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डर से उम्मीद तक: पहलगाम हमले के बाद घाटी में लौटी रौनक, सैलानियों ने बढ़ाया उत्साह

पहलगाम 22 अप्रैल 2025 की तारीख को कभी भुलाया नहीं जा सकता है, क्योंकि इस दिन कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने 26 मासूम लोगों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। घटना के बाद ऑपरेशन सिंदूर हुआ और कश्मीर के स्थानीय लोगों पर भी सवाल उठे। इस दर्दनाक घटना के बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में कमी देखने को मिली थी, लेकिन आठ महीनों बाद फिर से घाटियों में रौनक लौट आई है। नया साल मनाने के लिए पर्यटकों की भीड़ पहलगाम में दिख रही है। पहलगाम पहुंचे पर्यटकों से बातचीत की है।  दीक्षा नाम की टूरिस्ट ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कश्मीर के लोग बहुत अच्छे हैं और वे पहली बार कश्मीर आई हैं। उन्होंने कहा, "मैं हरियाणा के हिसार से आई हूं। कश्मीर में यह मेरा पहला अनुभव है और यह सचमुच बहुत सुंदर है। यहां सुरक्षा व्यवस्था बहुत अच्छी है और हम नव वर्ष मनाने आए हैं। कश्मीरी लोगों का पूरा सहयोग मिल रहा है और वे हर छोटी मदद करने के लिए तैयार हैं। दीक्षा के पति गौतम ने बताया कि पहलगाम, सोनमर्ग और गुलमर्ग में भारी बर्फबारी हुई है और कश्मीर की वादियां किसी को भी आकर्षित कर सकती हैं। बहुत सारे लोग दूर-दूर से घूमने के लिए पहुंच रहे हैं। व्यवस्था भी बहुत अच्छी है। हम यहां अच्छी यादें संजोने के लिए आए हैं। एक अन्य पर्यटक ने बताया कि वे तीसरी बार पहलगाम आए हैं और अब पहले से माहौल अच्छा हो गया है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग बहुत सपोर्टिव हैं और हर तरह की मदद कर रहे हैं। उनका बोलने का लहजा बहुत प्यारा है। नए साल को देखते हुए देश के अलग-अलग राज्यों से पर्यटक बर्फबारी का मजा लेने के लिए कश्मीर पहुंच रहे हैं और सुंदर वादियों के नजारों का लुफ्त उठा रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद जम्मू और कश्मीर के पर्यटन पर बड़ा प्रभाव पड़ा था। जम्मू और कश्मीर का मुख्य व्यवसाय ही पर्यटन है, जहां की दुकानों से लेकर होटल पर्यटकों के आने पर चलते हैं। ऑफ सीजन में स्थानीय लोगों की कमाई कम होती है, लेकिन बर्फबारी के सीजन में घाटी और स्थानीय लोगों के चेहरों पर मुस्कान आ जाती है।

डिप्लोमेसी से पहले तबाही का संदेश, जेलेंस्की-ट्रंप बैठक से पहले रूस ने यूक्रेन पर बरसाए मिसाइल-ड्रोन

रूस  रूस ने शनिवार तड़के यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़ा हमला किया। इस हमले में कम से कम आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें एक 16 वर्षीय किशोर भी शामिल है। हमले के दौरान कई घंटों तक राजधानी में जोरदार धमाकों की आवाजें गूंजती रहीं और कई इलाकों में आग लग गई।कीव सिटी मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख तैमूर तकाचेंको के अनुसार, राजधानी के सात अलग-अलग स्थानों पर हमले हुए। ड्निप्रो जिले की एक 18 मंजिला रिहायशी इमारत में आग लग गई, जिसे काबू में करने के लिए आपातकालीन सेवाओं को भेजा गया। डारनित्सिया जिले की 24 मंजिला इमारत भी हमले की चपेट में आई।   इसके अलावा ओबोलोन्स्की और होलोसीवस्की जिलों में भी आगजनी की घटनाएं सामने आईं। व्यापक कीव क्षेत्र में औद्योगिक और रिहायशी इमारतों को नुकसान पहुंचा है। व्यशहोरोड इलाके में राहतकर्मियों ने मलबे में दबे एक व्यक्ति को जीवित बाहर निकाला। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं।   जेलेंस्की ने बताया कि इस बैठक में सुरक्षा गारंटी, युद्धविराम और डोनेट्स्क व जापोरिज़िया क्षेत्रों से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला अमेरिका-यूक्रेन वार्ता से पहले रूस की ओर से दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। लगभग चार साल से जारी इस युद्ध में हालिया हमले ने शांति प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

