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इंडोनेशिया का रक्षा पैंतरा: भारत से ब्रह्मोस और पाकिस्तान से JF-17, मुस्लिम देशों में डिमांड में तेजी

नई दिल्ली हाल के दिनों में पाकिस्तान के JF-17 थंडर फाइटर जेट्स की मांग मुस्लिम देशों में तेजी से बढ़ रही है. यह जेट पाकिस्तान और चीन द्वारा मिलकर बनाया गया है। लीबिया के साथ 4 अरब डॉलर का सौदा, सूडान के साथ 1.5 अरब डॉलर का करार और सऊदी अरब के साथ 4 अरब डॉलर की बातचीत चल रही है. इसके अलावा बांग्लादेश, अजरबैजान और इंडोनेशिया जैसे देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि इतनी जल्दी क्यों? विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का प्रभाव कम हो रहा है और यह उसका असर है.  JF-17 जेट की क्यों हो रही है इसकी बिक्री? JF-17 थंडर एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान की पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) और चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री ग्रुप ने साथ मिलकर विकसित किया है. यह जेट सस्ता, रखरखाव में आसान और आधुनिक हथियारों से लैस है. पाकिस्तान इसे 'मुस्लिम दुनिया' के आधे हिस्से को बेचने की कोशिश कर रहा है.     लीबिया का सौदा: 4 अरब डॉलर में JF-17 जेट्स खरीदने का समझौता.     सूडान का करार: 1.5 अरब डॉलर का डील.     सऊदी अरब की बातचीत: 4 अरब डॉलर की संभावित डील.     अन्य देशों की रुचि: बांग्लादेश, अजरबैजान और इंडोनेशिया भी JF-17 खरीदने पर विचार कर रहे हैं. ये सौदे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद हैं. चीन की हथियार निर्यात रणनीति को मजबूत करते हैं. अमेरिका का प्रभाव क्यों कम हो रहा है? विशेषज्ञों के अनुसार, ये सौदे अमेरिका के घटते प्रभाव को दिखाते हैं. पहले सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश अमेरिकी सुरक्षा प्रणाली पर निर्भर थे. लेकिन अब वे विकल्प तलाश रहे हैं. चीनी जेट्स, पाकिस्तानी उत्पादन लाइन और वैकल्पिक हथियार सप्लाई चेन से अमेरिका के दबाव के पॉइंट कम हो जाते हैं. अगर अमेरिका सख्त कदम उठाता है, तो ये देश चीन और पाकिस्तान की तरफ और ज्यादा झुक सकते हैं. इसी वजह से अमेरिका संयम बरत रहा है. कूटनीति पर जोर दे रहा है. एक उदाहरण है ट्रंप प्रशासन का ईरान पर हमला न करने का फैसला, जिसमें खाड़ी देशों का दबाव काम आया. यह पूर्व और पश्चिम के बीच क्षेत्रीय प्रभाव की लड़ाई का हिस्सा है. इंडोनेशिया का मामला: JF-17 की रुचि और ब्रह्मोस सौदा भारत के लिए सबसे चिंता की बात इंडोनेशिया है. इंडोनेशिया भारत से 450 मिलियन डॉलर का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा अंतिम चरण में है, लेकिन साथ ही वह पाकिस्तान से JF-17 जेट्स खरीदने पर विचार कर रहा है. पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में इंडोनेशियाई रक्षा मंत्री सजाफरी सजामसोद्दीन और पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू के बीच बैठक हुई. पाकिस्तान ने 40 JF-17 जेट्स की पेशकश की. इंडोनेशिया पाकिस्तानी कॉम्बैट ड्रोन भी खरीदने पर सोच रहा है. भारत इंडोनेशिया को दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ महत्वपूर्ण साझेदार मानता है. ऐसे में पाकिस्तान और चीन से जुड़े प्लेटफॉर्म खरीदना भारत के लिए चिंता का विषय है. इससे द्विपक्षीय विश्वास कम हो सकता है. क्षेत्रीय सुरक्षा जटिल हो सकती है. बांग्लादेश भी पाकिस्तान से JF-17 पर बात कर रहा है, जो क्षेत्र में पाकिस्तान की बढ़ती पहुंच दिखाता है. ब्रह्मोस मिसाइल क्यों है महत्वपूर्ण? ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे भारत और रूस ने मिलकर बनाया है. इसकी रेंज 300 किमी है. स्पीड मैक 3 से ज्यादा. यह रैमजेट इंजन से चलती है. फायर-एंड-फॉरगेट सिस्टम है, मतलब लॉन्च करने के बाद खुद टारगेट को हिट करती है. पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ब्रह्मोस ने अहम भूमिका निभाई. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने Su-30MKI जेट्स से 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं. इनसे पाकिस्तान के 12 में से 11 प्रमुख एयरबेस (जैसे चकलाला, रफिकी, सरगोधा आदि) को नुकसान पहुंचा. रडार, कमांड सेंटर, गोला-बारूद डिपो और रनवे तबाह हो गए. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने माना कि हमला अप्रत्याशित था. यह मिसाइल भारत की आक्रामक रणनीति का गेम-चेंजर है. इंडोनेशिया इसे खरीदकर अपनी समुद्री रक्षा मजबूत करना चाहता है, खासकर नतुना सागर में. फिलीपींस ने 2022 में 375 मिलियन डॉलर में ब्रह्मोस खरीदा और इससे दक्षिण चीन सागर में अपनी स्थिति मजबूत की. भारत की चिंता और आगे क्या? भारत के रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इंडोनेशिया का JF-17 पर विचार ब्रह्मोस सौदे के बीच में गलत संकेत देता है. इससे साझेदारी पर असर पड़ सकता है. नवंबर 2023 में भारत-इंडोनेशिया रक्षा मंत्रियों की बैठक में ब्रह्मोस पर प्रगति हुई. सौदा लगभग पूरा है, सिर्फ रूस की मंजूरी बाकी है (रूस की ब्रह्मोस में 49.5% हिस्सेदारी है). इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो 2025 के गणतंत्र दिवस पर भारत आए थे, तब ब्रह्मोस पर चर्चा हुई. इंडोनेशिया को ब्रह्मोस से अपनी सैन्य आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी. लेकिन JF-17 की खरीद भारत को सतर्क कर रही है. क्या इंडोनेशिया ब्रह्मोस सौदे पर पीछे हटेगा? या दोनों सौदे साथ चलेंगे? यह समय बताएगा. कुल मिलाकर, यह वैश्विक हथियार बाजार में बदलते संतुलन को दिखाता है, जहां चीन और पाकिस्तान नए विकल्प दे रहे हैं. अमेरिका का एकाधिकार टूट रहा है.   

