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आर्कटिक की जंग: रूस-चीन के बढ़ते असर पर ब्रिटेन-NATO का कड़ा प्लान

लंदन ब्रिटेन ने आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन से उत्पन्न बढ़ते खतरों को लेकर नाटो के अपने सहयोगी देशों के साथ बातचीत शुरू की है। सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि इन चर्चाओं का मकसद आर्कटिक में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना है। ब्रिटेन की परिवहन मंत्री हाइडी एलेक्जेंडर ने रविवार को बताया कि यह बातचीत नाटो की “सामान्य प्रक्रिया” का हिस्सा है और इसे हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की धमकियों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि, ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिका नाटो सहयोगी डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए समझौता करना चाहता है, ताकि रूस या चीन वहां अपना प्रभाव न बढ़ा सकें। ट्रंप ने यह भी कहा था, “हम ग्रीनलैंड को लेकर कुछ करने जा रहे हैं, चाहे वे इसे पसंद करें या नहीं।”करीब 57,000 की आबादी वाला ग्रीनलैंड डेनमार्क के संरक्षण में है और उसकी सैन्य क्षमता अमेरिका की तुलना में काफी सीमित है। ग्रीनलैंड में अमेरिका का एक सैन्य अड्डा भी मौजूद है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का कब्जा नाटो की एकता के लिए खतरा होगा।   ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप प्रशासन की लगातार चेतावनियों के बाद अमेरिका और डेनमार्क के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत जेस्पर मोलर सोरेनसन ने ग्रीनलैंड में नवनियुक्त अमेरिकी दूत जेफ लैंड्री के उस बयान का कड़ा जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने ग्रीनलैंड की संप्रभुता की रक्षा की थी। सोरेनसन ने कहा कि डेनमार्क हमेशा अमेरिका के साथ खड़ा रहा है, खासकर 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के बाद, और ग्रीनलैंड के भविष्य पर फैसला करने का अधिकार केवल वहां के लोगों को है। मंत्री हाइडी एलेक्जेंडर ने कहा कि ब्रिटेन इस बात से सहमत है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और यह नाटो के लिए गंभीर चुनौती है। ब्रिटेन के पूर्व अमेरिकी राजदूत पीटर मैंडेलसन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ट्रंप बलपूर्वक ग्रीनलैंड पर कब्जा करेंगे। उन्होंने कहा, “ट्रंप मूर्ख नहीं हैं। आर्कटिक को चीन और रूस से सुरक्षित करना जरूरी है और अगर इस प्रयास का नेतृत्व कोई करेगा, तो वह अमेरिका ही होगा।” आर्कटिक क्षेत्र अब ऊर्जा संसाधनों, नए समुद्री मार्गों और सैन्य रणनीति के कारण वैश्विक राजनीति का अहम केंद्र बनता जा रहा है, जहां आने वाले समय में महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा और तेज होने की आशंका है।    

करूर भगदड़ मामला: चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली आए विजय, CBI पूछताछ के दौरान ऑफिस के बाहर हंगामा

नई दिल्ली तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) प्रमुख व अभिनेता विजय करूर भगदड़ मामले में सीबीआई के समक्ष पूछताछ के लिए सोमवार को पेश हुए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। तमिल सुपरस्टार सुबह 11:29 बजे काली रेंज रोवर में भारी सुरक्षा घेरे में CBI मुख्यालय पहुंचे। आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, उन्हें एजेंसी की भ्रष्टाचार रोधी इकाई की टीम के पास ले जाया गया जो 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में हुई भगदड़ मामले की जांच कर रही है। इस भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई और 60 से अधिक लोग घायल हो गए थे।   अभिनेता-राजनेता के समर्थकों की भारी भीड़ जुटने की आशंका के मद्देनजर सीबीआई कार्यालय भवन के आसपास दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कई इकाइयों को तैनात किया गया था। कुछ प्रशंसक CBI कार्यालय के बाहर जमा मीडियाकर्मियों के बीच से निकलकर अभिनेता की एक झलक पाने में कामयाब रहे। नोएडा में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाले प्रशंसक अय्यनार ने को बताया, ‘हम सभी दिल्ली में रहते हैं। हम लगभग 40 प्रशंसक हैं जो अभिनेता की एक झलक पाने के लिए यहां आए हैं। हम सभी विजय के बहुत बड़े प्रशंसक हैं।’ चार्टर्ड विमान से चेन्नई से दिल्ली के लिए रवाना पार्टी सूत्रों के अनुसार विजय अपने सहयोगियों के साथ सुबह 7 बजे चार्टर्ड विमान से चेन्नई से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। सीबीआई ने इस मामले में पार्टी के कई पदाधिकारियों से भी पूछताछ की है। अधिकारियों के अनुसार, सीबीआई ने तमिलनाडु के पूर्व एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) एस डेविडसन देवसिरवथम को भी तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने एसआईटी से यह मामला अपने हाथ में ले लिया था और वह सबूत जुटा रही है।  