खामेनेई का बड़ा बयान: पश्चिमी देशों पर तीखा हमला, यूरोपीय युवाओं को आंदोलन में शामिल होने का आह्वान

ईरान  ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने यूरोप में पढ़ रहे इस्लामिक छात्र नेताओं को संबोधित करते हुए पश्चिमी देशों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पश्चिम ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नहीं, बल्कि उसकी “अवज्ञाकारी नीति” और मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने के साहस से नाराज़ है।खामेनेई ने दावा किया कि ईरानी युवाओं ने “साहस और बलिदान” के दम पर पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य शक्ति को पराजित किया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल हथियारों का नहीं, बल्कि विचारधारा का है, जिसमें ईरान “अन्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था” के खिलाफ खड़ा है। अपने संदेश में खामेनेई ने शहादत को मिशन का “ईंधन” बताते हुए कहा कि निर्वासन में रह रहे युवाओं को अब आगे आकर भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने यूरोप में रह रहे ईरानी और मुस्लिम छात्रों से पश्चिमी प्रभाव छोड़कर इस्लामिक आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया। खामेनेई ने कहा कि ईरान एक “न्यायपूर्ण इस्लामिक विश्व व्यवस्था” स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी कारण पश्चिमी ताकतें उसे निशाना बना रही हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान-पश्चिम संबंध पहले से ही परमाणु, क्षेत्रीय युद्ध और प्रतिबंधों को लेकर तनावपूर्ण बने हुए हैं।

चौंकाने वाला खुलासा: 2025 में भारतीयों के सबसे ज्यादा डिपोर्टेशन का रिकॉर्ड US नहीं, इस मुस्लिम देश के नाम

सऊदी अरब  साल 2025 में भारतीय नागरिकों के निर्वासन को लेकर सामने आए आंकड़ों ने आम धारणा को तोड़ दिया है। अधिकतर लोग मानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद अमेरिका से सबसे ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट किया गया, लेकिन विदेश मंत्रालय (MEA) के ताजा आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं।MEA के अनुसार, 2025 में सबसे ज्यादा भारतीयों को निर्वासित करने वाला देश सऊदी अरब रहा, जहां से करीब 11,000 भारतीयों को वापस भेजा गया। इनमें अधिकांश मजदूर और निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी थे, जिन्हें वीजा उल्लंघन, अवैध प्रवास, ओवरस्टे या स्थानीय कानूनों के उल्लंघन के कारण डिपोर्ट किया गया। इसके मुकाबले, अमेरिका से 2025 में 3,800 भारतीयों का निर्वासन हुआ, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा जरूर है, लेकिन सऊदी अरब के आंकड़े से काफी कम है। इनमें से अधिकांश कार्रवाई वाशिंगटन डीसी और ह्यूस्टन से की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन में दस्तावेजों की कड़ी जांच, वर्क ऑथराइजेशन और वीजा स्टेटस पर सख्ती इसका बड़ा कारण रही। MEA के मुताबिक, खाड़ी देशों में भारतीयों की बड़ी आबादी होने के कारण निर्वासन के मामले ज्यादा सामने आते हैं। सऊदी अरब के अलावा संयुक्त अरब अमीरात (1,469) और बहरीन (764) से भी बड़ी संख्या में भारतीयों को वापस भेजा गया। सामान्य कारणों में बिना वैध परमिट काम करना, नियोक्ता से फरार होना, श्रम कानूनों का उल्लंघन और सिविल या आपराधिक मामलों में फंसना शामिल है।दक्षिण–पूर्व एशिया में निर्वासन का पैटर्न अलग नजर आया। म्यांमार (1,591) और मलेशिया (1,485) के साथ थाईलैंड (481) और कंबोडिया (305) से भी भारतीयों को डिपोर्ट किया गया।   तेलंगाना सरकार की एनआरआई सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष भीमा रेड्डी के अनुसार, इन देशों में कई भारतीयों को ऊंची तनख्वाह का झांसा देकर बुलाया जाता है और बाद में अवैध साइबर गतिविधियों में जबरन काम कराया जाता है, जिसे “साइबर स्लेवरी” कहा जा रहा है। 2025 में भारतीय छात्रों के निर्वासन के मामलों में यूनाइटेड किंगडम शीर्ष पर रहा, जहां से 170 छात्रों को वापस भेजा गया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया (114), रूस (82) और अमेरिका (45) का स्थान रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि एजेंटों की धोखाधड़ी, स्थानीय कानूनों की अनभिज्ञता, वीजा नियमों का उल्लंघन और अतिरिक्त कमाई की कोशिश में किए गए छोटे अपराध भारतीयों के लिए विदेश में बड़ी मुसीबत बन रहे हैं।  

