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11 दिन बाद ऑस्ट्रेलिया में दोबारा यहूदियों पर हमला, कार पर फायर बम फेंकने की घटना

सिडनी     आस्ट्रेलिया में क्रिसमम की सुबह से पहले एक बार फिर से यहूदी पर हमला किया गया है. असामाजिक तत्वों ने मेलबॉर्न में एक रब्बी की कार को जलाने की कोशिश की है. ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने इसे कार की फायर बॉम्बिंग का नाम दिया है. प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने इस घटना को संदिग्ध एंटी सेमिटिज्म करार दिया है.  एंटी-सेमिटिज्मका मतलब है यहूदियों के प्रति घृणा, पूर्वाग्रह, भेदभाव या दुश्मनी. यह नस्लवादी विचारधारा है जो यहूदियों को निशाना बनाती है, उन्हें दोषी ठहराती है या उनके खिलाफ हिंसा, बहिष्कार या साजिश फैलाती है.  ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने कहा कि क्रिसमस की सुबह से पहले एक रब्बी की कार पर आग लगाने वाला बम फेंका गया. घटना में कार का दरवाजा जल गया दिखता है. पुलिस ने इस रब्बी परिवार को रेस्क्यू कर लिया है.  पुलिस सेंट किल्डा ईस्ट में इस यहूदी विरोधी हमले की जांच कर रही है. गुरुवार को सुबह करीब 2.50 बजे बालाक्लावा रोड पर रब्बी के घर के ड्राइव वे में खड़ी एक सिल्वर सेडान कार में आग लगा दी गई थी.  इस कार के ऊपर 'हैप्पी हनुक्का' का एक छोटा सा बोर्ड लगा था.  पुलिस ने बताया कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन एहतियात के तौर पर रब्बी के परिवार को वहां से निकाल लिया गया. एक प्रवक्ता ने कहा, "मूरैबिन क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट के जासूस गुरुवार, 25 दिसंबर को सेंट किल्डा ईस्ट में लगी संदिग्ध आग की जांच कर रहे हैं." "जासूसों ने एक ऐसे व्यक्ति की पहचान की है जो उनकी जांच में मदद कर सकता है. घटना की जांच जारी है." जली हुई कार को गुरुवार सुबह ड्राइववे से हटा दिया गया, लेकिन उसकी खिड़कियों के टूटे हुए कांच मेलबर्न के यहूदी समुदाय के बीच स्थित घर के ड्राइववे में पड़े रहे. यह घर एक यहूदी स्कूल के सामने है, यहां सामने के दरवाज़े के पास एक छोटे बच्चे की साइकिल और जूतों की कतारें रखी थीं.  यह आगजनी की घटना बॉन्डी बीच पर हनुक्का फेस्टिवल में दो बंदूकधारियों द्वारा हमला करने के 11 दिन बाद हुई, जिसमें 15 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी. यहूदियों का रोशनी का त्योहार हनुक्का 22 दिसंबर को खत्म हुआ था. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने इस घटना पर शोक जताया है. उन्होंने कहा कि बॉन्डी आतंकवादी हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया का यहूदी समुदाय शोक में है. मेलबर्न में एक कार पर आग लगाने की घटना संदिग्ध यहूदी-विरोधी भावना का एक और भयानक काम है. फेडरल अधिकारी मदद के लिए तैयार हैं.  पीएम अल्बनीज ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया में इस तरह की नफरत के लिए कोई जगह नहीं है और इसे रुकना ही होगा. 

