताया कि टैरिफ और बाजार पहुंच को लेकर मतभेद होने के बावजूद दोनों देश आपस में संपर्क बनाए रखे हुए हैं। गोर ने यह भी घोषणा की कि अगले महीने भारत को 'पैक्ससिलिका' में पूरे सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा गया है। उन्होंने बताया कि 'पैक्ससिलिका' एक नई पहल है जिसे अमेरिका ने पिछले महीने ही शुरू किया है। इसका मकसद जरूरी मिनरल्स और एनर्जी इनपुट से लेकर एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, एआई डेवलपमेंट और लॉजिस्टिक्स तक एक सुरक्षित, खुशहाल और इनोवेशन पर आधारित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना है। उन्होंने आगे कहा, "पिछले महीने इस ग्रुप में शामिल होने वाले देशों में जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और इजराइल शामिल हैं। भारत के शामिल होने से यह ग्रुप और मजबूत होगा।" गोर के बयान से अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक की टिप्पणियों से पैदा हुआ ज्यादातर कन्फ्यूजन दूर हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार बातचीत इसलिए रुक गई है क्योंकि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया। विदेश मंत्रालय ने लटनिक के बयान को खारिज करते हुए कहा, "रिपोर्ट में बताई गई बातों में इन चर्चाओं का जो जिक्र किया गया है, वह सही नहीं है।" विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत दो कॉम्प्लिमेंट्री इकोनॉमी के बीच आपसी फायदे वाले ट्रेड डील में दिलचस्पी रखता है और इसे पूरा करने की उम्मीद करता है।"

चीन का दो टूक संदेश: ईरान के दमन पर साथ, अमेरिका को ग्रीनलैंड मुद्दे पर खुली चुनौती

ईरान ईरान में जारी जनविरोध और अशांति के बीच चीन ने स्पष्ट रूप से तेहरान सरकार का समर्थन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को कड़ा संदेश दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह “आशा करता है कि ईरान अपनी मौजूदा कठिनाइयों से उबर जाएगा” और देश में “स्थिरता” बनी रहेगी। बीजिंग ने इस बयान के साथ ही यह भी दोहराया कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता है। चीन का यह रुख ऐसे समय आया है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर सख्ती, गिरफ्तारियां और कथित मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर पश्चिमी देश चिंता जता रहे हैं।यही नहीं, चीन ने ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव पर भी अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन का यह बयान केवल ईरान के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति में एक व्यापक संदेश है कि सत्तावादी सरकारों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को ‘घरेलू मामला’ मानते हुए उस पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए। चीन का यह रुख अमेरिका और यूरोपीय देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकार आधारित हस्तक्षेप की सोच से टकराता हुआ नजर आता है। इससे साफ है कि ईरान संकट केवल एक देश का आंतरिक मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और वैचारिक टकराव का नया मोर्चा बनता जा रहा है। ईरान में दमन को चीन ने खुला समर्थन देकर पूरी दुनिया को सख्त संदेश दिया है “अपने काम से काम रखो।”  हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठोनों और पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा, गिरफ्तारियां और सख्त कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। ऐसे में चीन का यह रुख साफ तौर पर दमनकारी नीतियों के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव पर चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका को अपने “स्वार्थी हितों” के लिए दूसरे देशों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। चीन ने स्पष्ट किया कि आर्कटिक में उसकी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के पूरी तरह अनुरूप हैं और किसी भी देश की संप्रभुता के खिलाफ नहीं हैं। बीजिंग के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र में सभी देशों के स्वतंत्र और शांतिपूर्ण गतिविधियों के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।चीनी विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अमेरिका बार-बार दूसरे देशों और क्षेत्रों को बहाना बनाकर अपने रणनीतिक और सैन्य हित साधना चाहता है। ग्रीनलैंड को लेकर हाल के अमेरिकी बयानों और गतिविधियों ने आर्कटिक को एक बार फिर वैश्विक शक्ति संघर्ष का केंद्र बना दिया है।विशेषज्ञों का मानना है कि आर्कटिक में प्राकृतिक संसाधनों, नए समुद्री मार्गों और रणनीतिक बढ़त को लेकर अमेरिका और चीन आमने-सामने आ रहे हैं। चीन का यह बयान साफ संकेत है कि बीजिंग अब आर्कटिक में अमेरिकी दबदबे को खुली चुनौती देने के मूड में है।  