यूरोप में आतंक का गुप्त जाल बेनकाब: चैरिटी के नाम पर हमास को मदद, इटली में बड़ी कार्रवाई

इटली  इटली की आतंकवाद-रोधी एजेंसियों ने बड़ा खुलासा करते हुए हमास को अवैध रूप से फंडिंग करने के आरोप में तीन चैरिटी संगठनों से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। अभियोजकों के अनुसार, इन संगठनों ने मानवीय सहायता की आड़ में करीब 7 मिलियन यूरो (लगभग 82 लाख डॉलर) हमास से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचाए।इटली के अभियोजकों ने बताया कि गिरफ्तार लोगों में मोहम्मद हन्नून भी शामिल है, जो इटली में फिलिस्तीनी एसोसिएशन का अध्यक्ष है। अभियोजकों ने उसे “हमास के इटालियन सेल का प्रमुख” बताया है। गौरतलब है कि यूरोपीय संघ (EU) ने हमास को आधिकारिक तौर पर आतंकी संगठन घोषित कर रखा है।  कैसे होती थी फंडिंग? जांच में सामने आया कि फंडिंग को छुपाने के लिए बैंक ट्रांसफर, विदेशों में स्थित संगठनों के जरिए तथाकथित “ट्रायएंगुलेशन ऑपरेशंस”  का इस्तेमाल किया गया। यह पैसा उन संगठनों तक पहुंचाया गया जो गाज़ा, फिलिस्तीनी इलाकों या इज़राइल में स्थित थे और जिनके हमास से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध थे। इनमें से कई संगठनों को इज़राइल पहले ही अवैध घोषित कर चुका है।  इटली सरकार का सख्त संदेश इटली के गृह मंत्री मातेओ पियांतेडोसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि “यह ऑपरेशन उन गतिविधियों से पर्दा उठाता है, जो फिलिस्तीनी जनता की मदद के नाम पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन और भागीदारी छिपाए हुए थीं।” यूरोप स्तर पर कार्रवाई इस जांच में अन्य EU देशों की एजेंसियों ने भी सहयोग किया। जनवरी 2025 में ही यूरोपीय परिषद ने हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद को फंडिंग करने वाले 12 व्यक्तियों और 3 संस्थाओं पर प्रतिबंध बढ़ाया था, जिससे यह कार्रवाई और अहम हो जाती है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों या संबंधित संगठनों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।  

जम्मू-कश्मीर: नरबल–तांगमर्ग हाईवे से गुजरने वाले वाहनों की कड़ी चेकिंग, जानिए क्या है वजह

बडगाम  SSP बडगाम के निर्देश पर, नए साल के जश्न से पहले पूरे जिले में सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है। SDPO मगाम, SHO मगाम, CRPF कंपनी कमांडर और असिस्टेंट कमांडेंट सिक्योरिटी के इंतजामों की निगरानी और उन्हें आसान बनाने के लिए जमीन पर मौजूद रहे। सड़कों की अच्छी तरह से जांच करने और किसी भी संदिग्ध चीज का पता लगाने के लिए खास टीमों ने स्निफ़र डॉग्स, DSMD, और HHMD जैसे मॉडर्न सर्विलांस टूल्स तैनात किए। मगाम इलाके में नरबल-तांगमर्ग हाईवे पर संदिग्ध लोगों और गाड़ियों की फिजिकल जांच की जा रही है। सुरक्षा के इन कड़े उपायों का मकसद जिले में शांति और बिना किसी घटना के नया साल मनाना है। 