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को PM मोदी ने दी हरी झंडी, राजधानी के मुकाबले सुपर फास्ट

नईदिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखा दी है. पश्चिम बंगाल के हावड़ा से असम के गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच चलने वाली यह ट्रेन 958 किलोमीटर की दूरी को महज 14 घंटे में तय कर लेगी, जबकि अभी यह दूरी तय करने में करीब 17 घंट लग जाते हैं. इस ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे, जिनमें 11 थर्ड एसी, 4 सेकंड एसी और 1 फर्स्ट एसी कोच शामिल होगा. इस ट्रेन का किराया राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों से थोड़ा ज्यादा है. गुवाहाटी से हावड़ा तक थर्ड एसी का किराया करीब 2,300 के आसपास है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को भारतीय रेलवे के इतिहास में एक बड़ा और खास कदम माना जा रहा है. अब तक वंदे भारत ट्रेनें सिर्फ चेयरकार में चल रही थीं, लेकिन स्लीपर वर्जन के शुरू होने से लंबी दूरी की रात की यात्रा पूरी तरह बदलने वाली है. खासकर उन यात्रियों के लिए यह ट्रेन बड़ी राहत होगी, जो रात में आरामदायक और तेज सफर चाहते हैं. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में क्या-क्या सुविधा? वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को पूरी तरह आधुनिक तकनीक और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसके इंटीरियर को भारतीय संस्कृति से प्रेरित डिजाइन दिया गया है, जिससे ट्रेन के अंदर का माहौल न सिर्फ आरामदायक बल्कि देखने में भी आकर्षक होगा. बर्थ, लाइटिंग और कोच की बनावट इस तरह की गई है कि लंबा सफर भी थकाने वाला न लगे. स्वच्छता और हेल्थ को लेकर वंदे भारत स्लीपर में खास इंतजाम किए गए हैं. इसमें डिसइंफेक्टेंट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. रेल मंत्रालय के मुताबिक, कोच में यूवीसी तकनीक लगाई गई है, जो हवा में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करती है. यह सिस्टम कोच की हवा को फिल्टर करके साफ करता है और फिर ताजी हवा अंदर छोड़ता है. यानी अगर आसपास किसी यात्री को सर्दी-जुकाम हो, तो भी बाकी यात्रियों को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होगी. रेल हादसों से सुरक्षा देगा कवच सुरक्षा के मामले में भी यह ट्रेन काफी एडवांस है. इसमें ‘कवच’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है, जो ट्रेन की स्पीड और सिग्नल पर नजर रखता है और हादसों की आशंका को काफी हद तक कम करता है. इसके अलावा, इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट भी दी गई है, जिससे किसी भी परेशानी की स्थिति में यात्री सीधे ट्रेन स्टाफ से बात कर सकेंगे. ड्राइवर के केबिन में भी आधुनिक कंट्रोल और सेफ्टी सिस्टम लगाए गए हैं. ट्रेन का बाहरी लुक भी काफी आधुनिक और एयरोडायनामिक होगा. इसका फायदा यह होगा कि ट्रेन ज्यादा स्मूद तरीके से चलेगी और ऊर्जा की खपत भी कम होगी. इसके दरवाजे ऑटोमैटिक होंगे, जो स्टेशन पर रुकने और चलने के समय अपने आप खुलेंगे और बंद होंगे. राजधानी से भी तेज रफ्तार अगर रफ्तार की बात करें तो वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की अधिकतम गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि सामान्य परिचालन में यह करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी. इस ट्रेन में यात्रियों को कई प्रीमियम सुविधाएं भी मिलेंगी. सफर के दौरान हाई क्वालिटी कंबल, कवर और एडवांस्ड बेडरोल दिए जाएंगे. साथ ही यात्रियों के लिए कैटरिंग सर्विस भी उपलब्ध होगी, जिससे खाने-पीने की सुविधा रहेगी. आराम का खास ध्यान रखते हुए ट्रेन में बेहतर कुशनिंग वाली एर्गोनोमिक बर्थ लगाई गई हैं और शोर कम करने की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, ताकि रात की यात्रा शांत और सुकून भरी हो. सभी ऑनबोर्ड स्टाफ तय यूनिफॉर्म में मौजूद रहेंगे, जिससे यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सके. वंदे भारत स्लीपर, चेयर कार वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेमी हाई-स्पीड है और इसमें कुल 16 कोच हैं: 11 थर्ड एसी, 4 सेकंड एसी और 1 फर्स्ट एसी। कुल 823 यात्री इस ट्रेन में सफर कर सकेंगे। अधिकतम गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा है और 958 किलोमीटर का सफर सिर्फ 14 घंटे में पूरा होगा। इसमें बस कन्फर्म टिकट मिलेंगे, RAC या वेटिंग लिस्ट नहीं। क्या बिहार में रुकेगी ट्रेन ? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह ट्रेन बिहार में रुकेगी या बिहार के किसी स्टेशन से होकर गुजरेगी? बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले यह चर्चा जरूर थी कि पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पटना–दिल्ली के बीच चलेगी, लेकिन फिलहाल उसका रूट बदल दिया गया है। रेलवे की ओर से बिहार में ठहराव या गुजरने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। भविष्य में रूट विस्तार या ठहराव जोड़े जाने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है, लेकिन अभी बिहार के यात्रियों को इस ट्रेन का सीधा लाभ नहीं मिलेगा। आधुनिक और लग्जरी सुविधाएं     आरामदायक स्लीपर बेड और बेहतर कुशनिंग     ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए नई डिजाइन वाली सीढ़ी     ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे     सुरक्षा के लिए KAVACH एंटी-कोलिजन सिस्टम     हर कोच में CCTV, इमरजेंसी टॉक-बैक और फायर डिटेक्शन     बायो-वैक्यूम टॉयलेट और टच-फ्री फिटिंग्स     क्षेत्रीय खाने की कैटरिंग (बंगाली और असमिया व्यंजन)     कोच की कीटाणुमुक्त सफाई और डिसइन्फेक्टेंट तकनीक वंदे भारत स्लीपर का किराया     AC थ्री-टियर: ₹2,000–₹2,300     AC टू-टियर: ₹2,500–₹3,000     फर्स्ट AC: ₹3,000–₹3,600 राजधानी एक्सप्रेस से थोड़ी महंगी, लेकिन तेज और आरामदायक सफर। रूट और प्रमुख स्टेशन्स हावड़ा से कामाख्या के बीच ट्रेन रुकेगी इन स्टेशनों पर: बंदेल, नवद्वीप धाम, कटवा, अजीमगंज, न्यू फरक्का, मालदा टाउन, अलुआबारी रोड, न्यू जलपाईगुड़ी, जलपाईगुड़ी रोड, न्यू कूच बिहार, न्यू अलीपुरद्वार, न्यू बोंगाईगांव, रंगिया। टाइम शेड्यूल     हावड़ा से रवाना: शाम 6:20 बजे     कामाख्या पहुंचने का समय: सुबह 8:20 बजे     वापसी: कामाख्या से शाम 6:15 बजे, हावड़ा सुबह 8:15 बजे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि साल 2026 में और भी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू होंगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा और भी आसान और आरामदायक होगी।  