हिंदू, ईसाई और सिख समुदाय बांग्लादेश में हिंसा का शिकार, दुनिया ने जताई चिंता

नई दिल्ली बांग्लादेश में हिंदुओं सहित धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है. हालात ऐसे हैं कि केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि ईसाई और सिख समुदाय भी हिंसा और अमानवीय व्यवहार का शिकार बन रहे हैं. हाल ही में एक हिंदू युवक को भीड़ द्वारा बेरहमी से मार डाले जाने और बाद में उसके शव को पेड़ से लटकाकर जला दिए जाने की घटना ने पूरी दुनिया को भीतर तक झकझोर कर रख दिया है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि हिंदुओं के लिए आखिर सबसे अत्याचारी मुस्लिम देश कौन सा है? क्या सबसे अत्याचारी देश की कोई आधिकारिक रैंकिंग है? सबसे पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी भी मान्य अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा हिंदुओं के लिए सबसे अत्याचारी मुस्लिम देश की आधिकारिक रैंकिंग जारी नहीं की जाती है. धार्मिक स्वतंत्रता पर काम करने वाली संस्थाएं- जैसे USCIRF, Amnesty International और Pew Research देशों की स्थिति को घटनाओं, कानूनों और सामाजिक माहौल के आधार पर आकलित करती हैं, न कि किसी एक समुदाय के लिए सीधी रैंकिंग बनाती हैं.  धार्मिक उत्पीड़न को कैसे मापा जाता है अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स आमतौर पर तीन आधार देखती हैं- कानूनी ढांचा, सरकारी संरक्षण या निष्क्रियता, और सामाजिक हिंसा. जब किसी देश में अल्पसंख्यकों पर हमले होते हैं और उन पर कार्रवाई नहीं होती, तो उसे धार्मिक स्वतंत्रता के लिए जोखिमपूर्ण माना जाता है. यह आकलन किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि सभी अल्पसंख्यकों पर लागू होता है. कौन सा देश हिंदुओ के लिए सबसे अत्याचारी किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने यह घोषित नहीं किया है कि किस मुस्लिम देश में हिंदुओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार होता है, लेकिन मान्य वैश्विक रिपोर्टों और तथ्यों के आधार पर कुछ देशों का नाम बार-बार गंभीर स्थिति के रूप में सामने आता है. वर्तमान अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार हिंदुओं के लिए सबसे ज्यादा कठिन और असुरक्षित हालात जिन मुस्लिम देशों में माने जाते हैं, उनमें पाकिस्तान और अफगानिस्तान टॉप पर आते हैं. पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ जबरन धर्मांतरण, विशेषकर नाबालिग लड़कियों के मामले, मंदिरों पर हमले, ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग और सामाजिक भेदभाव जैसी घटनाएं लगातार अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दर्ज होती रही हैं. यही कारण है कि USCIRF और अन्य मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में पाकिस्तान को धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए उच्च जोखिम वाला देश माना जाता है. अफगानिस्तान के हालात अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद हालात और भी खराब हुए हैं. वहां हिंदू समुदाय लगभग समाप्ति की कगार पर है. धार्मिक स्वतंत्रता लगभग नहीं के बराबर है और खुले तौर पर हिंदू पहचान के साथ रहना बेहद मुश्किल माना जाता है. बांग्लादेश की स्थिति क्या कहती है बांग्लादेश एक मुस्लिम-बहुल देश है, जहां हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय हैं. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में बांग्लादेश को अक्सर वॉच लिस्ट या चिंताजनक घटनाओं वाला देश माना गया है. दुर्गा पूजा के दौरान हिंसा, मंदिरों पर हमले और जबरन पलायन की घटनाएं समय-समय पर रिपोर्ट हुई हैं. हालांकि बांग्लादेश का संविधान धर्मनिरपेक्षता की बात करता है और सरकार आधिकारिक रूप से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का दावा करती है. लेकिन इस वक्त वहां के हालात हिंदुओं के बद से बदत्तर हो चुके हैं. 

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर का असर, पूरी सैलरी कैलकुलेशन समझें