यूनुस का विवादित फैसला: ट्रंप की खुशामद में गाजा भेजना चाहते हैं सेना, अपने ही देश में विरोध तेज

ढाका बांग्लादेश की अंतरिम सरकार मुहम्मद यूनुस द्वारा गाजा में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने की रुचि जाहिर करने के बाद फिलिस्तीन समर्थक संगठन पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी, बांग्लादेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह इस फोर्स में किसी भी प्रकार की भागीदारी से दूर रहे, क्योंकि यह बांग्लादेश की ऐतिहासिक और नैतिक नीति के खिलाफ होगा। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, कमेटी ने बयान जारी कर अंतरिम सरकार की इस कथित रुचि की कड़ी निंदा की। सदस्य-सचिव प्रोफेसर मोहम्मद हारुन-ओर-रशीद ने कहा कि इस फोर्स का मुख्य उद्देश्य इजरायल की सुरक्षा के नाम पर गाजा के स्वतंत्रता सेनानियों को निरस्त्र करना और फिलिस्तीनी प्रतिरोध आंदोलन को समाप्त करना होगा।   कमेटी ने क्या कहा? पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी, बांग्लादेश के सदस्य-सचिव प्रोफेसर मोहम्मद हारुन-ओर-रशीद ने कहा कि इस स्थिरीकरण बल का मुख्य उद्देश्य इजरायल की सुरक्षा के बहाने गाजा के स्वतंत्रता सेनानियों को हथियार छीनना और फिलिस्तीनी प्रतिरोध आंदोलन को पूरी तरह खत्म करना है। बयान में कमेटी ने दावा किया कि बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान ने अमेरिका दौरे के दौरान वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक में गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में बांग्लादेश की रुचि जाहिर की थी। यह जानकारी मुख्य सलाहकार मुहम्मद युनूस के प्रेस विंग के बयान के हवाले से सामने आई थी। कमेटी ने जोर दिया कि बांग्लादेश के लोग हमेशा फिलिस्तीनी अधिकारों और स्वतंत्रता के समर्थन में खड़े रहे हैं और आगे भी खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश खुद संघर्ष और आजादी की लड़ाई से जन्मा देश है, इसलिए यहां की जनता उत्पीड़न और कब्जे के खिलाफ लड़ने वालों के दर्द को अच्छी तरह समझती है। इस दौरान संगठन ने याद दिलाया कि बांग्लादेश ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया है और इजरायली कब्जे की लगातार निंदा की है। क्यों हो रहा विरोध? दरअसल, पाकिस्तान की तर्ज पर बांग्लादेश ने भी गाजा में सेना भेजने पर सैद्धांतिक चर्चा की थी, लेकिन अब देश में इस पर विरोध बढ़ गया है। कमेटी का मानना है कि इस फोर्स में शामिल होना बांग्लादेश की नैतिक और कूटनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है, खासकर जब गाजा गंभीर मानवीय संकट से गुजर रहा है। हालांकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