BMC में BJP–शिंदे गठबंधन की जीत, बहुमत से 4 सीटें ज्यादा हासिल

 मुंबई मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव में सभी 227 वार्डों के नतीजे घोषित हो चुके हैं और मुंबई की सियासत की तस्वीर बदल गई है. करीब ढाई दशक से ठाकरे परिवार का गढ़ मानी जाने वाली BMC में इस बार भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. बीजेपी और शिंदे सेना ने 118 सीटों पर जीत हासिल की. जबकि बहुमत के लिए 114 सीटों पर जीत जरूरी थी. 2017 में 82 सीटों पर सिमटने वाली BJP ने इस बार अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है. आंकड़ों के मुताबिक, BJP ने 89 वार्डों में जीत दर्ज की. BJP के विजयी उम्मीदवारों को कुल 11,79,273 वोट मिले. यह जीते उम्मीदवारों के मतों का 45.22 प्रतिशत और कुल मतदान का 21.58 प्रतिशत है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना दूसरे नंबर पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को 65 सीटें मिलीं. कुल वोट 7,17,736 मिले. जीते कैंडिडेट का मत प्रतिशत 27.52 रहा. जबकि कुल मतदान का 13.13 प्रतिशत रहा. हालांकि उद्धव सेना दूसरे नंबर पर रही, लेकिन BMC की सत्ता से दूर हो गई. शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने 29 वार्डों में जीत दर्ज की. कुल वोट 2,73,326 मिले. विजयी उम्मीदवारों का मत प्रतिशत 10.48 रहा. कुल मतदान के 5 प्रतिशत वोट मिले. BJP-शिंदे गठबंधन ने मिलकर 118 सीटें हासिल कीं, जो बहुमत के आंकड़े से 4 सीटें ज्यादा हैं. कांग्रेस 24 सीटों पर सिमटी कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं. कुल 2,42,646 वोट मिले. विजयी मत प्रतिशत 9.31 रहा. कांग्रेस ने कुछ सीटों पर वंचित बहुजन अघाड़ी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन शहरी इलाकों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा. AIMIM, MNS और NCP का हाल – AIMIM: 8 सीटें, 68,072 वोट (2.61 प्रतिशत) – महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS): 6 सीटें, 74,946 वोट (2.87 प्रतिशत) – NCP (अजित पवार गुट): 3 सीटें, 24,691 वोट (0.95 प्रतिशत) – NCP (शरद पवार गुट): 1 सीट, 11,760 वोट – समाजवादी पार्टी: 2 सीटें, 15,162 वोट बीएमसी चुनाव​ कुल मतदान और वोटिंग प्रतिशत क्या रहा? – कुल डाले गए वोट: 54,64,412 – अमान्य वोट: 11,677 – कुल मतदान प्रतिशत: 47.72 गठबंधन की तस्वीर क्या रही? BJP और शिवसेना (शिंदे) का गठबंधन मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोबिवली, वसई-विरार, भिवंडी और पनवेल में रहा. अजित पवार और शरद पवार की NCP का गठबंधन पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में था. उद्धव-राज ठाकरे और कांग्रेस का पुणे में गठबंधन रहा. नवी मुंबई, मीरा-भाईंदर और उल्हासनगर में BJP और शिंदे गुट ने अलग-अलग चुनाव लड़ा. कांग्रेस और प्रकाश आंबेडकर की पार्टी का गठबंधन मुंबई और आसपास के इलाकों में रहा. मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव इस नतीजे के साथ BMC की सत्ता में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. लंबे समय तक ठाकरे परिवार का अभेद्य किला मानी जाने वाली मुंबई नगर निगम में अब BJP-शिंदे गुट ने दबदबा बना लिया है. 

आडवाणी और जोशी को नहीं मिलेगा वोट करने का अधिकार, BJP अध्यक्ष चुनाव में पहली बार नहीं डाल पाएंगे वोट

 नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इतिहास में 20 जनवरी 2026 का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। 45 साल के नितिन नवीन का पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है। हालांकि, इस चुनाव में एक चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के संस्थापक सदस्य लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी पहली बार मतदान नहीं कर पाएंगे। दिसंबर 2025 से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन नवीन अब पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। बिहार के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री नितिन नवीन भाजपा के दिग्गज नेता दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। आरएसएस (RSS) की पृष्ठभूमि वाले नवीन को संगठन में गहरी पैठ और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में पार्टी की चुनावी जीत में बड़ी भूमिका के लिए जाना जाता है। 19 जनवरी को उनका नामांकन होगा और 20 जनवरी को उनकी जीत की औपचारिक घोषणा की जाएगी। उनके नामांकन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक बनेंगे। आडवाणी और जोशी मतदाता सूची से बाहर क्यों? 1980 में भाजपा की स्थापना के बाद यह पहला मौका है जब इन दोनों दिग्गजों का नाम अध्यक्ष चुनाव की मतदाता सूची में नहीं है। इसके पीछे कोई राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि तकनीकी कारण हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनने के लिए संबंधित राज्य में संगठनात्मक चुनाव पूरा होना अनिवार्य है। आडवाणी और जोशी फिलहाल दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा में चुनाव अभी लंबित हैं। जब तक दिल्ली में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव नहीं हो जाते वहां से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चयन नहीं हो सकता। इसी कारण दोनों नेताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके। आपको बता दें कि इससे पहले आडवाणी गुजरात (गांधीनगर) और जोशी उत्तर प्रदेश (कानपुर) से परिषद सदस्य हुआ करते थे। सक्रिय राजनीति से हटने के बाद वे दिल्ली से सदस्य बने थे। भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण ने चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। 19 जनवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक नामांकन होगा। 19 जनवरी को ही शाम तक नामांकन पत्रों की जांच और वापसी का समय है। 20 जनवरी को यदि आवश्यक हुआ तो मतदान होगा, अन्यथा निर्विरोध चुनाव की घोषणा। जेपी नड्डा का स्थान लेने वाले नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को तैयार करना और आगामी विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल आदि) में पार्टी के प्रदर्शन को सुधारना होगी। युवा नेतृत्व के माध्यम से भाजपा अब अपनी अगली पीढ़ी की टीम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