नेपाल बना बीजिंग की कठपुतली? तिब्बतियों की निगरानी के लिए लगाए गए सीक्रेट कैमरे

चीन चीन ने अपनी निगरानी और दमन नीति को सीमाओं से बाहर फैलाते हुए नेपाल में तिब्बतियों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए अमेरिकी तकनीक से लैस सर्विलांस कैमरे स्थापित किए हैं। नेपाल से सामने आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, काठमांडू और सीमा क्षेत्रों में गुप्त कैमरे बड़ी संख्या में लगाए गए हैं, जिनका उद्देश्य सुरक्षा नहीं बल्कि तिब्बती समुदाय की निगरानी बताया जा रहा है। तिब्बती संसद-इन-एग्ज़ाइल की उपाध्यक्ष डोल्मा त्सेरिंग ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ये कैमरे तिब्बतियों को मानवाधिकार प्रदर्शनों में हिस्सा लेने, चीन में हो रहे अत्याचारों पर बोलने और स्वतंत्र आवाज़ उठाने से डराने का जरिया बन गए हैं। उन्होंने कहा कि ल्हासा में घरों की खिड़कियों से ज़्यादा सीसीटीवी कैमरे हैं, जो चीन की दमनकारी नीति को दर्शाता है। डोल्मा त्सेरिंग ने आरोप लगाया कि नेपाल सरकार चीन के दबाव में आकर तिब्बतियों की आवाजाही सीमित कर रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से इस “सीमापार आक्रामकता” पर संज्ञान लेने और कार्रवाई की मांग की। उनके मुताबिक, पहले नेपाल तिब्बती शरणार्थियों के लिए सुरक्षित मार्ग था, लेकिन अब वहां से भारत और अन्य देशों तक पहुंच लगभग ठप हो गई है।   तिब्बती संसद सदस्य ल्हा ग्यारी नामग्याल डोलकर ने भी चिंता जताते हुए कहा कि चीन ने निगरानी तकनीक को वैश्विक स्तर पर तिब्बतियों, उइगरों, मंगोलियनों और हांगकांग वासियों को दबाने के हथियार में बदल दिया है। उन्होंने अमेरिकी कंपनियों से भी सवाल किया कि उनकी तकनीक का इस्तेमाल मानवाधिकार हनन के लिए हो रहा है। तिब्बती नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ध्यान नहीं दिया, तो चीन की यह नीति क्षेत्रीय संप्रभुता और भारत सहित पड़ोसी देशों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती है।  

कर्नाटक में सरकारी कार्रवाई से बढ़ा विवाद, बेंगलुरु में 400+ घरों को किया गया ध्वस्त