चुनाव आयुक्तों की सुरक्षा पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट का केंद्र व चुनाव आयोग को नोटिस

नई दिल्ली मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को मुकदमे से जीवन भर संरक्षण देने के कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट वैधता का परीक्षण करने को तैयार है। एनजीओ लोक प्रहरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर कोई रोक नहीं लगाई है। कानून में संशोधन 2023 में किया गया था जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को ये संरक्षण दिया गया है कि उनके आधिकारिक काम को लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता है। सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले का परीक्षण करेंगे, देखेंगे कि इस प्रावधान से कोई नुकसान हो रहा है या नहीं, और देखेंगे कि क्या संविधान की व्यवस्था के तहत ऐसी छूट दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्टे की जरूरत नहीं है। अदालत से प्रावधान पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता संस्था लोक प्रहरी ने दलील दी कि इतनी व्यापक कानूनी छूट तो भारत के राष्ट्रपति को भी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि संसद में कानून पर बहस के दौरान मंत्री ने खुद कहा था कि यह विधेयक केवल सेवा शर्तों से संबंधित है। ऐसे में आपराधिक अभियोजन से छूट को सेवा शर्त नहीं माना जा सकता है। याचिका में यह भी कहा गया कि यह प्रावधान स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को नुकसान पहुंचाता है। याचिकाकर्ता ने अदालत से इस प्रावधान पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए मुकदमों से प्रोटेक्शन दिए जाने को लेकर कानून में संशोधन किए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। कानून में संशोधन 2023 में किया गया था, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को ये संरक्षण दिया गया है कि उनके आधिकारिक काम को लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता है।

‘यह भारत नहीं, हमारी गलियां हैं’—न्यूज़ीलैंड में नगर कीर्तन पर हाका डांस के साथ विरोध

वेलिंग्टन न्यूजीलैंड में धार्मिक सहिष्णुता और बहुसांस्कृतिक मूल्यों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सिख समुदाय की शांतिपूर्ण धार्मिक शोभायात्रा नगर कीर्तन को लगातार दूसरी बार दक्षिणपंथी समूह के विरोध का सामना करना पड़ा। यह घटना गुरु गोबिंद सिंह की जयंती के अवसर पर ताउरंगा शहर में सामने आई। 11 जनवरी को सुबह करीब 11 बजे नगर कीर्तन गुरुद्वारा सिख संगत से शुरू होकर कैमरन रोड होते हुए ताउरंगा बॉयज कॉलेज की ओर बढ़ रहा था। यह न्यूजीलैंड है, भारत नहीं इसी दौरान दक्षिणपंथी पेंटेकोस्टल नेता ब्रायन तमाकी और उनके डेस्टिनी चर्च समर्थक नगर कीर्तन के मार्ग में पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने पारंपरिक माओरी हाका किया और “यह न्यूजीलैंड है, भारत नहीं” तथा “WHOSE STREETS? KIWI STREETS” जैसे नारे लिखे बैनर लहराए। हालांकि, न्यूजीलैंड पुलिस और सिख समुदाय के स्वयंसेवकों की सतर्कता के चलते स्थिति बिगड़ने से बच गई और नगर कीर्तन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।   तमाकी का भड़काऊ बयान घटना के बाद ब्रायन तमाकी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए विरोध को “शांतिपूर्ण प्रतिरोध” बताया। उन्होंने दावा किया कि नगर कीर्तन  के दौरान तलवारें और खंजर लहराए गए और इसे “राष्ट्रीय पहचान के लिए खतरा” करार दिया। तमाकी ने आप्रवासन, बहुसांस्कृतिक नीति और सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि न्यूजीलैंड को “ईसाई मूल्यों वाला देश” बनाए रखने के लिए आंदोलन जारी रहेगा।   पहले भी हो चुका विरोध गौरतलब है कि इससे पहले ऑकलैंड में भी गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों साहिबजादों की शहादत की स्मृति में निकाले गए नगर कीर्तन का विरोध किया गया था। उस घटना के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री, अकाल तख्त के जत्थेदार और SGPC ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। यह ताजा घटना न केवल न्यूजीलैंड के सिख समुदाय को चिंतित कर रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ रही है। SGPC की कड़ी निंदा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि नगर कीर्तन सिख धर्म की एक पवित्र, शांतिपूर्ण और विश्वभर में सम्मानित परंपरा है। इसे रोकने की कोशिश धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द पर सीधा हमला है। SGPC ने न्यूजीलैंड और भारत सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