भारत-जर्मनी संबंधों को नई गति: पीएम मोदी ने चांसलर मर्ज से की अहम बातचीत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को द्विपक्षीय साझेदारी के समग्र विस्तार के लिए व्यापक बातचीत की और इसी के साथ दोनों देशों ने शिक्षा क्षेत्र में रिश्तों का विस्तार करने के लिए एक बड़ा रोडमैप तैयार किया। दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष, गाजा के हालात और अन्य ज्वलंत वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की। मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा सभी समस्याओं और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है। जर्मनी के चांसलर मर्ज भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आज सुबह अहमदाबाद पहुंचे। यह जर्मन चांसलर के रूप में मर्ज की पहली एशिया यात्रा है। मोदी ने एक वक्तव्य में कहा, ‘‘आज उच्च शिक्षा पर बना समग्र रोडमैप शिक्षा के क्षेत्र में हमारी साझेदारी को नई दिशा देगा।'' प्रधानमंत्री ने जर्मनी के विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर खोलने के लिए भी आमंत्रित किया।   मोदी ने कहा कि वह और मर्ज इस बात पर एकमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा,‘‘भारत और जर्मनी इसके विरुद्ध एकजुट होकर पूरी दृढ़ता से लड़ाई जारी रखेंगे।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज हमने यूक्रेन और गाजा सहित कई वैश्विक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।'' उन्होंने कहा, ‘‘भारत सभी समस्याओं और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है और इस दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है।''   मोदी ने कहा, ‘‘भारत और जर्मनी की जनता के बीच ऐतिहासिक और गहन संबंध हैं। रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचनाओं ने जर्मनी के बौद्धिक जगत को नई दृष्टि दी। स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने जर्मनी सहित पूरे यूरोप को प्रेरित किया। और मैडम कामा ने जर्मनी में पहली बार भारत की आजादी का ध्वज फहराकर हमारी स्वतंत्रता की आकांक्षा को वैश्विक पहचान दी।''  

गोल्ड मेडल की उम्मीद थी, PIL में निकला बेटा—BJP नेता पर CJI का व्यंग्य

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ आज (सोमवार, 12 जनवरी को) एक ऐसी जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर ही थी, जिसे एक लॉ स्टूडेन्ट ने फाइल की थी और उस मामले की पैरवी उसके ही वकील पिता कर रहे थे। इस याचिका में केंद्र सरकार को ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज़ (आपत्तिजनक विज्ञापन) एक्ट, 1954 के प्रावधानों की समीक्षा और अपडेट करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि यह कानून अब मौजूदा वैज्ञानिक ज्ञान या मेडिकल प्रैक्टिस को नहीं दिखाता है। इसके अलावा आयुष डॉक्टरों को एलोपैथिक डॉक्टरों के बराबर कानून के तहत 'रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर' घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।   शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय कानून, स्वास्थ्य और आयुष मंत्रालयों से इस जनहित याचिका पर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान, बेंच ने औपचारिक रूप से नोटिस जारी करने से पहले याचिकाकर्ता के कम उम्र में PIL दायर करने और उसकी पैरवी उसके ही पिता द्वारा करने पर चुटकी ली और हल्के-फुल्के कमेंट्स किए। दरअसल, ये याचिका नितिन उपाध्याय नाम के लॉ स्टूडेंट ने दायर की है, जो भाजपा नेता और वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय के बेटे हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने पैरवी कर रहे वकील अश्विनी उपाध्याय से पूछा, "क्या यह आपका बेटा है?' इस पर अश्विनी उपाध्याय ने कहा, "जी हाँ।" तभी CJI ने चुटकी ली और कहा, "हमने सोचा था कि उसे कुछ गोल्ड मेडल वगैरह मिलेंगे, लेकिन अब तो ये PIL फाइल करने लगा है।" उन्होंने नितिन से भी पूछा, "अब तुम पढ़ाई क्यों नहीं करते?" इसी बीच, पीठ के दूसरे जज जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, "नोटिस जारी कर रहे हैं। सिर्फ़ आपके बेटे के लिए। ताकि वह अच्छे से पढ़ाई कर सके।" बता दें कि इस जनहित याचिका में 1954 के एक्ट के शेड्यूल की समीक्षा और उसे आज के वैज्ञानिक विकास के अनुसार अपडेट करने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी के गठन की भी मांग की गई है। इसमें तर्क दिया गया है कि हालांकि यह एक्ट जनता को गुमराह करने वाले विज्ञापनों से बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन धारा 3(d) कुछ बीमारियों से संबंधित विज्ञापनों पर पूरी तरह से बैन लगाती है, बिना गुमराह करने वाले दावों और सच्ची, सबूत-आधारित जानकारी के बीच अंतर किए। याचिका में कहा गया है कि चूंकि आयुष और अन्य गैर-एलोपैथिक प्रैक्टिशनर एक्ट की धारा 14 में दिए गए छूट के तहत नहीं आते हैं, इसलिए उन्हें गंभीर बीमारियों के लिए वैध दवाओं का विज्ञापन करने से प्रभावी रूप से रोक दिया गया है, जिससे जनता में अज्ञानता फैल रही है। याचिका में दावा किया गया है कि पुराना कानून बीमारियों के निदान, रोकथाम और उपचार से संबंधित जानकारी के अधिकार को असमान रूप से प्रतिबंधित करता है। इसलिए, आधुनिक चिकित्सा ज्ञान के आलोक में एक्ट की व्यापक समीक्षा की मांग की गई है।  