बेंगलुरु बेंगलुरु में 400 से ज़्यादा घरों को गिराने के बाद कर्नाटक सरकार विवादों में घिर गई है. जिससे सैकड़ों लोग, जिनमें ज़्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग हैं, बेघर हो गए हैं. इस हफ़्ते की शुरुआत में हुई इस बड़े पैमाने पर बेदखली की कार्रवाई ने सत्ताधारी कांग्रेस और केरल लेफ्ट फ्रंट यूनिट के बीच ज़बरदस्त जुबानी जंग छेड़ दी है.  जानकारी के अनुसार 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव में फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में तोड़फोड़ की गई. जिससे करीब 400 परिवार बेघर हो गए. यह कार्रवाई ऐसे वक्त में की गई, जब शहर में साल की सबसे ज़्यादा ठंड पड़ रही है. बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML) द्वारा चलाए गए इस अभियान में 4 JCB और 150 से ज़्यादा पुलिसकर्मी शामिल थे.  कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में उतरे लोग  मामले में कर्नाटक सरकार ने कहा कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास एक झील के किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बनाए गए थे. हालांकि, निवासियों ने दावा किया कि उन्हें पहले से कोई नोटिस नहीं मिला था. पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती बेदखल कर दिया. इससे सैकड़ों लोगों को कड़ाके की ठंड में सड़कों पर और अस्थायी शेल्टरों के नीचे रातें बितानी पड़ रही हैं. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कुछ निवासियों के हवाले से बताया गया है कि  वे 25 सालों से इस इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैलिड आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं. निकाले गए ज़्यादातर लोग प्रवासी हैं और मज़दूर के तौर पर काम करते हैं. यह मुद्दा अब कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़ा विवाद बन गया है. इस एक्शन के खिलाफ लोग विरोध में उतर आए हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं.  एक गुट ने राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी विरोध प्रदर्शन किया. साथ ही कार्रवाई के विरोध में दलित संघर्ष समिति जैसे कई संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है. कार्रवाई की केरल के मुख्यमंत्री ने की निंदा इस कार्रवाई को लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कांग्रेस की की निंदा की है. उन्होंने इसे कांग्रेस की "अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति" बताया है. एक्स पर किए गए एक पोस्ट में विजयन ने कहा कि दुख की बात है कि संघ परिवार की अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति अब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तहत चलाई जा रही है. जब कोई सरकार डर और ज़बरदस्ती से शासन करती है, तो संवैधानिक मूल्य और मानवीय गरिमा सबसे पहले शिकार होते हैं. वहीं मामले में केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने कहा कि कांग्रेस सरकार की "अमानवीय कार्रवाई" इमरजेंसी के दौर की याद दिलाती है. जो लोग धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के नाम पर सत्ता में आए हैं, वे गरीब लोगों के घरों को तोड़कर एक बार फिर अपना पाखंड दिखा रहे हैं.  उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पिनाराई को दिया जवाब सीपीआई और केरल सीएम की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यह इलाका कब्ज़ा की गई कचरा फेंकने की जगह थी. लेकिन लैंड माफिया इसे झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा कि हमने लोगों को नई जगहों पर शिफ्ट होने का समय दिया था. हम बुलडोज़र चलाने में विश्वास नहीं करते. पिनाराई विजयन पर तंज कसते हुए शिवकुमार ने ज़ोर देकर कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. कांग्रेस के सीनियर नेता ने यह भी कहा कि पिनारयी विजयन जैसे सीनियर नेताओं को बेंगलुरु की समस्याओं के बारे में पता होना चाहिए. हम अपने शहर को अच्छी तरह जानते हैं और हम ऐसी झुग्गियों को बढ़ावा नहीं देना चाहते जो लैंड माफिया की एक्टिविटीज़ को बढ़ावा देती हैं.   

दादी खालिदा जिया की विरासत आगे बढ़ाएंगी जायमा रहमान? पिता के साथ वापसी ने बदली सियासी तस्वीर