अमेरिकी सीनेटरों ने डोनाल्ड ट्रंप को लिखी चिट्ठी, दाल पर 30% टैरिफ हटाने की अपील

 नई दिल्‍ली कुछ दिन पहले ही अपडेट आया था कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के फर्स्‍ट स्‍टेज की बातचीत लगभग पूरी ही हो चुकी है, जल्‍द ही इसका ऐलान किया जा सकता है. इस बीच अमेरिकी सीनेटर्स ने राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को चिट्ठी लिखी है और भारत को अमेरिकी मटर दाल पर से टैक्‍स हटाने की मांग की है.  ट्रंप को लिखी चिट्ठी में अमेरिकी सीनेटरों ने भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट में 'दलहन फसलों के लिए अनुकूल प्रावधान' की मांग की है.  राष्ट्रपति ट्रंप से यह सुनिश्चित करने के लिए कह रहे हैं कि भारत पीली मटर (दलहन) पर 30% टैक्स हटा दे, जिसे अमेरिकी किसान बेचना चाहते हैं.  भारत दालों का सबसे बड़ा यूजर  नॉर्थ डकोटा और मोंटाना मटर समेत दलहन फसलों के टॉप दो उत्पादक हैं और भारत इन फसलों का दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो दुनिया की कुल खपत का लगभग 27% हिस्सा यूज करता है. जैसे-जैसे यूनाइटेड स्टेट्स व्यापार में असमानताओं को ठीक करने की कोशिश कर रहा है, अमेरिकी किसान इस कमी को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार हैं.  उन्‍होंने ट्रंप से कहा कि जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ रही है, हम आपसे रिक्वेस्ट करते हैं कि यूनाइटेड स्टेट्स और रिपब्लिक ऑफ इंडिया के बीच होने वाले किसी भी एग्रीमेंट में दालों की फसलों के लिए जोर दें. भारत में सबसे ज्‍यादा खाई जाने वाली दालें मसूर, चना, सूखी बीन्स और मटर हैं, फिर भी उन्होंने अमेरिकी दालों पर काफी टैरिफ लगाया है. अमेरिका को हो रहा नुकसान ट्रंप को लिखे लेटर में कहा गया है कि भारत ने 30 अक्टूबर, 2025 को पीली मटर पर 30% टैरिफ लगा दिया. यह ड्यूटी 1 नवंबर, 2025 से लागू है, जिस कारण अमेरिकी दालों के प्रोड्यूसर्स को भारत में अपने हाई-क्वालिटी प्रोडक्ट को एक्सपोर्ट करते समय कॉम्पिटिशन में काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. पहले भी कर चुके हैं मांग  सीनेटरों ने ट्रंप से कहा कि आपके पहले कार्यकाल में हमने आपको इस मुद्दे पर लिखा था, और आपने 2020 में भारत के साथ ट्रेड बातचीत के दौरान हमारा लेटर प्रधानमंत्री मोदी को खुद दिया था, जिससे हमारे प्रोड्यूसर्स को बातचीत की टेबल पर लाने में मदद मिली.  अमेरिकी खेती के सामान के लिए मार्केट के मौके बढ़ाने का आपका काम बहुत जरूरी रहा है. जैसे-जैसे यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड में असमानताओं को ठीक करने की कोशिश कर रहा है, अमेरिकी किसान इस कमी को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार हैं. अगर ट्रेड के मौके मिलते हैं, तो उनमें दुनिया को खाना खिलाने और एनर्जी देने की जबरदस्त क्षमता है. हमारे देशों के बीच इकोनॉमिक सहयोग को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ दालों पर टैरिफ के मुद्दे पर बात करना अमेरिकी प्रोड्यूसर्स और भारतीय कस्टमर्स दोनों के लिए फायदेमंद होगा. 

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में मिलेगा लग्जरी अनुभव, ऑटोमैटिक दरवाजे और नई सुविधाओं का आनंद

नई दिल्ली 17 जनवरी 2026 का दिन भारतीय रेलवे के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जोड़ने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे.वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पूरी तरह एयर-कंडीशंड है और लंबी दूरी की रात की यात्रा को बहुत आरामदायक और सुरक्षित बनाएगी. यह ट्रेन हावड़ा (कोलकाता) से कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच चलेगी.   वंदे भारत स्लीपर एक सेमी हाई-स्पीड ट्रेन है, जिसमें कुल 16 कोच हैं. इसमें 11 थर्ड एसी, 4 सेकंड एसी और 1 फर्स्ट एसी कोच शामिल हैं. थर्ड एसी में 611, सेकंड एसी में 188 और फर्स्ट एसी में 24 बर्थ हैं. ट्रेन में कुल 823 यात्री सफर कर सकेंगे. वंदे भारत स्लीपर की अधिकतम स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा है. यह पश्चिम बंगाल के हावड़ा से गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच 958 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 14 घंटे में तय करेगी. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सिर्फ कन्फर्म टिकट ही मिलेंगे. कोई RAC या वेटिंग लिस्ट नहीं होगी, जिससे यात्रा बिना किसी तनाव के होगी. आइए जानते हैं वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की आधुनिक सुविधाएं जो यात्रियों को एयरलाइन जैसा अनुभव देंगी.     – आरामदायक और बेहतर कुशनिंग वाले बर्थ (स्लीपर बेड)     – आसानी से ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए नई डिजाइन वाली सीढ़ी     – ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे जो स्टेशन पर ही खुलते-बंद होते हैं     – KAVACH एंटी-कोलिजन सिस्टम (ट्रेन की सुरक्षा के लिए)     – हर कोच में CCTV कैमरे, इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम और फायर डिटेक्शन     – आधुनिक बायो-वैक्यूम टॉयलेट और टच-फ्री फिटिंग्स     – क्षेत्रीय खाने की कैटरिंग (जैसे बंगाली और असमिया व्यंजन)     – डिसइन्फेक्टेंट तकनीक से कोच हमेशा साफ और कीटाणुमुक्त रहेंगे वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया  (हावड़ा से गुवाहाटी)     AC थ्री-टियर: लगभग ₹2,000 से ₹2,300 (5% GST के साथ)     AC टू-टियर: ₹2,500 से ₹3,000 के आसपास     फर्स्ट AC: ₹3,000 से ₹3,600 तक किराया  राजधानी एक्सप्रेस से थोड़ा महंगा है लेकिन सफर ज्यादा आरामदायक और तेज होगा.  180 की स्पीड से दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, रूट-किराया सबकुछ तय, जानें खासियत ट्रेन हावड़ा से कामाख्या के बीच इन स्टेशनों पर रुकेगी.     बंदेल     नवद्वीप धाम     कटवा     अजीमगंज     न्यू फरक्का     मालदा टाउन     अलुआबारी रोड     न्यू जलपाईगुड़ी (एनजेपी)     जलपाईगुड़ी रोड     न्यू कूच बिहार     न्यू अलीपुरद्वार     न्यू बोंगाईगांव     रंगिया ट्रेन का टाइम शेड्यूल शुरुआती अनुमान है कि हावड़ा से शाम 6:20 बजे निकलेगी और अगले दिन सुबह 8:20 बजे कामाख्या पहुंचेगी. वहीं, वापसी में कामाख्या से शाम 6:15 बजे चलेगी और सुबह 8:15 बजे हावड़ा पहुंचेगी. बता दें कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि साल 2026 में कई और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू होंगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अब और आसान हो जाएगी.