ट्रंप–भारत रिश्तों में नई गर्माहट, अमेरिकी दूत बोले—दो साल में फिर दिखेंगे ट्रंप

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर भारत दौरे पर आ सकते हैं। भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को नई दिल्ली में अपना कार्यभार संभालते हुए इस बात के संकेत दिए। उन्होंने न केवल ट्रंप और पीएम मोदी की 'सच्ची दोस्ती' का जिक्र किया, बल्कि वाइट हाउस के अंदर की कुछ दिलचस्प बातें भी शेयर कीं। सर्जियो गोर ने अपने पहले संबोधन में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर अपनी पिछली भारत यात्रा को याद करते हैं और अगले एक-दो सालों में दोबारा भारत आने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा- रष्ट्रपति ट्रंप को यहां की अपनी पिछली यात्रा याद है। मैं पिछले हफ्ते राष्ट्रपति के साथ था और जब हमने नए साल के ठीक बाद डिनर किया, तो उन्होंने यहां आने के अपने शानदार अनुभव और भारत के महान प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी गहरी दोस्ती के बारे में बताया। मुझे यह भी उम्मीद है कि राष्ट्रपति जल्द ही हमसे मिलने आएंगे, उम्मीद है अगले एक-दो साल में भारत आएंगे। 'दोस्त हैं, इसलिए मतभेद सुलझा लेंगे' राजदूत गोर ने दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार और टैरिफ विवादों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "मैं राष्ट्रपति ट्रंप के साथ पूरी दुनिया घूमा हूं और मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी दोस्ती 'असली' है। सच्चे दोस्तों में असहमति हो सकती है, लेकिन वे अंत में अपने मतभेद सुलझा ही लेते हैं।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते और टैरिफ को लेकर थोड़ी खींचतान चल रही है। गोर ने भरोसा दिलाया कि दोनों देश इन मुद्दों को सुलझाने के लिए सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। वाइट हाउस की 'इनसाइड स्टोरी', रात 2 बजे के फोन कॉल राजदूत ने ट्रंप और मोदी के रिश्तों की गहराई बताने के लिए एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया- राष्ट्रपति ट्रंप की आदत है कि वे रात के 2 बजे फोन करते हैं। और नई दिल्ली के टाइम डिफरेंस को देखते हुए, यह आदत भारत के साथ रिश्तों में काफी फिट बैठती है। भारत 'पैक्स सिलिका' का हिस्सा बनेगा अपने संबोधन में सर्जियो गोर ने एक बड़ी घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को 'पैक्स सिलिका' एलायंस में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेगा। यह अमेरिका के नेतृत्व वाला एक रणनीतिक समूह है, जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, इजरायल और ताइवान जैसे देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित करना और एआई (AI) तकनीक में सहयोग बढ़ाना है। सर्जियो गोर, जो ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते हैं, उन्होंने साफ किया कि उनका लक्ष्य भारत-अमेरिका संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना है। उन्होंने कहा- भारत से ज्यादा जरूरी कोई साझीदार नहीं है। आने वाले महीनों और सालों में, मेरा लक्ष्य एक बेहद महत्वाकांक्षी एजेंडे को आगे बढ़ाना होगा। गौरतलब है कि सर्जियो गोर ने ऐसे समय में कार्यभार संभाला है जब अमेरिका में 'रूस प्रतिबंध अधिनियम' जैसे कानूनों पर चर्चा हो रही है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, गोर के बयानों से साफ है कि ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रख रहा है।

SC में ED का गंभीर आरोप, ममता बनर्जी पर ₹2,742 करोड़ के घोटाले और 20 करोड़ हवाला के लिंक का आरोप