ढाका  बांग्लादेश की राजनीति में जिया परिवार की चौथी पीढ़ी के प्रवेश की चर्चा तेज हो गई है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान की इकलौती बेटी बैरिस्टर जायमा रहमान अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने की तैयारी कर रही हैं। 17 साल लंदन में निर्वासन की जिंदगी बिताने के बाद 25 दिसंबर को पिता के साथ देश लौटीं जायमा ने फेसबुक पोस्ट और पार्टी मीटिंग्स में अपनी इच्छा जाहिर की है कि वे बांग्लादेश के पुनर्निर्माण में योगदान देना चाहती हैं और लोगों से सीधा जुड़कर देश को समझना चाहती हैं।   जायमा रहमान का जन्म 26 अक्टूबर 1995 को हुआ था। वे पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालेदा जिया की पोती हैं। बचपन ढाका में बीता, लेकिन 2008 में जब तारिक रहमान चिकित्सा और राजनीतिक कारणों से लंदन चले गए, तब 13 साल की जायमा भी मां डॉ. जुबाइदा रहमान के साथ वहां चली गईं। लंदन में क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और लिंकन्स इन से बैरिस्टर बनीं। कानूनी प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने लोगों के साथ काम करके सहानुभूति, ईमानदारी और न्याय की समझ विकसित की। 'मैं कभी अपनी जड़ों की देखभाल करना नहीं भूली', ये लाइन जायमा ने हाल ही में अपने एक फेसबुक पोस्ट में लिखीं। जायमा ने अपनी पोस्ट में अपनी दादी और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा को प्यार से 'डाडू' कहते हुए याद किया। बता दें कि जायमा ने अब तक न तो कोई औपचारिक पार्टी पद संभाला है और न ही कभी चुनाव लड़ा है। बीते 17 वर्षों में उनका जीवन मुख्यतः लंदन में उनके कानूनी पेशे के इर्द-गिर्द रहा। ढाका में भव्य स्वागत, जायमा की ‘शांत’ एंट्री तारिक रहमान की वापसी पर हजारों समर्थक ढाका की सड़कों पर उमड़ पड़े। यह एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी था। हालांकि, जायमा रहमान की एंट्री अपेक्षाकृत शांत रही। वह अपनी मां जुबैदा रहमान के साथ गुरुवार को गुलशन एवेन्यू के 196 नंबर आवास पर पहुंचीं। राजनीतिक मंच पर रोशनी भले तारिक रहमान पर रही, लेकिन लंदन से ढाका तक के सफर की तस्वीरें वायरल होने के साथ जायमा रहमान भी देश की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गईं। पेशे से बैरिस्टर, राजनीति में नई उम्मीद? यूनाइटेड किंगडम में प्रशिक्षित बैरिस्टर जायमा को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के लिए ‘नवीनीकरण’ का चेहरा माना जा रहा है। बीएनपी लंबे समय से भ्रष्टाचार, घोटालों और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों से घिरी रही है। तारिक रहमान का ‘हावा भवन’ एक समय BNP-जमात गठबंधन सरकार के दौरान सत्ता का वैकल्पिक केंद्र माना जाता था। वह भी इन्हीं विवादों से जुड़ा रहा। ऐसे में, फरवरी 2026 में संभावित राष्ट्रीय चुनावों से पहले तारिक रहमान की नई छवि गढ़ने की कोशिशों में जायमा एक अहम भूमिका निभा सकती हैं, खासकर युवाओं को जोड़ने के लिहाज से। पार्टी पहले से ही युवा मतदाताओं को लुभाने की रणनीति पर काम कर रही है। यादें और राजनीति जायमा पहली बार 2001 के आम चुनावों में मीडिया की नजर में आई थीं, जब वह महज छह साल की उम्र में अपनी दादी खालिदा जिया के साथ मतदान केंद्र गई थीं। उस चुनाव में BNP को भारी जीत मिली थी और खालिदा दिया प्रधानमंत्री बनी थीं। हाल के फेसबुक पोस्ट में जायमा ने अपने बचपन की एक याद साझा की, जो पहले ढाका ट्रिब्यून में रिपोर्ट हुई थी। उन्होंने बताया कि कैसे 11 साल की उम्र में फुटबॉल टूर्नामेंट जीतने के बाद वह अपना मेडल सीधे डाडू को दिखाने उनके ऑफिस गई थीं। जायमा ने लिखा- जिस गर्व और ध्यान से वह मेरी बात सुन रही थीं, वही याद आज भी मेरे साथ है। 2021 का विवाद और राजनीतिक मुखरता 2021 में जायमा उस वक्त सुर्खियों में आईं जब आवामी लीग के मंत्री मुराद हसन ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इसके बाद हसन को इस्तीफा देना पड़ा और उनके खिलाफ मानहानि का मामला भी दर्ज हुआ। हालांकि, जायमा की वास्तविक राजनीतिक सक्रियता जुलाई छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद शुरू हुई, जब वह अपने पिता के साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई देने लगीं और कई मंचों पर उनका प्रतिनिधित्व भी किया। उन्होंने वाशिंगटन डीसी में नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट में BNP प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर हिस्सा लिया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता मिर्ज़ा फखरुल और आमिर खस्रू भी शामिल थे। 23 नवंबर 2025 को उन्होंने BNP की अपनी पहली औपचारिक बैठक में भाग लिया, जहां यूरोपीय प्रतिनिधियों का एक दल भी मौजूद था। तारिक रहमान की घरवापसी और जायमा की भूमिका तारिक रहमान 17 साल बाद पत्नी जुबैदा और बेटी जायमा के साथ ढाका लौटे। हवाई अड्डे पर हजारों समर्थकों ने भव्य स्वागत किया। तारिक ने नंगे पांव जमीन को छुआ और कहा- 6314 दिन बाद बांग्लादेश के आकाश में वापस।' जायमा ने भी विमान से फोटो शेयर कर लिखा- मातृभूमि की ओर वापस। फरवरी 2026 में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले बीएनपी मजबूत स्थिति में है। तारिक रहमान को अगला प्रधानमंत्री उम्मीदवार माना जा रहा है। ऐसे में जायमा का प्