नई दिल्ली सातवें वेतन आयोग की समय-सीमा 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रही है। ऐसे में आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि 1 जनवरी 2026 से नई वेतन संरचना लागू हो सकती है, जिसका सीधा लाभ देश के करीब 1.19 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स (Salary Hike) को मिलेगा। फिटमेंट फैक्टर का सैलरी पर पड़ेगा ये असर कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को लेकर है। अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है, तो सैलरी और पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। वेतन में इजाफा इसी फैक्टर पर निर्भर करता है, क्योंकि इसी के आधार पर नई बेसिक सैलरी (Salary calculations) तय की जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फिटमेंट फैक्टर तय करते समय महंगाई, जीवन-यापन की लागत, CPI और CPI-IW के आंकड़े, सरकार की वित्तीय स्थिति, बजट और प्राइवेट सेक्टर की सैलरी से तुलना जैसे कई पहलुओं पर विचार किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.15 होता है, तो नई बेसिक सैलरी 38,700 रुपये हो जाएगी। वहीं, 50,000 रुपये बेसिक सैलरी वाले कर्मचारी की नई बेसिक सैलरी 1,07,500 रुपये तक पहुंच सकती है। ग्रेड              वर्तमान बेसिक पे (₹)     अनुमानित बेसिक पे (₹) Level 1            18,000                    38,700.00 Level 2             19,900                   42,785.00 Level 3             21,700                   46,655.00 Level 4            25,500                    54,825.00 Level 5             29,200                   62,780.00 Level 6             35,400                   76,110.00 Level 7            44,900                    96,535.00 Level 8            47,600                    102,340.00 Level 9            53,100                      114,165.00 Level 10         56,100                   120,615.00 Level 11         67,700                    145,555.00 Level 12        78,800                   169,420.00 Level 13       118,500                  254,775.00 Level 13       131,100                   281,865.00 Level 14        144,200                    310,030.00 Level 15        182,200                   391,730.00 Level 16        205,400                      441,610.00 Level 17          225,000                    483,750.00 Level 18           250,000                 537,500.00 DA-HRA में भी बड़ा इजाफा संभव चूंकि महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और पेंशन जैसी सुविधाएं बेसिक सैलरी से जुड़ी होती हैं, इसलिए कुल मासिक आय और रिटायरमेंट लाभों में भी बड़ा इजाफा संभव है। हालांकि, आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को अंतिम रूप देने में सरकार को करीब दो साल लग सकते हैं, ऐसे में कर्मचारियों को एरियर मिलने की भी संभावना जताई जा रही है।

ड्रोन टेक्नोलॉजी पर सख्ती: अमेरिका ने विदेशी ड्रोन संचालन पर लगाई रोक, चीन ने दी प्रतिक्रिया

बीजिंग  चीन ने मंगलवार को अमेरिका के उस निर्णय की कड़ी निंदा की, जिसके तहत 'राष्ट्रीय सुरक्षा' के नाम पर सभी विदेशी निर्मित ड्रोन प्रणालियों और उनके प्रमुख घटकों को प्रतिबंधित आपूर्तिकर्ताओं की सूची में शामिल किया गया है। चीन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने अपना रवैया नहीं बदला, तो वह अपने उद्यमों के वैध हितों की रक्षा के लिए आवश्यक और प्रभावी कदम उठाएगा। चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह प्रतिक्रिया अमेरिकी संघीय संचार आयोग (एफसीसी) द्वारा हाल ही में जारी नोटिस के बाद दी। इस नोटिस के अनुसार, सभी विदेशी ड्रोन कंपनियों को 'अविश्वसनीय आपूर्तिकर्ताओं' की सूची में डाल दिया गया है, जिससे उनका अमेरिकी बाजार में संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। प्रवक्ता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने चीनी और अमेरिकी कंपनियों के बीच सामान्य व्यापारिक लेनदेन तथा दोनों देशों के उद्योग जगत की वास्तविक आवश्यकताओं की बार-बार अनदेखी की है। उसने 'राष्ट्रीय सुरक्षा' की अवधारणा का दुरुपयोग कर चीनी उद्यमों को दबाने और प्रतिस्पर्धा को अनुचित तरीके से सीमित करने का प्रयास किया है। यह बाजार व्यवस्था को बाधित करने और एकतरफा दबाव की नीति का उदाहरण है। उन्होंने आगे कहा कि चीन अमेरिका से इन गलत प्रथाओं को तुरंत समाप्त करने और संबंधित प्रतिबंधात्मक उपायों को वापस लेने का आग्रह करता है। यदि अमेरिका अपनी मनमानी जारी रखता है, तो चीन न केवल अपने उद्यमों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा करेगा, बल्कि आवश्यक होने पर जवाबी कार्रवाई भी करेगा। विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय दोनों देशों के बीच तकनीकी और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को और गहरा कर सकता है। ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चीन अग्रणी वैश्विक शक्ति है और अमेरिकी बाजार उसके लिए एक प्रमुख उपभोक्ता केंद्र माना जाता है। इस पृष्ठभूमि में चीन की तीखी प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि वाशिंगटन और पेइचिंग के बीच तकनीकी वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है।