‘सरकार ही कर सकती है हमारा भला’, डिलीवरी बॉयज की 10 मिनट की बाध्यता खत्म होने पर खुशी, सरकार से एक और अनुरोध

आगरा  उत्तर प्रदेश के आगरा में डिलीवरी बॉयज में खुशी की लहर है. सरकार ने उन्हें 10 मिनट की बाध्यता से मुक्त कर दिया है. अब डिलीवरी का सामान आराम से पहुंचाया जा सकता है. पहले जल्दी के चक्कर में कई बार एक्सीडेंट हो जाया करता था. डिलीवरी बॉयज ने सरकार से अपील की है कि उनका पेआउट भी थोड़ा बढ़ाया जाए. उन्होंने कहा है कि कंपनी 3 से 4 रुपए एक ऑर्डर पर दे रही है. डिलीवरी बॉयज ने कहा कि महंगाई के दौर पर उनका आर्थिक जीवन मुश्किल में पड़ गया है. जिस तरह सरकार ने उनके 10 मिनट की बाध्यता खत्म की है, इसी तरह थोड़ा उन्हें आर्थिक लाभ भी दिलाए. उन्होंने कहा कि सरकार से अनुरोध है कि वह कम्पनी से आग्रह कर उन्हें पेट्रोल खर्चा उनके हिसाब से दें, क्योंकि पेट्रोल काफी महंगा है. पेट्रोल खर्चा थोड़ा बढ़ाया जाए आगरा में डिलीवरी बॉयज ने कहा है कि सरकार उनके आर्थिक लाभ के बारे में विचार करे. आगरा के डिलीवरी बॉय मनोज ने कहा कि कंपनी उन्हें 3 से 4 रुपए डिलीवरी का देती है. इसमें सामान को डिलीवर कर वापस भी आना होता है. ऐसे में पेट्रोल इतना महंगा है कि उनको नुकसान हो जाता है. उन्होंने कहा कि कम्पनी को पेट्रोल का खर्चा थोड़ा और बढ़ाना चाहिए. डिलीवरी बॉय मनोज ने कहा कि दिन में 12 घंटे की जॉब करते हैं और फिर भी 300 से 400 रुपए ही कमा पाते हैं. सरकार से अनुरोध है कि थोड़ा उनकी आर्थिक मदद में सहयोग करें. बाइक टूटने का खर्चा भी कंपनी नहीं देती आगरा के डिलीवरी बॉय मनोज ने कहा कि कई बार डिलीवरी करते समय बाइक फिसल जाती है, जिसमें राइडर को भी चोट आती है और बाइक भी डैमेज हो जाती है. इस स्थिति में भी कम्पनी उनका साथ नहीं देती है. ऐसी परिस्थिति में डिलीवरी बॉय को ही अपने पैसों से इलाज और बाइक ठीक करानी होती है. उन्होंने कहा कि कंपनी बिल्कुल सहयोग नहीं करती है. मनोज बताते हैं कि पहले से परिवार पर आर्थिक संकट होता है, ऐसे में अगर एक्सीडेंट हो जाए तो सारे पैसे इलाज में ही खर्च हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि जैसे सरकार ने 10 मिनट का रूल खत्म किया है, वैसे ही थोड़ा उनके आर्थिक सहयोग के बारे में भी सोचे.