जमीनी परिवहन में नया रिकॉर्ड, चीन के हाइपरलूप ने छुई 700 km/h की स्पीड

 नई दिल्ली चीन ने मैग्नेटिक लेविटेशन (मैग्लेव) तकनीक में नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी (NUDT) के वैज्ञानिकों ने एक 1 टन वजनी टेस्ट वाहन को सिर्फ 2 सेकेंड में 700 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड तक पहुंचा दिया. यह टेस्ट 400 मीटर लंबे ट्रैक पर हुआ. वाहन को सुरक्षित रोक भी लिया गया. टेस्ट की पूरी जानकारी सरकारी चैनल CCTV ने वीडियो दिखाया, जिसमें वाहन सिर्फ एक चेसिस जैसा लगता है. वह ट्रैक पर धुंध की तरह तेजी से गुजरता है. पीछे धुआं छोड़ता है. यह सुपरकंडक्टिंग इलेक्ट्रिक मैग्लेव सिस्टम है, जो दुनिया में सबसे तेज एक्सेलरेशन और स्पीड का रिकॉर्ड है. टेस्ट में बहुत तेज ब्रेकिंग भी सफल रही. तकनीकी सफलताएं इस उपलब्धि से कई बड़ी समस्याएं हल हो गईं…     अल्ट्रा-हाई-स्पीड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रोपल्शन.      इलेक्ट्रिक सस्पेंशन और गाइडेंस.     हाई-पावर एनर्जी स्टोरेज.     हाई-फील्ड सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स. प्रोफेसर ली जी ने कहा कि यह सफलता चीन में अल्ट्रा-हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रांसपोर्ट के विकास को तेज करेगी. मैग्लेव ट्रेन क्या है? मैग्लेव ट्रेन (Maglev Train) का पूरा नाम मैग्नेटिक लेविटेशन ट्रेन है. यह एक विशेष तरह की तेज रफ्तार ट्रेन है जो सामान्य पटरियों पर पहियों से नहीं चलती, बल्कि चुंबकीय शक्ति (मैग्नेटिक फोर्स) से पटरी से कुछ सेंटीमीटर ऊपर हवा में तैरती हुई चलती है. कैसे काम करती है? ट्रेन और पटरी में शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेट लगे होते हैं. एक जैसे चुंबक एक-दूसरे को धक्का देते हैं (रिपल्शन), जिससे ट्रेन पटरी से ऊपर उठ जाती है (लगभग 1-10 सेमी). आगे बढ़ाने के लिए चुंबकीय क्षेत्र को बदल-बदल कर पुल और पुश किया जाता है. इससे घर्षण (फ्रिक्शन) बिल्कुल नहीं होता, इसलिए ट्रेन बहुत तेज चल सकती है. फायदे बहुत तेज स्पीड: 400-600 km/h या इससे ज्यादा (सामान्य ट्रेन से दोगुनी). कम शोर, कम कंपन, आरामदायक सफर. कम रखरखाव क्योंकि पहिए और पटरी नहीं घिसते. पर्यावरण के लिए अच्छी क्योंकि बिजली से चलती है, प्रदूषण कम. भविष्य में क्या फायदे? यह तकनीक सिर्फ ट्रेनों तक सीमित नहीं…     वैक्यूम ट्यूब में हाइपरलूप जैसी ट्रांसपोर्ट (1000 km/h तक संभव).     रॉकेट और हवाई जहाजों के लॉन्च में शुरुआती बूस्ट और ईंधन बचत होगी.     एयरोस्पेस टेस्टिंग के लिए जमीनी सिमुलेशन आसान हो जाएगी. चीन का मैग्लेव इतिहास     30 साल पहले इसी यूनिवर्सिटी ने चीन का पहला मानवयुक्त मैग्लेव बनाया.     10 साल की रिसर्च के बाद जनवरी 2025 में 648 km/h रिकॉर्ड.     शंघाई मैग्लेव दुनिया की एकमात्र कॉमर्शियल सर्विस (430 km/h).     दातोंग में 2 km वैक्यूम ट्यूब लाइन, लक्ष्य 1000 km/h. यह ब्रेकथ्रू दुनिया की ट्रांसपोर्ट और स्पेस तकनीक बदल सकता है. चीन अब इस क्षेत्र में दुनिया के टॉप देशों में शामिल हो गया है. आने वाले सालों में और बड़े टेस्ट होने की उम्मीद है.