कानूनी शिकंजा: हाजिर न होने पर मंत्री नितेश राणे पर कोर्ट सख्त, जारी हुआ NBW

सिंधुदुर्ग महाराष्ट्र में कुडाल कोर्ट ने राज्य के कैबिनेट मंत्री और सिंधुदुर्ग जिले के गार्डियन मिनिस्टर नितेश राणे को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई लंबे समय से कोर्ट में पेश न होने और बार-बार गैरहाजिर रहने के चलते की गई है। संविधान बचाने के लिए हुए प्रोटेस्ट से जुड़े प्रकरण में विधायक प्रवीण दरेकर और विधायक प्रसाद लाड के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। यह मामला 26 जून 2021 का है, जब सिंधुदुर्ग जिले में ओबीसी आंदोलन के दौरान कुडाल पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। प्रोटेस्ट के सिलसिले में राजन तेली, विधायक नीलेश राणे, मंत्री नितेश राणे और 42 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान विधायक नीलेश राणे, राजन तेली और अन्य आरोपी कोर्ट में उपस्थित थे, जबकि नितेश राणे सहित कुल छह आरोपी गैरहाजिर रहे। कोर्ट ने नितेश राणे के वकीलों द्वारा दी गई गैरहाजिरी की याचिका को खारिज कर दिया। लगातार तारीखों पर पेश न होने को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने उनके खिलाफ नॉन बेलेबल अरेस्ट वारंट जारी किया। इससे पहले नासिक हाउसिंग घोटाले से जुड़े मामले में कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी (अजित पवार गुट) नेता माणिकराव कोकाटे को दो साल की सजा सुनाई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन गिरफ्तारी से संरक्षण देते हुए दो साल की जेल की सजा को अंतिम सुनवाई तक निलंबित कर दिया। हाईकोर्ट का यह आदेश नासिक सेशन कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका पर आया है, जिसमें कोकाटे को सरकारी फ्लैटों के अवैध अधिग्रहण से जुड़े हाउसिंग फ्रॉड मामले में दो साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। सेशन कोर्ट के फैसले के बाद कोकाटे ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

गांवों में टिकाऊ विकास की बुनियाद रखने का संकल्प: ‘जी राम जी’ पर शिवराज चौहान की सोच को पीएमओ की सराहना

नई दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 'विकसित भारत-जी राम जी' पर लिखे लेख को शेयर किया है। पीएमओ ने कहा है कि 'विकसित भारत-जी राम जी' एक्ट 2025 को आय सहायता और बड़े ग्रामीण विकास के बीच एक रिश्ते के तौर पर देखा जा रहा है। इस आर्टिकल में 'विकसित भारत-जी राम जी' एक्ट 2025 को केवल योजनाओं या घटनाओं की एक शृंखला के रूप में नहीं, बल्कि इनकम सपोर्ट, संपत्ति निर्माण, कृषि स्थिरता और समग्र ग्रामीण विकास को जोड़ने वाले एक व्यापक आर्थिक फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पीएमओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "इस विधेयक को तैयार करने से पहले केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ बड़े पैमाने पर परामर्श किया था। इसके अलावा, तकनीकी कार्यशालाओं का आयोजन किया गया और विभिन्न हितधारकों-किसानों, ग्रामीण समुदायों, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ विस्तृत बातचीत की गई, ताकि जमीनी जरूरतों और व्यावहारिक चुनौतियों को समझा जा सके।" केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस पोस्ट पर पीएमओ ने लिखा कि यह जानकारीपूर्ण आर्टिकल 'विकसित भारत-जी राम जी' एक्ट 2025 की मूल भावना को उजागर करता है। यह कानून इनकम सपोर्ट, परिसंपत्ति निर्माण, कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता और समुदाय के नेतृत्व वाले ग्रामीण विकास को अलग-अलग पहलुओं के रूप में नहीं, बल्कि आपस में जुड़े हुए तत्वों के रूप में देखता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। आर्टिकल में यह भी जिक्र किया गया है कि 'विकसित भारत-जी राम जी' एक्ट 2025 का उद्देश्य केवल अल्पकालिक सहायता देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ विकास की नींव रखना है। इसके तहत रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे का विकास, कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि 'विकसित भारत-जी राम जी' एक्ट 2025 ग्रामीण भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायक सिद्ध होगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'विकसित भारत-जी राम जी' पर एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा कि अक्सर कहा जाता है कि बदलाव मौके पैदा करता है। मनरेगा की आड़ में यूपीए सरकार ने लोगों को बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं दिया। 'विकसित भारत-जी राम जी' बिल पेश करके हमने कांग्रेस द्वारा छोड़ी गई गंभीर कमियों को दूर करने की कोशिश की है। इस बिल के बारे में कांग्रेस द्वारा अब जो भ्रम और गलत जानकारी फैलाई जा रही है, उसका सिर्फ एक ही मकसद है अपनी नाकामियों और पिछले गलत कामों को छिपाना।