हरिद्वार में गैर हिंदू श्रद्धालुओं की एंट्री पर पाबंदी, हरकी पौड़ी में पोस्टर लगाए गए

हरिद्वार तीर्थ नगरी हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदुओं की एंट्री बैन किए जाने की मांग के बीच हरकी पौड़ी पर चेतावनी के बोर्ड लगाए गए हैं, जिसमें हर की पैड़ी पर ‘अहिंदू प्रवेश निषेध क्षेत्र’ यानी गैर हिंदू की एंट्री पर रोक की चेतावनी लिखी गई है. शुक्रवार सुबह हर की पौड़ी की व्यवस्था संभालने वाली संस्था गंगा सभा की ओर से ब्रह्म कुंड और उसके आसपास ये बोर्ड लगाए गए हैं. बोर्ड गंगा के नाम से नहीं, बल्कि म्युनिसिपालिटी बायोलॉज के हवाले से लगाए गए हैं. दरअसल बीते मंगलवार को दो युवक अरबी शेख की पोशाक में हर की पौड़ी पर घूमते हुए नजर आए थे, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं. गंगा सभा से जुड़े तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि पहले से मौजूद नियमों के तहत चेतावनी के बोर्ड लगाए गए हैं, ताकि लोग हर की पैड़ी क्षेत्र में प्रवेश के नियमों को लेकर जागरूक हो सकें. पोस्टर लगाने का क्या है उद्देश्य हरिद्वार के तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने कहा कि बोर्ड लगाने का उद्देश्य यही है कि सभी को यहां के नियमों और मर्यादाओं की जानकारी रहे. पहले भी ऐसे पोस्टर लगे थे, लेकिन कुछ क्षतिग्रस्त हो गए थे. हमारा उद्देश्य यही है कि सनातन धर्म के इस पवित्र स्थल पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह पता होना चाहिए और किस धर्म ने जुड़े हुए लोगों को यहां प्रवेश करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि यह बोर्ड हर की पौड़ी या उसके आसपास आने वाले हर क्षेत्र में लग चुके हैं. अब इसका सज्ञान सभी लोग लेंगे और प्रशासन इन नियमों को कड़ाई से पालन कराने में हमारा सहयोग करेगा. संस्था गंगा सभा की ओर से लगाए गए इस पोस्टर के बाद इसकी चर्चा तेज हो गई है और कई संगठन इसका विरोध कर रहे हैं. चार तीर्थों में प्रमुख स्थान बता दें कि हरिद्वार हिंदू धर्म में चार तीर्थों में प्रमुख स्थान रखता है, जहां दूर-दूर से भक्त गंगा स्नान करने और दान कर पुण्य प्राप्त करने आते हैं. वहीं श्री गंगा सभा संस्था हर की पौड़ी क्षेत्र की व्यवस्थाएं देखने का कार्य करती है. इस संस्था की नींव महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने रखी गई थी. श्री गंगा सभा के वर्तमान अध्यक्ष नितिन गौतम ने हर की पौड़ी क्षेत्र में गैर हिन्दुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है और उनकी इस मांग का साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोग भी समर्थन कर रहे हैं.

न पुतिन न ट्रंप, इस बार कौन होगा रिपब्लिक डे का चीफ गेस्ट? PM मोदी ने किसे दिया न्योता और क्यों

नई दिल्ली एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर यही दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. इस बार न रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आ रहे हैं, न अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. इसके बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा न्योता दिया है, जो भारत के कूटनीतिक इतिहास में पहली बार हो रहा है. पहली बार किसी एक देश के नेता को नहीं बल्कि यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेताओं को एक साथ रिपब्लिक डे का चीफ गेस्ट बनाया गया है. यह फैसला सिर्फ परंपरा तोड़ने वाला नहीं बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की रणनीतिक