 नई दिल्ली पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म 'इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी' (I-PAC) के कोलकाता दफ्तर और कंपनी के डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के मामले में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. ईडी ने पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है. केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि 8 जनवरी 2026 को उसके वैधानिक सर्च ऑपरेशन में जानबूझकर बाधा डाली गई, जांच को पटरी से उतारने की कोशिश की गई और सबूतों से छेड़छाड़ व उन्हें नष्ट किया गया. ईडी ने अपनी याचिका में कहा है कि यह सर्च ऑपरेशन धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत “रीजन टू बिलीव” दर्ज करने के बाद किया गया था. छापेमारी दो स्थानों पर हुई- कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के आवास और बिधाननगर के सेक्टर-वी में स्थित इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (IPAC) के दफ्तर में. यह मामला ₹2,742.32 करोड़ के कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले से जुड़ा है. ईडी का दावा है कि इस घोटाले से जुड़े 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हवाला चैनलों के जरिए IPAC तक पहुंचाई गई. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करीब 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं और सर्च के दौरान ईडी अधिकारियों को रोका गया. आरोप है कि जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज जबरन लेकर पुलिस कस्टडी में लगभग दो घंटे तक रखे गए. ईडी का कहना है कि अधिकारियों को धमकाया गया, पंचनामा की कार्यवाही प्रभावित हुई और जांच पूरी नहीं करने दी गई. इसके बाद दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के तहत कोलकाता के अलग-अलग थानों में ED अधिकारियों के खिलाफ चार FIR दर्ज की गईं. ईडी ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि कलकत्ता हाई कोर्ट की कार्यवाही के दौरान सत्तारूढ़ दल के समर्थकों द्वारा कथित तौर पर हंगामा किया गया, जिसके चलते न्यायालय ने माहौल को सुनवाई के लिए प्रतिकूल बताया. ED का तर्क है कि ऐसे हालात में हाई कोर्ट में वैकल्पिक उपाय प्रभावहीन हो गया है. ED ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री, डीजीपी, पुलिस कमिश्नर और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की CBI जांच की मांग की है. एजेंसी का कहना है कि इन घटनाओं में BNS, 2023 के तहत चोरी, डकैती, आपराधिक अतिक्रमण, सरकारी कर्मियों के कार्य में बाधा, सबूत नष्ट करने और आपराधिक धमकी जैसे संज्ञेय अपराध बनते हैं. ईडी ने अंतरिम राहत के तौर पर अपने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक, किसी भी तरह की बदले की कार्रवाई  से सुरक्षा, और जब्त डिजिटल साक्ष्यों को सील कर सुरक्षित रखने व फॉरेंसिक संरक्षण की मांग की है. वहीं, IPAC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर किसी भी राजनीतिक या चुनावी डेटा की जब्ती से इनकार किया है और जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग का दावा किया है.

भारत के 16 सैटेलाइट्स का हुआ अंतरिक्ष में गायब होना, जानें कैसे होते हैं खराब सैटेलाइट्स का निस्तारण