अफगान शरणार्थियों के लिए पाक-ईरान बने ‘नरक’! हर दिन हो रही जबरन वापसी, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों पर सवाल

ईरान पाकिस्तान और ईरान द्वारा अफ़ग़ान शरणार्थियों के खिलाफ सख़्त रवैये ने एक बार फिर मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिर्फ़ एक दिन में 3,000 से अधिक अफ़ग़ान शरणार्थियों को इन दोनों देशों से निकालकर अफ़ग़ानिस्तान भेज दिया गया। तालिबान के उप-प्रवक्ता मुल्ला हमदुल्ला फ़ितरत के अनुसार, मंगलवार को 693 परिवारों के कुल 3,610 लोग विभिन्न सीमा चौकियों के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान लौटे। इनमें तोरख़म, इस्लाम क़ला, स्पिन बोल्डक और बह्रामचा जैसे प्रमुख बॉर्डर पॉइंट शामिल हैं। फ़ितरत ने बताया कि कुछ परिवारों को उनके मूल इलाक़ों तक पहुँचाया गया, जबकि सीमित संख्या में लोगों को मानवीय सहायता दी गई। बावजूद इसके, ज़मीनी हक़ीक़त बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। अफ़ग़ान मीडिया और शरणार्थियों के बयानों के मुताबिक, पाकिस्तान में रह रहे अफ़ग़ान नागरिक लगातार पुलिस दबाव, अवैध गिरफ़्तारी और कथित वसूली का सामना कर रहे हैं। कई मामलों में सादे कपड़ों में लोग खुद को पुलिस बताकर शरणार्थियों को पकड़ लेते हैं, जिससे डर और अराजकता का माहौल बना हुआ है। अफ़ग़ान शरणार्थियों का कहना है कि न तो उन्हें बुनियादी मानवाधिकार मिल रहे हैं और न ही उनकी शिकायत सुनने वाला कोई है। हालात इतने खराब हैं कि कई लोग यह भी नहीं समझ पाते कि उन्हें पकड़ने वाले पुलिस हैं या अपराधी। विश्लेषकों का मानना है कि तालिबान-पाकिस्तान तनाव के बीच शरणार्थियों को दबाव का हथियार बनाया जा रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस पूरे संकट पर लगभग चुप हैं।  

अरुणाचल पर फिर साया चीनी खतरे का? पूर्व राजनयिक बोले— भारत की सीमाओं का सम्मान नहीं करता ड्रैगन

नई दिल्ली  पूर्व भारतीय राजनयिक के.पी. फैबियन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चीन की विस्तारवादी नीतियों को लेकर भारत को एक बार फिर सतर्क रहने की जरूरत है। चीन भारत की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान नहीं करता और अरुणाचल प्रदेश पर उसका दावा उसी विस्तारवादी मानसिकता का हिस्सा है, जो दशकों से चली आ रही है। बातचीत में फैबियन ने हालिया पेंटागन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत की तथाकथित ‘पांच उंगलियों’ में से एक मानता है। उन्होंने कहा कि यह सोच न तो नई है और न ही मासूम बल्कि यह चीन की सोची-समझी भू-राजनीतिक रणनीति को दर्शाती है। फैबियन के अनुसार, चीन का इतिहास बताता है कि वह पड़ोसी देशों की सीमाओं का सम्मान करने के बजाय विस्तार को अपना अधिकार समझता है। उन्होंने साफ कहा, “चीन भारत की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान नहीं करता।”हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि भारत व्यावहारिक नीति अपनाते हुए व्यापार, निवेश और संवाद के स्तर पर चीन से रिश्ते बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे चीन की असल मंशा नहीं बदलती। पेंटागन की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को रोकने की कोशिश कर रहा है।   इस पर फैबियन ने दो टूक कहा कि चीन चाहे जितनी कोशिश कर ले, वह भारत-अमेरिका रिश्तों को रोक नहीं सकता। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपनी तथाकथित ‘कोर इंटरेस्ट्स’ की सूची में अरुणाचल प्रदेश, ताइवान, दक्षिण चीन सागर और अन्य विवादित क्षेत्रों को शामिल कर लिया है। बीजिंग 2049 तक “महान चीनी पुनरुत्थान” के नाम पर सैन्य और भू-राजनीतिक विस्तार की योजना पर काम कर रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर तनाव कम करने के बावजूद भारत को चीन की मंशा को लेकर भ्रम में नहीं रहना चाहिए। अरुणाचल पर दावा, एलएसी पर दबाव और कूटनीतिक चालें ये सभी चीन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा हैं।