सोच को भी दिखाता है. रिपोर्ट के अनुसार यह न्योता ऐसे समय दिया गया है जब दुनिया की राजनीति तेजी से बदल रही है. अमेरिका और ट्रांसअटलांटिक रिश्तों में खटास बढ़ी है. अमेरिका और यूरोप के बीच भरोसे की दरार खुलकर सामने आ रही है. इसी बीच भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के और करीब आ रहे हैं. भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत निर्णायक मोड़ पर है. रक्षा, सुरक्षा, क्लीन एनर्जी और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर साझेदारी गहरी हो रही है. ऐसे में EU के दोनों शीर्ष नेताओं को एक साथ न्योता देना भारत का बड़ा कूटनीतिक दांव माना जा रहा है. कौन हैं एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन? एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं. ये दोनों पद EU की सबसे ताकतवर संस्थाओं का नेतृत्व करते हैं. 27 देशों के इस समूह में नीतिगत फैसलों से लेकर वैश्विक रणनीति तक, इन दोनों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. क्यों खास है यह न्योता? पहली बार हुआ ऐसा भारत के इतिहास में अब तक रिपब्लिक डे पर किसी एक देश के नेता को ही मुख्य अतिथि बनाया गया है. इस बार तस्वीर बदली है. EU को एक इकाई के रूप में मान्यता देना, अपने आप में बड़ा संकेत है. यह दिखाता है कि भारत अब द्विपक्षीय रिश्तों से आगे बढ़कर ब्लॉक-लेवल डिप्लोमेसी को भी उतनी ही अहमियत दे रहा है. ट्रंप फैक्टर और बदलते वैश्विक समीकरण डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए तबसे अमेरिका-यूरोप रिश्ते फिर तनाव में हैं. NATO, व्यापार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद बढ़े हैं. EU ऐसे समय में भारत को एक भरोसेमंद, स्थिर और उभरते वैश्विक साझेदार के तौर पर देख रहा है. भारत भी पश्चिमी देशों के साथ संतुलन बनाते हुए अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है. इस दौरे का पूरा शेड्यूल क्या है?     25 जनवरी को दोनों नेता भारत पहुंचेंगे.     राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे.     26 जनवरी को रिपब्लिक डे परेड में चीफ गेस्ट होंगे.     27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे.     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी.     भारत-EU बिजनेस फोरम भी आयोजित होगा. भारत-EU FTA क्यों बना सबसे बड़ा एजेंडा? भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत 2007 से चल रही है. दिसंबर 2025 में इसे नई रफ्तार मिली. अब इसे अंतिम चरण में माना जा रहा है. EU भारत को चीन पर निर्भरता कम करने के विकल्प के तौर पर देखता है, जबकि भारत को यूरोपीय बाजार, टेक्नोलॉजी और निवेश की ज़रूरत है. इस दौरे से क्या-क्या निकल सकता है?     भारत-EU FTA पर बड़ा ब्रेकथ्रू.     डिफेंस और सिक्योरिटी पार्टनरशिप का औपचारिक ऐलान.     ग्रीन एनर्जी, हाइड्रोजन और क्लीन टेक्नोलॉजी में सहयोग.     सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन में भारत की भूमिका मजबूत.     वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था की संयुक्त पैरवी. क्यों कहा जा रहा है इसे बड़ा कूटनीतिक दांव? EU ने हाल ही में भारत के लिए नई स्ट्रैटेजिक एजेंडा तैयार की है. वहीं भारत भी EU को सिर्फ देशों के समूह के तौर पर नहीं, बल्कि एक रणनीतिक शक्ति के रूप में देखने लगा है. इस दौर में यह न्योता बताता है कि भारत वैश्विक राजनीति में सिर्फ संतुलन नहीं, बल्कि दिशा तय करने की भूमिका में आ चुका है.

टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद, 1 अप्रैल से FASTag और UPI से ही होगी एंट्री

 नई दिल्ली FASTag Toll Payment: देश के हाइवे पर यात्रा का तरीका बदलने जा रहा है. हाईवे जर्नी को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है. 1 अप्रैल से देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. अब टोल टैक्स सिर्फ FASTag या UPI के जरिए ही चुकाया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि समय, फ्यूल और पैसे की भी बचत होगी. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा कि, भारत तेजी से डिजिटल इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है. पहले UPI से टोल भुगतान की सुविधा शुरू की गई थी, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया. अब सरकार ने टोल प्लाजा पर कैश भुगतान (Cash Payment) पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया है. 1 अप्रैल के बाद टोल पर सिर्फ FASTag या UPI ही मान्य होंगे. टोल प्लाजा से खत्म होगा कैश लेन इस फैसले के बाद देशभर के टोल प्लाजा पर कैश लेन पूरी तरह बंद हो जाएंगे. इससे मैन्युअल वसूली के कारण लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलेगी. सरकार का कहना है कि कैशलेस टोलिंग से सिस्टम ज्यादा फास्ट, ट्रांसपैरेंट और भरोसेमंद बनेगा. अब भी कई लोग FASTag होने के बावजूद कैश लेन का इस्तेमाल करते थे, जिससे खासकर त्योहारों और पीक आवर्स में जाम की स्थिति बनती थी. फ्यूल और टाइम की बचत टोल प्लाजा पर बार-बार रुकने से गाड़ियों का फ्यूल ज्यादा खर्च होता है और ड्राइवरों को भी थकान होती है. वी. उमाशंकर के मुताबिक हर बार रुकने और फिर गाड़ी चलाने में समय और डीजल दोनों की बर्बादी होती है. लंबी दूरी की यात्रा में यह नुकसान और बढ़ जाता है. कैशलेस सिस्टम से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी. बैरियर-फ्री टोलिंग की तैयारी कैशलेस टोल का यह फैसला भविष्य की एक बड़ी योजना की तैयारी भी माना जा रहा है. सरकार जल्द ही मल्टी लेन फ्री फ्लो यानी MLFF टोलिंग सिस्टम लागू करने जा रही है. इस सिस्टम में टोल प्लाजा पर कोई बैरियर नहीं होगा और वाहन बिना रुके हाईवे पर फर्राटा भरते हुए निकल सकेंगे. टोल शुल्क अपने आप FASTag और व्हीकल आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के जरिए कट जाएगा. 25 टोल प्लाजाओं पर पायलट प्रोजेक्ट सरकार ने MLFF सिस्टम के पायलट प्रोजेक्ट के लिए देशभर में 25 टोल प्लाजाओं को चिन्हित किया है. यहां इस नई तकनीक को लागू करने से पहले नियमों  और यात्रियों के अनुभवों की जांच की जाएगी. इसके बाद इस सिस्टम को पूरे देश में लागू करने की योजना है. इससे जाम खत्म होगा, ट्रैवेल टाइम घटेगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी. सरकार ने यात्रियों से अपील की है कि वे 1 अप्रैल से पहले अपना FASTag एक्टिव रखें और उसमें पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करें, या UPI भुगतान के लिए तैयार रहें. कैशलेस टोलिंग और बैरियर-फ्री हाईवे का यह कदम भारत की सड़क यात्रा को पूरी तरह बदलने वाला है. आने वाले समय में टोल प्लाजाओं पर किसी तरह का कोई जाम नहीं लगेगा और सफर ज्यादा बेहतर और आसान होगा.