   नई दिल्ली   ISRO का आज का लॉन्च मिशन फेल हो चुका है. उसी के साथ सवाल ये उठता है कि PSLV रॉकेट से जो 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे गए. वो कहां हैं. कब धरती पर गिरेंगे. या अंतरिक्ष में ही घूमते रहेंगे. अंतरिक्ष में हजारों सैटेलाइट्स काम कर रहे हैं, लेकिन जब ये खराब हो जाते हैं, पुराने हो जाते हैं या ईंधन खत्म हो जाता है, तो इन्हें अंतरिक्ष में छोड़ना खतरनाक है.  ये स्पेस डेब्री (कचरा) बन जाते हैं, जो अन्य सैटेलाइट्स से टकरा सकते हैं. इसलिए, दुनिया भर के स्पेस एजेंसियां इन सैटेलाइट्स को डिस्पोज करने के नियम फॉलो करती हैं. लेकिन क्या ये खुद-ब-खुद गिरते हैं? या कोई फिक्स जगह है?  पुराने सैटेलाइट्स क्या करते हैं? दो मुख्य तरीके प्राकृतिक गिरावट  पृथ्वी के बहुत करीब (लो अर्थ ऑर्बिट – LEO, 200-2000 किमी ऊंचाई) वाले सैटेलाइट्स पर हवा का हल्का घर्षण (atmospheric drag) लगता है. यह घर्षण धीरे-धीरे सैटेलाइट की स्पीड कम करता है, और ये नीचे की ओर गिरते जाते हैं.       400-600 किमी ऊंचाई पर: 5-10 साल में खुद गिर जाते हैं.       700-1000 किमी पर: 100-200 साल या ज्यादा लग सकते हैं.     छोटे सैटेलाइट्स (जैसे CubeSats) ज्यादातर इसी तरह जलकर खत्म हो जाते हैं. लेकिन बड़े सैटेलाइट्स के टुकड़े जमीन पर गिर सकते हैं, इसलिए अब नियम सख्त हैं. कंट्रोल्ड डीऑर्बिट  एजेंसियां बचे हुए ईंधन से थ्रस्टर्स फायर करके सैटेलाइट को धीमा करती हैं, ताकि ये तय जगह पर गिरे. ज्यादातर बड़े सैटेलाइट्स और स्पेस स्टेशन इसी तरीके से गिराए जाते हैं. अंतरराष्ट्रीय नियम क्या हैं? स्पेस डेब्री को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN COPUOS) ने Space Debris Mitigation Guidelines बनाए हैं (2007 में अपनाए गए, 2025 तक अपडेटेड). ये नियम स्वैच्छिक हैं, लेकिन ज्यादातर देश फॉलो करते हैं. मुख्य नियम… 25-वर्ष नियम (25-Year Rule): मिशन खत्म होने के बाद सैटेलाइट को 25 साल के अंदर डीऑर्बिट करना चाहिए, ताकि वो LEO में ज्यादा समय न रहे.  अमेरिका (FCC), यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) अब 5 साल का नियम लागू कर रहे हैं.     सैटेलाइट्स को डिजाइन ऐसा करें कि वे सामान्य ऑपरेशन में डेब्री न छोड़ें.       विस्फोट न हो (passivation: बचे ईंधन को खत्म करना).       टकराव से बचाव (collision avoidance).       अगर सैटेलाइट पूरी तरह न जल सके, तो कंट्रोल्ड तरीके से गिराएं. अगर सैटेलाइट 2000 किमी से ऊपर (जैसे GEO ऑर्बिट – 36,000 किमी) है, तो उसे ग्रेवयार्ड ऑर्बिट में भेजा जाता है, जहां वो सदियों तक रह सकता है बिना टकराव के. फिक्स जगह: स्पेसक्राफ्ट सेमेटरी या पॉइंट नेमो बड़े सैटेलाइट्स, स्पेस स्टेशन और कार्गो व्हीकल्स को पॉइंट नेमो (Point Nemo) नाम की जगह पर गिराया जाता है. यह दक्षिणी प्रशांत महासागर में सबसे दूरस्थ जगह है…     सबसे नजदीकी जमीन से 2,688 किमी दूर (न्यूजीलैंड, ईस्टर आइलैंड, अंटार्कटिका से).     नाम: नेमो (Latin में कोई नहीं) – जूल्स वर्न की किताब से लिया गया है. Oceanic Pole of Inaccessibility या South Pacific Ocean Uninhabited Area. यहां क्यों? क्योंकि… कोई इंसान, जहाज या द्वीप नहीं है. अगर टुकड़े बच भी जाएं, तो कोई खतरा नहीं. 1971 से अब तक 264+ स्पेसक्राफ्ट यहां गिराए गए (रूस सबसे ज्यादा, Mir स्पेस स्टेशन सहित). ISS (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) 2030-2031 में यहीं गिराया जाएगा. क्या कोई खतरा है? ज्यादातर सैटेलाइट्स वायुमंडल में जल जाते हैं. बड़े टुकड़े (जैसे Mir के) समंदर में डूब जाते हैं. अब तक कोई मौत नहीं हुई स्पेस डेब्री से (एक बार 1997 में महिला पर छोटा टुकड़ा गिरा था). लेकिन डेब्री बढ़ रहा है, इसलिए नियम सख्त हो रहे हैं. खराब सैटेलाइट्स खुद-ब-खुद गिर सकते हैं (प्राकृतिक तरीके से), लेकिन अब नियम कहते हैं कि उन्हें 5-25 साल में कंट्रोल्ड तरीके से गिराना चाहिए. छोटे सैटेलाइट्स वायुमंडल में जल जाते हैं, बड़े को पॉइंट नेमो के स्पेसग्रेवयार्ड में भेजा जाता है. यह जगह सबसे सुरक्षित है, क्योंकि वहां कोई नहीं है. 