आम बजट का सफर: फाइलों के दौर से ऑनलाइन प्रेज़ेंटेशन तक की कहानी

नई दिल्ली देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा, और इसी के साथ वह लगातार 9 बार बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी। वहीं, भारत के इतिहास का यह 80वां केंद्रीय बजट होगा। भारत का केंद्रीय बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सोच और नीतिगत दिशा का आईना भी होता है। आजादी के बाद से लेकर अब तक बजट की तारीख, समय, प्रस्तुति की शैली और उसकी प्राथमिकताओं में कई बड़े बदलाव हुए हैं। समय के साथ भारत की अर्थव्यवस्था बदली और उसी के साथ बजट की परंपराएं भी आधुनिक होती चली गईं। भारत में पहली बार बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था। हालांकि उस समय देश ब्रिटिश शासन के अधीन था। आजाद भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। इसे तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी ने संसद में प्रस्तुत किया। यह बजट आजादी के बाद की शुरुआती आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, जिसमें देश के पुनर्निर्माण और बुनियादी जरूरतों पर फोकस था। इसके बाद से अब तक बजट की प्रक्रिया में कई बड़े और ऐतिहासिक बदलाव हुए हैं। लंबे समय तक भारत में केंद्रीय बजट हर साल 28 फरवरी को पेश किया जाता रहा। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही थी। लेकिन साल 2017 में मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए बजट की तारीख 1 फरवरी कर दी। इसका मकसद यह था कि बजट से जुड़ी योजनाएं नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से पहले ही लागू की जा सकें और राज्यों को भी अपनी योजनाएं बनाने के लिए ज्यादा समय मिल सके। साल 2019 से पहले बजट को चमड़े के ब्रीफकेस में संसद लाया जाता था। लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस परंपरा को बदलते हुए बजट को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर पेश किया। पहले बजट दस्तावेज भारी-भरकम कागजी फाइलों में पेश किए जाते थे। लेकिन साल 2021 में पहली बार भारत का केंद्रीय बजट पूरी तरह डिजिटल फॉर्म में पेश किया गया। इसके साथ ही 'बजट ऐप' भी लॉन्च किया गया, जिससे आम लोग आसानी से बजट से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकें। आजादी के बाद कई दशकों तक भारत में अलग से रेल बजट पेश किया जाता था। लेकिन साल 2017 में रेल बजट को केंद्रीय बजट में ही शामिल कर दिया गया। सरकार का तर्क था कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और रेलवे के विकास को समग्र आर्थिक नीति से जोड़ा जा सकेगा। एक समय ऐसा था जब भारत का बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार (वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा) ने बजट की टाइमिंग बदलकर सुबह 11 बजे कर दी। तब से लेकर आज तक बजट इसी समय पेश किया जाता है। वहीं आम बजट 2026-27 को लेकर चर्चाएं तेज हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इस बार बजट की तारीख 1 फरवरी 2026 को रविवार है। इसे लेकर असमंजस की स्थिति जरूर है, लेकिन संसदीय इतिहास बताता है कि जरूरत पड़ने पर शनिवार और रविवार जैसे अवकाश वाले दिन भी कार्यदिवस घोषित किए जा चुके हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि इस पर अंतिम फैसला संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा सही समय पर लिया जाएगा। अगर 1 फरवरी को बजट पेश होता है, तो यह कोई नई बात नहीं होगी। 2020 में कोविड महामारी के दौरान रविवार को संसद की कार्यवाही हुई थी। वर्ष 2015 और 2016 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को बजट पेश किया था। 2025 में निर्मला सीतारमण ने भी शनिवार को बजट प्रस्तुत किया था। शुरुआती दौर में बजट का फोकस कृषि, सिंचाई और बुनियादी ढांचे पर था। समय के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया, ग्रीन एनर्जी और सामाजिक कल्याण जैसे विषय बजट की प्राथमिकताओं में शामिल होते गए। आज का बजट आत्मनिर्भर भारत, रोजगार सृजन और समावेशी विकास पर केंद्रित नजर आता है। केंद्रीय बजट में हुए ये बदलाव दिखाते हैं कि भारत की आर्थिक नीति समय के साथ अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और आधुनिक होती गई है। तारीख से लेकर समय और प्रस्तुति के तरीके तक, हर बदलाव का उद्देश्य देश के विकास को गति देना और नीतियों को जमीन पर जल्दी उतारना रहा है।