जाफर एक्सप्रेस बनी आतंकियों का निशाना, बम धमाके से उड़ा मुख्य रेलवे ट्रैक; बड़ा हादसा टला

पेशावर  पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में आतंकियों ने एक बार फिर रेलवे ढांचे को निशाना बनाया है। नसीराबाद जिले के नोटल इलाके के पास मुख्य रेलवे ट्रैक पर लगाए गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) में विस्फोट हो गया, जिससे ट्रैक का एक हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।पुलिस के अनुसार, यह विस्फोट जाफर एक्सप्रेस के मौके पर पहुंचने से पहले हो गया, जिससे एक बड़े रेल हादसे से बचाव हो सका। जाफर एक्सप्रेस पेशावर से क्वेटा जा रही थी, जिसे एहतियातन डेरा मुराद जमाली स्टेशन पर रोक दिया गया। विस्फोट के बाद क्वेटा और अन्य क्षेत्रों के बीच रेल सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गईं।घटना के तुरंत बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ते और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान एक अन्य विस्फोटक डिवाइस को भी समय रहते निष्क्रिय किया गया। गौरतलब है कि जाफर एक्सप्रेस पहले भी कई बार आतंकियों के निशाने पर रही है। नवंबर में बोलान पास इलाके में ट्रेन पर फायरिंग की गई थी।    अक्टूबर में सिंध के शिकारपुर जिले में ट्रैक ब्लास्ट में सात लोग घायल हुए थे। इस साल मार्च में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) की मजीद ब्रिगेड ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर 400 से अधिक यात्रियों को बंधक बना लिया था, जिसमें कई सुरक्षाकर्मियों की मौत का दावा किया गया था। लगातार हो रहे इन हमलों ने पाकिस्तान में रेल यात्रियों की सुरक्षा और राज्य की आतंरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

राजनीतिक भूचाल: बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी बैन, अमेरिका ने जताई कड़ी नाराज़गी

ढाका  अगले वर्ष की शुरुआत में बांग्लादेश में प्रस्तावित चुनावों से पहले अवामी लीग की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने चिंता जताई है। सांसदों ने कहा कि बांग्लादेश के लोगों को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के जरिए सरकार चुनने का अवसर मिलना चाहिए। प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के रैंकिंग सदस्य ग्रेगरी मीक्स, दक्षिण एवं मध्य एशिया उपसमिति के अध्यक्ष बिल हुइजेंगा, दक्षिण एवं मध्य एशिया उपसमिति की रैंकिंग सदस्य सिडनी कैमलेगर-डोव और सांसद जूली जॉनसन ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को मंगलवार को पत्र भेजा जिसमें फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले एक राजनीतिक दल पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर चिंता जताई गई। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में सांसद टॉम सुओज्जी भी शामिल हैं। सांसदों ने कहा कि यह अत्यंत आवश्यक है कि अंतरिम सरकार सभी राजनीतिक दलों के साथ मिलकर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए परिस्थितियां तैयार करे ताकि बांग्लादेश के लोगों की आवाज मतपेटी के माध्यम से शांतिपूर्ण रूप से व्यक्त हो सके और ऐसे सुधार किए जा सकें जो सरकारी संस्थानों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता में भरोसा बहाल करें। उन्होंने आशा जताई कि यूनुस सरकार या निर्वाचित उत्तराधिकारी राजनीतिक दल की गतिविधियां निलंबित करने के फैसले पर पुनर्विचार करेगा। बांग्लादेश ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की सभी गतिविधियों पर रातों-रात संशोधित आतंकवाद-रोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया है।