ईरान में प्रदर्शनों में मृतकों की संख्या 544 तक पहुंची, पेजेशकियन की नागरिकों से शांति की अपील

तेहरान  ईरान में पिछले दो हफ्तों से सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शन जारी है. इस दौरान कम से कम 544 प्रदर्शनकारी मारे गए जिनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं. सीएनएन ने ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स के हवाले से ये रिपोर्ट दी है. विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को बढ़ती महंगाई और आर्थिक मुश्किलों के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये पूरे देश में तनावपूर्ण अशांति में बदल गए, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई. विरोध प्रदर्शन कई शहरों में फैल गए. अधिकारी गिरफ्तारियों, कार्रवाई और बल प्रयोग करके जवाब दे रहे हैं. मानवाधिकार समूहों ने बार-बार हताहतों की संख्या और प्रदर्शनकारियों के साथ किए जा रहे बर्ताव पर चिंता जताई. ईरानी अधिकारियों ने अशांति के लिए दंगाइयों और विदेशी दखलअंदाजी को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि यह भी कहा है कि जायज आर्थिक शिकायतों को दूर किया जाएगा. अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने इस स्थिति पर खुलकर बात की है. पोप लियो ने अपनी एंजेलस प्रार्थना के बाद वेटिकन में भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि वह ईरान में शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मेरे विचार इन दिनों मध्य पूर्व में खासकर ईरान और सीरिया में जो हो रहा है, उस पर हैं, जहाँ लगातार तनाव के कारण कई लोगों की मौत हो रही है. मुझे उम्मीद है और मैं प्रार्थना करता हूँ कि पूरे समाज की भलाई के लिए बातचीत और शांति को धैर्यपूर्वक बढ़ावा दिया जाएगा.' फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भी ईरानी अधिकारियों से हिंसा से बचने की अपील की और एक्स पर पोस्ट किया, 'आक्रामकता बंद होनी चाहिए. हम गलत तरीके से हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग करते हैं.' आयरलैंड की विदेश मंत्री हेलेन मैकएन्टी ने कहा कि वह ईरान से आ रही रिपोर्टों से 'बहुत चिंतित' हैं. साथ ही इस बात पर जोर दिया कि अभिव्यक्ति की आजादी, शांतिपूर्ण सभा और जानकारी तक पहुंच का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने ईरानी अधिकारियों से आगे हिंसा न करने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की भी अपील की.   इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि इजराइल ईरानी लोगों का समर्थन करता है और एक्स पर कहा. 'हम आजादी के लिए ईरानी लोगों के संघर्ष का समर्थन करते हैं और उन्हें सफलता की शुभकामनाएं देते हैं.' इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने रविवार को कहा कि वह ईरान में हो रहे घटनाक्रम पर करीब से नज़र रख रही है, क्योंकि विरोध प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गए हैं. आईडीएफ के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, 'ये विरोध प्रदर्शन ईरान का अंदरूनी मामला है. फिर भी आईडीएफ रक्षात्मक रूप से तैयार है और लगातार अपनी क्षमताओं और ऑपरेशनल तैयारी में सुधार कर रही है.'  सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भी रविवार को बाद में एक सीमित सुरक्षा परामर्श करने की उम्मीद है, जिसमें ईरान और लेबनान के घटनाक्रम एजेंडे में होंगे. जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ईरान की स्थिति पर एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि जापान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ किसी भी तरह की ताकत के इस्तेमाल के खिलाफ हैं. अशांति के बीच अमेरिकी अधिकारियों ने सीएनएन को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद ईरान में मिलिट्री विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, और उन्होंने तेहरान को प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा बल का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी है. ईरानी अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सख्त होगी. तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा कि कार्रवाई बिना किसी नरमी, दया या रियायत के की जाएगी. उन्होंने कहा, 'सभी दंगाईयों पर आरोप एक जैसे हैं.' इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने नागरिकों से अपील की कि वे उस चीज में शामिल न हों जिसे उन्होंने हिंसक अशांति बताया. टेलीविजन पर दिए गए भाषण में उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और हिंसा के बीच साफ अंतर है. उन्होंने कहा, 'अगर लोगों को कोई चिंता है, तो यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी चिंताओं को दूर करें, लेकिन सबसे बड़ा कर्तव्य यह है कि हम दंगाइयों के एक समूह को आकर पूरे समाज को बाधित करने की अनुमति न दें.' पेजेशकियन ने आगे कहा, 'यह किस तरह का विरोध है? यह किस तरह का संदेश है, जो लोगों के दिलों में नफरत पैदा कर रहा है?' उन्होंने आगे कहा, 'अमेरिका और इजराइल वहाँ बैठे हैं और उन्हें जाने के लिए कह रहे हैं और (कह रहे हैं) 'हम तुम्हारे साथ हैं'. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि वे ईरान के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय "अपने देश को संभालें'. सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किए गए एक संदेश में खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर ईरान में अशांति को बढ़ावा देने और अपने देश की गंभीर समस्याओं को हल करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. खामेनेई ने लिखा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति ने घोषणा की कि अगर ईरानी सरकार ऐसा या वैसा करती है, तो वह दंगाइयों का साथ देंगे. दंगाइयों ने उन पर उम्मीदें लगा रखी हैं. अगर वह इतने काबिल हैं, तो उन्हें अपने देश को संभालना चाहिए.'

जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट: LoC के पास पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए, सेना ने की सख्त जवाबी कार्रवाई

राजौरी: जम्मू-कश्मीर के नौशेरा-राजौरी सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल के पास कुछ ड्रोन देखे गए. इनके पाकिस्तान के होने का शक है. इस घटना के बाद भारतीय सेना ने काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम के उपाय किए. इसके बाद ये ड्रोन वापस चले गए. रिपोर्ट के अनुसार रविवार शाम को जम्मू-कश्मीर के सांबा, राजौरी और पुंछ जिलों में इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास कई फॉरवर्ड इलाकों में संदिग्ध ड्रोन की हलचल देखी गई, जिनके पाकिस्तान के होने का शक है. सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया कि ये उड़ने वाली चीजें बॉर्डर के पाकिस्तान की तरफ से आई और कुछ मिनट तक भारतीय इलाके के ऊपर मंडराने के बाद वापस चली गई. संदिग्ध ड्रोन गतिविधि देखे जाने के बाद जमीन पर तलाशी अभियान भी शुरू किया गया. सेना के जवानों ने शाम करीब 6:35 बजे गनिया-कलसियां ​​गांव के ऊपर ड्रोन की हलचल देखने पर मीडियम और लाइट मशीन गन से फायरिंग की. उसी समय, राजौरी के टेरियथ में खब्बर गांव में एक और ड्रोन देखा गया. अधिकारियों ने बताया कि यह उड़ने वाली चीज, जिसमें टिमटिमाती रोशनी थी, कलाकोट के धर्मसाल गांव की दिशा से आई थी, और फिर भरख की ओर आगे बढ़ी. एक और ऐसी ही चीज, जिसमें टिमटिमाती रोशनी थी, शाम करीब 7:15 बजे चक बबरल के ऊपर कई मिनट तक मंडराती हुई देखी गई. एक और ऐसी ही चीज पुंछ में एलओसी के पास मनकोट सेक्टर में टैन से टोपा की ओर जाती हुई देखी गई. इस घटना के बाद भारतीय सेना के जवानों ने काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम के उपाय भी किए, जिससे उन्हें वापस लौटना पड़ा. बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार को सांबा जिले के पालूरा गांव में सीमा के पास से हथियार और गोला-बारूद का एक जखीरा बरामद होने के बाद एक जॉइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया. इस जखीरे में चीन में बनी एक 9 एमएम पिस्टल जिसके साथ दो मैगजीन, एक ग्लॉक 9एमएम पिस्टल जिसके साथ एक मैगजीन थी और एक चीनी हैंड ग्रेनेड जिस पर एपीएल एचजीआर 84 लिखा था, शामिल था. पुलिस के मुताबिक पैकेट से कुल सोलह 9एमएम कारतूस भी बरामद किए गए.